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13 hrs ago
user_Krishnan
Krishnan
बख्शी का तालाब, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
13 hrs ago

More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
  • वाराणसी में दर्शन करने आईं लक्ष्मण दुमड़ी की रहने वाली एक माताजी अपने पति और बेटे से बिछड़ गई हैं और काफी घंटे बीतने के बाद भी उनसे नहीं मिल पाई हैं। वह अपने पति, बेटे और एक छोटे बच्चे के साथ यहाँ दर्शन करने आई थीं, लेकिन अब अपने परिवार से अलग होकर बहुत परेशान हैं। इस समय वह वाराणसी के बेनिया बाग तिराहा चौकी पान दरीबा के पास, जूस की दुकान के बगल में और शकील चाय वाले की दुकान के पीछे बैठी हुई हैं। लोगों से इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा शेयर करने की अपील की जा रही है ताकि माताजी अपने परिवार से जल्द से जल्द मिल सकें।
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    वाराणसी में दर्शन करने आईं लक्ष्मण दुमड़ी की रहने वाली एक माताजी अपने पति और बेटे से बिछड़ गई हैं और काफी घंटे बीतने के बाद भी उनसे नहीं मिल पाई हैं। वह अपने पति, बेटे और एक छोटे बच्चे के साथ यहाँ दर्शन करने आई थीं, लेकिन अब अपने परिवार से अलग होकर बहुत परेशान हैं। इस समय वह वाराणसी के बेनिया बाग तिराहा चौकी पान दरीबा के पास, जूस की दुकान के बगल में और शकील चाय वाले की दुकान के पीछे बैठी हुई हैं। लोगों से इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा शेयर करने की अपील की जा रही है ताकि माताजी अपने परिवार से जल्द से जल्द मिल सकें।
    user_NATIONAL INDIA TV
    NATIONAL INDIA TV
    Local News Reporter बख्शी का तालाब, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • लखनऊ के चिनहट थाना क्षेत्र के कमता से 22 मई 2026 को रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हुए 23 वर्षीय चालक गुलफान अहमद का 58 दिन बाद भी कोई सुराग नहीं मिल सका है। इस बीच, 18 जुलाई को पुलिस ने उनकी अर्टिगा कार (UP 53 AF 4894) बरामद कर ली है, लेकिन चालक का पता न चलने से मामला और भी गंभीर हो गया है। सुल्तानपुर जनपद के शिवगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम ज्ञानीपुर निवासी गुलफान अहमद 22 मई को कमता बस स्टैंड से कार लेकर गोरखपुर के लिए रवाना हुए थे, जिसके बाद उनका मोबाइल बंद हो गया। इस संबंध में परिजनों ने 2 जून को चिनहट थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी, जबकि वाहन स्वामी ने भी 25 मई को ही गोरखपुर में कार व चालक के गायब होने की शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस द्वारा लापता अर्टिगा कार बरामद किए जाने के बाद परिजनों ने दावा किया है कि गाड़ी के अंदर कई अलग-अलग नंबर प्लेटें भी मिली हैं, हालांकि पुलिस ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसी बीच, गुलफान के भाई महमूद को एक युवती का फोन आया था, जिसने अपने पति आदिल के साथ साहिल, तालिब और समीर के नाम लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। पुलिस इन आरोपों के साथ-साथ अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है। परिजनों के मुताबिक, पुलिस ने समीर और तालिब को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी, जिसमें से तीन दिन बाद तालिब को छोड़ दिया गया है और समीर से पूछताछ अभी भी जारी है। गुलफान का कोई सुराग न मिलने से उनकी मां पिछले 58 दिनों से आस लगाए बैठी हैं और पूरा परिवार बेहद चिंतित और बेचैन है। कमता पुलिस चौकी के प्रभारी अभय कुमार सिंह के नेतृत्व में पुलिस साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच कर रही है। पीड़ित परिवार ने उत्तर प्रदेश पुलिस और संबंधित अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और त्वरित जांच कराकर गुलफान अहमद का जल्द से जल्द पता लगाने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। अब सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि 58 दिन बाद कार तो मिल गई, लेकिन आखिर गुलफान अहमद कहां हैं।
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    लखनऊ के चिनहट थाना क्षेत्र के कमता से 22 मई 2026 को रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हुए 23 वर्षीय चालक गुलफान अहमद का 58 दिन बाद भी कोई सुराग नहीं मिल सका है। इस बीच, 18 जुलाई को पुलिस ने उनकी अर्टिगा कार (UP 53 AF 4894) बरामद कर ली है, लेकिन चालक का पता न चलने से मामला और भी गंभीर हो गया है। सुल्तानपुर जनपद के शिवगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम ज्ञानीपुर निवासी गुलफान अहमद 22 मई को कमता बस स्टैंड से कार लेकर गोरखपुर के लिए रवाना हुए थे, जिसके बाद उनका मोबाइल बंद हो गया। इस संबंध में परिजनों ने 2 जून को चिनहट थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी, जबकि वाहन स्वामी ने भी 25 मई को ही गोरखपुर में कार व चालक के गायब होने की शिकायत दर्ज कराई थी।

पुलिस द्वारा लापता अर्टिगा कार बरामद किए जाने के बाद परिजनों ने दावा किया है कि गाड़ी के अंदर कई अलग-अलग नंबर प्लेटें भी मिली हैं, हालांकि पुलिस ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसी बीच, गुलफान के भाई महमूद को एक युवती का फोन आया था, जिसने अपने पति आदिल के साथ साहिल, तालिब और समीर के नाम लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। पुलिस इन आरोपों के साथ-साथ अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है। परिजनों के मुताबिक, पुलिस ने समीर और तालिब को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी, जिसमें से तीन दिन बाद तालिब को छोड़ दिया गया है और समीर से पूछताछ अभी भी जारी है।

गुलफान का कोई सुराग न मिलने से उनकी मां पिछले 58 दिनों से आस लगाए बैठी हैं और पूरा परिवार बेहद चिंतित और बेचैन है। कमता पुलिस चौकी के प्रभारी अभय कुमार सिंह के नेतृत्व में पुलिस साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच कर रही है। पीड़ित परिवार ने उत्तर प्रदेश पुलिस और संबंधित अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और त्वरित जांच कराकर गुलफान अहमद का जल्द से जल्द पता लगाने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। अब सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि 58 दिन बाद कार तो मिल गई, लेकिन आखिर गुलफान अहमद कहां हैं।
    user_आदर्श मीडिया एसोसिएशन (रजि.)
    आदर्श मीडिया एसोसिएशन (रजि.)
    Voice of people Bakshi Ka Talab, Lucknow•
    7 hrs ago
  • लखनऊ के बख्शी का तालाब (बीकेटी) तहसील क्षेत्र के अंतर्गत बीकेटी थाना क्रॉसिंग नहर रोड से अस्ती रोड की ओर जाने वाले राहगीरों के लिए सफर बेहद खतरनाक हो चुका है। इस मार्ग पर गाड़ियां सड़क पर कम और गड्ढों में ज्यादा चलती हैं। हालात इतने खराब हैं कि बिना किसी झटके, टायर पंचर या कमर दर्द के घर पहुंच जाना महज किस्मत का खेल बनकर रह गया है। इस बदहाली की मुख्य वजह महीनों पहले बिजली विभाग द्वारा मोटे विद्युत तार डालने के लिए सड़क किनारे की गई लंबी खुदाई है। विभाग ने तारों को जमीन के नीचे डालने के बाद गड्ढों को सिर्फ खानापूर्ति के लिए आधे-अधूरे पैचवर्क से भर दिया। पहली ही बरसात में वहां की मिट्टी बह गई और सड़क किनारे बड़े-बड़े गड्ढे बन गए। सड़क की बची-कुची कसर अवैध खनन में दौड़ रहे ओवरलोड डंपरों ने पूरी कर दी। दिन-रात भारी-भरकम डंपरों की आवाजाही ने सड़क को पूरी तरह तोड़कर रख दिया है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बिजली विभाग की खुदाई ने तो सड़क को सिर्फ बीमार किया था, लेकिन इन डंपरों ने उसे सीधे आईसीयू में पहुंचा दिया है। रही-सही कसर बरसात ने पूरी कर दी है, जहां गड्ढों में पानी भर जाने से यह पता ही नहीं चलता कि आगे सड़क है या तालाब। इस वजह से दोपहिया वाहन चालक रोज गिरकर चोटिल हो रहे हैं। ग्रामीणों द्वारा कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद न तो बिजली विभाग ने अपनी खुदाई को सुधारा और न ही किसी जिम्मेदार विभाग ने सड़क की मरम्मत कराई। जिम्मेदार अधिकारी ठंडी एसी हवा के बीच फाइलों में व्यस्त हैं, जबकि लोग रोज अपनी जान जोखिम में डालकर इस सड़क पर हिचकोले खा रहे हैं। ग्रामीणों का तंज है कि शायद अधिकारियों को किसी बड़े हादसे का इंतजार है, जिसके बाद ही वे चैन की नींद से जागेंगे। ऐसे में इस मार्ग पर चलने वालों के लिए बस यही सलाह दी जा रही है कि वे अपनी किस्मत के भरोसे ही आगे बढ़ें।
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    लखनऊ के बख्शी का तालाब (बीकेटी) तहसील क्षेत्र के अंतर्गत बीकेटी थाना क्रॉसिंग नहर रोड से अस्ती रोड की ओर जाने वाले राहगीरों के लिए सफर बेहद खतरनाक हो चुका है। इस मार्ग पर गाड़ियां सड़क पर कम और गड्ढों में ज्यादा चलती हैं। हालात इतने खराब हैं कि बिना किसी झटके, टायर पंचर या कमर दर्द के घर पहुंच जाना महज किस्मत का खेल बनकर रह गया है।

इस बदहाली की मुख्य वजह महीनों पहले बिजली विभाग द्वारा मोटे विद्युत तार डालने के लिए सड़क किनारे की गई लंबी खुदाई है। विभाग ने तारों को जमीन के नीचे डालने के बाद गड्ढों को सिर्फ खानापूर्ति के लिए आधे-अधूरे पैचवर्क से भर दिया। पहली ही बरसात में वहां की मिट्टी बह गई और सड़क किनारे बड़े-बड़े गड्ढे बन गए।

सड़क की बची-कुची कसर अवैध खनन में दौड़ रहे ओवरलोड डंपरों ने पूरी कर दी। दिन-रात भारी-भरकम डंपरों की आवाजाही ने सड़क को पूरी तरह तोड़कर रख दिया है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बिजली विभाग की खुदाई ने तो सड़क को सिर्फ बीमार किया था, लेकिन इन डंपरों ने उसे सीधे आईसीयू में पहुंचा दिया है। रही-सही कसर बरसात ने पूरी कर दी है, जहां गड्ढों में पानी भर जाने से यह पता ही नहीं चलता कि आगे सड़क है या तालाब। इस वजह से दोपहिया वाहन चालक रोज गिरकर चोटिल हो रहे हैं।

ग्रामीणों द्वारा कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद न तो बिजली विभाग ने अपनी खुदाई को सुधारा और न ही किसी जिम्मेदार विभाग ने सड़क की मरम्मत कराई। जिम्मेदार अधिकारी ठंडी एसी हवा के बीच फाइलों में व्यस्त हैं, जबकि लोग रोज अपनी जान जोखिम में डालकर इस सड़क पर हिचकोले खा रहे हैं। ग्रामीणों का तंज है कि शायद अधिकारियों को किसी बड़े हादसे का इंतजार है, जिसके बाद ही वे चैन की नींद से जागेंगे। ऐसे में इस मार्ग पर चलने वालों के लिए बस यही सलाह दी जा रही है कि वे अपनी किस्मत के भरोसे ही आगे बढ़ें।
    user_Vishal singh
    Vishal singh
    Local News Reporter बख्शी का तालाब, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • Post by Krishnan
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    Post by Krishnan
    user_Krishnan
    Krishnan
    बख्शी का तालाब, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    13 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश के रामपुर में समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान द्वारा स्थापित जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर विवाद काफी गहरा गया है। रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने यूनिवर्सिटी कैंपस की 40 में से 38 इमारतों को अवैध घोषित कर दिया है। अथॉरिटी का कहना है कि इन भवनों का निर्माण बिना स्वीकृत नक्शे के किया गया है, जिसके चलते इन्हें 15 दिनों के भीतर हटाने या ढहाने का आदेश जारी किया गया है। इस यूनिवर्सिटी पर शुरुआत से ही स्थानीय गरीब किसानों की जमीनों पर जबरन कब्जा करने के आरोप लगते रहे हैं। आरोप है कि इसके निर्माण के दौरान नदी किनारे की सरकारी जमीनों और सार्वजनिक रास्तों को भी यूनिवर्सिटी की बाउंड्री में मिला लिया गया था, जिसके कारण आजम खान के खिलाफ कई एफआईआर (FIR) भी दर्ज हैं। इस मामले पर राजनीतिक घमासान भी छिड़ गया है, जहां सपा प्रमुख अखिलेश यादव इसे शिक्षा और बच्चों के भविष्य पर हमला बता रहे हैं, वहीं सत्तापक्ष भाजपा और उसके सहयोगी दल इसे भ्रष्टाचार और अवैध निर्माण के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कह रहे हैं। इस पूरे विवाद की कहानी भारत समाचार के चैनल पर भी चर्चा में बनी हुई है।
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    उत्तर प्रदेश के रामपुर में समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान द्वारा स्थापित जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर विवाद काफी गहरा गया है। रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने यूनिवर्सिटी कैंपस की 40 में से 38 इमारतों को अवैध घोषित कर दिया है। अथॉरिटी का कहना है कि इन भवनों का निर्माण बिना स्वीकृत नक्शे के किया गया है, जिसके चलते इन्हें 15 दिनों के भीतर हटाने या ढहाने का आदेश जारी किया गया है।

इस यूनिवर्सिटी पर शुरुआत से ही स्थानीय गरीब किसानों की जमीनों पर जबरन कब्जा करने के आरोप लगते रहे हैं। आरोप है कि इसके निर्माण के दौरान नदी किनारे की सरकारी जमीनों और सार्वजनिक रास्तों को भी यूनिवर्सिटी की बाउंड्री में मिला लिया गया था, जिसके कारण आजम खान के खिलाफ कई एफआईआर (FIR) भी दर्ज हैं। इस मामले पर राजनीतिक घमासान भी छिड़ गया है, जहां सपा प्रमुख अखिलेश यादव इसे शिक्षा और बच्चों के भविष्य पर हमला बता रहे हैं, वहीं सत्तापक्ष भाजपा और उसके सहयोगी दल इसे भ्रष्टाचार और अवैध निर्माण के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कह रहे हैं। इस पूरे विवाद की कहानी भारत समाचार के चैनल पर भी चर्चा में बनी हुई है।
    user_रामानंद सागर
    रामानंद सागर
    Librarian सदर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश में समाज की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था संभालने वाले प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के जवान आज सरकार की बेरुखी के कारण बदहाली की जिंदगी जीने को मजबूर हैं। सन 1948 के एक्ट के तहत नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अगुवाई में गठित इस विभाग में ग्रामीण क्षेत्रों के ब्लॉक स्तर से पूरी फोर्स लेवल की तैयारी कराकर जवानों की भर्ती की जाती है। इन्हें सामाजिक सुरक्षा, प्रशासनिक व्यवस्था, यातायात नियंत्रण और कुंभ मेला व त्योहारों जैसी महत्वपूर्ण ड्यूटियों की अहम जिम्मेदारी दी जाती है, लेकिन इसके बावजूद इनका भविष्य अंधकार में डूबा हुआ है। सरकार द्वारा इन जवानों का मानदेय मात्र ₹500 प्रतिदिन निर्धारित किया गया है और इन्हें किसी भी तरह की बीमा सुविधा नहीं दी जाती है। ड्यूटी पर आने-जाने के दौरान यदि कोई दुर्घटना होती है, तो जवान को इलाज का खर्च भी अपनी जेब से ही उठाना पड़ता है। हद तो यह है कि 60 वर्ष पूरे होने के बाद सेवानिवृत्त होने पर जवान के परिवार को ₹1 की भी आर्थिक सहायता नहीं मिलती। गोरखपुर समेत कई जनपदों के पीआरडी जवान सेवाएं समाप्त होने के बाद घर बैठे हैं, जिससे उनके परिवारों का जीवन यापन मुश्किल हो गया है। आज विभाग की इस बदहाली के कारण जवान और उनके बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो चुका है, जिससे हताश होकर मां-बाप अब अपने बच्चों को इस विभाग में भेजने की बजाय मजदूरी करने की सलाह देने लगे हैं। इस अत्यंत दयनीय स्थिति को देखते हुए, उत्तर प्रदेश के समस्त 75 जनपदों के 45,000 पीआरडी जवानों के परिवारों के हक के लिए पत्रकारों से विनम्र निवेदन किया गया है। पत्रकारों से अपील की गई है कि वे इस विषय पर विचार-विमर्श करें और जवानों की इस दर्दभरी आवाज को माननीय मुख्यमंत्री, माननीय प्रधानमंत्री, माननीय राष्ट्रपति और माननीय राज्यपाल महोदय तक पहुंचाकर उन्हें न्याय दिलाने में अपनी अहम भूमिका निभाएं।
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    उत्तर प्रदेश में समाज की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था संभालने वाले प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के जवान आज सरकार की बेरुखी के कारण बदहाली की जिंदगी जीने को मजबूर हैं। सन 1948 के एक्ट के तहत नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अगुवाई में गठित इस विभाग में ग्रामीण क्षेत्रों के ब्लॉक स्तर से पूरी फोर्स लेवल की तैयारी कराकर जवानों की भर्ती की जाती है। इन्हें सामाजिक सुरक्षा, प्रशासनिक व्यवस्था, यातायात नियंत्रण और कुंभ मेला व त्योहारों जैसी महत्वपूर्ण ड्यूटियों की अहम जिम्मेदारी दी जाती है, लेकिन इसके बावजूद इनका भविष्य अंधकार में डूबा हुआ है।

सरकार द्वारा इन जवानों का मानदेय मात्र ₹500 प्रतिदिन निर्धारित किया गया है और इन्हें किसी भी तरह की बीमा सुविधा नहीं दी जाती है। ड्यूटी पर आने-जाने के दौरान यदि कोई दुर्घटना होती है, तो जवान को इलाज का खर्च भी अपनी जेब से ही उठाना पड़ता है। हद तो यह है कि 60 वर्ष पूरे होने के बाद सेवानिवृत्त होने पर जवान के परिवार को ₹1 की भी आर्थिक सहायता नहीं मिलती। गोरखपुर समेत कई जनपदों के पीआरडी जवान सेवाएं समाप्त होने के बाद घर बैठे हैं, जिससे उनके परिवारों का जीवन यापन मुश्किल हो गया है। आज विभाग की इस बदहाली के कारण जवान और उनके बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो चुका है, जिससे हताश होकर मां-बाप अब अपने बच्चों को इस विभाग में भेजने की बजाय मजदूरी करने की सलाह देने लगे हैं।

इस अत्यंत दयनीय स्थिति को देखते हुए, उत्तर प्रदेश के समस्त 75 जनपदों के 45,000 पीआरडी जवानों के परिवारों के हक के लिए पत्रकारों से विनम्र निवेदन किया गया है। पत्रकारों से अपील की गई है कि वे इस विषय पर विचार-विमर्श करें और जवानों की इस दर्दभरी आवाज को माननीय मुख्यमंत्री, माननीय प्रधानमंत्री, माननीय राष्ट्रपति और माननीय राज्यपाल महोदय तक पहुंचाकर उन्हें न्याय दिलाने में अपनी अहम भूमिका निभाएं।
    user_NATIONAL INDIA TV
    NATIONAL INDIA TV
    Local News Reporter बख्शी का तालाब, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • लखनऊ पुलिस कमिश्नर के दिशा-निर्देशन में थाना विभूतिखंड पुलिस ने सम्मिट बिल्डिंग के पास एक सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाया। थाना प्रभारी के नेतृत्व में चले इस अभियान के दौरान मौके पर कई दरोगा और पुलिसकर्मी मौजूद रहे। पुलिस ने सम्मिट बिल्डिंग से ठीक पहले सख्त पहरा बैठाकर वाहनों की बारीकी से जांच की। इस चेकिंग अभियान के दौरान यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों, ब्लैक फिल्म लगी गाड़ियों और शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ बेहद सख्त कार्रवाई की गई। पुलिस ने कई वाहनों का चालान काटा और कई गाड़ियों को सीज करने की कार्रवाई भी की जा रही है। पुलिस ने साफ किया है कि सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने और कानून-व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त रखने के लिए ऐसे सघन चेकिंग अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे।
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    लखनऊ पुलिस कमिश्नर के दिशा-निर्देशन में थाना विभूतिखंड पुलिस ने सम्मिट बिल्डिंग के पास एक सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाया। थाना प्रभारी के नेतृत्व में चले इस अभियान के दौरान मौके पर कई दरोगा और पुलिसकर्मी मौजूद रहे। पुलिस ने सम्मिट बिल्डिंग से ठीक पहले सख्त पहरा बैठाकर वाहनों की बारीकी से जांच की।

इस चेकिंग अभियान के दौरान यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों, ब्लैक फिल्म लगी गाड़ियों और शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ बेहद सख्त कार्रवाई की गई। पुलिस ने कई वाहनों का चालान काटा और कई गाड़ियों को सीज करने की कार्रवाई भी की जा रही है। पुलिस ने साफ किया है कि सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने और कानून-व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त रखने के लिए ऐसे सघन चेकिंग अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे।
    user_Zahira Bano
    Zahira Bano
    Media company बख्शी का तालाब, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    20 hrs ago
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