सुल्तानपुर जीआरपी की कार्यशैली इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है, जहाँ सुरक्षा व्यवस्था से ज़्यादा चर्चाएँ वसूली, दबंगई और अनुशासनहीनता की हो रही हैं। आरोप है कि पश्चिम से आए कुछ सिपाहियों ने जीआरपी की छवि को धूमिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, और सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह सब बिना विभागीय संरक्षण के संभव है। चर्चा है कि जीआरपी प्रभारी भोलाशंकर का इन पर पूरा संरक्षण प्राप्त है। यह संरक्षण स्टेशन के बाहर टेम्पो स्टैंड, वेंडरों और कथित टिकट दलालों से होने वाली कथित वसूली के खेल से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क की कमान सिपाही योगेश कुमार यादव के हाथों में है, जो बिना वर्दी के भी दो वर्दीधारी पुलिसकर्मियों के साथ ऐसे घूमता है, मानो उसे व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए सरकारी एस्कॉर्ट उपलब्ध कराया गया हो। यदि सीसीटीवी फुटेज में दिख रहे दृश्य वास्तविक हैं, तो तस्वीर और भी चिंताजनक है, जहाँ एक व्यक्ति को जानवरों की तरह बेरहमी से पीटा जा रहा है। ऐसे दृश्य न केवल पुलिस की छवि पर दाग लगाते हैं, बल्कि आम नागरिक के मन में कानून के प्रति भरोसा भी कमजोर करते हैं, जिससे स्टेशन परिसर में दहशत का माहौल है और लोग शिकायत करने से बचते हैं। इसके अतिरिक्त, गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय गौरव के अवसर पर भी अनुशासनहीनता देखने को मिली है, जहाँ सिपाही नितिन कुमार मलिक का आचरण सलामी समारोह के दौरान वर्दी की गरिमा और तिरंगे के सम्मान के अनुरूप नहीं था। इन गंभीर आरोपों को देखते हुए, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सुल्तानपुर जीआरपी में कानून का राज है या कुछ लोगों की मनमानी का। यदि लगाए जा रहे आरोपों और सीसीटीवी फुटेज में दम है, तो संबंधित अधिकारियों को निष्पक्ष जांच कर सच्चाई जनता के सामने लानी चाहिए, क्योंकि वर्दी सम्मान का प्रतीक है, भय और बदनामी का नहीं।
सुल्तानपुर जीआरपी की कार्यशैली इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है, जहाँ सुरक्षा व्यवस्था से ज़्यादा चर्चाएँ वसूली, दबंगई और अनुशासनहीनता की हो रही हैं। आरोप है कि पश्चिम से आए कुछ सिपाहियों ने जीआरपी की छवि को धूमिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, और सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह सब बिना विभागीय संरक्षण के संभव है। चर्चा है कि जीआरपी प्रभारी भोलाशंकर का इन पर पूरा संरक्षण प्राप्त है। यह संरक्षण स्टेशन के बाहर टेम्पो स्टैंड, वेंडरों और कथित टिकट दलालों से होने वाली कथित वसूली के खेल से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क की कमान सिपाही योगेश कुमार यादव के हाथों में है, जो बिना वर्दी के भी दो वर्दीधारी पुलिसकर्मियों के साथ ऐसे घूमता है, मानो उसे व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए सरकारी एस्कॉर्ट उपलब्ध कराया गया हो। यदि सीसीटीवी फुटेज में दिख रहे दृश्य वास्तविक हैं, तो तस्वीर और भी चिंताजनक है, जहाँ एक व्यक्ति को जानवरों की तरह बेरहमी से पीटा जा रहा है। ऐसे दृश्य न केवल पुलिस की छवि पर दाग लगाते हैं, बल्कि आम नागरिक के मन में कानून के प्रति भरोसा भी कमजोर करते हैं, जिससे स्टेशन परिसर में दहशत का माहौल है और लोग शिकायत करने से बचते हैं। इसके अतिरिक्त, गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय गौरव के अवसर पर भी अनुशासनहीनता देखने को मिली है, जहाँ सिपाही नितिन कुमार मलिक का आचरण सलामी समारोह के दौरान वर्दी की गरिमा और तिरंगे के सम्मान के अनुरूप नहीं था। इन गंभीर आरोपों को देखते हुए, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सुल्तानपुर जीआरपी में कानून का राज है या कुछ लोगों की मनमानी का। यदि लगाए जा रहे आरोपों और सीसीटीवी फुटेज में दम है, तो संबंधित अधिकारियों को निष्पक्ष जांच कर सच्चाई जनता के सामने लानी चाहिए, क्योंकि वर्दी सम्मान का प्रतीक है, भय और बदनामी का नहीं।
- सुल्तानपुर जिले के गोसाईगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कारी बहार गांव में मृतक बादल वर्मा से जुड़े मामले में पुलिस प्रशासन द्वारा एक बाइट जारी की गई है। पुलिस प्रशासन ने इस मामले को लेकर अपना बयान दिया है।1
- बाराबंकी के हैदरगढ़ स्थित प्राचीन शिव मंदिर में जन सेवा अधिकार संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल कुमार पाठक ने भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण के लिए प्रार्थना की। पूजा के पश्चात उन्होंने मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने सामाजिक एकता, सेवा और मानव कल्याण के संदेश को प्रसारित करने का आह्वान करते हुए कहा कि भगवान भोलेनाथ की कृपा से समाज में सद्भावना और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, इसलिए सभी को जनहित के कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में अनिल कुमार पाठक ने मंदिर प्रबंधन और उपस्थित श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया, जहाँ उनके साथ संगठन के अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।1
- सुल्तानपुर जिले के लम्भुआ में वकीलों ने उपजिलाधिकारी प्रीति जैन पर अभद्रता का गंभीर आरोप लगाया है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामसागर पाठक ने बताया कि उपजिलाधिकारी ने अधिवक्ता भएन्द्र जीत यादव के साथ अभद्र व्यवहार किया और उन्हें कोर्ट से बाहर निकल जाने के लिए कहा। इस घटना से आक्रोशित वकीलों ने 'उपजिलाधिकारी लम्भुआ मुर्दाबाद' के नारे लगाए और प्रदर्शन किया। अधिवक्ता सुषमा पाल और अन्य पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उपजिलाधिकारी पर उचित कार्यवाही नहीं की जाती, तब तक सभी अधिवक्ता न्यायिक कार्यों से विरत रहेंगे। बार एसोसिएशन के सचिव ने यह भी आरोप लगाया कि उपजिलाधिकारी के न्यायालय में आदेश पारित होने के बावजूद महीनों तक कोई कार्यवाही नहीं होती है, जिससे आम जनता को बेवजह परेशान होना पड़ता है। वकीलों ने इसे घोर लापरवाही बताते हुए न्याय की मांग की है।1
- सुलतानपुर के गोसाईगंज थाना क्षेत्र में 29 जून को आजाद वर्मा की मौत के मामले में पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि आजाद की मौत किसी हमले या साजिश का परिणाम नहीं, बल्कि एक स्कॉर्पियो में अवैध पिस्टल चलाने के दौरान हुई एक्सीडेंटल फायरिंग के कारण हुई थी। जब युवक गाड़ी में मौजूद नई अवैध पिस्टल का परीक्षण कर रहे थे, तब अचानक चली एक गोली सीट को चीरते हुए आजाद वर्मा की कमर में जा लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घटना के बाद आरोपी उन्हें अस्पताल ले जाने के बजाय इधर-उधर घुमाते रहे और अंततः लखनऊ ले गए। पुलिस की जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि आरोपियों ने घटना को छिपाने और पुलिस को गुमराह करने के लिए सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो और झूठी कहानियां फैलाई थीं। वैज्ञानिक साक्ष्यों, फॉरेंसिक जांच और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने अभिषेक वर्मा पुत्र विजय बहादुर और अभिषेक वर्मा पुत्र रामजनक को लखनऊ के पीजीआई क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। आरोपियों की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त काली स्कॉर्पियो, अवैध पिस्टल, कारतूस का खोखा और सीट पर मौजूद खून के निशान व गोली के प्रवेश-निकास के साक्ष्य बरामद किए गए हैं। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है, जबकि घटना में शामिल तीसरे आरोपी की तलाश में दबिश दी जा रही है। सुलतानपुर पुलिस का कहना है कि विवेचना जारी है और फरार आरोपी की गिरफ्तारी के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस खुलासे ने यह साबित कर दिया है कि वैज्ञानिक जांच के सामने सोशल मीडिया पर रची गई कोई भी झूठी कहानी टिक नहीं सकती।1
- सोशल मीडिया पर इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप का बताया जा रहा एक भावुक वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसमें बाढ़ के तेज़ बहाव में फँसे एक बाघ को बचाने के लिए एक हाथी प्रयास करता दिख रहा है। दावा किया जा रहा है कि यह दृश्य अचानक आई भीषण बाढ़ के दौरान का है जहाँ बाघ पानी के तेज़ बहाव में फँस गया था। वीडियो में हाथी अपनी सूँड के सहारे बाघ तक पहुँचने और उसे सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश करता हुआ नज़र आता है। इस मार्मिक दृश्य ने लाखों लोगों को भावुक कर दिया है और पशुओं की संवेदनशीलता के साथ-साथ उनके परस्पर सहयोग की भावना पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। हालाँकि, इस वीडियो के स्थान, समय और इससे जुड़े दावे की अभी तक स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी यह वीडियो लाखों लोगों द्वारा तेज़ी से साझा किया जा रहा है। यह दृश्य एक बार फिर यह संदेश देता है कि प्रकृति के जीव भी संकट की घड़ी में एक-दूसरे की सहायता करने की भावना रखते हैं, जो मानव समाज के लिए भी प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत है। इस घटना में हाथी ने इंसानियत की मिसाल पेश की है।1
- सुल्तानपुर जीआरपी की कार्यशैली इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है, जहाँ सुरक्षा व्यवस्था से ज़्यादा चर्चाएँ वसूली, दबंगई और अनुशासनहीनता की हो रही हैं। आरोप है कि पश्चिम से आए कुछ सिपाहियों ने जीआरपी की छवि को धूमिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, और सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह सब बिना विभागीय संरक्षण के संभव है। चर्चा है कि जीआरपी प्रभारी भोलाशंकर का इन पर पूरा संरक्षण प्राप्त है। यह संरक्षण स्टेशन के बाहर टेम्पो स्टैंड, वेंडरों और कथित टिकट दलालों से होने वाली कथित वसूली के खेल से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क की कमान सिपाही योगेश कुमार यादव के हाथों में है, जो बिना वर्दी के भी दो वर्दीधारी पुलिसकर्मियों के साथ ऐसे घूमता है, मानो उसे व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए सरकारी एस्कॉर्ट उपलब्ध कराया गया हो। यदि सीसीटीवी फुटेज में दिख रहे दृश्य वास्तविक हैं, तो तस्वीर और भी चिंताजनक है, जहाँ एक व्यक्ति को जानवरों की तरह बेरहमी से पीटा जा रहा है। ऐसे दृश्य न केवल पुलिस की छवि पर दाग लगाते हैं, बल्कि आम नागरिक के मन में कानून के प्रति भरोसा भी कमजोर करते हैं, जिससे स्टेशन परिसर में दहशत का माहौल है और लोग शिकायत करने से बचते हैं। इसके अतिरिक्त, गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय गौरव के अवसर पर भी अनुशासनहीनता देखने को मिली है, जहाँ सिपाही नितिन कुमार मलिक का आचरण सलामी समारोह के दौरान वर्दी की गरिमा और तिरंगे के सम्मान के अनुरूप नहीं था। इन गंभीर आरोपों को देखते हुए, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सुल्तानपुर जीआरपी में कानून का राज है या कुछ लोगों की मनमानी का। यदि लगाए जा रहे आरोपों और सीसीटीवी फुटेज में दम है, तो संबंधित अधिकारियों को निष्पक्ष जांच कर सच्चाई जनता के सामने लानी चाहिए, क्योंकि वर्दी सम्मान का प्रतीक है, भय और बदनामी का नहीं।1