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मध्य प्रदेश के रीवा जिले में स्थित इटमा वॉटरफॉल में एक बार फिर हादसा हो गया है। यहाँ सेल्फी लेने की कोशिश करते समय एक युवक जलप्रपात में गिर गया।
शेखर तिवारी
मध्य प्रदेश के रीवा जिले में स्थित इटमा वॉटरफॉल में एक बार फिर हादसा हो गया है। यहाँ सेल्फी लेने की कोशिश करते समय एक युवक जलप्रपात में गिर गया।
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- मध्य प्रदेश के सीधी में स्थित एसडीएम कार्यालय में एक वकील अपनी बुलेट मोटरसाइकिल लेकर भीतर घुस गए। इस घटना के संबंध में अधिवक्ता बृजेंद्र सिंह का बयान सामने आया है।1
- मैहर जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम कंचनपुर अंतर्गत जल्हा गांव में एक सीसी सड़क के निर्माण में ऐसा चौंकाने वाला नजारा सामने आया है, जिसे देखकर लोग और इंजीनियरिंग जगत भी हैरान हैं। यहां लगभग 100 मीटर लंबी यह सड़क, जिसकी लागत करीब 2.92 लाख रुपये बताई गई है, सड़क के बीच में खड़े उच्च वोल्टेज बिजली के खंभे को हटाए बिना ही बना दी गई है। खंभे को हटाने की जहमत न उठाते हुए, उसे सड़क के चारों ओर घेरकर मानो एक "स्मारक" का दर्जा दे दिया गया है। यह खंभा अब सड़क का स्थायी हिस्सा बन चुका है, जिससे वाहन चालकों, स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को रोजाना एक "इंजीनियरिंग अजूबे" का सामना करना पड़ रहा है। यह सड़क प्राथमिक पाठशाला की बाउंड्रीवाल से सटी होने के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। रात के समय किसी संभावित दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी, यह भी एक बड़ा प्रश्न है। इस मामले में जब जिम्मेदार उपयंत्री योगेंद्र सिंह परमार से जानकारी मांगी गई, तो उनका जवाब और भी हैरान करने वाला था; उन्होंने साफ कहा कि "मैं तो जाकर देखा ही नहीं"। ऐसे में कई सवाल उठ रहे हैं कि क्या सड़क निर्माण में खंभा हटाने का कोई प्रस्ताव नहीं बनाया गया, संबंधित विभाग से समन्वय क्यों नहीं किया गया, और तकनीकी स्वीकृति देते समय इस खामी को किसी ने क्यों नहीं देखा। लोग यह भी पूछ रहे हैं कि क्या सरकारी धन का उपयोग इसी तरह के निर्माण कार्यों में किया जाएगा। कुछ लोग व्यंग्यात्मक रूप से यह भी कह रहे हैं कि भविष्य में कहीं इस खंभे को "विकास स्तंभ" घोषित कर पर्यटन स्थल न बना दिया जाए, क्योंकि फिलहाल यह खंभा विकास कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर इस मामले की जांच करें और संभावित दुर्घटना को दावत देने वाली इस व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त किया जाए। मौजूदा स्थिति में, यह निर्माण कार्य सड़क कम और सरकारी लापरवाही का जीता-जागता प्रदर्शन अधिक प्रतीत होता है।1
- सतना जिले के रामपुर बाघेलन की ग्राम पंचायत केमार में आज शाम 5 बजे एक जन चौपाल का आयोजन किया गया, जहाँ पुलिस और जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। इस चौपाल का मुख्य फोकस नशा, साइबर फ्रॉड और कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं पर रहा। कार्यक्रम में बेला चौकी प्रभारी इंद्रवली सिंह ने साइबर अपराध से बचाव के तरीके विस्तार से बताए। उन्होंने ग्रामीणों को OTP, संदिग्ध लिंक और फर्जी कॉल से सावधान रहने, तथा किसी भी संदेहास्पद गतिविधि की तुरंत पुलिस को सूचना देने की सलाह दी। इस जन चौपाल में जनपद सदस्य प्रजेश द्विवेदी, भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के जिला अध्यक्ष लक्ष्मण रावत, जनपद सदस्य बद्री दहिया, राजेश सिंह तिवारी, बेला सरपंच प्रतिनिधि महेंद्र सिंह, केमार सरपंच प्रतिनिधि बृजेश सेन और भाजपा मंडल मीडिया प्रभारी रामदत्त दाहिया सहित कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे। जन चौपाल में भारी संख्या में उपस्थित ग्रामीणों ने नशा, अवैध शराब की बिक्री, सड़क-सुरक्षा और गाँव से संबंधित अन्य समस्याएँ सामने रखीं। पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों को उनकी सभी समस्याओं का त्वरित निराकरण करने का आश्वासन दिया। ग्राम पंचायत केमार के ग्रामीणों ने पुलिस और प्रशासन द्वारा की गई इस पहल की सराहना की। इस जन चौपाल का मुख्य उद्देश्य आम जनता को जागरूक करना और पुलिस तथा जनता के बीच समन्वय को मजबूत करना था।1
- राष्ट्रीय पत्रकार संघ भारत द्वारा 19 जुलाई को सतना जिले के हिरौदी मझगवा में एक ऐतिहासिक पत्रकार सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम को संपादक एडवोकेट राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीश सिंह चंदेल संबोधित करेंगे। इस सम्मेलन के लिए सभी प्रदेशों के पत्रकारों को आमंत्रित किया गया है, जिसमें मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के पत्रकार भी शामिल हैं।1
- रीवा रेंज के आईजी गौरव राजपूत ने जन चौपाल की मॉनिटरिंग के दौरान एक महत्वपूर्ण बात कही है। उन्होंने टिप्पणी की कि समाज को वैसी ही पुलिस मिलती है जैसा वह चाहता है, और उसी तरह पुलिस को भी वैसा ही समाज मिलता है जैसा लोग चाहते हैं।1
- मध्य प्रदेश के रीवा जिले में स्थित इटमा वॉटरफॉल में एक बार फिर हादसा हो गया है। यहाँ सेल्फी लेने की कोशिश करते समय एक युवक जलप्रपात में गिर गया।1
- सोशल मीडिया पर एक पोस्ट ने मनुष्य की क्रूरता पर गहरा सवाल उठाया है, जिसमें पूछा गया है कि कोई व्यक्ति इतना बेरहम कैसे हो सकता है। पोस्ट में इस तरह के कृत्यों को 'बहादुरी' कहने पर भी प्रश्नचिह्न लगाया गया है। उपयोगकर्ता ने अन्य लोगों से इन 'बहादुरों' के लिए कुछ 'मर्यादित शब्द' कहने का भी आग्रह किया है।1
- मैहर जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम कंचनपुर अंतर्गत जल्हा गांव में सीसी सड़क निर्माण का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ सड़क के बीचोंबीच एक उच्च वोल्टेज बिजली का खंभा खड़ा है। अधिकारियों ने इसे हटाने की बजाय लगभग 100 मीटर लंबी और 2.92 लाख रुपये की लागत से बनी सड़क को उसी खंभे के चारों ओर बना दिया, जिससे यह खंभा अब सड़क का स्थायी 'स्मारक' बन गया है। इस अजीबोगरीब निर्माण को देखकर लोग और इंजीनियरिंग जगत भी हैरान है। यह सड़क प्राथमिक पाठशाला की बाउंड्रीवाल से लगी हुई है, जिससे बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों और वाहन चालकों को अब रोजाना इस 'इंजीनियरिंग अजूबे' का सामना करना पड़ेगा, और रात के समय किसी संभावित दुर्घटना की आशंका भी बढ़ गई है। जब इस निर्माण कार्य के संबंध में उपयंत्री योगेंद्र सिंह परमार से जानकारी मांगी गई, तो उनका जवाब और भी चौंकाने वाला था; उन्होंने कहा कि वे तो मौके पर देखने ही नहीं गए। इस बयान के बाद निर्माण की गुणवत्ता, सुरक्षा और तकनीकी मानकों के पालन पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। लोग जानना चाहते हैं कि क्या खंभा हटाने का प्रस्ताव नहीं बना, संबंधित विभाग से समन्वय क्यों नहीं किया गया, और तकनीकी स्वीकृति देते समय यह खामी क्यों नहीं देखी गई। फिलहाल, सड़क के बीचोंबीच खड़ा यह खंभा विकास कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है, और ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों से तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच करने और इस दुर्घटना को न्योता देने वाली व्यवस्था को दुरुस्त कराने की मांग की है। यह निर्माण कार्य सड़क कम, और सरकारी लापरवाही का जीता-जागता प्रदर्शन अधिक नजर आ रहा है।1
- रीवा जिले के गुढ़ बस स्टैंड से रागनियां और नेशनल हाईवे 39 को जोड़ने वाला गुढ़ रागनियां मार्ग पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। हाल ही में इस सड़क के गड्ढों को कंक्रीट भरकर भरा गया था, लेकिन बरसात की कुछ ही बूंदों ने भ्रष्टाचार की पोल खोल दी, जिससे पूरी सड़क तालाब का रूप ले चुकी है। इस मार्ग पर स्कूली बच्चों से लेकर आम आदमी तक को घुटनों तक पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है, जिससे उनकी परेशानी बढ़ गई है। यह मार्ग रागनियां गांव की जनता के साथ-साथ छोटे-छोटे स्कूली बच्चों के लिए भी रोजाना आवागमन का मुख्य रास्ता है, जहाँ दिन भर वाहनों की आवाजाही लगी रहती है। अब कीचड़ और पानी से भरी इस सड़क से निकलना उनकी मजबूरी बन गई है। आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी और प्रतिनिधि इस रास्ते का इस्तेमाल नहीं करते हैं, जिसके कारण उन्हें इस मार्ग की खस्ताहाली का अंदाजा नहीं है। इसी अनदेखी के चलते सड़क तालाब में बदल गई है और आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं, बावजूद इसके सड़क का मरम्मतीकरण नहीं कराया जा रहा है। सड़क की इस दयनीय स्थिति के कारण आम लोगों का निकलना दूभर हो गया है। विशेष रूप से छोटे स्कूली बच्चों के घुटनों तक गहरे गड्ढों में कभी भी गिरने और किसी बड़ी दुर्घटना का शिकार होने का खतरा बना हुआ है। स्थानीय जनता इस परेशानी से जूझ रही है, जबकि अधिकारी इस पूरे मामले पर मूकदर्शक बने हुए हैं।1