रीवा जिले के गुढ़ बस स्टैंड से रागनियां और नेशनल हाईवे 39 को जोड़ने वाला गुढ़ रागनियां मार्ग पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। हाल ही में इस सड़क के गड्ढों को कंक्रीट भरकर भरा गया था, लेकिन बरसात की कुछ ही बूंदों ने भ्रष्टाचार की पोल खोल दी, जिससे पूरी सड़क तालाब का रूप ले चुकी है। इस मार्ग पर स्कूली बच्चों से लेकर आम आदमी तक को घुटनों तक पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है, जिससे उनकी परेशानी बढ़ गई है। यह मार्ग रागनियां गांव की जनता के साथ-साथ छोटे-छोटे स्कूली बच्चों के लिए भी रोजाना आवागमन का मुख्य रास्ता है, जहाँ दिन भर वाहनों की आवाजाही लगी रहती है। अब कीचड़ और पानी से भरी इस सड़क से निकलना उनकी मजबूरी बन गई है। आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी और प्रतिनिधि इस रास्ते का इस्तेमाल नहीं करते हैं, जिसके कारण उन्हें इस मार्ग की खस्ताहाली का अंदाजा नहीं है। इसी अनदेखी के चलते सड़क तालाब में बदल गई है और आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं, बावजूद इसके सड़क का मरम्मतीकरण नहीं कराया जा रहा है। सड़क की इस दयनीय स्थिति के कारण आम लोगों का निकलना दूभर हो गया है। विशेष रूप से छोटे स्कूली बच्चों के घुटनों तक गहरे गड्ढों में कभी भी गिरने और किसी बड़ी दुर्घटना का शिकार होने का खतरा बना हुआ है। स्थानीय जनता इस परेशानी से जूझ रही है, जबकि अधिकारी इस पूरे मामले पर मूकदर्शक बने हुए हैं।
रीवा जिले के गुढ़ बस स्टैंड से रागनियां और नेशनल हाईवे 39 को जोड़ने वाला गुढ़ रागनियां मार्ग पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। हाल ही में इस सड़क के गड्ढों को कंक्रीट भरकर भरा गया था, लेकिन बरसात की कुछ ही बूंदों ने भ्रष्टाचार की पोल खोल दी, जिससे पूरी सड़क तालाब का रूप ले चुकी है। इस मार्ग पर स्कूली बच्चों से लेकर आम आदमी तक को घुटनों तक पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है, जिससे उनकी परेशानी बढ़ गई है। यह मार्ग रागनियां गांव की जनता के साथ-साथ छोटे-छोटे स्कूली बच्चों के लिए भी रोजाना आवागमन का मुख्य रास्ता है, जहाँ दिन भर वाहनों की आवाजाही लगी रहती है। अब कीचड़ और पानी से भरी इस सड़क से निकलना उनकी मजबूरी बन गई है। आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी और प्रतिनिधि इस रास्ते का इस्तेमाल नहीं करते हैं, जिसके कारण उन्हें इस मार्ग की खस्ताहाली का अंदाजा नहीं है। इसी अनदेखी के चलते सड़क तालाब में बदल गई है और आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं, बावजूद इसके सड़क का मरम्मतीकरण नहीं कराया जा रहा है। सड़क की इस दयनीय स्थिति के कारण आम लोगों का निकलना दूभर हो गया है। विशेष रूप से छोटे स्कूली बच्चों के घुटनों तक गहरे गड्ढों में कभी भी गिरने और किसी बड़ी दुर्घटना का शिकार होने का खतरा बना हुआ है। स्थानीय जनता इस परेशानी से जूझ रही है, जबकि अधिकारी इस पूरे मामले पर मूकदर्शक बने हुए हैं।
- चित्रकूट में उत्तर प्रदेश-मध्य प्रदेश सीमा पर ओवरलोड वाहनों के विरुद्ध चल रही प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान एक गंभीर मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, कार्यपालिक मजिस्ट्रेट और नायब तहसीलदार बरौधा ने एक ओवरलोड ट्रक को पकड़ा था और उसे थाना माझगवां ले जाने का निर्देश दिया था। सुरक्षा कारणों से ट्रक में दो चौकीदारों को भी बैठाया गया था। बताया जा रहा है कि ट्रक चालक ने वाहन को उत्तर प्रदेश क्षेत्र में स्थित गौतम पेट्रोल पंप पर खड़ा कर दिया और मौके से फरार हो गया। इसके चलते प्रशासनिक अधिकारियों को ट्रक को आगे ले जाने में खासी परेशानी हुई। आरोप है कि इस दौरान गौतम पेट्रोल पंप के संचालक ने अपने कर्मचारियों के मोबाइल फोन से नायब तहसीलदार से बात की और कथित तौर पर धमकी भरे लहजे में कहा कि "मेरे पेट्रोल पंप से गाड़ी नहीं हटनी चाहिए, नहीं तो अच्छा नहीं होगा। यह उत्तर प्रदेश है।" स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि ऐसी प्रशासनिक कार्रवाई के समय ओवरलोड वाहन अक्सर इसी पेट्रोल पंप पर खड़े कर दिए जाते हैं, जिससे कार्रवाई में बाधा उत्पन्न होती है। कुछ लोगों का मानना है कि इस प्रकार की घटनाओं से अवैध बालू परिवहन को संरक्षण मिलने की आशंका है।1
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- मैहर जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम कंचनपुर अंतर्गत जल्हा गांव में एक सीसी सड़क के निर्माण में ऐसा चौंकाने वाला नजारा सामने आया है, जिसे देखकर लोग और इंजीनियरिंग जगत भी हैरान हैं। यहां लगभग 100 मीटर लंबी यह सड़क, जिसकी लागत करीब 2.92 लाख रुपये बताई गई है, सड़क के बीच में खड़े उच्च वोल्टेज बिजली के खंभे को हटाए बिना ही बना दी गई है। खंभे को हटाने की जहमत न उठाते हुए, उसे सड़क के चारों ओर घेरकर मानो एक "स्मारक" का दर्जा दे दिया गया है। यह खंभा अब सड़क का स्थायी हिस्सा बन चुका है, जिससे वाहन चालकों, स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को रोजाना एक "इंजीनियरिंग अजूबे" का सामना करना पड़ रहा है। यह सड़क प्राथमिक पाठशाला की बाउंड्रीवाल से सटी होने के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। रात के समय किसी संभावित दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी, यह भी एक बड़ा प्रश्न है। इस मामले में जब जिम्मेदार उपयंत्री योगेंद्र सिंह परमार से जानकारी मांगी गई, तो उनका जवाब और भी हैरान करने वाला था; उन्होंने साफ कहा कि "मैं तो जाकर देखा ही नहीं"। ऐसे में कई सवाल उठ रहे हैं कि क्या सड़क निर्माण में खंभा हटाने का कोई प्रस्ताव नहीं बनाया गया, संबंधित विभाग से समन्वय क्यों नहीं किया गया, और तकनीकी स्वीकृति देते समय इस खामी को किसी ने क्यों नहीं देखा। लोग यह भी पूछ रहे हैं कि क्या सरकारी धन का उपयोग इसी तरह के निर्माण कार्यों में किया जाएगा। कुछ लोग व्यंग्यात्मक रूप से यह भी कह रहे हैं कि भविष्य में कहीं इस खंभे को "विकास स्तंभ" घोषित कर पर्यटन स्थल न बना दिया जाए, क्योंकि फिलहाल यह खंभा विकास कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर इस मामले की जांच करें और संभावित दुर्घटना को दावत देने वाली इस व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त किया जाए। मौजूदा स्थिति में, यह निर्माण कार्य सड़क कम और सरकारी लापरवाही का जीता-जागता प्रदर्शन अधिक प्रतीत होता है।1
- रीवा कलेक्ट्रेट में आयोजित जन सुनवाई के दौरान घोर लापरवाही सामने आई। इस जन सुनवाई में विकलांग व्यक्तियों के लिए वीलचेयर की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी, जिसके कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा।1
- ललितपुर जिले के आयुर्वेद व यूनानी विभाग के अधिकारी डॉ. अर्जुन लाल अहिरवार और सहायक क्लर्क राम किशोर गुप्ता को 50-50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। कुल एक लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में इन दोनों रिश्वतखोरों को गिरफ्तारी के बाद जेल भेज दिया गया है।1
- भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी आर्मी चीफ के पद से सेवानिवृत्त हो गए हैं। उनकी विदाई के अवसर पर साउथ ब्लॉक लॉन में उन्हें औपचारिक 'गार्ड ऑफ ऑनर' प्रदान किया गया। इससे पहले, जनरल द्विवेदी ने नेशनल वॉर मेमोरियल पर पुष्पांजलि अर्पित कर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने अपना पदभार सौंपा और सेवा से रिटायर हो गए। अपनी सेवानिवृत्ति पर जनरल द्विवेदी ने एक भावुक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने कहा कि सैनिक स्कूल से शुरू हुआ उनका चार दशकों से अधिक का सफर यादगार रहा। उन्होंने भारतीय सेना में सेवा देने को अपने जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य बताया। जनरल द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि सेना की असली ताकत किसी एक व्यक्ति में नहीं, बल्कि सैनिकों, कमांडरों, पूर्व सैनिकों, उनके परिवारों और देश के नागरिकों के अटूट भरोसे में निहित है। उन्होंने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को नमन करते हुए अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।1
- रीवा जिले के गुढ़ बस स्टैंड से रागनियां और नेशनल हाईवे 39 को जोड़ने वाला गुढ़ रागनियां मार्ग पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। हाल ही में इस सड़क के गड्ढों को कंक्रीट भरकर भरा गया था, लेकिन बरसात की कुछ ही बूंदों ने भ्रष्टाचार की पोल खोल दी, जिससे पूरी सड़क तालाब का रूप ले चुकी है। इस मार्ग पर स्कूली बच्चों से लेकर आम आदमी तक को घुटनों तक पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है, जिससे उनकी परेशानी बढ़ गई है। यह मार्ग रागनियां गांव की जनता के साथ-साथ छोटे-छोटे स्कूली बच्चों के लिए भी रोजाना आवागमन का मुख्य रास्ता है, जहाँ दिन भर वाहनों की आवाजाही लगी रहती है। अब कीचड़ और पानी से भरी इस सड़क से निकलना उनकी मजबूरी बन गई है। आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी और प्रतिनिधि इस रास्ते का इस्तेमाल नहीं करते हैं, जिसके कारण उन्हें इस मार्ग की खस्ताहाली का अंदाजा नहीं है। इसी अनदेखी के चलते सड़क तालाब में बदल गई है और आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं, बावजूद इसके सड़क का मरम्मतीकरण नहीं कराया जा रहा है। सड़क की इस दयनीय स्थिति के कारण आम लोगों का निकलना दूभर हो गया है। विशेष रूप से छोटे स्कूली बच्चों के घुटनों तक गहरे गड्ढों में कभी भी गिरने और किसी बड़ी दुर्घटना का शिकार होने का खतरा बना हुआ है। स्थानीय जनता इस परेशानी से जूझ रही है, जबकि अधिकारी इस पूरे मामले पर मूकदर्शक बने हुए हैं।1