झारखंड के लोहरदगा जिले के कुड़ू प्रखंड स्थित सलगी पंचायत के चूल्हापानी गांव में गंगा दशहरा के अवसर पर आयोजित देवनद दामोदर महोत्सव में आस्था और संस्कृति का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। इस भव्य आयोजन में झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार ने शिरकत की, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्साह और गौरव का माहौल छा गया। राज्यपाल संतोष गंगवार सड़क मार्ग से चूल्हापानी पहुंचे, जहां ग्रामीणों ने उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। इसके उपरांत, वे पहाड़ी और जंगली रास्तों से दामोदर नदी के उद्गम स्थल तक गए। उद्गम स्थल पर उन्होंने जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय के साथ गंगा पूजन, गंगा आरती और हवन-पूजन किया। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और घंटियों की ध्वनि से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। इस मौके पर उपायुक्त संदीप कुमार मीणा, पुलिस अधीक्षक सादिक अनवर रिजवी, उपविकास आयुक्त सुषमा नीलम सोरेंग समेत कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल संतोष गंगवार ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की नदियाँ केवल जल स्रोत नहीं हैं, बल्कि ये देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का अभिन्न अंग हैं। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और जल स्रोतों को बचाने के लिए सामूहिक प्रयास करने की अपील की। वहीं, विधायक सरयू राय ने बताया कि दामोदर नदी को बचाने और उसे प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए पिछले 12 वर्षों से एक अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने चूल्हापानी स्थित दामोदर उद्गम स्थल को पर्यटन और धार्मिक स्थल के रूप में विकसित करने की भी मांग उठाई। महोत्सव के दौरान पूरे गांव में मेले जैसा माहौल रहा, जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पारंपरिक लोक प्रस्तुतियों ने आयोजन को और भी आकर्षक बना दिया। कार्यक्रम में जिला परिषद अध्यक्ष सुखदेव उरांव, जिप सदस्य गंगोत्री देवी, एसडीओ अमित कुमार, सीओ संतोष उरांव, थाना प्रभारी अजीत कुमार सहित कई गणमान्य लोग और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
झारखंड के लोहरदगा जिले के कुड़ू प्रखंड स्थित सलगी पंचायत के चूल्हापानी गांव में गंगा दशहरा के अवसर पर आयोजित देवनद दामोदर महोत्सव में आस्था और संस्कृति का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। इस भव्य आयोजन में झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार ने शिरकत की, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्साह और गौरव का माहौल छा गया। राज्यपाल संतोष गंगवार सड़क मार्ग से चूल्हापानी पहुंचे, जहां ग्रामीणों ने उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। इसके उपरांत, वे पहाड़ी और जंगली रास्तों से दामोदर नदी के उद्गम स्थल तक गए। उद्गम स्थल पर उन्होंने जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय के साथ गंगा पूजन, गंगा आरती और हवन-पूजन किया। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और घंटियों की ध्वनि से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। इस मौके पर उपायुक्त संदीप कुमार मीणा, पुलिस अधीक्षक सादिक अनवर रिजवी, उपविकास आयुक्त सुषमा नीलम सोरेंग समेत कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल संतोष गंगवार ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की नदियाँ केवल जल स्रोत नहीं हैं, बल्कि ये देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का अभिन्न अंग हैं। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और जल स्रोतों को बचाने के लिए सामूहिक प्रयास करने की अपील की। वहीं, विधायक सरयू राय ने बताया कि दामोदर नदी को बचाने और उसे प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए पिछले 12 वर्षों से एक अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने चूल्हापानी स्थित दामोदर उद्गम स्थल को पर्यटन और धार्मिक स्थल के रूप में विकसित करने की भी मांग उठाई। महोत्सव के दौरान पूरे गांव में मेले जैसा माहौल रहा, जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पारंपरिक लोक प्रस्तुतियों ने आयोजन को और भी आकर्षक बना दिया। कार्यक्रम में जिला परिषद अध्यक्ष सुखदेव उरांव, जिप सदस्य गंगोत्री देवी, एसडीओ अमित कुमार, सीओ संतोष उरांव, थाना प्रभारी अजीत कुमार सहित कई गणमान्य लोग और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
- सवाल पूछे जाने पर एक भाजपा नेता ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत को आज़ादी मिलने के इतने समय बाद भी अब तक सड़क का निर्माण क्यों नहीं हो पाया था। उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि जब राज्यपाल महोदय को आना था, तो वही सड़क मात्र एक दिन के भीतर बनकर तैयार हो गई।1
- बिशुनपुर प्रखंड के पूर्व प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) सुलेमान मुंडरी ने महुआडांड में नए अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) के रूप में अपना पदभार ग्रहण कर लिया है। प्रशासनिक सेवा में यह उनकी पहली एसडीएम नियुक्ति है, जिसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। अपने सरल स्वभाव, मृदुभाषी व्यक्तित्व और कर्मठ कार्यशैली के लिए लोकप्रिय रहे मुंडरी की इस नई नियुक्ति से क्षेत्रवासियों में भारी उत्साह और खुशी का माहौल है। पदभार ग्रहण करने के बाद एक विशेष इंटरव्यू में, नए एसडीएम सुलेमान मुंडरी ने महुआडांड की जनता को 'जोहार' कहकर अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता क्षेत्र में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखना है, जिसे महुआडांड के शांतिपूर्ण माहौल में पूरी तरह से कायम रखा जाएगा। दूसरी बड़ी प्राथमिकता विकास कार्यों को गति देना है, जिसके लिए ब्लॉक, अंचल और अनुमंडल प्रशासन मिलकर, जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार अधिकतम प्रयास करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि आम लोगों की समस्याओं और मुख्य मुद्दों को गंभीरता से सुना जाएगा तथा जनता के सक्रिय सहयोग से ही विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। एसडीएम मुंडरी ने क्षेत्र की जनता को बेझिझक होकर अपनी बात रखने का संदेश दिया है। उन्होंने महुआडांड की आम जनता से बिना किसी संकोच के उनसे मिलने, अपनी समस्याएं रखने और क्षेत्र की बेहतरी के लिए सुझाव साझा करने का आग्रह किया है, जिससे स्थानीय समस्याओं को करीब से जानने और उनके त्वरित व उचित समाधान निकालने में मदद मिलेगी। सुलेमान मुंडरी के पदभार ग्रहण करने पर महुआडांड अनुमंडल सांसद प्रतिनिधी संजय जायसवाल, भाजपा मंडल के पश्चिमी अध्यक्ष अमित कुमार जायसवाल, पूर्वी मंडल अध्यक्ष प्रशांत सिंह, नेतरहाट होटल संघ के सर्वेश प्रसाद, विनय प्रसाद, हेमंत प्रसाद और बिट्टू प्रसाद सहित कई गणमान्य लोगों ने खुशी जाहिर की। नेतरहाट के मुखिया राम विष्णु नगेसिया, गजेंद्र किसान, तेज नारायण किसान सहित दर्जनों स्थानीय नागरिकों ने उन्हें बुके देकर बधाई दी और सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं भी दीं। क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि उनके पिछले प्रशासनिक अनुभवों और कार्यकुशलता का लाभ इस पूरे अनुमंडल को मिलेगा।1
- लातेहार जिले के लिए यह गर्व का विषय है कि बनवारी शाहू महाविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) स्वयंसेवक आयुष चौधरी का चयन भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित प्रतिष्ठित “एक भारत श्रेष्ठ भारत युवा संगम 2026” कार्यक्रम के लिए हुआ है। आयुष के इस चयन से पूरे जिले में खुशी का माहौल है और इसे युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणादायक उपलब्धि माना जा रहा है। यह राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम 25 मई 2026 से 3 जून 2026 तक मध्यप्रदेश के इंदौर स्थित Indian Institute of Technology Indore में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चयनित युवा प्रतिभागी हिस्सा लेंगे, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं के बीच सांस्कृतिक, शैक्षणिक और सामाजिक समन्वय को मजबूत कर “एक भारत श्रेष्ठ भारत” की भावना को और अधिक सशक्त बनाना है। आयुष चौधरी ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों, तकनीकी सत्रों, शैक्षणिक भ्रमण तथा नेतृत्व विकास कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। इस वर्ष कार्यक्रम का थीम “5 पी” रखा गया है, जिसमें पर्यटन, प्रौद्योगिकी, परस्पर संवाद, परंपरा और प्रगति जैसे विषय शामिल हैं। आयुष ने “शुभम संवाद” से बातचीत करते हुए बताया कि उनका चयन राज्य स्तर से आयोजित चयन प्रक्रिया के माध्यम से हुआ है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि बनवारी शाहू महाविद्यालय तथा नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय क्षेत्र से लातेहार जिले में केवल उनका ही चयन हुआ है, जो उनके लिए बेहद गर्व और सम्मान की बात है। उन्होंने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, महाविद्यालय के शिक्षकों तथा एनएसएस के पदाधिकारियों को दिया। आयुष चौधरी के पिता मनोज चौधरी कल्याण विभाग लातेहार में चालक के पद पर कार्यरत हैं और एक साधारण परिवार से आने वाले आयुष ने अपनी मेहनत और लगन से यह उपलब्धि हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। आयुष चौधरी के चयन की खबर मिलते ही उनके परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई और उनके माता-पिता ने उन्हें आशीर्वाद देकर कार्यक्रम में भाग लेने के लिए विदा किया। इस उपलब्धि पर बनवारी शाहू महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. पी.के. तिवारी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे महाविद्यालय और पूरे जिले के लिए गौरव का विषय बताया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इससे अन्य विद्यार्थियों को भी राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों में भाग लेने की प्रेरणा मिलेगी। वहीं, एनएसएस के जिला नोडल कार्यक्रम पदाधिकारी नवल किशोर प्रसाद ने आयुष की सफलता को पूरे जिले के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बताया और उम्मीद जताई कि आयुष कार्यक्रम में बेहतर प्रदर्शन कर जिले और राज्य का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करेंगे। महाविद्यालय की सचिव अंजू गुप्ता ने आयुष चौधरी को बधाई देते हुए उन्हें अनुशासित, मेहनती और प्रतिभाशाली छात्र बताया और अन्य विद्यार्थियों से भी शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक और राष्ट्रीय गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की। आयुष चौधरी की इस महत्वपूर्ण उपलब्धि से लातेहार जिले में खुशी और गर्व का माहौल है। जिले के लोगों ने इसे युवा प्रतिभा और मेहनत की मिसाल बताते हुए आयुष को शुभकामनाएं दी हैं। राष्ट्रीय स्तर के इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में भागीदारी निश्चित रूप से आयुष के अनुभव और व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी तथा आने वाले समय में जिले के अन्य युवाओं को भी नई दिशा और प्रेरणा देगी।4
- रातु के गुडू गांव में महान स्वतंत्रता सेनानी ठेबले उराँव की 68वीं पुण्यतिथि मनाने की तैयारी को लेकर एक बैठक आयोजित की गई। कुरमाली भाषा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजाराम महतो ने इस दौरान गुडू गांव का भ्रमण किया, जहाँ उन्होंने ठेबले उराँव के परिवारों से मुलाकात की और जनसंपर्क अभियान चलाया। डॉ. महतो ने 1 जून को होने वाले पुण्यतिथि समारोह की तैयारियों का जायजा लिया और बताया कि गुडू गांव में ठेबले उराँव की आदमकद प्रतिमा स्थापित की जाएगी। प्रतिमा स्थापना और ठेबले उराँव के पैतृक गांव गुडू के सर्वांगीण विकास की मांग को लेकर उनके वंशजों ने झारखंड के राज्यपाल को एक आवेदन सौंपा है। डॉ. राजाराम महतो ने अपने पत्र में यह भी बताया कि स्वतंत्रता सेनानी ठेबले उराँव स्वतंत्र भारत के प्रथम नामित सांसद थे। उन्होंने राज्यपाल से अनुरोध किया है कि झारखंड सरकार के निर्णय के अनुरूप ठेबले उराँव के पैतृक गांव गुडू रातू का सर्वांगीण विकास किया जाए और उनकी आदमकद प्रतिमा लगाई जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान से प्रेरणा प्राप्त कर सकें। पत्र में यह भी जानकारी दी गई है कि रातु अंचल के मौजा गुडू में खाता संख्या 79, प्लॉट संख्या 1, रकबा 21 डिसमिल गैर-मजरूआ जमीन को जिला प्रशासन द्वारा इस कार्य के लिए चिन्हित किया गया है। डॉ. महतो के पत्र में ठेबले उराँव के महत्वपूर्ण योगदानों का भी उल्लेख है; उन्होंने शिक्षक के रूप में अपना जीवन शुरू किया और बाद में समाज व देश सेवा में खुद को समर्पित कर दिया। उन्होंने वर्ष 1900 में छोटानागपुर उन्नति समाज की स्थापना की और उसके अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। 1908 में उन्होंने शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए लंबे समय तक प्रयास किए, 1916 में गो-रक्षा के लिए आंदोलन चलाया और 1928 में साइमन कमीशन के समक्ष झारखंड को अलग प्रांत बनाने की मांग रखी। इसके अतिरिक्त, 1931 में उन्होंने छोटानागपुर किसान सभा का गठन कर किसानों को संगठित किया और रांची विश्वविद्यालय की स्थापना में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस अवसर पर डॉ. राजाराम महतो के साथ शिवशंकर नीलकंठ महतो, नरेश महतो, भावेश मिश्रा, जीतराम लोहारा, सोहराय उरांव, टूना उरांव, बसंती उरांव और अन्य ग्रामवासी उपस्थित थे।1
- दिल्ली के लाल किला में आयोजित जनजाति संस्कृति महा संगम कार्यक्रम में झारखंड के लातेहार जिले के पोचरा, माजर गांव निवासी सत्येंद्र सिंह खेरवार ने जनजाति हित, संस्कृति और समाज के उत्थान पर एक प्रभावशाली उद्बोधन दिया। इस कार्यक्रम में देश के गृहमंत्री अमित शाह भी मंच पर उपस्थित थे, जिन्होंने सत्येंद्र सिंह की बातों को गंभीरता से सुना। अपने संबोधन के दौरान, अमित शाह ने कई बार सत्येंद्र सिंह का नाम लेकर उनके कार्यों की सराहना की, जिससे लातेहार का नाम राष्ट्रीय मंच पर गूंज उठा। सत्येंद्र सिंह ने लातेहार जैसे छोटे जिले के माजर गांव से निकलकर एक संगठन के माध्यम से अपनी राष्ट्रीय पहचान बनाई है। उनका प्रारंभिक जीवन वनवासी कल्याण केंद्र में प्रखंड संगठन मंत्री के रूप में शुरू हुआ था। इस दौरान उन्हें स्व. डॉ. आर.पी. गुप्ता और उनकी धर्मपत्नी स्व. कुंती देवी का हर कदम पर मार्गदर्शन और सहयोग मिला। आज वे राष्ट्रीय स्तर पर जनजाति समाज की एक प्रमुख आवाज बन चुके हैं। नई दिल्ली में देशभर से आए लाखों जनजाति समाज के लोगों के बीच मंच से मार्गदर्शन देना लातेहार के लिए गौरव और सौभाग्य का विषय है। एक छोटे गांव से निकलकर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाना युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। माजर भले ही एक अविकसित गांव है, लेकिन इसके निवासी आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए वर्षों जेल में रहे थे। राष्ट्र और धर्म के लिए माजर गांव सदैव आगे रहा है।1
- गुमला के सिसई थाना परिसर में बकरीद पर्व के शांतिपूर्ण आयोजन हेतु एक शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सुरेश प्रसाद यादव और अंचल पुलिस निरीक्षक गुलशन भेंगरा ने की, जिसमें पर्व को आपसी भाईचारे और शांतिपूर्ण ढंग से मनाने की अपील की गई। पुलिस प्रशासन ने लोगों से किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचने का आग्रह किया। साथ ही, सोशल मीडिया पर गलत अफवाह फैलाने वालों की पहचान कर तत्काल थाना प्रभारी को सूचना देने के निर्देश दिए गए, ताकि ऐसे व्यक्तियों पर उचित कार्रवाई की जा सके। बैठक के दौरान अंजुमन फलाहुल मुस्लेमिन संगठन सिसई ने बकरीद की नमाज़ के निर्धारित समय की जानकारी दी। बताया गया कि सिसई के आठ अलग-अलग मस्जिदों और ईदगाहों में सुबह 6:30 बजे से 8:00 बजे तक नमाज़ अदा की जाएगी। संगठन ने पशु बलि की तस्वीरें या वीडियो लेने और उन्हें सोशल मीडिया पर साझा करने पर सख्त प्रतिबंध लगाने की बात भी कही। प्रशासन ने आगामी 28 मई को मनाए जाने वाले बकरीद पर्व के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने का आश्वासन दिया। विशेष रूप से, 28 मई को बृहस्पतिवार होने के कारण सिसई प्रखंड में लगने वाले साप्ताहिक बाजार में भारी भीड़ की आशंका के मद्देनजर सड़कों पर वाहनों के आवागमन को वन-वे (एक तरफा) रखा जाएगा, ताकि जाम की स्थिति न बने और आम जनता को असुविधा न हो। इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य सिसई उत्तरी विजयलक्ष्मी कुमारी, पंसस रेखा देवी, जाकिर अली, थाना प्रभारी नीरज कुमार, एसआई अजय कुमार, जनप्रतिनिधि सुनीता कुमारी, शकुंतला देवी, बंदीराम उरांव, शांति समिति के सदस्य अंजुमन सदर सलमान अली, बैबूल अंसारी, निरंजन सिंह, तेजमोहन साहु, विपिन बिहारी झा, कैप्टन लोहरा उरांव, मनोज वर्मा, सूरज सिंह, नवल महतो, सुप्रदीप साहु सहित कई अन्य प्रबुद्ध गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।4
- आदिवासी महिलाएँ अपने अधिकारों की रक्षा के लिए दिल्ली पहुँची हैं।1
- सोमवार को बरवाडीह प्रखंड मुख्यालय के मस्जिद मोहल्ला में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब झामुमो नेता गुलाम अशगर के घर के ऊपर से गुजर रहा 11 हजार वोल्ट का हाईटेंशन बिजली तार अचानक टूटकर छत पर गिर पड़ा। गनीमत रही कि घटना के वक्त परिवार के सदस्य बाल-बाल बच गए, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तार तेज आवाज के साथ टूटा, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई और आसपास के लोग घरों से बाहर निकल आए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह हाईटेंशन तार लंबे समय से घरों के ऊपर से गुजर रहा है और इसे हटाने की मांग कई बार बिजली विभाग से की जा चुकी है, लेकिन विभाग ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। परिजनों ने बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी अनदेखी के कारण कभी भी बड़ी जनहानि हो सकती थी, क्योंकि तार काफी नीचे झूल रहा था जिससे हमेशा खतरा बना रहता था। इस घटना के बाद मोहल्ले में लोगों में भारी आक्रोश देखा गया। स्थानीय नागरिकों ने बिजली विभाग से तत्काल जर्जर तार हटाने, वैकल्पिक लाइन की व्यवस्था करने और पूरे क्षेत्र में सुरक्षा जांच अभियान चलाने की मांग की है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे विभाग के खिलाफ आंदोलन करेंगे।1
- गुमला के सिसई प्रखंड से उत्तर प्रदेश के बनारस स्थित एक ईंट भट्ठे में काम करने गए मज़दूरों के साथ अमानवीय व्यवहार, मारपीट और बकाया मजदूरी का भुगतान न किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। बनारस से वापस लौटे पीड़ित मज़दूरों ने अपनी आपबीती समाजसेवी संजय वर्मा को सुनाई, जिसके बाद उनके नेतृत्व में मज़दूरों ने श्रम विभाग गुमला में शिकायत दर्ज कराई है। सिसई के इन मज़दूरों ने बनारस के 'सागर ब्रिक्स ईंट भट्ठा' के मालिक और एक स्थानीय एजेंट पर बंधक बनाकर दिन-रात काम कराने, मारपीट करने और बाल मज़दूरी कराने के साथ-साथ तय वेतन न देने का आरोप लगाया है। पीड़ित मज़दूर सिसई के लकेया बांसटोली निवासी जगरनाथ तुरी ने बताया कि अक्टूबर 2025 में (यह तिथि मूल पाठ में दी गई है) एक स्थानीय एजेंट ने लगभग 20 मज़दूरों को 15 हज़ार रुपये मासिक वेतन का लालच देकर भट्ठे पर ले गया था, लेकिन वहां उन्हें गुज़ारे के नाम पर मात्र 1500 रुपये दिए जाते थे और उनसे कड़ी मेहनत कराई जाती थी। मज़दूरों का आरोप है कि बकाया मज़दूरी मांगने पर भट्ठा मालिक डब्लू सिंह गाली-गलौज और मारपीट करता था। उन्होंने यह भी बताया कि ईंट भट्ठे में नाबालिग बच्चों से भी जबरन काम कराया जाता था और उनके साथ भी मारपीट की जाती थी, जिससे कई मज़दूर प्रताड़ना से परेशान होकर पहले ही वहां से भाग निकले थे। जगरनाथ तुरी सहित चार मज़दूरों ने किसी तरह 6 माह 15 दिन तक वहां काम किया, जिसके बाद भट्ठा मालिक ने उन्हें भी बिना मज़दूरी दिए मारपीट कर भगा दिया। वापस लौटने के लिए पैसे न होने पर, उन्होंने किसी दूसरे ईंट भट्ठे में एक सप्ताह काम करके पैसे जुटाए और फिर सिसई लौटे। पीड़ित मज़दूरों का कहना है कि उनके चार मज़दूरों के कुल 3 लाख 90 हज़ार रुपये की मज़दूरी भट्ठा मालिक के पास बकाया है। उन्होंने श्रम अधीक्षक से भट्ठा मालिक और एजेंट के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और उनकी बकाया राशि दिलाने की मांग की है। समाजसेवी संजय वर्मा ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गुमला ज़िले के मज़दूरों के साथ दूसरे राज्यों में ऐसी अमानवीय घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिसमें मारपीट और बकाया मजदूरी न दिए जाने के मामले पहले भी डिब्रुगढ़, असम से सामने आए थे। उन्होंने इन घटनाओं के लिए स्थानीय एजेंटों को सबसे अधिक दोषी ठहराया, जो अपनी मोटी कमाई के लालच में भोले-भाले गरीब मज़दूरों को पैसे का लालच देकर दूसरे राज्यों में ले जाते हैं और उन्हें 'बेचने' का काम करते हैं। वर्मा ने बताया कि इन एजेंटों के पास मज़दूर भेजने का कोई वैध दस्तावेज़ या लाइसेंस नहीं है, फिर भी वे धड़ल्ले से ऐसे गैर-कानूनी कार्यों में लिप्त हैं, जो सीधे तौर पर मानव तस्करी से जुड़ा है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि सख्ती दिखाते हुए इन एजेंटों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।3