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ईद मुबारक!
Dinesh yadav
ईद मुबारक!
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- Post by Dinesh yadav1
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- अजीत मिश्रा (खोजी) 🚨आम आदमी की रसोई पर 'सिंडिकेट' का डाका🚨 ⭐‘आपदा में अवसर’ का खेल उल्टा पड़ा: 25 दिन की LPG सीमा ने खोली गैस एजेंसियों के काले कारनामों की पोल ⭐"सब्सिडी आपकी, सिलेंडर होटल का: बस्ती में गैस एजेंसियों ने रचा 'बुकिंग' का मायाजाल।" ⭐"हवा में उड़ी आपूर्ति! जब चूल्हा खाली था, तब आपके नाम का सिलेंडर कहाँ 'डिलीवर' हो गया?" बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश। बस्ती।। कहते हैं कि चोर कितना भी शातिर क्यों न हो, कोई न कोई सुराग छोड़ ही जाता है। एलपीजी रिफिल बुकिंग के लिए सरकार द्वारा तय की गई 25 दिनों की समय-सीमा ने गैस एजेंसियों के उस 'तिलिस्म' को तोड़ दिया है, जिसकी आड़ में वर्षों से उपभोक्ताओं के हक पर डाका डाला जा रहा था। बस्ती सहित पूरे देश में मची अफरातफरी ने यह साफ कर दिया है कि संकट गैस की किल्लत का नहीं, बल्कि नीयत की खोट का है। 💫डिजिटल स्ट्राइक से बेनकाब हुआ 'ब्लैक' का खेल अब तक बिना किसी सख्त समय-सीमा के खेल चल रहा था। एजेंसी संचालक उपभोक्ताओं के नाम पर फर्जी बुकिंग कर सिलेंडर होटल, ढाबों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को ऊंचे दामों पर बेच रहे थे। लेकिन जैसे ही '25 दिन का नियम' लागू हुआ, यह सिंडिकेट अपने ही जाल में फंस गया। जब असली उपभोक्ता ने सिलेंडर बुक करना चाहा, तो स्क्रीन पर चमकते "Already Booked" के संदेश ने भ्रष्टाचार की पूरी कहानी बयां कर दी। 💫डेटा बनाम हकीकत: कहां गया आम आदमी का गैस? एजेंसियों के बाहर लगी लंबी कतारें और उपभोक्ताओं का आक्रोश जायज है। चौंकाने वाली बात यह है कि कंपनियों के सर्वर पर जो सिलेंडर 'डिलीवर' दिखाए जा रहे हैं, वे कभी उपभोक्ता के घर पहुंचे ही नहीं। 💫सवाल यह है: अगर सिलेंडर उपभोक्ता को नहीं मिला, तो वह गया कहां? 💫जवाब साफ है: बिचौलियों की मिलीभगत से घरेलू सब्सिडी का सिलेंडर व्यावसायिक भट्ठियों में झोंक दिया गया। "यह महज तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि एक संगठित आर्थिक अपराध है। जब डेटा बोलता है कि सिलेंडर बिक चुका है और उपभोक्ता कहता है कि चूल्हा ठंडा है, तो समझ लीजिए कि बीच की मलाई कोई और खा गया है।" 💫अब कार्रवाई की दरकार प्रशासन और खाद्य रसद विभाग को केवल तमाशबीन नहीं बने रहना चाहिए। यह समय है कि उन एजेंसियों का स्टॉक ऑडिट किया जाए और सर्वर डेटा का मिलान भौतिक सत्यापन से हो। 'डिजिटल इंडिया' के दौर में अगर कालाबाजारी की यह तकनीक अपनाई जा रही है, तो दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई होनी चाहिए। 💫उपभोक्ता क्या करें? यदि आपके साथ भी ऐसा हुआ है, तो चुप न बैठें: 👉शिकायत दर्ज करें: तुरंत आधिकारिक हेल्पलाइन या पोर्टल पर 'अनधिकृत बुकिंग' की रिपोर्ट करें। 👉सबूत जुटाएं: अपने मोबाइल पर आए मैसेज का स्क्रीनशॉट रखें। 👉विधिक कदम: जिला आपूर्ति अधिकारी (DSO) को लिखित शिकायत दें।1
- Post by Anand Kumar Scrap Merchant1
- Post by Ramnath chauhan1
- आकाशवनी , 21 -3-2026 ई0', आज शानीवार है। शानीवर के दिन भगवान शनी देव को समर्पित माना जाता है। नवरात्रि का आज तीसरा दिन है। माता चंद्रघंटा की पूजा अराधना किया जता है। मित्रों ! सो कर उठ गए हो ,तो आइए! भगवान शनी को प्रनाम करते हुऎ , माता रानी के चरणों में सिर झुकाते हुऎ, अपने मुरू का ध्यान करते हुऎ , 👉🏾विघ्नहर्ता का स्मरण करते हुए , आज के दिन चर्या प्रारंभ करते हैं! 🙏1
- Post by Vipin Rai Journalist1
- अजीत मिश्रा (खोजी) फर्रुखाबाद।। उत्तर प्रदेश पुलिस जहाँ एक ओर अपनी छवि सुधारने और 'जीरो टॉलरेंस' की नीति का दम भर रही है, वहीं फर्रुखाबाद के कायमगंज थाने से आए एक वीडियो ने पुलिस विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ की महिला उपनिरीक्षक (SI) सुधा पाल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें न्याय की रक्षक ही 'भ्रष्टाचार' की पटकथा लिखती नजर आ रही हैं। ⭐वीडियो में कैद हुई सौदेबाजी वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि दारोगा सुधा पाल पहले थाने के ड्राइवर से एकांत में कुछ गुप्त मंत्रणा करती हैं। इसके तुरंत बाद, वही ड्राइवर दारोगा का हवाला देते हुए एक तीसरे पक्ष से सरेआम ₹7,000 की रिश्वत वसूलता है। यह पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई, जिसने यह साबित कर दिया कि थाने की चौखट पर न्याय बिक रहा है। ⭐SP की त्वरित कार्रवाई: दारोगा सस्पेंड वीडियो के संज्ञान में आते ही जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कड़ा रुख अपनाया है। भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरीं सुधा पाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। विभाग की ओर से इस मामले की विभागीय जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं। ⭐जनता का भरोसा डगमगाया कायमगंज की इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या पुलिस की वर्दी अब सेवा के बजाय 'उगाही' का माध्यम बन गई है? जब थाने के भीतर ही भ्रष्टाचार के सिंडिकेट चल रहे हों, तो आम आदमी न्याय की उम्मीद किससे करे? "भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी नीति स्पष्ट है। किसी भी दोषी पुलिसकर्मी को बख्शा नहीं जाएगा। वीडियो की जांच के आधार पर निलंबन की कार्रवाई की गई है और आगे की जांच जारी है।"— पुलिस प्रशासन, फर्रुखाबाद1