शामली के झिंझाना कस्बे में आगामी उर्स मेले की तैयारियां शुरू होते ही एक बार फिर पुराना विवाद गरमाने लगा है। प्रशासन की कथित अनदेखी और मेले के लिए उचित स्थान के अभाव में इस बार भी कब्रिस्तान की जमीन और कब्रों के ठीक ऊपर ही दुकानें तथा भारी-भरकम झूले सजाए जा रहे हैं। इससे कब्रों में दफ्न अपने परिजनों की बेकद्री से आहत लोगों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय लोगों और परिजनों का आरोप है कि उर्स मेले में हर साल लाखों की संख्या में जायरीन और आम लोग पहुंचते हैं, और उचित जगह न होने के कारण पूरा मेला कब्रों के बीच और उनके ऊपर ही समेट दिया जाता है। मेले के दौरान कब्रों को पैरों तले कुचला जाता है, जिससे उनकी पवित्रता और सम्मान पूरी तरह नष्ट हो जाता है। परिजनों ने दर्द व्यक्त करते हुए कहा कि, “हमारे पूर्वज और परिजन यहाँ सुपुर्द-ए-खाक हैं। उनकी कब्रों पर झूले लगाना और दुकानों का कचरा फेंकना सरासर हमारी आस्था और मानवीय संवेदनाओं के साथ खिलवाड़ है। प्रशासन को इस पर तुरंत रोक लगानी चाहिए।” विवाद का एक बड़ा कारण मेले के दौरान और उसके बाद फैलने वाली गंदगी भी है। लाखों की भीड़ के कारण भारी मात्रा में प्लास्टिक, जूठन और अन्य कचरा सीधे कब्रों के ऊपर और आसपास फेंक दिया जाता है। मेले के समापन के बाद कई दिनों तक कब्रिस्तान की स्थिति दयनीय बनी रहती है, जिससे स्थानीय मुस्लिम समाज और मृत आत्माओं के परिजनों की भावनाएं आहत होती हैं। उचित व्यवस्था न होने के कारण हर साल इस मुद्दे को लेकर तनाव की स्थिति बनी रहती है, और इस बार भी कब्रों पर झूले सजते देख परिजनों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने जिला प्रशासन और पुलिस से मांग की है कि मेले के आयोजन के लिए कब्रिस्तान से दूर कोई वैकल्पिक स्थान चिन्हित किया जाए, कब्रिस्तान की पवित्रता बनाए रखने के लिए वहां बैरिकेडिंग की जाए ताकि कब्रों पर पैर न पड़ें, और स्वच्छता तथा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएं ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति या सांप्रदायिक तनाव से बचा जा सके। चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते प्रशासन ने इस गंभीर विषय पर संज्ञान नहीं लिया, तो आस्था के नाम पर हो रही इस बेकद्री के चलते कस्बे में विवाद और बड़ा रूप ले सकता है।
शामली के झिंझाना कस्बे में आगामी उर्स मेले की तैयारियां शुरू होते ही एक बार फिर पुराना विवाद गरमाने लगा है। प्रशासन की कथित अनदेखी और मेले के लिए उचित स्थान के अभाव में इस बार भी कब्रिस्तान की जमीन और कब्रों के ठीक ऊपर ही दुकानें तथा भारी-भरकम झूले सजाए जा रहे हैं। इससे कब्रों में दफ्न अपने परिजनों की बेकद्री से आहत लोगों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय लोगों और परिजनों का आरोप है कि उर्स मेले में हर साल लाखों की संख्या में जायरीन और आम लोग पहुंचते हैं, और उचित जगह
न होने के कारण पूरा मेला कब्रों के बीच और उनके ऊपर ही समेट दिया जाता है। मेले के दौरान कब्रों को पैरों तले कुचला जाता है, जिससे उनकी पवित्रता और सम्मान पूरी तरह नष्ट हो जाता है। परिजनों ने दर्द व्यक्त करते हुए कहा कि, “हमारे पूर्वज और परिजन यहाँ सुपुर्द-ए-खाक हैं। उनकी कब्रों पर झूले लगाना और दुकानों का कचरा फेंकना सरासर हमारी आस्था और मानवीय संवेदनाओं के साथ खिलवाड़ है। प्रशासन को इस पर तुरंत रोक लगानी चाहिए।” विवाद का एक बड़ा कारण मेले के दौरान और उसके बाद फैलने वाली गंदगी भी
है। लाखों की भीड़ के कारण भारी मात्रा में प्लास्टिक, जूठन और अन्य कचरा सीधे कब्रों के ऊपर और आसपास फेंक दिया जाता है। मेले के समापन के बाद कई दिनों तक कब्रिस्तान की स्थिति दयनीय बनी रहती है, जिससे स्थानीय मुस्लिम समाज और मृत आत्माओं के परिजनों की भावनाएं आहत होती हैं। उचित व्यवस्था न होने के कारण हर साल इस मुद्दे को लेकर तनाव की स्थिति बनी रहती है, और इस बार भी कब्रों पर झूले सजते देख परिजनों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने जिला प्रशासन और पुलिस से
मांग की है कि मेले के आयोजन के लिए कब्रिस्तान से दूर कोई वैकल्पिक स्थान चिन्हित किया जाए, कब्रिस्तान की पवित्रता बनाए रखने के लिए वहां बैरिकेडिंग की जाए ताकि कब्रों पर पैर न पड़ें, और स्वच्छता तथा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएं ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति या सांप्रदायिक तनाव से बचा जा सके। चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते प्रशासन ने इस गंभीर विषय पर संज्ञान नहीं लिया, तो आस्था के नाम पर हो रही इस बेकद्री के चलते कस्बे में विवाद और बड़ा रूप ले सकता है।
- लोगों ने अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें उन्होंने एक मेले को रोकने की मांग की है। इस शिकायत के बाद अब सभी की नजरें प्रशासन के आगामी फैसले पर टिकी हुई हैं।1
- भोजपुर, बिहार से आ रही जानकारी के अनुसार, भरत तिवारी का पहले सरेंडर के बाद भी एनकाउंटर हुआ था। अब इस मामले में उनके पिता और भाई पर भी एफआईआर दर्ज कर ली गई है।1
- जनपद शामली के थानाभवन थाना क्षेत्र के ग्राम नांगल में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ पाँच परिवारों ने एक दबंग पड़ोसी पर रास्ता बंद करने का आरोप लगाते हुए अपने ही मकानों पर 'पलायन को मजबूर' होने के बैनर लगा दिए हैं। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि गाँव के दबंग श्याम सिंह ने कब्जे की नीयत से उनके पुश्तैनी रास्ते पर मलबा डालकर उसे पूरी तरह बंद कर दिया है, जिससे इन परिवारों का घर से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया है। पीड़ित दीपक पुत्र सेवाराम और उनके परिवार के सदस्य, जिनमें देवेंद्र, जोगिंदर, प्रमोद और बिजेंद्र शामिल हैं, पिछले कई वर्षों से लगभग 16 वर्गगज की एक साझा गैलरी को अपने घरों तक पहुँचने के मुख्य मार्ग के रूप में इस्तेमाल करते आ रहे थे। परिवार के अनुसार, इस गैलरी के ऊपर की पुरानी और जर्जर छत अचानक गिर गई, जिससे रास्ता मलबे से भर गया। दीपक का आरोप है कि उन्हें मलबा हटाने और रास्ता साफ करने नहीं दिया गया, जिससे पाँच परिवारों का एकमात्र रास्ता बंद हो गया। इसके कारण बच्चों को स्कूल भेजने, बाजार जाने और अन्य दैनिक कार्यों में भारी परेशानी हो रही है, जिसका सबसे अधिक असर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है। परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि रास्ता खुलवाने की मांग करने पर उन्हें धमकियाँ दी जा रही हैं। पीड़ित परिवार का कहना है कि वे दबंग आरोपी श्याम सिंह की कथित दबंगई से पिछले लगभग 10 महीनों से परेशान हैं। उन्होंने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक समेत कई आला अधिकारियों को प्रार्थना पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। मीडिया से बात करते हुए दीपक ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उनका परिवार गाँव छोड़ने को मजबूर हो जाएगा, क्योंकि रास्ता बंद होने से उनका सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है और वे मानसिक तनाव में रह रहे हैं। परिवार की एक महिला सदस्य पिंकी ने भी मीडिया के सामने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि संबंधित अधिकारियों से शिकायत के बावजूद समस्या बनी हुई है। गाँव में पलायन का बैनर लगने के बाद यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। अब लोगों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं और सभी को इंतजार है कि आखिर पीड़ित परिवार को कब राहत मिलेगी तथा वर्षों पुराने रास्ते का यह विवाद किस प्रकार सुलझाया जाएगा।1
- जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अवि मुक्तेश्वरानंद ने सरकार पर तीखा हमला बोला है, जहाँ उन्होंने सवाल उठाया कि "हमारा वोट लेकर माता की बोटी क्यों?" यह बयान तब आया जब वे अपनी गौ रक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा लेकर शामली के थाना भवन पहुंचे थे। इस दौरान, शंकराचार्य ने सरकार पर 'कालनेमि वाले बयान' को लेकर भी फिर से पलटवार किया। उनका यह प्रश्न सरकार की नीतियों और गौ रक्षा के प्रति उसकी कथित निष्क्रियता पर सीधा आरोप दर्शाता है।1
- हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति (SC) विभाग में कृष्ण कुटेल को कार्यकारी चेयरमैन नियुक्त किया गया है।1
- बुढाना तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान कितनी शिकायतें दर्ज की गईं, यह एक प्रमुख सवाल बना हुआ है। लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि इस दौरान क्या मुद्दे उठाए गए और जनता ने अपनी क्या परेशानियाँ साझा कीं, तथा इस पूरे मामले में क्या मुख्य बातें सामने आईं।1
- जय श्री श्याम जय चिल्काना धाम बाबा मंदिर में देश और विदेशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँचते हैं। यह मंदिर भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है जहाँ विभिन्न स्थानों से लोग दर्शन के लिए आते हैं।1
- जनपद शामली के थानाभवन थाना क्षेत्र के ग्राम नांगल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ पाँच परिवारों ने एक दबंग पड़ोसी पर पुश्तैनी रास्ता बंद करने का आरोप लगाते हुए अपने मकानों पर 'पलायन को मजबूर' होने के बैनर लगा दिए हैं। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि गाँव के दबंग श्याम सिंह ने कब्जे की नीयत से उनके वर्षों पुराने पुश्तैनी रास्ते पर मलबा डालकर उसे बंद कर दिया है। न्याय के लिए आला अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद कोई समाधान न निकलने पर, इन परिवारों ने गाँव छोड़ने की चेतावनी देते हुए यह कदम उठाया है, जिससे यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। पीड़ित परिवार के सदस्य दीपक पुत्र सेवाराम और उनके साथ देवेन्द्र, जोगिन्द्र, प्रमोद, बिजेन्द्र समेत पाँच परिवार एक साझा गैलरी के रास्ते से अपने घरों तक आते-जाते रहे हैं, जो लगभग 16 वर्गगज की बताई जा रही है और उनके लिए मुख्य मार्ग रही है। परिवार ने बताया कि गैलरी के ऊपर की पुरानी और जर्जर छत अचानक भरभराकर गिर गई, जिससे पूरा रास्ता मलबे से भर गया और आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया। दीपक का आरोप है कि रास्ते से मलबा हटाने के कई प्रयासों को रोका गया और उन्हें ऐसा नहीं करने दिया गया। पीड़ित परिवार का कहना है कि श्याम सिंह ने कथित तौर पर इस मलबे को हटाने नहीं दिया और उलटा और मलबा डलवाकर रास्ते को पूरी तरह से बंद कर दिया है, जिससे वे अपनी दबंगई के बल पर इस आम रास्ते पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। इन पाँच परिवारों को पिछले लगभग 10 महीनों से आरोपी श्याम सिंह की कथित दबंगई के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, और रास्ता खुलवाने की माँग करने पर उन्हें धमकियाँ भी दी जा रही हैं। इस स्थिति के कारण पाँच परिवारों का एकमात्र रास्ता बंद हो गया है, जिससे घर से निकलना, बच्चों को स्कूल भेजना, बाजार जाना और अन्य जरूरी कार्य करना मुश्किल हो गया है। परिवार का कहना है कि बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ रहा है, जिससे उनका सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो चुका है और वे मानसिक तनाव में रह रहे हैं। मीडिया से बातचीत में दीपक ने समस्या के जल्द समाधान न होने पर गाँव छोड़ने की बात कही, वहीं परिवार की महिला सदस्य पिंकी अपनी व्यथा सुनाते हुए भावुक हो गईं और उन्होंने अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है। पीड़ित परिवारों ने जिला प्रशासन के आला अधिकारियों, जिसमें डीएम और एसपी शामिल हैं, को प्रार्थना पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। वे केवल अपने घरों तक आने-जाने का रास्ता खुलवाने और रास्ते में पड़े मलबे को तत्काल हटवाकर वर्षों पुराने आम रास्ते को बहाल कराने की मांग कर रहे हैं। अब ग्रामीणों सहित सभी की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं कि आखिर इन पीड़ित परिवारों को कब राहत मिलेगी और यह वर्षों पुराना विवाद किस प्रकार सुलझाया जाएगा।1