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पड़वार में जमीनी विवाद ने लिया हिंसक रूप जमकर चले लाठी डंडे पुलिस ने किया मामला दर्ज *जमीनी विवाद को लेकर दोनों पक्ष आपस में भिड़े लाठी डंडों से की मारपीट-अमरपुर चौकी में मामला दर्ज।* उमरिया जिले के इंदवार थाना क्षेत्र अंतर्गत अमरपुर चौकी के ग्राम पड़वार में जमीनी विवाद में चले लाठी-डंडे ग्राम पंचायत पड़वार में जमीनी विवाद ने हिंसक रूप ले लिया गांव के ही लवकुश जायसवाल और शिवकुमार जायसवाल ने लाठी-डंडों से अपने पड़ोसी बसंत जायसवाल, विमला जायसवाल, बुजुर्ग रामकरण और पूजा जायसवाल पर हमला कर दिया। वही दोनों पक्षों ने अमरपुर चौकी में अपनी रिपोर्ट दर्ज कराई है मामले को गंभीरता से लेते हुए अमरपुर चौकी प्रभारी अभिलाष सिंह ने प्राथमिक दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

8 hrs ago
user_Ashutosh tripathi
Ashutosh tripathi
Court reporter मानपुर, उमरिया, मध्य प्रदेश•
8 hrs ago

पड़वार में जमीनी विवाद ने लिया हिंसक रूप जमकर चले लाठी डंडे पुलिस ने किया मामला दर्ज *जमीनी विवाद को लेकर दोनों पक्ष आपस में भिड़े लाठी डंडों से की मारपीट-अमरपुर चौकी में मामला दर्ज।* उमरिया जिले के इंदवार थाना क्षेत्र अंतर्गत अमरपुर चौकी के ग्राम पड़वार में जमीनी विवाद में चले लाठी-डंडे ग्राम पंचायत पड़वार में जमीनी विवाद ने हिंसक रूप ले लिया गांव के ही लवकुश जायसवाल और शिवकुमार जायसवाल ने लाठी-डंडों से अपने पड़ोसी बसंत जायसवाल, विमला जायसवाल, बुजुर्ग रामकरण और पूजा जायसवाल पर हमला कर दिया। वही दोनों पक्षों ने अमरपुर चौकी में अपनी रिपोर्ट दर्ज कराई है मामले को गंभीरता से लेते हुए अमरपुर चौकी प्रभारी अभिलाष सिंह ने प्राथमिक दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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  • *जमीनी विवाद को लेकर दोनों पक्ष आपस में भिड़े लाठी डंडों से की मारपीट-अमरपुर चौकी में मामला दर्ज।* उमरिया जिले के इंदवार थाना क्षेत्र अंतर्गत अमरपुर चौकी के ग्राम पड़वार में जमीनी विवाद में चले लाठी-डंडे ग्राम पंचायत पड़वार में जमीनी विवाद ने हिंसक रूप ले लिया गांव के ही लवकुश जायसवाल और शिवकुमार जायसवाल ने लाठी-डंडों से अपने पड़ोसी बसंत जायसवाल, विमला जायसवाल, बुजुर्ग रामकरण और पूजा जायसवाल पर हमला कर दिया। वही दोनों पक्षों ने अमरपुर चौकी में अपनी रिपोर्ट दर्ज कराई है मामले को गंभीरता से लेते हुए अमरपुर चौकी प्रभारी अभिलाष सिंह ने प्राथमिक दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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    *जमीनी विवाद को लेकर दोनों पक्ष आपस में भिड़े लाठी डंडों से की मारपीट-अमरपुर चौकी में मामला दर्ज।*
उमरिया जिले के इंदवार थाना क्षेत्र अंतर्गत अमरपुर चौकी के ग्राम पड़वार में जमीनी विवाद में चले लाठी-डंडे  ग्राम पंचायत पड़वार में जमीनी विवाद ने हिंसक रूप ले लिया गांव के ही लवकुश जायसवाल और शिवकुमार जायसवाल ने लाठी-डंडों से अपने पड़ोसी बसंत जायसवाल, विमला जायसवाल, बुजुर्ग रामकरण और पूजा जायसवाल पर हमला कर दिया। वही दोनों पक्षों ने अमरपुर चौकी में अपनी रिपोर्ट दर्ज कराई है मामले को गंभीरता से लेते हुए अमरपुर चौकी प्रभारी अभिलाष सिंह ने प्राथमिक दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
    user_Ashutosh tripathi
    Ashutosh tripathi
    Court reporter मानपुर, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • बाघों की दहलीज पर खड़ा कैलाश वॉटर पार्क प्रधान मुख्य वन संरक्षक के आदेश को ठेगा दिखा रहा वॉटर पार्क रसूख के आगे नतमस्तक उमरिया प्रशासन उमरिया// विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, जो अपनी गर्जना और प्राकृतिक शांति के लिए जाना जाता है, आज भ्रष्टाचार के शोर और अवैध निर्माण की जद में है। उमरिया के ग्राम महामन में स्थित कैलाश वॉटर पार्क वन्यजीव संरक्षण अधिनियमों की धज्जियां उड़ाते हुए न केवल सीना ताने खड़ा है, बल्कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) भोपाल के स्पष्ट निर्देशों को भी बौना साबित कर रहा है। आखिर वो कौन सी अदृश्य शक्ति है, जिसके संरक्षण में यह वॉटर पार्क इको-सेंसिटिव जोन के नियमों को पैरों तले रौंद रहा है। नियमों की कब्र पर खड़ा कैलाश का साम्राज्य सरकारी दस्तावेजों की पड़ताल से एक चौंकाने वाला सच सामने आया है। भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 13.12.2016 को जारी अधिसूचना के बिंदु क्रमांक 4(11)(क) के अनुसार, संरक्षित क्षेत्र की सीमा से 01 किलोमीटर के भीतर किसी भी प्रकार का नया वाणिज्यिक निर्माण पूर्णत: प्रतिबंधित है, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि कैलाश वॉटर पार्क की पक्की बाउंड्री वॉल बांधवगढ़ के खितौली कोर परिक्षेत्र से महज 10 से 12 मीटर की दूरी पर पाई गई है। यह सीधे तौर पर बाघों के घर में अनधिकृत घुसपैठ है। पीसीसीएफ की रिपोर्ट ने खोली पोल भोपाल मुख्यालय से जारी प्रतिवेदन ने इस पूरे खेल का पर्दाफाश कर दिया है। विभाग के अभिमत में स्पष्ट लिखा है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उप संचालक को इस मामले में अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने का कानूनी अधिकार ही नहीं था। नियमत: इस प्रकरण को इको सेंसिटिव जोन की निगरानी समिति के समक्ष रखा जाना अनिवार्य था, जिसे दरकिनार कर दिया गया। वॉटर पार्क से निकलने वाले प्रदूषित पानी को नजरअंदाज करते हुए इसे प्रदूषण न फैलाने वाले उद्योग की श्रेणी में रखकर गुमराह किया गया। वन्यजीवों के लिए धीमा जहर दस्तावेजों में स्पष्ट उल्लेख है कि वॉटर पार्क में पानी के निस्तार के पूर्व जल उपचार संयंत्र का सही ढंग से संचालन और उसकी अनुमति आवश्यक है। पार्क से निकलने वाला क्लोरीन युक्त और प्रदूषित पानी सीधे तौर पर क्षेत्र के भूजल और वन्यजीवों के जल स्रोतों को जहरीला बना रहा है। क्या विभाग किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहा है? जब बाघों की दहलीज पर इस तरह का वॉटर वेस्ट बहेगा, तो पारिस्थितिक तंत्र का विनाश निश्चित है। शैलानियों की जान से खिलवाड़ और शांति भंग टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र से मात्र चंद मीटर की दूरी पर वॉटर पार्क का संचालन न केवल वन्यजीवों की शांति भंग कर रहा है, बल्कि वहां आने वाले शैलानियों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता है। शोर-शराबे और मानवीय दखल से विचलित होकर यदि कोई हिंसक वन्यजीव इंसानी बस्ती या पार्क की ओर रुख करता है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? सिस्टम के मुंह पर तमाचा प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय ने 14 अगस्त 2025 को अपने प्रतिवेदन में साफ कर दिया कि यह निर्माण नियमों के विरुद्ध है और आवश्यक कार्यवाही हेतु फाइल आगे बढ़ाई गई है। बावजूद इसके, वॉटर पार्क का पुन: शुरू होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। स्थानीय ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि अगर एक गरीब अपनी जमीन पर झोपड़ी बनाए तो वन विभाग डंडा लेकर पहुंच जाता है, लेकिन टाइगर रिजर्व की नाक के नीचे करोड़ों का वॉटर पार्क फल-फूल रहा है और अधिकारी फाइल-फाइल खेल रहे हैं। कैलाश वॉटर पार्क केवल एक निर्माण नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का जीता-जागता स्मारक है। यदि तत्काल प्रभाव से इस पर ताला नहीं जड़ा गया और जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज नहीं गिरी, तो वह दिन दूर नहीं जब बांधवगढ़ की पहचान केवल कागजों तक सीमित रह जाएगी।
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    बाघों की दहलीज पर खड़ा कैलाश वॉटर पार्क  
प्रधान मुख्य वन संरक्षक के आदेश को ठेगा दिखा रहा वॉटर पार्क 
रसूख के आगे नतमस्तक उमरिया प्रशासन
उमरिया// विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, जो अपनी गर्जना और प्राकृतिक शांति के लिए जाना जाता है, आज भ्रष्टाचार के शोर और अवैध निर्माण की जद में है। उमरिया के ग्राम महामन में स्थित कैलाश वॉटर पार्क वन्यजीव संरक्षण अधिनियमों की धज्जियां उड़ाते हुए न केवल सीना ताने खड़ा है, बल्कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) भोपाल के स्पष्ट निर्देशों को भी बौना साबित कर रहा है। आखिर वो कौन सी अदृश्य शक्ति है, जिसके संरक्षण में यह वॉटर पार्क इको-सेंसिटिव जोन के नियमों को पैरों तले रौंद रहा है। 
नियमों की कब्र पर खड़ा कैलाश का साम्राज्य
सरकारी दस्तावेजों की पड़ताल से एक चौंकाने वाला सच सामने आया है। भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 13.12.2016 को जारी अधिसूचना के बिंदु क्रमांक 4(11)(क) के अनुसार, संरक्षित क्षेत्र की सीमा से 01 किलोमीटर के भीतर किसी भी प्रकार का नया वाणिज्यिक निर्माण पूर्णत: प्रतिबंधित है, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि कैलाश वॉटर पार्क की पक्की बाउंड्री वॉल बांधवगढ़ के खितौली कोर परिक्षेत्र से महज 10 से 12 मीटर की दूरी पर पाई गई है। यह सीधे तौर पर बाघों के घर में अनधिकृत घुसपैठ है।
पीसीसीएफ की रिपोर्ट ने खोली पोल
भोपाल मुख्यालय से जारी प्रतिवेदन ने इस पूरे खेल का पर्दाफाश कर दिया है। विभाग के अभिमत में स्पष्ट लिखा है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उप संचालक को इस मामले में अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने का कानूनी अधिकार ही नहीं था। नियमत: इस प्रकरण को इको सेंसिटिव जोन की निगरानी समिति के समक्ष रखा जाना अनिवार्य था, जिसे दरकिनार कर दिया गया। वॉटर पार्क से निकलने वाले प्रदूषित पानी को नजरअंदाज करते हुए इसे प्रदूषण न फैलाने वाले उद्योग की श्रेणी में रखकर गुमराह किया गया।
वन्यजीवों के लिए धीमा जहर
दस्तावेजों में स्पष्ट उल्लेख है कि वॉटर पार्क में पानी के निस्तार के पूर्व जल उपचार संयंत्र का सही ढंग से संचालन और उसकी अनुमति आवश्यक है। पार्क से निकलने वाला क्लोरीन युक्त और प्रदूषित पानी सीधे तौर पर क्षेत्र के भूजल और वन्यजीवों के जल स्रोतों को जहरीला बना रहा है। क्या विभाग किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहा है? जब बाघों की दहलीज पर इस तरह का वॉटर वेस्ट बहेगा, तो पारिस्थितिक तंत्र का विनाश निश्चित है।
शैलानियों की जान से खिलवाड़ और शांति भंग
टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र से मात्र चंद मीटर की दूरी पर वॉटर पार्क का संचालन न केवल वन्यजीवों की शांति भंग कर रहा है, बल्कि वहां आने वाले शैलानियों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता है। शोर-शराबे और मानवीय दखल से विचलित होकर यदि कोई हिंसक वन्यजीव इंसानी बस्ती या पार्क की ओर रुख करता है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?
सिस्टम के मुंह पर तमाचा
प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय ने 14 अगस्त 2025 को अपने प्रतिवेदन में साफ कर दिया कि यह निर्माण नियमों के विरुद्ध है और आवश्यक कार्यवाही हेतु फाइल आगे बढ़ाई गई है। बावजूद इसके, वॉटर पार्क का पुन: शुरू होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। स्थानीय ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि अगर एक गरीब अपनी जमीन पर झोपड़ी बनाए तो वन विभाग डंडा लेकर पहुंच जाता है, लेकिन टाइगर रिजर्व की नाक के नीचे करोड़ों का वॉटर पार्क फल-फूल रहा है और अधिकारी फाइल-फाइल खेल रहे हैं। कैलाश वॉटर पार्क केवल एक निर्माण नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का जीता-जागता स्मारक है। यदि तत्काल प्रभाव से इस पर ताला नहीं जड़ा गया और जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज नहीं गिरी, तो वह दिन दूर नहीं जब बांधवगढ़ की पहचान केवल कागजों तक सीमित रह जाएगी।
    user_Neeraj Singh Raghuvanshi
    Neeraj Singh Raghuvanshi
    बांधवगढ़, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • क्रेशर के पास तेंदुए की आहट से गांव में दहशत, सड़क किनारे दिखा और जंगल में हुआ ओझल उमरिया तपस गुप्ता जिले के नौरोजाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम पोड़ी में गुरुवार शाम उस समय हड़कंप मच गया जब गांव के पास संचालित क्रेशर के नजदीक तेंदुआ दिखाई देने की खबर फैल गई। ग्रामीणों के अनुसार शाम करीब 4:30 बजे कुछ लोगों ने सड़क के किनारे तेंदुए को देखा, जिसके बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि तेंदुआ कुछ देर के लिए सड़क के पास दिखाई दिया। आसपास मौजूद लोगों ने जैसे ही उसे देखा, शोर मचाया और दूर से ही उसे देखने लगे। लोगों की हलचल बढ़ती देख तेंदुआ कुछ ही देर में जंगल की ओर चला गया। हालांकि वह ज्यादा देर तक वहां नहीं रुका, लेकिन उसकी मौजूदगी ने गांव के लोगों को डरा दिया। तेंदुआ दिखने की खबर कुछ ही समय में पूरे पोड़ी गांव में फैल गई। खबर सुनते ही कई ग्रामीण मौके की ओर पहुंच गए और आसपास के क्षेत्र में हलचल बढ़ गई। बच्चों और महिलाओं में खासा डर देखने को मिला। एहतियात के तौर पर ग्रामीणों ने बच्चों को घर से बाहर न निकलने की सलाह दी और मवेशियों को भी सुरक्षित स्थानों पर बांध दिया। ग्रामीणों का कहना है कि क्रेशर के आसपास घना जंगल है, जिसके कारण जंगली जानवर अक्सर इस इलाके में आ जाते हैं। हालांकि तेंदुए का सड़क के इतने पास दिखाई देना लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है। ग्रामीणों ने वन विभाग से इलाके में गश्त बढ़ाने और निगरानी रखने की मांग की है। वहीं इस संबंध में वन परीक्षित अधिकारी पीयूष त्रिपाठी ने बताया कि इस क्षेत्र में पहले भी तेंदुए के मूवमेंट की जानकारी मिलती रही है। हालांकि गुरुवार को तेंदुआ दिखने की सूचना विभाग को आधिकारिक रूप से प्राप्त नहीं हुई है। फिलहाल तेंदुए के दिखाई देने की खबर से पोड़ी गांव और आसपास के क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ गई है और ग्रामीण सावधानी बरत रहे हैं।
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    क्रेशर के पास तेंदुए की आहट से गांव में दहशत, सड़क किनारे दिखा और जंगल में हुआ ओझल
उमरिया तपस गुप्ता 
जिले के नौरोजाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम पोड़ी में गुरुवार शाम उस समय हड़कंप मच गया जब गांव के पास संचालित क्रेशर के नजदीक तेंदुआ दिखाई देने की खबर फैल गई। ग्रामीणों के अनुसार शाम करीब 4:30 बजे कुछ लोगों ने सड़क के किनारे तेंदुए को देखा, जिसके बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि तेंदुआ कुछ देर के लिए सड़क के पास दिखाई दिया। आसपास मौजूद लोगों ने जैसे ही उसे देखा, शोर मचाया और दूर से ही उसे देखने लगे। लोगों की हलचल बढ़ती देख तेंदुआ कुछ ही देर में जंगल की ओर चला गया। हालांकि वह ज्यादा देर तक वहां नहीं रुका, लेकिन उसकी मौजूदगी ने गांव के लोगों को डरा दिया।
तेंदुआ दिखने की खबर कुछ ही समय में पूरे पोड़ी गांव में फैल गई। खबर सुनते ही कई ग्रामीण मौके की ओर पहुंच गए और आसपास के क्षेत्र में हलचल बढ़ गई। बच्चों और महिलाओं में खासा डर देखने को मिला। एहतियात के तौर पर ग्रामीणों ने बच्चों को घर से बाहर न निकलने की सलाह दी और मवेशियों को भी सुरक्षित स्थानों पर बांध दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि क्रेशर के आसपास घना जंगल है, जिसके कारण जंगली जानवर अक्सर इस इलाके में आ जाते हैं। हालांकि तेंदुए का सड़क के इतने पास दिखाई देना लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है। ग्रामीणों ने वन विभाग से इलाके में गश्त बढ़ाने और निगरानी रखने की मांग की है।
वहीं इस संबंध में वन परीक्षित अधिकारी पीयूष त्रिपाठी ने बताया कि इस क्षेत्र में पहले भी तेंदुए के मूवमेंट की जानकारी मिलती रही है। हालांकि गुरुवार को तेंदुआ दिखने की सूचना विभाग को आधिकारिक रूप से प्राप्त नहीं हुई है। 
फिलहाल तेंदुए के दिखाई देने की खबर से पोड़ी गांव और आसपास के क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ गई है और ग्रामीण सावधानी बरत रहे हैं।
    user_Tapas Gupta
    Tapas Gupta
    पाली, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • उमरिया जिले के बरबसपुर क्षेत्र में जल संरक्षण को लेकर बड़ा कदम उठाया गया। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत कछली नदी में बोरी बंधान (रेत की बोरियों से अस्थायी बांध) बनाया गया। इस अभियान में प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर श्रमदान किया। बोरी बंधान बनने से नदी का पानी रुकेगा, जिससे भूजल स्तर बढ़ने और आसपास के खेतों को लाभ मिलने की उम्मीद है। #उमरिया #जल_गंगा_संवर्धन #जल_संरक्षण
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    उमरिया जिले के बरबसपुर क्षेत्र में जल संरक्षण को लेकर बड़ा कदम उठाया गया। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत कछली नदी में बोरी बंधान (रेत की बोरियों से अस्थायी बांध) बनाया गया।
इस अभियान में प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर श्रमदान किया। बोरी बंधान बनने से नदी का पानी रुकेगा, जिससे भूजल स्तर बढ़ने और आसपास के खेतों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
#उमरिया #जल_गंगा_संवर्धन #जल_संरक्षण
    user_Sumit Singh Chandel
    Sumit Singh Chandel
    Local News Reporter गोहपारू, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    13 hrs ago
  • राहुल सिंह राणा, 9407812522, 6260146722 सोहागपुर-शहडोल। जिले के जैतपुर थाना क्षेत्र से एक परिवार ने पुलिस पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई है। ग्राम कुदरी-अमहा निवासी विमला बाई पाव ने एसपी को दिए आवेदन में बताया कि उनके पुत्र गणेश पाव और पड़ोस में रहने वाली युवती शांतिबाई के बीच आपसी सहमति से साथ रहने का निर्णय हुआ था, जिसकी जानकारी ग्राम पंचायत के समक्ष भी दी गई थी। आवेदन के अनुसार 3 मार्च 2026 की रात करीब 10 बजे होली के अवसर पर युवती के परिजनों ने गणेश पाव को पकड़कर मारपीट की। शोर सुनकर बीच-बचाव करने आए परिवार के अन्य सदस्यों पर भी पत्थरों से हमला किया गया, जिससे कई लोग घायल हो गए। पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना की सूचना 112 पर देने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन मामले में उचित कार्रवाई नहीं की गई और एफआईआर दर्ज नहीं की गई। पीड़ित पक्ष ने पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने तथा परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
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    राहुल सिंह राणा, 9407812522, 6260146722 सोहागपुर-शहडोल। जिले के जैतपुर थाना क्षेत्र से एक परिवार ने पुलिस पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई है। ग्राम कुदरी-अमहा निवासी विमला बाई पाव ने एसपी को दिए आवेदन में बताया कि उनके पुत्र गणेश पाव और पड़ोस में रहने वाली युवती शांतिबाई के बीच आपसी सहमति से साथ रहने का निर्णय हुआ था, जिसकी जानकारी ग्राम पंचायत के समक्ष भी दी गई थी।
आवेदन के अनुसार 3 मार्च 2026 की रात करीब 10 बजे होली के अवसर पर युवती के परिजनों ने गणेश पाव को पकड़कर मारपीट की। शोर सुनकर बीच-बचाव करने आए परिवार के अन्य सदस्यों पर भी पत्थरों से हमला किया गया, जिससे कई लोग घायल हो गए।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना की सूचना 112 पर देने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन मामले में उचित कार्रवाई नहीं की गई और एफआईआर दर्ज नहीं की गई। पीड़ित पक्ष ने पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने तथा परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
    user_राहुल सिंह राणा
    राहुल सिंह राणा
    Newspaper advertising department सोहागपुर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • *जो वक्त नहीं दे पा रहे हैं... वो साथ क्या देंगे..!!! जो मेरा करना सब मिलकर करो किसी हम नहीं बोलेंगे शिव सिंह राजपूत दहिया वीरदत्त हाउस थाना अमरपाटन विधान सभा क्षेत्र*
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    *जो वक्त नहीं दे पा रहे हैं... वो साथ क्या देंगे..!!! जो मेरा करना सब मिलकर करो किसी हम नहीं बोलेंगे शिव सिंह राजपूत दहिया वीरदत्त हाउस थाना अमरपाटन विधान सभा क्षेत्र*
    user_Shiv Singh rajput dahiya journalist MP
    Shiv Singh rajput dahiya journalist MP
    Court reporter Amarpatan, Satna•
    8 hrs ago
  • *“देशभक्ति-जनसेवा के नारे पर अमानवीयता का दाग: क्या बदेरा थाना में लौट आया अंग्रेजी दौर का कोतवाली राज?” महज 3000 रुपये की लूट की रिपोर्ट लिखाने पहुंचे फरियादी के साथ कथित मारपीट, पैरों के तलवों पर गंभीर चोट का आरोप — कार्रवाई न होने से उठे सवाल* *मैहर* जिले के बदेरा थाना से सामने आई एक घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस पुलिस का आदर्श वाक्य *“देशभक्ति और जनसेवा”* बताया जाता है, उसी पर एक फरियादी के साथ कथित अमानवीय व्यवहार करने के आरोप लगने से क्षेत्र में चर्चा और आक्रोश का माहौल बन गया है। लोगों का कहना है कि यह घटना कहीं न कहीं अंग्रेजी हुकूमत के उस दौर की याद दिलाती है,*जब पुलिस आम जनता के लिए भय का प्रतीक मानी जाती थी।* प्राप्त जानकारी के अनुसार मामला मात्र 3000 रुपये की लूट की शिकायत से जुड़ा बताया जा रहा है। *भदनपुर निवासी रामभजन प्रजापति* अपनी रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए कई बार बदेरा थाना पहुंचे। आरोप है कि पुलिस द्वारा उनकी शिकायत दर्ज करने के बजाय उन्हें बार-बार टालते हुए *“दूसरे दिन आने”* के लिए कहा जाता रहा। बताया जाता है कि *3 मार्च 2026 को रामभजन प्रजापति लूट की एफआईआर दर्ज कराने थाने गए थे।* रिपोर्ट दर्ज न होने पर वे अगले दिन भी थाने पहुंचे। पीड़ित का आरोप है कि *4 मार्च की सुबह लगभग 10 बजे उन्हें थाने बुलाया गया, जहां पहले उन्हें खाना खिलाया गया और उसके बाद उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई।* पीड़ित के अनुसार इस मारपीट से उनके *पैरों के तलवों में गंभीर चोट आई है, जिसके कारण उनका चलना-फिरना और दैनिक दिनचर्या भी प्रभावित हो गई है।* इस घटना को पुलिस की ज्यादती बताते हुए उन्होंने पुलिस अधीक्षक कार्यालय मैहर पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई है और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। *हालांकि घटना सामने आने के बाद भी अब तक किसी ठोस कार्रवाई के संकेत नहीं मिलने से क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।* लोगों का कहना है कि यदि एक साधारण नागरिक अपनी छोटी-सी शिकायत लेकर थाने जाता है और उसके साथ ऐसा व्यवहार होता है, तो यह कानून व्यवस्था और मानवाधिकारों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। *अब सभी की निगाहें प्रशासन और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी हैं* कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाती है या नहीं और पीड़ित को न्याय मिल पाता है या नहीं।
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    *“देशभक्ति-जनसेवा के नारे पर अमानवीयता का दाग: क्या बदेरा थाना में लौट आया अंग्रेजी दौर का कोतवाली राज?” महज 3000 रुपये की लूट की रिपोर्ट लिखाने पहुंचे फरियादी के साथ कथित मारपीट, पैरों के तलवों पर गंभीर चोट का आरोप — कार्रवाई न होने से उठे सवाल*
*मैहर* जिले के बदेरा थाना से सामने आई एक घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस पुलिस का आदर्श वाक्य *“देशभक्ति और जनसेवा”* बताया जाता है, उसी पर एक फरियादी के साथ कथित अमानवीय व्यवहार करने के आरोप लगने से क्षेत्र में चर्चा और आक्रोश का माहौल बन गया है। लोगों का कहना है कि यह घटना कहीं न कहीं अंग्रेजी हुकूमत के उस दौर की याद दिलाती है,*जब पुलिस आम जनता के लिए भय का प्रतीक मानी जाती थी।*
प्राप्त जानकारी के अनुसार मामला मात्र 3000 रुपये की लूट की शिकायत से जुड़ा बताया जा रहा है। *भदनपुर निवासी रामभजन प्रजापति* अपनी रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए कई बार बदेरा थाना पहुंचे। आरोप है कि पुलिस द्वारा उनकी शिकायत दर्ज करने के बजाय उन्हें बार-बार टालते हुए *“दूसरे दिन आने”* के लिए कहा जाता रहा।
बताया जाता है कि *3 मार्च 2026 को रामभजन प्रजापति लूट की एफआईआर दर्ज कराने थाने गए थे।* रिपोर्ट दर्ज न होने पर वे अगले दिन भी थाने पहुंचे। पीड़ित का आरोप है कि *4 मार्च की सुबह लगभग 10 बजे उन्हें थाने बुलाया गया, जहां पहले उन्हें खाना खिलाया गया और उसके बाद उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई।* पीड़ित के अनुसार इस मारपीट से उनके *पैरों के तलवों में गंभीर चोट आई है, जिसके कारण उनका चलना-फिरना और दैनिक दिनचर्या भी प्रभावित हो गई है।* इस घटना को पुलिस की ज्यादती बताते हुए उन्होंने पुलिस अधीक्षक कार्यालय मैहर पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई है और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
*हालांकि घटना सामने आने के बाद भी अब तक किसी ठोस कार्रवाई के संकेत नहीं मिलने से क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।* लोगों का कहना है कि यदि एक साधारण नागरिक अपनी छोटी-सी शिकायत लेकर थाने जाता है और उसके साथ ऐसा व्यवहार होता है, तो यह कानून व्यवस्था और मानवाधिकारों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
*अब सभी की निगाहें प्रशासन और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी हैं* कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाती है या नहीं और पीड़ित को न्याय मिल पाता है या नहीं।
    user_Deepak Tiwari (Sonu)
    Deepak Tiwari (Sonu)
    पत्रकार मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • बांधवगढ़ में बाघ का नाइट राउंड! आधी रात ऑफिस-आवास के चक्कर, कर्मचारी बोले साहब निरीक्षण पर हैं क्या? उमरिया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पतौर परिक्षेत्र कार्यालय और रेंजर आवास परिसर में इन दिनों एक बाघ की अनोखी “नाइट ड्यूटी” चर्चा का विषय बनी हुई है। बताया जा रहा है कि पिछले कई दिनों से आधी रात के बाद बाघ आराम से ऑफिस और आवास परिसर के आसपास चक्कर लगाते दिखाई दे रहा है। जंगल का राजा जैसे किसी खास मिशन पर निकलता हो और सीधा सरकारी परिसर का ही रुख कर रहा हो। कर्मचारियों के अनुसार शुरुआत में उन्हें लगा कि कोई सामान्य वन्यजीव होगा, लेकिन जब लगातार कई रातों तक बाघ की मौजूदगी देखी गई तो सब चौकन्ने हो गए। हालांकि इस घटना को लेकर कर्मचारियों के बीच हल्का-फुल्का मजाक भी चल रहा है। कुछ लोग हंसते हुए कहते हैं कि लगता है बाघ साहब रात में चेक करने आते हैं कि कर्मचारी ठीक से ड्यूटी कर रहे हैं या नहीं। मजाक के बीच डर भी बना हुआ है। आखिर जंगल का राजा जब बार-बार ऑफिस और आवास के आसपास घूमे तो सावधानी जरूरी हो जाती है। मामले की जानकारी मिलते ही पार्क प्रबंधन ने कर्मचारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। रात के समय अकेले बाहर न निकलने और परिसर में अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा गया है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र जंगल से लगा हुआ है, इसलिए बाघ का आसपास आना असामान्य नहीं है। फिर भी लगातार उसकी गतिविधि को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी गई है। फिलहाल कर्मचारियों के बीच यही चर्चा है कि जंगल का राजा भी शायद इन दिनों नाइट राउंड पर है।
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    बांधवगढ़ में बाघ का नाइट राउंड! आधी रात ऑफिस-आवास के चक्कर, कर्मचारी बोले  साहब निरीक्षण पर हैं क्या?
उमरिया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पतौर परिक्षेत्र कार्यालय और रेंजर आवास परिसर में इन दिनों एक बाघ की अनोखी “नाइट ड्यूटी” चर्चा का विषय बनी हुई है। बताया जा रहा है कि पिछले कई दिनों से आधी रात के बाद बाघ आराम से ऑफिस और आवास परिसर के आसपास चक्कर लगाते दिखाई दे रहा है। जंगल का राजा जैसे किसी खास मिशन पर निकलता हो और सीधा सरकारी परिसर का ही रुख कर रहा हो।
कर्मचारियों के अनुसार शुरुआत में उन्हें लगा कि कोई सामान्य वन्यजीव होगा, लेकिन जब लगातार कई रातों तक बाघ की मौजूदगी देखी गई तो सब चौकन्ने हो गए। हालांकि इस घटना को लेकर कर्मचारियों के बीच हल्का-फुल्का मजाक भी चल रहा है। कुछ लोग हंसते हुए कहते हैं कि लगता है बाघ साहब रात में चेक करने आते हैं कि कर्मचारी ठीक से ड्यूटी कर रहे हैं या नहीं।
मजाक के बीच डर भी बना हुआ है। आखिर जंगल का राजा जब बार-बार ऑफिस और आवास के आसपास घूमे तो सावधानी जरूरी हो जाती है। मामले की जानकारी मिलते ही पार्क प्रबंधन ने कर्मचारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। रात के समय अकेले बाहर न निकलने और परिसर में अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा गया है।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र जंगल से लगा हुआ है, इसलिए बाघ का आसपास आना असामान्य नहीं है। फिर भी लगातार उसकी गतिविधि को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी गई है। फिलहाल कर्मचारियों के बीच यही चर्चा है कि जंगल का राजा भी शायद इन दिनों नाइट राउंड पर है।
    user_Tapas Gupta
    Tapas Gupta
    पाली, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
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