जयपुर के शाहपुरा उपजिला अस्पताल से बेहद चिंताजनक तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुई हैं, जिनमें अस्पताल परिसर के भीतर कचरे और गंदगी के बड़े अंबार दिखाई दे रहे हैं। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं और मुख्यमंत्री से इस मामले का संज्ञान लेने की माँग की गई है। सरकार द्वारा प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था को सुधारने और अस्पतालों को हाईटेक बनाने के दावों के बीच यह मामला सामने आया है। वायरल तस्वीरों में अस्पताल के एक हिस्से में काले रंग के बड़े प्लास्टिक बैग और खुले कचरे का भारी जमावड़ा स्पष्ट देखा जा सकता है। मरीजों के इलाज और स्वास्थ्य सुधार के लिए बने इस परिसर में हफ्तों से कचरा न उठने के कारण भयंकर दुर्गंध फैल रही है। अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों का कहना है कि वे यहाँ बीमारियों का इलाज कराने आते हैं, लेकिन इस गंदगी को देखकर लगता है कि लोग यहाँ से नई बीमारियां लेकर घर लौटेंगे। नियमों के अनुसार, अस्पतालों से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट का वैज्ञानिक तरीके से अलग-अलग रंग के डिब्बों में प्रबंधन और निस्तारण अनिवार्य है, लेकिन शाहपुरा उपजिला अस्पताल में सामान्य कचरे के साथ-साथ अन्य प्रकार का कचरा भी खुले में पड़ा है, जिससे इन नियमों की सरेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। इसी बीच, शाहपुरा नगर पालिका में ठेके पर कार्यरत सफाई कर्मचारियों की हड़ताल भी जारी है। कर्मचारियों का आरोप है कि उनका शोषण किया जा रहा है, उन्हें कम वेतन मिल रहा है और समय पर भुगतान भी नहीं हो रहा है। इस संबंध में नगर पालिका प्रशासन और ठेकेदार के बीच कर्मचारियों की सहमति नहीं बन पाई है।
जयपुर के शाहपुरा उपजिला अस्पताल से बेहद चिंताजनक तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुई हैं, जिनमें अस्पताल परिसर के भीतर कचरे और गंदगी के बड़े अंबार दिखाई दे रहे हैं। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं और मुख्यमंत्री से इस मामले का संज्ञान लेने की माँग की गई है। सरकार द्वारा प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था को सुधारने और अस्पतालों को हाईटेक बनाने के दावों के बीच यह मामला सामने आया है। वायरल तस्वीरों में अस्पताल के एक हिस्से में काले रंग के बड़े प्लास्टिक बैग और खुले कचरे का भारी जमावड़ा स्पष्ट देखा जा सकता है। मरीजों के इलाज और स्वास्थ्य सुधार के लिए बने इस परिसर में हफ्तों से कचरा न उठने के कारण भयंकर दुर्गंध फैल रही है। अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों का कहना है कि वे यहाँ बीमारियों का इलाज कराने आते हैं, लेकिन इस गंदगी को देखकर लगता है कि लोग यहाँ से नई बीमारियां लेकर घर लौटेंगे। नियमों के अनुसार, अस्पतालों से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट का वैज्ञानिक तरीके से अलग-अलग रंग के डिब्बों में प्रबंधन और निस्तारण अनिवार्य है, लेकिन शाहपुरा उपजिला अस्पताल में सामान्य कचरे के साथ-साथ अन्य प्रकार का कचरा भी खुले में पड़ा है, जिससे इन नियमों की सरेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। इसी बीच, शाहपुरा नगर पालिका में ठेके पर कार्यरत सफाई कर्मचारियों की हड़ताल भी जारी है। कर्मचारियों का आरोप है कि उनका शोषण किया जा रहा है, उन्हें कम वेतन मिल रहा है और समय पर भुगतान भी नहीं हो रहा है। इस संबंध में नगर पालिका प्रशासन और ठेकेदार के बीच कर्मचारियों की सहमति नहीं बन पाई है।
- जयपुर के शाहपुरा उपजिला अस्पताल से बेहद चिंताजनक तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुई हैं, जिनमें अस्पताल परिसर के भीतर कचरे और गंदगी के बड़े अंबार दिखाई दे रहे हैं। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं और मुख्यमंत्री से इस मामले का संज्ञान लेने की माँग की गई है। सरकार द्वारा प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था को सुधारने और अस्पतालों को हाईटेक बनाने के दावों के बीच यह मामला सामने आया है। वायरल तस्वीरों में अस्पताल के एक हिस्से में काले रंग के बड़े प्लास्टिक बैग और खुले कचरे का भारी जमावड़ा स्पष्ट देखा जा सकता है। मरीजों के इलाज और स्वास्थ्य सुधार के लिए बने इस परिसर में हफ्तों से कचरा न उठने के कारण भयंकर दुर्गंध फैल रही है। अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों का कहना है कि वे यहाँ बीमारियों का इलाज कराने आते हैं, लेकिन इस गंदगी को देखकर लगता है कि लोग यहाँ से नई बीमारियां लेकर घर लौटेंगे। नियमों के अनुसार, अस्पतालों से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट का वैज्ञानिक तरीके से अलग-अलग रंग के डिब्बों में प्रबंधन और निस्तारण अनिवार्य है, लेकिन शाहपुरा उपजिला अस्पताल में सामान्य कचरे के साथ-साथ अन्य प्रकार का कचरा भी खुले में पड़ा है, जिससे इन नियमों की सरेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। इसी बीच, शाहपुरा नगर पालिका में ठेके पर कार्यरत सफाई कर्मचारियों की हड़ताल भी जारी है। कर्मचारियों का आरोप है कि उनका शोषण किया जा रहा है, उन्हें कम वेतन मिल रहा है और समय पर भुगतान भी नहीं हो रहा है। इस संबंध में नगर पालिका प्रशासन और ठेकेदार के बीच कर्मचारियों की सहमति नहीं बन पाई है।1
- कोटपूतली-बहरोड़ जिले के कुजोता गांव में देर रात एक हादसा हुआ। यह घटना डंपर चालक की लापरवाही के कारण हुई, जिसके चलते एक बिजली का पोल गिर गया। इस हादसे के परिणामस्वरूप, गांव में बिजली आपूर्ति पूरी तरह से बाधित हो गई है।1
- रानियावास पाटीयो की ढाणी के ग्रामीण पिछले बीस सालों से एक कच्चे रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं, जिससे उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस जर्जर सड़क के कारण अब तक कई हादसे हो चुके हैं, और प्रतिदिन आने-जाने वाले लोगों के साथ-साथ स्कूली बच्चों को भी रोजमर्रा की परेशानियों से जूझना पड़ता है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय विधायक और सरपंच केवल चुनाव के समय ही उन्हें याद करते हैं, जबकि कई बार शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद सड़क की इस गंभीर समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। इसी परेशानी के निवारण हेतु, ग्रामीणों ने विधायक श्री महेंद्र पाल मीणा जी से विनम्र निवेदन किया है कि वे उनकी शिकायत को गंभीरता से संज्ञान में लें और गांव की सड़क में सुधार कर उनकी लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान करें, क्योंकि वे इस दिशा में पहले भी बहुत प्रयास कर चुके हैं।1
- मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा को पत्र लिखकर संगठित तरीके से चल रहे पेपर लीक रैकेट के मास्टरमाइंड और अन्य रसूखदार लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। यह मांग बाबूलाल कटारा द्वारा खोले गए राज के बाद की गई है। इस संदर्भ में, एक व्यक्ति ने बताया कि वे बाबूलाल कटारा से जेल में मिले थे और कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि वे फिर मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे और मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।1
- जिस व्यक्ति को ममता बानो अपना 'बड़ा भाई' बताती थीं, आज बंगाल की जनता उसी का 'बहुत प्यार से सेवा पूजा' करते हुए 'स्वागत और सत्कार' कर रही है।1
- किशनगढ़ रेनवाल कस्बे में एक तेज रफ्तार और बेकाबू पिकअप वाहन ने रेनवाल के पचार-खाटूश्यामजी चौराहे पर एक मोटरसाइकिल सवार युवक को जोरदार टक्कर मार दी। यह हादसा इतना भीषण था कि प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक टक्कर लगते ही बाइक चालक करीब 5 फीट हवा में उछलकर सड़क पर जा गिरा और गंभीर रूप से घायल हो गया। यह पूरी घटना पास के एक होटल के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। दुर्घटना के बाद चालक अपने वाहन सहित मौके से फरार हो गया। घटना की सूचना मिलते ही रेनवाल पुलिस और एंबुलेंस तुरंत घटनास्थल पर पहुंची। गंभीर रूप से घायल युवक को तत्काल उप जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे जयपुर रेफर कर दिया। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना कर आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है, ताकि फरार पिकअप चालक की पहचान कर उसकी तलाश की जा सके। रेनवाल पुलिस ने अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया है। इस हादसे के बाद क्षेत्र के लोगों में रोष है और वे तेज रफ्तार वाहनों पर अंकुश लगाने की मांग कर रहे हैं।1
- पूर्व यातायात मंत्री रोहिताश्व कुमार गुरुवार को एक दिवसीय दौरे पर बानसूर पहुँचे, जहाँ उनके समर्थकों और शुभचिंतकों ने उनकी सुपुत्री उषा प्रियदर्शी को हरियाणा महिला आयोग का अध्यक्ष बनाए जाने पर मिठाई खिलाकर और गुलदस्ते भेंट कर बधाई दी। इस अवसर पर आयोजित एक पत्रकार वार्ता में रोहिताश्व कुमार ने बानसूर के राजकीय महाविद्यालय के नवनिर्मित भवन की शिला पट्टिका के लोकार्पण समारोह पर सवाल उठाते हुए इसे "वाहवाही लूटने का कार्यक्रम" करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि जब भवन का वर्चुअल लोकार्पण पहले ही हो चुका है, तो दोबारा शिला पट्टिका अनावरण का कोई औचित्य नहीं बचता। महाविद्यालय खुलवाने का श्रेय वर्तमान विधायक को दिए जाने पर पलटवार करते हुए, पूर्व मंत्री ने स्पष्ट किया कि बानसूर में राजकीय महाविद्यालय तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने उनकी मांग पर स्वीकृत किया था। उन्होंने आगे बताया कि मात्र 2 दिन के भीतर स्टाफ की नियुक्ति कर इसे राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय भवन में तुरंत संचालित करवा दिया गया था। रोहिताश्व कुमार ने जोर देकर कहा कि कॉलेज की स्थापना का वास्तविक श्रेय वसुंधरा राजे सरकार और उनकी पहल को जाता है, न कि बाद में इसका श्रेय लेने वालों को। अपनी बेटी उषा प्रियदर्शी की नियुक्ति पर खुशी जताते हुए, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वह महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में हरियाणा में बेहतर काम करेंगी।1
- नीम का थाना में बिजली विभाग की कथित नाकामी, कामचोरी और रिश्वतखोरी के कारण आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एक दुकानदार ने शिकायत की है कि उनकी दुकान के बाहर लगा बिजली का पैनल खुला पड़ा है, जिससे कभी भी जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता है। यह पैनल लगातार खराब होता रहता है। शिकायतकर्ता ने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए निजी पावर हाउस में कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस खुले पैनल से किसी भी प्रकार का जान-माल का नुकसान होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी बिजली विभाग की होगी।1