अंतिम तिथि पर भी नहीं मिले जिम्मेदार, नीलामी प्रक्रिया पर उठे सवाल बहोरीबंद जनपद में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दुकानों की नीलामी प्रक्रिया में कथित लापरवाही और मनमानी का मामला सामने आया है, जिससे आवेदकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 22 अप्रैल को दुकानों की नीलामी हेतु आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि निर्धारित की गई थी। अधिकारियों द्वारा निविदा में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि शाम 6 बजे तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि अंतिम तिथि के दिन भी कार्यालय में कोई जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं मिला। मौके पर मौजूद आवेदक ने बताया कि वे समय पर आवेदन जमा करने पहुंचे थे, लेकिन कार्यालय में ताला लगा मिला और कोई भी आवेदन लेने वाला नहीं था। इस पूरी घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें आवेदक अपनी समस्या बताते नजर आ रहे हैं। गौरतलब है कि 23 अप्रैल को दुकानों की नीलामी प्रस्तावित है। ऐसे में आवेदन ही स्वीकार नहीं किए जाने से पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। आवेदकों का आरोप है कि यह सब जानबूझकर किया जा रहा है, ताकि कुछ चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाया जा सके। इस मामले ने जनपद की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर लापरवाही पर क्या कार्रवाई करता है और क्या प्रभावित आवेदकों को न्याय मिल पाता है।
अंतिम तिथि पर भी नहीं मिले जिम्मेदार, नीलामी प्रक्रिया पर उठे सवाल बहोरीबंद जनपद में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दुकानों की नीलामी प्रक्रिया में कथित लापरवाही और मनमानी का मामला सामने आया है, जिससे आवेदकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 22 अप्रैल को दुकानों की नीलामी हेतु आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि निर्धारित की गई थी। अधिकारियों द्वारा निविदा में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि शाम 6 बजे तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि अंतिम तिथि के दिन भी कार्यालय में कोई जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं मिला। मौके पर मौजूद आवेदक ने बताया कि वे समय पर आवेदन जमा करने पहुंचे थे, लेकिन कार्यालय में ताला लगा मिला और कोई भी आवेदन लेने वाला नहीं था। इस पूरी घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें आवेदक अपनी समस्या बताते नजर आ रहे हैं। गौरतलब है कि 23 अप्रैल को दुकानों की नीलामी प्रस्तावित है। ऐसे में आवेदन ही स्वीकार नहीं किए जाने से पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। आवेदकों का आरोप है कि यह सब जानबूझकर किया जा रहा है, ताकि कुछ चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाया जा सके। इस मामले ने जनपद की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर लापरवाही पर क्या कार्रवाई करता है और क्या प्रभावित आवेदकों को न्याय मिल पाता है।
- Post by Saroj Viswakarma1
- गाड़ी पंचर होने की वजह से दूल्हे की बारात 2 घंटे देरी से पहुंची, बारात लेट पहुंची तो डीजे वाले ने डीजे बजाने से मना कर दिया,, क्योंकि उसकी 11:00 बजे दूसरी जगह बुकिंग थी. इसी बात को लेकर बारातियों ने मिलकर डीजे वाले को पीट दिया. डीजे वाले ने पुलिस को कॉल मिलाया,, अब सभी बारातियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा जा रहा है, और पुलिस के साथ-साथ डीजे वाले भैया भी जमकर लाठियां भांज रहे है।1
- *60 एकड़ फसल जली, लेकिन उम्मीद अभी ज़िंदा है* *मोहनटोला के किसानों के लिए राहत की आस जगी* विजयराघवगढ़ के मोहनटोला गांव में 15 अप्रैल को लगी भीषण नरवाई की आग ने लगभग 35 किसानों की करीब 60 एकड़ गेहूँ की खड़ी फसल को चंद घंटों में राख कर दिया। किसानों की छह महीने की मेहनत सपने और आजीविका इस आग में स्वाहा हो गई। खेतों के साथ-साथ सिंचाई उपकरण कृषि सामग्री और आम के पेड़ भी जलकर नष्ट हो गए जिससे किसानों की हालत बेहद दयनीय हो गई है।लेकिन इस दर्दनाक घटना के बीच अब राहत की किरण दिखाई देने लगी है। प्रशासन हरकत में सर्वे और राहत प्रक्रिया शुरू घटना के बाद स्थानीय पटवारी द्वारा पंचनामा तैयार किया गया है और अब राजस्व विभाग द्वारा विस्तृत सर्वे कार्य तेज़ी से किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार प्रभावित किसानों को शासन की आपदा राहत योजना के तहत मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।प्रदेश स्तर पर भी इस घटना की जानकारी पहुँचने के बाद जिला प्रशासन को निर्देश दिए जाने की संभावना जताई जा रही है कि प्रभावित किसानों को शीघ्र आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। किसानों को राहत राशि बीमा क्लेम और कृषि पुनर्वास योजना का लाभ दिलाने पर भी विचार किया जा रहा है।हालांकि शुरुआती दिनों में किसानों को उपेक्षा का एहसास हुआ लेकिन अब प्रशासनिक टीम गांव पहुंचकर हालात का जायजा ले रही है। किसानों को भरोसा दिलाया जा रहा है कि उन्हें अकेला नहीं छोड़ा जाएगा और हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।भले ही आग ने उनकी मेहनत को जला दिया लेकिन मोहनटोला के किसान हिम्मत नहीं हारे हैं। एक बार फिर खेतों में हरियाली लाने का संकल्प उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा है।यह घटना जितनी दर्दनाक है उतनी ही यह भरोसा भी जगाती है कि शासन-प्रशासन और समाज मिलकर किसानों के इस संकट को कम करने में पीछे नहीं हटेंगे। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राहत कितनी जल्दी और कितनी प्रभावी रूप से किसानों तक पहुँचती है।खेत जले हैं हौसले नहीं… मोहनटोला फिर से खड़ा होगा।2
- कटनी ,मध्यप्रदेश बारात में बवाल, पुलिस से झड़प डीजे बंद कराने पर मारपीट, 15 घायल कुठला की घटना2
- शादी में हंगामा, खाकी हुई बदनाम: दो उप-निरीक्षक लाइन अटैच सबहेड: इंदिरा नगर कांड के बाद विभाग में मचा हड़कंप, विवादों में घिरे अधिकारियों पर फिर उठे सवाल 📍 कटनी | 21 अप्रैल 2026 कटनी के कुठला थाना क्षेत्र के इंदिरा नगर में एक शादी समारोह उस वक्त हंगामे में बदल गया, जब पुलिसकर्मियों के कथित व्यवहार को लेकर विवाद खड़ा हो गया। इस घटना ने न सिर्फ कार्यक्रम में अफरा-तफरी मचाई, बल्कि पुलिस विभाग की छवि पर भी सवाल खड़े कर दिए। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग ने तुरंत एक्शन लेते हुए उप-निरीक्षक सौरभ सोनी और सिद्धार्थ राय को लाइन अटैच कर दिया। विभागीय स्तर पर यह कार्रवाई प्रारंभिक जांच के आधार पर की गई है। 👉 घटना के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि संबंधित अधिकारियों को लेकर पहले भी शिकायतें उठती रही हैं। हालांकि इन बिंदुओं की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। ⚖️ जनता की नजरें अब जांच पर टिकीं स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि कानून के प्रति जनता का भरोसा कायम रहे।1
- जबलपुर। संस्कारधानी के हृदय स्थल और आस्था के केंद्र ग्वारीघाट में आज उस समय नजारा कुछ अलग नजर आया, जब श्रद्धालुओं के साथ-साथ बकरियों का एक झुंड भी नर्मदा जल का आनंद लेने पहुंच गया। भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए या महज कौतूहल वश, इन बेजुबानों को पानी में अठखेलियां करते देख वहां मौजूद लोग भी मुस्कुराने पर मजबूर हो गए।1
- बाकल। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं की बेहतर देखभाल और उपचार के उद्देश्य से संचालित ग्राम बाकल का पशु चिकित्सालय इन दिनों अव्यवस्थाओं का शिकार बना हुआ है। हालात यह हैं कि यहां अधिकांश समय ताला लटका रहता है, जिससे पशुपालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जब भी वे अपने बीमार पशुओं को लेकर चिकित्सालय पहुंचते हैं, तो वहां ताला बंद मिलता है। दूर-दराज के गांवों से आने वाले पशुपालक निराश होकर वापस लौटने को मजबूर हो जाते हैं। समय पर उपचार नहीं मिलने से पशुओं की हालत बिगड़ रही है, जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पशु चिकित्सालय का संचालन लंबे समय से मनमाने ढंग से किया जा रहा है। न तो यहां पदस्थ पशु चिकित्सक नियमित रूप से उपस्थित रहते हैं और न ही अन्य स्टाफ की जिम्मेदारी तय नजर आती है। परिणामस्वरूप शासन की योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पा रहा है। मामले में जब पशु चिकित्सालय में पदस्थ चिकित्सक डॉ. जय कुमार केवट से संपर्क किया गया, तो उन्होंने बताया कि वे जिला मुख्यालय में आयोजित एक सेवानिवृत्ति कार्यक्रम में शामिल होने गए हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सहायक स्टाफ चिकित्सालय में मौजूद है, जबकि मौके पर चिकित्सालय पूरी तरह बंद पाया गया। जिसमें ताला लटका हुआ था। इस लापरवाही को लेकर पशुपालकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि समय पर पशुओं को उपचार नहीं मिलता है, जिससे पशुओं की मौत तक हो जाती है। वहीं जब इस मामले में डीडीओ राजकुमार सोनी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उनका फोन रिसीव नहीं हुआ, जिससे जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पशु चिकित्सालय की नियमित निगरानी की जाए और लापरवाह अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि पशुपालकों को समय पर और बेहतर उपचार सुविधा मिल सके।2
- Post by भगवत सिंह लोधी पत्रकार1
- Post by Rajnish Dahiya1