Shuru
Apke Nagar Ki App…
पावर प्लांट और पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़: सिंगरौली में लेबर की मौत पर भड़के, कर्मचारियों को पीटा; प्लांट से धुआं उठता भी दिखा सिंगरौली (मध्य प्रदेश) में एक पावर प्लांट (संभवतः विंध्याचल NTPC) में मजदूर की मौत के बाद भड़के कामगारों ने जमकर बवाल किया। आक्रोशित भीड़ ने प्लांट परिसर और पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की, कर्मचारियों को पीटा और क्षेत्र में तनाव फैला दिया। घटना के बाद सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
Phool singh
पावर प्लांट और पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़: सिंगरौली में लेबर की मौत पर भड़के, कर्मचारियों को पीटा; प्लांट से धुआं उठता भी दिखा सिंगरौली (मध्य प्रदेश) में एक पावर प्लांट (संभवतः विंध्याचल NTPC) में मजदूर की मौत के बाद भड़के कामगारों ने जमकर बवाल किया। आक्रोशित भीड़ ने प्लांट परिसर और पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की, कर्मचारियों को पीटा और क्षेत्र में तनाव फैला दिया। घटना के बाद सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
- Subhash Sharmaमथुरा, मथुरा, उत्तर प्रदेशमजदूरौ की वर्दी वगैरा देखकर तो ऐसा लग रहा है कि यह सरकारी पावर प्लांट के मजदूर हैं और सरकारी पावर प्लांट है या निजी पावर प्लांट है वह गवर्नमेंट को टैक्स भी देते हैं तो गवर्नमेंट का अगर पावर प्लांट है या सरकारी निजी पावर प्लांट है तो मजदूर ड्यूटी पर अगर खत्म हुआ है तो इसको गवर्नमेंट सहयोग से एक करोड़ का हार्ड अटेक सहयोग दिया जाऐ सरकारी गाडी तोढने बाले को जुर्माना किया जाऐ किसी सरकारी संमपत्ती को नुकसान नही फहुचा सकते चालान जुर्माना दोनो भुगतने फढैगै सरकारी निजी सहयोग के बाद सहयोगी से सहयोगी राशि दिलाई जाए जो नारे जय श्री राम के नारे बाजू बाजी कर रहे थे उनहे शॉवॉसी दी जाऐ1 hr ago
More news from Madhya Pradesh and nearby areas
- Post by Mithilesh Kumar Yadav1
- मजदूर के मौत के बाद जमकर हंगामा पुलिस मौके पर मौजूद स्थिति संभालने में लगी।1
- पावर प्लांट और पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़: सिंगरौली में लेबर की मौत पर भड़के, कर्मचारियों को पीटा; प्लांट से धुआं उठता भी दिखा सिंगरौली (मध्य प्रदेश) में एक पावर प्लांट (संभवतः विंध्याचल NTPC) में मजदूर की मौत के बाद भड़के कामगारों ने जमकर बवाल किया। आक्रोशित भीड़ ने प्लांट परिसर और पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की, कर्मचारियों को पीटा और क्षेत्र में तनाव फैला दिया। घटना के बाद सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।1
- *कानून व्यवस्था को दृष्टिगत रखते हुए थाना मोरवा क्षेत्र में निकाला गया फ्लैग मार्च* जिले में शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से थाना मोरवा क्षेत्र में पुलिस द्वारा फ्लैग मार्च निकाला गया। फ्लैग मार्च के दौरान पुलिस बल द्वारा क्षेत्र के मुख्य मार्गों, बाजारों एवं संवेदनशील स्थानों पर पैदल भ्रमण कर आमजन में सुरक्षा का विश्वास सुदृढ़ किया गया तथा असामाजिक तत्वों को सख्त संदेश दिया गया कि कानून व्यवस्था से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस दौरान पुलिस अधिकारियों एवं पुलिस बल द्वारा क्षेत्र में सतर्कता बनाए रखते हुए नागरिकों से शांति एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने की अपील की गई। साथ ही आमजन से कहा गया कि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि या अफवाह की जानकारी तत्काल पुलिस को दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्यवाही की जा सके। सिंगरौली पुलिस द्वारा क्षेत्र में लगातार पेट्रोलिंग एवं निगरानी रखी जा रही है, जिससे आम नागरिक सुरक्षित वातावरण में अपने दैनिक कार्य कर सकें। *सिंगरौली पुलिस जिले में शांति, सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने हेतु सदैव प्रतिबद्ध है।*1
- Post by Devraj Balmiki1
- Post by Dinesh Sahu1
- मध्य प्रदेश के सीधी जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार कर देने वाली एक तस्वीर सामने आई है। जहाँ सरकारें 'जननी सुरक्षा' के बड़े-बड़े दावे करती हैं, वहीं कुसमी में एक गरीब परिवार एंबुलेंस के लिए गिड़गिड़ाता रहा और अंततः सड़क पर ही बच्चे की गूंज सुनाई दी। क्या कुसमी का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ सफेद हाथी बनकर रह गया है? पूरी रिपोर्ट: जब सिस्टम ने फेर लिया मुँह यह मामला सीधी जिले के कुसमी पंचायत भगवार का है। 13 मार्च की सुबह करीब 8 बजे, जब शिवराज रजक अपनी गर्भवती पत्नी सुमित्रा रजक को प्रसव पीड़ा से तड़पता देख 108 एंबुलेंस को फोन करते हैं। इंतजार की वो 40 मिनट: परिजनों का कहना है कि उन्होंने एंबुलेंस को अपनी स्थिति बताई, गुहार लगाई कि वे गरीब हैं और अस्पताल पहुँचने का कोई साधन नहीं है। लेकिन मदद नहीं पहुँची। रास्ते में प्रसव: 40 मिनट तक मौत और जिंदगी के बीच जूझती सुमित्रा को जब सरकारी मदद नहीं मिली, तो परिजनों ने निजी वाहन किराए पर लिया। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था—अस्पताल पहुँचने से पहले ही रास्ते में डिलीवरी हो गई। अस्पताल का सन्नाटा: जैसे-तैसे जब पीड़ित परिवार कुसमी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुँचा, तो वहाँ की बदहाली का दूसरा चेहरा सामने आया। आरोप है कि अस्पताल में न डॉक्टर थे और न ही पर्याप्त स्टाफ। जिम्मेदार कौन? इस घटना ने कुसमी की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है: जब 108 एंबुलेंस को समय पर सूचना दी गई, तो वह 40 मिनट तक क्यों नहीं पहुँची? सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ड्यूटी के समय स्टाफ क्यों नदारद रहता है? अगर रास्ते में जच्चा या बच्चा के साथ कोई अनहोनी हो जाती, तो क्या प्रशासन इसकी जिम्मेदारी लेता? "हम गरीब हैं साहब, एंबुलेंस का इंतजार करते रहे पर कोई नहीं आया। रास्ते में ही बच्चा हो गया, अस्पताल आए तो यहाँ भी कोई सुनने वाला नहीं था।" – पीड़ित परिजन कुसमी की यह घटना कोई पहली बार नहीं है। समय पर एंबुलेंस न मिलना और अस्पताल में स्टाफ की कमी यहाँ के आम जन के लिए मुसीबत बन चुकी है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी इन लापरवाहों पर क्या कार्रवाई करते हैं या फिर अगली बार किसी और 'सुमित्रा' को इसी तरह सड़क पर सिस्टम की नाकामी का शिकार होना पड़ेगा।1
- मजदूर के मौत के बाद जमकर हंगामा पुलिस मौके पर मौजूद स्थिति संभालने में लगी।1