कोटा: चार लेबर कोड रद्द करने सहित कई मुद्दों पर दिल्ली में माकपा की जनाक्रोश रैली आज कोटा जिले से सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ताओं ने लिया भाग कोटा। केंद्र सरकार की मजदूर-विरोधी, किसान-विरोधी और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ 24 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली जन आक्रोश रैली में कोटा जिले से सैकड़ों माकपा कार्यकर्ता, मजदूर, किसान और महिलाएं शामिल हुए। इस रैली में कोटा से लगभग 200 महिला-पुरुषों के जत्थे ने दिल्ली रैली में शिरकत की। जत्थे में 57 महिलाएं शामिल हैं। रैली में शामिल होने वाले कोटा जिले के जत्थे का नेतृत्व माकपा जिला सचिव कामरेड हबीब खान, कामरेड दुलीचंद बोरदा, सीटू जिला महामंत्री कामरेड उमाशंकर, कामरेड नरेंद्र सिंह, जनवादी महिला समिति की नेता कामरेड पुष्पा खींची, इटावा-पीपल्दा तहसील सचिव कामरेड मुकुट बिहारी जंगम और सीटू महामंत्री मुरारीलाल बैरवा ने किया। माकपा पीपल्दा-कोटा तहसील सचिव कामरेड मुकुट बिहारी जंगम ने बताया कि यह रैली आम जनता के हितों और जन मुद्दों को लेकर माकपा के नेतृत्व में आयोजित की जा रही है। इटावा-पीपल्दा क्षेत्र सहित कोटा शहर और आसपास के इलाकों से कार्यकर्ता सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। ये हैं जनाक्रोश रैली की प्रमुख मांगें जन आक्रोश रैली के माध्यम से कोटा की आम जनता की आवाज को बुलंद करते हुए निम्नलिखित प्रमुख मांगें उठाई गईं- मजदूर विरोधी चारों श्रम संहिताओं (लेबर कोड बिल) को तुरंत रद्द किया जाए और पूर्व के सभी 44 मजदूर हितैषी श्रम कानूनों को वापस लागू किया जाए। ग्रामीण मजदूरों को बर्बाद करने वाले वी.बी.जी. राम जी मनरेगा विधेयक 2025 को रद्द किया जाए। आम बिजली उपभोक्ताओं की जेब काटने वाले बिजली बिल विधेयक 2025 को वापस लिया जाए। किसान विरोधी और खेती-किसानी को बर्बाद करने वाले बीज विधेयक 2025 को रद्द किया जाए। अमेरिका के साथ की गई व्यापारिक ट्रेड डील को तुरंत रद्द किया जाए। निर्माण मजदूरों की श्रमिक योजनाओं में कटौती बंद की जाए। श्रम कल्याण बोर्ड से सरकार द्वारा उधार लिए गए 385.50 करोड़ रुपए वापस जमा किए जाएं। एक साल से जे.के. मजदूरों का बकाया वेतन 18% ब्याज सहित राजस्थान सरकार द्वारा भुगतान कराया जाए। कृष्णा ट्रेडिंग कंपनी द्वारा 2022 में इटावा कृषि उपज मंडी में लुटे गए 102 किसानों की सरसों की 1 करोड़ 46 लाख रुपए की राशि का शीघ्र भुगतान किया जाए। सभी असंगठित क्षेत्र के निर्माण मजदूरों और मेहनतकश वर्ग को हर माह 10 हजार रुपए की सामाजिक सुरक्षा पेंशन लागू की जाए। 2018 से बंद शुभशक्ति योजना पोर्टल को चालू कर हिताधिकारियों की पुत्रियों को 55 हजार रुपये की सहायता राशि उनके खातों में जमा की जाए। किसानों की संपूर्ण फसल की खरीद पर एम.एस.पी. की कानूनी गारंटी लागू की जाए। 2022-23, 2024 और 2025 में बाढ़ व अतिवृष्टि से नष्ट फसलों व मकानों का मुआवजा शीघ्र पीड़ित परिवारों के खातों में डाला जाए। राजीविका सुविधा कर्मियों को राज्य कर्मचारियों का दर्जा दिया जाए और रुका हुआ वेतन भुगतान किया जाए। कर्मचारियों की नई पेंशन योजना रद्द कर पुरानी पेंशन योजना को बहाल किया जाए। आसमान छूती महंगाई पर अंकुश लगाया जाए और सरकारी संस्थानों का निजीकरण बंद किया जाए। मजदूर-किसान आंदोलनों में पुलिस हस्तक्षेप बंद किया जाए। श्रमिक योजनाओं के आवेदनों को श्रम विभाग अधिकारियों द्वारा केवल रजिस्टर्ड निर्माण मजदूर यूनियन के अध्यक्ष/महामंत्री के हस्ताक्षर पर ही मान्य किया जाए ताकि भ्रष्टाचार रोका जा सके। मनरेगा और शहरी रोजगार योजना में 200 दिन काम और 600 रुपए दैनिक मजदूरी लागू की जाए। मजदूरों के ठहरने के लिए कस्बों और शहरों में शौचालय सहित मजदूर चौखटियों का निर्माण कराया जाए। सभी के लिए न्यूनतम वेतन 26,000 रुपए प्रति माह लागू किया जाए। इनके अलावा अन्य जनहितैषी मुद्दों को लेकर कोटा की मेहनतकश जनता रामलीला मैदान में अपनी आवाज बुलंद करेगी।
कोटा: चार लेबर कोड रद्द करने सहित कई मुद्दों पर दिल्ली में माकपा की जनाक्रोश रैली आज कोटा जिले से सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ताओं ने लिया भाग कोटा। केंद्र सरकार की मजदूर-विरोधी, किसान-विरोधी और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ 24 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली जन आक्रोश रैली में कोटा जिले से सैकड़ों माकपा कार्यकर्ता, मजदूर, किसान और महिलाएं शामिल हुए। इस रैली में कोटा से लगभग 200 महिला-पुरुषों के जत्थे ने दिल्ली रैली में शिरकत की। जत्थे में 57 महिलाएं शामिल हैं। रैली में शामिल होने वाले कोटा जिले के जत्थे का नेतृत्व माकपा जिला सचिव कामरेड हबीब खान, कामरेड दुलीचंद बोरदा, सीटू जिला महामंत्री कामरेड उमाशंकर, कामरेड नरेंद्र सिंह, जनवादी महिला समिति की नेता कामरेड पुष्पा खींची, इटावा-पीपल्दा तहसील सचिव कामरेड मुकुट बिहारी जंगम और सीटू महामंत्री मुरारीलाल बैरवा ने किया। माकपा पीपल्दा-कोटा तहसील सचिव कामरेड मुकुट बिहारी जंगम ने बताया कि यह रैली आम
जनता के हितों और जन मुद्दों को लेकर माकपा के नेतृत्व में आयोजित की जा रही है। इटावा-पीपल्दा क्षेत्र सहित कोटा शहर और आसपास के इलाकों से कार्यकर्ता सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। ये हैं जनाक्रोश रैली की प्रमुख मांगें जन आक्रोश रैली के माध्यम से कोटा की आम जनता की आवाज को बुलंद करते हुए निम्नलिखित प्रमुख मांगें उठाई गईं- मजदूर विरोधी चारों श्रम संहिताओं (लेबर कोड बिल) को तुरंत रद्द किया जाए और पूर्व के सभी 44 मजदूर हितैषी श्रम कानूनों को वापस लागू किया जाए। ग्रामीण मजदूरों को बर्बाद करने वाले वी.बी.जी. राम जी मनरेगा विधेयक 2025 को रद्द किया जाए। आम बिजली उपभोक्ताओं की जेब काटने वाले बिजली बिल विधेयक 2025 को वापस लिया जाए। किसान विरोधी और खेती-किसानी को बर्बाद करने वाले बीज विधेयक 2025 को रद्द किया जाए। अमेरिका के साथ की गई व्यापारिक ट्रेड डील को तुरंत रद्द किया जाए। निर्माण मजदूरों की
श्रमिक योजनाओं में कटौती बंद की जाए। श्रम कल्याण बोर्ड से सरकार द्वारा उधार लिए गए 385.50 करोड़ रुपए वापस जमा किए जाएं। एक साल से जे.के. मजदूरों का बकाया वेतन 18% ब्याज सहित राजस्थान सरकार द्वारा भुगतान कराया जाए। कृष्णा ट्रेडिंग कंपनी द्वारा 2022 में इटावा कृषि उपज मंडी में लुटे गए 102 किसानों की सरसों की 1 करोड़ 46 लाख रुपए की राशि का शीघ्र भुगतान किया जाए। सभी असंगठित क्षेत्र के निर्माण मजदूरों और मेहनतकश वर्ग को हर माह 10 हजार रुपए की सामाजिक सुरक्षा पेंशन लागू की जाए। 2018 से बंद शुभशक्ति योजना पोर्टल को चालू कर हिताधिकारियों की पुत्रियों को 55 हजार रुपये की सहायता राशि उनके खातों में जमा की जाए। किसानों की संपूर्ण फसल की खरीद पर एम.एस.पी. की कानूनी गारंटी लागू की जाए। 2022-23, 2024 और 2025 में बाढ़ व अतिवृष्टि से नष्ट फसलों व मकानों का मुआवजा शीघ्र पीड़ित परिवारों के खातों
में डाला जाए। राजीविका सुविधा कर्मियों को राज्य कर्मचारियों का दर्जा दिया जाए और रुका हुआ वेतन भुगतान किया जाए। कर्मचारियों की नई पेंशन योजना रद्द कर पुरानी पेंशन योजना को बहाल किया जाए। आसमान छूती महंगाई पर अंकुश लगाया जाए और सरकारी संस्थानों का निजीकरण बंद किया जाए। मजदूर-किसान आंदोलनों में पुलिस हस्तक्षेप बंद किया जाए। श्रमिक योजनाओं के आवेदनों को श्रम विभाग अधिकारियों द्वारा केवल रजिस्टर्ड निर्माण मजदूर यूनियन के अध्यक्ष/महामंत्री के हस्ताक्षर पर ही मान्य किया जाए ताकि भ्रष्टाचार रोका जा सके। मनरेगा और शहरी रोजगार योजना में 200 दिन काम और 600 रुपए दैनिक मजदूरी लागू की जाए। मजदूरों के ठहरने के लिए कस्बों और शहरों में शौचालय सहित मजदूर चौखटियों का निर्माण कराया जाए। सभी के लिए न्यूनतम वेतन 26,000 रुपए प्रति माह लागू किया जाए। इनके अलावा अन्य जनहितैषी मुद्दों को लेकर कोटा की मेहनतकश जनता रामलीला मैदान में अपनी आवाज बुलंद करेगी।
- विकल्प की काव्य गोष्ठी में उभरे सृजन और प्रतिरोध के स्वर कोटा। नगर की साहित्यिक संस्था विकल्प जन सांस्कृतिक मंच ने क्रांतिकारी महानायकों भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के शहादत दिवस को साम्राज्यवाद-विरोधी जन चेतना दिवस के रूप में मनाया। प्रेस क्लब, कोटा के सभागार में शाम 4 बजे आयोजित विकल्प काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार ओम कटारा ने की। काव्य संध्या से पूर्व आयोजित विचार सत्र में प्रमुख वक्ता राजमल शर्मा ने भगत सिंह का प्रसिद्ध उद्धरण प्रस्तुत किया “साम्राज्यवाद ही युद्ध का कारण है। हम एक ऐसे समाज का निर्माण करना चाहते हैं जो हमेशा के लिए साम्राज्यवादी युद्धों का अंत कर दे। उन्होंने कहा कि भगत सिंह केवल क्रांतिकारी नहीं, बल्कि उच्च कोटि के विचारक और लेखक भी थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि “क्रांति बम और पिस्तौल का दर्शन नहीं है, विचारों की सान पर ही क्रांति की तलवार तेज होती है। काव्य गोष्ठी में सृजन और प्रतिरोध की अनुगूंज अध्यक्षीय उद्बोधन में ओम कटारा ने कहा कि भगत सिंह का नाम विश्व के क्रांतिकारी शहीदों में हमेशा ध्रुवतारे की तरह चमकता रहेगा। उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से भाव व्यक्त किया कि चलो जहां प्यासे होठों पर कोई नदी लहराती है। गोष्ठी का प्रारंभ कवि किशन वर्मा ने हाड़ौती कविता अरे बटोही थक मत जाज्यो, बटमारां को पहरो छै से किया। मयंक सोलंकी ने नवगीत में कहा कैसे हैं आर्तनाद, कैसा विध्वंस, सुलग उठे बम। गौरी शंकर जोशी ने भूख और असमानता पर तीखी कविता पढ़ी “कहा भूख ने प्यास से खुल कर बारम्बार, तेरे मेरे बीच में रोटी की दीवार।”विशिष्ट अतिथि विजय राघव ने ग़ज़ल में साम्राज्यवाद पर प्रहार किया “लूट के डॉलर पर इतराए अमरीकी मकड़ा।”विजय सिंह पालीवाल ने भगत सिंह को समर्पित कविता में कहा “अरे ओ भगतसिंह वाले, तुम हो आज़ादी की सोच के मतवाले।”प्रसिद्ध शायर चांद शेरी ने शेरों में विद्रोह का स्वर उठाया “घर खंजरों में अपना बनाया है तो शेरी, क्यों चैन से जीने की दुआ मांग रहे हो।” इन रचनाकारों ने भी किया काव्य पाठ गोष्ठी में विकल्प के अध्यक्ष दिनेश राय द्विवेदी, अहमद सिराज फारूकी, वेद प्रकाश, सीमा तबस्सुम, सत्येन्द्र वर्मा, बी.एल. वर्मा, महेन्द्र नेह, नारायण शर्मा, कृष्ण लाल वर्मा सहित अन्य कवियों ने अपनी प्रतिनिधि कविताएं पढ़ीं। श्रद्धांजलि और जन अभियान विकल्प की टीम ने पहले नगर के प्रमुख केंद्रों राजकीय महाविद्यालय स्थित भगत सिंह प्रतिमा पर क्रांतिकारी श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद सी.बी. गार्डन, विवेकानंद स्मारक और अंबेडकर प्रतिमा परिसर में भगत सिंह के विचारों पर आधारित पोस्टर प्रदर्शन किया गया। इस जन अभियान का संचालन राजेन्द्र जैन, महेन्द्र पांडेय, अब्दुल गफूर, नारायण शर्मा और शब्बीर अहमद ने किया।विकल्प जन सांस्कृतिक मंच ने इस कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को भगत सिंह के क्रांतिकारी विचारों और साम्राज्यवाद-विरोधी चेतना से जोड़ने का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों और श्रोताओं ने शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।4
- कोटा के नांता थाना क्षेत्र के नया खेड़ा इलाके में रविवार को दो पक्षों के बीच जमकर विवाद हो गया, जो देखते ही देखते हिंसक झगड़े में बदल गया। दोनों पक्षों के लोग लाठी-डंडे लेकर एक-दूसरे पर टूट पड़े। मारपीट की इस घटना का वीडियो मौके पर मौजूद एक व्यक्ति ने बना लिया, जो अब सामने आया है। जानकारी के अनुसार शंकर सुमन ढाबा, नया खेड़ा के पास 4 से 5 बाइक पर सवार होकर आए कुछ लोगों ने ढाबे पर तोड़फोड़ शुरू कर दी और वहां मौजूद लोगों के साथ मारपीट की। झगड़े में दोनों पक्षों के करीब 5 से 6 लोग घायल हो गए। मारपीट में घायल विष्णु, ब्रजमोहन और निर्मल को गंभीर चोटें आई हैं, जिन्हें इलाज के लिए एमबीएस अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं बीच-बचाव करने आए लोरीक गुर्जर पर भी हमला किया गया, जिससे उसके हाथ-पैर और सिर में गंभीर चोट आई।2
- कोटा-झालावाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर दरा स्टेशन के समीप सोमवार को यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। बताया जा रहा है कि इस मार्ग पर रविवार को एक ट्रक दरा घाटी में खराब होने के बाद जाम के हालात बने। इसके चलते सोमवार को भी लोगो को जाम का सामना करना पड़ा। वाहनों की कतारों के चलते दरा स्टेशन के पास यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमराई रही जिससे दोनों तरफ से रेंग रेंग कर वाहन चल रहे हैं। ऐसे में एक वाहन को दरा घाटी पार करने में एक घंटे से ज्यादा का वक्त लग रहा है। सोमवार दोपहर करीब 2 बजे कनवास थाना SI से मिली जानकारी के अनुसार NH -52 पर जाम नहीं है। रविवार से ही इस रोड पर वाहनों का दबाव है। सुबह से ही कोटा से झालावाड़ व झालावाड़ से कोटा आने वाली दोनों लाइन फुल चल रही है। वाहन धीमी गति से चल रहे हैं। सांगोद डीएसपी भी मौके पर RAC के जवान, मोड़क थाना, कनवास थाना का जाप्ता भी मौजूद हैं। यातायात सुधार करने में लगे है। घाटी क्षेत्र होने के कारण सड़क संकरी है, दरा की नाल से एक एक करके वाहनों को निकाला जा रहा है। दरअसल दरा की नाल में संकरा सिंगल-लेन पुल है। यह स्थिति बॉटलनेक बनाती है, जहां आमने-सामने से आने वाले भारी वाहनों के कारण यातायात ठप हो जाता है। पश्चिम-मध्य रेलवे के कोटा मंडल ने दरा घाटी में रेलवे अंडरपास के निर्माण के लिए 9.5 करोड़ रुपए स्वीकृत कर दिया।1
- कोटा में ब्याज के पैसों के लेन-देन को लेकर घर में अकेला पाकर एक महिला की गला दबाकर हत्या कर दी गई। आरोपी ने वारदात के बाद नकदी और आभूषण लेकर फरार होते हुए इसे लूट का रूप देने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने 24 घंटे में मर्डर का खुलासा करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।1
- Post by VKH NEWS1
- Post by अप्सरा अंसारी जिलाप्रभारी कोटा उत्तर महिला कांग्रेस सेवादल Ansari2
- केशवरायपाटन,नोताडा क्षेत्र में अवैध खनन पर कोटा माइनिंग विभाग की टीम ने की कार्रवाई, दो वाहनों पर लगाया 2लाख 37 हजार का जुर्माना1
- कोटा जिले से सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ताओं ने लिया भाग कोटा। केंद्र सरकार की मजदूर-विरोधी, किसान-विरोधी और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ 24 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली जन आक्रोश रैली में कोटा जिले से सैकड़ों माकपा कार्यकर्ता, मजदूर, किसान और महिलाएं शामिल हुए। इस रैली में कोटा से लगभग 200 महिला-पुरुषों के जत्थे ने दिल्ली रैली में शिरकत की। जत्थे में 57 महिलाएं शामिल हैं। रैली में शामिल होने वाले कोटा जिले के जत्थे का नेतृत्व माकपा जिला सचिव कामरेड हबीब खान, कामरेड दुलीचंद बोरदा, सीटू जिला महामंत्री कामरेड उमाशंकर, कामरेड नरेंद्र सिंह, जनवादी महिला समिति की नेता कामरेड पुष्पा खींची, इटावा-पीपल्दा तहसील सचिव कामरेड मुकुट बिहारी जंगम और सीटू महामंत्री मुरारीलाल बैरवा ने किया। माकपा पीपल्दा-कोटा तहसील सचिव कामरेड मुकुट बिहारी जंगम ने बताया कि यह रैली आम जनता के हितों और जन मुद्दों को लेकर माकपा के नेतृत्व में आयोजित की जा रही है। इटावा-पीपल्दा क्षेत्र सहित कोटा शहर और आसपास के इलाकों से कार्यकर्ता सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। ये हैं जनाक्रोश रैली की प्रमुख मांगें जन आक्रोश रैली के माध्यम से कोटा की आम जनता की आवाज को बुलंद करते हुए निम्नलिखित प्रमुख मांगें उठाई गईं- मजदूर विरोधी चारों श्रम संहिताओं (लेबर कोड बिल) को तुरंत रद्द किया जाए और पूर्व के सभी 44 मजदूर हितैषी श्रम कानूनों को वापस लागू किया जाए। ग्रामीण मजदूरों को बर्बाद करने वाले वी.बी.जी. राम जी मनरेगा विधेयक 2025 को रद्द किया जाए। आम बिजली उपभोक्ताओं की जेब काटने वाले बिजली बिल विधेयक 2025 को वापस लिया जाए। किसान विरोधी और खेती-किसानी को बर्बाद करने वाले बीज विधेयक 2025 को रद्द किया जाए। अमेरिका के साथ की गई व्यापारिक ट्रेड डील को तुरंत रद्द किया जाए। निर्माण मजदूरों की श्रमिक योजनाओं में कटौती बंद की जाए। श्रम कल्याण बोर्ड से सरकार द्वारा उधार लिए गए 385.50 करोड़ रुपए वापस जमा किए जाएं। एक साल से जे.के. मजदूरों का बकाया वेतन 18% ब्याज सहित राजस्थान सरकार द्वारा भुगतान कराया जाए। कृष्णा ट्रेडिंग कंपनी द्वारा 2022 में इटावा कृषि उपज मंडी में लुटे गए 102 किसानों की सरसों की 1 करोड़ 46 लाख रुपए की राशि का शीघ्र भुगतान किया जाए। सभी असंगठित क्षेत्र के निर्माण मजदूरों और मेहनतकश वर्ग को हर माह 10 हजार रुपए की सामाजिक सुरक्षा पेंशन लागू की जाए। 2018 से बंद शुभशक्ति योजना पोर्टल को चालू कर हिताधिकारियों की पुत्रियों को 55 हजार रुपये की सहायता राशि उनके खातों में जमा की जाए। किसानों की संपूर्ण फसल की खरीद पर एम.एस.पी. की कानूनी गारंटी लागू की जाए। 2022-23, 2024 और 2025 में बाढ़ व अतिवृष्टि से नष्ट फसलों व मकानों का मुआवजा शीघ्र पीड़ित परिवारों के खातों में डाला जाए। राजीविका सुविधा कर्मियों को राज्य कर्मचारियों का दर्जा दिया जाए और रुका हुआ वेतन भुगतान किया जाए। कर्मचारियों की नई पेंशन योजना रद्द कर पुरानी पेंशन योजना को बहाल किया जाए। आसमान छूती महंगाई पर अंकुश लगाया जाए और सरकारी संस्थानों का निजीकरण बंद किया जाए। मजदूर-किसान आंदोलनों में पुलिस हस्तक्षेप बंद किया जाए। श्रमिक योजनाओं के आवेदनों को श्रम विभाग अधिकारियों द्वारा केवल रजिस्टर्ड निर्माण मजदूर यूनियन के अध्यक्ष/महामंत्री के हस्ताक्षर पर ही मान्य किया जाए ताकि भ्रष्टाचार रोका जा सके। मनरेगा और शहरी रोजगार योजना में 200 दिन काम और 600 रुपए दैनिक मजदूरी लागू की जाए। मजदूरों के ठहरने के लिए कस्बों और शहरों में शौचालय सहित मजदूर चौखटियों का निर्माण कराया जाए। सभी के लिए न्यूनतम वेतन 26,000 रुपए प्रति माह लागू किया जाए। इनके अलावा अन्य जनहितैषी मुद्दों को लेकर कोटा की मेहनतकश जनता रामलीला मैदान में अपनी आवाज बुलंद करेगी।4