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बुधवार रात सुभाष नगर थाने के समीप एक मामूली विवाद ने खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। इस दौरान एक युवक ने दूसरे युवक के साथ जमकर मारपीट की, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को तुरंत इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घायल धर्मेंद्र मिश्रा ने बुधवार रात करीब 8:30 बजे जिला अस्पताल में बताया कि वह सुभाष नगर थाने के पास पेट्रोल पंप के समीप बैठा था। इसी दौरान सोनू लोट वहां आया और गाली गलौज करने लगा। जब धर्मेंद्र ने उसे वहां से जाने को कहा, तो सोनू ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। इस मारपीट में धर्मेंद्र के शरीर के विभिन्न हिस्सों पर काफी गहरी चोटें आई हैं। उसका इलाज जिला अस्पताल के ट्रॉमा वार्ड में चल रहा है।
Puneet jain
बुधवार रात सुभाष नगर थाने के समीप एक मामूली विवाद ने खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। इस दौरान एक युवक ने दूसरे युवक के साथ जमकर मारपीट की, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को तुरंत इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घायल धर्मेंद्र मिश्रा ने बुधवार रात करीब 8:30 बजे जिला अस्पताल में बताया कि वह सुभाष नगर थाने के पास पेट्रोल पंप के समीप बैठा था। इसी दौरान सोनू लोट वहां आया और गाली गलौज करने लगा। जब धर्मेंद्र ने उसे वहां से जाने को कहा, तो सोनू ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। इस मारपीट में धर्मेंद्र के शरीर के विभिन्न हिस्सों पर काफी गहरी चोटें आई हैं। उसका इलाज जिला अस्पताल के ट्रॉमा वार्ड में चल रहा है।
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- राजस्थान के भीलवाड़ा में नौकरी दिलाने के बहाने दुष्कर्म, जबरन निकाह और करोड़ों रुपये की ठगी का गंभीर आरोप सामने आया है। इस मामले में शिकायत दर्ज की गई है।1
- भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जनजाति (एसटी) मोर्चा के जिलाध्यक्ष अजय सिंह मीणा का शाहपुरा आगमन पर कार्यकर्ताओं द्वारा भव्य स्वागत और अभिनन्दन किया गया। यह स्वागत कार्यक्रम रामद्वारा के बाहर आयोजित हुआ, जहाँ भाजपा कार्यकर्ताओं और समाज के गणमान्य लोगों ने मीणा को माला व साफा पहनाकर उनका अभिनंदन किया। इस स्वागत कार्यक्रम का नेतृत्व रामसिंह मीणा ने किया। इस अवसर पर ग्रामीण सोशल मीडिया संयोजक रामसिंह मीणा, चरण मीणा, पूर्व सीआर मंडल अध्यक्ष ब्रजराज कुचलवाडा, सुरेश चंद्र घुसर, ओबीसी मोर्चा जिला संयोजक सोशल मीडिया हंसराज जाट, बबलू मीणा और गोपाल कहार सहित कई भाजपा कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष अजय सिंह मीणा का फूल-माला व साफा पहनाकर स्वागत किया। इस दौरान संगठन को और अधिक मजबूत बनाने के विषय पर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई।3
- चित्तौड़गढ़ जिले की कपासन पुलिस के खिलाफ पत्रकारों में भारी रोष देखा जा रहा है, जहाँ पत्रकारों का आरोप है कि पुलिस लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को गुमराह कर रही है। यह रोष विशेषकर पुलिसकर्मियों के मोबाइल स्टेटस को लेकर है, जहाँ जवान से लेकर थानाधिकारी तक अपराधियों की तस्वीरें अपने स्टेटस पर लगा रहे हैं, जबकि पत्रकारों को ऐसे कार्य करने से सख्त मनाही है। इस भेदभावपूर्ण व्यवहार के कारण, चित्तौड़गढ़ पुलिस मीडिया ग्रुप और PRO ग्रुप से एक पत्रकार को बाहर कर दिया गया है। बताया गया है कि पत्रकार द्वारा माफी मांगने के बाद भी ग्रुप के एडमिन द्वारा उन्हें वापस नहीं जोड़ा जा रहा है, जिससे पत्रकारों में असंतोष और गहरा गया है।1
- राजस्थान सरकार ने चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार स्थित मेवाड़ विश्वविद्यालय में सभी नए प्रवेशों पर आगामी आदेश तक तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। उच्च शिक्षा विभाग ने यह सख्त प्रशासनिक निर्णय फर्जी डिग्री प्रकरण, जांच में सामने आई कथित गंभीर अनियमितताओं और विभिन्न स्तरों पर जारी जांचों को ध्यान में रखते हुए लिया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के हित, उच्च शिक्षा व्यवस्था की साख और जनहित को सुरक्षित रखना बताया गया है, जिसके तहत विश्वविद्यालय के सभी शैक्षणिक एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में नए दाखिले प्रतिबंधित रहेंगे। यह कार्रवाई विश्वविद्यालय के खिलाफ फर्जी डिग्रियां जारी करने और अन्य प्रशासनिक व शैक्षणिक अनियमितताओं की शिकायतों के बाद शुरू हुई जांच पर आधारित है। राज्य सरकार ने उदयपुर संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित की थी, जिसने अपनी रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया है। इसी रिपोर्ट के आधार पर उच्च शिक्षा विभाग ने मेवाड़ विश्वविद्यालय चित्तौड़गढ़ अधिनियम-2009 की धारा 44(1) के तहत विश्वविद्यालय को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था। सूत्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय ने अपना जवाब प्रस्तुत कर दिया है, जिसकी विभागीय स्तर पर समीक्षा जारी है। इसके अतिरिक्त, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने भी फर्जी डिग्री प्रकरणों की जांच के दौरान विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ कर्मचारियों और पदाधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की है, जिसमें कुछ गिरफ्तारियां भी शामिल हैं, जिन्हें सरकार ने गंभीरता से लिया है। सरकारी आदेश में इस बात पर जोर दिया गया है कि विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न मामलों की जांच अभी जारी है और कुछ मामलों में कानूनी कार्रवाई भी विचाराधीन है। साथ ही, मेवाड़ विश्वविद्यालय अधिनियम-2009 की कुछ धाराओं के संभावित उल्लंघन से संबंधित परिस्थितियाँ भी सरकार के संज्ञान में आई हैं। सरकार का मानना है कि इन परिस्थितियों में नए प्रवेश जारी रखना विद्यार्थियों के भविष्य के लिए उचित नहीं होगा। संयुक्त सचिव डॉ. मुकेश कुमार शर्मा की ओर से जारी इस आदेश के बाद मेवाड़ विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है, जिससे आगामी शैक्षणिक सत्र को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। शिक्षा जगत की निगाहें अब सरकार की अगली कार्रवाई, विभागीय जांच के अंतिम निष्कर्ष और विश्वविद्यालय प्रशासन के जवाब पर टिकी हुई हैं, जिसके बाद ही प्रवेश प्रक्रिया और विश्वविद्यालय के भविष्य पर अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।1
- NH 148 D पर स्थित परासोली चौराहा लगातार सड़क हादसों का मुख्य कारण बनता जा रहा है। सड़क निर्माण के दौरान प्रभावित लोगों को मुआवजा दिए जाने के बावजूद, आज तक कई मकान मौके से नहीं हटाए गए हैं। इन निर्माणों के कारण आसींद से बदनोर और बदनोर से आसींद आने-जाने वाले वाहन चालकों को दूसरी ओर से आने वाला यातायात स्पष्ट दिखाई नहीं देता, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं और लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं। यह चौराहा वाहन चालकों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन चुका है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जब NH 148 D का निर्माण कार्य हुआ था तब यह क्षेत्र आसींद प्रशासन के अधीन था, लेकिन वर्तमान में यह बदनोर उपखंड प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में आता है। इस गंभीर समस्या पर प्रशासन और NHAI अधिकारियों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। हालांकि, सरकार द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारों से अतिक्रमण हटाने का एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है, और हाल ही में आसींद तहसीलदार जयसिंह के नेतृत्व में NH 148 D पर चोटियास गांव तक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी की गई। मगर, बदनोर क्षेत्र शुरू होने के कारण यह कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी, जिससे परासोली चौराहे पर कई निर्माण अभी भी सड़क की जद में बने हुए हैं। मुआवजा मिलने के बाद भी इन निर्माणों को अब तक क्यों नहीं हटाया गया और आखिर बदनोर प्रशासन एवं NHAI इस समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाल पा रहे हैं, यह बड़ा प्रश्न है। लगातार हो रहे इन हादसों के कारण स्थानीय लोगों और वाहन चालकों में भारी रोष व्याप्त है, और वे प्रशासन से जल्द से जल्द उचित कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं।4
- भीलवाड़ा जिले के गुरला टोल के पास स्थित नरसिंहपुरा गांव में बुधवार को एक खेत की पत्थर की दीवार में अजगर दिखाई देने से ग्रामीणों में हलचल मच गई। खेत मालिक रमेश कुमावत ने तत्काल इसकी सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम और वन्यजीव रक्षक मौके पर पहुंचे, जिन्होंने रेस्क्यू के दौरान अजगर के साथ उसके अंडे भी सुरक्षित बाहर निकाले। वन्यजीव रक्षक नारायण लाल बैरवा ने बुधवार शाम लगभग 6 बजे जानकारी दी कि रमेश कुमावत के खेत में अजगर होने की सूचना वनपाल चंद्रपाल को दी गई। इसके बाद वन रक्षक दिनेश कुमार रेगर अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। टीम ने देखा कि अजगर दीवार के बीच सुरक्षित बैठा था, और उसे सावधानीपूर्वक बाहर निकालने के प्रयास में उसके अंडे भी दिखाई दिए। वन विभाग की टीम ने पूरी सतर्कता बरतते हुए अजगर और उसके अंडों को बिना किसी क्षति के सुरक्षित रेस्क्यू किया। वन विभाग के रेंजर प्रशांत भट्ट के निर्देशानुसार, अजगर और उसके अंडों को सुरक्षित रूप से वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया। इस अभियान के दौरान दिनेश कुमार, वनरक्षक सोहनलाल, वनरक्षक योगेंद्र सिंह, वन्यजीव रक्षक नारायण लाल बैरवा और उनकी टीम मौजूद रही। वन विभाग के दिनेश कुमार ने बताया कि यह भारतीय रॉक पाइथन एक विशाल और विषहीन अजगर प्रजाति है, जिसकी लंबाई 20 फीट तक हो सकती है। यह प्रजाति भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत संरक्षित है, और गर्मी के मौसम में मादा अजगर अंडे देती है तथा उनकी सुरक्षा करती है। वन विभाग ने इस दौरान ग्रामीणों को वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक किया और लोगों से अपील की है कि किसी भी वन्यजीव को नुकसान न पहुंचाएं, बल्कि किसी क्षेत्र में अजगर या अन्य वन्यजीव दिखाई देने पर तुरंत वन विभाग को सूचना दें। विभाग ने यह भी बताया कि वन्यजीव पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनका संरक्षण करना हम सभी की जिम्मेदारी है।1
- भीलवाड़ा शहर के सुभाष नगर थाना क्षेत्र में एक मामूली बात पर शुरू हुआ विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। यह घटना प्राइवेट बस स्टैंड के पास स्थित पेट्रोल पंप के निकट घटी, जहां शाहपुरा निवासी धर्मेंद्र मिश्रा और सोनू लौट के बीच किसी बात को लेकर बहस हुई। विवाद इतना बढ़ गया कि सोनू लौट ने धर्मेंद्र मिश्रा के साथ मारपीट करना शुरू कर दिया। इस मारपीट में धर्मेंद्र मिश्रा गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि सोनू लौट घटना स्थल से फरार हो गया। घायल धर्मेंद्र मिश्रा को भीलवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज जारी है।1