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मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में एक बड़ा हादसा हुआ है।

7 hrs ago
user_Dileep Kumar rajak
Dileep Kumar rajak
Farmer पन्ना, पन्ना, मध्य प्रदेश•
7 hrs ago

मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में एक बड़ा हादसा हुआ है।

More news from Madhya Pradesh and nearby areas
  • पन्ना जिले में एक तेज़ रफ्तार अनियंत्रित बाइक के फिसलने से दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना ने एक बार फिर सड़क पर रफ्तार के कहर को सामने लाया है, जहाँ वाहन पर से नियंत्रण खोने के कारण यह हादसा हुआ और युवकों को गंभीर चोटें आईं।
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    पन्ना जिले में एक तेज़ रफ्तार अनियंत्रित बाइक के फिसलने से दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना ने एक बार फिर सड़क पर रफ्तार के कहर को सामने लाया है, जहाँ वाहन पर से नियंत्रण खोने के कारण यह हादसा हुआ और युवकों को गंभीर चोटें आईं।
    user_Rupesh Jain
    Rupesh Jain
    में दैनिक भास्कर में संवाददाता हु Panna, Madhya Pradesh•
    4 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की शाहनगर तहसील अंतर्गत ग्राम लमतरा में राजस्व और वन भूमि को लेकर एक गंभीर विवाद सामने आया है। ग्रामीणों और पीड़ित पक्षों ने हल्का पटवारी और वन विभाग के कर्मचारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया है, जिसमें गरीब आदिवासियों और किसानों की जमीनों पर जबरन कब्जा करने तथा नियमों को ताक पर रखकर उनके अधिकारों का हनन करने की बात कही गई है। इस संबंध में, के.पी. सिंह बुंदेला के नेतृत्व में पीड़ितों ने पन्ना कलेक्टर को एक शिकायती ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि ग्राम लमतरा के किसान पीढ़ी-दर-पीढ़ी जिन जमीनों पर खेती करते आ रहे हैं, हल्का पटवारी ने दुर्भावनापूर्ण तरीके से उन पर जेसीबी मशीन चलवाकर राजस्व एवं भूमि स्वामियों की मेड़-बंधान, फसल सुरक्षा दीवार (बाउंड्रीवॉल) और अन्य निर्माणों को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया। इस ज्यादती के विरोध में बीती 7 जून को ग्रामीणों ने एक ‘महापंचायत’ भी बुलाई थी, और समाधान न होने पर नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा था। एक बड़ी धांधली का खुलासा करते हुए शिकायत में बताया गया है कि शाहनगर तहसीलदार द्वारा जारी एक प्रतिवेदन (दिनांक 13/06/2026, क्रमांक/350/प्रवाचक/2026) के अनुसार, एक व्यवस्थापन पट्टा 'ममता बाई बेवा बालाप्रसाद परोहा' के नाम पर जारी किया गया है। इस पट्टे में बालाप्रसाद परोहा को 'मृत' घोषित कर दिया गया है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि बालाप्रसाद परोहा आज भी जीवित हैं। जीवित व्यक्ति को मृत बताकर किए गए इस भूमि व्यवस्थापन के खेल ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला सिर्फ राजस्व भूमि तक सीमित नहीं है, बल्कि वन विभाग के कर्मचारियों पर भी संगीन आरोप लगे हैं। ज्ञापन के अनुसार, सलैया (फेरंन सिंह) वन विभाग के कर्मचारियों ने गांव में आकर गरीब आदिवासियों से उनके 'वन अधिकार दावा आवेदन' की मूल पावतियां (Receipts) ले ली हैं और अब उन्हें वापस नहीं कर रहे हैं। जिन भूमियों पर आदिवासी सालों से खेती कर रहे हैं, वन विभाग अब वहां जबरन नर्सरी बनाने की तैयारी में है। पीड़ितों ने अपनी पावतियां वापस दिलाने की मांग की है ताकि वे कोर्ट या प्रशासन के सामने न्याय की लड़ाई लड़ सकें। आरोप है कि आदिवासियों के वन अधिकार के दावे पिछले डेढ़ वर्ष से एसडीएम कार्यालय में लंबित पड़े हैं, जिन पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। वन अधिनियम की उपधाराओं के तहत सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कोई बेदखली की जा सकती है, लेकिन शाहनगर क्षेत्र के पगरी, बरतला, और कल्दा क्षेत्र के बड़ी खमरिया जैसे गांवों में नियमों को ताक पर रखकर आदिवासियों को हटाया जा रहा है। पीड़ितों की प्रमुख मांगों में जीवित व्यक्ति को मृत बताकर किए गए फर्जी भूमि व्यवस्थापन और पट्टे की उच्च स्तरीय जांच, हल्का पटवारी द्वारा जेसीबी चलाकर किसानों की फसलों और मेड़ को नुकसान पहुंचाने की जांच कर मुआवजा प्रदान करना, वन विभाग के कर्मचारियों से आदिवासियों के दावों की मूल पावती वापस दिलाना, और वन अधिकार अधिनियम के तहत लंबित दावों का जल्द से जल्द विधि अनुसार निराकरण करना शामिल है। अब यह देखना होगा कि पन्ना जिला प्रशासन इन गंभीर आरोपों और दस्तावेजी साक्ष्यों के सामने आने के बाद दोषी कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई करता है।
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    मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की शाहनगर तहसील अंतर्गत ग्राम लमतरा में राजस्व और वन भूमि को लेकर एक गंभीर विवाद सामने आया है। ग्रामीणों और पीड़ित पक्षों ने हल्का पटवारी और वन विभाग के कर्मचारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया है, जिसमें गरीब आदिवासियों और किसानों की जमीनों पर जबरन कब्जा करने तथा नियमों को ताक पर रखकर उनके अधिकारों का हनन करने की बात कही गई है। इस संबंध में, के.पी. सिंह बुंदेला के नेतृत्व में पीड़ितों ने पन्ना कलेक्टर को एक शिकायती ज्ञापन सौंपा है।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि ग्राम लमतरा के किसान पीढ़ी-दर-पीढ़ी जिन जमीनों पर खेती करते आ रहे हैं, हल्का पटवारी ने दुर्भावनापूर्ण तरीके से उन पर जेसीबी मशीन चलवाकर राजस्व एवं भूमि स्वामियों की मेड़-बंधान, फसल सुरक्षा दीवार (बाउंड्रीवॉल) और अन्य निर्माणों को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया। इस ज्यादती के विरोध में बीती 7 जून को ग्रामीणों ने एक ‘महापंचायत’ भी बुलाई थी, और समाधान न होने पर नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा था।

एक बड़ी धांधली का खुलासा करते हुए शिकायत में बताया गया है कि शाहनगर तहसीलदार द्वारा जारी एक प्रतिवेदन (दिनांक 13/06/2026, क्रमांक/350/प्रवाचक/2026) के अनुसार, एक व्यवस्थापन पट्टा 'ममता बाई बेवा बालाप्रसाद परोहा' के नाम पर जारी किया गया है। इस पट्टे में बालाप्रसाद परोहा को 'मृत' घोषित कर दिया गया है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि बालाप्रसाद परोहा आज भी जीवित हैं। जीवित व्यक्ति को मृत बताकर किए गए इस भूमि व्यवस्थापन के खेल ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामला सिर्फ राजस्व भूमि तक सीमित नहीं है, बल्कि वन विभाग के कर्मचारियों पर भी संगीन आरोप लगे हैं। ज्ञापन के अनुसार, सलैया (फेरंन सिंह) वन विभाग के कर्मचारियों ने गांव में आकर गरीब आदिवासियों से उनके 'वन अधिकार दावा आवेदन' की मूल पावतियां (Receipts) ले ली हैं और अब उन्हें वापस नहीं कर रहे हैं। जिन भूमियों पर आदिवासी सालों से खेती कर रहे हैं, वन विभाग अब वहां जबरन नर्सरी बनाने की तैयारी में है। पीड़ितों ने अपनी पावतियां वापस दिलाने की मांग की है ताकि वे कोर्ट या प्रशासन के सामने न्याय की लड़ाई लड़ सकें।

आरोप है कि आदिवासियों के वन अधिकार के दावे पिछले डेढ़ वर्ष से एसडीएम कार्यालय में लंबित पड़े हैं, जिन पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। वन अधिनियम की उपधाराओं के तहत सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कोई बेदखली की जा सकती है, लेकिन शाहनगर क्षेत्र के पगरी, बरतला, और कल्दा क्षेत्र के बड़ी खमरिया जैसे गांवों में नियमों को ताक पर रखकर आदिवासियों को हटाया जा रहा है।

पीड़ितों की प्रमुख मांगों में जीवित व्यक्ति को मृत बताकर किए गए फर्जी भूमि व्यवस्थापन और पट्टे की उच्च स्तरीय जांच, हल्का पटवारी द्वारा जेसीबी चलाकर किसानों की फसलों और मेड़ को नुकसान पहुंचाने की जांच कर मुआवजा प्रदान करना, वन विभाग के कर्मचारियों से आदिवासियों के दावों की मूल पावती वापस दिलाना, और वन अधिकार अधिनियम के तहत लंबित दावों का जल्द से जल्द विधि अनुसार निराकरण करना शामिल है। अब यह देखना होगा कि पन्ना जिला प्रशासन इन गंभीर आरोपों और दस्तावेजी साक्ष्यों के सामने आने के बाद दोषी कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई करता है।
    user_Sandeep shukla
    Sandeep shukla
    पत्रकारिता Devendranagar, Panna•
    7 hrs ago
  • पन्ना जिले की पवई तहसील के ग्राम हथकुरी में एक पीपल के पेड़ के नीचे हनुमान जी की प्रतिमा निकली है। यह घटना तब सामने आई जब हनुमान जी एक बालक अजीत गर्ग के सपने में आए थे। इस सपने के बाद, ग्रामीणों ने सुबह मिलकर पीपल के पेड़ के नीचे से प्रतिमा को निकाला।
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    पन्ना जिले की पवई तहसील के ग्राम हथकुरी में एक पीपल के पेड़ के नीचे हनुमान जी की प्रतिमा निकली है। यह घटना तब सामने आई जब हनुमान जी एक बालक अजीत गर्ग के सपने में आए थे। इस सपने के बाद, ग्रामीणों ने सुबह मिलकर पीपल के पेड़ के नीचे से प्रतिमा को निकाला।
    user_Sitaram rai
    Sitaram rai
    Video Creator सिमरिया, पन्ना, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों का खंडन करते हुए इन आरोपों को भ्रम पैदा करने वाला एक षडयंत्र करार दिया है। पार्टी ने जोर देकर कहा कि प्रदेश की जनता कांग्रेस के इस षडयंत्र को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगी। बीजेपी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक लोकप्रिय नेता बताया जो प्रदेश को विकसित राज्य बनाने की दिशा में दिन-रात काम कर रहे हैं। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह से गलत और असत्य बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 2023 में दाखिल नामांकन के अनुसार उनके पास 17 एकड़ जमीन थी, जो 2026 में भी उतनी ही है। उनकी पत्नी सीमा यादव के नाम पर दर्ज 12.29 एकड़ जमीन में भी 2026 तक कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। खंडेलवाल ने यह भी बताया कि आरोपों में उल्लिखित सिद्धि विनायक कंपनी, जिसके पास 2023 में 68 एकड़ जमीन थी, जून में घटकर 65 एकड़ रह गई; मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2017 में ही इसके डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया था। खंडेलवाल ने आगे बताया कि मुख्यमंत्री के बेटे वैभव के पास भी 2023 से पहले जो 16 एकड़ जमीन थी, उसमें डॉ. मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद कोई बदलाव नहीं आया। ये सभी जमीनें मास्टर प्लान लागू होने से पहले की थीं। उनकी बहू शालिनी यादव द्वारा 10 एकड़ की कृषि भूमि खरीदी गई थी, जो मास्टर प्लान एरिया के बाहर की है। उन्होंने आरोपों में जिन रिश्तेदारों का जिक्र किया गया है, उन्हें भी पूरी तरह गलत बताया, क्योंकि मुख्यमंत्री और उनके परिवार का उनसे कोई लेना-देना नहीं है और उन रिश्तेदारों का अपना स्वतंत्र अस्तित्व है। खंडेलवाल ने यह भी सूचित किया कि रिश्तेदारों पर लगाए गए आरोपों में दिए गए तथ्य भी गलत हैं और वे भी अपनी बात रखेंगे तथा कार्रवाई करेंगे। प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल ने कांग्रेस पर पिछड़े वर्ग के मुख्यमंत्रियों को लगातार निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब-जब प्रदेश को पिछड़े वर्ग का मुख्यमंत्री मिला है, चाहे वह उमा भारती हों, शिवराज सिंह चौहान हों, या डॉ. मोहन यादव हों, कांग्रेस ने हमेशा उनके खिलाफ षडयंत्र करके उन्हें कमजोर करने का प्रयास किया है। उन्होंने पूरी विनम्रता और सख्ती के साथ कांग्रेस के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि कांग्रेसी मुख्यमंत्री को उनके विकास कार्यों में पीछे नहीं कर सके, इसलिए इस तरह का षडयंत्र रच रहे हैं, जिसे प्रदेश की जनता कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।
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    भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों का खंडन करते हुए इन आरोपों को भ्रम पैदा करने वाला एक षडयंत्र करार दिया है। पार्टी ने जोर देकर कहा कि प्रदेश की जनता कांग्रेस के इस षडयंत्र को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगी। बीजेपी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक लोकप्रिय नेता बताया जो प्रदेश को विकसित राज्य बनाने की दिशा में दिन-रात काम कर रहे हैं।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह से गलत और असत्य बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 2023 में दाखिल नामांकन के अनुसार उनके पास 17 एकड़ जमीन थी, जो 2026 में भी उतनी ही है। उनकी पत्नी सीमा यादव के नाम पर दर्ज 12.29 एकड़ जमीन में भी 2026 तक कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। खंडेलवाल ने यह भी बताया कि आरोपों में उल्लिखित सिद्धि विनायक कंपनी, जिसके पास 2023 में 68 एकड़ जमीन थी, जून में घटकर 65 एकड़ रह गई; मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2017 में ही इसके डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया था।

खंडेलवाल ने आगे बताया कि मुख्यमंत्री के बेटे वैभव के पास भी 2023 से पहले जो 16 एकड़ जमीन थी, उसमें डॉ. मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद कोई बदलाव नहीं आया। ये सभी जमीनें मास्टर प्लान लागू होने से पहले की थीं। उनकी बहू शालिनी यादव द्वारा 10 एकड़ की कृषि भूमि खरीदी गई थी, जो मास्टर प्लान एरिया के बाहर की है। उन्होंने आरोपों में जिन रिश्तेदारों का जिक्र किया गया है, उन्हें भी पूरी तरह गलत बताया, क्योंकि मुख्यमंत्री और उनके परिवार का उनसे कोई लेना-देना नहीं है और उन रिश्तेदारों का अपना स्वतंत्र अस्तित्व है। खंडेलवाल ने यह भी सूचित किया कि रिश्तेदारों पर लगाए गए आरोपों में दिए गए तथ्य भी गलत हैं और वे भी अपनी बात रखेंगे तथा कार्रवाई करेंगे।

प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल ने कांग्रेस पर पिछड़े वर्ग के मुख्यमंत्रियों को लगातार निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब-जब प्रदेश को पिछड़े वर्ग का मुख्यमंत्री मिला है, चाहे वह उमा भारती हों, शिवराज सिंह चौहान हों, या डॉ. मोहन यादव हों, कांग्रेस ने हमेशा उनके खिलाफ षडयंत्र करके उन्हें कमजोर करने का प्रयास किया है। उन्होंने पूरी विनम्रता और सख्ती के साथ कांग्रेस के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि कांग्रेसी मुख्यमंत्री को उनके विकास कार्यों में पीछे नहीं कर सके, इसलिए इस तरह का षडयंत्र रच रहे हैं, जिसे प्रदेश की जनता कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।
    user_BALKISHUN VISHWAKARMA
    BALKISHUN VISHWAKARMA
    Lawyer राजनगर, छतरपुर, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
  • देशभर में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से नए मेडिकल कॉलेजों के विकास पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। इस पहल को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि यह भविष्य में डॉक्टरों की संख्या में वृद्धि करने में सहायक होगी, जिससे लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच बेहतर हो सकेगी। उनका यह भी कहना है कि मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का यह विस्तार देश के समग्र विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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    देशभर में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से नए मेडिकल कॉलेजों के विकास पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। इस पहल को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि यह भविष्य में डॉक्टरों की संख्या में वृद्धि करने में सहायक होगी, जिससे लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच बेहतर हो सकेगी। उनका यह भी कहना है कि मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का यह विस्तार देश के समग्र विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
    user_Dilip Kumar Bharti
    Dilip Kumar Bharti
    Local News Reporter नरैनी, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    17 hrs ago
  • छतरपुर जिले के गौरिहार थाना क्षेत्र के मनूरिया गांव के एक दलित युवक ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय पहुँचकर गांव के कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। युवक का कहना है कि उसे फोन पर गाली-गलौज, अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए जान से मारने की धमकी दी गई है। पीड़ित युवक ने यह भी बताया कि पहले शिकायत दर्ज कराने के बावजूद उसे न्याय नहीं मिला, जिसके बाद उसने एसपी से मामले में कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में जिन लोगों पर आरोप लगे हैं, उनकी स्थानीय भाजपा नेताओं और जनप्रतिनिधियों के साथ तस्वीरें भी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई हैं। ये आरोप शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए हैं और मामले की जांच तथा कार्रवाई पुलिस द्वारा की जानी है।
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    छतरपुर जिले के गौरिहार थाना क्षेत्र के मनूरिया गांव के एक दलित युवक ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय पहुँचकर गांव के कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। युवक का कहना है कि उसे फोन पर गाली-गलौज, अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए जान से मारने की धमकी दी गई है।

पीड़ित युवक ने यह भी बताया कि पहले शिकायत दर्ज कराने के बावजूद उसे न्याय नहीं मिला, जिसके बाद उसने एसपी से मामले में कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में जिन लोगों पर आरोप लगे हैं, उनकी स्थानीय भाजपा नेताओं और जनप्रतिनिधियों के साथ तस्वीरें भी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई हैं। ये आरोप शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए हैं और मामले की जांच तथा कार्रवाई पुलिस द्वारा की जानी है।
    user_Bharat Junction News
    Bharat Junction News
    Local News Reporter छतरपुर, छतरपुर, मध्य प्रदेश•
    48 min ago
  • मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में एक बड़ा हादसा हुआ है।
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    मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में एक बड़ा हादसा हुआ है।
    user_Dileep Kumar rajak
    Dileep Kumar rajak
    Farmer पन्ना, पन्ना, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
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