मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की शाहनगर तहसील अंतर्गत ग्राम लमतरा में राजस्व और वन भूमि को लेकर एक गंभीर विवाद सामने आया है। ग्रामीणों और पीड़ित पक्षों ने हल्का पटवारी और वन विभाग के कर्मचारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया है, जिसमें गरीब आदिवासियों और किसानों की जमीनों पर जबरन कब्जा करने तथा नियमों को ताक पर रखकर उनके अधिकारों का हनन करने की बात कही गई है। इस संबंध में, के.पी. सिंह बुंदेला के नेतृत्व में पीड़ितों ने पन्ना कलेक्टर को एक शिकायती ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि ग्राम लमतरा के किसान पीढ़ी-दर-पीढ़ी जिन जमीनों पर खेती करते आ रहे हैं, हल्का पटवारी ने दुर्भावनापूर्ण तरीके से उन पर जेसीबी मशीन चलवाकर राजस्व एवं भूमि स्वामियों की मेड़-बंधान, फसल सुरक्षा दीवार (बाउंड्रीवॉल) और अन्य निर्माणों को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया। इस ज्यादती के विरोध में बीती 7 जून को ग्रामीणों ने एक ‘महापंचायत’ भी बुलाई थी, और समाधान न होने पर नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा था। एक बड़ी धांधली का खुलासा करते हुए शिकायत में बताया गया है कि शाहनगर तहसीलदार द्वारा जारी एक प्रतिवेदन (दिनांक 13/06/2026, क्रमांक/350/प्रवाचक/2026) के अनुसार, एक व्यवस्थापन पट्टा 'ममता बाई बेवा बालाप्रसाद परोहा' के नाम पर जारी किया गया है। इस पट्टे में बालाप्रसाद परोहा को 'मृत' घोषित कर दिया गया है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि बालाप्रसाद परोहा आज भी जीवित हैं। जीवित व्यक्ति को मृत बताकर किए गए इस भूमि व्यवस्थापन के खेल ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला सिर्फ राजस्व भूमि तक सीमित नहीं है, बल्कि वन विभाग के कर्मचारियों पर भी संगीन आरोप लगे हैं। ज्ञापन के अनुसार, सलैया (फेरंन सिंह) वन विभाग के कर्मचारियों ने गांव में आकर गरीब आदिवासियों से उनके 'वन अधिकार दावा आवेदन' की मूल पावतियां (Receipts) ले ली हैं और अब उन्हें वापस नहीं कर रहे हैं। जिन भूमियों पर आदिवासी सालों से खेती कर रहे हैं, वन विभाग अब वहां जबरन नर्सरी बनाने की तैयारी में है। पीड़ितों ने अपनी पावतियां वापस दिलाने की मांग की है ताकि वे कोर्ट या प्रशासन के सामने न्याय की लड़ाई लड़ सकें। आरोप है कि आदिवासियों के वन अधिकार के दावे पिछले डेढ़ वर्ष से एसडीएम कार्यालय में लंबित पड़े हैं, जिन पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। वन अधिनियम की उपधाराओं के तहत सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कोई बेदखली की जा सकती है, लेकिन शाहनगर क्षेत्र के पगरी, बरतला, और कल्दा क्षेत्र के बड़ी खमरिया जैसे गांवों में नियमों को ताक पर रखकर आदिवासियों को हटाया जा रहा है। पीड़ितों की प्रमुख मांगों में जीवित व्यक्ति को मृत बताकर किए गए फर्जी भूमि व्यवस्थापन और पट्टे की उच्च स्तरीय जांच, हल्का पटवारी द्वारा जेसीबी चलाकर किसानों की फसलों और मेड़ को नुकसान पहुंचाने की जांच कर मुआवजा प्रदान करना, वन विभाग के कर्मचारियों से आदिवासियों के दावों की मूल पावती वापस दिलाना, और वन अधिकार अधिनियम के तहत लंबित दावों का जल्द से जल्द विधि अनुसार निराकरण करना शामिल है। अब यह देखना होगा कि पन्ना जिला प्रशासन इन गंभीर आरोपों और दस्तावेजी साक्ष्यों के सामने आने के बाद दोषी कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई करता है।
मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की शाहनगर तहसील अंतर्गत ग्राम लमतरा में राजस्व और वन भूमि को लेकर एक गंभीर विवाद सामने आया है। ग्रामीणों और पीड़ित पक्षों ने हल्का पटवारी और वन विभाग के कर्मचारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया है, जिसमें गरीब आदिवासियों और किसानों की जमीनों पर जबरन कब्जा करने तथा नियमों को ताक पर रखकर उनके अधिकारों का हनन करने की बात कही गई है। इस संबंध में, के.पी. सिंह बुंदेला के नेतृत्व में पीड़ितों ने पन्ना कलेक्टर को एक शिकायती ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि ग्राम लमतरा के किसान पीढ़ी-दर-पीढ़ी जिन जमीनों पर खेती करते आ रहे हैं, हल्का पटवारी ने दुर्भावनापूर्ण तरीके से उन पर जेसीबी मशीन चलवाकर राजस्व एवं भूमि स्वामियों की मेड़-बंधान, फसल सुरक्षा दीवार (बाउंड्रीवॉल) और अन्य निर्माणों को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया। इस ज्यादती के विरोध में बीती 7 जून को ग्रामीणों ने एक ‘महापंचायत’ भी बुलाई थी, और समाधान न होने पर नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा था। एक बड़ी धांधली का खुलासा करते हुए शिकायत में बताया गया है कि शाहनगर तहसीलदार द्वारा जारी एक प्रतिवेदन (दिनांक 13/06/2026, क्रमांक/350/प्रवाचक/2026) के अनुसार, एक व्यवस्थापन पट्टा 'ममता बाई बेवा बालाप्रसाद परोहा' के नाम पर जारी किया गया है। इस पट्टे में बालाप्रसाद परोहा को 'मृत' घोषित कर दिया गया है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि बालाप्रसाद परोहा आज भी जीवित हैं। जीवित व्यक्ति को मृत बताकर किए गए इस भूमि व्यवस्थापन के खेल ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला सिर्फ राजस्व भूमि तक सीमित नहीं है, बल्कि वन विभाग के कर्मचारियों पर भी संगीन आरोप लगे हैं। ज्ञापन के अनुसार, सलैया (फेरंन सिंह) वन विभाग के कर्मचारियों ने गांव में आकर गरीब आदिवासियों से उनके 'वन अधिकार दावा आवेदन' की मूल पावतियां (Receipts) ले ली हैं और अब उन्हें वापस नहीं कर रहे हैं। जिन भूमियों पर आदिवासी सालों से खेती कर रहे हैं, वन विभाग अब वहां जबरन नर्सरी बनाने की तैयारी में है। पीड़ितों ने अपनी पावतियां वापस दिलाने की मांग की है ताकि वे कोर्ट या प्रशासन के सामने न्याय की लड़ाई लड़ सकें। आरोप है कि आदिवासियों के वन अधिकार के दावे पिछले डेढ़ वर्ष से एसडीएम कार्यालय में लंबित पड़े हैं, जिन पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। वन अधिनियम की उपधाराओं के तहत सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कोई बेदखली की जा सकती है, लेकिन शाहनगर क्षेत्र के पगरी, बरतला, और कल्दा क्षेत्र के बड़ी खमरिया जैसे गांवों में नियमों को ताक पर रखकर आदिवासियों को हटाया जा रहा है। पीड़ितों की प्रमुख मांगों में जीवित व्यक्ति को मृत बताकर किए गए फर्जी भूमि व्यवस्थापन और पट्टे की उच्च स्तरीय जांच, हल्का पटवारी द्वारा जेसीबी चलाकर किसानों की फसलों और मेड़ को नुकसान पहुंचाने की जांच कर मुआवजा प्रदान करना, वन विभाग के कर्मचारियों से आदिवासियों के दावों की मूल पावती वापस दिलाना, और वन अधिकार अधिनियम के तहत लंबित दावों का जल्द से जल्द विधि अनुसार निराकरण करना शामिल है। अब यह देखना होगा कि पन्ना जिला प्रशासन इन गंभीर आरोपों और दस्तावेजी साक्ष्यों के सामने आने के बाद दोषी कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई करता है।
- मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की शाहनगर तहसील अंतर्गत ग्राम लमतरा में राजस्व और वन भूमि को लेकर एक गंभीर विवाद सामने आया है। ग्रामीणों और पीड़ित पक्षों ने हल्का पटवारी और वन विभाग के कर्मचारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया है, जिसमें गरीब आदिवासियों और किसानों की जमीनों पर जबरन कब्जा करने तथा नियमों को ताक पर रखकर उनके अधिकारों का हनन करने की बात कही गई है। इस संबंध में, के.पी. सिंह बुंदेला के नेतृत्व में पीड़ितों ने पन्ना कलेक्टर को एक शिकायती ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि ग्राम लमतरा के किसान पीढ़ी-दर-पीढ़ी जिन जमीनों पर खेती करते आ रहे हैं, हल्का पटवारी ने दुर्भावनापूर्ण तरीके से उन पर जेसीबी मशीन चलवाकर राजस्व एवं भूमि स्वामियों की मेड़-बंधान, फसल सुरक्षा दीवार (बाउंड्रीवॉल) और अन्य निर्माणों को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया। इस ज्यादती के विरोध में बीती 7 जून को ग्रामीणों ने एक ‘महापंचायत’ भी बुलाई थी, और समाधान न होने पर नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा था। एक बड़ी धांधली का खुलासा करते हुए शिकायत में बताया गया है कि शाहनगर तहसीलदार द्वारा जारी एक प्रतिवेदन (दिनांक 13/06/2026, क्रमांक/350/प्रवाचक/2026) के अनुसार, एक व्यवस्थापन पट्टा 'ममता बाई बेवा बालाप्रसाद परोहा' के नाम पर जारी किया गया है। इस पट्टे में बालाप्रसाद परोहा को 'मृत' घोषित कर दिया गया है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि बालाप्रसाद परोहा आज भी जीवित हैं। जीवित व्यक्ति को मृत बताकर किए गए इस भूमि व्यवस्थापन के खेल ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला सिर्फ राजस्व भूमि तक सीमित नहीं है, बल्कि वन विभाग के कर्मचारियों पर भी संगीन आरोप लगे हैं। ज्ञापन के अनुसार, सलैया (फेरंन सिंह) वन विभाग के कर्मचारियों ने गांव में आकर गरीब आदिवासियों से उनके 'वन अधिकार दावा आवेदन' की मूल पावतियां (Receipts) ले ली हैं और अब उन्हें वापस नहीं कर रहे हैं। जिन भूमियों पर आदिवासी सालों से खेती कर रहे हैं, वन विभाग अब वहां जबरन नर्सरी बनाने की तैयारी में है। पीड़ितों ने अपनी पावतियां वापस दिलाने की मांग की है ताकि वे कोर्ट या प्रशासन के सामने न्याय की लड़ाई लड़ सकें। आरोप है कि आदिवासियों के वन अधिकार के दावे पिछले डेढ़ वर्ष से एसडीएम कार्यालय में लंबित पड़े हैं, जिन पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। वन अधिनियम की उपधाराओं के तहत सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कोई बेदखली की जा सकती है, लेकिन शाहनगर क्षेत्र के पगरी, बरतला, और कल्दा क्षेत्र के बड़ी खमरिया जैसे गांवों में नियमों को ताक पर रखकर आदिवासियों को हटाया जा रहा है। पीड़ितों की प्रमुख मांगों में जीवित व्यक्ति को मृत बताकर किए गए फर्जी भूमि व्यवस्थापन और पट्टे की उच्च स्तरीय जांच, हल्का पटवारी द्वारा जेसीबी चलाकर किसानों की फसलों और मेड़ को नुकसान पहुंचाने की जांच कर मुआवजा प्रदान करना, वन विभाग के कर्मचारियों से आदिवासियों के दावों की मूल पावती वापस दिलाना, और वन अधिकार अधिनियम के तहत लंबित दावों का जल्द से जल्द विधि अनुसार निराकरण करना शामिल है। अब यह देखना होगा कि पन्ना जिला प्रशासन इन गंभीर आरोपों और दस्तावेजी साक्ष्यों के सामने आने के बाद दोषी कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई करता है।1
- पन्ना जिले में एक तेज़ रफ्तार अनियंत्रित बाइक के फिसलने से दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना ने एक बार फिर सड़क पर रफ्तार के कहर को सामने लाया है, जहाँ वाहन पर से नियंत्रण खोने के कारण यह हादसा हुआ और युवकों को गंभीर चोटें आईं।1
- पन्ना जिले की पवई तहसील के ग्राम हथकुरी में एक पीपल के पेड़ के नीचे हनुमान जी की प्रतिमा निकली है। यह घटना तब सामने आई जब हनुमान जी एक बालक अजीत गर्ग के सपने में आए थे। इस सपने के बाद, ग्रामीणों ने सुबह मिलकर पीपल के पेड़ के नीचे से प्रतिमा को निकाला।1
- सतना जिले के कन्या महाविद्यालय में छात्राओं ने अपनी छात्रवृत्ति का भुगतान न होने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि पिछले छह महीने से उन्हें छात्रवृत्ति नहीं मिली है, जिसके कारण वे काफी परेशान हैं। छात्राओं के अनुसार, उनकी इस समस्या का मुख्य कारण कॉलेज प्रशासन द्वारा पोर्टल पर डेटा अपडेट न किया जाना है। वे अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए छात्रवृत्ति पर निर्भर हैं, लेकिन कॉलेज की इस लापरवाही के चलते उनकी छात्रवृत्ति की प्रक्रिया पूरी तरह से ठप पड़ गई है। इसी मुद्दे को लेकर छात्राओं ने आज कन्या महाविद्यालय के सामने ही एसडीएम के समक्ष अपनी बात रखी। उन्होंने कॉलेज प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए तत्काल पोर्टल पर डेटा अपडेट करने की मांग की, ताकि उनकी रुकी हुई छात्रवृत्ति का भुगतान सुनिश्चित हो सके। छात्राएं अपनी भविष्य की शिक्षा को लेकर चिंतित हैं और उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर क्या कदम उठाता है।1
- सतना जिले में साइबर अपराधों की रोकथाम और जन-जागरूकता के उद्देश्य से "सेफ क्लिक-2026" नामक एक साइबर जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया गया है। यह अभियान पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देशों और पुलिस अधीक्षक सतना के मार्गदर्शन में महिला थाना प्रभारी निरीक्षक श्वेता मौर्या द्वारा शुरू किया गया। अभियान के तहत, संदीपनी शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल बगहा (सतना), पुलिस कल्याण पेट्रोल पंप और महिला थाना परिसर में साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी प्रदान की जा रही है। इसमें छात्रों और नागरिकों को ऑनलाइन ठगी, फर्जी लिंक के खतरे, ओटीपी साझा करने की सावधानियाँ, सोशल मीडिया फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, निवेश धोखाधड़ी, साइबर बुलिंग तथा अन्य साइबर अपराधों से बचाव के उपायों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। निरीक्षक श्वेता मौर्या ने बताया कि वर्तमान समय में साइबर अपराधों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसके चलते प्रत्येक नागरिक के लिए डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित उपयोग करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने या ऑनलाइन रिपोर्ट करने की सलाह दी है। नागरिकों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाने के लिए अभियान के दौरान पोस्टर, पम्पलेट, जनसंवाद, सोशल मीडिया संदेश और जागरूकता कार्यक्रमों का उपयोग किया जा रहा है। महिला थाना सतना ने लोगों से अपील की है कि वे अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें, किसी को भी ओटीपी, बैंकिंग जानकारी या पासवर्ड साझा न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। इस पहल के माध्यम से नागरिकों से साइबर सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने का आग्रह किया गया है, जिसका मूल मंत्र है: 'सावधान रहें, सुरक्षित रहें – SAFE CLICK करें।'1
- सतना जिले की उचेहरा तहसील के परसमनिया पठार के घने जंगलों में स्थित राजा बाबा मंदिर भक्तों के लिए श्रद्धा और कौतूहल का केंद्र बना हुआ है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहाँ स्थापित राजा बाबा की प्रतिमा का आकार समय के साथ लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसे श्रद्धालु दैवीय चमत्कार मानते हैं। यह अनोखा मंदिर विंध्य क्षेत्र के सबसे विशिष्ट धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। मंदिर से जुड़ी एक लोककथा के अनुसार, एक महिला को पहाड़ी पर एक पत्थर मिला था, जिसे जब वर्तमान स्थल पर रखा गया तो उसे दोबारा उठाया नहीं जा सका। इसी घटना के बाद से यहाँ राजा बाबा की पूजा-अर्चना शुरू हुई। क्षेत्र के लोग राजा बाबा को परसमनिया के रक्षक के रूप में देखते हैं और दृढ़ता से विश्वास करते हैं कि सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद यहाँ पूरी होती है। यह स्थल सतना से लगभग 55 किलोमीटर और उचेहरा से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। धार्मिक महत्व के साथ-साथ, यह अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध है, खासकर बारिश के मौसम में। राजा बाबा जलप्रपात, चारों ओर हरियाली से ढके पहाड़ और शांत वन क्षेत्र यहाँ श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों को भी आकर्षित करते हैं। यह स्थान आस्था, लोकविश्वास और प्रकृति का एक अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है, जहाँ रहस्य से आस्था का गहरा जुड़ाव महसूस होता है।1
- सतना जिले के मैहर क्षेत्र में बुधवार शाम अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। तेज हवाओं के साथ शुरू हुई जोरदार बारिश ने देखते ही देखते जोर पकड़ लिया, जिससे पूरे शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में झमाझम बारिश हुई। लंबे समय से गर्मी और उमस से परेशान लोगों को इस बारिश से काफी राहत मिली, जिसके चलते तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। लोगों ने बारिश का आनंद लिया, जबकि बच्चों और युवाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। हालांकि, बारिश के चलते सड़कों पर पानी भर गया, जिससे वाहन चालकों को आवागमन में कुछ परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं, इस बारिश से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं, क्योंकि इसे खरीफ फसलों की बुवाई के लिए लाभकारी माना जा रहा है। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी जिले के कुछ क्षेत्रों में बारिश की संभावना जताई है।1
- मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में एक बड़ा हादसा हुआ है।3