शिमला शहर के प्रतिबंधित मार्गों पर निवास कर रहे स्थानीय लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए 22 जून को उपायुक्त कार्यालय शिमला में सांसद सुरेश कश्यप को एक ज्ञापन सौंपा गया। यह प्रतिनिधिमंडल, जिसमें भाजपा नेता कर्ण नंदा, श्याम शर्मा, कृष्ण गुप्त और शांता कुमार शामिल थे, ने सांसद को जाखू, यू.एस. क्लब, बेनमोर और कनलोग वार्ड के ऊपरी क्षेत्रों में रहने वाले सैकड़ों परिवारों की स्थिति से अवगत कराया। इन क्षेत्रों के स्थायी निवासी वाहन परमिट व्यवस्था के कारण भारी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। ज्ञापन में बताया गया कि कई परिवार 50 से 60 वर्षों से, और कुछ स्वतंत्रता पूर्व से ही यहाँ रह रहे हैं। इसके बावजूद, उन्हें अपने निजी वाहनों के लिए बार-बार परमिट लेने की एक जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिससे उन्हें अनावश्यक परेशानी और आर्थिक बोझ झेलना पड़ रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि स्थायी निवासियों के लिए दीर्घकालिक रेजिडेंट पास जारी किए जाएं, परमिट शुल्क में तर्कसंगत कमी लाई जाए, एकल खिड़की प्रणाली लागू की जाए, तथा प्रतिबंधित मार्गों से संबंधित नियमों में स्थानीय निवासियों को छूट प्राप्त श्रेणी में शामिल किया जाए। इसके अतिरिक्त, दोपहिया वाहनों और स्थानीय निवासियों के अन्य निजी वाहनों को भी परमिट व्यवस्था के दायरे में सरलता के साथ शामिल करने की बात कही गई। सांसद सुरेश कश्यप ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि वे इन समस्याओं और मांगों को गंभीरता से संबंधित विभागों और प्रदेश सरकार के समक्ष उठाएंगे, तथा लोगों को राहत दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे। प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि स्थानीय निवासियों की वर्षों पुरानी इस समस्या का शीघ्र समाधान होगा और उन्हें एक सरल एवं जनहितैषी व्यवस्था का लाभ मिलेगा।
शिमला शहर के प्रतिबंधित मार्गों पर निवास कर रहे स्थानीय लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए 22 जून को उपायुक्त कार्यालय शिमला में सांसद सुरेश कश्यप को एक ज्ञापन सौंपा गया। यह प्रतिनिधिमंडल, जिसमें भाजपा नेता कर्ण नंदा, श्याम शर्मा, कृष्ण गुप्त और शांता कुमार शामिल थे, ने सांसद को जाखू, यू.एस. क्लब, बेनमोर और कनलोग वार्ड के ऊपरी क्षेत्रों में रहने वाले सैकड़ों परिवारों की स्थिति से अवगत कराया। इन क्षेत्रों के स्थायी निवासी वाहन परमिट व्यवस्था के कारण भारी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। ज्ञापन में बताया गया कि कई परिवार 50 से 60 वर्षों से, और कुछ स्वतंत्रता पूर्व से ही यहाँ रह रहे हैं। इसके बावजूद, उन्हें अपने निजी वाहनों के लिए बार-बार परमिट लेने की एक जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिससे उन्हें अनावश्यक परेशानी और आर्थिक बोझ झेलना
पड़ रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि स्थायी निवासियों के लिए दीर्घकालिक रेजिडेंट पास जारी किए जाएं, परमिट शुल्क में तर्कसंगत कमी लाई जाए, एकल खिड़की प्रणाली लागू की जाए, तथा प्रतिबंधित मार्गों से संबंधित नियमों में स्थानीय निवासियों को छूट प्राप्त श्रेणी में शामिल किया जाए। इसके अतिरिक्त, दोपहिया वाहनों और स्थानीय निवासियों के अन्य निजी वाहनों को भी परमिट व्यवस्था के दायरे में सरलता के साथ शामिल करने की बात कही गई। सांसद सुरेश कश्यप ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि वे इन समस्याओं और मांगों को गंभीरता से संबंधित विभागों और प्रदेश सरकार के समक्ष उठाएंगे, तथा लोगों को राहत दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे। प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि स्थानीय निवासियों की वर्षों पुरानी इस समस्या का शीघ्र समाधान होगा और उन्हें एक सरल एवं जनहितैषी व्यवस्था का लाभ मिलेगा।
- शिमला जिले के रामपुर के ननखड़ी कॉलेज को डीनोटिफाई करने के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। भाजपा नेता और रामपुर से पूर्व प्रत्याशी कौल नेगी ने प्रदेश सरकार को चेतावनी दी है कि यदि कॉलेज बंद हुआ तो लोग सड़कों पर उतरकर इसका कड़ा विरोध करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान कांग्रेस सरकार गरीब बच्चों को उच्च शिक्षा से वंचित करना चाहती है। कौल नेगी ने बताया कि यह कॉलेज 18 बच्चों के साथ भी सफलतापूर्वक चल रहा था, लेकिन अब कम छात्रों की संख्या का हवाला देकर इसे बंद किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कॉलेज में कला और वाणिज्य संकाय की पढ़ाई होती है। हालांकि, ननखड़ी के आसपास के स्कूलों में वाणिज्य की पढ़ाई नहीं कराई जाती, जिससे शिमला-रामपुर क्षेत्र से बच्चे ननखड़ी कॉलेज तक नहीं पहुँच पाएंगे। नेगी के अनुसार, इस कॉलेज के बंद होने से 18 पंचायतें प्रभावित होंगी। उन्होंने स्मरण कराया कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने 2012-13 में इस कॉलेज की घोषणा की थी, जिसके बाद यह स्थापित हुआ। नेगी ने जोर दिया कि पूर्व सरकारों के प्रमुखों की सोच थी कि किसी भी बच्चे को उच्च शिक्षा से वंचित न रखा जाए, और पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र भी तीन बच्चों के लिए भी स्कूल चलाने की बात कहते थे। इसके विपरीत, वर्तमान सरकार इस विचार के विरुद्ध काम कर रही है। कौल नेगी ने पुनः चेतावनी दी है कि अगर कॉलेज को फिर से बहाल नहीं किया गया, तो बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।3
- बिलासपुर के मल्टीपर्पज़ कल्चरल कॉम्प्लेक्स में सोमवार को समग्र शिक्षा योजना के अंतर्गत सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) की जनसुनवाई आयोजित की गई। इस जनसुनवाई का मुख्य उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और सामुदायिक सहभागिता को मजबूत बनाना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता उपनिदेशक उच्च शिक्षा (गुणवत्ता) निशा गुप्ता ने की। जनसुनवाई में शिक्षा विभाग के अधिकारियों, विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों, शिक्षकों, अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस दौरान समग्र शिक्षा योजना के कार्यान्वयन, विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं और शिक्षा की गुणवत्ता से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर गहन चर्चा हुई, तथा उपस्थित प्रतिभागियों से कई सुझाव और शिकायतें प्राप्त की गईं। उपनिदेशक शिक्षा (गुणवत्ता) निशा गुप्ता ने सभी प्रतिभागियों से शिक्षा से संबंधित समस्याओं, सुझावों एवं शिकायतों को लिखित रूप में प्रस्तुत करने का आग्रह किया, ताकि उन्हें उचित स्तर पर विचार के लिए भेजा जा सके। इस अवसर पर, रिसोर्स पर्सन एवं प्रधानाचार्य-अन्वेषक डॉ. रणधीर रंटा ने सामाजिक अंकेक्षण की पूरी प्रक्रिया और उसके मुख्य निष्कर्षों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस अंकेक्षण के तहत जिले के लगभग 20 प्रतिशत विद्यालयों का निरीक्षण किया गया है, और इसी निरीक्षण के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट को जनसुनवाई के दौरान प्रस्तुत किया गया। डॉ. रंटा ने विद्यालयों से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रतिभागियों के साथ सीधे संवाद किया और उनके प्रश्नों तथा जिज्ञासाओं का समाधान किया। डॉ. रणधीर रंटा ने आगे बताया कि जनसुनवाई के दौरान प्राप्त सभी सुझावों, शिकायतों और अभिमतों को संकलित कर एक विस्तृत प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा। यह प्रतिवेदन आवश्यक कार्रवाई और नीति निर्माण के लिए सरकार को भेजा जाएगा। उन्होंने जोर दिया कि सामाजिक अंकेक्षण का दोहरा उद्देश्य है: योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना और शिक्षा व्यवस्था में जनभागीदारी को बढ़ावा देना। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में मीडिया कोऑर्डिनेटर नागेंद्र, ऑब्जर्वर राकेश कुमार, वित्त अधिकारी देवांश सलोत्रा, उप-प्रधानाचार्य कुलदीप शर्मा, कार्यक्रम समन्वयक सोमदत्त, मीडिया कोऑर्डिनेटर दिग्विजय मल्होत्रा, पूर्व-प्राथमिक शिक्षा समन्वयक अतुल शर्मा और रीता कुमारी सहित अनेक अधिकारी एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।1
- किन्नौर के उरनी में एक लोहे का पुल टूट गया, जिसके परिणामस्वरूप एक डंपर वाहन पुल सहित नीचे खाई में जा गिरा। इस घटना में डंपर का चालक पूरी तरह सुरक्षित बताया गया है, जिससे किन्नौर में एक बड़ा हादसा टल गया।1
- ग्राम पंचायत सेऊ के गाँव सेऊ, घुमारवीं में एक पीपल पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस धार्मिक अवसर पर स्थानीय लोग उपस्थित रहे। यह पूजन कार्यक्रम सभी रीति-रिवाजों का पालन करते हुए पारंपरिक तरीके से संपन्न हुआ।2
- बिलासपुर जिले के लगदयो में प्राकृतिक खेती एवं अनुभव साझाकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में लगभग 1000 किसानों ने भाग लिया।1
- मंडी के खुचनची स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (GSSS) की दयनीय हालत और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) ने मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा है। SMC ने विद्यालय में रिक्त पड़े पदों को भरने और आवश्यक बुनियादी सुविधाओं को जल्द से जल्द पूरा करने की प्रमुख मांगें उठाई हैं। समिति ने सरकार से गुहार लगाई है कि शिक्षकों की भारी कमी और अधूरे पड़े निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। उनका मानना है कि विद्यालय में विकास कार्यों को तेजी से संपन्न कराना अत्यंत आवश्यक है, ताकि शैक्षणिक माहौल में सुधार हो सके।1
- बंजार नगर पंचायत उपाध्यक्ष पद के चुनाव में रोचक स्थिति देखने को मिली, जहाँ विवेक कुमार को टॉस में हार का सामना करना पड़ा। चुनाव के दौरान चार-चार बराबर मत पड़ने के कारण उपाध्यक्ष पद का फैसला टॉस के जरिए किया गया। इस बीच, ए पी एम सी चेयरमैन मिया राम सिंह ने अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर क्या कहा, यह जानकारी मूल पाठ में उपलब्ध नहीं है।1
- हिमाचल प्रदेश में मिड-डे मील वर्कर्स अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी हड़ताल पर हैं। सीटू से संबंधित मिड डे मील वर्कर्स यूनियन के बैनर तले टॉलैंड से सचिवालय तक रोष रैली निकाली गई, जहाँ उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यूनियन वेतन बढ़ोतरी, पूरे 12 महीने का वेतन, ग्रेच्युटी, पेंशन और नियमितीकरण सहित कई अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रही है। इस दौरान यूनियन नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकारों पर लंबे समय से मिड डे मील वर्कर्स की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। यूनियन की राज्य महासचिव शांति देवी और अध्यक्ष संजीव कुमार ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने पिछले 17 वर्षों में मिड डे मील वर्कर्स के वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं की है, और राज्य सरकार भी इस मुद्दे पर उदासीन रवैया अपना रही है। उन्होंने बताया कि मिड डे मील वर्कर्स को नियमित वेतन नहीं मिलता, बल्कि कई बार तीन-तीन महीने तक वेतन लंबित रहता है और भुगतान भी एकमुश्त नहीं किया जाता। इसके अतिरिक्त, स्कूलों में 25 बच्चों की अनिवार्य संख्या की शर्त के कारण बच्चों की संख्या कम होने पर वर्कर्स की सेवाएं समाप्त कर दी जाती हैं। यूनियन ने प्रमुखता से मांग की है कि हाई कोर्ट के फैसले के अनुरूप मिड डे मील वर्कर्स को पूरे 12 महीने का वेतन दिया जाए। उनकी अन्य मांगों में हरियाणा की तर्ज पर 7,000 रुपये मासिक वेतन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की तरह अवकाश, 25 बच्चों की अनिवार्य संख्या की शर्त को समाप्त करना, ग्रेच्युटी और पेंशन सुविधा प्रदान करना, मेडिकल जांच का खर्च विभाग द्वारा वहन करना और मिड डे मील वर्कर्स के लिए नियमितीकरण की नीति बनाना शामिल है। यूनियन नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।4