राजेश मिश्रा की एक रिपोर्ट के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) ने शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और संचार सहित लगभग हर क्षेत्र में अपनी उपयोगिता सिद्ध की है। हालांकि, AI के बढ़ते उपयोग के साथ एक नया पहलू सामने आ रहा है, जिस पर अब विशेषज्ञ गंभीरता से चर्चा कर रहे हैं: डेटा सेंटरों में पानी की बढ़ती खपत। AI-आधारित सेवाओं को संचालित करने वाले बड़े डेटा सेंटर अत्यधिक कंप्यूटिंग क्षमता का उपयोग करते हैं। इन सर्वरों से उत्पन्न होने वाली गर्मी को नियंत्रित करने के लिए कई स्थानों पर जल-आधारित शीतलन प्रणालियों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे AI के विस्तार के साथ-साथ पानी और ऊर्जा की मांग भी बढ़ रही है। विशेषज्ञ बताते हैं कि भले ही एक-दो प्रश्न पूछने से पानी की बड़ी मात्रा खर्च न हो, लेकिन जब दुनिया भर में प्रतिदिन करोड़ों लोग AI का उपयोग करते हैं, तो जल संसाधनों पर इसका कुल प्रभाव महत्वपूर्ण हो सकता है। साथ ही, बड़े AI मॉडलों के प्रशिक्षण और संचालन में भी पर्याप्त मात्रा में जल संसाधनों का अप्रत्यक्ष उपयोग होता है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब दुनिया पहले से ही जलवायु परिवर्तन, भूजल के लगातार दोहन, बढ़ती आबादी और प्रदूषण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में AI जैसी आधुनिक तकनीकों का भी जिम्मेदारी और आवश्यकता के अनुसार उपयोग करना समय की मांग बन गया है। विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि AI जल संकट का सबसे बड़ा कारण नहीं है, क्योंकि कृषि, उद्योग और शहरी जल प्रबंधन का प्रभाव कहीं अधिक है। फिर भी, डिजिटल संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग से ऊर्जा और पानी दोनों की बचत में योगदान दिया जा सकता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि जिस प्रकार हम बिजली और पानी की अनावश्यक बर्बादी से बचते हैं, उसी प्रकार AI का उपयोग भी आवश्यकता के अनुसार ही किया जाना चाहिए। अनावश्यक प्रयोगों के बजाय सोच-समझकर किया गया उपयोग भविष्य में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सहायक हो सकता है। तकनीक के लाभ उठाने के साथ-साथ, हर संसाधन की तरह AI का भी जिम्मेदारी और जरूरत के अनुसार उपयोग करना आवश्यक है, क्योंकि छोटी-छोटी सावधानियां ही भविष्य के जल संकट को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
राजेश मिश्रा की एक रिपोर्ट के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) ने शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और संचार सहित लगभग हर क्षेत्र में अपनी उपयोगिता सिद्ध की है। हालांकि, AI के बढ़ते उपयोग के साथ एक नया पहलू सामने आ रहा है, जिस पर अब विशेषज्ञ गंभीरता से चर्चा कर रहे हैं: डेटा सेंटरों में पानी की बढ़ती खपत। AI-आधारित सेवाओं को संचालित करने वाले बड़े डेटा सेंटर अत्यधिक कंप्यूटिंग क्षमता का उपयोग करते हैं। इन सर्वरों से उत्पन्न होने वाली गर्मी को नियंत्रित करने के लिए कई स्थानों पर जल-आधारित शीतलन प्रणालियों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे AI के विस्तार के साथ-साथ पानी और ऊर्जा की मांग भी बढ़ रही है। विशेषज्ञ बताते हैं कि भले ही एक-दो प्रश्न पूछने से पानी की बड़ी मात्रा खर्च न हो, लेकिन जब दुनिया भर में प्रतिदिन करोड़ों लोग AI का उपयोग करते हैं, तो जल संसाधनों पर इसका कुल प्रभाव महत्वपूर्ण हो सकता है। साथ ही, बड़े AI मॉडलों के प्रशिक्षण और संचालन में भी पर्याप्त मात्रा में जल संसाधनों का अप्रत्यक्ष उपयोग होता है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब दुनिया पहले से ही जलवायु परिवर्तन, भूजल के लगातार दोहन, बढ़ती आबादी और प्रदूषण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में AI जैसी आधुनिक तकनीकों का भी जिम्मेदारी और आवश्यकता के अनुसार उपयोग करना समय की मांग बन गया है। विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि AI जल संकट का सबसे बड़ा कारण नहीं है, क्योंकि कृषि, उद्योग और शहरी जल प्रबंधन का प्रभाव कहीं अधिक है। फिर भी, डिजिटल संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग से ऊर्जा और पानी दोनों की बचत में योगदान दिया जा सकता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि जिस प्रकार हम बिजली और पानी की अनावश्यक बर्बादी से बचते हैं, उसी प्रकार AI का उपयोग भी आवश्यकता के अनुसार ही किया जाना चाहिए। अनावश्यक प्रयोगों के बजाय सोच-समझकर किया गया उपयोग भविष्य में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सहायक हो सकता है। तकनीक के लाभ उठाने के साथ-साथ, हर संसाधन की तरह AI का भी जिम्मेदारी और जरूरत के अनुसार उपयोग करना आवश्यक है, क्योंकि छोटी-छोटी सावधानियां ही भविष्य के जल संकट को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
- अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। अखिल भारतीय समग्र क्रांति पार्टी के ज़िला अध्यक्ष राजेश मिश्रा ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजेश मिश्रा ने सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी का हवाला देते हुए दावा किया कि राम मंदिर निर्माण के लिए अखिलेश यादव द्वारा किसी भी आर्थिक सहयोग का कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है। उन्होंने यह भी कहा कि न तो श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सार्वजनिक जानकारी में अखिलेश यादव के नाम से किसी दान की पुष्टि हुई है और न ही उन्होंने स्वयं किसी दान राशि की आधिकारिक घोषणा की है। इसी आधार पर राजेश मिश्रा ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए तीखे शब्दों में कहा, "राम मंदिर के लिए फूटी कौड़ी तक नहीं दी और आज सिर्फ विधवा विलाप कर रहे हैं। यह बेशर्मी की हद है।" उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने मंदिर निर्माण के समय कोई सहयोग नहीं किया, वे अब केवल राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से बयानबाज़ी कर रहे हैं। यह टिप्पणी राजेश मिश्रा का एक राजनीतिक आरोप है, और अखिलेश यादव या समाजवादी पार्टी की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।2
- बिलासपुर के हिर्री थाना पुलिस ने कोयला घोटाला मामले में एक महीने से फरार चल रहे आरोपी रिजवान खान को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। यह जानकारी मंगलवार शाम 5 बजे जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में दी गई। पुलिस के अनुसार, प्रार्थी आशीष केशरी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि वह कोयला परिवहन का काम करते हैं। उन्होंने एसईसीएल के अमेरा विश्रामपुर क्षेत्र की खदान से उच्च गुणवत्ता वाला कोयला (G-6, 5500-5800 GCV) ट्रेलर क्रमांक सीजी 15 ईसी 9200, सीजी 15 ईसी 7400 और सीजी 30 एच 2900 में लोड करवाकर गोपाल स्पंज एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड, सिलतरा के लिए भेजा था। रास्ते में पेंड्री डीह के पास आरोपी गंगा साहू और रिजवान खान ने इन ट्रेलरों को रोका। उन्होंने अग्रवाल के कोल डिपो में ले जाकर ट्रेलरों से पांच-पांच टन उच्च गुणवत्ता का कोयला उतारा और उसकी जगह 4700 जीसीव्ही का निम्न गुणवत्ता वाला कोयला लोड कर दिया, जिसे बाद में गोपाल स्पंज एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड, सिलतरा में अनलोड किया गया। इस रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने अपराध धारा 316(3), 317(4), 3(5) बीएनएस सदर के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए, बिलासपुर के उमनि एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) मधुलिका सिंह और नगर पुलिस अधीक्षक (चकरभाठा) नूपुर उपाध्याय से आवश्यक दिशा-निर्देश प्राप्त किए गए। हिर्री थाना प्रभारी निरीक्षक दामोदर मिश्रा ने एक टीम तैयार की और इस मामले में पहले ही आरोपी नरेश कुमार अग्रवाल, वाहन मालिक गंगा प्रसाद साहू, तथा वाहन चालक फिरोज अंसारी, निसार असारी और इमरान अंसारी को 25.05.2026 को दोपहर 2 बजे गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा जा चुका है। घटना के बाद से फरार चल रहे आरोपी रिजवान खान (पिता वसीम खान, उम्र 25 साल, निवासी खण्डोवा मंदिर के पीछे, रतनपुर, जिला बिलासपुर) की लगातार तलाश की जा रही थी, जिसे आज 30.06.2026, मंगलवार को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है।1
- खरोरा और आसपास के क्षेत्रों में धड़ल्ले से हो रहे धर्मांतरण के विरोध में सर्व हिन्दू समाज के बैनर तले खरोरा स्थित दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर परिसर में एक बड़ी बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सैकड़ों की संख्या में उपस्थित लोगों ने धर्मांतरण और प्रार्थना सभाओं पर प्रतिबंध की मांग को लेकर जोरदार हुंकार भरी। उल्लेखनीय है कि खरोरा सहित ग्रामीण क्षेत्रों में धर्मांतरण के मामलों में अचानक वृद्धि हुई है, जिसके कारण कई स्थानों पर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो रही है। ईसाई मिशनरियों पर आरोप है कि वे प्रार्थना सभाओं में गैर-ईसाई समुदाय के लोगों को आमंत्रित कर उन्हें हिन्दू धर्म के खिलाफ भड़काते हैं और धर्मांतरित करते हैं। पिछले दिनों 24 जून को समीपस्थ ग्राम मांठ में भी धर्मांतरण की घटना पर बड़ा विवाद हुआ था, जहाँ ईसाई पास्टरों और हिन्दुओं के बीच टकराव की स्थिति बन गई थी। पुलिस के हस्तक्षेप से कोई अप्रिय घटना नहीं हुई, लेकिन ग्रामीणों की शिकायत पर पुलिस ने रायपुर के पास्टर शुशांत ज्ञानिक और पीयूष पटेल पर कार्रवाई की थी। इस घटना के बाद से ही हिन्दू समाज धर्मांतरण को लेकर आक्रोशित नजर आ रहा है। बैठक के दौरान, रायपुर जिला पंचायत के अध्यक्ष नवीन अग्रवाल ने धर्मांतरण को समाज और राष्ट्र के लिए गंभीर खतरा बताते हुए सभी से दलगत विचारों से ऊपर उठकर धर्मांतरण के खिलाफ एकजुट होने की अपील की। वरिष्ठ समाजसेवी राजीव अग्रवाल ने बताया कि ईसाई पास्टर गरीब और असहाय तबके के लोगों को आसानी से निशाना बनाते हैं; पहले उनके दुःख-दर्द दूर करने का भरोसा देते हैं और फिर उन्हें धर्मांतरित कर देते हैं। उन्होंने लोगों से इन ईसाई मिशनरियों, पास्टरों और उनके प्रार्थना प्रलोभनों से दूरी बनाए रखने का आग्रह किया। पूर्व नपं अध्यक्ष अनिल सोनी ने नगर के वार्डों में धर्मांतरण विरोधी समितियां बनाने और अवैध धर्मांतरण गतिविधियों पर नजर रखने की बात कही। युवा समाजसेवी बब्लू भाटिया ने युवाओं से इन पास्टरों पर नजर रखने और धर्मांतरण में संलिप्तता पाए जाने पर उन्हें सबक सिखाने की अपील की। इस बैठक में सेवानिवृत्त शिक्षक सिताराम यादव, भागवताचार्य संतोष गांगुली, श्रीमती रश्मि वर्मा, श्रीमती सोना वर्मा, सुरेन्द्र वर्मा, तोरण ठाकुर, जोगिंदर सलूजा, विकास ठाकुर, राम बाबू मंडल, राजा भाटिया, सुमीत सेन और जयप्रकाश वर्मा सहित कई अन्य लोगों ने भी सभा को संबोधित करते हुए धर्मांतरण का पुरजोर विरोध किया और घर-घर जाकर लोगों के बीच जनजागरण अभियान चलाने का आह्वान किया। सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि आसपास के गांवों में समितियां गठित की जाएंगी, जिनके माध्यम से लोगों में धर्मांतरण के प्रति जागरूकता लाई जाएगी। साथ ही, बाहरी ईसाई पादरी और पास्टरों की गतिविधियों पर निगरानी रखने तथा अवैध प्रार्थना सभाओं को बंद कराने का संकल्प लिया गया।4
- बांदे पुलिस ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। यह कार्रवाई उन व्यक्तियों के खिलाफ की गई है जिन्होंने साधु का वेश धारण कर एक घर से ₹5 लाख रुपये की चोरी की थी।1
- बिलासपुर में पवित्र हज यात्रा पूरी कर ख़ाना-ए-काबा और रौज़ा-ए-अक़दस की ज़ियारत के बाद सकुशल लौटीं हज्जन अफसाना सैफी (रूबी) साहिबा का उनके परिजनों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों ने गर्मजोशी से इस्तकबाल किया। इस अवसर पर उन्हें हज की मुबारकबाद दी गई और यह दुआ की गई कि अल्लाह तआला उनका हज मक़बूल फरमाए, उनकी तमाम इबादतों, दुआओं और नेक अमल को अपनी बारगाह में कबूलियत अता करे, तथा उनके घर-परिवार को रहमत, बरकत, सेहत, सुकून और खुशियों से मालामाल रखे। उपस्थित लोगों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि हज केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह ईमान, सब्र, शुक्र और इंसानियत का संदेश देने वाला एक मुकद्दस सफर है। उन्होंने कहा कि हज से लौटने वाले अल्लाह के मेहमान होते हैं, और उनकी दुआओं में पूरे समाज के लिए रहमत और बरकत की कामना होती है। सभी ने यह भी दुआ की कि हज की रूहानियत और पाकीज़गी की रौशनी हज्जन अफसाना सैफी (रूबी) की पूरी ज़िंदगी को मुनव्वर रखे तथा उनकी नेक दुआओं का फ़ैज़ सभी को नसीब हो। इस गर्मजोशी भरे इस्तकबाल में हाजी अफजल सैफी, हज्जन सोफिया बेगम, इस्माइल भाईजान, अफरोजा (रानू बाजी), आसिफ भाईजान, आसमा बाजी, अनीश सैफी, सोनम पारेकर, अलिशा, मामा-मामी और चाचा-चाची सहित बड़ी संख्या में परिजन एवं रिश्तेदार उपस्थित रहे। इनके अतिरिक्त, अब्दुल रज्जाक, भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला मंत्री अलीम अंसारी, तथा समाजसेवी दीपक साहू और हसन अली जैसे अनेक गणमान्य नागरिकों ने भी उपस्थित होकर हज्जन अफसाना सैफी (रूबी) को हज की मुबारकबाद दी और उनके स्वस्थ एवं सुखमय जीवन की कामना की।1
- एक नई और अनोखी कहानी, जिसका शीर्षक 'समयवीर' है, जल्द ही दर्शकों के सामने आने वाली है। यह प्रस्तुति समय को बदलने और हिम्मत की एक नई मिसाल कायम करने का वादा करती है। 'समयवीर' हर पल की कीमत समझाने वाली एक ऐसी कहानी लेकर आ रहा है, जो अपने दर्शकों को अंत तक बांधे रखेगी। इस रोमांचक पेशकश के लिए सभी को तैयार रहने का आग्रह किया गया है।1
- राजेश मिश्रा की एक रिपोर्ट के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) ने शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और संचार सहित लगभग हर क्षेत्र में अपनी उपयोगिता सिद्ध की है। हालांकि, AI के बढ़ते उपयोग के साथ एक नया पहलू सामने आ रहा है, जिस पर अब विशेषज्ञ गंभीरता से चर्चा कर रहे हैं: डेटा सेंटरों में पानी की बढ़ती खपत। AI-आधारित सेवाओं को संचालित करने वाले बड़े डेटा सेंटर अत्यधिक कंप्यूटिंग क्षमता का उपयोग करते हैं। इन सर्वरों से उत्पन्न होने वाली गर्मी को नियंत्रित करने के लिए कई स्थानों पर जल-आधारित शीतलन प्रणालियों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे AI के विस्तार के साथ-साथ पानी और ऊर्जा की मांग भी बढ़ रही है। विशेषज्ञ बताते हैं कि भले ही एक-दो प्रश्न पूछने से पानी की बड़ी मात्रा खर्च न हो, लेकिन जब दुनिया भर में प्रतिदिन करोड़ों लोग AI का उपयोग करते हैं, तो जल संसाधनों पर इसका कुल प्रभाव महत्वपूर्ण हो सकता है। साथ ही, बड़े AI मॉडलों के प्रशिक्षण और संचालन में भी पर्याप्त मात्रा में जल संसाधनों का अप्रत्यक्ष उपयोग होता है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब दुनिया पहले से ही जलवायु परिवर्तन, भूजल के लगातार दोहन, बढ़ती आबादी और प्रदूषण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में AI जैसी आधुनिक तकनीकों का भी जिम्मेदारी और आवश्यकता के अनुसार उपयोग करना समय की मांग बन गया है। विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि AI जल संकट का सबसे बड़ा कारण नहीं है, क्योंकि कृषि, उद्योग और शहरी जल प्रबंधन का प्रभाव कहीं अधिक है। फिर भी, डिजिटल संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग से ऊर्जा और पानी दोनों की बचत में योगदान दिया जा सकता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि जिस प्रकार हम बिजली और पानी की अनावश्यक बर्बादी से बचते हैं, उसी प्रकार AI का उपयोग भी आवश्यकता के अनुसार ही किया जाना चाहिए। अनावश्यक प्रयोगों के बजाय सोच-समझकर किया गया उपयोग भविष्य में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सहायक हो सकता है। तकनीक के लाभ उठाने के साथ-साथ, हर संसाधन की तरह AI का भी जिम्मेदारी और जरूरत के अनुसार उपयोग करना आवश्यक है, क्योंकि छोटी-छोटी सावधानियां ही भविष्य के जल संकट को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।1
- रायपुर के नकटी गांव में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 80 से अधिक मकानों पर बुलडोजर चलाया है। इस दौरान पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल देखा गया, जिसके चलते भारी पुलिस बल तैनात रहा। प्रशासन का दावा है कि यह जमीन विधायक कॉलोनी के निर्माण के लिए चिन्हित सरकारी भूमि है। वहीं, प्रभावित ग्रामीण वर्षों से इस भूमि पर अपना निवास होने का दावा कर रहे हैं।1