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खरोरा और आसपास के क्षेत्रों में धड़ल्ले से हो रहे धर्मांतरण के विरोध में सर्व हिन्दू समाज के बैनर तले खरोरा स्थित दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर परिसर में एक बड़ी बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सैकड़ों की संख्या में उपस्थित लोगों ने धर्मांतरण और प्रार्थना सभाओं पर प्रतिबंध की मांग को लेकर जोरदार हुंकार भरी। उल्लेखनीय है कि खरोरा सहित ग्रामीण क्षेत्रों में धर्मांतरण के मामलों में अचानक वृद्धि हुई है, जिसके कारण कई स्थानों पर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो रही है। ईसाई मिशनरियों पर आरोप है कि वे प्रार्थना सभाओं में गैर-ईसाई समुदाय के लोगों को आमंत्रित कर उन्हें हिन्दू धर्म के खिलाफ भड़काते हैं और धर्मांतरित करते हैं। पिछले दिनों 24 जून को समीपस्थ ग्राम मांठ में भी धर्मांतरण की घटना पर बड़ा विवाद हुआ था, जहाँ ईसाई पास्टरों और हिन्दुओं के बीच टकराव की स्थिति बन गई थी। पुलिस के हस्तक्षेप से कोई अप्रिय घटना नहीं हुई, लेकिन ग्रामीणों की शिकायत पर पुलिस ने रायपुर के पास्टर शुशांत ज्ञानिक और पीयूष पटेल पर कार्रवाई की थी। इस घटना के बाद से ही हिन्दू समाज धर्मांतरण को लेकर आक्रोशित नजर आ रहा है। बैठक के दौरान, रायपुर जिला पंचायत के अध्यक्ष नवीन अग्रवाल ने धर्मांतरण को समाज और राष्ट्र के लिए गंभीर खतरा बताते हुए सभी से दलगत विचारों से ऊपर उठकर धर्मांतरण के खिलाफ एकजुट होने की अपील की। वरिष्ठ समाजसेवी राजीव अग्रवाल ने बताया कि ईसाई पास्टर गरीब और असहाय तबके के लोगों को आसानी से निशाना बनाते हैं; पहले उनके दुःख-दर्द दूर करने का भरोसा देते हैं और फिर उन्हें धर्मांतरित कर देते हैं। उन्होंने लोगों से इन ईसाई मिशनरियों, पास्टरों और उनके प्रार्थना प्रलोभनों से दूरी बनाए रखने का आग्रह किया। पूर्व नपं अध्यक्ष अनिल सोनी ने नगर के वार्डों में धर्मांतरण विरोधी समितियां बनाने और अवैध धर्मांतरण गतिविधियों पर नजर रखने की बात कही। युवा समाजसेवी बब्लू भाटिया ने युवाओं से इन पास्टरों पर नजर रखने और धर्मांतरण में संलिप्तता पाए जाने पर उन्हें सबक सिखाने की अपील की। इस बैठक में सेवानिवृत्त शिक्षक सिताराम यादव, भागवताचार्य संतोष गांगुली, श्रीमती रश्मि वर्मा, श्रीमती सोना वर्मा, सुरेन्द्र वर्मा, तोरण ठाकुर, जोगिंदर सलूजा, विकास ठाकुर, राम बाबू मंडल, राजा भाटिया, सुमीत सेन और जयप्रकाश वर्मा सहित कई अन्य लोगों ने भी सभा को संबोधित करते हुए धर्मांतरण का पुरजोर विरोध किया और घर-घर जाकर लोगों के बीच जनजागरण अभियान चलाने का आह्वान किया। सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि आसपास के गांवों में समितियां गठित की जाएंगी, जिनके माध्यम से लोगों में धर्मांतरण के प्रति जागरूकता लाई जाएगी। साथ ही, बाहरी ईसाई पादरी और पास्टरों की गतिविधियों पर निगरानी रखने तथा अवैध प्रार्थना सभाओं को बंद कराने का संकल्प लिया गया।

2 hrs ago
user_रोहित वर्मा
रोहित वर्मा
खरोरा, रायपुर, छत्तीसगढ़•
2 hrs ago

खरोरा और आसपास के क्षेत्रों में धड़ल्ले से हो रहे धर्मांतरण के विरोध में सर्व हिन्दू समाज के बैनर तले खरोरा स्थित दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर परिसर में एक बड़ी बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सैकड़ों की संख्या में उपस्थित लोगों ने धर्मांतरण और प्रार्थना सभाओं पर प्रतिबंध की मांग को लेकर जोरदार हुंकार भरी। उल्लेखनीय है कि खरोरा सहित ग्रामीण क्षेत्रों में धर्मांतरण के मामलों में अचानक वृद्धि हुई है, जिसके कारण कई स्थानों पर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो रही है। ईसाई मिशनरियों पर आरोप है कि वे प्रार्थना सभाओं में गैर-ईसाई समुदाय के लोगों को आमंत्रित कर उन्हें हिन्दू धर्म के खिलाफ भड़काते हैं और धर्मांतरित

करते हैं। पिछले दिनों 24 जून को समीपस्थ ग्राम मांठ में भी धर्मांतरण की घटना पर बड़ा विवाद हुआ था, जहाँ ईसाई पास्टरों और हिन्दुओं के बीच टकराव की स्थिति बन गई थी। पुलिस के हस्तक्षेप से कोई अप्रिय घटना नहीं हुई, लेकिन ग्रामीणों की शिकायत पर पुलिस ने रायपुर के पास्टर शुशांत ज्ञानिक और पीयूष पटेल पर कार्रवाई की थी। इस घटना के बाद से ही हिन्दू समाज धर्मांतरण को लेकर आक्रोशित नजर आ रहा है। बैठक के दौरान, रायपुर जिला पंचायत के अध्यक्ष नवीन अग्रवाल ने धर्मांतरण को समाज और राष्ट्र के लिए गंभीर खतरा बताते हुए सभी से दलगत विचारों से ऊपर उठकर धर्मांतरण के खिलाफ एकजुट होने

की अपील की। वरिष्ठ समाजसेवी राजीव अग्रवाल ने बताया कि ईसाई पास्टर गरीब और असहाय तबके के लोगों को आसानी से निशाना बनाते हैं; पहले उनके दुःख-दर्द दूर करने का भरोसा देते हैं और फिर उन्हें धर्मांतरित कर देते हैं। उन्होंने लोगों से इन ईसाई मिशनरियों, पास्टरों और उनके प्रार्थना प्रलोभनों से दूरी बनाए रखने का आग्रह किया। पूर्व नपं अध्यक्ष अनिल सोनी ने नगर के वार्डों में धर्मांतरण विरोधी समितियां बनाने और अवैध धर्मांतरण गतिविधियों पर नजर रखने की बात कही। युवा समाजसेवी बब्लू भाटिया ने युवाओं से इन पास्टरों पर नजर रखने और धर्मांतरण में संलिप्तता पाए जाने पर उन्हें सबक सिखाने की अपील की। इस बैठक में सेवानिवृत्त

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शिक्षक सिताराम यादव, भागवताचार्य संतोष गांगुली, श्रीमती रश्मि वर्मा, श्रीमती सोना वर्मा, सुरेन्द्र वर्मा, तोरण ठाकुर, जोगिंदर सलूजा, विकास ठाकुर, राम बाबू मंडल, राजा भाटिया, सुमीत सेन और जयप्रकाश वर्मा सहित कई अन्य लोगों ने भी सभा को संबोधित करते हुए धर्मांतरण का पुरजोर विरोध किया और घर-घर जाकर लोगों के बीच जनजागरण अभियान चलाने का आह्वान किया। सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि आसपास के गांवों में समितियां गठित की जाएंगी, जिनके माध्यम से लोगों में धर्मांतरण के प्रति जागरूकता लाई जाएगी। साथ ही, बाहरी ईसाई पादरी और पास्टरों की गतिविधियों पर निगरानी रखने तथा अवैध प्रार्थना सभाओं को बंद कराने का संकल्प लिया गया।

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  • खरोरा और आसपास के क्षेत्रों में धड़ल्ले से हो रहे धर्मांतरण के विरोध में सर्व हिन्दू समाज के बैनर तले खरोरा स्थित दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर परिसर में एक बड़ी बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सैकड़ों की संख्या में उपस्थित लोगों ने धर्मांतरण और प्रार्थना सभाओं पर प्रतिबंध की मांग को लेकर जोरदार हुंकार भरी। उल्लेखनीय है कि खरोरा सहित ग्रामीण क्षेत्रों में धर्मांतरण के मामलों में अचानक वृद्धि हुई है, जिसके कारण कई स्थानों पर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो रही है। ईसाई मिशनरियों पर आरोप है कि वे प्रार्थना सभाओं में गैर-ईसाई समुदाय के लोगों को आमंत्रित कर उन्हें हिन्दू धर्म के खिलाफ भड़काते हैं और धर्मांतरित करते हैं। पिछले दिनों 24 जून को समीपस्थ ग्राम मांठ में भी धर्मांतरण की घटना पर बड़ा विवाद हुआ था, जहाँ ईसाई पास्टरों और हिन्दुओं के बीच टकराव की स्थिति बन गई थी। पुलिस के हस्तक्षेप से कोई अप्रिय घटना नहीं हुई, लेकिन ग्रामीणों की शिकायत पर पुलिस ने रायपुर के पास्टर शुशांत ज्ञानिक और पीयूष पटेल पर कार्रवाई की थी। इस घटना के बाद से ही हिन्दू समाज धर्मांतरण को लेकर आक्रोशित नजर आ रहा है। बैठक के दौरान, रायपुर जिला पंचायत के अध्यक्ष नवीन अग्रवाल ने धर्मांतरण को समाज और राष्ट्र के लिए गंभीर खतरा बताते हुए सभी से दलगत विचारों से ऊपर उठकर धर्मांतरण के खिलाफ एकजुट होने की अपील की। वरिष्ठ समाजसेवी राजीव अग्रवाल ने बताया कि ईसाई पास्टर गरीब और असहाय तबके के लोगों को आसानी से निशाना बनाते हैं; पहले उनके दुःख-दर्द दूर करने का भरोसा देते हैं और फिर उन्हें धर्मांतरित कर देते हैं। उन्होंने लोगों से इन ईसाई मिशनरियों, पास्टरों और उनके प्रार्थना प्रलोभनों से दूरी बनाए रखने का आग्रह किया। पूर्व नपं अध्यक्ष अनिल सोनी ने नगर के वार्डों में धर्मांतरण विरोधी समितियां बनाने और अवैध धर्मांतरण गतिविधियों पर नजर रखने की बात कही। युवा समाजसेवी बब्लू भाटिया ने युवाओं से इन पास्टरों पर नजर रखने और धर्मांतरण में संलिप्तता पाए जाने पर उन्हें सबक सिखाने की अपील की। इस बैठक में सेवानिवृत्त शिक्षक सिताराम यादव, भागवताचार्य संतोष गांगुली, श्रीमती रश्मि वर्मा, श्रीमती सोना वर्मा, सुरेन्द्र वर्मा, तोरण ठाकुर, जोगिंदर सलूजा, विकास ठाकुर, राम बाबू मंडल, राजा भाटिया, सुमीत सेन और जयप्रकाश वर्मा सहित कई अन्य लोगों ने भी सभा को संबोधित करते हुए धर्मांतरण का पुरजोर विरोध किया और घर-घर जाकर लोगों के बीच जनजागरण अभियान चलाने का आह्वान किया। सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि आसपास के गांवों में समितियां गठित की जाएंगी, जिनके माध्यम से लोगों में धर्मांतरण के प्रति जागरूकता लाई जाएगी। साथ ही, बाहरी ईसाई पादरी और पास्टरों की गतिविधियों पर निगरानी रखने तथा अवैध प्रार्थना सभाओं को बंद कराने का संकल्प लिया गया।
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    खरोरा और आसपास के क्षेत्रों में धड़ल्ले से हो रहे धर्मांतरण के विरोध में सर्व हिन्दू समाज के बैनर तले खरोरा स्थित दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर परिसर में एक बड़ी बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सैकड़ों की संख्या में उपस्थित लोगों ने धर्मांतरण और प्रार्थना सभाओं पर प्रतिबंध की मांग को लेकर जोरदार हुंकार भरी।

उल्लेखनीय है कि खरोरा सहित ग्रामीण क्षेत्रों में धर्मांतरण के मामलों में अचानक वृद्धि हुई है, जिसके कारण कई स्थानों पर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो रही है। ईसाई मिशनरियों पर आरोप है कि वे प्रार्थना सभाओं में गैर-ईसाई समुदाय के लोगों को आमंत्रित कर उन्हें हिन्दू धर्म के खिलाफ भड़काते हैं और धर्मांतरित करते हैं। पिछले दिनों 24 जून को समीपस्थ ग्राम मांठ में भी धर्मांतरण की घटना पर बड़ा विवाद हुआ था, जहाँ ईसाई पास्टरों और हिन्दुओं के बीच टकराव की स्थिति बन गई थी। पुलिस के हस्तक्षेप से कोई अप्रिय घटना नहीं हुई, लेकिन ग्रामीणों की शिकायत पर पुलिस ने रायपुर के पास्टर शुशांत ज्ञानिक और पीयूष पटेल पर कार्रवाई की थी। इस घटना के बाद से ही हिन्दू समाज धर्मांतरण को लेकर आक्रोशित नजर आ रहा है।

बैठक के दौरान, रायपुर जिला पंचायत के अध्यक्ष नवीन अग्रवाल ने धर्मांतरण को समाज और राष्ट्र के लिए गंभीर खतरा बताते हुए सभी से दलगत विचारों से ऊपर उठकर धर्मांतरण के खिलाफ एकजुट होने की अपील की। वरिष्ठ समाजसेवी राजीव अग्रवाल ने बताया कि ईसाई पास्टर गरीब और असहाय तबके के लोगों को आसानी से निशाना बनाते हैं; पहले उनके दुःख-दर्द दूर करने का भरोसा देते हैं और फिर उन्हें धर्मांतरित कर देते हैं। उन्होंने लोगों से इन ईसाई मिशनरियों, पास्टरों और उनके प्रार्थना प्रलोभनों से दूरी बनाए रखने का आग्रह किया। पूर्व नपं अध्यक्ष अनिल सोनी ने नगर के वार्डों में धर्मांतरण विरोधी समितियां बनाने और अवैध धर्मांतरण गतिविधियों पर नजर रखने की बात कही। युवा समाजसेवी बब्लू भाटिया ने युवाओं से इन पास्टरों पर नजर रखने और धर्मांतरण में संलिप्तता पाए जाने पर उन्हें सबक सिखाने की अपील की।

इस बैठक में सेवानिवृत्त शिक्षक सिताराम यादव, भागवताचार्य संतोष गांगुली, श्रीमती रश्मि वर्मा, श्रीमती सोना वर्मा, सुरेन्द्र वर्मा, तोरण ठाकुर, जोगिंदर सलूजा, विकास ठाकुर, राम बाबू मंडल, राजा भाटिया, सुमीत सेन और जयप्रकाश वर्मा सहित कई अन्य लोगों ने भी सभा को संबोधित करते हुए धर्मांतरण का पुरजोर विरोध किया और घर-घर जाकर लोगों के बीच जनजागरण अभियान चलाने का आह्वान किया। सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि आसपास के गांवों में समितियां गठित की जाएंगी, जिनके माध्यम से लोगों में धर्मांतरण के प्रति जागरूकता लाई जाएगी। साथ ही, बाहरी ईसाई पादरी और पास्टरों की गतिविधियों पर निगरानी रखने तथा अवैध प्रार्थना सभाओं को बंद कराने का संकल्प लिया गया।
    user_रोहित वर्मा
    रोहित वर्मा
    खरोरा, रायपुर, छत्तीसगढ़•
    2 hrs ago
  • एक चेतावनी जारी की गई है ताकि दर्शक 'सिर्फ ₹44 महीने में सिम पूरे साल चालू रहेगा' जैसे दावों से भ्रमित न हों। सलाह दी गई है कि ऐसे दावे, यदि वे किसी टेलीकॉम कंपनी के वास्तविक प्लान पर आधारित हों, तभी किए जाने चाहिए। दर्शकों को किसी भी तरह के भ्रम से बचाने के लिए, कंपनी का नाम और उस प्लान की वास्तविक व पूरी जानकारी स्पष्ट रूप से शामिल करना महत्वपूर्ण है।
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    एक चेतावनी जारी की गई है ताकि दर्शक 'सिर्फ ₹44 महीने में सिम पूरे साल चालू रहेगा' जैसे दावों से भ्रमित न हों। सलाह दी गई है कि ऐसे दावे, यदि वे किसी टेलीकॉम कंपनी के वास्तविक प्लान पर आधारित हों, तभी किए जाने चाहिए। दर्शकों को किसी भी तरह के भ्रम से बचाने के लिए, कंपनी का नाम और उस प्लान की वास्तविक व पूरी जानकारी स्पष्ट रूप से शामिल करना महत्वपूर्ण है।
    user_POLICE DOST NEWS
    POLICE DOST NEWS
    Media company Raipur, Chhattisgarh•
    14 min ago
  • राजेश मिश्रा की एक रिपोर्ट के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) ने शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और संचार सहित लगभग हर क्षेत्र में अपनी उपयोगिता सिद्ध की है। हालांकि, AI के बढ़ते उपयोग के साथ एक नया पहलू सामने आ रहा है, जिस पर अब विशेषज्ञ गंभीरता से चर्चा कर रहे हैं: डेटा सेंटरों में पानी की बढ़ती खपत। AI-आधारित सेवाओं को संचालित करने वाले बड़े डेटा सेंटर अत्यधिक कंप्यूटिंग क्षमता का उपयोग करते हैं। इन सर्वरों से उत्पन्न होने वाली गर्मी को नियंत्रित करने के लिए कई स्थानों पर जल-आधारित शीतलन प्रणालियों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे AI के विस्तार के साथ-साथ पानी और ऊर्जा की मांग भी बढ़ रही है। विशेषज्ञ बताते हैं कि भले ही एक-दो प्रश्न पूछने से पानी की बड़ी मात्रा खर्च न हो, लेकिन जब दुनिया भर में प्रतिदिन करोड़ों लोग AI का उपयोग करते हैं, तो जल संसाधनों पर इसका कुल प्रभाव महत्वपूर्ण हो सकता है। साथ ही, बड़े AI मॉडलों के प्रशिक्षण और संचालन में भी पर्याप्त मात्रा में जल संसाधनों का अप्रत्यक्ष उपयोग होता है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब दुनिया पहले से ही जलवायु परिवर्तन, भूजल के लगातार दोहन, बढ़ती आबादी और प्रदूषण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में AI जैसी आधुनिक तकनीकों का भी जिम्मेदारी और आवश्यकता के अनुसार उपयोग करना समय की मांग बन गया है। विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि AI जल संकट का सबसे बड़ा कारण नहीं है, क्योंकि कृषि, उद्योग और शहरी जल प्रबंधन का प्रभाव कहीं अधिक है। फिर भी, डिजिटल संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग से ऊर्जा और पानी दोनों की बचत में योगदान दिया जा सकता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि जिस प्रकार हम बिजली और पानी की अनावश्यक बर्बादी से बचते हैं, उसी प्रकार AI का उपयोग भी आवश्यकता के अनुसार ही किया जाना चाहिए। अनावश्यक प्रयोगों के बजाय सोच-समझकर किया गया उपयोग भविष्य में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सहायक हो सकता है। तकनीक के लाभ उठाने के साथ-साथ, हर संसाधन की तरह AI का भी जिम्मेदारी और जरूरत के अनुसार उपयोग करना आवश्यक है, क्योंकि छोटी-छोटी सावधानियां ही भविष्य के जल संकट को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
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    राजेश मिश्रा की एक रिपोर्ट के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) ने शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और संचार सहित लगभग हर क्षेत्र में अपनी उपयोगिता सिद्ध की है। हालांकि, AI के बढ़ते उपयोग के साथ एक नया पहलू सामने आ रहा है, जिस पर अब विशेषज्ञ गंभीरता से चर्चा कर रहे हैं: डेटा सेंटरों में पानी की बढ़ती खपत।

AI-आधारित सेवाओं को संचालित करने वाले बड़े डेटा सेंटर अत्यधिक कंप्यूटिंग क्षमता का उपयोग करते हैं। इन सर्वरों से उत्पन्न होने वाली गर्मी को नियंत्रित करने के लिए कई स्थानों पर जल-आधारित शीतलन प्रणालियों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे AI के विस्तार के साथ-साथ पानी और ऊर्जा की मांग भी बढ़ रही है। विशेषज्ञ बताते हैं कि भले ही एक-दो प्रश्न पूछने से पानी की बड़ी मात्रा खर्च न हो, लेकिन जब दुनिया भर में प्रतिदिन करोड़ों लोग AI का उपयोग करते हैं, तो जल संसाधनों पर इसका कुल प्रभाव महत्वपूर्ण हो सकता है। साथ ही, बड़े AI मॉडलों के प्रशिक्षण और संचालन में भी पर्याप्त मात्रा में जल संसाधनों का अप्रत्यक्ष उपयोग होता है।

यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब दुनिया पहले से ही जलवायु परिवर्तन, भूजल के लगातार दोहन, बढ़ती आबादी और प्रदूषण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में AI जैसी आधुनिक तकनीकों का भी जिम्मेदारी और आवश्यकता के अनुसार उपयोग करना समय की मांग बन गया है। विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि AI जल संकट का सबसे बड़ा कारण नहीं है, क्योंकि कृषि, उद्योग और शहरी जल प्रबंधन का प्रभाव कहीं अधिक है। फिर भी, डिजिटल संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग से ऊर्जा और पानी दोनों की बचत में योगदान दिया जा सकता है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि जिस प्रकार हम बिजली और पानी की अनावश्यक बर्बादी से बचते हैं, उसी प्रकार AI का उपयोग भी आवश्यकता के अनुसार ही किया जाना चाहिए। अनावश्यक प्रयोगों के बजाय सोच-समझकर किया गया उपयोग भविष्य में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सहायक हो सकता है। तकनीक के लाभ उठाने के साथ-साथ, हर संसाधन की तरह AI का भी जिम्मेदारी और जरूरत के अनुसार उपयोग करना आवश्यक है, क्योंकि छोटी-छोटी सावधानियां ही भविष्य के जल संकट को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
    user_Rajesh mishra
    Rajesh mishra
    Local News Reporter बलौदा बाजार, बलौदा बाजार, छत्तीसगढ़•
    1 hr ago
  • कुछ ग्रामीणों ने बताया है कि तीन दिन पहले जब वे अपने खेत में जुताई करने के लिए गए, तो उन्होंने देखा कि उनके खेत में दो बिजली के खंभे लगा दिए गए हैं। ये खंभे पहले उस जगह पर मौजूद नहीं थे। ग्रामीणों ने इन बिजली के खंभों को जल्द से जल्द खेत से हटाने की मांग की है।
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    कुछ ग्रामीणों ने बताया है कि तीन दिन पहले जब वे अपने खेत में जुताई करने के लिए गए, तो उन्होंने देखा कि उनके खेत में दो बिजली के खंभे लगा दिए गए हैं। ये खंभे पहले उस जगह पर मौजूद नहीं थे। ग्रामीणों ने इन बिजली के खंभों को जल्द से जल्द खेत से हटाने की मांग की है।
    user_Bhavesh dewangan
    Bhavesh dewangan
    औदगी, रायपुर, छत्तीसगढ़•
    11 hrs ago
  • तिल्दा-नेवरा में सहकारिता सप्ताह के अवसर पर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, शाखा तिल्दा और प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों तिल्दा तथा तुलसी में किसान हितैषी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य किसानों को सहकारिता विभाग की विभिन्न योजनाओं, बैंकिंग सुविधाओं और कृषि से जुड़ी सेवाओं की विस्तृत जानकारी देकर उन्हें अधिकतम लाभ पहुँचाना था। कार्यक्रम की शुरुआत जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, शाखा तिल्दा में ध्वजारोहण के साथ हुई। बैंक अधिकारियों ने उपस्थित किसानों को कृषि ऋण, फसल ऋण, बैंकिंग सेवाओं और सहकारिता विभाग की विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी दी। साथ ही, किसानों को समय पर ऋण भुगतान करने, आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसी कड़ी में, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति तिल्दा और तुलसी में किसान सम्मेलन आयोजित कर किसानों को उर्वरक वितरण व्यवस्था, ऋण सुविधाओं, सहकारी योजनाओं तथा कृषि विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। अधिकारियों ने किसानों से समितियों के माध्यम से संचालित इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आग्रह भी किया। इन कार्यक्रमों में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के शाखा प्रबंधक शोभाराम साहू, सहायक लेखापाल मनीष दुबे, तिल्दा समिति के अध्यक्ष मनहरण वर्मा, समिति प्रभारी भूवन साहू, सीईओ शशांक बल्लेवार, नरसिंग वर्मा, गुलाब आदिल, महेश शर्मा सहित बैंक एवं समिति के अधिकारी-कर्मचारी, बड़ी संख्या में किसान और क्षेत्र के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सहकारिता सप्ताह के तहत आयोजित इन कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को सहकारी व्यवस्था से जोड़ने, सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करने और कृषि क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाने का संदेश दिया गया।
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    तिल्दा-नेवरा में सहकारिता सप्ताह के अवसर पर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, शाखा तिल्दा और प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों तिल्दा तथा तुलसी में किसान हितैषी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य किसानों को सहकारिता विभाग की विभिन्न योजनाओं, बैंकिंग सुविधाओं और कृषि से जुड़ी सेवाओं की विस्तृत जानकारी देकर उन्हें अधिकतम लाभ पहुँचाना था।

कार्यक्रम की शुरुआत जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, शाखा तिल्दा में ध्वजारोहण के साथ हुई। बैंक अधिकारियों ने उपस्थित किसानों को कृषि ऋण, फसल ऋण, बैंकिंग सेवाओं और सहकारिता विभाग की विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी दी। साथ ही, किसानों को समय पर ऋण भुगतान करने, आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसी कड़ी में, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति तिल्दा और तुलसी में किसान सम्मेलन आयोजित कर किसानों को उर्वरक वितरण व्यवस्था, ऋण सुविधाओं, सहकारी योजनाओं तथा कृषि विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। अधिकारियों ने किसानों से समितियों के माध्यम से संचालित इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आग्रह भी किया।

इन कार्यक्रमों में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के शाखा प्रबंधक शोभाराम साहू, सहायक लेखापाल मनीष दुबे, तिल्दा समिति के अध्यक्ष मनहरण वर्मा, समिति प्रभारी भूवन साहू, सीईओ शशांक बल्लेवार, नरसिंग वर्मा, गुलाब आदिल, महेश शर्मा सहित बैंक एवं समिति के अधिकारी-कर्मचारी, बड़ी संख्या में किसान और क्षेत्र के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सहकारिता सप्ताह के तहत आयोजित इन कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को सहकारी व्यवस्था से जोड़ने, सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करने और कृषि क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाने का संदेश दिया गया।
    user_प्रकाश जोशी
    प्रकाश जोशी
    Newspaper publisher औदगी, रायपुर, छत्तीसगढ़•
    21 hrs ago
  • नवापारा-राजिम में, भाजपा द्वारा नगरीय निकायों में एल्डरमैन की हालिया नियुक्तियों से जैन समाज में गहरा असंतोष और आक्रोश है। समाज के पदाधिकारियों और वरिष्ठजनों का आरोप है कि रायपुर और सरगुजा संभाग के कुल 253 एल्डरमैन पदों पर की गई नियुक्तियों में जैन समाज के एक भी कार्यकर्ता को प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया, जिससे समाज स्वयं को पूरी तरह उपेक्षित महसूस कर रहा है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, रायपुर संभाग में 152 और सरगुजा संभाग में 101 एल्डरमैन पदों पर ये नियुक्तियाँ की गई हैं, लेकिन जैन समाज का दावा है कि इनमें उनका एक भी नाम शामिल नहीं है। जैन समाज के वरिष्ठजनों ने इस फैसले पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि वर्षों से भाजपा के साथ मजबूती से खड़े रहने के बावजूद यदि उन्हें लगातार उपेक्षित किया जाएगा, तो समाज भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर गंभीरता से विचार करने को मजबूर होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि "विश्वास और समर्थन का प्रतिफल उपेक्षा के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता" और ऐसी स्थिति लंबे समय तक बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समाज के प्रतिनिधियों ने यह भी बताया कि केवल जैन समाज ही नहीं, बल्कि ब्राह्मण और अग्रवाल समाज को भी अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिला। रायपुर संभाग के 152 पदों में ब्राह्मण और अग्रवाल समाज से 8-8 प्रतिनिधियों को स्थान मिला, जबकि सरगुजा संभाग के 101 पदों में ब्राह्मण समाज से 10 और अग्रवाल समाज से 3 प्रतिनिधियों की नियुक्ति हुई, फिर भी जैन समाज को दोनों संभागों में एक भी अवसर नहीं दिया गया। इस संबंध में भाजपा का पक्ष जानने के लिए अशोक बजाज ने प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। जैन समाज के वरिष्ठजनों का कहना है कि समाज किसी विशेष कृपा की अपेक्षा नहीं करता, बल्कि संगठन में वर्षों से सक्रिय कार्यकर्ताओं को उनके योगदान के अनुरूप सम्मानजनक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में भी यही अनदेखी जारी रही, तो जैन समाज को अपने राजनीतिक विकल्पों पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
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    नवापारा-राजिम में, भाजपा द्वारा नगरीय निकायों में एल्डरमैन की हालिया नियुक्तियों से जैन समाज में गहरा असंतोष और आक्रोश है। समाज के पदाधिकारियों और वरिष्ठजनों का आरोप है कि रायपुर और सरगुजा संभाग के कुल 253 एल्डरमैन पदों पर की गई नियुक्तियों में जैन समाज के एक भी कार्यकर्ता को प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया, जिससे समाज स्वयं को पूरी तरह उपेक्षित महसूस कर रहा है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, रायपुर संभाग में 152 और सरगुजा संभाग में 101 एल्डरमैन पदों पर ये नियुक्तियाँ की गई हैं, लेकिन जैन समाज का दावा है कि इनमें उनका एक भी नाम शामिल नहीं है।

जैन समाज के वरिष्ठजनों ने इस फैसले पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि वर्षों से भाजपा के साथ मजबूती से खड़े रहने के बावजूद यदि उन्हें लगातार उपेक्षित किया जाएगा, तो समाज भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर गंभीरता से विचार करने को मजबूर होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि "विश्वास और समर्थन का प्रतिफल उपेक्षा के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता" और ऐसी स्थिति लंबे समय तक बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समाज के प्रतिनिधियों ने यह भी बताया कि केवल जैन समाज ही नहीं, बल्कि ब्राह्मण और अग्रवाल समाज को भी अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिला। रायपुर संभाग के 152 पदों में ब्राह्मण और अग्रवाल समाज से 8-8 प्रतिनिधियों को स्थान मिला, जबकि सरगुजा संभाग के 101 पदों में ब्राह्मण समाज से 10 और अग्रवाल समाज से 3 प्रतिनिधियों की नियुक्ति हुई, फिर भी जैन समाज को दोनों संभागों में एक भी अवसर नहीं दिया गया। इस संबंध में भाजपा का पक्ष जानने के लिए अशोक बजाज ने प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।

जैन समाज के वरिष्ठजनों का कहना है कि समाज किसी विशेष कृपा की अपेक्षा नहीं करता, बल्कि संगठन में वर्षों से सक्रिय कार्यकर्ताओं को उनके योगदान के अनुरूप सम्मानजनक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में भी यही अनदेखी जारी रही, तो जैन समाज को अपने राजनीतिक विकल्पों पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
    user_तुकाराम कंसारी नवापारा राजिम
    तुकाराम कंसारी नवापारा राजिम
    Artist औदगी, रायपुर, छत्तीसगढ़•
    22 hrs ago
  • लाखे नगर वार्ड में एक नई सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है, जिससे क्षेत्र की तस्वीर बदल रही है। यह विकास कार्य पार्षद अंबर अग्रवाल की देखरेख में किया जा रहा है।
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    लाखे नगर वार्ड में एक नई सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है, जिससे क्षेत्र की तस्वीर बदल रही है। यह विकास कार्य पार्षद अंबर अग्रवाल की देखरेख में किया जा रहा है।
    user_POLICE DOST NEWS
    POLICE DOST NEWS
    Media company Raipur, Chhattisgarh•
    20 min ago
  • उत्तर प्रदेश के रायबरेली में स्थित एक सरकारी अस्पताल से एक अशोभनीय घटना सामने आई है। इस घटना में, एक महिला सफाई कर्मी को एक मानसिक रूप से कमजोर युवक को लात मारते हुए और गालियां बकते हुए देखा गया है। इस तरह के व्यवहार को पूरी तरह से अशोभनीय बताया जा रहा है, और मामले की जाँच जारी है। जनता से आग्रह किया गया है कि वे इस घटना पर अपनी राय कमेंट्स में साझा करें।
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    उत्तर प्रदेश के रायबरेली में स्थित एक सरकारी अस्पताल से एक अशोभनीय घटना सामने आई है। इस घटना में, एक महिला सफाई कर्मी को एक मानसिक रूप से कमजोर युवक को लात मारते हुए और गालियां बकते हुए देखा गया है। इस तरह के व्यवहार को पूरी तरह से अशोभनीय बताया जा रहा है, और मामले की जाँच जारी है। जनता से आग्रह किया गया है कि वे इस घटना पर अपनी राय कमेंट्स में साझा करें।
    user_Mukesh Awasthi
    Mukesh Awasthi
    Raipur, Chhattisgarh•
    17 min ago
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