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भारतीय डाक विभाग ने ग्राहकों की सुविधा के लिए 22 जून से शाखा डाकघरों में ई-केवाईसी आधारित लेनदेन की डिजिटल सुविधा उपलब्ध करा दी है। धर्मशाला के अधीक्षक डाकघर, रविन्द्र कुमार शर्मा ने 23 जून को यह जानकारी देते हुए बताया कि इस पहल से ग्राहकों को आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के माध्यम से कई सेवाएं मिलेंगी। इस नई सुविधा के तहत, अब बचत खाते, आवर्ती खाते और सुकन्या समृद्धि खातों में निर्धारित सीमा तक बिना किसी दस्तावेजी औपचारिकता के 50,000 रुपये तक जमा किए जा सकेंगे। साथ ही, बचत बैंक खातों से 20,000 रुपये तक निकालने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इससे पात्र खाताधारक किसी भी शाखा डाकघर से लेनदेन कर सकेंगे, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के खाताधारकों को विशेष आसानी होगी। अधीक्षक शर्मा के अनुसार, धर्मशाला मंडल के अंतर्गत सभी शाखा डाकघरों में यह ई-केवाईसी सुविधा उपलब्ध है। खाताधारक अपने खाते को अपने मोबाइल नंबर से लिंक करवाकर और ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूर्ण करके डाक विभाग की इस डिजिटल बैंकिंग सेवा का लाभ उठा सकते हैं।

3 hrs ago
user_SHARMA AS
SHARMA AS
its A Digital news website and web tv कांगड़ा, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश•
3 hrs ago

भारतीय डाक विभाग ने ग्राहकों की सुविधा के लिए 22 जून से शाखा डाकघरों में ई-केवाईसी आधारित लेनदेन की डिजिटल सुविधा उपलब्ध करा दी है। धर्मशाला के अधीक्षक डाकघर, रविन्द्र कुमार शर्मा ने 23 जून को यह जानकारी देते हुए बताया कि इस पहल से ग्राहकों को आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के माध्यम से कई सेवाएं मिलेंगी। इस नई सुविधा के तहत, अब बचत खाते, आवर्ती खाते और सुकन्या समृद्धि खातों में निर्धारित सीमा तक बिना किसी दस्तावेजी औपचारिकता के 50,000 रुपये तक जमा किए जा सकेंगे। साथ ही, बचत बैंक खातों से 20,000 रुपये तक निकालने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इससे पात्र खाताधारक किसी भी शाखा डाकघर से लेनदेन कर सकेंगे, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के खाताधारकों को विशेष आसानी होगी। अधीक्षक शर्मा के अनुसार, धर्मशाला मंडल के अंतर्गत सभी शाखा डाकघरों में यह ई-केवाईसी सुविधा उपलब्ध है। खाताधारक अपने खाते को अपने मोबाइल नंबर से लिंक करवाकर और ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूर्ण करके डाक विभाग की इस डिजिटल बैंकिंग सेवा का लाभ उठा सकते हैं।

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  • आज मंगलवार, 23 जून को ऊना जिले की अख़बारों की मुख्य सुर्खियां जारी की गई हैं। इन सुर्खियों में बंगाना, मैहतपुर, चिंतपूर्णी, अंब और गगरेट जैसे विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित खबरें शामिल की गई हैं।
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    आज मंगलवार, 23 जून को ऊना जिले की अख़बारों की मुख्य सुर्खियां जारी की गई हैं। इन सुर्खियों में बंगाना, मैहतपुर, चिंतपूर्णी, अंब और गगरेट जैसे विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित खबरें शामिल की गई हैं।
    user_247 superfast ks
    247 superfast ks
    ऊना, ऊना, हिमाचल प्रदेश•
    12 hrs ago
  • बाबा वीर नाथ राम चंद ठाकुर के एक कुल्लवी गीत के बारे में जानकारी दी गई है, जो 2026 से संबंधित है। इस गीत के संबंध में 'एचपी कॉल' (hp call) के लिए 7018646780 पर संपर्क किया जा सकता है।
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    बाबा वीर नाथ राम चंद ठाकुर के एक कुल्लवी गीत के बारे में जानकारी दी गई है, जो 2026 से संबंधित है। इस गीत के संबंध में 'एचपी कॉल' (hp call) के लिए 7018646780 पर संपर्क किया जा सकता है।
    user_Ram chand
    Ram chand
    Singer मनाली, कुल्लू, हिमाचल प्रदेश•
    12 hrs ago
  • ग्राम पंचायत सेऊ के गाँव सेऊ, घुमारवीं में एक पीपल पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस धार्मिक अवसर पर स्थानीय लोग उपस्थित रहे। यह पूजन कार्यक्रम सभी रीति-रिवाजों का पालन करते हुए पारंपरिक तरीके से संपन्न हुआ।
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    ग्राम पंचायत सेऊ के गाँव सेऊ, घुमारवीं में एक पीपल पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस धार्मिक अवसर पर स्थानीय लोग उपस्थित रहे। यह पूजन कार्यक्रम सभी रीति-रिवाजों का पालन करते हुए पारंपरिक तरीके से संपन्न हुआ।
    user_रिपोर्टर राकेशशर्मा पंजाबकेसरी
    रिपोर्टर राकेशशर्मा पंजाबकेसरी
    Local News Reporter घुमारवीं, बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश•
    23 hrs ago
  • बिलासपुर के मल्टीपर्पज़ कल्चरल कॉम्प्लेक्स में सोमवार को समग्र शिक्षा योजना के अंतर्गत सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) की जनसुनवाई आयोजित की गई। इस जनसुनवाई का मुख्य उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और सामुदायिक सहभागिता को मजबूत बनाना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता उपनिदेशक उच्च शिक्षा (गुणवत्ता) निशा गुप्ता ने की। जनसुनवाई में शिक्षा विभाग के अधिकारियों, विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों, शिक्षकों, अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस दौरान समग्र शिक्षा योजना के कार्यान्वयन, विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं और शिक्षा की गुणवत्ता से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर गहन चर्चा हुई, तथा उपस्थित प्रतिभागियों से कई सुझाव और शिकायतें प्राप्त की गईं। उपनिदेशक शिक्षा (गुणवत्ता) निशा गुप्ता ने सभी प्रतिभागियों से शिक्षा से संबंधित समस्याओं, सुझावों एवं शिकायतों को लिखित रूप में प्रस्तुत करने का आग्रह किया, ताकि उन्हें उचित स्तर पर विचार के लिए भेजा जा सके। इस अवसर पर, रिसोर्स पर्सन एवं प्रधानाचार्य-अन्वेषक डॉ. रणधीर रंटा ने सामाजिक अंकेक्षण की पूरी प्रक्रिया और उसके मुख्य निष्कर्षों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस अंकेक्षण के तहत जिले के लगभग 20 प्रतिशत विद्यालयों का निरीक्षण किया गया है, और इसी निरीक्षण के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट को जनसुनवाई के दौरान प्रस्तुत किया गया। डॉ. रंटा ने विद्यालयों से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रतिभागियों के साथ सीधे संवाद किया और उनके प्रश्नों तथा जिज्ञासाओं का समाधान किया। डॉ. रणधीर रंटा ने आगे बताया कि जनसुनवाई के दौरान प्राप्त सभी सुझावों, शिकायतों और अभिमतों को संकलित कर एक विस्तृत प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा। यह प्रतिवेदन आवश्यक कार्रवाई और नीति निर्माण के लिए सरकार को भेजा जाएगा। उन्होंने जोर दिया कि सामाजिक अंकेक्षण का दोहरा उद्देश्य है: योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना और शिक्षा व्यवस्था में जनभागीदारी को बढ़ावा देना। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में मीडिया कोऑर्डिनेटर नागेंद्र, ऑब्जर्वर राकेश कुमार, वित्त अधिकारी देवांश सलोत्रा, उप-प्रधानाचार्य कुलदीप शर्मा, कार्यक्रम समन्वयक सोमदत्त, मीडिया कोऑर्डिनेटर दिग्विजय मल्होत्रा, पूर्व-प्राथमिक शिक्षा समन्वयक अतुल शर्मा और रीता कुमारी सहित अनेक अधिकारी एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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    बिलासपुर के मल्टीपर्पज़ कल्चरल कॉम्प्लेक्स में सोमवार को समग्र शिक्षा योजना के अंतर्गत सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) की जनसुनवाई आयोजित की गई। इस जनसुनवाई का मुख्य उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और सामुदायिक सहभागिता को मजबूत बनाना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता उपनिदेशक उच्च शिक्षा (गुणवत्ता) निशा गुप्ता ने की।

जनसुनवाई में शिक्षा विभाग के अधिकारियों, विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों, शिक्षकों, अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस दौरान समग्र शिक्षा योजना के कार्यान्वयन, विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं और शिक्षा की गुणवत्ता से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर गहन चर्चा हुई, तथा उपस्थित प्रतिभागियों से कई सुझाव और शिकायतें प्राप्त की गईं। उपनिदेशक शिक्षा (गुणवत्ता) निशा गुप्ता ने सभी प्रतिभागियों से शिक्षा से संबंधित समस्याओं, सुझावों एवं शिकायतों को लिखित रूप में प्रस्तुत करने का आग्रह किया, ताकि उन्हें उचित स्तर पर विचार के लिए भेजा जा सके।

इस अवसर पर, रिसोर्स पर्सन एवं प्रधानाचार्य-अन्वेषक डॉ. रणधीर रंटा ने सामाजिक अंकेक्षण की पूरी प्रक्रिया और उसके मुख्य निष्कर्षों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस अंकेक्षण के तहत जिले के लगभग 20 प्रतिशत विद्यालयों का निरीक्षण किया गया है, और इसी निरीक्षण के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट को जनसुनवाई के दौरान प्रस्तुत किया गया। डॉ. रंटा ने विद्यालयों से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रतिभागियों के साथ सीधे संवाद किया और उनके प्रश्नों तथा जिज्ञासाओं का समाधान किया।

डॉ. रणधीर रंटा ने आगे बताया कि जनसुनवाई के दौरान प्राप्त सभी सुझावों, शिकायतों और अभिमतों को संकलित कर एक विस्तृत प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा। यह प्रतिवेदन आवश्यक कार्रवाई और नीति निर्माण के लिए सरकार को भेजा जाएगा। उन्होंने जोर दिया कि सामाजिक अंकेक्षण का दोहरा उद्देश्य है: योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना और शिक्षा व्यवस्था में जनभागीदारी को बढ़ावा देना।

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में मीडिया कोऑर्डिनेटर नागेंद्र, ऑब्जर्वर राकेश कुमार, वित्त अधिकारी देवांश सलोत्रा, उप-प्रधानाचार्य कुलदीप शर्मा, कार्यक्रम समन्वयक सोमदत्त, मीडिया कोऑर्डिनेटर दिग्विजय मल्होत्रा, पूर्व-प्राथमिक शिक्षा समन्वयक अतुल शर्मा और रीता कुमारी सहित अनेक अधिकारी एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
    user_Sanjeev ranout
    Sanjeev ranout
    बिलासपुर सदर, बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश•
    5 hrs ago
  • रैला पंचायत के प्रधान टेक सिंह ठाकुर ने पंचायत क्षेत्र में NHPC पार्वती परियोजना की डंपिंग साइट्स से उत्पन्न होने वाले खतरे का मुद्दा उठाया है। प्रधान ठाकुर ने परियोजना अधिकारी के टाल-मटोल भरे जवाबों पर अपनी नाराजगी व्यक्त की और इस गंभीर विषय पर उच्च अधिकारियों के साथ एक बैठक आयोजित करने की मांग रखी।
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    रैला पंचायत के प्रधान टेक सिंह ठाकुर ने पंचायत क्षेत्र में NHPC पार्वती परियोजना की डंपिंग साइट्स से उत्पन्न होने वाले खतरे का मुद्दा उठाया है। प्रधान ठाकुर ने परियोजना अधिकारी के टाल-मटोल भरे जवाबों पर अपनी नाराजगी व्यक्त की और इस गंभीर विषय पर उच्च अधिकारियों के साथ एक बैठक आयोजित करने की मांग रखी।
    user_Budhi Singh Thakur
    Budhi Singh Thakur
    Local News Reporter Sainj, Kullu•
    1 hr ago
  • शिमला जिले के रामपुर के ननखड़ी कॉलेज को डीनोटिफाई करने के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। भाजपा नेता और रामपुर से पूर्व प्रत्याशी कौल नेगी ने प्रदेश सरकार को चेतावनी दी है कि यदि कॉलेज बंद हुआ तो लोग सड़कों पर उतरकर इसका कड़ा विरोध करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान कांग्रेस सरकार गरीब बच्चों को उच्च शिक्षा से वंचित करना चाहती है। कौल नेगी ने बताया कि यह कॉलेज 18 बच्चों के साथ भी सफलतापूर्वक चल रहा था, लेकिन अब कम छात्रों की संख्या का हवाला देकर इसे बंद किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कॉलेज में कला और वाणिज्य संकाय की पढ़ाई होती है। हालांकि, ननखड़ी के आसपास के स्कूलों में वाणिज्य की पढ़ाई नहीं कराई जाती, जिससे शिमला-रामपुर क्षेत्र से बच्चे ननखड़ी कॉलेज तक नहीं पहुँच पाएंगे। नेगी के अनुसार, इस कॉलेज के बंद होने से 18 पंचायतें प्रभावित होंगी। उन्होंने स्मरण कराया कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने 2012-13 में इस कॉलेज की घोषणा की थी, जिसके बाद यह स्थापित हुआ। नेगी ने जोर दिया कि पूर्व सरकारों के प्रमुखों की सोच थी कि किसी भी बच्चे को उच्च शिक्षा से वंचित न रखा जाए, और पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र भी तीन बच्चों के लिए भी स्कूल चलाने की बात कहते थे। इसके विपरीत, वर्तमान सरकार इस विचार के विरुद्ध काम कर रही है। कौल नेगी ने पुनः चेतावनी दी है कि अगर कॉलेज को फिर से बहाल नहीं किया गया, तो बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।
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    शिमला जिले के रामपुर के ननखड़ी कॉलेज को डीनोटिफाई करने के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। भाजपा नेता और रामपुर से पूर्व प्रत्याशी कौल नेगी ने प्रदेश सरकार को चेतावनी दी है कि यदि कॉलेज बंद हुआ तो लोग सड़कों पर उतरकर इसका कड़ा विरोध करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान कांग्रेस सरकार गरीब बच्चों को उच्च शिक्षा से वंचित करना चाहती है।

कौल नेगी ने बताया कि यह कॉलेज 18 बच्चों के साथ भी सफलतापूर्वक चल रहा था, लेकिन अब कम छात्रों की संख्या का हवाला देकर इसे बंद किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कॉलेज में कला और वाणिज्य संकाय की पढ़ाई होती है। हालांकि, ननखड़ी के आसपास के स्कूलों में वाणिज्य की पढ़ाई नहीं कराई जाती, जिससे शिमला-रामपुर क्षेत्र से बच्चे ननखड़ी कॉलेज तक नहीं पहुँच पाएंगे। नेगी के अनुसार, इस कॉलेज के बंद होने से 18 पंचायतें प्रभावित होंगी।

उन्होंने स्मरण कराया कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने 2012-13 में इस कॉलेज की घोषणा की थी, जिसके बाद यह स्थापित हुआ। नेगी ने जोर दिया कि पूर्व सरकारों के प्रमुखों की सोच थी कि किसी भी बच्चे को उच्च शिक्षा से वंचित न रखा जाए, और पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र भी तीन बच्चों के लिए भी स्कूल चलाने की बात कहते थे। इसके विपरीत, वर्तमान सरकार इस विचार के विरुद्ध काम कर रही है। कौल नेगी ने पुनः चेतावनी दी है कि अगर कॉलेज को फिर से बहाल नहीं किया गया, तो बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।
    user_Roshan Sharma
    Roshan Sharma
    Local News Reporter Shimla (Urban), Himachal Pradesh•
    14 hrs ago
  • प्रदेश कांग्रेस के पूर्व मीडिया कॉर्डिनेटर संदीप सांख्यान ने घोषणा की है कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने किशाऊ बांध परियोजना पर पिछले आठ वर्षों से चला आ रहा गतिरोध तोड़ दिया है। सांख्यान के अनुसार, मुख्यमंत्री प्रदेश के हितों की रक्षा करने में सबसे बड़े रणनीतिकार साबित हुए हैं और उन्होंने भविष्य में प्रदेश का राजस्व बढ़ाने की दिशा में एक सराहनीय कदम उठाया है। संदीप सांख्यान ने बताया कि लगभग पंद्रह हजार करोड़ रुपये की लागत वाली यह बहुद्देश्यीय परियोजना प्रदेश की आर्थिकी में उल्लेखनीय वृद्धि करेगी, जबकि प्रदेश सरकार का वित्तीय निवेश इसमें न के बराबर होगा। इसे मुख्यमंत्री की रणनीति की एक बड़ी जीत करार दिया गया है। सांख्यान के अनुसार, इस योजना से भविष्य में प्रदेश को लगभग 225 मेगावाट बिजली मुफ्त मिलेगी, जिसमें प्रतिवर्ष 100 करोड़ यूनिट से भी अधिक बिजली का उत्पादन होगा, जिससे प्रदेश जगमग करेगा। साथ ही, प्रदेश के राजस्व में प्रतिवर्ष करीब 600 करोड़ रुपये की वृद्धि होगी। उन्होंने टोंस नदी, जो कि यमुना की एक प्रमुख सहायक नदी है, पर बनने वाली इस बहुद्देश्यीय योजना को अमलीजामा पहनाना मुख्यमंत्री का मास्टर स्ट्रोक बताया।
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    प्रदेश कांग्रेस के पूर्व मीडिया कॉर्डिनेटर संदीप सांख्यान ने घोषणा की है कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने किशाऊ बांध परियोजना पर पिछले आठ वर्षों से चला आ रहा गतिरोध तोड़ दिया है। सांख्यान के अनुसार, मुख्यमंत्री प्रदेश के हितों की रक्षा करने में सबसे बड़े रणनीतिकार साबित हुए हैं और उन्होंने भविष्य में प्रदेश का राजस्व बढ़ाने की दिशा में एक सराहनीय कदम उठाया है।

संदीप सांख्यान ने बताया कि लगभग पंद्रह हजार करोड़ रुपये की लागत वाली यह बहुद्देश्यीय परियोजना प्रदेश की आर्थिकी में उल्लेखनीय वृद्धि करेगी, जबकि प्रदेश सरकार का वित्तीय निवेश इसमें न के बराबर होगा। इसे मुख्यमंत्री की रणनीति की एक बड़ी जीत करार दिया गया है।

सांख्यान के अनुसार, इस योजना से भविष्य में प्रदेश को लगभग 225 मेगावाट बिजली मुफ्त मिलेगी, जिसमें प्रतिवर्ष 100 करोड़ यूनिट से भी अधिक बिजली का उत्पादन होगा, जिससे प्रदेश जगमग करेगा। साथ ही, प्रदेश के राजस्व में प्रतिवर्ष करीब 600 करोड़ रुपये की वृद्धि होगी। उन्होंने टोंस नदी, जो कि यमुना की एक प्रमुख सहायक नदी है, पर बनने वाली इस बहुद्देश्यीय योजना को अमलीजामा पहनाना मुख्यमंत्री का मास्टर स्ट्रोक बताया।
    user_Sanjeev ranout
    Sanjeev ranout
    बिलासपुर सदर, बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश•
    7 hrs ago
  • सैंज पिन पार्वती नदी में आई बाढ़ के कारण पार्वती बांध के आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस स्थिति के बीच, बचाव अभियान चलाकर घायलों को सुरक्षित शिविरों में पहुंचाया गया है। आपदा प्रबंधन के तहत, नदी किनारे स्थित खतरे वाले गांवों को भी खाली करा लिया गया है।
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    सैंज पिन पार्वती नदी में आई बाढ़ के कारण पार्वती बांध के आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस स्थिति के बीच, बचाव अभियान चलाकर घायलों को सुरक्षित शिविरों में पहुंचाया गया है। आपदा प्रबंधन के तहत, नदी किनारे स्थित खतरे वाले गांवों को भी खाली करा लिया गया है।
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    Budhi Singh Thakur
    Local News Reporter Sainj, Kullu•
    1 hr ago
  • हिमाचल प्रदेश में मिड-डे मील वर्कर्स अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी हड़ताल पर हैं। सीटू से संबंधित मिड डे मील वर्कर्स यूनियन के बैनर तले टॉलैंड से सचिवालय तक रोष रैली निकाली गई, जहाँ उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यूनियन वेतन बढ़ोतरी, पूरे 12 महीने का वेतन, ग्रेच्युटी, पेंशन और नियमितीकरण सहित कई अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रही है। इस दौरान यूनियन नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकारों पर लंबे समय से मिड डे मील वर्कर्स की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। यूनियन की राज्य महासचिव शांति देवी और अध्यक्ष संजीव कुमार ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने पिछले 17 वर्षों में मिड डे मील वर्कर्स के वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं की है, और राज्य सरकार भी इस मुद्दे पर उदासीन रवैया अपना रही है। उन्होंने बताया कि मिड डे मील वर्कर्स को नियमित वेतन नहीं मिलता, बल्कि कई बार तीन-तीन महीने तक वेतन लंबित रहता है और भुगतान भी एकमुश्त नहीं किया जाता। इसके अतिरिक्त, स्कूलों में 25 बच्चों की अनिवार्य संख्या की शर्त के कारण बच्चों की संख्या कम होने पर वर्कर्स की सेवाएं समाप्त कर दी जाती हैं। यूनियन ने प्रमुखता से मांग की है कि हाई कोर्ट के फैसले के अनुरूप मिड डे मील वर्कर्स को पूरे 12 महीने का वेतन दिया जाए। उनकी अन्य मांगों में हरियाणा की तर्ज पर 7,000 रुपये मासिक वेतन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की तरह अवकाश, 25 बच्चों की अनिवार्य संख्या की शर्त को समाप्त करना, ग्रेच्युटी और पेंशन सुविधा प्रदान करना, मेडिकल जांच का खर्च विभाग द्वारा वहन करना और मिड डे मील वर्कर्स के लिए नियमितीकरण की नीति बनाना शामिल है। यूनियन नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।
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    हिमाचल प्रदेश में मिड-डे मील वर्कर्स अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी हड़ताल पर हैं। सीटू से संबंधित मिड डे मील वर्कर्स यूनियन के बैनर तले टॉलैंड से सचिवालय तक रोष रैली निकाली गई, जहाँ उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यूनियन वेतन बढ़ोतरी, पूरे 12 महीने का वेतन, ग्रेच्युटी, पेंशन और नियमितीकरण सहित कई अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रही है। इस दौरान यूनियन नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकारों पर लंबे समय से मिड डे मील वर्कर्स की उपेक्षा करने का आरोप लगाया।

यूनियन की राज्य महासचिव शांति देवी और अध्यक्ष संजीव कुमार ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने पिछले 17 वर्षों में मिड डे मील वर्कर्स के वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं की है, और राज्य सरकार भी इस मुद्दे पर उदासीन रवैया अपना रही है। उन्होंने बताया कि मिड डे मील वर्कर्स को नियमित वेतन नहीं मिलता, बल्कि कई बार तीन-तीन महीने तक वेतन लंबित रहता है और भुगतान भी एकमुश्त नहीं किया जाता। इसके अतिरिक्त, स्कूलों में 25 बच्चों की अनिवार्य संख्या की शर्त के कारण बच्चों की संख्या कम होने पर वर्कर्स की सेवाएं समाप्त कर दी जाती हैं।

यूनियन ने प्रमुखता से मांग की है कि हाई कोर्ट के फैसले के अनुरूप मिड डे मील वर्कर्स को पूरे 12 महीने का वेतन दिया जाए। उनकी अन्य मांगों में हरियाणा की तर्ज पर 7,000 रुपये मासिक वेतन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की तरह अवकाश, 25 बच्चों की अनिवार्य संख्या की शर्त को समाप्त करना, ग्रेच्युटी और पेंशन सुविधा प्रदान करना, मेडिकल जांच का खर्च विभाग द्वारा वहन करना और मिड डे मील वर्कर्स के लिए नियमितीकरण की नीति बनाना शामिल है। यूनियन नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।
    user_Roshan Sharma
    Roshan Sharma
    Local News Reporter Shimla (Urban), Himachal Pradesh•
    14 hrs ago
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