उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद अंतर्गत खैराबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में तैनात एक चिकित्सक पर गंभीर आरोप लगे हैं। उन पर मरीजों को सरकारी अस्पताल के बजाय बाहर से महंगी दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर करने और विरोध करने पर अभद्र व्यवहार करने का आरोप है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। जानकारी के अनुसार, एक मरीज ने बताया कि जब उसने डॉक्टर द्वारा बाहर से दवाइयां खरीदने के लिए दबाव डालने का विरोध किया, तो चिकित्सक ने कथित तौर पर गाली-गलौज करते हुए अभद्र भाषा का प्रयोग किया। मरीज ने इस पूरी घटना को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया, जिसके बाद यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया और स्थानीय लोगों व मरीजों में भी नाराजगी फैल गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित डॉक्टर को जिला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है। इसके साथ ही, पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए दो सदस्यीय समिति का गठन किया गया है और उसे जल्द से जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने पर संबंधित चिकित्सक के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी। वायरल वीडियो के बाद सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं और मुफ्त दवाओं की उपलब्धता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। यदि सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवाओं की व्यवस्था होने के बावजूद मरीजों को बाहर से दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है, तो यह स्वास्थ्य व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद अंतर्गत खैराबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में तैनात एक चिकित्सक पर गंभीर आरोप लगे हैं। उन पर मरीजों को सरकारी अस्पताल के बजाय बाहर से महंगी दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर करने और विरोध करने पर अभद्र व्यवहार करने का आरोप है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। जानकारी के अनुसार, एक मरीज ने बताया कि जब उसने डॉक्टर द्वारा बाहर से दवाइयां खरीदने के लिए दबाव डालने का विरोध किया, तो चिकित्सक ने कथित तौर पर गाली-गलौज करते हुए
अभद्र भाषा का प्रयोग किया। मरीज ने इस पूरी घटना को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया, जिसके बाद यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया और स्थानीय लोगों व मरीजों में भी नाराजगी फैल गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित डॉक्टर को जिला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है। इसके साथ ही, पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए दो सदस्यीय समिति का गठन किया गया है और उसे जल्द से जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों
ने कहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने पर संबंधित चिकित्सक के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी। वायरल वीडियो के बाद सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं और मुफ्त दवाओं की उपलब्धता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। यदि सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवाओं की व्यवस्था होने के बावजूद मरीजों को बाहर से दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है, तो यह स्वास्थ्य व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।
- उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद के रामकोट थाना क्षेत्र में गुरुवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब लकड़ियों से लदी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली निर्माणाधीन सड़क पर अनियंत्रित होकर पलट गई। गनीमत रही कि हादसे के दौरान आसपास मौजूद लोग समय रहते सुरक्षित स्थान पर पहुंच गए, जिससे कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रैक्टर-ट्रॉली लकड़ियों का भारी बोझ लेकर गुजर रही थी और सड़क निर्माण कार्य के चलते मार्ग पर गिट्टी, मिट्टी और ऊबड़-खाबड़ स्थिति बनी हुई थी। इसी दौरान चालक का संतुलन बिगड़ा और ट्रॉली सड़क किनारे पलट गई, जिससे लकड़ियां सड़क पर बिखर गईं और कुछ देर के लिए यातायात भी बाधित हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माणाधीन सड़क पर आए दिन जाम और दुर्घटना जैसी स्थितियां बन रही हैं। उल्लेखनीय है कि एक दिन पूर्व इसी मार्ग पर लगे जाम में जिलाधिकारी (DM) की गाड़ी भी फंसी थी, जिसके बाद सड़क निर्माण की गुणवत्ता और यातायात व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे थे। घटना की सूचना मिलते ही रामकोट पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से मार्ग को खाली करवाने का प्रयास किया ताकि यातायात सामान्य हो सके। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने प्रशासन से निर्माण कार्य में तेजी लाने और सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। फिलहाल इस हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन घटना ने निर्माणाधीन सड़क की बदहाल व्यवस्था को एक बार फिर उजागर कर दिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है।1
- जिला बाराबंकी की तहसील फतेहपुर और आसपास के इलाकों में 9 मुहर्रम यौमे आशूरा का मुख्य जुलूस कर्बला की शहादत की याद में शांतिपूर्ण और पारंपरिक तरीके से निकाला गया। इस दौरान अज़ादार काले कपड़े पहनकर 'या हुसैन' के नारे बुलंद करते हुए नज़र आए। पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच यह जुलूस निकाला गया, जिसमें अलम और ताजिया उठाए गए। जुलूस में भारी भीड़ देखने को मिली, जो विभिन्न मार्गों से होकर गुज़रा। इस अवसर पर थाना फतेहपुर प्रभारी अमित कुमार सिंह, चौकी प्रभारी अजय पांडे और पुलिस बल मौजूद रहा।4
- लखनऊ के गाजीपुर थाना क्षेत्र में वांछित अभियुक्त सैयद मोहम्मद मुजम्मिल इमाम के खिलाफ न्यायालय के आदेश पर धारा 82 सीआरपीसी के तहत उद्घोषणा की कार्रवाई की गई है। सैयद मोहम्मद मुजम्मिल इमाम, जो सैय्यद नजरे इमाम के पुत्र हैं और डी-53/2, सर्वोदय नगर, इंदिरा नगर, थाना गाजीपुर, लखनऊ के निवासी हैं, मु0अ0सं0-54/2026, धारा 64(1)/351(3) बीएनएस से संबंधित मामले में वांछित थे। इस कार्रवाई के दौरान, गाजीपुर थाना पुलिस टीम द्वारा अभियुक्त के आवास पर नोटिस चस्पा किया गया। स्थानीय लोगों की मौजूदगी में डुगडुगी पिटवाकर उद्घोषणा कराई गई, और पुलिस ने आसपास के क्षेत्र में भी अभियुक्त से संबंधित जानकारी प्रसारित की। इस दौरान चौकी प्रभारी सर्वोदय नगर सचिन कौशिक, वरिष्ठ उपनिरीक्षक सुरेश कुमार पांडेय, आरक्षी ज्ञानेन्द्र कुमार और महिला आरक्षी आराधना सेंगर सहित गाजीपुर थाना पुलिस टीम मौजूद रही।1
- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने स्वस्थ जीवन के लिए आहार और विहार (जीवनशैली) के स्वस्थ होने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मनुष्य तभी स्वस्थ रह सकता है, जब उसका आहार स्वच्छ हो।1
- बाराबंकी जिले के घुंघटेर स्थित बाबागंज विद्युत केंद्र पर बृहस्पतिवार को भारतीय किसान यूनियन अरा श्रमिक जनशक्ति संगठन के जिला अध्यक्ष सतीश के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन दिया और जोरदार नारेबाजी की। जिला अध्यक्ष ने मांग की है कि शाम के समय विद्युत कटौती को बंद किया जाए, क्योंकि रात्रि में बार-बार कटौती और लो वोल्टेज की समस्या बनी रहती है। उन्होंने बताया कि रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लगभग 40 बार बिजली काटी जाती है, जिससे हर 10 मिनट की कटौती के कारण उपभोक्ताओं के टीवी, पंखे, फ्रिज, कूलर और इन्वर्टर जैसे उपकरण जलने का खतरा रहता है। संगठन ने बिजली विभाग को जल्द सुधार की चेतावनी देते हुए गांव में सरकार के निर्देशों का पालन करने की मांग की। किसानों ने यह भी मांग की कि जले हुए ट्रांसफार्मरों को 72 घंटे के भीतर बदला जाए, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे ट्रांसफार्मरों की मरम्मत में बिजली विभाग के कर्मचारी 24 घंटे लगाते हैं और फिर भी उन्हें ठीक करने नहीं जाते, जिसकी शिकायत ग्रामीण उपभोक्ता लगातार करते रहते हैं। आगामी धान की रोपाई के मद्देनजर खेतों में लटक रहे 11000 लाइन के तारों को तत्काल सही करने की मांग भी की गई। इसके अतिरिक्त, किसानों ने शिकायत की कि गांव में बिजली बिल रीडर समय पर नहीं आते, जिससे उपभोक्ताओं के काफी बिल जमा हो जाते हैं और फिर बिजली विभाग कैंप लगाकर कनेक्शन काट देता है; इसे रोका जाए और हर महीने बिजली बिल निकालकर उपभोक्ताओं को दिए जाएं। कुल मिलाकर, यह घेराव भारतीय किसान यूनियन श्रमिक जनशक्ति की 10 सूत्री मांगों को लेकर किया गया था। इस दौरान, बिजली विभाग के कर्मचारियों ने गेट को अंदर से बंद कर लिया, जिससे नाराज होकर भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ता गेट पर ही धरने पर बैठ गए। घटना की जानकारी मिलते ही बाबागंज विद्युत केंद्र के जेई विवेक मिश्रा मौके पर पहुंचे, उन्होंने किसानों का प्रार्थना पत्र लिया और आश्वासन दिया कि सभी बिंदुओं पर जांच कर जल्द ही सुधार किया जाएगा। इस प्रदर्शन में जिला अध्यक्ष सतीश के साथ मोहम्मद वास, जुबेर खान, आदित्य कुमार, पार्वती प्रसाद, सरवन यादव, गुड्डू, किरण देवी, शांति देवी, सीमा यादव, सुनीता देवी, माया देवी, लता देवी सहित सैकड़ों की संख्या में किसान और मजदूर मौजूद रहे।1
- बाराबंकी के घुंघटेर स्थित बाबागंज विद्युत केंद्र पर बृहस्पतिवार को भारतीय किसान यूनियन अरा श्रमिक जनशक्ति संगठन के कार्यकर्ताओं ने जिला अध्यक्ष सतीश के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों और मजदूरों के साथ प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने बिजली व्यवस्था में सुधार की अपनी मांग को लेकर विद्युत विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और एक ज्ञापन सौंपा। जिला अध्यक्ष सतीश ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ता लगातार बिजली कटौती और लो वोल्टेज की समस्या से जूझ रहे हैं, खासकर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक बिजली लगभग 40 बार काटी जाती है। इससे टीवी, पंखा, फ्रिज, कूलर और इनवर्टर जैसे विद्युत उपकरणों के खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। प्रदर्शनकारियों ने शाम के समय निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने, जले हुए ट्रांसफार्मरों को 72 घंटे के भीतर बदलने, गांवों में छोटे-छोटे फॉल्टों को समय पर ठीक करने और खेतों व गांवों में लटक रहे 11000 वोल्ट के बिजली तारों को तत्काल दुरुस्त करने की मांग की। सतीश ने यह भी आरोप लगाया कि बिजली बिल समय पर जारी नहीं किए जाते, जिसके कारण उपभोक्ताओं पर एक साथ अधिक बिल का बोझ पड़ता है। बाद में विभाग द्वारा कैंप लगाकर कनेक्शन काट दिए जाने से लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है। प्रदर्शन के दौरान, कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि विद्युत विभाग के कर्मचारियों ने कार्यालय का गेट अंदर से बंद कर लिया, जिससे नाराज किसान और मजदूर गेट के बाहर ही धरने पर बैठ गए। सूचना मिलने पर बाबागंज विद्युत केंद्र के जेई विवेक मिश्रा मौके पर पहुंचे, उन्होंने ज्ञापन स्वीकार किया और समस्याओं के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया।1
- हरदोई जिले की संडीला तहसील के अतरौली थाना क्षेत्र के पुरवामन गांव में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद बुधवार को एक बार फिर सुलझ नहीं पाया। पुलिस सुरक्षा न मिलने के कारण पैमाइश करने पहुँची राजस्व टीम को मौके से भागना पड़ा, जिससे ग्रामीण आक्रोशित हो उठे और उन्होंने राजस्व कर्मियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। पुरवामन गांव में कुछ लोगों ने ग्रामसमाज की घूर गद्दा, खेल मैदान और नाली की जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है, जिसके कारण ग्रामीणों को गंभीर जल निकासी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। घरों और आबादी क्षेत्र में जल भराव से परेशान लगभग दो दर्जन ग्रामीणों ने एक साल पहले एसडीएम सहित उच्च अधिकारियों से सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराने की मांग की थी। हालांकि, तब से कई बार पैमाइश के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई और ग्रामीणों को टरकाया जाता रहा, लेकिन अवैध कब्जा जस का तस बना हुआ है। गत 22 जून को भी पैमाइश के लिए आई राजस्व टीम ने पुलिस बल की कमी का हवाला देकर कार्य अधूरा छोड़ दिया था। बुधवार को भी बिना पर्याप्त पुलिस सुरक्षा के मौके पर पहुँची राजस्व टीम ने फीता डालकर दो पक्षों के बीच तनाव बढ़ने के बाद असुरक्षा का अंदेशा जताते हुए तुरंत वहाँ से चली गई। ग्रामीणों का आरोप है कि राजस्व टीम जानबूझकर पर्याप्त पुलिस बल की मांग नहीं करती और फिर सुरक्षा व विवाद की आशंका का बहाना बनाकर पैमाइश टाल देती है, जिससे कर्मियों की अवैध कब्जेदारों से मिलीभगत का संदेह होता है। ग्रामीणों ने पिछले साल बारिश में हुई जलभराव की समस्या और संक्रमण के खतरे को याद दिलाते हुए चिंता व्यक्त की है कि इस बार भी नाली की जमीन कब्जा मुक्त न होने से वही हालात दोहराए जाएंगे। इस मामले में लेखपाल राजन सिंह ने बताया कि वे एसडीएम महोदया के निर्देश पर कानूनगो के साथ मौके पर पहुँचे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामला आबादी क्षेत्र से संबंधित होने और मौके पर बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के कारण पैमाइश नहीं हो पाई; यह पक्ष-विपक्ष का मामला है, जिसमें खाद के गड्ढों और खेल मैदान की भूमि शामिल है। लेखपाल के अनुसार, क्षेत्र में एक नहीं बल्कि कई खाद के गड्ढे और विभिन्न चक होने के कारण पैमाइश में कठिनाई आ रही है, और निष्पक्ष तथा सुचारु रूप से कार्य के लिए एसडीएम से अतिरिक्त राजस्व टीम उपलब्ध कराने की मांग की गई है।1
- सीतापुर शहर के आंख अस्पताल रोड स्थित एक्सिस बैंक शाखा में गुरुवार दोपहर करीब 2 बजे उस वक्त हड़कंप मच गया, जब बैंक के सर्वर रूम में अचानक आग लग गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह आग एमसीबी (MCB) में शॉर्ट सर्किट के कारण लगी, जिसके बाद देखते ही देखते सर्वर रूम में काला धुआं भर गया। इससे बैंक कर्मचारियों और वहां मौजूद ग्राहकों के बीच दहशत का माहौल बन गया। बैंक परिसर से धुआं निकलता देख आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए बैंक कर्मचारियों ने तत्काल अग्निशमन यंत्रों का उपयोग कर आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू कर दिया। कर्मचारियों की इस तत्परता के चलते आग को शुरुआती स्तर पर ही रोक लिया गया, जिससे एक बहुत बड़ा हादसा टल गया। बैंक में लगे फायर अलार्म के बजते ही दमकल विभाग को सूचना मिली और फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंचीं। अग्निशमन कर्मियों ने बैंक परिसर का निरीक्षण कर सुनिश्चित किया कि आग पूरी तरह बुझ चुकी है। राहत की खबर यह है कि इस हादसे में किसी भी कर्मचारी या ग्राहक के घायल होने की सूचना नहीं है। इस घटना के बाद बैंक का कामकाज कुछ समय के लिए प्रभावित रहा और बैंक प्रशासन आग से सर्वर रूम में रखे कीमती उपकरणों को हुए नुकसान का आकलन कर रहा है। वहीं, घटना को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आग लगने के बाद बैंक कर्मचारी इस जानकारी को सार्वजनिक होने से रोकने और मामले को दबाने का प्रयास करते रहे। इस पूरे घटनाक्रम पर बैंक प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। फिलहाल पुलिस और संबंधित विभाग आग लगने के सटीक कारणों की जांच कर रहे हैं।1