खंडवा के हरसूद विधानसभा क्षेत्र में वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए वन विभाग द्वारा की जा रही कार्रवाई के समर्थन में कोरकू समाज के हजारों नागरिक और वन सुरक्षा समितियों के सदस्य उतर आए हैं। समाज के प्रतिनिधियों ने रविवार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम सिटी मजिस्ट्रेट श्री बजरंग बहादुर सिंह को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान ग्रामीणों ने "जंगल है तो जीवन है" और "तीर गोफन खाएंगे, जंगल हम बचाएंगे" जैसे नारे लगाते हुए स्टेडियम ग्राउंड पहुंचकर वन संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की। खालवा विकासखंड के ग्राम ताल्याधड़ निवासी धारासिंह ने बताया कि वन भूमि पर लगातार हो रहे अवैध अतिक्रमण के कारण जंगलों का क्षेत्रफल घट रहा है, जिससे वन्यजीवों के आवास नष्ट हो रहे हैं और कोरकू समाज के पारंपरिक निस्तार अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने भिलायीखेड़ा क्षेत्र सहित अन्य स्थानों पर वन विभाग द्वारा की गई अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई का पूर्ण समर्थन करते हुए इसे आदिवासी समाज के दीर्घकालीन हित में बताया। वहीं पन्नालाल, हजारी और अन्य वनवासियों ने मांग की है कि बिना किसी दबाव के ऐसी कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहनी चाहिए और बेहतर काम करने वाले वन कर्मियों व सहयोगी ग्रामीणों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। वनवासी मानक लाल ने इस अवसर पर कहा कि कोरकू समाज का अस्तित्व, संस्कृति और आजीविका सदियों से जंगलों पर ही टिकी है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की कि खंडवा और बुरहानपुर जिले की समस्त वन भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी रखी जाए। साथ ही, भिलायीखेड़ा सहित अतिक्रमण मुक्त कराई गई जमीन पर दोबारा कब्जा रोकने के लिए सघन पौधारोपण, गश्त, सुरक्षा चौकियां, ट्रेंच और वॉच टॉवर जैसी सुरक्षा व्यवस्था की जाए। उन्होंने वन विभाग के अमले को कार्रवाई के दौरान पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराने, हमला करने वाले अपराधियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने और वनों को बचाने के लिए विशेष राज्य स्तरीय अभियान चलाने की भी मांग की है।
खंडवा के हरसूद विधानसभा क्षेत्र में वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए वन विभाग द्वारा की जा रही कार्रवाई के समर्थन में कोरकू समाज के हजारों नागरिक और वन सुरक्षा समितियों के सदस्य उतर आए हैं। समाज के प्रतिनिधियों ने रविवार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम सिटी मजिस्ट्रेट श्री बजरंग बहादुर सिंह को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान ग्रामीणों ने "जंगल है तो जीवन है" और "तीर गोफन खाएंगे, जंगल हम बचाएंगे" जैसे नारे लगाते हुए स्टेडियम ग्राउंड पहुंचकर वन संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की। खालवा विकासखंड के ग्राम ताल्याधड़ निवासी धारासिंह ने बताया कि वन भूमि पर लगातार हो रहे
अवैध अतिक्रमण के कारण जंगलों का क्षेत्रफल घट रहा है, जिससे वन्यजीवों के आवास नष्ट हो रहे हैं और कोरकू समाज के पारंपरिक निस्तार अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने भिलायीखेड़ा क्षेत्र सहित अन्य स्थानों पर वन विभाग द्वारा की गई अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई का पूर्ण समर्थन करते हुए इसे आदिवासी समाज के दीर्घकालीन हित में बताया। वहीं पन्नालाल, हजारी और अन्य वनवासियों ने मांग की है कि बिना किसी दबाव के ऐसी कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहनी चाहिए और बेहतर काम करने वाले वन कर्मियों व सहयोगी ग्रामीणों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। वनवासी मानक लाल ने इस अवसर पर कहा कि कोरकू समाज
का अस्तित्व, संस्कृति और आजीविका सदियों से जंगलों पर ही टिकी है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की कि खंडवा और बुरहानपुर जिले की समस्त वन भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी रखी जाए। साथ ही, भिलायीखेड़ा सहित अतिक्रमण मुक्त कराई गई जमीन पर दोबारा कब्जा रोकने के लिए सघन पौधारोपण, गश्त, सुरक्षा चौकियां, ट्रेंच और वॉच टॉवर जैसी सुरक्षा व्यवस्था की जाए। उन्होंने वन विभाग के अमले को कार्रवाई के दौरान पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराने, हमला करने वाले अपराधियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने और वनों को बचाने के लिए विशेष राज्य स्तरीय अभियान चलाने की भी मांग की है।
- खंडवा जिला कलेक्टर श्री ऋषव गुप्ता एवं पुलिस अधीक्षक श्री अगम जैन के निर्देशानुसार जिलेभर में भूमि विवादों के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण के लिए राजस्व एवं पुलिस विभाग द्वारा संयुक्त शिकायत निवारण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यालयों में प्राप्त शिकायतों के विश्लेषण के दौरान भूमि विवाद संबंधी शिकायतों की संख्या अधिक पाए जाने पर सभी राजस्व अधिकारियों एवं पुलिस अधिकारियों को संयुक्त रूप से ऐसे प्रकरणों की सुनवाई कर मौके पर ही निराकरण करने के निर्देश दिए गए थे। इसी कड़ी में पुनासा के मुंदी थाना क्षेत्र में मुंदी थाना प्रभारी और तहसीलदार श्रीमती वंदना चौहान की उपस्थिति में संयुक्त शिकायत निवारण शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में भूमि विवाद से जुड़े मामलों के आवेदकों और अनावेदकों को बुलाकर दोनों पक्षों की विस्तार से सुनवाई की गई। अधिकारियों ने आपसी चर्चा और आवश्यक राजस्व अभिलेखों के परीक्षण के बाद कई मामलों का मौके पर ही समाधान कराया तथा शेष बचे मामलों में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार के संयुक्त शिविरों का मुख्य उद्देश्य भूमि विवादों का समयबद्ध, निष्पक्ष और प्रभावी निराकरण करके आम जनता को राहत प्रदान करना है, जिससे अनावश्यक न्यायिक एवं पुलिस विवादों को कम किया जा सके।1
- हरदा में मूंग खरीदी की मांग को लेकर शुक्रवार को किसानों ने शहर की प्रमुख सड़कों पर सांकेतिक चक्का जाम कर सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में बड़ी संख्या में किसान शहर के प्रमुख मार्गों पर एकत्र हुए और सरकार से मूंग खरीदी समेत अपनी अन्य समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की मांग करते हुए जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने साफ किया कि उन्हें केवल सीमित खरीदी स्वीकार्य नहीं है। सरकार को सभी पात्र किसानों की 100 प्रतिशत मूंग खरीदनी चाहिए ताकि किसी भी किसान को अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर न होना पड़े। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक तेज करेंगे।1
- पटना हाईकोर्ट ने वर्ष 2008 के एक आपराधिक मामले में 9 जुलाई 2026 को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल महिला की छाती दबाना और सलवार उतारने का प्रयास करना, हर परिस्थिति में स्वतः ही दुष्कर्म के प्रयास (धारा 376/511) की श्रेणी में नहीं माना जा सकता। कोर्ट के अनुसार, किसी मामले में दुष्कर्म के प्रयास का अपराध बनता है या नहीं, यह पूरी तरह से उस मामले के तथ्यों, परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों पर ही निर्भर करेगा। इस विशिष्ट मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष ऐसे पर्याप्त सबूत पेश करने में असमर्थ रहा, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी का उद्देश्य दुष्कर्म करना था। हालांकि, कोर्ट ने यह साफ किया कि आरोपी का यह कृत्य बेहद गंभीर अपराध है और यह महिला की लज्जा भंग करने यानी आईपीसी की धारा 354 के दायरे में आता है, इसलिए आरोपी को पूरी तरह से राहत नहीं दी गई है। इसके साथ ही, सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर फैलाई जा रही भ्रामक सूचनाओं को भी स्पष्ट किया गया है कि यह निर्णय केवल इस विशेष मामले के तथ्यों के आधार पर है, न कि सभी मामलों के लिए कोई सामान्य नियम।1
- खरगोन जिले के भीकनगांव अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बोरगांव में मुख्य सड़क की बदहाली से ग्रामीण बेहद परेशान हैं। यहाँ की मुख्य सड़क पर सीसी रोड का नामोनिशान नहीं है, जिसके कारण हालात अत्यंत खराब हो चुके हैं। सड़क पर फैले कीचड़ और फिसलती मिट्टी की वजह से हर रोज राहगीर, बुजुर्ग और स्कूली बच्चे गिरकर चोटिल हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यह केवल एक सड़क की समस्या नहीं है, बल्कि लोगों की सुरक्षा के साथ पूरी तरह से खिलवाड़ किया जा रहा है और यहाँ आए दिन छोटे-मोटे हादसों का डर बना रहता है। इस बदहाली को लेकर ग्रामीणों में गहरा असंतोष है। उनका कहना है कि ऐसा महसूस होता है जैसे विकास की रफ्तार सिर्फ शहरों की चमचमाती सड़कों तक ही सीमित रह गई है और गाँवों की अनदेखी करना ही नियति बन चुकी है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से पुरजोर अपील की गई है कि वे केवल कागजी कार्रवाई से बाहर निकलें और जमीनी हकीकत को देखें, क्योंकि बोरगांव को जल्द से जल्द पक्की सड़क की सख्त जरूरत है। इस आवाज को जिम्मेदार लोगों तक पहुँचाने के लिए वीडियो को अधिक से अधिक शेयर करने की मांग की गई है।1
- बैतूल जिले के भीमपुर विकासखंड के अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला खिड़कियांढाना में शिक्षा विभाग के बीएसी नंदराम पांसे द्वारा विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता का आकस्मिक मूल्यांकन किया गया। निरीक्षण के दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने विभिन्न कक्षाओं के विद्यार्थियों से पढ़ाई से संबंधित प्रश्न पूछकर उनकी सीखने की क्षमता का जायजा लिया। इस दौरान कक्षा चौथी के छात्र ऋतिक की शैक्षणिक योग्यता विशेष रूप से देखने को मिली। अधिकारियों द्वारा जब उससे 2 से 20 तक के पहाड़े सुनाने के लिए कहा गया, तो उसने बिना किसी हिचकिचाहट के सभी पहाड़े लगातार और फर्राटेदार अंदाज में सुना दिए। इसके बाद छात्र ने हिंदी का पाठ भी तेज गति और शुद्ध उच्चारण के साथ पढ़कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। छात्र के इस उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने उसकी जमकर सराहना की और इसे विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण का सकारात्मक परिणाम बताया। अधिकारियों ने शिक्षकों की मेहनत की प्रशंसा करते हुए उन्हें निर्देश दिए कि वे प्रत्येक विद्यार्थी की नियमित शैक्षणिक प्रगति का आकलन करते रहें। उन्होंने कमजोर विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान देकर उन्हें भी बेहतर स्तर तक पहुंचाने का प्रयास करने और इसी तरह विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का स्तर बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।3
- देवास जिले के हाटपीपल्या में निलंबित उपयंत्री सतीश समेले का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने मीडिया के सामने विकास कार्यों में जनपद से लेकर भोपाल तक चलने वाले कमीशन के खेल का बड़ा पर्दाफाश किया है। उन्होंने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि "कौन माई का लाल है जो जनपद से लेकर भोपाल तक पैसे नहीं ले रहा हो।" उनके आरोपों के अनुसार, किसी भी कार्य की शुरुआत होते ही सरपंच को 10%, सचिव को 5%, जीआरएस को 3%, सब इंजीनियर को 5%, सहायक यंत्री को 2%, और जनपद सीईओ को 2-3% का कमीशन सीधे तौर पर जाता है। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि निरीक्षण के लिए आने वाले अधिकारी भी "सूटकेस" लेते हैं, चाहे वे कमिश्नरी से आएं, भोपाल से आएं या फिर जिले से। निलंबित उपयंत्री ने सब इंजीनियरों को महज "वसूली एजेंट" बताया है और दावा किया है कि जिला पंचायत के कामों में डंके की चोट पर 10 से 15% का कमीशन फिक्स रहता है। उन्होंने खुद को भी इस भ्रष्ट तंत्र का हिस्सा बताते हुए स्वीकार किया कि उनसे भी यह काम करवाया गया। इन गंभीर आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोर्ट के लिए वॉइस रिकॉर्डिंग और वीडियो जैसे पुख्ता सबूत होने का दावा किया है।1
- खरगोन जिले के बड़वाह में नर्मदा घाट पर श्रीराम भक्त प्रभातफेरी मंडल द्वारा दो घंटे का सफाई अभियान चलाया गया। इस सफाई अभियान के दौरान घाट से बड़ी मात्रा में कचरा एकत्रित किया गया। इसके साथ ही, मां नर्मदा को प्रदूषण मुक्त बनाने की अपील भी की गई है।1
- खरगोन के बड़वाह में नर्मदा नदी में डूब रहे इंदौर के एक युवक को गोताखोर बाबूलाल मंगले ने बचा लिया है। नदी में डूब रहे इस युवक को गोताखोर बाबूलाल मंगले ने सुरक्षित बाहर निकाला और उसकी जान बचाई।1