रामानुजगंज वन वाटिका में फिर गूंजा रौनक का माहौल, नौका विहार शुरू—आधे किराए में परिवारों को मिलेगा आनंद बलरामपुर जिले के रामानुजगंज स्थित वन वाटिका एक बार फिर पर्यटकों से गुलजार होने की ओर बढ़ रही है। लंबे समय से बंद पड़ी नौका विहार (बोटिंग) सुविधा को नई व्यवस्थाओं के साथ पुनः शुरू कर दिया गया है। इस पहल से न सिर्फ पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है, बल्कि स्थानीय लोगों, खासकर महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। रविवार शाम आयोजित एक सादगीपूर्ण लेकिन उत्साहपूर्ण कार्यक्रम में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम ने नौका विहार का विधिवत शुभारंभ किया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, वन विभाग के अधिकारी, पुलिस बल और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। इस दौरान बच्चों के लिए तैयार किए गए चिल्ड्रन पार्क का भी लोकार्पण किया गया, जिससे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बन गया। मंत्री नेताम ने अपने संबोधन में कहा कि विकास का अर्थ केवल भवन और सड़कें बनाना नहीं है, बल्कि लोगों की जरूरतों को समझकर उन्हें सुविधाएं उपलब्ध कराना ही असली विकास है। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहलें स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करती हैं और युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार के अवसर प्रदान करती हैं। उन्होंने युवाओं की मांग को ध्यान में रखते हुए यहां ओपन जिम, बैठने की बेहतर व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित करने का आश्वासन भी दिया। महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनेगा संचालन मॉडल इस बार नौका विहार की सबसे खास बात इसका संचालन मॉडल है। वन प्रबंधन समिति के अंतर्गत “विश्वास महिला स्वयं सहायता समूह” को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंत्री ने समूह की महिलाओं से बातचीत कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली और उन्हें सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए। यह पहल महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे समूह की महिलाओं को नियमित आय का स्रोत मिलेगा और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगी। साथ ही, स्थानीय स्तर पर एक बेहतर प्रबंधन व्यवस्था भी विकसित होगी। किराए में बड़ा बदलाव, परिवारों को राहत पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए बोटिंग शुल्क में भी अहम बदलाव किया गया है। पहले जहां प्रति व्यक्ति 100 रुपये (15 मिनट) लिया जाता था, वहीं अब 3 से 6 लोगों के लिए कुल 300 रुपये (15 मिनट) निर्धारित किया गया है। इस नई व्यवस्था से परिवार के साथ आने वाले पर्यटकों को सीधा फायदा होगा। वहीं, पैडल बोट और पतवार बोट का किराया पहले की तरह 50 रुपये प्रति व्यक्ति (15 मिनट) रखा गया है, ताकि हर वर्ग के लोग इस सुविधा का आनंद ले सकें। पर्यटन हब के रूप में विकसित करने की तैयारी वन विभाग ने वन वाटिका को एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की व्यापक योजना बनाई है। आने वाले समय में यहां औषधीय वाटिका, पतंजलि वाटिका, कॉटेज, जिपलाइन, आकर्षक लाइटिंग और विभिन्न स्टैचू स्थापित किए जाएंगे। इन सुविधाओं के विकसित होने से यह स्थान न केवल स्थानीय बल्कि राज्यस्तर पर भी एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में उभर सकता है। इससे आसपास के क्षेत्रों में होटल, दुकानों और अन्य व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलेगा। सुरक्षा और व्यवस्था पर विशेष ध्यान पिछले अनुभवों से सीख लेते हुए इस बार सुरक्षा और प्रबंधन को प्राथमिकता दी गई है। वन वाटिका परिसर में निजी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है, जिससे भीड़ नियंत्रण और दुर्घटनाओं की संभावना कम हो सके। आगंतुकों के लिए अलग पार्किंग व्यवस्था की गई है, जहां बाइक के लिए 10 रुपये और कार के लिए 30 रुपये शुल्क तय किया गया है। साथ ही, परिसर को प्लास्टिक मुक्त रखने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। सीमावर्ती क्षेत्र का मिलेगा लाभ झारखंड सीमा के करीब स्थित होने के कारण रामानुजगंज क्षेत्र पहले से ही आसपास के लोगों के लिए एक पसंदीदा जगह रहा है। अब बोटिंग जैसी आकर्षक सुविधा शुरू होने से यहां पर्यटकों की संख्या में और इजाफा होने की संभावना है। करीब 250 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित हो रहे इस पर्यटन स्थल में 5 एकड़ में वन वाटिका तैयार की गई है। वर्ष 2009 से इसका संचालन वन प्रबंधन समिति द्वारा किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि पहले भी यहां नौका विहार शुरू किया गया था, लेकिन अव्यवस्थाओं के चलते इसे बंद करना पड़ा था। इस बार नई योजना, बेहतर प्रबंधन और महिला समूह की भागीदारी के साथ इसे फिर से शुरू किया गया है। यदि व्यवस्थाएं सुचारू रूप से बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में रामानुजगंज वन वाटिका न केवल एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल बनेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देने वाला केंद्र साबित हो सकता है।
रामानुजगंज वन वाटिका में फिर गूंजा रौनक का माहौल, नौका विहार शुरू—आधे किराए में परिवारों को मिलेगा आनंद बलरामपुर जिले के रामानुजगंज स्थित वन वाटिका एक बार फिर पर्यटकों से गुलजार होने की ओर बढ़ रही है। लंबे समय से बंद पड़ी नौका विहार (बोटिंग) सुविधा को नई व्यवस्थाओं के साथ पुनः शुरू कर दिया गया है। इस पहल से न सिर्फ पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है, बल्कि स्थानीय लोगों, खासकर महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। रविवार शाम आयोजित एक सादगीपूर्ण लेकिन उत्साहपूर्ण कार्यक्रम में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम ने नौका विहार का विधिवत शुभारंभ किया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, वन विभाग के अधिकारी, पुलिस बल और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। इस दौरान बच्चों के लिए तैयार किए गए चिल्ड्रन पार्क का भी लोकार्पण किया गया, जिससे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बन गया। मंत्री नेताम ने अपने संबोधन में कहा कि विकास का अर्थ केवल भवन और सड़कें बनाना नहीं है, बल्कि लोगों की जरूरतों को समझकर उन्हें सुविधाएं उपलब्ध कराना ही असली विकास है। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहलें स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करती हैं और युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार के अवसर प्रदान करती हैं। उन्होंने युवाओं की मांग को ध्यान में रखते हुए यहां ओपन जिम, बैठने की बेहतर व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित करने का आश्वासन भी दिया। महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनेगा संचालन मॉडल इस बार नौका विहार की सबसे खास बात इसका संचालन मॉडल है। वन प्रबंधन समिति के अंतर्गत “विश्वास महिला स्वयं सहायता समूह” को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंत्री ने समूह की महिलाओं से बातचीत कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली और उन्हें सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए। यह पहल महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे समूह की महिलाओं को नियमित आय का स्रोत मिलेगा और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगी। साथ ही, स्थानीय स्तर पर एक बेहतर प्रबंधन व्यवस्था भी विकसित होगी। किराए में बड़ा बदलाव, परिवारों को राहत पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए बोटिंग शुल्क में भी अहम बदलाव किया गया है। पहले जहां प्रति व्यक्ति 100 रुपये (15 मिनट) लिया जाता था, वहीं अब 3 से 6 लोगों के लिए कुल 300 रुपये (15 मिनट) निर्धारित किया गया है। इस नई व्यवस्था से परिवार के साथ आने वाले पर्यटकों को सीधा फायदा होगा। वहीं, पैडल बोट और पतवार बोट का किराया पहले की तरह 50 रुपये प्रति व्यक्ति (15 मिनट) रखा गया है, ताकि हर वर्ग के लोग इस सुविधा का आनंद ले सकें। पर्यटन हब के रूप में विकसित करने की तैयारी वन विभाग ने वन वाटिका को एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की व्यापक योजना बनाई है। आने वाले समय में यहां औषधीय वाटिका, पतंजलि वाटिका, कॉटेज, जिपलाइन, आकर्षक लाइटिंग और विभिन्न स्टैचू स्थापित किए जाएंगे। इन सुविधाओं के विकसित होने से यह स्थान न केवल स्थानीय बल्कि राज्यस्तर पर भी एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में उभर सकता है। इससे आसपास के क्षेत्रों में होटल, दुकानों और अन्य व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलेगा। सुरक्षा और व्यवस्था पर विशेष ध्यान पिछले अनुभवों से सीख लेते हुए इस बार सुरक्षा और प्रबंधन को प्राथमिकता दी गई है। वन वाटिका परिसर में निजी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है, जिससे भीड़ नियंत्रण और दुर्घटनाओं की संभावना कम हो सके। आगंतुकों के लिए अलग पार्किंग व्यवस्था की गई है, जहां बाइक के लिए 10 रुपये और कार के लिए 30 रुपये शुल्क तय किया गया है। साथ ही, परिसर को प्लास्टिक मुक्त रखने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। सीमावर्ती क्षेत्र का मिलेगा लाभ झारखंड सीमा के करीब स्थित होने के कारण रामानुजगंज क्षेत्र पहले से ही आसपास के लोगों के लिए एक पसंदीदा जगह रहा है। अब बोटिंग जैसी आकर्षक सुविधा शुरू होने से यहां पर्यटकों की संख्या में और इजाफा होने की संभावना है। करीब 250 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित हो रहे इस पर्यटन स्थल में 5 एकड़ में वन वाटिका तैयार की गई है। वर्ष 2009 से इसका संचालन वन प्रबंधन समिति द्वारा किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि पहले भी यहां नौका विहार शुरू किया गया था, लेकिन अव्यवस्थाओं के चलते इसे बंद करना पड़ा था। इस बार नई योजना, बेहतर प्रबंधन और महिला समूह की भागीदारी के साथ इसे फिर से शुरू किया गया है। यदि व्यवस्थाएं सुचारू रूप से बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में रामानुजगंज वन वाटिका न केवल एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल बनेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देने वाला केंद्र साबित हो सकता है।
- बलरामपुर जिले के रामानुजगंज स्थित वन वाटिका एक बार फिर पर्यटकों से गुलजार होने की ओर बढ़ रही है। लंबे समय से बंद पड़ी नौका विहार (बोटिंग) सुविधा को नई व्यवस्थाओं के साथ पुनः शुरू कर दिया गया है। इस पहल से न सिर्फ पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है, बल्कि स्थानीय लोगों, खासकर महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। रविवार शाम आयोजित एक सादगीपूर्ण लेकिन उत्साहपूर्ण कार्यक्रम में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम ने नौका विहार का विधिवत शुभारंभ किया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, वन विभाग के अधिकारी, पुलिस बल और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। इस दौरान बच्चों के लिए तैयार किए गए चिल्ड्रन पार्क का भी लोकार्पण किया गया, जिससे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बन गया। मंत्री नेताम ने अपने संबोधन में कहा कि विकास का अर्थ केवल भवन और सड़कें बनाना नहीं है, बल्कि लोगों की जरूरतों को समझकर उन्हें सुविधाएं उपलब्ध कराना ही असली विकास है। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहलें स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करती हैं और युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार के अवसर प्रदान करती हैं। उन्होंने युवाओं की मांग को ध्यान में रखते हुए यहां ओपन जिम, बैठने की बेहतर व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित करने का आश्वासन भी दिया। महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनेगा संचालन मॉडल इस बार नौका विहार की सबसे खास बात इसका संचालन मॉडल है। वन प्रबंधन समिति के अंतर्गत “विश्वास महिला स्वयं सहायता समूह” को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंत्री ने समूह की महिलाओं से बातचीत कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली और उन्हें सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए। यह पहल महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे समूह की महिलाओं को नियमित आय का स्रोत मिलेगा और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगी। साथ ही, स्थानीय स्तर पर एक बेहतर प्रबंधन व्यवस्था भी विकसित होगी। किराए में बड़ा बदलाव, परिवारों को राहत पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए बोटिंग शुल्क में भी अहम बदलाव किया गया है। पहले जहां प्रति व्यक्ति 100 रुपये (15 मिनट) लिया जाता था, वहीं अब 3 से 6 लोगों के लिए कुल 300 रुपये (15 मिनट) निर्धारित किया गया है। इस नई व्यवस्था से परिवार के साथ आने वाले पर्यटकों को सीधा फायदा होगा। वहीं, पैडल बोट और पतवार बोट का किराया पहले की तरह 50 रुपये प्रति व्यक्ति (15 मिनट) रखा गया है, ताकि हर वर्ग के लोग इस सुविधा का आनंद ले सकें। पर्यटन हब के रूप में विकसित करने की तैयारी वन विभाग ने वन वाटिका को एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की व्यापक योजना बनाई है। आने वाले समय में यहां औषधीय वाटिका, पतंजलि वाटिका, कॉटेज, जिपलाइन, आकर्षक लाइटिंग और विभिन्न स्टैचू स्थापित किए जाएंगे। इन सुविधाओं के विकसित होने से यह स्थान न केवल स्थानीय बल्कि राज्यस्तर पर भी एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में उभर सकता है। इससे आसपास के क्षेत्रों में होटल, दुकानों और अन्य व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलेगा। सुरक्षा और व्यवस्था पर विशेष ध्यान पिछले अनुभवों से सीख लेते हुए इस बार सुरक्षा और प्रबंधन को प्राथमिकता दी गई है। वन वाटिका परिसर में निजी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है, जिससे भीड़ नियंत्रण और दुर्घटनाओं की संभावना कम हो सके। आगंतुकों के लिए अलग पार्किंग व्यवस्था की गई है, जहां बाइक के लिए 10 रुपये और कार के लिए 30 रुपये शुल्क तय किया गया है। साथ ही, परिसर को प्लास्टिक मुक्त रखने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। सीमावर्ती क्षेत्र का मिलेगा लाभ झारखंड सीमा के करीब स्थित होने के कारण रामानुजगंज क्षेत्र पहले से ही आसपास के लोगों के लिए एक पसंदीदा जगह रहा है। अब बोटिंग जैसी आकर्षक सुविधा शुरू होने से यहां पर्यटकों की संख्या में और इजाफा होने की संभावना है। करीब 250 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित हो रहे इस पर्यटन स्थल में 5 एकड़ में वन वाटिका तैयार की गई है। वर्ष 2009 से इसका संचालन वन प्रबंधन समिति द्वारा किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि पहले भी यहां नौका विहार शुरू किया गया था, लेकिन अव्यवस्थाओं के चलते इसे बंद करना पड़ा था। इस बार नई योजना, बेहतर प्रबंधन और महिला समूह की भागीदारी के साथ इसे फिर से शुरू किया गया है। यदि व्यवस्थाएं सुचारू रूप से बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में रामानुजगंज वन वाटिका न केवल एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल बनेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देने वाला केंद्र साबित हो सकता है।1
- अपराध क्रमांक 81/26 धारा— 2004 कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम की धारा 4,6,10 एवं 1960 पशु क्रूरता अधिनियम की धारा 11 (घ) विवरण: घटना दिनांक-11.04.2026 को थाना राजपुर पुलिस स्टाफ शासकीय वाहन से रात्रि गश्त पर रवाना हुए थे। गश्त के दौरान रात्रि लगभग 10:00 बजे मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि एक सफेद रंग की पिकअप वाहन क्रमांक JH01GN-8143 में मवेशियों को क्रूरता पूर्वक बांधकर तेज गति से अंबिकापुर से राजपुर होते हुए गुमला (झारखण्ड) की ओर ले जाया जा रहा है। सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए थाना राजपुर स्टाफ द्वारा थाना के सामने अंबिकापुर रोड पर घेराबंदी कर उक्त वाहन को रोका गया। प्रारंभिक पूछताछ में वाहन चालक द्वारा भ्रामक जानकारी दी गई, जिससे संदेह उत्पन्न होने पर सख्ती से पूछताछ की गई। पूछताछ में वाहन स्वामी ने अपना नाम संदीप बड़ाईक, पिता चमन बड़ाईक, उम्र 27 वर्ष, निवासी टांगरझरिया थाना बसिया जिला गुमला (झारखण्ड) तथा चालक ने अपना नाम संदीप साहू, पिता सोमरा, उम्र 25 वर्ष, निवासी सुरसुरिया थाना गुमला जिला गुमला (झारखण्ड) बताया।* *पूछताछ में यह तथ्य सामने आया कि दिनांक 11.04.2026 को ग्राम जयनगर थाना जयनगर जिला सूरजपुर से 02 नग गाय एवं 02 नग बछिया को गुमला पहुंचाने हेतु उक्त वाहन में लोड कराया गया था। मवेशियों को वाहन में अत्यंत अमानवीय एवं क्रूर तरीके से ठूंस-ठूंस कर बांधकर परिवहन किया जा रहा था। उक्त कृत्य पशु क्रूरता से संबंधित विधिक प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन करना पाए जाने पर वाहन सहित मवेशियों को जप्त कर आरोपियों के विरुद्ध संबंधित धाराओं में अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया एवं आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर न्यायालय पेश किया गया है।* पुलिस अधीक्षक महोदय के निर्देशन में जिले में अवैध गतिविधियों के विरुद्ध सतत कार्यवाही जारी है, और आगे भी जारी रहेगी, आम नागरिकों से अपील की गई है कि इस प्रकार की किसी भी अवैध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को सूचना दें।1
- Post by Md Faijuddin1
- विधायक जी ने कान में सुनी बात और कर दिया पत्रकारों के सवालों का खंडन 😂🤣 अपने ही विधायक क्षेत्र के सवालों में घिरी सामरी विधायक #BJPGovernment #BJP4IND1
- तातापानी में कानून पस्त, भू-माफिया मस्त NH-343 के किनारे सरकारी जमीन पर खड़ा हुआ 'अवैध किराए के बिल्डिंग अली खान 9754053874 छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले का प्रसिद्ध पर्यटन क्षेत्र तातापानी इन दिनों अपनी गर्म जलधाराओं के लिए नहीं, बल्कि भू-माफियाओं के बेखौफ कब्जों के लिए चर्चा में है। जिला मुख्यालय से मात्र 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग 343 (NH-343) के किनारे शासकीय बेशकीमती जमीन और बजार की भूमि पर भू-माफियाओं ने कंक्रीट का जाल बिछा दिया है। आलम यह है कि प्रशासन के नाक के नीचे सरकारी संपत्ति की 'बंदरबांट' जारी है और जिम्मेदार तंत्र ने रहस्यमयी चुप्पी साध ली है। रसूख के आगे थमी प्रशासन की कलम हैरानी की बात यह है कि जिस मार्ग पर रोजाना जिले के आला अधिकारियों और सफेदपोश नेताओं का काफिला गुजरता है, वहीं धड़ल्ले से अवैध निर्माण की इमारतें खड़ी हो रही हैं। यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या प्रशासन को यह निर्माण दिखाई नहीं देता या फिर माफियाओं के रसूख के आगे सरकारी तंत्र नतमस्तक हो चुका है दोहरा मापदंड गरीब पर बुलडोजर, रसूखदारों को अभयदान क्षेत्र में चर्चा है कि प्रशासन का 'बुलडोजर' केवल गरीब भूमिहीनों की झोपड़ियों तक ही सीमित है। जब कोई गरीब दो गज जमीन पर सिर छुपाने की कोशिश करता है, तो प्रशासन तुरंत सक्रिय हो जाता है, लेकिन तातापानी के "धनकुबेरों" द्वारा करोड़ों की सरकारी जमीन डकारने पर विभाग के पसीने छूट रहे हैं शासकीय जमीन पर व्यापार: निजी तिजोरी में जा रहा सरकारी किराया तातापानी में अवैध कब्जा सिर्फ निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां 'दुकानों का काला बाजार' फल-फूल रहा है। माफियाओं ने सरकारी जमीन पर दुकानें बनाकर उन्हें किराए पर चढ़ा दिया है। विडंबना देखिए कि संपत्ति सरकार की है, लेकिन उससे होने वाली मोटी कमाई माफियाओं की तिजोरी में जा रही है। सैंया भये कोतवाल, अब डर काहे का" यह कहावत यहाँ सटीक बैठती है। राजनैतिक संरक्षण और मिलीभगत के कारण इन कब्जाधारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें कानून का जरा भी भय नहीं है। सड़क की बर्बादी और पंचायत का मौन इन अवैध निर्माणों का खामियाजा आम जनता और सरकारी खजाने को भुगतना पड़ रहा है: जल निकासी ठप: बेतरतीब निर्माण के कारण नालियां जाम हो गई हैं। NH-343 को खतरा: जलभराव की वजह से करोड़ों की लागत से बनी सड़क समय से पहले जर्जर हो रही है। पंचायत की चुप्पी: स्थानीय ग्राम पंचायत भी इस पूरे प्रकरण में मूकदर्शक बनी हुई है, जिससे मिलीभगत की आशंका और गहरा जाती है। क्या NH-343 के किनारे हो रहे इन विशाल निर्माणों के पास कोई वैध नक्शा या अनुमति है? सरकारी जमीन पर निजी व्यवसाय और किराया वसूली पर प्रशासन अब तक मौन क्यों है क्या बलरामपुर में सत्ता की हनक, कानून और जनहित से ऊपर हो गई है तातापानी की यह स्थिति प्रशासन की साख पर एक बड़ा सवालिया निशान है। यदि समय रहते इन 'सफेदपोश' माफियाओं पर नकेल नहीं कसी गई, तो आने वाले समय में सरकारी जमीनों का वजूद ही खत्म हो जाएगा। अब देखना यह है कि प्रशासन अपनी 'कुंभकर्णी' नींद से कब जागता है।2
- चिनीयां थाना क्षेत्र के कुम्हार टोली, चिनीयां–रंका मुख्य सड़क पर रविवार दोपहर करीब 3 बजे उस वक्त अजीब स्थिति उत्पन्न हो गई, जब स्थानीय लोगों ने सड़क पर ही थ्रेसर मशीन लगाकर गेहूं की दवाई (मड़ाई) शुरू कर दी। देखते ही देखते मुख्य सड़क ‘थ्रेसर जोन’ में तब्दील हो गई और वहां से गुजरने वाले राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। करीब दो घंटे तक सड़क पर ही थ्रेसर मशीन चलती रही, जिससे उड़ने वाले भूसे और धूल (डस्ट) ने पूरे इलाके को ढक लिया। सड़क से गुजर रहे बाइक सवार, साइकिल चालक और पैदल राहगीर धूल के गुबार में फंसकर परेशान हो गए। कई लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में भी दिक्कत महसूस हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मुख्य सड़क है, जहां दिनभर लोगों का आना-जाना लगा रहता है। इसके बावजूद सड़क पर इस तरह से गेहूं की दवाई करना न केवल नियमों की अनदेखी है, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ है। राहगीरों में इसको लेकर खासा आक्रोश देखा गया। लोगों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियों के लिए खेत या खुले स्थान का उपयोग किया जाना चाहिए, न कि सार्वजनिक सड़क का। कई लोगों ने प्रशासन से इस मामले में कार्रवाई करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने की मांग की है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आगे चलकर इससे बड़ी दुर्घटना भी हो सकती है। फिलहाल इस घटना ने स्थानीय व्यवस्था और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।1
- Post by Sunil singh1
- छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर वन परिक्षेत्र में लगी भीषण जंगल आग ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वाड्रफनगर–बनारस मार्ग पर अजगरा नाला के पास फैले जंगल में लगी यह आग अब विकराल रूप ले चुकी है, लेकिन जिम्मेदार महकमा अब तक मौके से नदारद बताया जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आग वाड्रफनगर वन विभाग कार्यालय से महज 500 मीटर की दूरी पर धधक रही है। इसके बावजूद समय पर कार्रवाई न होना विभाग की लापरवाही को उजागर करता है। आग की लपटों में तेजी से पेड़-पौधे जल रहे हैं, जिससे वन संपदा को भारी नुकसान हो रहा है और पूरा इलाका धुएं से भर गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद वन विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंची। अगर समय रहते कार्रवाई होती तो आग को फैलने से रोका जा सकता था। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहा है। इस भीषण आग से वन्य जीवों पर भी बड़ा खतरा मंडरा रहा है। कई जानवरों के फंसने या झुलसने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन उन्हें बचाने के लिए भी अब तक कोई ठोस प्रयास नजर नहीं आया है। घटना ने एक बार फिर वन विभाग की आपातकालीन तैयारी और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर जब विभाग का कार्यालय इतने पास है, तो आग पर काबू पाने में इतनी देरी क्यों हो रही है? फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है और न ही विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है। ऐसे में प्रशासन की चुप्पी भी कई सवालों को जन्म दे रही है। स्थानीय लोग अब तत्काल कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।1