महिला सशक्तिकरण में कांग्रेस की ऐतिहासिक भूमिका, आरक्षण में समान भागीदारी जरूरी: अक्षय सिंह नैंटा” महिला आरक्षण से जुड़े संविधान (131वां) संशोधन विधेयक पर लोकसभा में लंबी चर्चा के बाद यह बिल आवश्यक बहुमत न मिलने के कारण पारित नहीं हो सका। करीब 21 घंटे की बहस के बाद हुए मतदान में 528 सांसदों ने हिस्सा लिया, जिसमें 298 वोट पक्ष में और 230 वोट विपक्ष में पड़े। दो-तिहाई बहुमत के लिए 352 मतों की आवश्यकता थी, जिसके अभाव में यह विधेयक गिर गया। इस विधेयक में संसद की सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान किया गया था, जिसे लेकर विपक्ष ने इसे संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ बताया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह विधेयक महिलाओं के सशक्तिकरण के नाम पर संविधान के साथ छेड़छाड़ का प्रयास था। उन्होंने कहा कि यह कानून महिलाओं को वास्तविक अधिकार देने के बजाय चुनावी क्षेत्रों के स्वरूप को बदलने का माध्यम बन सकता था। ⸻ 🏛️ “महिला अधिकार संघर्ष से मिले हैं, किसी की देन नहीं” – अक्षय सिंह नैंटा इस पूरे मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए Indian National Congress के नेता एवं पूर्व स्टेट कोऑर्डिनेटर, प्रदेश कांग्रेस कमेटी अक्षय सिंह नैंटा ने कहा कि देश में महिलाओं को जो अधिकार आज प्राप्त हैं, वह लंबे संघर्ष और कांग्रेस की विचारधारा का परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि आज़ादी की लड़ाई से लेकर संविधान निर्माण तक, कांग्रेस के नेतृत्व में महिलाओं ने हर स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ⸻ 🏛️ कांग्रेस में महिला नेतृत्व की मजबूत परंपरा अक्षय सिंह नैंटा ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं को नेतृत्व में आगे बढ़ाया— * देश को पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में Indira Gandhi दी * पहली महिला राष्ट्रपति बनीं Pratibha Patil * पहली महिला लोकसभा स्पीकर के रूप में Meira Kumar को अवसर दिया उन्होंने कहा कि यह केवल उदाहरण नहीं, बल्कि कांग्रेस की सोच और नीतियों का प्रमाण हैं। ⸻ 📜 संविधान और स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की भूमिका उन्होंने कहा कि Sarojini Naidu, Aruna Asaf Ali, Usha Mehta, Kasturba Gandhi जैसी कई महिलाओं ने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वहीं संविधान सभा में Hansa Mehta, Durgabai Deshmukh, Rajkumari Amrit Kaur जैसी महिलाओं ने समानता और अधिकारों को सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई। ⸻ ⚖️ समान भागीदारी की मांग अक्षय सिंह नैंटा ने कहा कि महिला आरक्षण का उद्देश्य केवल सीटें बढ़ाना नहीं, बल्कि हर वर्ग की महिलाओं को न्याय देना होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि— * नया Census कराया जाए * OBC वर्ग का सटीक डेटा सामने लाया जाए * और उसी आधार पर आरक्षण लागू किया जाए ⸻ 🧾 निष्कर्ष: उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि देश के भविष्य और सामाजिक न्याय से जुड़ा विषय है। ऐसे में संविधान की मर्यादा और समान भागीदारी को ध्यान में रखते हुए ही कोई भी निर्णय लिया जाना चाहिए।
महिला सशक्तिकरण में कांग्रेस की ऐतिहासिक भूमिका, आरक्षण में समान भागीदारी जरूरी: अक्षय सिंह नैंटा” महिला आरक्षण से जुड़े संविधान (131वां) संशोधन विधेयक पर लोकसभा में लंबी चर्चा के बाद यह बिल आवश्यक बहुमत न मिलने के कारण पारित नहीं हो सका। करीब 21 घंटे की बहस के बाद हुए मतदान में 528 सांसदों ने हिस्सा लिया, जिसमें 298 वोट पक्ष में और 230 वोट विपक्ष में पड़े। दो-तिहाई बहुमत के लिए 352 मतों की आवश्यकता थी, जिसके अभाव में यह विधेयक गिर गया। इस विधेयक में संसद की सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान किया गया था, जिसे लेकर विपक्ष ने इसे संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ बताया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह विधेयक महिलाओं के सशक्तिकरण के नाम पर संविधान के साथ छेड़छाड़ का प्रयास था। उन्होंने कहा कि यह कानून महिलाओं को वास्तविक अधिकार देने के बजाय चुनावी क्षेत्रों के स्वरूप को बदलने का माध्यम बन सकता था। ⸻ 🏛️ “महिला अधिकार संघर्ष से मिले हैं, किसी की देन नहीं” – अक्षय सिंह नैंटा इस पूरे मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए Indian National Congress के नेता एवं पूर्व स्टेट कोऑर्डिनेटर, प्रदेश कांग्रेस कमेटी अक्षय सिंह नैंटा ने कहा कि देश में महिलाओं को जो अधिकार आज प्राप्त हैं, वह लंबे संघर्ष और कांग्रेस की विचारधारा का परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि आज़ादी की लड़ाई से लेकर संविधान निर्माण तक, कांग्रेस के नेतृत्व में महिलाओं ने हर स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ⸻ 🏛️ कांग्रेस में महिला नेतृत्व की मजबूत परंपरा अक्षय सिंह नैंटा ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं को नेतृत्व में आगे बढ़ाया— * देश को पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में Indira Gandhi दी * पहली महिला राष्ट्रपति बनीं Pratibha Patil * पहली महिला लोकसभा स्पीकर के रूप में Meira Kumar को अवसर दिया उन्होंने कहा कि यह केवल उदाहरण नहीं, बल्कि कांग्रेस की सोच और नीतियों का प्रमाण हैं। ⸻ 📜 संविधान और स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की भूमिका उन्होंने कहा कि Sarojini Naidu, Aruna Asaf Ali, Usha Mehta, Kasturba Gandhi जैसी कई महिलाओं ने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वहीं संविधान सभा में Hansa Mehta, Durgabai Deshmukh, Rajkumari Amrit Kaur जैसी महिलाओं ने समानता और अधिकारों को सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई। ⸻ ⚖️ समान भागीदारी की मांग अक्षय सिंह नैंटा ने कहा कि महिला आरक्षण का उद्देश्य केवल सीटें बढ़ाना नहीं, बल्कि हर वर्ग की महिलाओं को न्याय देना होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि— * नया Census कराया जाए * OBC वर्ग का सटीक डेटा सामने लाया जाए * और उसी आधार पर आरक्षण लागू किया जाए ⸻ 🧾 निष्कर्ष: उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि देश के भविष्य और सामाजिक न्याय से जुड़ा विषय है। ऐसे में संविधान की मर्यादा और समान भागीदारी को ध्यान में रखते हुए ही कोई भी निर्णय लिया जाना चाहिए।
- आईजीएमसी में कर्मचारियों को चेंजिंग रूम तक की सुविधा नहीं तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कहाँ रिपोर्ट करें इसको लेकर भी कोई आदेश नही.. मनोज शर्मा, एनजीओ अध्यक्ष केएनएच अस्पताल2
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- पिछले करीब पांच वर्षों से भारी बारिश और भूस्खलन के कारण क्षतिग्रस्त हुए बरमाना क्षेत्र के मोक्ष धाम के पुनर्निर्माण का मार्ग अब प्रशस्त हो गया है। इस मोक्ष धाम के ध्वस्त होने से आसपास की बैरी बरमाना, धोन कोठी, पंजगाई सहित मंडी क्षेत्र डेहर कीपंचायत के लोगों को अंतिम संस्कार के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। हिमुडा निदेशक मंडल सदस्य जितेंद्र चंदेल ने इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेते हुए इसे प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू तथा कैबिनेट मंत्री राजेश धर्माणी के समक्ष उठाया। सरकार ने इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए 77 लाख रुपये की लागत से मोक्ष धाम के पुनर्निर्माण के आदेश जारी किए हैं। इस संबंध में पंजगाई में आयोजित एक प्रेस वार्ता में जितेंद्र चंदेल ने जानकारी देते हुए बताया कि नए सिरे से आधुनिक सुविधाओं के साथ मोक्ष धाम का निर्माण किया जाएगा जिसमें वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। प्रेस वार्ता में पूर्व प्रधान पुष्पा शर्मा पंजगाई , पूर्व प्रधान धोनकोठी सुरेंद्र शर्मा, पूर्व प्रधान सुशील शर्मा उर्फ बब्बू पंजगाई , पूर्व प्रधान बरमाना रमेश संध्यार , वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रवीण चंदेलभी, ओंकार चंदेल, बीडीटीएस सदस्य डॉ. कुलदीप कुमार बेली राम शर्मा ,श्याम सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री और जितेंद्र चंदेल का आभार व्यक्त किया।1
- बिलासपुर बिलासपुर की बंदलाधार स्थित हाइड्रो कॉलेज बंदला में 10 किलोवाट क्षमता के सोलर इन्क्यूबेशन प्लांट का उद्घाटन तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने किया। यह प्लांट केके फाउंडेशन की ओर से कॉलेज को डोनेट किया गया है। इस दौरान मंत्री राजेश धर्माणी ने केके फाउंडेशन के चेयरमैन केके कश्यप का आभार जताते हुए कहा कि इस पहल से छात्रों को बड़ा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सोलर एनर्जी जनरेट करने सहित आधुनिक तकनीकों की जानकारी मिलेगी और उन्हें प्रैक्टिकल प्रशिक्षण भी प्राप्त होगा। मंत्री ने कहा कि भविष्य में भी इस तरह की गतिविधियां जारी रहेंगी, जिससे तकनीकी शिक्षा को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने केके कश्यप की सराहना करते हुए कहा कि फाउंडेशन के माध्यम से कई बच्चों को शिक्षा उपलब्ध करवाई जा रही है और वे सामाजिक गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। इसके साथ ही उन्होंने आग्रह किया कि परमवीर चक्र विजेता कैप्टन संजय कुमार के घर के समीप स्थित कलोल पॉलिटेक्निक कॉलेज में भी इसी तरह का सोलर इन्क्यूबेशन प्लांट स्थापित किया जाए।5
- घुमारवीं/हमीरपुर: नेशनल हाईवे 103 पर एक कार और बाइक के बीच जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सवार को गंभीर चोटें आई हैं। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों की मदद से घायल बाइक सवार को तुरंत उपचार के लिए हमीरपुर मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज जारी है। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दुर्घटना तेज रफ्तार या लापरवाही के कारण हुई हो सकती है, हालांकि पुलिस द्वारा हादसे के सही कारणों का पता लगाया जा रहा है।1
- Post by Dev Raj Thakur1
- रिपोर्ट 20 अप्रैल, बुद्धि सिंह ठाकुर सैंज। बंजार विधानसभा कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष मोहर सिंह ठाकुर के स्वागत समारोह में स्वागत के स्वागत इंतजार में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने डाली नाटी1
- 50 साल तक टालती रही कांग्रेस, मोदी सरकार ने दिया 33% आरक्षण का रास्ता : डॉ जितेंद्र सिंह महिलाओं के मुद्दे पर विपक्ष ने किया विश्वासघात—INDI गठबंधन ने रोका ऐतिहासिक कानून : डॉ जितेंद्र सिंह “‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ कहने वाली प्रियंका गांधी ने महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई क्यों छोड़ी?” : सरोज पांडे शिमला, 18 अप्रैल 2026: केंद्रीय मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर कांग्रेस और INDI गठबंधन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह केवल एक विधेयक नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न और देश में महिलाओं के समग्र सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास यात्रा का नेतृत्व करने वाला बनाया है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में सत्ता संभालते ही यह स्पष्ट कर दिया था कि उनकी सरकार गरीब, महिला, युवा और किसान को केंद्र में रखकर कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रहा है और पिछले एक दशक में जो परिवर्तन देखने को मिला है, वह अभूतपूर्व है। उन्होंने 15 अगस्त 2014 के प्रधानमंत्री के संबोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि लाल किले से शौचालय निर्माण की बात करना एक क्रांतिकारी सोच थी, जिसने महिलाओं के स्वास्थ्य, गरिमा और सुरक्षा को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाया। स्वच्छ भारत मिशन के तहत बड़े पैमाने पर शौचालयों का निर्माण हुआ, जिससे बालिकाओं की शिक्षा में निरंतरता आई और महिलाओं को सम्मानजनक जीवन मिला। डॉ. जितेंद्र सिंह ने उज्ज्वला योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस योजना ने करोड़ों महिलाओं को धुएं से मुक्ति दिलाई और उनके स्वास्थ्य के साथ-साथ जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया। उन्होंने कहा कि पहले महिलाएं घंटों चूल्हे के धुएं में काम करती थीं, जबकि अब वे समय बचाकर स्वरोजगार और अन्य गतिविधियों में भागीदारी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह बदलाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर महिलाओं के जीवन में वास्तविक परिवर्तन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि देश में महिलाओं की क्षमता पहले भी मौजूद थी, लेकिन उन्हें उचित अवसर नहीं मिल पाए थे। मोदी सरकार ने नीतियों और योजनाओं के माध्यम से वह अवसर प्रदान किया, जिसका परिणाम आज सिविल सेवाओं, तकनीकी शिक्षा, शोध और रक्षा सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के रूप में सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि अब महिलाएं केवल भागीदारी नहीं कर रही हैं, बल्कि नेतृत्व कर रही हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यह कानून महिलाओं को नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में सशक्त भागीदारी सुनिश्चित करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि यह समय की मांग थी और मोदी सरकार ने इसे गंभीरता से आगे बढ़ाया, लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने राजनीतिक स्वार्थ के कारण इस ऐतिहासिक पहल को बाधित करने का काम किया। उन्होंने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि पिछले 50 वर्षों से महिला आरक्षण की बात करने वाली पार्टी ने कभी इसे लागू करने का साहस नहीं दिखाया। उन्होंने कहा कि जब भाजपा सरकार ने ठोस समाधान प्रस्तुत किया, तब विपक्ष ने विभिन्न बहानों और तकनीकी मुद्दों का सहारा लेकर इस प्रक्रिया को रोकने का प्रयास किया। उन्होंने इसे महिलाओं के अधिकारों के साथ विश्वासघात करार दिया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भाजपा ने अपने संगठन में पहले ही महिलाओं को 33 प्रतिशत से अधिक भागीदारी दी है, जबकि कांग्रेस आज तक अपने संगठन में भी इसे लागू नहीं कर पाई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में महिलाओं को अवसर नहीं, बल्कि परिवारवाद के आधार पर सीमित स्थान मिलता है, जबकि भाजपा में मेरिट के आधार पर महिलाओं को आगे बढ़ाया जाता है। उन्होंने विश्वास जताया कि देश की महिलाएं इस मुद्दे को लेकर जागरूक हैं और आने वाले समय में यह एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेगा। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति अब अपने अधिकारों के प्रति सजग है और वह किसी भी प्रकार के राजनीतिक छल को स्वीकार नहीं करेगी। इस अवसर पर भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद सरोज पांडे ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि महिलाओं को लंबे समय तक केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया गया, लेकिन जब उन्हें अधिकार देने का अवसर आया, तो कांग्रेस पीछे हट गई। उन्होंने प्रियंका गांधी के “लड़की हूं, लड़ सकती हूं” नारे पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाओं के अधिकारों की सबसे बड़ी लड़ाई के समय यह नारा कहीं नजर नहीं आया। उन्होंने कहा कि संसद में बिल गिरने के बाद विपक्ष का रवैया महिलाओं के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है और यह पूरे देश की महिलाओं का अपमान है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने हमेशा महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं और आगे भी इस दिशा में कार्य करती रहेगी। अंत में भाजपा नेताओं ने कहा कि एक ओर मोदी सरकार है, जिसने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए ठोस नीतियां और अवसर दिए, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस है, जिसने हर बार महिलाओं के अधिकारों को टालने और रोकने का काम किया। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं इस अंतर को समझती हैं और आने वाले समय में इसका लोकतांत्रिक जवाब देंगी।2