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मेजा क्षेत्र में बहुत तेज आंधी बारिश होने से किसानों के चेहरे खिले। क्यों कि धान की खेती को पानी की जरूरत थी। मेजा क्षेत्र में बहुत तेज आंधी बारिश होने से किसानों के चेहरे खिले। क्यों कि धान की खेती को पानी की जरूरत थी।
Umesh chandra patrkar
मेजा क्षेत्र में बहुत तेज आंधी बारिश होने से किसानों के चेहरे खिले। क्यों कि धान की खेती को पानी की जरूरत थी। मेजा क्षेत्र में बहुत तेज आंधी बारिश होने से किसानों के चेहरे खिले। क्यों कि धान की खेती को पानी की जरूरत थी।
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- *दिनांक 22.09.2026 को थाना करछना क्षेत्रांतर्गत ग्राम कैथी में एक पिता द्वारा अपने पुत्र की हत्या किए जाने की घटना एवं पुलिस द्वारा कृत कार्यवाही के संबंध में सहायक पुलिस आयुक्त करछना द्वारा दी गई बाइट-* *दिनांक 22.09.2026 को थाना करछना क्षेत्रांतर्गत ग्राम कैथी में एक पिता द्वारा अपने पुत्र की हत्या किए जाने की घटना एवं पुलिस द्वारा कृत कार्यवाही के संबंध में सहायक पुलिस आयुक्त करछना द्वारा दी गई बाइट-*1
- मेजा क्षेत्र में बहुत तेज आंधी बारिश होने से किसानों के चेहरे खिले। क्यों कि धान की खेती को पानी की जरूरत थी। मेजा क्षेत्र में बहुत तेज आंधी बारिश होने से किसानों के चेहरे खिले। क्यों कि धान की खेती को पानी की जरूरत थी।1
- गौहनिया स्थित होटल का वीडियो वायरल, पुलिस से की गई जांच की मांग *होटल का वीडियो वायरल, पुलिस से की गई जांच की मांग* *प्रयागराज।* घूरपुर थाना क्षेत्र के गौहनिया स्थित बुदावां गांव में एक होटल परिसर से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो के आधार पर होटल में कथित तौर पर अनैतिक गतिविधियों के संचालन का आरोप लगाया जा रहा है। वायरल वीडियो में कुछ लोग होटल परिसर से बाहर निकलते हुए दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि सूचना मिलने पर वे मौके पर पहुंचे और पुलिस को जानकारी दी, लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले कुछ लोग वहां से निकल गए। स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर एक प्रॉपर्टी और होटल समूह का नाम चर्चा में है, हालांकि वायरल वीडियो की सत्यता, उसमें दिख रहे लोगों की पहचान और लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है और लोग मामले में जांच की मांग कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो का संज्ञान लिया गया है, जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी कि होटल में कोई अवैध गतिविधि संचालित हो रही थी या नहीं।2
- *कानपुर बुढ़वा मंगल पर्व पर पनकी मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद, DCP पश्चिम ने किया निरीक्षण*1
- जूनियर अधिवक्ताओं के चैंबर के लिए विवाद अज्ञात लोगों तोड़ा चैंबर फाड़ डाला बैग में रखा मूल पत्रावली एवं दस्तावेज मेजा प्रयागराज मेजा तहसील के तहसील परिसर में जूनियर अधिवक्ताओं द्वारा चैंबर लगाया गया था जिसे कुछ अधिवक्ताओं द्वारा दबंगई से सैकड़ों लोगों के साथ आकर चैम्बर क्षतिग्रस्त कर दिया गया बैग में रखे दस्तावेज फाड़ कर फेंक दिया गया और चैम्बर में बैठे मुवक्किलों को भी मारा पीटा प्राप्त जानकारी के अनुसार तहसील मेजा परिसर में पिछड़े एवं दलित वर्ग जूनियर अधिवक्ताओं द्वारा विधि व्यवसाय करने हेतु चैंबर बनाया गया था जिसे अवैध कहते हुए वर्तमान अध्यक्ष मंत्री द्वारा चैंबर हटाने हेतु नोटिस दिया गया था जिस पर जूनियर अधिवक्ताओं द्वारा समाधान दिवस पर प्रार्थना पत्र देकर अधिकारियों को अवगत कराया गया था कि हमारे चैम्बर को क्षतिग्रस्त करने की धमकी दिया गया है अधिकारियों के लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि आज तहसील परिसर में जूनियर अधिवक्ताओं के साथ यह घटना घटी है फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है1
- TGT-PGT की पुरानी नियमावली पर मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद छात्रों ने समाप्त किया धरना रिपोर्ट अजय द्विवेदी प्रयागराज Slug:TGT-PGT की पुरानी नियमावली पर मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद छात्रों ने समाप्त किया धरना डीएम-पुलिस कमिश्नर ने जूस पिलाकर कराया आंदोलन समाप्त Anchor:प्रयागराज में शिक्षक भर्ती में पुराने नियमावली को लेकर शिक्षा निदेशालय में चल रहा छात्रों का आंदोलन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आश्वासन के बाद खत्म हो गया है। बात दे प्रयागराज में TGT-PGT की पुरानी नियमावली बहाल करने की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे चार अभ्यर्थियों का बुधवार को अनशन खत्म हो गया। प्रयागराज डीएम मनीष वर्मा और पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया ने अभ्यर्थियों को जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया। पांच सितंबर से शिमला पटेल, रोशन सरोज, प्रवीण यादव और मीना सरोज भूख हड़ताल पर बैठे थे। अभ्यर्थियों की मांग थी कि TGT-PGT भर्ती परीक्षा पुरानी नियमावली और पुराने पैटर्न के आधार पर कराई जाए। मंगलवार रात करीब दो घंटे तक प्रशासन ने आमरण अनशन पर बैठे अभ्यर्थियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे लिखित आश्वासन की मांग पर अड़े रहे। बुधवार सुबह डीएम मनीष वर्मा और पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया फिर अनशन स्थल पर पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद अधिकारियों ने अभ्यर्थियों को जूस पिलाकर भूख हड़ताल खत्म कराई। अभ्यर्थियों का कहना था कि जब तक लिखित नोटिस नहीं मिलेगा, तब तक वे अनशन नहीं तोड़ेंगे। 31 अगस्त से चल रहा था धरना, सोमवार को 300 छात्रों ने घेरा शिक्षा निदेशालय अभ्यर्थियों का 31 अगस्त से अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन चल रहा था। सोमवार दोपहर करीब 3 बजे से करीब 300 छात्रों ने शिक्षा निदेशालय का घेराव कर प्रदर्शन किया। इससे पहले, सीएम ने लखनऊ में मंगलवार को धरना दे रहे TGT-PGT अभ्यर्थियों के मुद्दे का संज्ञान लिया। उन्होंने कहा- प्रयागराज में कुछ युवा धरने पर बैठे हैं। मैंने आज माध्यमिक शिक्षा मंत्री से कहा है कि वे राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) को पत्र लिखें। एक बार के लिए उन बच्चों को रिलैक्स (छूट) किया जाए। उनको प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करनी चाहिए या कोई ऐसी व्यवस्था बना दो कि एक समय के बाद वे बच्चे उसमें अपीयर (शामिल) हो सकें। कोई एक सिस्टम तो तैयार किया जाना चाहिए।1
- *गौहनिया के होटल में कथित देह व्यापार का खुला खेल! पुलिस पहुंचने से पहले खाली हुआ परिसर, घूरपुर पुलिस की निगरानी पर सवाल* *वायरल वीडियो और खबर से मचा हाहाकार, चारों तरफ एक ही सवाल—इतने दिनों से कथित गतिविधियां पुलिस की निगाहों से कैसे बची रहीं?* घूरपुर, प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र के घूरपुर थाना अंतर्गत गौहनिया के बुदावां गांव में स्थित एक होटल को लेकर कथित देह व्यापार का मामला सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और इस प्रकरण से जुड़ी खबर सामने आने के बाद चारों तरफ एक ही सवाल चर्चा में है कि यदि होटल परिसर में लंबे समय से ऐसी गतिविधियां संचालित होने के आरोप हैं तो आखिर इतने दिनों तक यह सब घूरपुर पुलिस की निगाहों से कैसे बचा रहा? आरोप है कि ‘इलाहाबाद प्रॉपर्टी एंड होटल ग्रुप’ के परिसर में संदिग्ध गतिविधियां संचालित हो रही थीं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की जानकारी मिलने पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा पुलिस को सूचना दिए जाने की बात सामने आ रही है। बताया जाता है कि सूचना के बाद जब लोग मौके पर पहुंचे तो होटल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल दिखाई दिया। इसी दौरान बनाए गए वायरल वीडियो में कुछ महिलाएं और युवतियां होटल परिसर से बाहर निकलती हुई दिखाई दे रही हैं। वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसके सामने आने के बाद मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। सबसे बड़ा सवाल पुलिस की कार्रवाई और सूचना तंत्र को लेकर खड़ा हो रहा है। यदि पुलिस को पहले ही सूचना दी गई थी तो पुलिस के मौके पर पहुंचने से पहले होटल परिसर कथित रूप से खाली कैसे हो गया? सूचना मिलने से लेकर पुलिस के पहुंचने तक कितना समय बीता? क्या सूचना समय रहते संबंधित पुलिसकर्मियों तक पहुंची थी? और यदि पहुंची थी तो मौके पर कार्रवाई से पहले कथित रूप से लोग वहां से कैसे निकल गए? सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और खबर के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। लोगों के बीच यह अंदेशा भी उठ रहा है कि यदि जांच में होटल में लंबे समय से ऐसी गतिविधियां संचालित होने की बात सामने आती है तो स्थानीय पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। आखिर बीट पुलिसकर्मी की निगरानी कहां थी? क्या होटल की गतिविधियों पर कभी नजर रखी गई? क्या आसपास के लोगों से कभी जानकारी जुटाई गई? या फिर पुलिस की निगाहों से यह पूरा मामला लगातार बचता रहा? यही अंदेशा अब कई सवालों की ओर इशारा कर रहा है, जिनका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। मामला केवल होटल तक सीमित था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क था, यह भी जांच का विषय है। पुलिस को होटल परिसर के सीसीटीवी फुटेज, प्रवेश-निकास से संबंधित अभिलेख, कर्मचारियों और संचालक से पूछताछ तथा वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम की सत्यता की जांच करनी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम कितने समय में मौके पर पहुंची। बुदावां और आसपास के ग्रामीणों में मामले को लेकर नाराजगी बताई जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो ग्रामीण क्षेत्र में ऐसी गतिविधियों को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। वहीं यदि वायरल वीडियो अथवा लगाए गए आरोपों में तथ्य नहीं हैं तो पुलिस की जांच से स्थिति भी साफ होनी चाहिए, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति या प्रतिष्ठान के खिलाफ गलत धारणा न बने। अब निगाहें घूरपुर थाना पुलिस और उच्च पुलिस अधिकारियों की जांच पर टिकी हैं। इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम सवाल यही है कि आखिर इतने दिनों से कथित गतिविधियां चलने की बात सामने आ रही है तो स्थानीय पुलिस की निगरानी व्यवस्था कहां थी और पुलिस को सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचने से पहले ही परिसर कथित रूप से कैसे खाली हो गया? इन सवालों का निष्पक्ष जवाब ही पूरे मामले की असल तस्वीर सामने ला सकता है। *गौहनिया के होटल में कथित देह व्यापार का खुला खेल! पुलिस पहुंचने से पहले खाली हुआ परिसर, घूरपुर पुलिस की निगरानी पर सवाल* *वायरल वीडियो और खबर से मचा हाहाकार, चारों तरफ एक ही सवाल—इतने दिनों से कथित गतिविधियां पुलिस की निगाहों से कैसे बची रहीं?* घूरपुर, प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र के घूरपुर थाना अंतर्गत गौहनिया के बुदावां गांव में स्थित एक होटल को लेकर कथित देह व्यापार का मामला सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और इस प्रकरण से जुड़ी खबर सामने आने के बाद चारों तरफ एक ही सवाल चर्चा में है कि यदि होटल परिसर में लंबे समय से ऐसी गतिविधियां संचालित होने के आरोप हैं तो आखिर इतने दिनों तक यह सब घूरपुर पुलिस की निगाहों से कैसे बचा रहा? आरोप है कि ‘इलाहाबाद प्रॉपर्टी एंड होटल ग्रुप’ के परिसर में संदिग्ध गतिविधियां संचालित हो रही थीं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की जानकारी मिलने पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा पुलिस को सूचना दिए जाने की बात सामने आ रही है। बताया जाता है कि सूचना के बाद जब लोग मौके पर पहुंचे तो होटल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल दिखाई दिया। इसी दौरान बनाए गए वायरल वीडियो में कुछ महिलाएं और युवतियां होटल परिसर से बाहर निकलती हुई दिखाई दे रही हैं। वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसके सामने आने के बाद मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। सबसे बड़ा सवाल पुलिस की कार्रवाई और सूचना तंत्र को लेकर खड़ा हो रहा है। यदि पुलिस को पहले ही सूचना दी गई थी तो पुलिस के मौके पर पहुंचने से पहले होटल परिसर कथित रूप से खाली कैसे हो गया? सूचना मिलने से लेकर पुलिस के पहुंचने तक कितना समय बीता? क्या सूचना समय रहते संबंधित पुलिसकर्मियों तक पहुंची थी? और यदि पहुंची थी तो मौके पर कार्रवाई से पहले कथित रूप से लोग वहां से कैसे निकल गए? सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और खबर के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। लोगों के बीच यह अंदेशा भी उठ रहा है कि यदि जांच में होटल में लंबे समय से ऐसी गतिविधियां संचालित होने की बात सामने आती है तो स्थानीय पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। आखिर बीट पुलिसकर्मी की निगरानी कहां थी? क्या होटल की गतिविधियों पर कभी नजर रखी गई? क्या आसपास के लोगों से कभी जानकारी जुटाई गई? या फिर पुलिस की निगाहों से यह पूरा मामला लगातार बचता रहा? यही अंदेशा अब कई सवालों की ओर इशारा कर रहा है, जिनका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। मामला केवल होटल तक सीमित था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क था, यह भी जांच का विषय है। पुलिस को होटल परिसर के सीसीटीवी फुटेज, प्रवेश-निकास से संबंधित अभिलेख, कर्मचारियों और संचालक से पूछताछ तथा वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम की सत्यता की जांच करनी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम कितने समय में मौके पर पहुंची। बुदावां और आसपास के ग्रामीणों में मामले को लेकर नाराजगी बताई जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो ग्रामीण क्षेत्र में ऐसी गतिविधियों को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। वहीं यदि वायरल वीडियो अथवा लगाए गए आरोपों में तथ्य नहीं हैं तो पुलिस की जांच से स्थिति भी साफ होनी चाहिए, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति या प्रतिष्ठान के खिलाफ गलत धारणा न बने। अब निगाहें घूरपुर थाना पुलिस और उच्च पुलिस अधिकारियों की जांच पर टिकी हैं। इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम सवाल यही है कि आखिर इतने दिनों से कथित गतिविधियां चलने की बात सामने आ रही है तो स्थानीय पुलिस की निगरानी व्यवस्था कहां थी और पुलिस को सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचने से पहले ही परिसर कथित रूप से कैसे खाली हो गया? 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- प्रयागराज मे चोरी के अभियोग से सम्बन्धित 01 अभियुक्त थाना कोतवाली पुलिस द्वारा गिरफ्तार व उसके कब्जे से 01 सफेद धातु का कुण्डल व 230 रुपये नकद बरामदगी के संबंध में सहायक पुलिस आयुक्त कोतवाली द्वारा दी गई बाइट। प्रयागराज मे चोरी के अभियोग से सम्बन्धित 01 अभियुक्त थाना कोतवाली पुलिस द्वारा गिरफ्तार व उसके कब्जे से 01 सफेद धातु का कुण्डल व 230 रुपये नकद बरामदगी के संबंध में सहायक पुलिस आयुक्त कोतवाली द्वारा दी गई बाइट।1