डूंगरपुर जिले के हिराता लोलकपुर निवासी एक आदिवासी श्रमिक, कमलेश मईडा, की अहमदाबाद में काम के दौरान नारियल गिरने से हुई दर्दनाक मौत के मामले में, आदिवासी विकास यूनियन संगठन (अहमदाबाद) के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार पीड़ित परिवार को उचित न्याय मिल गया है। संगठन के कड़े रुख और तीन दिवसीय त्रिपक्षीय वार्ता के दबाव के आगे झुकते हुए, प्रबंधन 4,25,000 रुपये की सम्मानजनक मुआवजा राशि देने पर सहमत हुआ है, जिससे पीड़ित परिवार को तात्कालिक आर्थिक संबल प्राप्त हुआ। प्राप्त विवरण के अनुसार, कमलेश मईडा पुत्र गटूलाल मईडा आजीविका के लिए अहमदाबाद गए थे, जहाँ वे एक बंगले पर घरेलू कामकाज (घर घाटी) कर रहे थे। पिछले दिनों जब वे मालिक के पालतू कुत्ते को टहलाने बंगले के परिसर में निकले थे, तभी पास के नारियल के पेड़ से एक भारी नारियल उनके सिर पर आ गिरा। इस भीषण चोट से कमलेश मौके पर ही बेहोश हो गए। उन्हें तत्काल अहमदाबाद के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ वे लगभग 10 दिनों तक जीवन और मृत्यु से जूझते रहे और आखिरकार 1 जुलाई को उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। कमलेश की असामयिक मृत्यु ने उनकी पत्नी और दो छोटे बच्चों के भविष्य को अंधकारमय कर दिया था। कमलेश की मौत के बाद, शुरुआत में नियोक्ता ने परिजनों को केवल 2 लाख रुपये देकर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया। चूंकि कमलेश अपने परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य थे, इसलिए परिजनों ने इस नाममात्र की राशि को अस्वीकार करते हुए उचित मुआवजे की मांग की, जिसे नियोक्ता ने खारिज कर दिया। नियोक्ता के इस अड़ियल रवैये से परेशान होकर, निराश परिजनों ने आदिवासी विकास यूनियन संगठन को इसकी सूचना दी। संगठन की टीम तुरंत अहमदाबाद पहुंची और स्थिति का जायजा लेते हुए स्थानीय प्रशासन और नियोक्ता पर दबाव बनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक पीड़ित परिवार को उचित न्याय और सम्मानजनक मुआवजा नहीं मिलेगा, वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे। संगठन के पदाधिकारियों और नियोक्ता के बीच लगातार तीन दिनों तक गहन दौर की वार्ता चली। आखिरकार, संगठन की एकजुटता और न्यायसंगत रुख के सामने नियोक्ता को झुकना पड़ा और कुल 4.25 लाख रुपये के मुआवजे पर सहमति बनी। इस राशि में से 1,25,000 रुपये नकद तुरंत प्रदान किए गए, जबकि 3,00,000 रुपये का बैंक चेक मृतक की पत्नी और माता के नाम पर जारी किया गया। इस सराहनीय और त्वरित न्याय दिलाने के कार्य के लिए मृतक के परिजनों सहित पूरे समाज ने संगठन की टीम का हृदय से आभार व्यक्त किया है। यह जानकारी संगठन के मीडिया प्रभारी विजयपाल मेणात ने संवाददाता संतोष व्यास को दी।
डूंगरपुर जिले के हिराता लोलकपुर निवासी एक आदिवासी श्रमिक, कमलेश मईडा, की अहमदाबाद में काम के दौरान नारियल गिरने से हुई दर्दनाक मौत के मामले में, आदिवासी विकास यूनियन संगठन (अहमदाबाद) के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार पीड़ित परिवार को उचित न्याय मिल गया है। संगठन के कड़े रुख और तीन दिवसीय त्रिपक्षीय वार्ता के दबाव के आगे झुकते हुए, प्रबंधन 4,25,000 रुपये की सम्मानजनक मुआवजा राशि देने पर सहमत हुआ है, जिससे पीड़ित परिवार को तात्कालिक आर्थिक संबल प्राप्त हुआ। प्राप्त विवरण के अनुसार, कमलेश मईडा पुत्र गटूलाल मईडा आजीविका के लिए अहमदाबाद गए थे, जहाँ वे एक बंगले पर घरेलू कामकाज (घर घाटी) कर रहे थे। पिछले दिनों जब वे मालिक के पालतू कुत्ते को टहलाने बंगले के परिसर में निकले थे, तभी पास के नारियल के पेड़ से एक भारी नारियल उनके सिर पर आ गिरा। इस भीषण चोट से कमलेश मौके पर ही बेहोश हो गए। उन्हें तत्काल अहमदाबाद के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ वे लगभग 10 दिनों तक जीवन और मृत्यु से जूझते रहे और आखिरकार 1 जुलाई को उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। कमलेश की असामयिक मृत्यु ने उनकी पत्नी और दो छोटे बच्चों के भविष्य को अंधकारमय कर दिया था। कमलेश की मौत के बाद, शुरुआत में नियोक्ता ने परिजनों को केवल 2 लाख रुपये देकर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया। चूंकि कमलेश अपने परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य थे, इसलिए परिजनों ने इस नाममात्र की राशि को अस्वीकार करते हुए उचित मुआवजे की मांग की, जिसे नियोक्ता ने खारिज कर दिया। नियोक्ता के इस अड़ियल रवैये से परेशान होकर, निराश परिजनों ने आदिवासी विकास यूनियन संगठन को इसकी सूचना दी। संगठन की टीम तुरंत अहमदाबाद पहुंची और स्थिति का जायजा लेते हुए स्थानीय प्रशासन और नियोक्ता पर दबाव बनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक पीड़ित परिवार को उचित न्याय और सम्मानजनक मुआवजा नहीं मिलेगा, वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे। संगठन के पदाधिकारियों और नियोक्ता के बीच लगातार तीन दिनों तक गहन दौर की वार्ता चली। आखिरकार, संगठन की एकजुटता और न्यायसंगत रुख के सामने नियोक्ता को झुकना पड़ा और कुल 4.25 लाख रुपये के मुआवजे पर सहमति बनी। इस राशि में से 1,25,000 रुपये नकद तुरंत प्रदान किए गए, जबकि 3,00,000 रुपये का बैंक चेक मृतक की पत्नी और माता के नाम पर जारी किया गया। इस सराहनीय और त्वरित न्याय दिलाने के कार्य के लिए मृतक के परिजनों सहित पूरे समाज ने संगठन की टीम का हृदय से आभार व्यक्त किया है। यह जानकारी संगठन के मीडिया प्रभारी विजयपाल मेणात ने संवाददाता संतोष व्यास को दी।
- डूंगरपुर जिला पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार के निर्देश पर रामसागड़ा थाना पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गत दिनों हुई सनसनीखेज लूट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक बाल अपचारी को निरुद्ध किया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी पुलिस से बचने के लिए महिलाओं के कपड़े पहनकर रातापानी-कुडीयागुण के घने जंगलों में छिपे हुए थे। मुख्य आरोपी कावा उर्फ कावालाल पुलिस थाने का हिस्ट्रीशीटर है, जिसके खिलाफ पहले से ही कई गंभीर मामले दर्ज हैं। घटना 19 जून की रात करीब 8.30 से 9 बजे के बीच हुई थी, जिसकी रिपोर्ट प्रार्थी कैलाश मीणा निवासी नयातालाब गमड़ी अहाड़ा ने 20 जून को थाने में दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार, कैलाश का चचेरा भाई पीयूष अपनी साली के साथ मोटरसाइकिल से लौट रहा था, तभी गामड़ी अहाड़ा से पहले सीमेंट ईंट फैक्ट्री के पास मोड़ पर एक मोटरसाइकिल पर सवार चार अज्ञात बदमाशों ने उनका पीछा कर रोका। बदमाशों ने मारपीट कर जबरन मोबाइल फोन, आवश्यक दस्तावेज़ और जेब में रखे 500 रुपये छीन लिए। विरोध करने पर पीड़ितों पर पत्थरों से भी वार किया गया, जिससे वे घायल हो गए थे। वारदात की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक खींवसिंह और वृत्ताधिकारी सीमलवाड़ा मदनलाल बिश्नोई के सुपरविजन में रामसागड़ा थानाधिकारी कैलाश पंचारिया के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस को मुखबिरों से सूचना मिली कि पूर्व चालानशुदा अपराधी और हिस्ट्रीशीटर कावा और टिंकू फरार हैं। बाद में पता चला कि वे गिरफ्तारी से बचने के लिए हुलिया बदलकर महिलाओं के वेश में जंगलों में छिपे हैं। इस सूचना पर पुलिस टीम ने जंगलों में घेराबंदी कर दोनों आरोपियों और बाल अपचारी को हिरासत में ले लिया। थाने लाकर कड़ी पूछताछ करने पर आरोपियों ने अपने एक अन्य साथी संदीप के साथ मिलकर इस लूट की वारदात को अंजाम देना स्वीकार किया। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी कावा उर्फ कावालाल निवासी गामड़ी अहाड़ा और टिंकू निवासी लोड़वाडा के पास से वारदात में प्रयुक्त मोटरसाइकिल और राहगीरों को डराने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक धारदार चाकू बरामद किया है। पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी कावा उर्फ कावालाल के खिलाफ मारपीट, आर्म्स एक्ट और पॉक्सो एक्ट जैसी गंभीर धाराओं में 5 प्रकरण दर्ज हैं, वहीं आरोपी टिंकू के खिलाफ 2 और बाल अपचारी के खिलाफ 3 मामले पहले से दर्ज हैं। पुलिस अब इस मामले में शामिल अन्य साथियों और कड़ियों को लेकर आगे की तफ्तीश में जुटी है।1
- डूंगरपुर के पुलिस थाना रामसागड़ा अंतर्गत हुई लूट की घटना का पर्दाफाश कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस मामले में, जहाँ प्रार्थियों से मारपीट और लूट को अंजाम दिया गया था, पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है और एक बाल अपचारी को निरूद्ध किया है। पुलिस से बचने के लिए अभियुक्त घटना को अंजाम देने के बाद रातापानी कुड़ियागुण के जंगलों में महिलाओं के भेष में छिपे हुए थे। गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों में कावा उर्फ कावालाल भी शामिल है, जिसके खिलाफ मारपीट के छह प्रकरण दर्ज थे और वह पुलिस थाना रामसागड़ा का हिस्ट्रीशीटर है। इस सराहनीय कार्य में पुलिस थाना रामसागड़ा का महत्वपूर्ण योगदान रहा।1
- डूंगरपुर जिले के रामसागड़ा पुलिस थाना क्षेत्र में राहगीरों के साथ हुई मारपीट और लूटपाट की घटना का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने 02 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 01 बाल अपचारी को भी निरूद्ध किया गया है। पकड़े गए अभियुक्तों में से एक कावा उर्फ कावालाल है, जो पुलिस थाना रामसागड़ा का हिस्ट्रीशीटर है और उसके खिलाफ मारपीट के 05 प्रकरण दर्ज हैं। अभियुक्तगणों ने प्रार्थी के साथ मारपीट कर लूट की वारदात को अंजाम दिया था। घटना को अंजाम देने के बाद, आरोपियों ने पुलिस से बचने के लिए रातापाणी कुड़ीयागुण के जंगल में अपना हुलिया बदलकर महिलाओं के वेश में छुपने की कोशिश की थी। इस पूरे मामले को लेकर वृत्त अधिकारी सीमलवाड़ा मदन लाल विश्नोई ने भी बाइट दी है।1
- सीमलवाड़ा कस्बे में पुल निर्माण कार्य के चलते छोटे वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग खोला गया, लेकिन बिना उचित यातायात व्यवस्था के यह रास्ता कस्बे की गलियों और बाजारों को जाम का केंद्र बना रहा है। पुलिस प्रशासन की अनुपस्थिति के कारण धंबोला स्थित बाजार दिनभर जाम से बेहाल रहा, जिससे पैदल चलना भी मुश्किल हो गया। दरअसल, पुल निर्माण के कारण धंबोला स्थित बीएसएनएल टावर के पास मुख्य मार्ग बंद कर दिया गया था। इसके बाद छोटे-बड़े वाहनों के लिए करीब तीन किलोमीटर लंबा कच्चा बायपास मार्ग बनाया गया था, जिससे दोपहिया चालकों, स्कूली बच्चों और स्थानीय लोगों को रोजाना भारी परेशानी हो रही थी। कस्बेवासियों की लगातार मांग और आमजन की दिक्कत को देखते हुए विभाग ने रविवार को छोटे वाहनों के लिए यह वैकल्पिक मार्ग खोल दिया। हालांकि, यह राहत ज्यादा देर नहीं टिक सकी। रास्ता खुलते ही छोटे वाहन निजी बस स्टैंड से होकर कस्बे की संकरी गलियों और मुख्य बाजार में प्रवेश करने लगे। वाहनों का दबाव बढ़ने से पूरे दिन ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही, जिसने पैदल चलने वालों को भी कठिनाई में डाल दिया। स्थानीय नागरिकों ने नाराजगी जताते हुए कहा है कि पुल निर्माण कार्य शुरू हुए आठ दिन से अधिक हो चुके हैं, फिर भी पुलिस प्रशासन ने यातायात व्यवस्था के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किए। बाजार में न तो यातायात पुलिस तैनात की गई और न ही वाहनों के संचालन की कोई वैकल्पिक योजना लागू की गई, जिसका खामियाजा रोजाना आमजन, दुकानदारों और विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। कस्बेवासियों ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए चेताया कि यदि समय रहते यातायात व्यवस्था नहीं सुधारी गई, तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। ग्रामीणों और व्यापारियों ने प्रशासन से तुरंत मुख्य बाजार और संवेदनशील चौराहों पर पुलिसकर्मी तैनात करने और प्रभावी यातायात संचालन व्यवस्था लागू करने की मांग की है, ताकि पुल निर्माण के दौरान लोगों को जाम और अव्यवस्था से राहत मिल सके।3
- समाज सेवी हितेश सिंघाड़ा के जन्मदिवस के अवसर पर समाज सेवी दिनेश चंद्र अहारी ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि यदि अच्छे, पढ़े-लिखे और युवा लोग आगे आकर क्षेत्र में जन जागरण का कार्य करेंगे, तो समाज में निश्चित रूप से सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेगा। अहारी ने यह भी कहा कि योग्य लोगों को सामाजिक और राजनीतिक दोनों क्षेत्रों में सक्रिय रूप से आगे आना चाहिए, क्योंकि इसी से इस क्षेत्र के वातावरण और राजनीति में 'रोटेशन' और 'पारदर्शिता' सुनिश्चित हो सकेगी।1
- मध्यप्रदेश शासन और पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के तहत, नशे के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान में उज्जैन रेंज पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस दौरान, चार जिलों के कुल 117 एनडीपीएस प्रकरणों में जब्त लगभग 22 क्विंटल 45 किलो 915 ग्राम मादक पदार्थों का विधिवत विनष्टीकरण किया गया। इन जब्त मादक पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब ₹1 करोड़ 80 लाख आंकी गई है। उज्जैन पुलिस ने भी एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज 39 प्रकरणों में जब्त 3 क्विंटल 66 किलो 988 ग्राम मादक पदार्थों को सफलतापूर्वक नष्ट कराया। इसके अतिरिक्त, एक अन्य प्रकरण में जब्त 902 ग्राम अफीम को नियमानुसार अधिकृत भंडारण केंद्र में जमा करवाया गया। ड्रग विनष्टीकरण समिति ने शुक्रवार को 112 प्रकरणों से जुड़े 2245.915 किलोग्राम मादक पदार्थों को नीमच जिले के खोर-नयागांव स्थित विक्रम सीमेंट फैक्ट्री की उच्च तापमान वाली भट्टी में पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए पूरी तरह से नष्ट किया। वहीं, पांच गंभीर प्रकरणों में जब्त 3.967 किलोग्राम अफीम को सुरक्षित भंडारण के लिए नीमच स्थित अल्कालाइड फैक्ट्री में जमा कराया गया। यह पूरी कार्रवाई पुलिस उप महानिरीक्षक और ड्रग विनष्टीकरण समिति के अध्यक्ष नवनीत भसीन के मार्गदर्शन तथा मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक अधिकारी एस.के. गुप्ता की उपस्थिति में विधिसम्मत तरीके से संपन्न हुई। उज्जैन पुलिस ने जानकारी दी कि मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई जारी है। इसके साथ ही, जब्त मादक पदार्थों का समयबद्ध विनष्टीकरण सुनिश्चित कर समाज को नशामुक्त और सुरक्षित बनाने की दिशा में यह अभियान लगातार चल रहा है। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि मादक पदार्थों के अवैध क्रय-विक्रय, परिवहन या भंडारण से संबंधित किसी भी सूचना को तत्काल निकटतम पुलिस थाना या पुलिस कंट्रोल रूम को दें, जिसमें सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।3
- डूंगरपुर जिले के हिराता लोलकपुर निवासी एक आदिवासी श्रमिक, कमलेश मईडा, की अहमदाबाद में काम के दौरान नारियल गिरने से हुई दर्दनाक मौत के मामले में, आदिवासी विकास यूनियन संगठन (अहमदाबाद) के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार पीड़ित परिवार को उचित न्याय मिल गया है। संगठन के कड़े रुख और तीन दिवसीय त्रिपक्षीय वार्ता के दबाव के आगे झुकते हुए, प्रबंधन 4,25,000 रुपये की सम्मानजनक मुआवजा राशि देने पर सहमत हुआ है, जिससे पीड़ित परिवार को तात्कालिक आर्थिक संबल प्राप्त हुआ। प्राप्त विवरण के अनुसार, कमलेश मईडा पुत्र गटूलाल मईडा आजीविका के लिए अहमदाबाद गए थे, जहाँ वे एक बंगले पर घरेलू कामकाज (घर घाटी) कर रहे थे। पिछले दिनों जब वे मालिक के पालतू कुत्ते को टहलाने बंगले के परिसर में निकले थे, तभी पास के नारियल के पेड़ से एक भारी नारियल उनके सिर पर आ गिरा। इस भीषण चोट से कमलेश मौके पर ही बेहोश हो गए। उन्हें तत्काल अहमदाबाद के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ वे लगभग 10 दिनों तक जीवन और मृत्यु से जूझते रहे और आखिरकार 1 जुलाई को उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। कमलेश की असामयिक मृत्यु ने उनकी पत्नी और दो छोटे बच्चों के भविष्य को अंधकारमय कर दिया था। कमलेश की मौत के बाद, शुरुआत में नियोक्ता ने परिजनों को केवल 2 लाख रुपये देकर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया। चूंकि कमलेश अपने परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य थे, इसलिए परिजनों ने इस नाममात्र की राशि को अस्वीकार करते हुए उचित मुआवजे की मांग की, जिसे नियोक्ता ने खारिज कर दिया। नियोक्ता के इस अड़ियल रवैये से परेशान होकर, निराश परिजनों ने आदिवासी विकास यूनियन संगठन को इसकी सूचना दी। संगठन की टीम तुरंत अहमदाबाद पहुंची और स्थिति का जायजा लेते हुए स्थानीय प्रशासन और नियोक्ता पर दबाव बनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक पीड़ित परिवार को उचित न्याय और सम्मानजनक मुआवजा नहीं मिलेगा, वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे। संगठन के पदाधिकारियों और नियोक्ता के बीच लगातार तीन दिनों तक गहन दौर की वार्ता चली। आखिरकार, संगठन की एकजुटता और न्यायसंगत रुख के सामने नियोक्ता को झुकना पड़ा और कुल 4.25 लाख रुपये के मुआवजे पर सहमति बनी। इस राशि में से 1,25,000 रुपये नकद तुरंत प्रदान किए गए, जबकि 3,00,000 रुपये का बैंक चेक मृतक की पत्नी और माता के नाम पर जारी किया गया। इस सराहनीय और त्वरित न्याय दिलाने के कार्य के लिए मृतक के परिजनों सहित पूरे समाज ने संगठन की टीम का हृदय से आभार व्यक्त किया है। यह जानकारी संगठन के मीडिया प्रभारी विजयपाल मेणात ने संवाददाता संतोष व्यास को दी।1
- डूंगरपुर जिले के पूंजपुर मार्ग पर एक ऑटो के अनियंत्रित होकर पलट जाने से उसमें सवार दो बच्चों सहित कुल सात लोग घायल हो गए। हादसे के बाद सभी घायलों को डूंगरपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह घटना दोवड़ा थाना क्षेत्र के लापिया के पास पूंजपुर रोड पर उस समय हुई, जब चुंडीयावाड़ा गांव निवासी हितेंद्र सिंह राठौड़ अपने परिवार के साथ चुंडीयावाड़ा से गडा सियालिया स्थित अपने रिश्तेदारों से मिलकर वापस अपने गांव लौट रहे थे। इस दौरान ऑटो अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे लगी बाड़ से टकराकर पलट गया। घायलों में हितेंद्र सिंह राठौड़, उनकी माता देवू कुंवर, बेटियां झलक और सेजल सहित कुल सात लोग शामिल हैं, जिनमें से तीन लोगों को मामूली चोटें आई हैं। सभी घायलों का इलाज डूंगरपुर जिला अस्पताल में चल रहा है।1