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डूंगरपुर के पुलिस थाना रामसागड़ा अंतर्गत हुई लूट की घटना का पर्दाफाश कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस मामले में, जहाँ प्रार्थियों से मारपीट और लूट को अंजाम दिया गया था, पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है और एक बाल अपचारी को निरूद्ध किया है। पुलिस से बचने के लिए अभियुक्त घटना को अंजाम देने के बाद रातापानी कुड़ियागुण के जंगलों में महिलाओं के भेष में छिपे हुए थे। गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों में कावा उर्फ कावालाल भी शामिल है, जिसके खिलाफ मारपीट के छह प्रकरण दर्ज थे और वह पुलिस थाना रामसागड़ा का हिस्ट्रीशीटर है। इस सराहनीय कार्य में पुलिस थाना रामसागड़ा का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
Bharat Pandya भरत पंड्या
डूंगरपुर के पुलिस थाना रामसागड़ा अंतर्गत हुई लूट की घटना का पर्दाफाश कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस मामले में, जहाँ प्रार्थियों से मारपीट और लूट को अंजाम दिया गया था, पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है और एक बाल अपचारी को निरूद्ध किया है। पुलिस से बचने के लिए अभियुक्त घटना को अंजाम देने के बाद रातापानी कुड़ियागुण के जंगलों में महिलाओं के भेष में छिपे हुए थे। गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों में कावा उर्फ कावालाल भी शामिल है, जिसके खिलाफ मारपीट के छह प्रकरण दर्ज थे और वह पुलिस थाना रामसागड़ा का हिस्ट्रीशीटर है। इस सराहनीय कार्य में पुलिस थाना रामसागड़ा का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
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- धंबोला में पुल निर्माण कार्य से प्रभावित छोटे वाहन चालकों को आंशिक राहत मिली है, जो एक खबर के प्रकाशन के बाद विभाग द्वारा बीएसएनएल टावर के पास बनाए गए अस्थायी मार्ग को पुराने बस स्टैंड तक खोले जाने से संभव हुआ है। इससे पहले जहां उन्हें गड़ापट्टा पीठ रोड पर बाईपास के लिए बनी तीन किलोमीटर लंबी और खराब कच्ची सड़क का चक्कर लगाना पड़ता था, वहीं अब कार, जीप, बाइक जैसे छोटे वाहन प्राइवेट बस स्टैंड होते हुए सिमलवाड़ा बस्ती के रास्ते मुख्य बाजार तक आसानी से पहुंच पा रहे हैं। इस कदम से वाहन चालकों को लंबा चक्कर लगाने से राहत मिली है और आवागमन पहले की तुलना में सुगम हो गया है। हालांकि, इस नई व्यवस्था ने कस्बे में एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। बस्ती की संकरी गलियों से वाहनों की आवाजाही बढ़ने के बावजूद, पुलिस प्रशासन द्वारा यातायात नियंत्रण के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। बाहरी क्षेत्रों से आने वाले वाहन चालक, जिन्हें मार्ग की सही जानकारी नहीं होती, वे पूरी बस्ती में भटकते रहते हैं, जिससे गलियों में बार-बार जाम लग रहा है। स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब क्रूजर जैसे बड़े छोटे व्यावसायिक वाहन संकरी गलियों में फंस जाते हैं, जिससे उनके पीछे वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं और स्थानीय निवासियों को आवागमन में भारी परेशानी उठानी पड़ती है। कस्बेवासियों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि प्रमुख चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर ट्रैफिक पुलिस कर्मियों की तैनाती की जाए। इसके साथ ही, बाहरी वाहन चालकों के लिए दिशा-सूचक संकेतक भी लगाए जाएं, ताकि वे बिना भटके निर्धारित मार्ग से गुजर सकें। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते यातायात व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में यह समस्या और भी विकराल रूप ले सकती है।1
- सलूम्बर में आयोजित रोजगार उत्सव के तहत 342 नव नियुक्त युवाओं को नियुक्ति पत्र और वेलकम किट प्रदान किए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को बालोतरा जिले के पचपदरा से ₹1 लाख 5 हजार करोड़ की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया, जिससे प्रदेश के सभी जिले वर्चुअल माध्यम से जुड़े। इसी अवसर पर सलूम्बर में जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में पंचायत समिति सभागार में जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री के संबोधन का सीधा प्रसारण किया गया, और मुख्यमंत्री रोजगार उत्सव के अंतर्गत विभिन्न विभागों में चयनित 342 नव नियुक्त युवाओं को मुख्यमंत्री का बधाई संदेश, वेलकम किट एवं नियुक्ति पत्र सौंपे गए। इस मौके पर जिला कलक्टर मुहम्मद जुनैद पी.पी. ने सभी नव नियुक्त अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए सरकारी सेवा को समाज और राष्ट्र की सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने सभी कार्मिकों से ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का आह्वान किया, और विश्वास जताया कि ये युवा विकसित भारत एवं विकसित राजस्थान के संकल्प को साकार करने में योगदान देंगे। इन 342 अभ्यर्थियों में प्रशासनिक सुधार विभाग के 306, माध्यमिक शिक्षा विभाग के 21, अजमेर विद्युत वितरण निगम के 6, कृषि विभाग के 3, गृह विभाग (कांस्टेबल) के 2, तथा कॉलेज शिक्षा विभाग, सहकारिता विभाग, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग एवं सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के 1-1 अभ्यर्थी शामिल थे। कार्यक्रम के अंत में सलूम्बर विधायक ने सभी नव नियुक्त अभ्यर्थियों को बधाई दी, जबकि अतिरिक्त जिला कलक्टर डॉ. दिनेश राय सपेला ने सभी नव नियुक्त कार्मिकों को कर्तव्यनिष्ठा एवं ईमानदारी की शपथ दिलाई। इस अवसर पर उपखंड अधिकारी जगदीश चंद्र बामनिया, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश चंद्र पाटीदार, सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के उप निदेशक दीपक धाकड़, जिला शिक्षा अधिकारी माया बजाड़, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी नीरज भास्कर सहित भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष हकरू भाई मईड़ा, विधायक शांता देवी मीणा, जिला उपाध्यक्ष चंद्रशेखर जोशी, जिला मंत्री करण सिंह, भूरा भाई पटेल, मंडल अध्यक्ष नाहर सिंह राठौड़, विजेश भलवाड़ा, अमरा भाई पटेल, उप प्रधान देवेंद्र सिंह, नगर पालिका नेता प्रतिपक्ष प्रभु लाल जैन, पंचायत समिति नेता प्रतिपक्ष सोहनलाल चौधरी, पूर्व चेयरमैन भगवतीलाल सेवक, पूर्व पार्षद संजय चाष्टा, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, नव नियुक्त अभ्यर्थी एवं उनके परिजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।4
- धरियावद के राजकीय उपजिला चिकित्सालय के नवीन परिसर में चिकित्सा कर्मियों द्वारा भूमि को हराभरा बनाने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए श्रमदान एवं पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। चिकित्सा अधिकारी डॉ. जितेन्द्र बागड़िया ने बताया कि चिकित्सालय के नवीन परिसर में प्रतिवर्ष डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कार्मिकों द्वारा पौधारोपण अभियान चलाया जाता है। इस वर्ष परिसर में 151 विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया। इस अभियान के तहत अब तक लगभग 350 नीम, पीपल, अमरूद, नारियल, गिलोय, बरगद, तुलसी, गुलाब सहित विभिन्न प्रजातियों के उपयोगी एवं औषधीय गुणों से युक्त पौधे लगाए जा चुके हैं। चिकित्सा स्टाफ और डॉक्टर समय-समय पर इन पौधों की देखरेख एवं सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप चिकित्सालय का नवीन परिसर विकसित, आकर्षक एवं मनमोहक स्वरूप ग्रहण कर रहा है। अस्पताल परिसर में पेड़-पौधों की मौजूदगी को स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है। इस अवसर पर डॉ. बागड़िया ने वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एस. के. जैन, डॉ. दिग्विजय सिंह, नर्सिंग अधीक्षक कमलेश कोठारी सहित समस्त नर्सिंग स्टाफ एवं कार्मिकों का इस पुनीत कार्य में योगदान के लिए आभार व्यक्त किया।1
- आज कानोड़ क्षेत्र में जबरदस्त बारिश हुई, जिससे इलाके में रौनक लौट आई। मूसलाधार बरसात के साथ इंद्रदेव मेहमान बनकर आए, जिसने लोगों में यह भरोसा जगाया है कि उनकी फसल अच्छी होगी।1
- रावतपुरा के स्थानीय बालाजी मित्र मंडल ने जीव दया और गौ सेवा के अपने संकल्प को आगे बढ़ाते हुए एक सराहनीय कार्य किया है। मंडल के सदस्यों ने मिलकर स्थानीय गौशाला में रह रही गौ माताओं के आराम और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए छह नए पंखे और भारी मात्रा में हरा चारा दान किया। यह पहल विशेष रूप से गर्मियों और उमस भरे मौसम में गौवंश को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है। दान किए गए पंखे गौशाला के शेड में लगवाए गए हैं, जिससे गौ माताओं को भीषण गर्मी से निजात मिल सके।2
- उदयपुर स्थित जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ (डीम्ड विश्वविद्यालय) में कर्मचारियों का आंदोलन लगातार तेज हो गया है। कर्मचारी संघ द्वारा दिए गए अल्टीमेटम की समय-सीमा समाप्त होने के बाद, कर्मचारियों ने मुख्य प्रशासनिक भवन समेत विभिन्न विभागों में तालाबंदी कर दी। इस घटनाक्रम के बाद, कुलपति और कुलसचिव ने कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों के साथ बातचीत की, लेकिन कर्मचारियों की विभिन्न मांगों पर कोई भी सहमति नहीं बन पाई। कर्मचारी संघ के अध्यक्ष डॉ. प्रकाश धाकड़ ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर आरोप लगाया कि वे केवल समय निकालने का प्रयास कर रहे हैं और कर्मचारियों की मुख्य मांगों पर कोई भी ठोस निर्णय नहीं ले रहे हैं। डॉ. धाकड़ ने स्पष्ट किया कि कुलपति की नियुक्ति के स्पष्टीकरण, जमीन घोटाले की जांच, ऑनलाइन पीएफ खाता उपलब्ध कराने, लंबित एरियर का भुगतान, महंगाई भत्ता देने और कर्मचारियों के खिलाफ द्वेषपूर्ण कार्रवाई रोकने जैसी मांगों पर लिखित आदेश मिलने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। वार्ता विफल होने के उपरांत, कर्मचारी संघ ने डबोक परिसर में फिर से क्रमिक धरना शुरू करने का निर्णय लिया है। संघ ने साफ तौर पर कहा है कि जब तक उनकी सभी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं मिल जाता, तब तक चरणबद्ध आंदोलन जारी रहेगा, और इसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।1
- धंबोला ग्राम पंचायत में तहसील कार्यालय के पास स्थित पुराने सरकारी क्वार्टर्स आज सरकारी उपेक्षा का शिकार होकर खंडहर में बदल चुके हैं। वर्ष 1979-80 में तहसील कर्मचारियों के आवास के लिए बने ये भवन अब पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं, जिससे न केवल सरकारी जमीन बेकार पड़ी है बल्कि आमजन के लिए खतरा भी पैदा हो गया है। दशकों से खाली पड़े इन भवनों की टूटी दीवारें, बिखरा मलबा और उगी झाड़ियाँ इनकी बदहाली की गवाही दे रही हैं। ग्रामीणों के अनुसार, 1993 तक अधिकांश क्वार्टर्स रहने लायक नहीं बचे थे, और कुछ वर्ष पहले इन्हीं खंडहरों में से एक भवन से मानव कंकाल मिलने की घटना भी सामने आई थी। इस घटना के बाद से यह परिसर लोगों में भय का कारण बन गया है और सुनसान पड़े इन भवनों में असामाजिक तत्वों की गतिविधियों की आशंका बनी रहती है। इन खंडहर हो चुके क्वार्टर्स के पास अक्षर एकेडमी सीनियर सेकेंडरी विद्यालय, वागड़ सेंट्रल पब्लिक स्कूल और ब्राइट डे स्कूल जैसे कई विद्यालय संचालित हैं, जहाँ बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ प्रतिदिन आते-जाते हैं। अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा की चिंता सता रही है क्योंकि जर्जर दीवारें कभी भी ढह सकती हैं। वे प्रशासन से अप्रिय घटना का इंतजार करने के बजाय इन खंडहरों को हटाकर सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इन खंडहरों को हटाकर यहाँ डीएसपी कार्यालय, सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) कार्यालय, अपर जिला एवं सत्र न्यायालय सहित अन्य महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय स्थापित किए जाएँ। उनका तर्क है कि इसी परिसर में पहले से ही तहसील कार्यालय, एसडीएम कार्यालय, न्यायालय कार्यालय और जलदाय विभाग कार्यालय के साथ विद्युत विभाग का एक्सईएन कार्यालय संचालित है। यदि अन्य विभाग भी इसी स्थान पर स्थापित हो जाएँ, तो आमजन को विभिन्न स्थानों पर भटकना नहीं पड़ेगा और सभी प्रशासनिक सेवाएँ एक ही परिसर में उपलब्ध हो सकेंगी। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से उपेक्षित पड़ी यह सरकारी भूमि जनहित में उपयोग की प्रतीक्षा कर रही है, और यहाँ आधुनिक प्रशासनिक संकुल विकसित होने से धंबोला-सिमलवाड़ा क्षेत्र को एक सुव्यवस्थित प्रशासनिक केंद्र के रूप में नई पहचान मिल सकती है, साथ ही बेकार पड़ी भूमि का भी सार्थक उपयोग होगा।1
- धरियावद में रामद्वारा केशरपुरा रोड के समीप करमोही नदी के तट पर एक मगरमच्छ दिखाई देने से क्षेत्र के ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों द्वारा मगरमच्छ देखे जाने के बाद इसकी सूचना तुरंत वन विभाग धरियावद को दी गई। उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी इसी नदी में एनीकेट के पास मगरमच्छ की आवाजाही देखी जा चुकी थी। इस घटना के बाद, वन विभाग के क्षेत्रीय वन अधिकारी रामलाल भील ने आमजन से अपील की है कि वे बहते पानी में न उतरें और सतर्क रहें।1
- उदयपुर जिले के खेता खेड़ा गांव में एक सरकारी टीचर द्वारा आम रास्ते और आबादी की जमीन पर अवैध कब्जा करने का गंभीर मामला सामने आया है। बताया गया है कि टीचर ने सार्वजनिक उपयोग के लिए निर्धारित रास्ते के साथ-साथ आवासीय भूमि पर भी अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है। इस अवैध कब्जे के खिलाफ संबंधित विभागों में शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं। ग्रामीणों ने इस मामले की शिकायत तहसीलदार, पंचायत और पुलिस थाने में की थी, लेकिन अब तक इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकल पाया है। आरोप है कि प्रशासन इस मामले पर ध्यान नहीं दे रहा है और उल्टे सरकारी टीचर का ही पक्ष ले रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, पीड़ितों ने इस सूचना को आगे से आगे सरकार तक पहुंचाने की अपील की है ताकि इस अवैध कब्जे का समाधान हो सके।4