धंबोला ग्राम पंचायत में तहसील कार्यालय के पास स्थित पुराने सरकारी क्वार्टर्स आज सरकारी उपेक्षा का शिकार होकर खंडहर में बदल चुके हैं। वर्ष 1979-80 में तहसील कर्मचारियों के आवास के लिए बने ये भवन अब पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं, जिससे न केवल सरकारी जमीन बेकार पड़ी है बल्कि आमजन के लिए खतरा भी पैदा हो गया है। दशकों से खाली पड़े इन भवनों की टूटी दीवारें, बिखरा मलबा और उगी झाड़ियाँ इनकी बदहाली की गवाही दे रही हैं। ग्रामीणों के अनुसार, 1993 तक अधिकांश क्वार्टर्स रहने लायक नहीं बचे थे, और कुछ वर्ष पहले इन्हीं खंडहरों में से एक भवन से मानव कंकाल मिलने की घटना भी सामने आई थी। इस घटना के बाद से यह परिसर लोगों में भय का कारण बन गया है और सुनसान पड़े इन भवनों में असामाजिक तत्वों की गतिविधियों की आशंका बनी रहती है। इन खंडहर हो चुके क्वार्टर्स के पास अक्षर एकेडमी सीनियर सेकेंडरी विद्यालय, वागड़ सेंट्रल पब्लिक स्कूल और ब्राइट डे स्कूल जैसे कई विद्यालय संचालित हैं, जहाँ बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ प्रतिदिन आते-जाते हैं। अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा की चिंता सता रही है क्योंकि जर्जर दीवारें कभी भी ढह सकती हैं। वे प्रशासन से अप्रिय घटना का इंतजार करने के बजाय इन खंडहरों को हटाकर सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इन खंडहरों को हटाकर यहाँ डीएसपी कार्यालय, सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) कार्यालय, अपर जिला एवं सत्र न्यायालय सहित अन्य महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय स्थापित किए जाएँ। उनका तर्क है कि इसी परिसर में पहले से ही तहसील कार्यालय, एसडीएम कार्यालय, न्यायालय कार्यालय और जलदाय विभाग कार्यालय के साथ विद्युत विभाग का एक्सईएन कार्यालय संचालित है। यदि अन्य विभाग भी इसी स्थान पर स्थापित हो जाएँ, तो आमजन को विभिन्न स्थानों पर भटकना नहीं पड़ेगा और सभी प्रशासनिक सेवाएँ एक ही परिसर में उपलब्ध हो सकेंगी। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से उपेक्षित पड़ी यह सरकारी भूमि जनहित में उपयोग की प्रतीक्षा कर रही है, और यहाँ आधुनिक प्रशासनिक संकुल विकसित होने से धंबोला-सिमलवाड़ा क्षेत्र को एक सुव्यवस्थित प्रशासनिक केंद्र के रूप में नई पहचान मिल सकती है, साथ ही बेकार पड़ी भूमि का भी सार्थक उपयोग होगा।
धंबोला ग्राम पंचायत में तहसील कार्यालय के पास स्थित पुराने सरकारी क्वार्टर्स आज सरकारी उपेक्षा का शिकार होकर खंडहर में बदल चुके हैं। वर्ष 1979-80 में तहसील कर्मचारियों के आवास के लिए बने ये भवन अब पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं, जिससे न केवल सरकारी जमीन बेकार पड़ी है बल्कि आमजन के लिए खतरा भी पैदा हो गया है। दशकों से खाली पड़े इन भवनों की टूटी दीवारें, बिखरा मलबा और उगी झाड़ियाँ इनकी बदहाली की गवाही दे रही हैं। ग्रामीणों के अनुसार, 1993 तक अधिकांश क्वार्टर्स रहने लायक नहीं बचे थे, और कुछ वर्ष पहले इन्हीं खंडहरों में से एक भवन से मानव कंकाल मिलने की घटना भी सामने आई थी। इस घटना के बाद से यह परिसर लोगों में भय का कारण बन गया है और सुनसान पड़े इन भवनों में असामाजिक तत्वों की गतिविधियों की आशंका बनी रहती है। इन खंडहर हो चुके क्वार्टर्स के पास अक्षर एकेडमी सीनियर सेकेंडरी विद्यालय, वागड़ सेंट्रल पब्लिक स्कूल और ब्राइट डे स्कूल जैसे कई विद्यालय संचालित हैं, जहाँ बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ प्रतिदिन आते-जाते हैं। अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा की चिंता सता रही है क्योंकि जर्जर दीवारें कभी भी ढह सकती हैं। वे प्रशासन से अप्रिय घटना का इंतजार करने के बजाय इन खंडहरों को हटाकर सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इन खंडहरों को हटाकर यहाँ डीएसपी कार्यालय, सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) कार्यालय, अपर जिला एवं सत्र न्यायालय सहित अन्य महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय स्थापित किए जाएँ। उनका तर्क है कि इसी परिसर में पहले से ही तहसील कार्यालय, एसडीएम कार्यालय, न्यायालय कार्यालय और जलदाय विभाग कार्यालय के साथ विद्युत विभाग का एक्सईएन कार्यालय संचालित है। यदि अन्य विभाग भी इसी स्थान पर स्थापित हो जाएँ, तो आमजन को विभिन्न स्थानों पर भटकना नहीं पड़ेगा और सभी प्रशासनिक सेवाएँ एक ही परिसर में उपलब्ध हो सकेंगी। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से उपेक्षित पड़ी यह सरकारी भूमि जनहित में उपयोग की प्रतीक्षा कर रही है, और यहाँ आधुनिक प्रशासनिक संकुल विकसित होने से धंबोला-सिमलवाड़ा क्षेत्र को एक सुव्यवस्थित प्रशासनिक केंद्र के रूप में नई पहचान मिल सकती है, साथ ही बेकार पड़ी भूमि का भी सार्थक उपयोग होगा।
- सीमलवाड़ा कस्बे में पुल निर्माण कार्य के चलते छोटे वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग खोला गया, लेकिन बिना उचित यातायात व्यवस्था के यह रास्ता कस्बे की गलियों और बाजारों को जाम का केंद्र बना रहा है। पुलिस प्रशासन की अनुपस्थिति के कारण धंबोला स्थित बाजार दिनभर जाम से बेहाल रहा, जिससे पैदल चलना भी मुश्किल हो गया। दरअसल, पुल निर्माण के कारण धंबोला स्थित बीएसएनएल टावर के पास मुख्य मार्ग बंद कर दिया गया था। इसके बाद छोटे-बड़े वाहनों के लिए करीब तीन किलोमीटर लंबा कच्चा बायपास मार्ग बनाया गया था, जिससे दोपहिया चालकों, स्कूली बच्चों और स्थानीय लोगों को रोजाना भारी परेशानी हो रही थी। कस्बेवासियों की लगातार मांग और आमजन की दिक्कत को देखते हुए विभाग ने रविवार को छोटे वाहनों के लिए यह वैकल्पिक मार्ग खोल दिया। हालांकि, यह राहत ज्यादा देर नहीं टिक सकी। रास्ता खुलते ही छोटे वाहन निजी बस स्टैंड से होकर कस्बे की संकरी गलियों और मुख्य बाजार में प्रवेश करने लगे। वाहनों का दबाव बढ़ने से पूरे दिन ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही, जिसने पैदल चलने वालों को भी कठिनाई में डाल दिया। स्थानीय नागरिकों ने नाराजगी जताते हुए कहा है कि पुल निर्माण कार्य शुरू हुए आठ दिन से अधिक हो चुके हैं, फिर भी पुलिस प्रशासन ने यातायात व्यवस्था के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किए। बाजार में न तो यातायात पुलिस तैनात की गई और न ही वाहनों के संचालन की कोई वैकल्पिक योजना लागू की गई, जिसका खामियाजा रोजाना आमजन, दुकानदारों और विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। कस्बेवासियों ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए चेताया कि यदि समय रहते यातायात व्यवस्था नहीं सुधारी गई, तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। ग्रामीणों और व्यापारियों ने प्रशासन से तुरंत मुख्य बाजार और संवेदनशील चौराहों पर पुलिसकर्मी तैनात करने और प्रभावी यातायात संचालन व्यवस्था लागू करने की मांग की है, ताकि पुल निर्माण के दौरान लोगों को जाम और अव्यवस्था से राहत मिल सके।3
- समाज सेवी हितेश सिंघाड़ा के जन्मदिवस के अवसर पर समाज सेवी दिनेश चंद्र अहारी ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि यदि अच्छे, पढ़े-लिखे और युवा लोग आगे आकर क्षेत्र में जन जागरण का कार्य करेंगे, तो समाज में निश्चित रूप से सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेगा। अहारी ने यह भी कहा कि योग्य लोगों को सामाजिक और राजनीतिक दोनों क्षेत्रों में सक्रिय रूप से आगे आना चाहिए, क्योंकि इसी से इस क्षेत्र के वातावरण और राजनीति में 'रोटेशन' और 'पारदर्शिता' सुनिश्चित हो सकेगी।1
- डूंगरपुर जिला पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार के निर्देश पर रामसागड़ा थाना पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गत दिनों हुई सनसनीखेज लूट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक बाल अपचारी को निरुद्ध किया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी पुलिस से बचने के लिए महिलाओं के कपड़े पहनकर रातापानी-कुडीयागुण के घने जंगलों में छिपे हुए थे। मुख्य आरोपी कावा उर्फ कावालाल पुलिस थाने का हिस्ट्रीशीटर है, जिसके खिलाफ पहले से ही कई गंभीर मामले दर्ज हैं। घटना 19 जून की रात करीब 8.30 से 9 बजे के बीच हुई थी, जिसकी रिपोर्ट प्रार्थी कैलाश मीणा निवासी नयातालाब गमड़ी अहाड़ा ने 20 जून को थाने में दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार, कैलाश का चचेरा भाई पीयूष अपनी साली के साथ मोटरसाइकिल से लौट रहा था, तभी गामड़ी अहाड़ा से पहले सीमेंट ईंट फैक्ट्री के पास मोड़ पर एक मोटरसाइकिल पर सवार चार अज्ञात बदमाशों ने उनका पीछा कर रोका। बदमाशों ने मारपीट कर जबरन मोबाइल फोन, आवश्यक दस्तावेज़ और जेब में रखे 500 रुपये छीन लिए। विरोध करने पर पीड़ितों पर पत्थरों से भी वार किया गया, जिससे वे घायल हो गए थे। वारदात की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक खींवसिंह और वृत्ताधिकारी सीमलवाड़ा मदनलाल बिश्नोई के सुपरविजन में रामसागड़ा थानाधिकारी कैलाश पंचारिया के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस को मुखबिरों से सूचना मिली कि पूर्व चालानशुदा अपराधी और हिस्ट्रीशीटर कावा और टिंकू फरार हैं। बाद में पता चला कि वे गिरफ्तारी से बचने के लिए हुलिया बदलकर महिलाओं के वेश में जंगलों में छिपे हैं। इस सूचना पर पुलिस टीम ने जंगलों में घेराबंदी कर दोनों आरोपियों और बाल अपचारी को हिरासत में ले लिया। थाने लाकर कड़ी पूछताछ करने पर आरोपियों ने अपने एक अन्य साथी संदीप के साथ मिलकर इस लूट की वारदात को अंजाम देना स्वीकार किया। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी कावा उर्फ कावालाल निवासी गामड़ी अहाड़ा और टिंकू निवासी लोड़वाडा के पास से वारदात में प्रयुक्त मोटरसाइकिल और राहगीरों को डराने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक धारदार चाकू बरामद किया है। पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी कावा उर्फ कावालाल के खिलाफ मारपीट, आर्म्स एक्ट और पॉक्सो एक्ट जैसी गंभीर धाराओं में 5 प्रकरण दर्ज हैं, वहीं आरोपी टिंकू के खिलाफ 2 और बाल अपचारी के खिलाफ 3 मामले पहले से दर्ज हैं। पुलिस अब इस मामले में शामिल अन्य साथियों और कड़ियों को लेकर आगे की तफ्तीश में जुटी है।1
- डूंगरपुर के पुलिस थाना रामसागड़ा अंतर्गत हुई लूट की घटना का पर्दाफाश कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस मामले में, जहाँ प्रार्थियों से मारपीट और लूट को अंजाम दिया गया था, पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है और एक बाल अपचारी को निरूद्ध किया है। पुलिस से बचने के लिए अभियुक्त घटना को अंजाम देने के बाद रातापानी कुड़ियागुण के जंगलों में महिलाओं के भेष में छिपे हुए थे। गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों में कावा उर्फ कावालाल भी शामिल है, जिसके खिलाफ मारपीट के छह प्रकरण दर्ज थे और वह पुलिस थाना रामसागड़ा का हिस्ट्रीशीटर है। इस सराहनीय कार्य में पुलिस थाना रामसागड़ा का महत्वपूर्ण योगदान रहा।1
- डूंगरपुर जिले के रामसागड़ा पुलिस थाना क्षेत्र में राहगीरों के साथ हुई मारपीट और लूटपाट की घटना का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने 02 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 01 बाल अपचारी को भी निरूद्ध किया गया है। पकड़े गए अभियुक्तों में से एक कावा उर्फ कावालाल है, जो पुलिस थाना रामसागड़ा का हिस्ट्रीशीटर है और उसके खिलाफ मारपीट के 05 प्रकरण दर्ज हैं। अभियुक्तगणों ने प्रार्थी के साथ मारपीट कर लूट की वारदात को अंजाम दिया था। घटना को अंजाम देने के बाद, आरोपियों ने पुलिस से बचने के लिए रातापाणी कुड़ीयागुण के जंगल में अपना हुलिया बदलकर महिलाओं के वेश में छुपने की कोशिश की थी। इस पूरे मामले को लेकर वृत्त अधिकारी सीमलवाड़ा मदन लाल विश्नोई ने भी बाइट दी है।1
- बांसवाड़ा जिले के खूंटा लालु पारंगी छायणा गांव में खेती का समय आ गया है। इस मौसम में गांव के किसान मक्का, सोयाबीन, चावल, मूंगफली, ज्वार और बाजरा जैसी फसलें बो रहे हैं। जानकारी के अनुसार, गांव के आधे किसानों ने अभी बुवाई का काम शुरू किया है, वहीं अन्य आधे किसानों ने अपनी खेती का काम पहले ही पूरा कर लिया है।1
- बांसवाड़ा-डूंगरपुर से सांसद राजकुमार रोत का एक पूरा बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह बयान व्यापक रूप से लोगों द्वारा देखा और सुना जा रहा है।1
- धंबोला में पुल निर्माण कार्य से प्रभावित छोटे वाहन चालकों को आंशिक राहत मिली है, जो एक खबर के प्रकाशन के बाद विभाग द्वारा बीएसएनएल टावर के पास बनाए गए अस्थायी मार्ग को पुराने बस स्टैंड तक खोले जाने से संभव हुआ है। इससे पहले जहां उन्हें गड़ापट्टा पीठ रोड पर बाईपास के लिए बनी तीन किलोमीटर लंबी और खराब कच्ची सड़क का चक्कर लगाना पड़ता था, वहीं अब कार, जीप, बाइक जैसे छोटे वाहन प्राइवेट बस स्टैंड होते हुए सिमलवाड़ा बस्ती के रास्ते मुख्य बाजार तक आसानी से पहुंच पा रहे हैं। इस कदम से वाहन चालकों को लंबा चक्कर लगाने से राहत मिली है और आवागमन पहले की तुलना में सुगम हो गया है। हालांकि, इस नई व्यवस्था ने कस्बे में एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। बस्ती की संकरी गलियों से वाहनों की आवाजाही बढ़ने के बावजूद, पुलिस प्रशासन द्वारा यातायात नियंत्रण के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। बाहरी क्षेत्रों से आने वाले वाहन चालक, जिन्हें मार्ग की सही जानकारी नहीं होती, वे पूरी बस्ती में भटकते रहते हैं, जिससे गलियों में बार-बार जाम लग रहा है। स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब क्रूजर जैसे बड़े छोटे व्यावसायिक वाहन संकरी गलियों में फंस जाते हैं, जिससे उनके पीछे वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं और स्थानीय निवासियों को आवागमन में भारी परेशानी उठानी पड़ती है। कस्बेवासियों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि प्रमुख चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर ट्रैफिक पुलिस कर्मियों की तैनाती की जाए। इसके साथ ही, बाहरी वाहन चालकों के लिए दिशा-सूचक संकेतक भी लगाए जाएं, ताकि वे बिना भटके निर्धारित मार्ग से गुजर सकें। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते यातायात व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में यह समस्या और भी विकराल रूप ले सकती है।1