एसआईआर की प्रक्रिया देशद्रोह, जेल जाएंगे ज्ञानेश कुमार 14 बार 10 महीनों में, दो चुनाव आयुक्तों ने रिकॉर्ड पर चुनाव आयोग के कदमों पर आपत्ति जताई: मतदाताओं को अंधेरे में रखने से लेकर नए मतदाता जोड़ने और हटाने तक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने अनधिकृत, अवैध कदमों पर आपत्ति दर्ज की: इंडियन एक्सप्रेस में छपी रितिका चौधरी की यही वो स्टोरी है जिसने कल से सनसनी फैला रखी है: इस रिपोर्ट में कई चौकाने वाले खुलासे हैं जिनमें एक तो बंगाल से जुड़ा हुआ है: रिपोर्ट बताती है कि पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में से 49 में एसआईआर में हटाए गए नाम जीत के मार्जिन से ज्यादा थे: इनमें 26 बीजेपी और 21 टीएमसी ने जीतीं: लेकिन नाम हटाए जाने के तरीके पर सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2026 में एसआईआर के अंतिम चरण को आयोग के हाथ से निकाल लिया और लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी वाले 60 लाख मतदाताओं के मामाले न्यायिक अधिकारियों को सौंप दिए: इनमें से 27 लाख मतदाताओं को आयोग ने बाद में हटा दिया। अदालत ने फिर रिटायर्ड हाई कोर्ट जजों के ट्रिब्यूनल बनाए ताकि उन फैसलों के खिलाफ अपील सुनी जा सकें:पिछले सप्ताह आयोग ने अदालत को बताया कि ट्रिब्यूनलों के सामने 38 लाख अपीलें लंबित हैं—22.21 लाख हटाए गए मतदाताओं ने खुद को बहाल कराने के लिए दाखिल कीं। बाकी 16.10 लाख उन मतदाताओं के खिलाफ दाखिल की गईं जिन्हें न्यायिक अधिकारियों ने शामिल किया था: आयोग ने नहीं बताया कि ये अपीलें किसने दाखिल कीं: यही मुद्दा संधू ने उठाया था। अगस्त में उन्होंने आयोग के अधिकारियों को लिखकर पूछा—“ECI की ओर से ये अपीलें दाखिल करने के लिए किसने अधिकृत किया और किसके द्वारा?” तथा “ECI की ओर से वास्तव में ये अपीलें किसने दाखिल कीं?” उन्होंने दर्ज किया कि न तो उन्हें, न जोशी को, न पश्चिम बंगाल के मौजूदा मुख्य निर्वाचन अधिकारी को इन अपीलों के आधार या प्रक्रिया की जानकारी दी गई थी: इसी तरह नए मतदाता जोड़ने या हटाने का मामला हो या पूरी प्रक्रिया को सेंट्रलाइज करके आईटी सेल के जरिए मनचाहे तरीके से नाम हटाने और जोड़ने का मामला, अकेले ज्ञानेश कुमार सारे फैसले दोनों आयुक्तों को अंधेरे में रख कर ले रहे थे जो ना सिर्फ गैरकानूनी है बल्कि इस देश के खिलाफ द्रोह है संविधान के खिलाफ है: नागरिक अधिकारों के खिलाफ अपराध है: दोस्तो आज हमने इसी मुद्दे पर कोटा में सीपीआईएम के सबसे बड़े नेता और राजस्थान की तरफ से कॉमरेड अमराराम जी के साथ पूरे देश में लेफ्ट की राजनीति का चेहरा कॉमरेड दुलीचंद बोरदा साहब से बात की: और हमेशा की तरह उनसे बातचीत बहुत शानदार रही:
एसआईआर की प्रक्रिया देशद्रोह, जेल जाएंगे ज्ञानेश कुमार 14 बार 10 महीनों में, दो चुनाव आयुक्तों ने रिकॉर्ड पर चुनाव आयोग के कदमों पर आपत्ति जताई: मतदाताओं को अंधेरे में रखने से लेकर नए मतदाता जोड़ने और हटाने तक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने अनधिकृत, अवैध कदमों पर आपत्ति दर्ज की: इंडियन एक्सप्रेस में छपी रितिका चौधरी की यही वो स्टोरी है जिसने कल से सनसनी फैला रखी है: इस रिपोर्ट में कई चौकाने वाले खुलासे हैं जिनमें एक तो बंगाल से जुड़ा हुआ है: रिपोर्ट बताती है कि पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में से 49 में एसआईआर में हटाए गए नाम जीत के मार्जिन से ज्यादा थे: इनमें 26 बीजेपी और 21 टीएमसी ने जीतीं: लेकिन नाम हटाए जाने के तरीके पर सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2026 में एसआईआर के अंतिम चरण को आयोग के हाथ से निकाल लिया और लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी वाले 60 लाख मतदाताओं के मामाले न्यायिक अधिकारियों को सौंप दिए: इनमें से 27 लाख मतदाताओं को आयोग ने बाद में हटा दिया। अदालत ने फिर रिटायर्ड हाई कोर्ट जजों के ट्रिब्यूनल बनाए ताकि उन फैसलों के खिलाफ अपील सुनी जा सकें:पिछले सप्ताह आयोग ने अदालत को बताया कि ट्रिब्यूनलों के सामने 38 लाख अपीलें लंबित हैं—22.21 लाख हटाए गए मतदाताओं ने खुद को बहाल कराने के लिए दाखिल कीं। बाकी 16.10 लाख उन मतदाताओं के खिलाफ दाखिल की गईं जिन्हें न्यायिक अधिकारियों ने शामिल किया था: आयोग ने नहीं बताया कि ये अपीलें किसने दाखिल कीं: यही मुद्दा संधू ने उठाया था। अगस्त में उन्होंने आयोग के अधिकारियों को लिखकर पूछा—“ECI की ओर से ये अपीलें दाखिल करने के लिए किसने अधिकृत किया और किसके द्वारा?” तथा “ECI की ओर से वास्तव में ये अपीलें किसने दाखिल कीं?” उन्होंने दर्ज किया कि न तो उन्हें, न जोशी को, न पश्चिम बंगाल के मौजूदा मुख्य निर्वाचन अधिकारी को इन अपीलों के आधार या प्रक्रिया की जानकारी दी गई थी: इसी तरह नए मतदाता जोड़ने या हटाने का मामला हो या पूरी प्रक्रिया को सेंट्रलाइज करके आईटी सेल के जरिए मनचाहे तरीके से नाम हटाने और जोड़ने का मामला, अकेले ज्ञानेश कुमार सारे फैसले दोनों आयुक्तों को अंधेरे में रख कर ले रहे थे जो ना सिर्फ गैरकानूनी है बल्कि इस देश के खिलाफ द्रोह है संविधान के खिलाफ है: नागरिक अधिकारों के खिलाफ अपराध है: दोस्तो आज हमने इसी मुद्दे पर कोटा में सीपीआईएम के सबसे बड़े नेता और राजस्थान की तरफ से कॉमरेड अमराराम जी के साथ पूरे देश में लेफ्ट की राजनीति का चेहरा कॉमरेड दुलीचंद बोरदा साहब से बात की: और हमेशा की तरह उनसे बातचीत बहुत शानदार रही:
- एसआईआर की प्रक्रिया देशद्रोह, जेल जाएंगे ज्ञानेश कुमार 14 बार 10 महीनों में, दो चुनाव आयुक्तों ने रिकॉर्ड पर चुनाव आयोग के कदमों पर आपत्ति जताई: मतदाताओं को अंधेरे में रखने से लेकर नए मतदाता जोड़ने और हटाने तक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने अनधिकृत, अवैध कदमों पर आपत्ति दर्ज की: इंडियन एक्सप्रेस में छपी रितिका चौधरी की यही वो स्टोरी है जिसने कल से सनसनी फैला रखी है: इस रिपोर्ट में कई चौकाने वाले खुलासे हैं जिनमें एक तो बंगाल से जुड़ा हुआ है: रिपोर्ट बताती है कि पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में से 49 में एसआईआर में हटाए गए नाम जीत के मार्जिन से ज्यादा थे: इनमें 26 बीजेपी और 21 टीएमसी ने जीतीं: लेकिन नाम हटाए जाने के तरीके पर सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2026 में एसआईआर के अंतिम चरण को आयोग के हाथ से निकाल लिया और लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी वाले 60 लाख मतदाताओं के मामाले न्यायिक अधिकारियों को सौंप दिए: इनमें से 27 लाख मतदाताओं को आयोग ने बाद में हटा दिया। अदालत ने फिर रिटायर्ड हाई कोर्ट जजों के ट्रिब्यूनल बनाए ताकि उन फैसलों के खिलाफ अपील सुनी जा सकें:पिछले सप्ताह आयोग ने अदालत को बताया कि ट्रिब्यूनलों के सामने 38 लाख अपीलें लंबित हैं—22.21 लाख हटाए गए मतदाताओं ने खुद को बहाल कराने के लिए दाखिल कीं। बाकी 16.10 लाख उन मतदाताओं के खिलाफ दाखिल की गईं जिन्हें न्यायिक अधिकारियों ने शामिल किया था: आयोग ने नहीं बताया कि ये अपीलें किसने दाखिल कीं: यही मुद्दा संधू ने उठाया था। अगस्त में उन्होंने आयोग के अधिकारियों को लिखकर पूछा—“ECI की ओर से ये अपीलें दाखिल करने के लिए किसने अधिकृत किया और किसके द्वारा?” तथा “ECI की ओर से वास्तव में ये अपीलें किसने दाखिल कीं?” उन्होंने दर्ज किया कि न तो उन्हें, न जोशी को, न पश्चिम बंगाल के मौजूदा मुख्य निर्वाचन अधिकारी को इन अपीलों के आधार या प्रक्रिया की जानकारी दी गई थी: इसी तरह नए मतदाता जोड़ने या हटाने का मामला हो या पूरी प्रक्रिया को सेंट्रलाइज करके आईटी सेल के जरिए मनचाहे तरीके से नाम हटाने और जोड़ने का मामला, अकेले ज्ञानेश कुमार सारे फैसले दोनों आयुक्तों को अंधेरे में रख कर ले रहे थे जो ना सिर्फ गैरकानूनी है बल्कि इस देश के खिलाफ द्रोह है संविधान के खिलाफ है: नागरिक अधिकारों के खिलाफ अपराध है: दोस्तो आज हमने इसी मुद्दे पर कोटा में सीपीआईएम के सबसे बड़े नेता और राजस्थान की तरफ से कॉमरेड अमराराम जी के साथ पूरे देश में लेफ्ट की राजनीति का चेहरा कॉमरेड दुलीचंद बोरदा साहब से बात की: और हमेशा की तरह उनसे बातचीत बहुत शानदार रही:1
- प्रहलाद गुंजल ने की रामपुरा के राजा की आरती कोटा : पूर्व विधायक व कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल ने गणेश महोत्सव के अंतर्गत आज रामपुरा के राजा की आरती की। पहले प्रहलाद गुंजल ने पूरे विधि विधान व मंत्रोच्चार के साथ गणपति जी की पूजा की उसके बाद रामपुरा के राजा की महा आरती कि। इस दौरान पूर्व पार्षद बृजेश शर्मा नीटू, प्रशांत सक्सैना, इंद्र कुमार जैन सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे। प्रहलाद गुंजल ने की रामपुरा के राजा की आरती कोटा : पूर्व विधायक व कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल ने गणेश महोत्सव के अंतर्गत आज रामपुरा के राजा की आरती की। पहले प्रहलाद गुंजल ने पूरे विधि विधान व मंत्रोच्चार के साथ गणपति जी की पूजा की उसके बाद रामपुरा के राजा की महा आरती कि। इस दौरान पूर्व पार्षद बृजेश शर्मा नीटू, प्रशांत सक्सैना, इंद्र कुमार जैन सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।1
- आलू से मोटापा नहीं बढ़ता, तेल-घी के कारण बढ़ता है वजन: वैज्ञानिकों ने बताया, 16 किस्मों की लगी प्रदर्शनी आलू से मोटापा नहीं बढ़ता, तेल-घी के कारण बढ़ता है वजन: वैज्ञानिकों ने बताया, 16 किस्मों की लगी प्रदर्शनी बोरखेड़ा कृषि विश्वविद्यालय में दो दिवसीय पोटैटो सेमिनार का आयोजन एंकर कोटा। कृषि विज्ञान केंद्र, बोरखेड़ा में आलू पर दो दिवसीय सेमिनार शुरू हुआ। उद्घाटन सत्र में देश के विभिन्न राज्यों से करीब 70 वैज्ञानिक शामिल हुए। इस दौरान आलू की नई किस्मों, पोषण, जलवायु परिवर्तन और किसानों की आय बढ़ाने पर मंथन किया गया। केंद्र में 16 अलग-अलग किस्मों के आलू की प्रदर्शनी भी लगाई गई। कृषि विश्वविद्यालय की कुलगुरु डॉ. विमला डुंकवाल ने बताया कि यह 44वीं सेमिनार है। उन्होंने कहा कि आलू को लेकर यह भ्रांति है कि इसे खाने से मोटापा बढ़ता है। आलू में करीब 0.8 प्रतिशत फैट होता है, जबकि तेल या घी मिलाने पर कैलोरी बढ़ती है। जिंक और आयरन की मात्रा बढ़ाने वाली किस्मों पर भी शोध चल रहा है। महाराणा प्रताप कृषि विश्वविद्यालय, उदयपुर के कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह ने बताया कि कोटा के अर्जुनपुरा में भी आलू की विभिन्न किस्मों पर काम हो रहा है। शुगर फ्री और प्रोटीन रिच आलू विकसित करने को लेकर भी चर्चा हुई। केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला के डॉ. बृजेश सिंह ने बताया कि फ्राइड आलू स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है, जबकि उबला आलू अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प है। ऐसी किस्मों पर शोध जारी है, जिनसे खाने के बाद ब्लड शुगर तेजी से न बढ़े।1
- कोटा विकास प्राधिकरण के आयुक्त अग्रवाल साहब से हमने आज हाई टेक्नोलॉजी पर आधारित दृष्टि एप के बारे में चर्चा की। और उसके बारे में विस्तृत बताया। दृष्टि अप कोटा विकास प्राधिकरण के लिए वरदान होगा विकास के कार्यों में1
- कोटा में अनंत चतुर्दशी को लेकर तैयारियां तेज, देर रात कलेक्टर और SP ने जुलूस मार्ग का किया निरीक्षण कोटा: कोटा शहर में 25 सितंबर को आयोजित होने वाले अनंत चतुर्दशी महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित आयोजन सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक अमले ने देर रात मोर्चा संभाला। जिला कलेक्टर पीयूष समारिया और शहर पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम ने अधिकारियों के साथ सूरजपोल गेट से बाराद्वारी तक के पूरे जुलूस मार्ग का पैदल निरीक्षण किया। इस दौरान दोनों उच्च अधिकारियों ने मार्ग में सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक डायवर्जन, विद्युत व्यवस्था (लाइटिंग) और श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली मूलभूत सुविधाओं की गहन समीक्षा की। कलेक्टर ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिए कि जुलूस मार्ग में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो और सभी बुनियादी काम समय रहते पूरे कर लिए जाएं। पुलिस अधीक्षक ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम और सीसीटीवी निगरानी को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। निरीक्षण के दौरान नगर निगम आयुक्त ओपी मेहरा और अनंत चतुर्दशी आयोजन समिति के पदाधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए1
- बीसी के नाम कथित धोखाधड़ी के मामले में आरोपी की गिरफ्तारी की मांग, आरकेपुरम थाने पर आप कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन कोटा। बीसी के नाम पर कथित धोखाधड़ी के मामले में आरोपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर गुरुवार दोपहर आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने आरकेपुरम थाने के बाहर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने हाथों में बैनर लेकर पुलिस से मामले में शीघ्र कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं का आरोप था कि बीसी के नाम पर लोगों से धोखाधड़ी किए जाने के मामले में आरोपी खुलेआम घूम रहा है, जबकि मामले में शिकायतकर्ता कार्रवाई की मांग को लेकर परेशान हो रहे हैं। कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई। आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन से मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर पीड़ितों को न्याय दिलाया जाए तथा यदि जांच में आरोपी के खिलाफ आरोप प्रमाणित पाए जाते हैं तो उसे शीघ्र गिरफ्तार किया जाए। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखीं और मामले में प्रभावी कार्रवाई की मांग की।4
- डिजिटल भास्कर पत्रिका न्यूज़ के डी अब्बासी कोटा शहर के भीमगंज मंडी क्षेत्र के मुख्य बाजार में कल शाम एक महिला के साथ छेड़छाड़ को लेकर एक युवक पूरी तरह पिटाई कर दी गई।।1
- कोटा। तीन पीढ़ियों से देहदान की परंपरा निभा रहे गुप्ता परिवार ने श्रीमती कैलाश गुप्ता के निधन के बाद उनकी इच्छा के अनुरूप न्यू मेडिकल कॉलेज, कोटा में देहदान कराया। कोटा। तीन पीढ़ियों से देहदान की परंपरा निभा रहे गुप्ता परिवार ने श्रीमती कैलाश गुप्ता के निधन के बाद उनकी इच्छा के अनुरूप न्यू मेडिकल कॉलेज, कोटा में देहदान कराया।1