अलीगढ़: 'थूक वाली रोटी' का घिनौना वीडियो वायरल, राजपूत होटल में परोसा जा रहा था जहर #Apkiawajdigital विशेष रिपोर्ट: अलीगढ़ से जमीनी हकीकत अलीगढ़/गभाना: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले से एक बेहद शर्मनाक और घृणित मामला सामने आया है। गभाना थाना क्षेत्र के कलुआ गांव स्थित 'राजपूत' नामक एक होटल में काम करने वाले एक मुस्लिम युवक का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। इस वीडियो में युवक तंदूर में रोटियां सेंकते समय उन पर थूकता हुआ साफ दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया पर मचा हड़कंप जैसे ही यह वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ, पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। वीडियो में दिख रहा है कि युवक रोटियां बेलने के बाद तंदूर में डालने से पहले उन पर बार-बार थूक रहा है। यह वीडियो किसी ग्राहक या राहगीर द्वारा चुपके से बनाया गया बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय ग्रामीणों और हिंदूवादी संगठनों में जबरदस्त उबाल है। लोगों का कहना है कि यह न केवल स्वच्छता के मानकों का उल्लंघन है, बल्कि लोगों की धार्मिक भावनाओं और विश्वास के साथ भी एक सोची-समझी साजिश है। होटल के नाम (राजपूत) और वहां काम करने वाले विशेष समुदाय के युवक की इस हरकत को लेकर पुलिस से कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है। पुलिस की जांच और कार्रवाई शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को संज्ञान में लिया है। पुलिस वीडियो की सत्यता की जांच कर रही है और आरोपी युवक की पहचान कर उसे हिरासत में लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। क्षेत्र में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त एहतियात बरती जा रही है। प्रमुख बिंदु: स्थान: राजपूत होटल, कलुआ गांव (गभाना), अलीगढ़। घटना: तंदूर की रोटी पर थूकने का कृत्य। साक्ष्य: वायरल वीडियो। स्थिति: इलाके में तनाव और गिरफ्तारी की मांग।
अलीगढ़: 'थूक वाली रोटी' का घिनौना वीडियो वायरल, राजपूत होटल में परोसा जा रहा था जहर #Apkiawajdigital विशेष रिपोर्ट: अलीगढ़ से जमीनी हकीकत अलीगढ़/गभाना: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले से एक बेहद शर्मनाक और घृणित मामला सामने आया है। गभाना थाना क्षेत्र के कलुआ गांव स्थित 'राजपूत' नामक एक होटल में काम करने वाले एक मुस्लिम युवक का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। इस वीडियो में युवक तंदूर में रोटियां सेंकते समय उन पर थूकता हुआ साफ दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया पर मचा हड़कंप जैसे ही यह वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ, पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। वीडियो में दिख रहा है कि युवक रोटियां बेलने के बाद तंदूर में डालने से पहले उन पर बार-बार थूक रहा है। यह वीडियो किसी ग्राहक या राहगीर द्वारा चुपके से बनाया गया बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय ग्रामीणों और हिंदूवादी संगठनों में जबरदस्त उबाल है। लोगों का कहना है कि यह न केवल स्वच्छता के मानकों का उल्लंघन है, बल्कि लोगों की धार्मिक भावनाओं और विश्वास के साथ भी एक सोची-समझी साजिश है। होटल के नाम (राजपूत) और वहां काम करने वाले विशेष समुदाय के युवक की इस हरकत को लेकर पुलिस से कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है। पुलिस की जांच और कार्रवाई शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को संज्ञान में लिया है। पुलिस वीडियो की सत्यता की जांच कर रही है और आरोपी युवक की पहचान कर उसे हिरासत में लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। क्षेत्र में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त एहतियात बरती जा रही है। प्रमुख बिंदु: स्थान: राजपूत होटल, कलुआ गांव (गभाना), अलीगढ़। घटना: तंदूर की रोटी पर थूकने का कृत्य। साक्ष्य: वायरल वीडियो। स्थिति: इलाके में तनाव और गिरफ्तारी की मांग।
- #Apkiawajdigital विशेष रिपोर्ट: महोबा से ताज़ा अपडेट महोबा, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के धिकवाहा प्राथमिक विद्यालय में मिड-डे मील के नाम पर बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने का मामला अब तूल पकड़ चुका है। वायरल वीडियो में 10 लीटर पानी की बाल्टी में मात्र एक लीटर दूध मिलाकर बच्चों को परोसने की घिनौनी हकीकत सामने आने के बाद, बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने त्वरित कार्रवाई की है। BSA का कड़ा रुख जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित स्कूल की हेडमास्टर को 'कारण बताओ नोटिस' (Show Cause Notice) जारी किया है। नोटिस में स्पष्ट रूप से पूछा गया है कि "मानकों की अनदेखी कर बच्चों को गुणवत्ताहीन दूध क्यों परोसा जा रहा था?" प्रशासन ने हेडमास्टर को जवाब देने के लिए मात्र 2 दिन (48 घंटे) का समय दिया है। क्या था पूरा मामला? बीते दिनों एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें स्कूल के भीतर बाल्टी भर पानी में दूध के पैकेट उड़ेल कर एक 'सफेद घोल' तैयार किया जा रहा था। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने इस वीडियो को साझा कर सरकार को घेरा था और पूछा था कि क्या यही यूपी के नौनिहालों का भविष्य है ? कार्यवाही की चेतावनी सूत्रों के अनुसार, यदि 2 दिन के भीतर हेडमास्टर का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) किया जा सकता है। साथ ही, स्कूल के अन्य स्टाफ और मिड-डे मील के जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। खबर के मुख्य बिंदु (Quick Glance): दोषी: धिकवाहा प्राथमिक विद्यालय की हेडमास्टर। कार्रवाई: BSA द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी। समय सीमा: 2 दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण अनिवार्य। आरोप: मिड-डे मील मानकों का घोर उल्लंघन और बच्चों के पोषण के साथ धोखाधड़ी। प्रशासनिक प्रतिक्रिया: "मिड-डे मील में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बच्चों का पोषण हमारी प्राथमिकता है। इस मामले में जांच रिपोर्ट के आधार पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।" — बेसिक शिक्षा अधिकारी, महोबा1
- बांदा कलेक्टर परिसर में एनएचएम स्वास्थ्य कर्मचारियों ने किया हंगामा 2 माह से वेतन में मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति से अपने जीवन यापन में बड़ी कठिनाई का सामना करते हुए मांग की अगर 7 दिवस के अंदर समाधान नहीं होता तो नो सैलरी नो वर्क का दिया नारा1
- महाशिवरात्रि से पहले अलर्ट मोड में पुलिस — बामदेवेश्वर मन्दिर की सुरक्षा व्यवस्था का ASP ने लिया जायजा बांदा — आगामी महाशिवरात्रि पर्व को लेकर पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड में नजर आ रहा है। अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज ने नगर मजिस्ट्रेट संदीप केला, क्षेत्राधिकारी नगर मेविस टॉक व क्षेत्राधिकारी यातायात प्रतिज्ञा सिंह के साथ बामदेवेश्वर मन्दिर परिसर का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान साफ-सफाई, रोशनी, सीसीटीवी, महिला-पुरुष अलग कतार, अग्निशमन उपकरण व आपात निकास मार्गों की व्यवस्थाओं को परखा गया। साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु आवागमन मार्ग निर्धारण के निर्देश दिए गए। पुलिस अधिकारियों ने महाशिवरात्रि पर पर्याप्त पुलिस बल तैनाती, ड्रोन व सीसीटीवी निगरानी, महिला सुरक्षा और सुचारू यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, वहीं आमजन से प्रशासनिक गाइडलाइन पालन की अपील की गई।1
- आपको बता दें कि पूरा मामला जिलाधिकारी कार्यालय बांदा से सामने आया है जहां पर आज उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा कर्मचारियो के मानदेय भुगतान में हो रही लगातार देरी के खिलाफ बांदा जिला अधिकारी को संविदा कर्मचारियों ने दिया लिखित शिकायत पत्र ,जिसमें जिला अध्यक्ष डॉ. मिलेन्द्र सिंह और जिला महामंत्री शोभित गुप्ता के हस्ताक्षर हैं। ज्ञापन जिलाधिकारी बांदा के माध्यम से भेजा गया है। प्रदेश भर में करीब 1.50 लाख संविदा कर्मचारी जुलाई 2025 से मासिक मानदेय समय पर नहीं पा रहे हैं। एक माह का भुगतान 2 माह या अधिक समय बाद मिल रहा है। SNA Sparsh पोर्टल के बाद 'लिमिट शून्य', 'बिल फेल' या 'बजट अनुपलब्धता' जैसे कारण बताए जा रहे हैं। इससे कर्मचारियों को गंभीर आर्थिक व मानसिक संकट का सामना करना पड़ रहा है; कुछ मामलों में आत्महत्या के प्रयास भी सामने आए हैं। संघ की प्रमुख मांगें: सभी संविदा कर्मचारियों का मानदेय हर माह की 7 तारीख तक अनिवार्य भुगतान हो। तकनीकी/प्रशासनिक समस्याओं (बिल फेल, लिमिट आदि) का स्थायी समाधान के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी हों। सभी लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान हो। भविष्य में विलंब न हो, इसके लिए समयबद्ध भुगतान की SOP जारी की जाए। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि 7 तारीख तक भुगतान सुनिश्चित नहीं हुआ, तो बांदा जिले के सभी संविदा कर्मचारी 'नो पे - नो वर्क' (No Pay - No Work) का रास्ता अपनाएंगे। यह समस्या पूरे उत्तर प्रदेश में व्याप्त है, जहां विभिन्न जिलों (जैसे बलिया, कुशीनगर, सोनभद्र, सुल्तानपुर, हरदोई आदि) में इसी तरह के प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं। प्रांतीय स्तर पर भी संगठन ने कई बार वार्ता और पत्राचार किया, लेकिन कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है।1
- हालात ऐसे हैं कि योगी सरकार, NGT और सुप्रीम कोर्ट के आदेश भी यहां बेअसर नजर आ रहे हैं। अवैध खनन माफिया खुलेआम नियमों को दरकिनार कर काम कर रहे हैं और जिम्मेदार अधिकारियों की सह पर आदेशों को पैरों तले कुचला जा रहा है। मुख्यमंत्री पोर्टल IGRS पर लगातार शिकायतें दर्ज होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई जमीन पर दिखाई नहीं दे रही। खनिज विभाग के खनिज अधिकारी राज रंजन और खान निरीक्षक गौरव गुप्ता द्वारा लगाई जा रही आख्या सवालों के घेरे में है। ग्राउंड जीरो की तस्वीरें हालात की गंभीरता खुद बयान कर रही हैं और प्रशासनिक दावों और जमीनी सच्चाई के बीच फर्क साफ दिखा रही हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि साड़ी खंड 77 में चल रहे अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई कब होती है और IGRS पर भ्रामक आख्या लगाने के मामलों पर कब जवाबदेही तय होती है। ग्राउंड जीरो से आशीष शुक्ला की रिपोर्ट, बांदा।1
- बांदा। जन समस्याओं को प्रमुखता से उठाने के उद्देश्य से चित्रांश टीवी पर एक विशेष कार्यक्रम “रविवार जन संवाद – जनता की आवाज़” की शुरुआत होने जा रही है। कार्यक्रम का संचालन श्रीकांत श्रीवास्तव द्वारा किया जाएगा। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गांव, कस्बे और शहरों की आम जनता की समस्याओं को एक सशक्त मंच प्रदान करना है। सड़क, पानी, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित किसी भी प्रकार की जन समस्या को इस मंच के माध्यम से उठाया जाएगा, ताकि संबंधित प्रशासन तक जनता की आवाज़ पहुंचाई जा सके। कार्यक्रम की विशेषता यह होगी कि इसमें ना पक्ष होगा, ना विपक्ष — केवल जनता का पक्ष रखा जाएगा।1
- रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज, बांदा प्रकरण बांदा। जिले में कथित चिकित्सकीय लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें 5 वर्षीय मासूम बच्ची को अपना पैर गंवाना पड़ा। पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई है। क्या है पूरा मामला? पीड़ित परिवार: ग्राम पडुई (थाना कोतवाली नगर), जनपद बांदा निवासी अनिल कुमार घटना की तारीख: 23 दिसंबर 2025 घटना: छत से गिरने के कारण बच्ची मानवी की बाएं पैर की जांघ की हड्डी टूट गई। प्रारंभिक इलाज: रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज, बांदा में भर्ती कराया गया। आरोप क्या हैं? पिता का आरोप है कि इलाज के दौरान डॉक्टर विनीत सिंह ने पैर को अत्यधिक कसकर बांध दिया। कथित रूप से रक्त संचार रुकने से नसें प्रभावित हुईं। समय पर उचित उपचार न मिलने से स्थिति बिगड़ती गई। 29 दिसंबर को ऑपरेशन के दौरान बच्ची को किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ (केजीएमयू) रेफर किया गया। वहां पैर काटने की सलाह दी गई। बाद में परिवार ने ओएमआई सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में इलाज कराया। हड्डी जोड़ने का ऑपरेशन हुआ, लेकिन संक्रमण बढ़ने के कारण अंततः बच्ची का पैर काटना पड़ा। प्रशासनिक कार्रवाई 12 फरवरी 2026 को पीड़ित पिता ने जिलाधिकारी को लिखित शिकायत दी। डॉक्टर के खिलाफ आपराधिक लापरवाही में एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने जांच के आदेश दिए हैं। परिवार का आरोप है कि 15 दिन बीतने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। न्याय न मिलने पर न्यायालय की शरण लेने की चेतावनी दी गई है। यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्था और चिकित्सकीय जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच और संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं।2
- #Apkiawajdigital विशेष राजनीतिक-आर्थिक रिपोर्ट नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर कड़ा प्रहार किया है। राहुल गांधी ने अमेरिका के साथ हुई हालिया टैरिफ शर्तों को भारतीय टेक्सटाइल (कपड़ा) उद्योग के लिए घातक बताते हुए इसे प्रधानमंत्री का 'आत्मसमर्पण' करार दिया है। 18% बनाम 0% का गणित राहुल गांधी ने एक तुलनात्मक आंकड़ा पेश करते हुए कहा कि वैश्विक बाजार में भारत को भारी नुकसान होने वाला है। उन्होंने तर्क दिया: > "टेक्सटाइल की रेस में भारत पर 18% टैरिफ की भारी बेड़ियाँ डाल दी गई हैं, जबकि हमारा पड़ोसी देश बांग्लादेश 0% टैरिफ के साथ खुले मैदान में दौड़ रहा है। यह कैसी प्रतियोगिता है जहाँ हमारे हाथ पहले ही बांध दिए गए हैं?" > "मौत का फरमान" राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि डोनाल्ड ट्रंप की शर्तों के सामने मोदी सरकार ने घुटने टेक दिए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यह फैसला भारतीय बुनकरों, मिल मालिकों और लाखों श्रमिकों के लिए 'मौत का फरमान' साबित होगा। उनके अनुसार, उच्च टैरिफ के कारण भारतीय कपड़ा अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगा हो जाएगा, जिससे निर्यात गिरना तय है। विपक्ष का तीखा सवाल राहुल गांधी ने सरकार से पूछा है कि क्या हम रेस शुरू होने से पहले ही हार स्वीकार कर रहे हैं? उन्होंने मांग की है कि सरकार स्पष्ट करे कि आखिर किन शर्तों के तहत भारतीय हितों की बलि चढ़ाई गई है और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले भारत को कमजोर क्यों होने दिया गया। तुलनात्मक विश्लेषण (एक नज़र में): | देश | टैरिफ दर (अनुमानित) | बाजार की स्थिति | |---|---|---| | भारत | 18% | टैरिफ के बोझ से व्यापार में कठिनाई | | बांग्लादेश | 0% | खुले बाजार का लाभ और सस्ता निर्यात | प्रभाव: निर्यात में गिरावट: भारतीय कपड़े की मांग विदेशों में कम हो सकती है। बेरोजगारी: टेक्सटाइल सेक्टर में काम करने वाले करोड़ों लोगों पर संकट। प्रतिस्पर्धा: बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों का दबदबा बढ़ेगा।1