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सुपौल जिले में एक सड़क पर मिट्टी डाल दिए जाने से स्थानीय लोगों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति के कारण बारिश का सारा पानी भी सड़क पर जमा हो जाता है, जिससे समस्या और बढ़ जाती है। जब मिट्टी डालने वाले व्यक्ति से इस बारे में बात की जाती है, तो वह यह कहकर जवाब देता है कि यह सड़क उसकी निजी जमीन पर बनी है और वह अपनी मर्जी के अनुसार ही काम करेगा। शिकायतकर्ता के अनुसार, यह व्यक्ति चौबीसों घंटे शराब के नशे में रहता है। प्रभावित लोगों ने इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए तत्काल मदद की गुहार लगाई है।

12 hrs ago
user_Anjeet kumar
Anjeet kumar
सुपौल, सुपौल, बिहार•
12 hrs ago

सुपौल जिले में एक सड़क पर मिट्टी डाल दिए जाने से स्थानीय लोगों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति के कारण बारिश का सारा पानी भी सड़क पर जमा हो जाता है, जिससे समस्या और बढ़ जाती है। जब मिट्टी डालने वाले व्यक्ति से इस बारे में बात की जाती है, तो वह यह कहकर जवाब देता है कि यह सड़क उसकी निजी जमीन पर बनी है और वह अपनी मर्जी के अनुसार ही काम करेगा। शिकायतकर्ता के अनुसार, यह व्यक्ति चौबीसों घंटे शराब के नशे में रहता है। प्रभावित लोगों ने इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए तत्काल मदद की गुहार लगाई है।

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  • सुपौल जिले में एक सड़क पर मिट्टी डाल दिए जाने से स्थानीय लोगों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति के कारण बारिश का सारा पानी भी सड़क पर जमा हो जाता है, जिससे समस्या और बढ़ जाती है। जब मिट्टी डालने वाले व्यक्ति से इस बारे में बात की जाती है, तो वह यह कहकर जवाब देता है कि यह सड़क उसकी निजी जमीन पर बनी है और वह अपनी मर्जी के अनुसार ही काम करेगा। शिकायतकर्ता के अनुसार, यह व्यक्ति चौबीसों घंटे शराब के नशे में रहता है। प्रभावित लोगों ने इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए तत्काल मदद की गुहार लगाई है।
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    सुपौल जिले में एक सड़क पर मिट्टी डाल दिए जाने से स्थानीय लोगों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति के कारण बारिश का सारा पानी भी सड़क पर जमा हो जाता है, जिससे समस्या और बढ़ जाती है। जब मिट्टी डालने वाले व्यक्ति से इस बारे में बात की जाती है, तो वह यह कहकर जवाब देता है कि यह सड़क उसकी निजी जमीन पर बनी है और वह अपनी मर्जी के अनुसार ही काम करेगा। शिकायतकर्ता के अनुसार, यह व्यक्ति चौबीसों घंटे शराब के नशे में रहता है। प्रभावित लोगों ने इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए तत्काल मदद की गुहार लगाई है।
    user_Anjeet kumar
    Anjeet kumar
    सुपौल, सुपौल, बिहार•
    12 hrs ago
  • सुपौल जिले के पिपरा बाजार में बिजली की गंभीर समस्या बनी हुई है, जहां सुबह 1 बजे से बिजली की आपूर्ति पूरी तरह ठप है। शाम के 7 बजने तक भी बिजली नहीं आई है, जिसके कारण स्थानीय लोग लगभग 18 घंटे से बिजली के बिना परेशान हैं। निवासियों ने तत्काल बिजली बहाली की मांग की है और इस पूरे मामले पर 'बरस बाद कार्रवाई' किए जाने की अपील की है।
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    सुपौल जिले के पिपरा बाजार में बिजली की गंभीर समस्या बनी हुई है, जहां सुबह 1 बजे से बिजली की आपूर्ति पूरी तरह ठप है। शाम के 7 बजने तक भी बिजली नहीं आई है, जिसके कारण स्थानीय लोग लगभग 18 घंटे से बिजली के बिना परेशान हैं। निवासियों ने तत्काल बिजली बहाली की मांग की है और इस पूरे मामले पर 'बरस बाद कार्रवाई' किए जाने की अपील की है।
    user_Satyam King
    Satyam King
    पिपरा, सुपौल, बिहार•
    38 min ago
  • प्राणपुर में मै० रेणु संतोष पेट्रोलियम का भव्य शुभारंभ किया गया है। यह प्रतिष्ठान अब अपनी सेवाएं प्रदान करने के लिए तैयार है।
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    प्राणपुर में मै० रेणु संतोष पेट्रोलियम का भव्य शुभारंभ किया गया है। यह प्रतिष्ठान अब अपनी सेवाएं प्रदान करने के लिए तैयार है।
    user_Mankhush kumar
    Mankhush kumar
    Local News Reporter नौहट्टा, सहरसा, बिहार•
    7 hrs ago
  • Mari batizi khana bana rahi hai pakode ki ladai isliye
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    Mari batizi khana bana rahi hai pakode ki ladai isliye
    user_Vijay kumar
    Vijay kumar
    Artist Tribeniganj, Supaul•
    9 hrs ago
  • ग्रामीण इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के सरकारी दावों के उलट, मधेपुरा जिले के कई उपस्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति बेहद खराब है। घैलाढ़ प्रखंड स्थित भान टेकती पंचायत और सदर प्रखंड के मिठाही पंचायत के उपस्वास्थ्य केंद्रों की तस्वीरें सामने आई हैं, जहाँ स्वास्थ्यकर्मी समय पर नहीं पहुँच रहे हैं और महंगे चिकित्सीय उपकरण बिना उपयोग के धूल फांक रहे हैं, जिससे मरीजों को इलाज और जांच की बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत इन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों में एक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ), दो एएनएम और एक पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ता की तैनाती का प्रावधान है। हालांकि, जमीनी हकीकत इससे काफी अलग है। भान टेकती उपस्वास्थ्य केंद्र में सुबह साढ़े दस बजे तक कोई स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं मिला, जबकि सीएचओ और एएनएम दोनों केंद्र परिसर के ऊपरी हिस्से में ही रहते हैं। काफी देर बाद एएनएम अमला कुमारी अस्पताल पहुँचीं, लेकिन अन्य स्वास्थ्यकर्मी नदारद रहे। वहीं, मिठाही उपस्वास्थ्य केंद्र में केवल सीएचओ सोनम कुमारी ही मौजूद थीं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति उजागर हुई। स्थानीय निवासी अशोक कुमार ने बताया कि अस्पताल में सिर्फ दवा बांटने का काम होता है और अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलती हैं, उन्होंने सरकार से सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि मरीजों को बिना किसी समुचित जांच के दवाइयां दे दी जाती हैं, और जांच उपकरण व प्रसव कक्ष में रखे महंगे चिकित्सीय उपकरण भी बेकार पड़े हुए हैं। ग्रामीण उत्तमलाल यादव ने कहा कि मरीजों की जांच की कोई बेहतर व्यवस्था नहीं है और बिना जांच के ही दवा देने से लोगों को परेशानी होती है। लोगों ने केंद्रों में साफ-सफाई की व्यवस्था को भी असंतोषजनक बताया, जिससे दवाइयों के रखरखाव से लेकर मरीजों के उपचार तक कई स्तरों पर लापरवाही साफ दिख रही है। मधेपुरा के सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार ने स्वीकार किया कि कुछ स्थानों पर कमियाँ मौजूद हैं, जिन्हें दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी के बावजूद व्यवस्था सुधारने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। हालांकि, सरकार के ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के दावों के बीच, मधेपुरा के इन उपस्वास्थ्य केंद्रों की बदहाली गंभीर सवाल खड़े कर रही है कि जब स्वास्थ्यकर्मी समय पर उपलब्ध नहीं होंगे और संसाधनों का उपयोग नहीं होगा, तो ग्रामीणों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं कैसे पहुंचेंगी। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई करता है।
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    ग्रामीण इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के सरकारी दावों के उलट, मधेपुरा जिले के कई उपस्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति बेहद खराब है। घैलाढ़ प्रखंड स्थित भान टेकती पंचायत और सदर प्रखंड के मिठाही पंचायत के उपस्वास्थ्य केंद्रों की तस्वीरें सामने आई हैं, जहाँ स्वास्थ्यकर्मी समय पर नहीं पहुँच रहे हैं और महंगे चिकित्सीय उपकरण बिना उपयोग के धूल फांक रहे हैं, जिससे मरीजों को इलाज और जांच की बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत इन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों में एक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ), दो एएनएम और एक पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ता की तैनाती का प्रावधान है। हालांकि, जमीनी हकीकत इससे काफी अलग है। भान टेकती उपस्वास्थ्य केंद्र में सुबह साढ़े दस बजे तक कोई स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं मिला, जबकि सीएचओ और एएनएम दोनों केंद्र परिसर के ऊपरी हिस्से में ही रहते हैं। काफी देर बाद एएनएम अमला कुमारी अस्पताल पहुँचीं, लेकिन अन्य स्वास्थ्यकर्मी नदारद रहे। वहीं, मिठाही उपस्वास्थ्य केंद्र में केवल सीएचओ सोनम कुमारी ही मौजूद थीं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति उजागर हुई।

स्थानीय निवासी अशोक कुमार ने बताया कि अस्पताल में सिर्फ दवा बांटने का काम होता है और अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलती हैं, उन्होंने सरकार से सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि मरीजों को बिना किसी समुचित जांच के दवाइयां दे दी जाती हैं, और जांच उपकरण व प्रसव कक्ष में रखे महंगे चिकित्सीय उपकरण भी बेकार पड़े हुए हैं। ग्रामीण उत्तमलाल यादव ने कहा कि मरीजों की जांच की कोई बेहतर व्यवस्था नहीं है और बिना जांच के ही दवा देने से लोगों को परेशानी होती है। लोगों ने केंद्रों में साफ-सफाई की व्यवस्था को भी असंतोषजनक बताया, जिससे दवाइयों के रखरखाव से लेकर मरीजों के उपचार तक कई स्तरों पर लापरवाही साफ दिख रही है।

मधेपुरा के सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार ने स्वीकार किया कि कुछ स्थानों पर कमियाँ मौजूद हैं, जिन्हें दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी के बावजूद व्यवस्था सुधारने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। हालांकि, सरकार के ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के दावों के बीच, मधेपुरा के इन उपस्वास्थ्य केंद्रों की बदहाली गंभीर सवाल खड़े कर रही है कि जब स्वास्थ्यकर्मी समय पर उपलब्ध नहीं होंगे और संसाधनों का उपयोग नहीं होगा, तो ग्रामीणों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं कैसे पहुंचेंगी। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई करता है।
    user_RAMAN KUMAR
    RAMAN KUMAR
    REPORTER मधेपुरा, मधेपुरा, बिहार•
    11 hrs ago
  • सौर बाजार प्रखंड क्षेत्र के चंदौर पूर्वी पंचायत अंतर्गत मुख्य सड़क मार्ग स्थित बीडीओ चौक पर वेपर लाइट न होने के कारण रात के समय वाहन चालकों और पैदल राहगीरों को आवागमन में हमेशा दुर्घटना का खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस मुख्य सड़क मार्ग से दो टोलों के लिए सड़कें निकलती हैं, जहां देर रात तक लोगों का आना-जाना लगा रहता है। अंधेरे के कारण मुख्य सड़क मार्ग से इन अंदरूनी सड़कों पर प्रवेश करते समय लोगों को रास्ता ठीक से दिखाई नहीं देता, जिससे कई बार वे दुर्घटनाओं का शिकार होने से बाल-बाल बचे हैं। इसके अतिरिक्त, मुख्य सड़क मार्ग से पूर्व दिशा की ओर दर्जनों किसानों के खेत हैं। किसान अपनी खेतीबाड़ी के काम से इस रास्ते से आते-जाते रहते हैं और कभी-कभी उन्हें देर रात तक भी खेतों में काम करना पड़ता है। इन परिस्थितियों को देखते हुए, लोगों ने इस सड़क मार्ग के किनारे वेपर लाइट लगाने की पुरजोर मांग की है, ताकि सभी को आवागमन में काफी सुविधा मिल सके और दुर्घटनाओं का जोखिम कम हो।
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    सौर बाजार प्रखंड क्षेत्र के चंदौर पूर्वी पंचायत अंतर्गत मुख्य सड़क मार्ग स्थित बीडीओ चौक पर वेपर लाइट न होने के कारण रात के समय वाहन चालकों और पैदल राहगीरों को आवागमन में हमेशा दुर्घटना का खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस मुख्य सड़क मार्ग से दो टोलों के लिए सड़कें निकलती हैं, जहां देर रात तक लोगों का आना-जाना लगा रहता है। अंधेरे के कारण मुख्य सड़क मार्ग से इन अंदरूनी सड़कों पर प्रवेश करते समय लोगों को रास्ता ठीक से दिखाई नहीं देता, जिससे कई बार वे दुर्घटनाओं का शिकार होने से बाल-बाल बचे हैं।

इसके अतिरिक्त, मुख्य सड़क मार्ग से पूर्व दिशा की ओर दर्जनों किसानों के खेत हैं। किसान अपनी खेतीबाड़ी के काम से इस रास्ते से आते-जाते रहते हैं और कभी-कभी उन्हें देर रात तक भी खेतों में काम करना पड़ता है। इन परिस्थितियों को देखते हुए, लोगों ने इस सड़क मार्ग के किनारे वेपर लाइट लगाने की पुरजोर मांग की है, ताकि सभी को आवागमन में काफी सुविधा मिल सके और दुर्घटनाओं का जोखिम कम हो।
    user_मिथिलेश कुमार
    मिथिलेश कुमार
    Teacher सौर बाजार, सहरसा, बिहार•
    2 hrs ago
  • K. N. Fuel Center का विधिवत शुभारंभ माननीय सांसद के कर-कमलों से संपन्न हुआ है।
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    K. N. Fuel Center का विधिवत शुभारंभ माननीय सांसद के कर-कमलों से संपन्न हुआ है।
    user_Mankhush kumar
    Mankhush kumar
    Local News Reporter नौहट्टा, सहरसा, बिहार•
    20 hrs ago
  • झंझारपुर के लखनौर थाना क्षेत्र के गंगापुर में एक दुखद घटना सामने आई है, जहाँ कमला बलान नदी में डूबने से 65 वर्षीय किसान नारायण यादव लापता हो गए हैं। यह हादसा शुक्रवार को तब हुआ जब नारायण यादव अपनी भैंस को नदी के पार बघार ले जा रहे थे। इसी दौरान अचानक भैंस की रस्सी उनके हाथ से छूट गई, जिसके बाद वे खुद को संभाल नहीं पाए और गहरे पानी में डूब गए। इस घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन तुरंत हरकत में आया और बीडीओ राजेश्वर राम व लखनौर थानाध्यक्ष बेमिसाल कुमार तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे। हालांकि, अनुमंडल स्तर पर आपदा से निपटने के लिए त्वरित बचाव संसाधनों की भारी कमी देखने को मिली, जिसके कारण SDRF की टीम को मौके पर पहुंचने में करीब 5 घंटे की लंबी देरी हुई। इस भारी विलंब को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है, उनका आरोप है कि यदि अनुमंडल स्तर पर ही आपदा राहत एवं बचाव की पर्याप्त व्यवस्था होती, तो रेस्क्यू ऑपरेशन बहुत पहले शुरू किया जा सकता था। ग्रामीण अब प्रशासन की इस लचर व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। काफी इंतजार के बाद, SDRF की टीम आखिरकार मौके पर पहुंची और तुरंत नदी में लापता किसान नारायण यादव की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। घटना के बाद से पूरे इलाके में मायूसी का माहौल छाया हुआ है और सभी की निगाहें नदी किनारे चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हैं, ग्रामीण ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं कि किसान का जल्द से जल्द कोई सुराग मिल सके।
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    झंझारपुर के लखनौर थाना क्षेत्र के गंगापुर में एक दुखद घटना सामने आई है, जहाँ कमला बलान नदी में डूबने से 65 वर्षीय किसान नारायण यादव लापता हो गए हैं। यह हादसा शुक्रवार को तब हुआ जब नारायण यादव अपनी भैंस को नदी के पार बघार ले जा रहे थे। इसी दौरान अचानक भैंस की रस्सी उनके हाथ से छूट गई, जिसके बाद वे खुद को संभाल नहीं पाए और गहरे पानी में डूब गए।

इस घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन तुरंत हरकत में आया और बीडीओ राजेश्वर राम व लखनौर थानाध्यक्ष बेमिसाल कुमार तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे। हालांकि, अनुमंडल स्तर पर आपदा से निपटने के लिए त्वरित बचाव संसाधनों की भारी कमी देखने को मिली, जिसके कारण SDRF की टीम को मौके पर पहुंचने में करीब 5 घंटे की लंबी देरी हुई। इस भारी विलंब को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है, उनका आरोप है कि यदि अनुमंडल स्तर पर ही आपदा राहत एवं बचाव की पर्याप्त व्यवस्था होती, तो रेस्क्यू ऑपरेशन बहुत पहले शुरू किया जा सकता था। ग्रामीण अब प्रशासन की इस लचर व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।

काफी इंतजार के बाद, SDRF की टीम आखिरकार मौके पर पहुंची और तुरंत नदी में लापता किसान नारायण यादव की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। घटना के बाद से पूरे इलाके में मायूसी का माहौल छाया हुआ है और सभी की निगाहें नदी किनारे चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हैं, ग्रामीण ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं कि किसान का जल्द से जल्द कोई सुराग मिल सके।
    user_Dharmendra Jha
    Dharmendra Jha
    Local News Reporter झंझारपुर, मधुबनी, बिहार•
    1 hr ago
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