लखीमपुर खीरी में न्याय या अन्याय? आदेश के बाद उजड़ा गरीब का घर, परिवार टंकी पर चढ़ा — बच्चों के सिर से छत छिनी लखीमपुर खीरी। लखीमपुर खीरी में न्याय या अन्याय? आदेश के बाद उजड़ा गरीब का घर, परिवार टंकी पर चढ़ा — बच्चों के सिर से छत छिनी लखीमपुर खीरी। जिले में सोमवार को एक ऐसा दिल दहला देने वाला दृश्य सामने आया जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और न्यायिक आदेशों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए। न्यायालय के आदेश के बाद जब घर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हुई तो हसनपुर कटौली निवासी बृजेश सिंह का परिवार पूरी तरह टूट गया। बताया जा रहा है कि घर गिराए जाने की खबर मिलते ही बृजेश सिंह अपने परिवार के सात सदस्यों के साथ पानी की ऊंची टंकी पर चढ़ गए। परिवार के साथ खड़े बृजेश सिंह का साफ कहना था— “अगर हमें रहने के लिए जमीन नहीं दी गई तो हम यहीं से कूदकर आत्महत्या कर लेंगे।” इस घटना की खबर मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया। एक तरफ न्यायालय के आदेश का दबाव था, तो दूसरी तरफ एक पूरे परिवार की जान दांव पर लगी हुई थी। काफी देर तक चले समझाने-बुझाने के बाद आखिरकार प्रशासन को बृजेश सिंह की मांग माननी पड़ी। प्रशासन की ओर से आश्वासन मिलने के बाद ही परिवार टंकी से नीचे उतरा। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब बुलडोजर चला तो एक घर ही नहीं टूटा, बल्कि कई मासूम बच्चों के सिर से छत छिन गई। वही बच्चे, जिन्होंने शायद अभी तक यह भी नहीं समझा कि अदालत के आदेश और प्रशासनिक कार्रवाई क्या होती है। उनके लिए तो बस इतना सच है— कल तक जहां उनका घर था, आज वहां मलबा पड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते परिवार को आश्वासन न दिया जाता तो यह मामला एक भयानक त्रासदी में बदल सकता था। सबसे बड़ा सवाल अब यही उठ रहा है— क्या किसी आदेश को लागू करते समय यह नहीं सोचा जाना चाहिए कि उसके पीछे एक परिवार, मासूम बच्चे और उनकी जिंदगी भी जुड़ी होती है? आज बृजेश सिंह का घर भले ही मलबे में बदल गया हो, लेकिन इस घटना ने पूरे जिले में एक बहस जरूर छेड़ दी है— क्या कानून की सख्ती में इंसानियत की जगह बची है या नहीं? हक की आवाज न्यूज़ चैनल प्रधान संपादक ऑल इंडिया प्रेस महापात्रा दिनेश आचार्य 8948983388
लखीमपुर खीरी में न्याय या अन्याय? आदेश के बाद उजड़ा गरीब का घर, परिवार टंकी पर चढ़ा — बच्चों के सिर से छत छिनी लखीमपुर खीरी। लखीमपुर खीरी में न्याय या अन्याय? आदेश के बाद उजड़ा गरीब का घर, परिवार टंकी पर चढ़ा — बच्चों के सिर से छत छिनी लखीमपुर खीरी। जिले में सोमवार को एक ऐसा दिल दहला देने वाला दृश्य सामने आया जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और न्यायिक आदेशों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए। न्यायालय के आदेश के बाद जब घर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हुई तो हसनपुर कटौली निवासी बृजेश सिंह का परिवार पूरी तरह टूट गया। बताया जा रहा है कि घर गिराए जाने की खबर मिलते ही बृजेश सिंह अपने परिवार के सात सदस्यों के साथ पानी की ऊंची टंकी पर चढ़ गए। परिवार के साथ खड़े बृजेश सिंह का साफ कहना था— “अगर हमें रहने के लिए जमीन नहीं दी गई तो हम यहीं से कूदकर आत्महत्या कर लेंगे।” इस घटना की खबर मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया। एक तरफ न्यायालय के आदेश का दबाव था, तो दूसरी तरफ एक पूरे परिवार की जान दांव पर लगी हुई थी। काफी देर तक चले समझाने-बुझाने के बाद आखिरकार प्रशासन को बृजेश सिंह की मांग माननी पड़ी। प्रशासन की ओर से आश्वासन मिलने के बाद ही परिवार टंकी से नीचे उतरा। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब बुलडोजर चला तो एक घर ही नहीं टूटा, बल्कि कई मासूम बच्चों के सिर से छत छिन गई। वही बच्चे, जिन्होंने शायद अभी तक यह भी नहीं समझा कि अदालत के आदेश और प्रशासनिक कार्रवाई क्या होती है। उनके लिए तो बस इतना सच है— कल तक जहां उनका घर था, आज वहां मलबा पड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते परिवार को आश्वासन न दिया जाता तो यह मामला एक भयानक त्रासदी में बदल सकता था। सबसे बड़ा सवाल अब यही उठ रहा है— क्या किसी आदेश को लागू करते समय यह नहीं सोचा जाना चाहिए कि उसके पीछे एक परिवार, मासूम बच्चे और उनकी जिंदगी भी जुड़ी होती है? आज बृजेश सिंह का घर भले ही मलबे में बदल गया हो, लेकिन इस घटना ने पूरे जिले में एक बहस जरूर छेड़ दी है— क्या कानून की सख्ती में इंसानियत की जगह बची है या नहीं? हक की आवाज न्यूज़ चैनल प्रधान संपादक ऑल इंडिया प्रेस महापात्रा दिनेश आचार्य 8948983388
- बाराबंकी — जिले में ऑनलाइन ठगी का एक और मामला सामने आया है, जहां सस्ते डिजाइनर लहंगे के लालच में एक महिला साइबर ठगों का शिकार हो गई। जानकारी के अनुसार, गीता नाम की महिला को फेसबुक पर एक आकर्षक विज्ञापन दिखाई दिया, जिसमें महज 1400 रुपये में डिजाइनर लहंगा देने का दावा किया गया था। ऑफर से प्रभावित होकर महिला ने दिए गए लिंक के जरिए ऑर्डर कर दिया। ऑर्डर के कुछ समय बाद महिला के पास एक कॉल आई, जिसमें कॉलर ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए पहले 250 रुपये “वेरिफिकेशन” के नाम पर मांगे। इसके बाद आरोपी ने लगातार फोन कर डराया-धमकाया और अलग-अलग बहानों से पैसे मांगता रहा। डर के माहौल में महिला से करीब 13 हजार रुपये वसूल लिए गए। जब तक महिला को ठगी का एहसास हुआ, तब तक आरोपी संपर्क से बाहर हो चुका था। पीड़िता ने मामले की शिकायत पुलिस से की है, जिसके बाद जांच शुरू कर दी गई है। यह घटना एक बार फिर सोशल मीडिया पर बढ़ते साइबर फ्रॉड के खतरे को उजागर करती है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे फेसबुक या अन्य प्लेटफॉर्म पर मिले संदिग्ध लिंक से खरीदारी करने से बचें और किसी भी अनजान कॉलर को पैसे न भेजें।1
- लखीमपुर खीरी में न्याय या अन्याय? आदेश के बाद उजड़ा गरीब का घर, परिवार टंकी पर चढ़ा — बच्चों के सिर से छत छिनी लखीमपुर खीरी। जिले में सोमवार को एक ऐसा दिल दहला देने वाला दृश्य सामने आया जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और न्यायिक आदेशों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए। न्यायालय के आदेश के बाद जब घर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हुई तो हसनपुर कटौली निवासी बृजेश सिंह का परिवार पूरी तरह टूट गया। बताया जा रहा है कि घर गिराए जाने की खबर मिलते ही बृजेश सिंह अपने परिवार के सात सदस्यों के साथ पानी की ऊंची टंकी पर चढ़ गए। परिवार के साथ खड़े बृजेश सिंह का साफ कहना था— “अगर हमें रहने के लिए जमीन नहीं दी गई तो हम यहीं से कूदकर आत्महत्या कर लेंगे।” इस घटना की खबर मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया। एक तरफ न्यायालय के आदेश का दबाव था, तो दूसरी तरफ एक पूरे परिवार की जान दांव पर लगी हुई थी। काफी देर तक चले समझाने-बुझाने के बाद आखिरकार प्रशासन को बृजेश सिंह की मांग माननी पड़ी। प्रशासन की ओर से आश्वासन मिलने के बाद ही परिवार टंकी से नीचे उतरा। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब बुलडोजर चला तो एक घर ही नहीं टूटा, बल्कि कई मासूम बच्चों के सिर से छत छिन गई। वही बच्चे, जिन्होंने शायद अभी तक यह भी नहीं समझा कि अदालत के आदेश और प्रशासनिक कार्रवाई क्या होती है। उनके लिए तो बस इतना सच है— कल तक जहां उनका घर था, आज वहां मलबा पड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते परिवार को आश्वासन न दिया जाता तो यह मामला एक भयानक त्रासदी में बदल सकता था। सबसे बड़ा सवाल अब यही उठ रहा है— क्या किसी आदेश को लागू करते समय यह नहीं सोचा जाना चाहिए कि उसके पीछे एक परिवार, मासूम बच्चे और उनकी जिंदगी भी जुड़ी होती है? आज बृजेश सिंह का घर भले ही मलबे में बदल गया हो, लेकिन इस घटना ने पूरे जिले में एक बहस जरूर छेड़ दी है— क्या कानून की सख्ती में इंसानियत की जगह बची है या नहीं? हक की आवाज न्यूज़ चैनल प्रधान संपादक ऑल इंडिया प्रेस महापात्रा दिनेश आचार्य 89489833881
- 🚨 अफवाहों से बचें, जिम्मेदार बनें 🚨 आजकल LPG सिलेंडर, पेट्रोल-डीजल को लेकर फैल रही अफवाहों की वजह से लोग अनावश्यक लाइन में लग रहे हैं। 👉 याद रखें: • सिलेंडर समय से पहले बुक करें, घर तक डिलीवरी मिलेगी • पेट्रोल-डीजल जरूरत के हिसाब से ही लें • स्टॉक करने की आदत से दूसरों को परेशानी होती है ⚠️ घबराहट नहीं, समझदारी जरूरी है अफवाहों में आकर लिया गया फैसला देश और समाज दोनों को नुकसान पहुंचाता है। 🇮🇳 जिम्मेदार नागरिक बनें — यही सच्ची देशभक्ति है 🗣️ — Yogi Adityanath #अफवाह_से_सावधान #जिम्मेदार_नागरिक #LPG #PetrolDiesel #देशहित1
- 🌺 नवरात्रि में कन्या भोज का पावन आयोजन 🌺 नवरात्रि के पावन अवसर पर छोटी-छोटी कन्याओं को कन्या भोज कराने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से कन्याओं का पूजन कर उन्हें भोजन कराया और आशीर्वाद प्राप्त किया। कन्या भोज हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है, जिसमें कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनकी सेवा की जाती है। पूरे कार्यक्रम में भक्ति और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला। 📺 हक की आवाज न्यूज़ चैनल ✍️ प्रधान संपादक: सन्नो आचार्य1
- लखीमपुर खीरी। चैत्र नवरात्रि की नवमी पर शुक्रवार को धौरहरा कस्बे में देवी मंदिरों और घरों में भक्तों ने हवन-पूजन किया। इस अवसर पर मां भगवती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। भक्तों ने मंत्रों का जाप किया, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। मंदिरों में घंटे और शंख की ध्वनि से पवित्रता बढ़ गई। राम मंदिरों में भी श्रद्धालुओं ने दर्शन और पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं ने कन्या पूजन भी किया। उन्होंने कन्याओं को भोजन कराया और दक्षिणा देकर आशीर्वाद प्राप्त किया। कस्बे के प्रमुख मंदिरों जैसे माता थाने मंदिर, श्री राम वाटिका धाम में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ी। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग श्रद्धालु फूल, माला, अगरबत्ती, कपूर और नारियल लेकर मंदिरों में पहुंचे। और कस्बे के कई मंदिरों में भी पूजा की और जल चढ़ाकर खीर-पुरी का भोग अर्पित किया। रामनवमी के शुभ अवसर कस्बे में स्थित श्री राम नवमी मंदिर प्रांगण में श्री राम लला के जन्मोत्सव की कथावाचक पण्डित आशुतोष पांडेय ने कथा सुनाई, इस दौरान कथा में पहुंचे सैकड़ों भक्त राम जन्म की बधाई सुनकर झूमते नजर आए3
- लखीमपुर खीरी के गौरीफंटा थाना क्षेत्र के अंतर्गत ड्राइव को बोनट पर लटका कर गाड़ी दौड़ाने के मामले में आया सी ओ पलिया का बयान1
- #लखीमपुर खीरी में एक तरफ किसान दिनभर तपती धूप में सिलेंडर और डीजल पेट्रोल की लाइन में लगकर गए सिलिंडर प्राप्त करते हैं तो वहीं एजेंसी मालिकों की गुंडागर्दी सरेआम देखने को मिल रही है। एक दिव्यांग व्यक्ति जो सिलेंडर के लिए लाइन में लगा एजेंसी स्टाफ से गिड़गिड़ा रहा था, ऐसे में झल्लाये एजेंसी मालिक ने कर दी दिव्यांग की पिटाई कर दी वहीं वीडियो बना रहे युवक को भी मारने के लिए दौड़ाया और गंदी गंदी गालियों से भी नवाजा। इस महामारी में एजेंसी मालिकों की गुंडागर्दी। पिटाई करते वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल। मामला कस्ता गैस एजेंसी का है।1
- अंकित संवाद-शाहिद लखाही लखीमपुर खीरी / पलिया कला: जनपद के पलिया कला क्षेत्र में नशे का बढ़ता प्रकोप अब खतरनाक रूप लेता नजर आ रहा है। जानकारी के अनुसार, नशे की हालत में मोटरसाइकिल सवार युवक 60-70 किमी प्रति घंटे की तेज रफ्तार से सड़कों पर दौड़ते हुए देखे जा रहे हैं। इतना ही नहीं, बीच सड़क पर गाड़ी रोककर आपस में मारपीट जैसी घटनाएं भी सामने आ रही हैं, जिससे क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पलिया कला में मेडिकल स्टोरों पर खुलेआम नशे की गोलियां और इंजेक्शन बेचे जा रहे हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग, विशेषकर ड्रग्स इंस्पेक्टर, इस ओर कोई ठोस कार्रवाई करता नजर नहीं आ रहा है। यहां तक कि पत्रकारों द्वारा संपर्क करने पर भी फोन न उठाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। अगर समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो नशे की लत में फंसे युवा मानसिक रूप से असंतुलित होकर कानून-व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। यह स्थिति पुलिस प्रशासन के लिए भी गंभीर चुनौती साबित हो सकती है। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर किसके संरक्षण में पलिया कला में इतना बड़ा नशे का कारोबार फल-फूल रहा है? क्या शासन-प्रशासन इस ओर ध्यान देगा या फिर युवाओं का भविष्य यूं ही अंधकार में डूबता रहेगा?1