logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

करोड़ रुपए पड़े हुए हैं, इतने पैसों में तो कम से कम 1,000 हाईटेक और उच्चस्तरीय स्कूल बनाए जा सकते हैं काकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने पीएम केयर्स फंड में जमा 8.5 हजार करोड़ रुपयों को लेकर पीएम मोदी पर साधा निशाना. अभिजीत दीपके ने एक वीडियो पोस्ट कर कहा- PM केयर फंड में लगभग 8.5 हजार करोड़ रुपए पड़े हुए हैं, इतने पैसों में तो कम से कम 1,000 हाईटेक और उच्चस्तरीय स्कूल बनाए जा सकते हैं, फिर सरकार बेहतर स्कूल क्यों नहीं बना रही है..?

8 hrs ago
user_गजेन्द्र कुमार सिंह
गजेन्द्र कुमार सिंह
Pindra, Varanasi•
8 hrs ago

करोड़ रुपए पड़े हुए हैं, इतने पैसों में तो कम से कम 1,000 हाईटेक और उच्चस्तरीय स्कूल बनाए जा सकते हैं काकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने पीएम केयर्स फंड में जमा 8.5 हजार करोड़ रुपयों को लेकर पीएम मोदी पर साधा निशाना. अभिजीत दीपके ने एक वीडियो पोस्ट कर कहा- PM केयर फंड में लगभग 8.5 हजार करोड़ रुपए पड़े हुए हैं, इतने पैसों में तो कम से कम 1,000 हाईटेक और उच्चस्तरीय स्कूल बनाए जा सकते हैं, फिर सरकार बेहतर स्कूल क्यों नहीं बना रही है..?

More news from Varanasi and nearby areas
  • करोड़ रुपए पड़े हुए हैं, इतने पैसों में तो कम से कम 1,000 हाईटेक और उच्चस्तरीय स्कूल बनाए जा सकते हैं काकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने पीएम केयर्स फंड में जमा 8.5 हजार करोड़ रुपयों को लेकर पीएम मोदी पर साधा निशाना. अभिजीत दीपके ने एक वीडियो पोस्ट कर कहा- PM केयर फंड में लगभग 8.5 हजार करोड़ रुपए पड़े हुए हैं, इतने पैसों में तो कम से कम 1,000 हाईटेक और उच्चस्तरीय स्कूल बनाए जा सकते हैं, फिर सरकार बेहतर स्कूल क्यों नहीं बना रही है..?
    1
    करोड़ रुपए पड़े हुए हैं,
इतने पैसों में तो कम से कम 1,000 हाईटेक और उच्चस्तरीय स्कूल बनाए जा सकते हैं
काकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने पीएम केयर्स फंड में जमा 8.5 हजार करोड़ रुपयों को लेकर पीएम मोदी पर साधा निशाना.
अभिजीत दीपके ने एक वीडियो पोस्ट कर कहा-
PM केयर फंड में लगभग 8.5 हजार करोड़ रुपए पड़े हुए हैं,
इतने पैसों में तो कम से कम 1,000 हाईटेक और उच्चस्तरीय स्कूल बनाए जा सकते हैं,
फिर सरकार बेहतर स्कूल क्यों नहीं बना रही है..?
    user_गजेन्द्र कुमार सिंह
    गजेन्द्र कुमार सिंह
    Pindra, Varanasi•
    8 hrs ago
  • एसओजी की गाड़ी के टक्कर से स्वास्थ्य कर्मी महिला घायल, बाइक क्षतिग्रस्त एसओजी की गाड़ी के टक्कर से स्वास्थ्य कर्मी महिला घायल, बाइक क्षतिग्रस्त अहरौला। थाना क्षेत्र के यूबीआई बैंक के सामने बुधवार दोपहर में तेज गति से आ रही एसओ जी की गाड़ी ने स्कूल गाड़ी में टक्कर मारी उसके बाद बाइक लेकर खड़े आशा बहू प्रियंका (35) पत्नी चिंतामणि निवासी पखनपुर सीएचसी से दवा लेकर वापस घर जा रहे थे की एसओ जी की गाडी सामने से जोरदार टक्कर मार दी जिससे बाइक क्षतिग्रस्त हो गयी और स्वास्थ्य कर्मी महिला प्रियंका गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गई प्रियंका को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया जहां उनका इलाज चल रहा है वहीं मौके पर बड़ी संख्या में जुटी आशा बहू में भारी आक्रोश था मौके पर आशा ब्लॉक संयोजक रीना उपाध्याय ने वर्तमान आशा संघ की निवर्तमान अध्यक्ष बृजबाला सिंह बड़ी संख्या में आशायें मौजूद थी।थानाध्यक्ष मंतोष कुमार सिंह ने बताया की सूचना मिली है की एसओ जी की गाड़ी तकनीकी खराबी से अनियंत्रित होकर टकराई है घायल महिला से बात की गई है और हर संभव सहयोग का आश्वासन भी दिया गया।
    1
    एसओजी की गाड़ी के टक्कर से स्वास्थ्य कर्मी महिला घायल, बाइक क्षतिग्रस्त
एसओजी की गाड़ी के टक्कर से स्वास्थ्य कर्मी महिला घायल, बाइक क्षतिग्रस्त
अहरौला। थाना क्षेत्र के  यूबीआई बैंक के सामने बुधवार दोपहर में तेज गति से आ रही एसओ जी की गाड़ी ने स्कूल गाड़ी में टक्कर मारी उसके बाद  बाइक लेकर खड़े आशा बहू प्रियंका (35) पत्नी चिंतामणि निवासी पखनपुर सीएचसी से दवा लेकर वापस घर जा रहे थे की  एसओ जी की गाडी सामने से जोरदार टक्कर मार दी जिससे बाइक क्षतिग्रस्त हो गयी और स्वास्थ्य कर्मी महिला प्रियंका गिरकर गंभीर रूप  से घायल हो गई प्रियंका को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया जहां उनका इलाज चल रहा है वहीं मौके पर बड़ी संख्या में जुटी आशा बहू में भारी आक्रोश था मौके पर आशा  ब्लॉक संयोजक रीना उपाध्याय ने वर्तमान आशा संघ की निवर्तमान अध्यक्ष बृजबाला सिंह बड़ी संख्या में आशायें मौजूद थी।थानाध्यक्ष  मंतोष कुमार सिंह ने बताया की सूचना मिली है की एसओ जी की गाड़ी तकनीकी खराबी से अनियंत्रित होकर टकराई है घायल महिला से बात की गई है और हर संभव सहयोग का आश्वासन भी दिया गया।
    user_RUPESH TIWARI
    RUPESH TIWARI
    फूलपुर, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश•
    20 hrs ago
  • जौनपुर नहोरा केराव गांव की बुढ़वा मंगल मेला का आनंद लेते लोग जौनपुर। आस्था और मेले का संगम कहे जाने वाले बुढ़वा मंगल मेले में मंगलवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिर परिसर के बाहर लगी दुकानों और झूलों पर बच्चों से लेकर बड़े तक खूब आनंद लेते दिखे। वीडियो में देखा जा सकता है मेले में खाने-पीने की दुकानें सजी थीं। एक तरफ कड़ाही में गरम-गरम *जलेबी* उतर रही थी तो दूसरी तरफ पकौड़े और नमकीन तलते दुकानदार नजर आ रहे थे। जलेबी की मिठास और पकौड़ों की खुशबू से पूरा मेला महक रहा था। खिलौने और चाट-पकौड़ी की दुकानों पर भी अच्छी खासी भीड़ लगी हुई थी। बच्चों के लिए रंगीन झूले और बहुत सारे खिलौने लगाए गए थे, जिस पर बच्चे झूमते दिखे। मेले में महिलाओं ने हर साल की तरह आकर पूजा-अर्चना की और परिवार के साथ खरीदारी भी की। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिसकर्मी भी तैनात रहे। शाम होते-होते मौसम बिगड़ गया और हल्की बारिश शुरू हो गई।इसके बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ। कई लोग छाता और पन्नी लेकर भी मेले में डटे रहे और प्रसाद लेकर घर लौटे।
    1
    जौनपुर नहोरा केराव गांव की बुढ़वा मंगल मेला का आनंद लेते लोग
जौनपुर। आस्था और मेले का संगम कहे जाने वाले बुढ़वा मंगल मेले में मंगलवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिर परिसर के बाहर लगी दुकानों और झूलों पर बच्चों से लेकर बड़े तक खूब आनंद लेते दिखे।
वीडियो में देखा जा सकता है  मेले में खाने-पीने की दुकानें सजी थीं। एक तरफ कड़ाही में गरम-गरम *जलेबी* उतर रही थी तो दूसरी तरफ पकौड़े और नमकीन तलते दुकानदार नजर आ रहे थे। जलेबी की मिठास और पकौड़ों की खुशबू से पूरा मेला महक रहा था। खिलौने और चाट-पकौड़ी की दुकानों पर भी अच्छी खासी भीड़ लगी हुई थी। 
बच्चों के लिए रंगीन झूले और बहुत सारे खिलौने  लगाए गए थे, जिस पर बच्चे झूमते दिखे। मेले में महिलाओं ने हर साल की तरह आकर पूजा-अर्चना की और परिवार के साथ खरीदारी भी की। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिसकर्मी भी तैनात रहे।
शाम होते-होते मौसम बिगड़ गया और हल्की बारिश शुरू हो गई।इसके बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ। कई लोग छाता और पन्नी लेकर भी मेले में डटे रहे और प्रसाद लेकर घर लौटे।
    user_Jitendra bahadur Dubey
    Jitendra bahadur Dubey
    Nurse केराकत, जौनपुर, उत्तर प्रदेश•
    19 hrs ago
  • भक्तिभाव#भक्तिस्टेटस#सावन पर्व#भोलेनाथकीजय #महादेव#पार्वती #स्टेटस #jbj#muick#up# महाकाल कादिवाना #vairalvideo #trendingshorts #goodcunten#westcvaliti#topcriyetar#topnews #breakingnews #savan ka pavan mhina। mhakal#song. भक्तिभाव#भक्तिस्टेटस#सावन पर्व#भोले
    1
    भक्तिभाव#भक्तिस्टेटस#सावन पर्व#भोलेनाथकीजय #महादेव#पार्वती #स्टेटस #jbj#muick#up# महाकाल कादिवाना #vairalvideo #trendingshorts #goodcunten#westcvaliti#topcriyetar#topnews #breakingnews #savan ka pavan mhina।  mhakal#song.  भक्तिभाव#भक्तिस्टेटस#सावन पर्व#भोले
    user_Satish pal
    Satish pal
    भदोही, भदोही, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • वाराणसी में मां गंगा ने पखारे मां शीतला के चरण,गर्भगृह में घुसा बाढ़ का पानी वाराणसी। काशी में मां गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।गंगा का पानी अब घाटों से होते हुए मंदिरों के गर्भगृह तक पहुंच गया है।बनारस में इसे बहुत शुभ माना जाता है। तस्वीर में दिख रहा यह दृश्य दशाश्वमेध स्थित मां शीतला माता मंदिर का है,जहां बाढ़ का पानी मां के दरबार में प्रवेश कर गया है और मां के चरणों को स्पर्श कर रहा है। मान्यता है कि जब-जब गंगा का पानी बढ़कर मां शीतला के पैर पखारता है,तो यह बहुत ही शुभ संकेत होता है।इसे मां गंगा द्वारा मां शीतला का अभिषेक माना जाता है।मंदिर के गर्भगृह में करीब घुटने तक पानी भर गया है, फिर भी माता का श्रृंगार वैसा ही दिव्य बना हुआ है।फूल-मालाओं से सजी मां की मुस्कुराती हुई मूर्ति भक्तों को आशीर्वाद दे रही है। उधर, गंगा का बढ़ाव इतना तेज है कि पानी जल पुलिस चौकी के ऊपर तक पहुंचने लगा है। जल पुलिस और एनडीआरएफ को अलर्ट पर रखा गया है। घाटों का संपर्क टूट गया है और सभी घाट जलमग्न हो गए हैं। प्रशासन लगातार लोगों से घाटों से दूर रहने की अपील कर रहा है। भक्त इसे आपदा नहीं, बल्कि दो माताओं का मिलन बता रहे हैं। जय मां गंगे! जय मां शीतला!
    1
    वाराणसी में मां गंगा ने पखारे मां शीतला के चरण,गर्भगृह में घुसा बाढ़ का पानी
वाराणसी। काशी में मां गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।गंगा का पानी अब घाटों से होते हुए मंदिरों के गर्भगृह तक पहुंच गया है।बनारस में इसे बहुत शुभ माना जाता है।
तस्वीर में दिख रहा यह दृश्य दशाश्वमेध स्थित मां शीतला माता मंदिर का है,जहां बाढ़ का पानी मां के दरबार में प्रवेश कर गया है और मां के चरणों को स्पर्श कर रहा है।
मान्यता है कि जब-जब गंगा का पानी बढ़कर मां शीतला के पैर पखारता है,तो यह बहुत ही शुभ संकेत होता है।इसे मां गंगा द्वारा मां शीतला का अभिषेक माना जाता है।मंदिर के गर्भगृह में करीब घुटने तक पानी भर गया है, फिर भी माता का श्रृंगार वैसा ही दिव्य बना हुआ है।फूल-मालाओं से सजी मां की मुस्कुराती हुई मूर्ति भक्तों को आशीर्वाद दे रही है।
उधर, गंगा का बढ़ाव इतना तेज है कि पानी जल पुलिस चौकी के ऊपर तक पहुंचने लगा है। जल पुलिस और एनडीआरएफ को अलर्ट पर रखा गया है। घाटों का संपर्क टूट गया है और सभी घाट जलमग्न हो गए हैं। प्रशासन लगातार लोगों से घाटों से दूर रहने की अपील कर रहा है।
भक्त इसे आपदा नहीं, बल्कि दो माताओं का मिलन बता रहे हैं।
जय मां गंगे! जय मां शीतला!
    user_NEWS 2 INDIA (NTI)
    NEWS 2 INDIA (NTI)
    Court reporter सदर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • खूंखार सांड ने बुजुर्ग पर किया हमला, गंभीर रूप से घायल; ग्रामीणों में दहशत जनता न्यूज़ टीवी ब्यूरो चीफ़ राजमणी पाण्डेय चंदौली टांडाकला (चंदौली)। स्थानीय ग्राम सभा निवासी 60 वर्षीय प्रमोद यादव पर गुरुवार को एक खूंखार सांड ने अचानक हमला कर दिया। सांड के हमले में प्रमोद यादव के चेहरे, कंधे और पैर में गंभीर चोटें आई हैं। घायल अवस्था में उनकी तस्वीर सामने आई है। पीड़ित प्रमोद यादव के अनुसार, उनके दरवाजे पर बंधी गाय रस्सी तोड़कर पास के खेत की ओर चली गई थी। वह गाय की रस्सी पकड़कर वापस घर की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान पीछे से आए सांड ने अचानक उन पर हमला कर दिया और उन्हें उठाकर जमीन पर पटक दिया। प्रमोद यादव ने साहस दिखाते हुए सांड के सींग को पकड़ लिया और मदद के लिए अपने बड़े भाई बीरेंद्र को आवाज लगाई। चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों को आता देख सांड वहां से भाग गया, जिससे प्रमोद यादव की जान बच सकी। ग्रामीणों का कहना है कि उक्त सांड बेहद आक्रामक और खतरनाक हो चुका है। आरोप है कि इस वर्ष अब तक वह कई लोगों को घायल कर चुका है। लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में भय और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि खतरनाक एवं आवारा सांडों को जल्द पकड़कर सुरक्षित स्थान अथवा गौशाला भेजा जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़ी अनहोनी को रोका जा सके।
    1
    खूंखार सांड ने बुजुर्ग पर किया हमला, गंभीर रूप से घायल; ग्रामीणों में दहशत
जनता न्यूज़ टीवी ब्यूरो चीफ़ राजमणी पाण्डेय चंदौली 
टांडाकला (चंदौली)। स्थानीय ग्राम सभा निवासी 60 वर्षीय प्रमोद यादव पर गुरुवार को एक खूंखार सांड ने अचानक हमला कर दिया। सांड के हमले में प्रमोद यादव के चेहरे, कंधे और पैर में गंभीर चोटें आई हैं। घायल अवस्था में उनकी तस्वीर सामने आई है।
पीड़ित प्रमोद यादव के अनुसार, उनके दरवाजे पर बंधी गाय रस्सी तोड़कर पास के खेत की ओर चली गई थी। वह गाय की रस्सी पकड़कर वापस घर की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान पीछे से आए सांड ने अचानक उन पर हमला कर दिया और उन्हें उठाकर जमीन पर पटक दिया।
प्रमोद यादव ने साहस दिखाते हुए सांड के सींग को पकड़ लिया और मदद के लिए अपने बड़े भाई बीरेंद्र को आवाज लगाई। चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों को आता देख सांड वहां से भाग गया, जिससे प्रमोद यादव की जान बच सकी।
ग्रामीणों का कहना है कि उक्त सांड बेहद आक्रामक और खतरनाक हो चुका है। आरोप है कि इस वर्ष अब तक वह कई लोगों को घायल कर चुका है। लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में भय और आक्रोश का माहौल है।
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि खतरनाक एवं आवारा सांडों को जल्द पकड़कर सुरक्षित स्थान अथवा गौशाला भेजा जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़ी अनहोनी को रोका जा सके।
    user_जनता न्यूज टीवी
    जनता न्यूज टीवी
    TV News Anchor सदर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप -10 ** ...जब हॉकी अपनी रूह के साथ खेली गई ** एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप -10 ** ...जब हॉकी अपनी रूह के साथ खेली गई ** बेशक़ आज इस मैच का नतीजा भारत के हक़ में रहा और इस जीत ने भारतीय हॉकी प्रेमियों को आज रात सुकून की नींद सोने की वजह भी दे दी होगी। मगर इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता कि बरसों बाद लोगों को एक ऐसा जबर्दस्त क्लासिकल हॉकी मुकाबला देखने को मिला, जिसकी रवानगी में पुराने ज़माने की हॉकी की खुशबू महसूस हुई। वैगनर स्टेडियम में मौजूद तक़रीबन 6,322 दर्शकों को आज शायद हॉकी की उस रूह को लाइव महसूस करने का मौका मिला, जो वक़्त की तेज़ रफ़्तार के साथ कहीं पीछे छूटती जा रही थी। मौजूदा ताबड़तोड़ हॉकी और उस दौर की क्लासिकल हॉकी के दरमियान का फर्क शायद आज हर उस शख्स ने महसूस किया होगा, जिसकी आंखों के सामने गेंद सिर्फ़ तेज़ी से दौड़ती हुई चीज़ नहीं थी, बल्कि कभी पास में ठहरती, कभी स्टिक से बतियाती और फिर अचानक गोल की तरफ़ निकल जाती थी। आज के मुकाबले में रफ़्तार थी, ताक़त थी, रोमांच था और गोलों की बारिश भी। मगर इन सबके बीच एक ऐसा ठहराव भी था, जो अच्छे हॉकी मुकाबले को महज़ एक खेल नहीं रहने देता—उसे एक यादगार शाम में बदल देता है। शायद यही वजह है कि भारत की 5-3 की जीत का जश्न अपनी जगह है, लेकिन इस मुकाबले की असली खूबसूरती सिर्फ़ जीत-हार के दायरे में कैद नहीं की जा सकती। आज वैगनर स्टेडियम ने सिर्फ़ भारत को पाकिस्तान पर जीतते हुए नहीं देखा। उसने हॉकी को सिर्फ़ खेलते हुए नहीं देखा। उसने हॉकी को अपनी पूरी रूह के साथ जीते हुए देखा। भारत-पाकिस्तान की भिड़ंत में वैसे भी कुछ ऐसा है, जिसे आंकड़ों की भाषा में पूरी तरह बयान नहीं किया जा सकता। यह सिर्फ़ दो टीमों के बीच का मुकाबला नहीं था। इसके साथ इतिहास था, यादें थीं ,पुरानी तस्वीरें थीं और उन तमाम मुकाबलों की आवाज़ें भी थीं, जिन्हें पिछली पीढ़ियों ने अपनी आंखों से देखा होगा। ...पर आज की शाम में एक फर्क था। इस बार दोनों टीमें जैसे पुराने हॉकी के उस आईने के सामने खड़ी थीं, जिसमें रफ्तार के साथ हुनर भी दिखाई दिया और ताकत के साथ तमीज़ भी। भारत ने शुरुआत से ही अपनी मंशा साफ कर दी थी। पांचवें मिनट में कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदला तो भारतीय खेमे में खुशी की पहली लहर उठी। कप्तान का गोल सिर्फ़ स्कोर खोलने वाला गोल नहीं था। यह उस शाम के तेवर का पहला नज़ारा था। 11वें मिनट में अभिषेक ने मैदानी गोल कर भारत की बढ़त 2-0 कर दी। दो गोल पीछे होने के बावजूद पाकिस्तान ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे। मगर भारतीय आक्रमण की धार ऐसी थी कि उसे अपनी रक्षापंक्ति को लगातार समेटकर रखना पड़ रहा था। 21वें मिनट में हरमनप्रीत ने फिर वही कमाल दिखाया। पेनल्टी कॉर्नर।ड्रैग-फ्लिक। गोल। 3-0। कप्तान की स्टिक जैसे आज पाकिस्तान के गोलपोस्ट से सवाल पर सवाल कर रही थी। लेकिन भारत-पाकिस्तान मुकाबला इतनी आसानी से किसी एक तरफ़ नहीं झुकता। 22वें मिनट में हन्नान शाहिद ने पाकिस्तान का पहला गोल कर दिया। स्कोर 3-1। अचानक मुकाबले में एक नई सांस आ गई। भारत ने इस सांस को ज्यादा लंबा नहीं होने दिया। 24वें मिनट में अभिषेक ने अपना दूसरा गोल किया और भारत फिर तीन गोल आगे हो गया। अब स्कोर बोर्ड पर 4-1 चमक बिखेरी रहा था। लेकिन यह चमक तब कुछ धुंधली पड़ गई जब उसी मिनट सुफियान खान ने पाकिस्तान की ओर से गोल दाग दिया। स्कोर 4-2। कुछ ही पलों में मुकाबला फिर से खुल चुका था। गोलों की यह आवाजाही बता रही थी कि दोनों टीमें सिर्फ़ जीतने नहीं, अपना पूरा वजूद मैदान पर छोड़ने आई हैं और शायद यही वह लम्हा था, जब वैगनर स्टेडियम में बैठे दर्शकों को एहसास हुआ होगा कि वे एक असाधारण हॉकी मुकाबले का हिस्सा बन चुके हैं। तीसरे क्वार्टर में 35वें मिनट पर हार्दिक सिंह ने पेनल्टी स्ट्रोक को गोल में तब्दील कर भारत की बढ़त 5-2 कर दी। यह गोल भारतीय टीम के लिए उस वक्त एक मजबूत सहारा था। लेकिन पाकिस्तान की जिद अभी बाकी थी। 46वें मिनट में हन्नान शाहिद ने अपना दूसरा गोल दाग दिया। स्कोर लाइन 5-3। अब आखिरी चौथे क्वार्टर में तनाव फिर लौट आया था। पाकिस्तान ने हमले बढ़ाए। भारतीय सर्किल के आसपास हलचल बढ़ी। हर गेंद के साथ रोमांच और गहरा होता गया। लेकिन इस बार भारत ने अपने धैर्य को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया। इंग्लैंड के खिलाफ जिस दूसरे हाफ ने भारत के हाथ से मुकाबला छीन लिया था, उस अनुभव से शायद टीम ने कुछ सीखा था। इस बार बढ़त मिली तो उसे सिर्फ़ बचाया नहीं गया, उसके साथ संयम भी रखा गया। आखिरी सीटी बजी। भारत 5-3 से जीत चुका था। हरमनप्रीत के दो गोल, अभिषेक के दो गोल और हार्दिक सिंह का एक गोल—भारत की जीत की पूरी कहानी इन पांच गोलों में दर्ज थी। लेकिन सच पूछिए तो इस मैच की कहानी इन पांच गोलों से कहीं बड़ी थी। भारत ने 57.7 प्रतिशत गेंद पर कब्जा रखा। 17 शॉट लिए और 28 बार सर्किल में पहुंचा। पाकिस्तान ने भी जवाब दिया और 11 शॉट तथा 16 सर्किल एंट्री के साथ मुकाबले को आखिरी तक जिंदा रखा। आंकड़े बताते हैं कि भारत बेहतर था। मगर आंखें बताती हैं कि मुकाबला खूबसूरत था। यही फर्क इस शाम को खास बनाता है। क्योंकि हॉकी सिर्फ़ गोल का खेल नहीं है। यह उस पास का भी खेल है, जो गोल से पहले रास्ता बनाता है। यह उस ड्रिबल का भी खेल है, जिसमें खिलाड़ी विरोधी को छकाकर आगे निकलता है। यह उस डिफेंडर के धैर्य का भी खेल है, जो आखिरी क्षण तक अपने गोल की हिफाज़त करता है। ...और यह उस एहसास का खेल है, जिसमें हजारों दर्शक एक साथ सांस लेते हैं—हमला होता है तो सांस रुकती है और गोल होता है तो पूरा स्टेडियम सांस छोड़ता है। आज भारत ने पाकिस्तान को हराया। विश्व कप में उसके खिलाफ अपनी चौथी जीत दर्ज की। अगले चक्र में जगह बनाई। लेकिन शायद इस रात की सबसे बड़ी जीत यह रही कि हॉकी ने खुद को एक बार फिर महसूस कराया। मौजूदा दौर की हॉकी तेज़ है। बेहद तेज़। उसमें ताकत है, फिटनेस है, प्रेसिंग है और पलक झपकते ही बदलता खेल है। मगर आज के मुकाबले ने याद दिलाया कि हॉकी की खूबसूरती सिर्फ़ रफ्तार में नहीं होती। उसमें एक ठहराव भी चाहिए। एक नज़ाकत चाहिए। गेंद के साथ वह रिश्ता चाहिए, जो खेल को सिर्फ़ परिणाम नहीं, एक अनुभव बना देता है। शायद इसीलिए 6,322 दर्शकों की मौजूदगी में खेला गया यह मुकाबला सिर्फ़ भारत की जीत बनकर नहीं रहेगा। यह उस शाम की याद भी रहेगा, जब दो पुराने प्रतिद्वंद्वी मैदान पर उतरे और हॉकी ने अपने पुराने रंग फिर से दिखा दिए। भारत अब अगले चक्र में है ...और अब सामने नीदरलैंड्स होगा और उसके बाद अर्जेंटीना या न्यूजीलैंड में से कोई एक चुनौती। वहां मुकाबले और मुश्किल होंगे। वहां हर गलती की कीमत ज्यादा होगी। वहां सिर्फ़ जुनून काफी नहीं होगा—खेल का स्तर भी लगातार ऊंचा रखना होगा। लेकिन आज की रात भारतीय टीम के पास एक ऐसी जीत है, जो सिर्फ़ अंक नहीं देती। यह भरोसा देती है। इंग्लैंड की हार के बाद जो सवाल उठे थे, पाकिस्तान के खिलाफ भारत ने उनका जवाब स्टिक से दिया है और इस जवाब में पांच गोल थे। दो हरमनप्रीत के। दो अभिषेक के। एक हार्दिक के। लेकिन इन पांच गोलों के पीछे एक पूरी टीम थी, जिसने दबाव को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। आज भारत जीता है। मगर इस जीत से भी बड़ी बात यह है कि आज हॉकी जीती है। कई बरस बाद शायद किसी भारत-पाकिस्तान मुकाबले ने यह एहसास कराया है कि हॉकी की रूह अभी कहीं गई नहीं है। वह यहीं है। मैदान में। गेंद में। स्टिक में। दर्शकों की धड़कनों में और उन आंखों में, जो आखिरी सीटी के बाद भी कुछ देर तक मैदान को देखती रह जाती हैं। आज वैगनर स्टेडियम ने सिर्फ़ भारत को पाकिस्तान पर जीतते हुए नहीं देखा। उसने हॉकी को अपनी पूरी रूह के साथ खेलते हुए देखा। #HockeyWorldCup2026 #INDvsPAK #IndianHockey #HockeyWorldCup #HarmanpreetSingh #Abhishek #HardikSingh #ClassicalHockey #HockeyLovers
    1
    एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप -10
    ** ...जब हॉकी अपनी 
                         रूह के साथ खेली गई  **
एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप -10
** ...जब हॉकी अपनी 
रूह के साथ खेली गई  **
बेशक़ आज इस मैच का नतीजा भारत के हक़ में रहा और इस जीत ने भारतीय हॉकी प्रेमियों को आज रात सुकून की नींद सोने की वजह भी दे दी होगी। मगर इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता कि बरसों बाद लोगों को एक ऐसा जबर्दस्त क्लासिकल हॉकी मुकाबला देखने को मिला, जिसकी रवानगी में पुराने ज़माने की हॉकी की खुशबू महसूस हुई।
वैगनर स्टेडियम में मौजूद तक़रीबन 6,322 दर्शकों को आज शायद हॉकी की उस रूह को लाइव महसूस करने का मौका मिला, जो वक़्त की तेज़ रफ़्तार के साथ कहीं पीछे छूटती जा रही थी। मौजूदा ताबड़तोड़ हॉकी और उस दौर की क्लासिकल हॉकी के दरमियान का फर्क शायद आज हर उस शख्स ने महसूस किया होगा, जिसकी आंखों के सामने गेंद सिर्फ़ तेज़ी से दौड़ती हुई चीज़ नहीं थी, बल्कि कभी पास में ठहरती, कभी स्टिक से बतियाती और फिर अचानक गोल की तरफ़ निकल जाती थी।
आज के मुकाबले में रफ़्तार थी, ताक़त थी, रोमांच था और गोलों की बारिश भी। मगर इन सबके बीच एक ऐसा ठहराव भी था, जो अच्छे हॉकी मुकाबले को महज़ एक खेल नहीं रहने देता—उसे एक यादगार शाम में बदल देता है। शायद यही वजह है कि भारत की 5-3 की जीत का जश्न अपनी जगह है, लेकिन इस मुकाबले की असली खूबसूरती सिर्फ़ जीत-हार के दायरे में कैद नहीं की जा सकती।
आज वैगनर स्टेडियम ने सिर्फ़ भारत को पाकिस्तान पर जीतते हुए नहीं देखा। उसने हॉकी को सिर्फ़ खेलते हुए नहीं देखा। उसने हॉकी को अपनी पूरी रूह के साथ जीते हुए देखा। भारत-पाकिस्तान की भिड़ंत में वैसे भी कुछ ऐसा है, जिसे आंकड़ों की भाषा में पूरी तरह बयान नहीं किया जा सकता।
यह सिर्फ़ दो टीमों के बीच का मुकाबला नहीं था। इसके साथ इतिहास था, यादें थीं ,पुरानी तस्वीरें थीं और उन तमाम मुकाबलों की आवाज़ें भी थीं, जिन्हें पिछली पीढ़ियों ने अपनी आंखों से देखा होगा।
...पर आज की शाम में एक फर्क था। इस बार दोनों टीमें जैसे पुराने हॉकी के उस आईने के सामने खड़ी थीं, जिसमें रफ्तार के साथ हुनर भी दिखाई दिया और ताकत के साथ तमीज़ भी।
भारत ने शुरुआत से ही अपनी मंशा साफ कर दी थी।
पांचवें मिनट में कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदला तो भारतीय खेमे में खुशी की पहली लहर उठी। कप्तान का गोल सिर्फ़ स्कोर खोलने वाला गोल नहीं था। यह उस शाम के तेवर का पहला नज़ारा था।
11वें मिनट में अभिषेक ने मैदानी गोल कर भारत की बढ़त 2-0 कर दी। दो गोल पीछे होने के बावजूद पाकिस्तान ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे। मगर भारतीय आक्रमण की धार ऐसी थी कि उसे अपनी रक्षापंक्ति को लगातार समेटकर रखना पड़ रहा था। 21वें मिनट में हरमनप्रीत ने फिर वही कमाल दिखाया। पेनल्टी कॉर्नर।ड्रैग-फ्लिक। गोल। 3-0। कप्तान की स्टिक जैसे आज पाकिस्तान के गोलपोस्ट से सवाल पर सवाल कर रही थी। लेकिन भारत-पाकिस्तान मुकाबला इतनी आसानी से किसी एक तरफ़ नहीं झुकता।
22वें मिनट में हन्नान शाहिद ने पाकिस्तान का पहला गोल कर दिया। स्कोर 3-1। अचानक मुकाबले में एक नई सांस आ गई। भारत ने इस सांस को ज्यादा लंबा नहीं होने दिया। 24वें मिनट में अभिषेक ने अपना दूसरा गोल किया और भारत फिर तीन गोल आगे हो गया। अब स्कोर बोर्ड पर 4-1 चमक बिखेरी रहा था। लेकिन यह चमक तब कुछ धुंधली पड़ गई जब उसी मिनट सुफियान खान ने पाकिस्तान की ओर से गोल दाग दिया। स्कोर 4-2।
कुछ ही पलों में मुकाबला फिर से खुल चुका था। गोलों की यह आवाजाही बता रही थी कि दोनों टीमें सिर्फ़ जीतने नहीं, अपना पूरा वजूद मैदान पर छोड़ने आई हैं और शायद यही वह लम्हा था, जब वैगनर स्टेडियम में बैठे दर्शकों को एहसास हुआ होगा कि वे एक असाधारण हॉकी मुकाबले का हिस्सा बन चुके हैं।
तीसरे क्वार्टर में 35वें मिनट पर हार्दिक सिंह ने पेनल्टी स्ट्रोक को गोल में तब्दील कर भारत की बढ़त 5-2 कर दी। यह गोल भारतीय टीम के लिए उस वक्त एक मजबूत सहारा था। लेकिन पाकिस्तान की जिद अभी बाकी थी।
46वें मिनट में हन्नान शाहिद ने अपना दूसरा गोल दाग दिया। स्कोर लाइन 5-3।
अब आखिरी चौथे क्वार्टर में तनाव फिर लौट आया था।
पाकिस्तान ने हमले बढ़ाए। भारतीय सर्किल के आसपास हलचल बढ़ी। हर गेंद के साथ रोमांच और गहरा होता गया। लेकिन इस बार भारत ने अपने धैर्य को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया।
इंग्लैंड के खिलाफ जिस दूसरे हाफ ने भारत के हाथ से मुकाबला छीन लिया था, उस अनुभव से शायद टीम ने कुछ सीखा था। इस बार बढ़त मिली तो उसे सिर्फ़ बचाया नहीं गया, उसके साथ संयम भी रखा गया। आखिरी सीटी बजी। भारत 5-3 से जीत चुका था। हरमनप्रीत के दो गोल, अभिषेक के दो गोल और हार्दिक सिंह का एक गोल—भारत की जीत की पूरी कहानी इन पांच गोलों में दर्ज थी। लेकिन सच पूछिए तो इस मैच की कहानी इन पांच गोलों से कहीं बड़ी थी। भारत ने 57.7 प्रतिशत गेंद पर कब्जा रखा। 17 शॉट लिए और 28 बार सर्किल में पहुंचा। पाकिस्तान ने भी जवाब दिया और 11 शॉट तथा 16 सर्किल एंट्री के साथ मुकाबले को आखिरी तक जिंदा रखा।
आंकड़े बताते हैं कि भारत बेहतर था। मगर आंखें बताती हैं कि मुकाबला खूबसूरत था। यही फर्क इस शाम को खास बनाता है। क्योंकि हॉकी सिर्फ़ गोल का खेल नहीं है। यह उस पास का भी खेल है, जो गोल से पहले रास्ता बनाता है। यह उस ड्रिबल का भी खेल है, जिसमें खिलाड़ी विरोधी को छकाकर आगे निकलता है। यह उस डिफेंडर के धैर्य का भी खेल है, जो आखिरी क्षण तक अपने गोल की हिफाज़त करता है। ...और यह उस एहसास का खेल है, जिसमें हजारों दर्शक एक साथ सांस लेते हैं—हमला होता है तो सांस रुकती है और गोल होता है तो पूरा स्टेडियम सांस छोड़ता है।
आज भारत ने पाकिस्तान को हराया। विश्व कप में उसके खिलाफ अपनी चौथी जीत दर्ज की। अगले चक्र में जगह बनाई। लेकिन शायद इस रात की सबसे बड़ी जीत यह रही कि हॉकी ने खुद को एक बार फिर महसूस कराया।
मौजूदा दौर की हॉकी तेज़ है। बेहद तेज़। उसमें ताकत है, फिटनेस है, प्रेसिंग है और पलक झपकते ही बदलता खेल है। मगर आज के मुकाबले ने याद दिलाया कि हॉकी की खूबसूरती सिर्फ़ रफ्तार में नहीं होती। उसमें एक ठहराव भी चाहिए। एक नज़ाकत चाहिए। गेंद के साथ वह रिश्ता चाहिए, जो खेल को सिर्फ़ परिणाम नहीं, एक अनुभव बना देता है। शायद इसीलिए 6,322 दर्शकों की मौजूदगी में खेला गया यह मुकाबला सिर्फ़ भारत की जीत बनकर नहीं रहेगा। यह उस शाम की याद भी रहेगा, जब दो पुराने प्रतिद्वंद्वी मैदान पर उतरे और हॉकी ने अपने पुराने रंग फिर से दिखा दिए।
भारत अब अगले चक्र में है ...और अब सामने नीदरलैंड्स होगा और उसके बाद अर्जेंटीना या न्यूजीलैंड में से कोई एक चुनौती। वहां मुकाबले और मुश्किल होंगे। वहां हर गलती की कीमत ज्यादा होगी। वहां सिर्फ़ जुनून काफी नहीं होगा—खेल का स्तर भी लगातार ऊंचा रखना होगा।
लेकिन आज की रात भारतीय टीम के पास एक ऐसी जीत है, जो सिर्फ़ अंक नहीं देती। यह भरोसा देती है।
इंग्लैंड की हार के बाद जो सवाल उठे थे, पाकिस्तान के खिलाफ भारत ने उनका जवाब स्टिक से दिया है और इस जवाब में पांच गोल थे। दो हरमनप्रीत के। दो अभिषेक के।
एक हार्दिक के। लेकिन इन पांच गोलों के पीछे एक पूरी टीम थी, जिसने दबाव को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया।
आज भारत जीता है। मगर इस जीत से भी बड़ी बात यह है कि आज हॉकी जीती है। कई बरस बाद शायद किसी भारत-पाकिस्तान मुकाबले ने यह एहसास कराया है कि हॉकी की रूह अभी कहीं गई नहीं है। वह यहीं है। मैदान में। गेंद में। स्टिक में। दर्शकों की धड़कनों में और उन आंखों में, जो आखिरी सीटी के बाद भी कुछ देर तक मैदान को देखती रह जाती हैं। आज वैगनर स्टेडियम ने सिर्फ़ भारत को पाकिस्तान पर जीतते हुए नहीं देखा।
उसने हॉकी को अपनी पूरी रूह के साथ खेलते हुए देखा।
#HockeyWorldCup2026 #INDvsPAK #IndianHockey #HockeyWorldCup #HarmanpreetSingh #Abhishek #HardikSingh #ClassicalHockey #HockeyLovers
    user_Keshav Choudhary
    Keshav Choudhary
    सदर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • वंदे मातरम् का गायन कराओ, संघ का गीत बंद करो..'* *वंदे मातरम् विवाद पर यूपी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने दिया *'RSS के पद संचलन में तिरंगा लेकर चलो,* *वंदे मातरम् का गायन कराओ, संघ का गीत बंद करो..'* *वंदे मातरम् विवाद पर यूपी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने दिया चैलेंज*
    1
    वंदे मातरम् का गायन कराओ, संघ का गीत बंद करो..'*
*वंदे मातरम् विवाद पर यूपी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने दिया
*'RSS के पद संचलन में तिरंगा लेकर चलो,*
*वंदे मातरम् का गायन कराओ, संघ का गीत बंद करो..'*
*वंदे मातरम् विवाद पर यूपी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने दिया चैलेंज*
    user_गजेन्द्र कुमार सिंह
    गजेन्द्र कुमार सिंह
    Pindra, Varanasi•
    8 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.