अस्पताल के बाहर लावारिस हालत में पड़ा रहा घायल युवक, उपचार के अभाव में परिजन और राहगीरों में आक्रोश *लहार सिविल अस्पताल की बड़ी लापरवाही* ⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡ *दो घंटे तक तड़पता रहा सड़क हादसे का घायल, इमरजेंसी में नहीं मिला डॉक्टर* ⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡ *अस्पताल के बाहर लावारिस हालत में पड़ा रहा घायल युवक, उपचार के अभाव में परिजन और राहगीरों में आक्रोश* ⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡ बांके तिगुनायक/देवानंद नायक लहार। प्रदेश सरकार जहां बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे कर रही है, वहीं लहार सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। शुक्रवार को रावतपुरा थाना क्षेत्र के महुआ के पास सड़क दुर्घटना में घायल हुए युवक को इलाज के लिए लहार सिविल अस्पताल लाया गया, लेकिन आरोप है कि अस्पताल में इमरजेंसी ड्यूटी पर कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। नतीजतन घायल युवक करीब दो घंटे तक दर्द से तड़पता रहा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घायल युवक को अस्पताल परिसर के बाहर ही लावारिस अवस्था में छोड़ दिया गया। समय पर उपचार नहीं मिलने से उसकी हालत बिगड़ती रही। अस्पताल में मौजूद लोगों ने कई बार चिकित्सकों और स्टाफ को सूचना देने का प्रयास किया, लेकिन काफी देर तक कोई जिम्मेदार अधिकारी या डॉक्टर मौके पर नहीं पहुंचा। बाद में घायल की पहचान असवार निवासी धीरेंद्र पुत्र प्रेमनारायण जोशी के रूप में हुई। बताया जा रहा है कि वह रावतपुरा थाना क्षेत्र के महुआ के पास सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुआ था। *पहले भी उठते रहे हैं सवाल* लहार सिविल अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर यह पहला मामला नहीं है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अस्पताल में डॉक्टरों की अनुपस्थिति, इमरजेंसी सेवाओं में लापरवाही और मरीजों की अनदेखी की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। कई बार शिकायतें उच्च अधिकारियों तक पहुंचने के बावजूद व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ। *जिम्मेदार कौन?* सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अस्पताल में इमरजेंसी ड्यूटी पर डॉक्टर मौजूद नहीं थे तो गंभीर मरीजों का उपचार कैसे किया जा रहा है अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही तय क्यों नहीं की जा रही यदि समय पर उपचार नहीं मिलता तो किसी भी घायल की जान जोखिम में पड़ सकती है। *सीएमएचओ की कार्यप्रणाली पर भी सवाल* लगातार सामने आ रही शिकायतों के बावजूद जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) द्वारा लहार सिविल अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने से लोगों में नाराजगी है। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई होती, तो ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होती। *जनता के सवाल* क्या लहार सिविल अस्पताल में इमरजेंसी सेवाएं केवल कागजों तक सीमित हैं? दुर्घटना में घायल मरीज को समय पर इलाज क्यों नहीं मिला? ड्यूटी पर डॉक्टर अनुपस्थित थे तो जिम्मेदारी किसकी है? अस्पताल परिसर के बाहर घायल को लावारिस हालत में क्यों छोड़ दिया गया? जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी लगातार मिल रही शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे?
अस्पताल के बाहर लावारिस हालत में पड़ा रहा घायल युवक, उपचार के अभाव में परिजन और राहगीरों में आक्रोश *लहार सिविल अस्पताल की बड़ी लापरवाही* ⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡ *दो घंटे तक तड़पता रहा सड़क हादसे का घायल, इमरजेंसी में नहीं मिला डॉक्टर* ⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡ *अस्पताल के बाहर लावारिस हालत में पड़ा रहा घायल युवक, उपचार के अभाव में परिजन और राहगीरों में आक्रोश* ⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡ बांके तिगुनायक/देवानंद नायक लहार। प्रदेश सरकार जहां बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे कर रही है, वहीं लहार सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। शुक्रवार को रावतपुरा थाना क्षेत्र के महुआ के पास सड़क दुर्घटना में घायल हुए युवक को इलाज के लिए लहार सिविल अस्पताल लाया गया, लेकिन आरोप है कि अस्पताल में इमरजेंसी ड्यूटी पर कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। नतीजतन घायल युवक करीब दो घंटे तक दर्द से तड़पता रहा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घायल युवक को अस्पताल परिसर के बाहर ही लावारिस अवस्था में छोड़ दिया गया। समय पर उपचार नहीं मिलने से उसकी हालत बिगड़ती रही। अस्पताल में मौजूद लोगों ने कई बार चिकित्सकों और स्टाफ को सूचना देने का प्रयास किया, लेकिन काफी देर तक कोई जिम्मेदार अधिकारी या डॉक्टर मौके पर नहीं पहुंचा। बाद में घायल की पहचान असवार निवासी धीरेंद्र पुत्र प्रेमनारायण जोशी के रूप में हुई। बताया जा रहा है कि वह रावतपुरा थाना क्षेत्र के महुआ के पास सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुआ था। *पहले भी उठते रहे हैं सवाल* लहार सिविल अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर यह पहला मामला नहीं है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अस्पताल में डॉक्टरों की अनुपस्थिति, इमरजेंसी सेवाओं में लापरवाही और मरीजों की अनदेखी की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। कई बार शिकायतें उच्च अधिकारियों तक पहुंचने के बावजूद व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ। *जिम्मेदार कौन?* सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अस्पताल में इमरजेंसी ड्यूटी पर डॉक्टर मौजूद नहीं थे तो गंभीर मरीजों का उपचार कैसे किया जा रहा है अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही तय क्यों नहीं की जा रही यदि समय पर उपचार नहीं मिलता तो किसी भी घायल की जान जोखिम में पड़ सकती है। *सीएमएचओ की कार्यप्रणाली पर भी सवाल* लगातार सामने आ रही शिकायतों के बावजूद जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) द्वारा लहार सिविल अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने से लोगों में नाराजगी है। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई होती, तो ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होती। *जनता के सवाल* क्या लहार सिविल अस्पताल में इमरजेंसी सेवाएं केवल कागजों तक सीमित हैं? दुर्घटना में घायल मरीज को समय पर इलाज क्यों नहीं मिला? ड्यूटी पर डॉक्टर अनुपस्थित थे तो जिम्मेदारी किसकी है? अस्पताल परिसर के बाहर घायल को लावारिस हालत में क्यों छोड़ दिया गया? जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी लगातार मिल रही शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे?
- गोहद चोराहा थाना क्षेत्र अंतर्गत बंजारे का पुरा के पास बस केंंटर में भिड़ंत,15 घायल एक की मौत गोहद चोराहा थाना क्षेत्र अंतर्गत बंजारे का पूरा के पास शुक्रवार को लगभग 9 बजे बस तथा केंटर में भिड़ंत हो गई। जिसमें एक महिला की मौत हो गई तथा 15 लोग घायल हो गए ।सभी घायलों को गोहद अस्पताल पहुंचाया गया जहां से सात लोगों को ग्वालियर रेफर कर दिया है बताया जा रहा है कि बस नेपाल से पूना जा रही थी।इसी दौरान यह हादसा हो गया1
- उच्च न्यायालय के फैसले का किया स्वागत सितंबर तक छात्रसंघ चुनाव होने की सम्भावना भिंड। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा छात्रसंघ गठन की प्रक्रिया सितंबर 2026 तक सुनिश्चित करने के निर्देश के बाद एनएसयूआई ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों की जीत बताया। शुक्रवार को आयोजित प्रेसवार्ता में एनएसयूआई जिलाध्यक्ष अंकित सिंह तोमर ने कहा कि पिछले नौ वर्षों से छात्रसंघ चुनाव नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण रहा। उन्होंने कहा कि न्यायालय की पहल से प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों को अपना प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिलेगा। अंकित तोमर ने राज्य सरकार से मांग की कि उच्च न्यायालय के निर्देश और लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुरूप बिना देरी विस्तृत चुनाव कार्यक्रम जारी किया जाए। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली से कराए जाएं ताकि प्रत्येक नियमित छात्र अपने प्रतिनिधि का सीधे चुनाव कर सके। उनका कहना था कि छात्रसंघ लोकतंत्र की पहली पाठशाला है इसलिए चुनाव निष्पक्ष पारदर्शी और व्यापक छात्र सहभागिता के साथ होने चाहिए।उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप समयबद्ध कार्रवाई नहीं करती या प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली से पीछे हटती है तो एनएसयूआई प्रदेशव्यापी आंदोलन करेगा जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।प्रेसवार्ता में कांग्रेस शहर जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र भदौरिया ने छात्रों के साथ हो रहे व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्र आंदोलनों पर कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। वहीं कांग्रेस ग्रामीण जिलाध्यक्ष रामशेष बघेल ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव नए नेतृत्व को उभरने का अवसर देते हैं और राजनीति में आने वाले युवाओं के लिए यह महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रसंघ चुनाव लंबे समय से नहीं कराए जाने से युवाओं का लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व प्रभावित हुआ है।1
- 48 घंटे में हुई पार्षदों की सुनवाई, 10 सूत्रीय मांगों पर आश्वासन के बाद धरना समाप्त 48 घंटे में हुई पार्षदों की सुनवाई, 10 सूत्रीय मांगों पर आश्वासन के बाद धरना समाप्त अम्बाह। नगर पालिका में पार्षदों द्वारा विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर शुरू किया गया अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन आखिरकार 48 घंटे बाद समाप्त हो गया। पार्षदों के धरने को अम्बाह विधायक देवेंद्र रामनारायण सखवार ने समर्थन दिया, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया। विधायक के समर्थन के कुछ घंटों बाद एसडीएम प्रतिभा शर्मा और नगर पालिका के सीएमओ शारिव कौसर एक साथ धरना स्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने पार्षदों एवं आम जनता की समस्याएं सुनीं और पार्षदों द्वारा रखी गई मांगों को समझा। इस दौरान अधिकारियों ने पार्षदों को उनकी 10 सूत्रीय मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया। अधिकारियों ने कहा कि मांगों से जुड़े कार्यों को जल्द पूरा किया जाएगा और समस्याओं के निराकरण के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की ओर से मिले आश्वासन के बाद पार्षदों ने अपना धरना-प्रदर्शन समाप्त कर दिया। पार्षदों का कहना है कि उनकी मांगों को प्रशासन द्वारा गंभीरता से सुना गया है और अब उन्हें उम्मीद है कि दिए गए आश्वासन के अनुसार सभी कार्य समय पर पूरे किए जाएंगे। इस तरह करीब 48 घंटे तक चले पार्षदों के धरने का समाधान बातचीत और आश्वासन के बाद हुआ।1
- मेहगांव जनपद की ग्राम पंचायत भारौली कलां में लाखों का घोटाला, भोपाल स्तरीय शिकायत के बाद मचा हड़कंप *ब्रेकिंग न्यूज़: भिंड* - मेहगांव जनपद की ग्राम पंचायत भारौली कलां में लाखों का घोटाला, भोपाल स्तरीय शिकायत के बाद मचा हड़कंप। भिंड जिले की मेहगांव जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत भारौली कलां में बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आने के बाद विकास कार्य ठप हो गए हैं। मामले की मुख्य बातें: शिकायत और कार्रवाई: भोपाल स्तर पर शिकायत के बाद प्रशासन हरकत में आया. जांच के चलते पंचायत के सभी विकास कार्य रोक दिए गए। सचिव निलंबित: 20 मई को पंचायत सचिव को निलंबित किया गया था। -आरोप: आरोप है कि बस स्टैंड निर्माण से पहले ही सरपंच और सचिव ने मिलकर 4 लाख 94 हजार रुपए की हस्तांतरित राशि निकाल ली। प्रशासन की हिदायत: घोटाले के बाद प्रशासन ने महिला सरपंच को सख्त हिदायत दी है। नया विवाद: शिकायत के बाद महिला सरपंच के पुत्र संदीप जेसीबी लोडर लेकर बस स्टैंड की जमीन का समतलीकरण कराने पहुंचा, इसका वीडियो ग्रामीणों ने बना लिया जो अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, ग्रामीणों का कहना है कि नियमों में जेसीबी लोडर से इस तरह का काम करने का प्रावधान नहीं है. इसके बावजूद काम कराया जा रहा है। फिलहाल प्रशासन मामले की जांच कर रहा है।1
- गोहद चोराहा थाना क्षेत्र अंतर्गत बंजारे का पुरा के पास बस केंंटर में भिड़ंत,15 घायल एक की मौत गोहद चोराहा थाना क्षेत्र अंतर्गत बंजारे का पूरा के पास शुक्रवार को लगभग 9 बजे बस तथा केंटर में भिड़ंत हो गई। जिसमें एक महिला की मौत हो गई तथा 15 लोग घायल हो गए ।सभी घायलों को गोहद अस्पताल पहुंचाया गया जहां से सात लोगों को ग्वालियर रेफर कर दिया है बताया जा रहा है कि बस नेपाल से पूना जा रही थी।इसी दौरान यह हादसा हो गया2
- मासूम ने कैमरे पर दिखाई गांव की हकीकत, उदयपुर कला में जलभराव ने खोली विकास कार्यों की पोल बाह तहसील के जैतपुर कलां ब्लॉक अंतर्गत ग्राम उदयपुर कला का एक वीडियो शुक्रवार सुबह 11 बजे से सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक छोटा बच्चा मुस्कराते और मस्ती भरे अंदाज में अपने घर के बाहर की गली दिखा रहा है, लेकिन उसकी यह मासूम वीडियो गांव की बड़ी समस्या को सामने ला रही है। गली में बारिश का पानी भरा हुआ है, जिससे लोगों का आवागमन प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में नालियों का निर्माण तो कराया गया, लेकिन पानी निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण हर वर्ष बारिश में यही स्थिति बन जाती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब हर साल बारिश होना तय है, तो विकास कार्यों के दौरान जल निकासी की स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं की जाती। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से जल्द जलभराव की समस्या का समाधान कर गांववासियों को राहत दिलाने की मांग की है।1