आस्था और लोक संस्कृति का अनूठा संगम: निवाली सहित मालवा-निमाड़ में गणगौर उत्सव की धूम आस्था और लोक संस्कृति का अनूठा संगम: निवाली सहित मालवा-निमाड़ में गणगौर उत्सव की धूम निवाली | स्वतंत्र पत्रकार, सुनील सोनी शनिवार, 21 मार्च 2026 निवाली। राजस्थान और मध्य प्रदेश के लोक-जीवन का सबसे आत्मीय पर्व 'गणगौर' आज चैत्र शुक्ल तृतीया के पावन अवसर पर श्रद्धा और उल्लास के साथ प्रारंभ हो गया। मालवा और निमाड़ अंचल के बड़वानी, धार, खरगोन, खंडवा, हरदा और बुरहानपुर जिलों में आज सुबह 5 बजे 'जवारों की बाड़ी' खुलने के साथ ही उत्सव की अलख जग गई। सोलह श्रृंगार और बाड़ी पूजन की गूँज प्रातः काल से ही समूचा निवाली नगर भक्तिमय वातावरण में सराबोर नजर आया। सुहागिन महिलाओं ने पारंपरिक सोलह श्रृंगार कर पंडितों के निवास पर स्थापित 'माता की बाड़ी' (गेहूं के जवारे) का पूजन किया। हाथ में पूजन थाली, केसरिया चुनरी और मधुर लोक गीतों के साथ बाड़ी पूजन का यह दृश्य भारतीय संस्कृति की जीवंतता को दर्शा रहा था। भक्तों ने माता को नारियल और मिष्ठान अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। बेटी की तरह विदा होकर घर पधारीं रणुबाई माता जिन परिवारों में माता की 'मन्नत' थी, वे ढोल-धमाकों और पारंपरिक नृत्य के साथ माता के रथ लेकर पंडितों के घर पहुंचे। यहाँ गणगौर (रणुबाई माता) और धनिया राजा के स्वरूप जवारों की टोकरियों को रथों में विराजित किया गया। श्रृद्धालु इन रथों को सिर पर उठाकर गाजे-बाजे के साथ अपने घर ले गए। आगामी दो दिनों तक माता को घर की बेटी के समान मानकर उनकी सेवा की जाएगी। लोक परंपरा के अनुसार माता को समय-समय पर पानी, दूध और भोजन 'जिमाने' (खिलाने) की रस्म निभाई जाएगी। गीतों के माध्यम से माता को रोकने और लाड लड़ाने का यह क्रम दो दिनों तक चलेगा, जिसके पश्चात तीसरे दिन नम आंखों से विसर्जन किया जाएगा। नगर परिषद की सराहनीय व्यवस्था निवाली नगर में पंडित राकेश जी के निवास पर बोई गई बाड़ी के पूजन हेतु प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए। मंदिर चौक और पंडित परिवार के घर के समक्ष नगर परिषद द्वारा टेंट लगाया गया और धूल से बचाव के लिए सड़कों पर पानी का छिड़काव करवाया गया। यहाँ घंटों तक माता के रथों के 'रमने' (खेलने) का कार्यक्रम चलता रहा, जिसे देखने के लिए सैकड़ों की संख्या में जनसैलाब उमड़ पड़ा। बाजारों में रौनक और श्रद्धा का सैलाब उत्सव के चलते बाजारों में भी भारी चहल-पहल देखी गई। माता और धनिया राजा के मुखौटे, चुनरी, चूड़ियाँ और श्रृंगार सामग्री की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ रही। श्रद्धा का आलम यह था कि लोग माता के रथों के चरण पखार रहे थे और अपने बच्चों को माता की गोद में रखकर आशीर्वाद दिलवा रहे थे। पंडित परिवारों को भी श्रद्धापूर्वक 'सीदा थाली' (कच्चा राशन) और नकद राशि भेंट कर इस प्राचीन परंपरा का निर्वहन किया गया। दोपहर तक पूरा नगर 'माता के जयकारों' से गुंजायमान रहा
आस्था और लोक संस्कृति का अनूठा संगम: निवाली सहित मालवा-निमाड़ में गणगौर उत्सव की धूम आस्था और लोक संस्कृति का अनूठा संगम: निवाली सहित मालवा-निमाड़ में गणगौर उत्सव की धूम निवाली | स्वतंत्र पत्रकार, सुनील सोनी शनिवार, 21 मार्च 2026 निवाली। राजस्थान और मध्य प्रदेश के लोक-जीवन का सबसे आत्मीय पर्व 'गणगौर' आज चैत्र शुक्ल तृतीया के पावन अवसर पर श्रद्धा और उल्लास के साथ प्रारंभ हो गया। मालवा और निमाड़ अंचल के बड़वानी, धार, खरगोन, खंडवा, हरदा और बुरहानपुर जिलों में आज सुबह 5 बजे 'जवारों की बाड़ी' खुलने के साथ ही उत्सव की अलख जग गई। सोलह श्रृंगार और बाड़ी पूजन की गूँज प्रातः काल से ही समूचा निवाली नगर भक्तिमय वातावरण में सराबोर नजर आया। सुहागिन महिलाओं
ने पारंपरिक सोलह श्रृंगार कर पंडितों के निवास पर स्थापित 'माता की बाड़ी' (गेहूं के जवारे) का पूजन किया। हाथ में पूजन थाली, केसरिया चुनरी और मधुर लोक गीतों के साथ बाड़ी पूजन का यह दृश्य भारतीय संस्कृति की जीवंतता को दर्शा रहा था। भक्तों ने माता को नारियल और मिष्ठान अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। बेटी की तरह विदा होकर घर पधारीं रणुबाई माता जिन परिवारों में माता की 'मन्नत' थी, वे ढोल-धमाकों और पारंपरिक नृत्य के साथ माता के रथ लेकर पंडितों के घर पहुंचे। यहाँ गणगौर (रणुबाई माता) और धनिया राजा के स्वरूप जवारों की टोकरियों को रथों में विराजित किया गया। श्रृद्धालु इन रथों को सिर पर उठाकर गाजे-बाजे के साथ अपने
घर ले गए। आगामी दो दिनों तक माता को घर की बेटी के समान मानकर उनकी सेवा की जाएगी। लोक परंपरा के अनुसार माता को समय-समय पर पानी, दूध और भोजन 'जिमाने' (खिलाने) की रस्म निभाई जाएगी। गीतों के माध्यम से माता को रोकने और लाड लड़ाने का यह क्रम दो दिनों तक चलेगा, जिसके पश्चात तीसरे दिन नम आंखों से विसर्जन किया जाएगा। नगर परिषद की सराहनीय व्यवस्था निवाली नगर में पंडित राकेश जी के निवास पर बोई गई बाड़ी के पूजन हेतु प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए। मंदिर चौक और पंडित परिवार के घर के समक्ष नगर परिषद द्वारा टेंट लगाया गया और धूल से बचाव के लिए सड़कों पर पानी का छिड़काव करवाया गया। यहाँ
घंटों तक माता के रथों के 'रमने' (खेलने) का कार्यक्रम चलता रहा, जिसे देखने के लिए सैकड़ों की संख्या में जनसैलाब उमड़ पड़ा। बाजारों में रौनक और श्रद्धा का सैलाब उत्सव के चलते बाजारों में भी भारी चहल-पहल देखी गई। माता और धनिया राजा के मुखौटे, चुनरी, चूड़ियाँ और श्रृंगार सामग्री की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ रही। श्रद्धा का आलम यह था कि लोग माता के रथों के चरण पखार रहे थे और अपने बच्चों को माता की गोद में रखकर आशीर्वाद दिलवा रहे थे। पंडित परिवारों को भी श्रद्धापूर्वक 'सीदा थाली' (कच्चा राशन) और नकद राशि भेंट कर इस प्राचीन परंपरा का निर्वहन किया गया। दोपहर तक पूरा नगर 'माता के जयकारों' से गुंजायमान रहा
- आस्था और लोक संस्कृति का अनूठा संगम: निवाली सहित मालवा-निमाड़ में गणगौर उत्सव की धूम निवाली | स्वतंत्र पत्रकार, सुनील सोनी शनिवार, 21 मार्च 2026 निवाली। राजस्थान और मध्य प्रदेश के लोक-जीवन का सबसे आत्मीय पर्व 'गणगौर' आज चैत्र शुक्ल तृतीया के पावन अवसर पर श्रद्धा और उल्लास के साथ प्रारंभ हो गया। मालवा और निमाड़ अंचल के बड़वानी, धार, खरगोन, खंडवा, हरदा और बुरहानपुर जिलों में आज सुबह 5 बजे 'जवारों की बाड़ी' खुलने के साथ ही उत्सव की अलख जग गई। सोलह श्रृंगार और बाड़ी पूजन की गूँज प्रातः काल से ही समूचा निवाली नगर भक्तिमय वातावरण में सराबोर नजर आया। सुहागिन महिलाओं ने पारंपरिक सोलह श्रृंगार कर पंडितों के निवास पर स्थापित 'माता की बाड़ी' (गेहूं के जवारे) का पूजन किया। हाथ में पूजन थाली, केसरिया चुनरी और मधुर लोक गीतों के साथ बाड़ी पूजन का यह दृश्य भारतीय संस्कृति की जीवंतता को दर्शा रहा था। भक्तों ने माता को नारियल और मिष्ठान अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। बेटी की तरह विदा होकर घर पधारीं रणुबाई माता जिन परिवारों में माता की 'मन्नत' थी, वे ढोल-धमाकों और पारंपरिक नृत्य के साथ माता के रथ लेकर पंडितों के घर पहुंचे। यहाँ गणगौर (रणुबाई माता) और धनिया राजा के स्वरूप जवारों की टोकरियों को रथों में विराजित किया गया। श्रृद्धालु इन रथों को सिर पर उठाकर गाजे-बाजे के साथ अपने घर ले गए। आगामी दो दिनों तक माता को घर की बेटी के समान मानकर उनकी सेवा की जाएगी। लोक परंपरा के अनुसार माता को समय-समय पर पानी, दूध और भोजन 'जिमाने' (खिलाने) की रस्म निभाई जाएगी। गीतों के माध्यम से माता को रोकने और लाड लड़ाने का यह क्रम दो दिनों तक चलेगा, जिसके पश्चात तीसरे दिन नम आंखों से विसर्जन किया जाएगा। नगर परिषद की सराहनीय व्यवस्था निवाली नगर में पंडित राकेश जी के निवास पर बोई गई बाड़ी के पूजन हेतु प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए। मंदिर चौक और पंडित परिवार के घर के समक्ष नगर परिषद द्वारा टेंट लगाया गया और धूल से बचाव के लिए सड़कों पर पानी का छिड़काव करवाया गया। यहाँ घंटों तक माता के रथों के 'रमने' (खेलने) का कार्यक्रम चलता रहा, जिसे देखने के लिए सैकड़ों की संख्या में जनसैलाब उमड़ पड़ा। बाजारों में रौनक और श्रद्धा का सैलाब उत्सव के चलते बाजारों में भी भारी चहल-पहल देखी गई। माता और धनिया राजा के मुखौटे, चुनरी, चूड़ियाँ और श्रृंगार सामग्री की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ रही। श्रद्धा का आलम यह था कि लोग माता के रथों के चरण पखार रहे थे और अपने बच्चों को माता की गोद में रखकर आशीर्वाद दिलवा रहे थे। पंडित परिवारों को भी श्रद्धापूर्वक 'सीदा थाली' (कच्चा राशन) और नकद राशि भेंट कर इस प्राचीन परंपरा का निर्वहन किया गया। दोपहर तक पूरा नगर 'माता के जयकारों' से गुंजायमान रहा4
- पानसेमल। चैत्र नवरात्र के साथ ही निमाड़ अंचलों सहित अन्य स्थानो पर गणगौर माताजी की स्थापना एवं पूजन शुरू हो जाता है ।महिलाओं द्वारा घरों की साफ सफाई एवं आवश्यक तैयारिया की जाती हैं।शनिवार तीज तिथि पर नगर के श्रीराम मंदिर में गणगौर पर्व पर माताजी की बाड़ी सुबह दर्शन एवं पूजन हेतु खोली गई। भिकनगांव के पुजारी हेमंत तारे एवं उनकी माताजी द्वारा बाड़ी का पूजन किया जा रहा है।पानसेमल खेतिया सहित जिले के विभिन्न स्थानों से आए श्रद्धालुओं ने सहपरिवार कुशल कामना के साथ पूजा अर्चना की।चैत्र नवरात्र में परिवारों द्वारा विधिविधान से माताजी की स्थापना कर पूजन किया जाता है। श्रीराम मंदिर पर महिलाओं द्वारा भक्ति भाव एवं उल्लास के साथ गणगौर गीत एवं झालरिए गाए जा रहे है।निमाड़ी समाज गणगौर उत्सव समिति सदस्यों ने बताया कि इस वर्ष 8 से 10 परिवारों में माताजी के रथ बनाए गए हैं,तीज तिथि पर बाड़ी खुलने के बाद रथों को मंदिर परिसर में लाया जाता है जहां माताजी के दर्शन कर उन्हें ढोल बाजे के साथ घर पर लाया जाता है।रविवार को श्यामलाल उपाध्याय के परिवार में माताजी के रथ विश्राम करेंगे जिसके बाद माताजी का विसर्जन गणगौर घाट पर किया जाता है।उत्सव के दौरान पुलिस थाना प्रभारी मंशाराम वगेन एवं नगर परिषद अधिकारी कर्मचारियों का विशेष सहयोग रहता है।1
- बड़वानी। शनिवार को निमाड़ के प्रसिद्ध लोकपर्व गणगौर का शुभारंभ हुआ। शुक्ल पक्ष की तीज पर माता की बाड़ी खुलते ही सुबह 5 बजे से श्रद्धालु पूजन-अर्चन के लिए जुटने लगे। हजारों लोगों ने बाड़ी स्थल पर पूजा कर जवारे लिए और रणुबाई व धनीयर राजा के रथ सिर पर रखकर घर ले गए। घरों में रथ स्थापित कर माता की सेवा और भजन-कीर्तन किए जाएंगे। रविवार को माता को झमलिया गार्डन ले जाकर पानी पिलाया जाएगा, जबकि मंगलवार को विदाई होगी। शहर के विभिन्न स्थानों पर दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ रही और पूरे निमाड़ में पर्व उत्साह के साथ मनाया जा रहा है।1
- पारंपरिक वेशभूषा में भक्ति में डूबे श्रद्धालु, घर में शांति बनाए रखने की कामना की1
- राजपुर। नगर में पारंपरिक उत्साह, श्रद्धा और सांस्कृतिक रंगों के साथ गणगौर पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस पावन अवसर पर महिलाओं और युवतियों ने सोलह श्रृंगार कर माता गौरी एवं भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और अपने परिवार की सुख-समृद्धि तथा अखंड सौभाग्य की कामना की। नगर के विभिन्न क्षेत्रों से गणगौर की भव्य और आकर्षक झांकियां निकाली गईं, जिनमें ईसर-गौरी की सुसज्जित प्रतिमाएं श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहीं। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक लोकगीतों की गूंज के बीच महिलाएं नृत्य करती नजर आईं, जिससे पूरे नगर में उत्सव जैसा माहौल बन गया। यह भव्य जुलूस नगर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा, जहां श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुष्प वर्षा के साथ स्वागत किया। जगह-जगह नागरिकों द्वारा पेयजल और प्रसाद की व्यवस्थाएं भी की गईं, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। पर्व के समापन अवसर पर महिलाओं ने विधिवत पूजा कर अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की। पूरे आयोजन के दौरान राजपुर नगर भक्ति, आस्था और उल्लास के रंग में रंगा नजर आया।1
- Post by Hemant Nagziriya2
- Post by NIMAD DASTAK NEWS1
- पानसेमल विधानसभा क्षेत्र के ग्रामों में तेज हवाओं से हुए नुकसान का जायजा लिया। उनके साथ जनप्रतिनिधि,किसान एवं ग्राम के वरिष्ठ जन मौजूद रहे। किसानों से मिलकर उन्होंने यथासंभव सहायता हेतु आश्वस्त की भी किया है।1