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रायबरेली सरेनी में दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट, वीडियो वायरल सरेनी थाना क्षेत्र के भगताखेड़ा मजरे निसगर में दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई,
रोहित यादव भारत न्यूज़ 24
रायबरेली सरेनी में दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट, वीडियो वायरल सरेनी थाना क्षेत्र के भगताखेड़ा मजरे निसगर में दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई,
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- रायबरेली सरेनी में दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट, वीडियो वायरल सरेनी थाना क्षेत्र के भगताखेड़ा मजरे निसगर में दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई,1
- रायबरेली में आठ वर्षीय बालक की नहर में डूब कर दर्दनाक मौत हो गई है। बालक की मौत से परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है। हादसा तब हुआ जब बालक शौच के लिए गया था। मामला शिवगढ़ थाना इलाके के ढेकवा गांव का है। यहां के रहने वाले अलीमुद्दीन का 8 वर्षीय बेटा अनस शौच के लिए गांव के किनारे से निकली शिवगढ़ रजबहा के किनारे गया था।उसी दौरान अचानक उसका पैर फिसल गया जिससे वह नहर में चला गया। पानी अधिक होने की वजह से वह बाहर नहीं आ सका। आसपास के लोगों से सूचना पाकर मौके पर पहुंचे परिजन बालक को लेकर आनन - फानन सीएचसी शिवगढ़ पहुंचे। यहाँ चिकित्सकों ने बालक को मृत घोषित कर दिया। थाना शिवगढ़ प्रभारी निरीक्षक शिवगढ़ राजीव सिंह ने बताया कि अस्पताल से मेमो प्राप्त हुआ है मौके पर हलका इंचार्ज को भेजा गया है।अग्रिम विधिक कार्यवाही की जा रही है। स्थान -शिवगढ़ रायबरेली रिपोर्ट -बलवंत कुमार1
- Ramnesh kumar agnihotri1
- कानून, राजनीति और भारत की न्यायिक साख पर एक आलोचनात्मक दृष्टि अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम भारत के संवैधानिक ढाँचे में ऐतिहासिक अन्याय के विरुद्ध एक आवश्यक सुरक्षा-कवच है। इसका उद्देश्य स्पष्ट है—सदियों के उत्पीड़न, सामाजिक बहिष्कार और हिंसा से पीड़ित समुदायों को त्वरित न्याय और संरक्षण। लेकिन जब कोई कानून अपने नैतिक उद्देश्य से विचलित होकर राजनीतिक सुविधा, प्रशासनिक जल्दबाज़ी या दुरुपयोग की आशंका का उपकरण बन जाए, तब वह न केवल निर्दोष नागरिकों के अधिकारों को चोट पहुँचाता है, बल्कि भारत की न्यायिक विश्वसनीयता को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रश्नांकित करता है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह कहना कि गिरफ्तारी से पहले प्राथमिक जाँच आवश्यक है, इसी संतुलन को साधने का प्रयास था—ताकि पीड़ितों को सुरक्षा मिले और निर्दोषों को मनमानी से बचाया जा सके। लेकिन उस निर्णय को निष्प्रभावी करने के लिए अधिनियम में संशोधन कर दिया गया, जिससे बिना जाँच तत्काल गिरफ्तारी का रास्ता फिर खोल दिया गया। यह संशोधन केवल एक कानूनी बदलाव नहीं था; यह राज्य की प्राथमिकताओं का राजनीतिक उद्घोष था। ## दरभंगा (कुशेश्वर) FIR 22/2026: एक स्थानीय मामला, वैश्विक सवाल बिहार के दरभंगा ज़िले की FIR संख्या 22 (2026) को अगर यहाँ वर्णित तथ्यों/आरोपों के आलोक में देखा जाए, तो यह मामला केवल एक गाँव या थाना-क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। इसमें उभरते प्रश्न अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की विधि-प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। 1. आपराधिक प्रक्रिया का कथित दुरुपयोग यदि FIR की उत्पत्ति किसी लंबित भुगतान/धन-उगाही विवाद से जुड़ी बताई जाती है और वह पंचायत में सिद्ध नहीं हो पाती, तो यह क्रिमिनल लॉ को सिविल विवाद सुलझाने के हथियार में बदलने का उदाहरण बनता है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार विमर्श में इसे abuse of process माना जाता है। 2. जन्म से अपराधीकरण का आरोप यदि अभियुक्तों को केवल ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने के आधार पर सूचीबद्ध किया गया—तो यह व्यक्तिगत अपराध की जगह सामूहिक पहचान पर दंड का आरोप बनता है। विडंबना यह है कि जिस कानून का उद्देश्य जाति-आधारित उत्पीड़न से बचाव है, उसी के तहत यदि किसी दूसरी जाति को “सामूहिक अपराधी” की तरह चिह्नित किया जाए, तो यह संवैधानिक समानता के सिद्धांत के विरुद्ध जाता है। 3. सामाजिक यथार्थ बनाम आरोप यदि शिकायतकर्ता स्वयं आर्थिक रूप से सशक्त बताया जाता है—ढाबा, आधुनिक सुविधाएँ, और गाँव में सामाजिक मेलजोल के प्रमाण—तो “छुआछूत” या “सामूहिक जातिगत हिंसा” के आरोपों की तथ्यात्मक जाँच अनिवार्य हो जाती है। बिना जाँच गिरफ्तारी का प्रावधान यहीं खतरनाक बनता है। 4. पूरे समुदाय को आरोपी बनाने का प्रयास पूरे गाँव/मोहल्ले की एक जाति को घसीट लेना, नामों में त्रुटियाँ (जैसे किसी पुरुष के पिता को महिला दर्शाना) — ये सब FIR की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं। अंतरराष्ट्रीय न्याय-मानकों में ऐसी त्रुटियाँ bad faith prosecution के संकेत मानी जाती हैं। 5. विदेशों में रह रहे लोगों पर कार्रवाई और इंटरपोल का प्रश्न यदि अभियुक्तों में ऐसे लोग भी शामिल हों जो अन्य राज्यों या विदेशों में काम कर रहे हों, तो बिना प्राथमिक जाँच के उनकी गिरफ्तारी के लिए इंटरपोल नोटिस की कल्पना ही भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर असहज स्थिति में डाल सकती है। इंटरपोल का दुरुपयोग पहले ही कई देशों में आलोचना का विषय रहा है; भारत के लिए यह कूटनीतिक और कानूनी जोखिम बन सकता है। 6. असंभव कथाएँ और तर्क का अभाव सैकड़ों हथियारबंद लोगों का एक निहत्थे व्यक्ति को नुकसान न पहुँचा पाना—यह विवरण सामान्य विवेक के स्तर पर भी सवाल खड़े करता है। जब ऐसी कथाएँ बिना जाँच कानूनी दस्तावेज़ बन जाती हैं, तो न्याय-प्रणाली की साख कमजोर होती है। 7. मुआवज़ा/प्रोत्साहन और अभियुक्तों की संख्या यदि मुआवज़ा या राहत अभियुक्तों की संख्या से अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हो, तो यह प्रोत्साहन-संरचना (incentive structure) खुद दुरुपयोग को जन्म दे सकती है। यह प्रश्न केवल नैतिक नहीं, बल्कि नीति-निर्माण का है। ## अंतरराष्ट्रीय निहितार्थ: भारत किस छवि के साथ खड़ा होगा? आज भारत स्वयं को rule of law, democracy और human rights का समर्थक बताता है। लेकिन यदि— * बिना जाँच गिरफ्तारी सामान्य प्रक्रिया बन जाए, * जातिगत पहचान के आधार पर सामूहिक अभियोजन के आरोप लगें, * और ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को घसीटा जाए, तो भारत पर यह आरोप लग सकता है कि वह मानवाधिकार कानूनों का चयनात्मक उपयोग कर रहा है। यह केवल विदेशी मीडिया या रिपोर्टों का सवाल नहीं; यह निवेश, प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनी सहयोग को भी प्रभावित कर सकता है। सुरक्षा और न्याय के बीच संतुलन अनिवार्य एससी/एसटी अत्याचार अधिनियम को कमजोर करना समाधान नहीं है—लेकिन उसके कथित दुरुपयोग पर आँख मूँद लेना भी नहीं। पीड़ितों की सुरक्षा और निर्दोषों के अधिकार, दोनों को साथ लेकर चलना ही संविधान की आत्मा है। यदि सरकार और न्यायपालिका इस संतुलन को पुनः स्थापित नहीं करतीं, तो हर ऐसा विवाद—जैसा कि दरभंगा का यह मामला—स्थानीय अन्याय से आगे बढ़कर भारत की वैश्विक न्यायिक साख पर सवाल बनता जाएगा। और तब यह केवल एक FIR नहीं रहेगी, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय चेतावनी बन जाएगी।1
- रायबरेली के सरेनी थाना क्षेत्र में दो पक्षों मे मारपीट, वीडियो वायरल रायबरेली: सरेनी थाना क्षेत्र के भगताखेड़ा मजरे निसगर गांव में दो पक्षों के बीच पुरानी रंजिश के चलते जमकर मारपीट हुई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें महिलाओं सहित करीब एक दर्जन से अधिक लोग लाठी-डंडों से एक-दूसरे पर हमला करते दिख रहे हैं।मारपीट के दौरान गांव में चीख-पुकार मच गई और कई लोगों को गंभीर चोटें आईं। घायलों को तत्काल प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है, जहां उनका मेडिकल कराया जा रहा है।सरेनी थाना प्रभारी रमेश चंद्र यादव ने बताया कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। दोनों पक्षों के बीच पुरानी दुश्मनी के कारण कहासुनी हुई, जिसके बाद यह झड़प हुई। पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।1
- दोनों वीडियो देख अंतर बताईए - नियम तो वही है फिर या तो इन 6 वर्षों में सरकार की नीयत बदल गई या फिर इन वर्षों में बड़ी तेजी से संसदीय परंपराओं में गिरावट आ गई… लोकसभा अध्यक्ष महोदय का ही पुराना वीडियो गवाही दे रहा है कि राष्ट्रपति अभिभाषण पर चर्चा का दायरा असीमित है। लोकसभा अध्यक्ष जी दोहरा मापदंड क्यों ? पराग प्रसाद रावत राष्ट्रीय महासचिव अखिल भारतीय राजीव गांधी विचार मंच1
- फतेहपुर व्यूरो रिपोर्ट उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य आज फतेहगढ़ जिले के एक दिवसीय दौरे पर रहेंगे1
- व्यापारियों ने एसडीएम सदर प्रफुल्ल शर्मा को ज्ञापन सौंपा। मांग की है कि नगर पालिका परिषद बोर्ड ने 22 जून 2023 को सर्वसम्मति से सुपर मार्केट की मरम्मत का प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन अभी तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया गया है। भवन की गंभीर स्थिति को देखते हुए यह आवश्यक है कि एक निष्पक्ष उच्च स्तरीय तकनीकी कमेटी गठित कर स्थलीय जांच कराई जाए। उसकी रिपोर्ट के आधार पर तत्काल मरम्मत कार्य शुरू किया जाए। इससे न केवल शासकीय धन की बचत होगी, बल्कि लोगों के रोजगार पर दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा। एसडीएम ने व्यापारियों की मांगों को पूरा कराने का भरोसा दिया। इस मौके पर मीडिया प्रभारी पारुल वाजपेयी, राजीव अग्रवाल, संजय गुप्ता, अमित वाजपेयी, विराट गुप्ता, उज्जवल गोयल, अनंत कपूर, अवतार सिंह मोंगा, संजय त्रिपाठी, सतीश चावला, जसप्रीत सिंह गांधी, निर्मल वाजपेयी, श्याम अग्रवाल, श्यामू गौड़, शिवकुमार गुप्ता, राजेश अग्रवाल, बबलू शुक्ला मौजूद रहे। स्थान -रायबरेली सुपर मार्केट रिपोर्ट -बलवंत कुमार1