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उमरिया जिले में गेहूं पिसाने को लेकर शुरू हुए एक विवाद ने हिंसक रूप ले लिया है। इस घटना में एक दलित परिवार पर जानलेवा हमला किया गया है, जिसके बाद पीड़ित पक्ष न्याय की गुहार लगाने के लिए पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय पहुंचा है।

1 hr ago
user_JIYAUDDIN ANSARI
JIYAUDDIN ANSARI
Voice of people Budar, Shahdol•
1 hr ago

उमरिया जिले में गेहूं पिसाने को लेकर शुरू हुए एक विवाद ने हिंसक रूप ले लिया है। इस घटना में एक दलित परिवार पर जानलेवा हमला किया गया है, जिसके बाद पीड़ित पक्ष न्याय की गुहार लगाने के लिए पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय पहुंचा है।

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  • उमरिया जिले में गेहूं पिसाने को लेकर शुरू हुए एक विवाद ने हिंसक रूप ले लिया है। इस घटना में एक दलित परिवार पर जानलेवा हमला किया गया है, जिसके बाद पीड़ित पक्ष न्याय की गुहार लगाने के लिए पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय पहुंचा है।
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    उमरिया जिले में गेहूं पिसाने को लेकर शुरू हुए एक विवाद ने हिंसक रूप ले लिया है। इस घटना में एक दलित परिवार पर जानलेवा हमला किया गया है, जिसके बाद पीड़ित पक्ष न्याय की गुहार लगाने के लिए पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय पहुंचा है।
    user_JIYAUDDIN ANSARI
    JIYAUDDIN ANSARI
    Voice of people Budar, Shahdol•
    1 hr ago
  • मध्य प्रदेश के अमरकंटक में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान एक गरीब महिला की झोपड़ी तोड़े जाने के बाद उसका मार्मिक विलाप देखने को मिला। पोस्ट के अनुसार, नर्मदा माई की इस पवित्र भूमि पर अपनी झोपड़ी गंवाने वाली इस असहाय महिला का चित्कार ऐसा है, जैसे किसी गरीब की झोपड़ी टूटने पर होता है, जो अंतरात्मा को हिला देने वाला है। उल्लेख किया गया है कि यह महिला कोई पक्का होटल बनाकर पैसे नहीं पीट रही थी; बल्कि उसकी यह झोपड़ी ही उसका सब कुछ थी। पोस्ट में यह भी इशारा किया गया है कि यदि उसके पास पैसे होते तो वह सबको 'सेट' कर लेती और उसकी झोपड़ी की एक ईंट भी नहीं हिलती। हालांकि, अतिक्रमण को बिल्कुल भी उचित नहीं बताते हुए, जिला प्रशासन और स्थानीय प्रशासन की कार्यवाही को सर्वथा उचित ठहराया गया है। लेकिन साथ ही यह भी कहा गया है कि अच्छा होता यदि ऐसे वास्तविक गरीबों को चिन्हित करके उन्हें समझा-बुझाकर कहीं अन्यत्र प्रधानमंत्री आवास देकर हटाया जाता। इस पूरी कार्यवाही में जिस संवेदनशीलता और सावधानी का परिचय दिया जाना चाहिए था, उसका पूर्ण अभाव रहा। नर्मदा भूमि में किसी गरीब असहाय महिला का यह मार्मिक विलाप मन को व्यथित करने वाला है, और स्थानीय प्रशासन से ऐसी कार्यवाही में भविष्य के लिए संवेदना तथा अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपेक्षा की गई है।
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    मध्य प्रदेश के अमरकंटक में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान एक गरीब महिला की झोपड़ी तोड़े जाने के बाद उसका मार्मिक विलाप देखने को मिला। पोस्ट के अनुसार, नर्मदा माई की इस पवित्र भूमि पर अपनी झोपड़ी गंवाने वाली इस असहाय महिला का चित्कार ऐसा है, जैसे किसी गरीब की झोपड़ी टूटने पर होता है, जो अंतरात्मा को हिला देने वाला है।

उल्लेख किया गया है कि यह महिला कोई पक्का होटल बनाकर पैसे नहीं पीट रही थी; बल्कि उसकी यह झोपड़ी ही उसका सब कुछ थी। पोस्ट में यह भी इशारा किया गया है कि यदि उसके पास पैसे होते तो वह सबको 'सेट' कर लेती और उसकी झोपड़ी की एक ईंट भी नहीं हिलती।

हालांकि, अतिक्रमण को बिल्कुल भी उचित नहीं बताते हुए, जिला प्रशासन और स्थानीय प्रशासन की कार्यवाही को सर्वथा उचित ठहराया गया है। लेकिन साथ ही यह भी कहा गया है कि अच्छा होता यदि ऐसे वास्तविक गरीबों को चिन्हित करके उन्हें समझा-बुझाकर कहीं अन्यत्र प्रधानमंत्री आवास देकर हटाया जाता। इस पूरी कार्यवाही में जिस संवेदनशीलता और सावधानी का परिचय दिया जाना चाहिए था, उसका पूर्ण अभाव रहा।

नर्मदा भूमि में किसी गरीब असहाय महिला का यह मार्मिक विलाप मन को व्यथित करने वाला है, और स्थानीय प्रशासन से ऐसी कार्यवाही में भविष्य के लिए संवेदना तथा अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपेक्षा की गई है।
    user_पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार
    पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार
    Astrologer सोहागपुर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • शहडोल जिले की गोहपारू पुलिस ने बुधवार दोपहर लगभग 2:30 बजे अपहरण और दुष्कर्म के एक फरार आरोपी लवकुश बैगा को पलसउ गांव से गिरफ्तार करने की जानकारी दी है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपहरण की घटना को अंजाम देने के बाद दुष्कर्म भी किया था और तब से वह लगातार फरार चल रहा था। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर गोहपारू पुलिस ने लवकुश बैगा को पकड़ा और उसे माननीय न्यायालय में पेश किया।
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    शहडोल जिले की गोहपारू पुलिस ने बुधवार दोपहर लगभग 2:30 बजे अपहरण और दुष्कर्म के एक फरार आरोपी लवकुश बैगा को पलसउ गांव से गिरफ्तार करने की जानकारी दी है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपहरण की घटना को अंजाम देने के बाद दुष्कर्म भी किया था और तब से वह लगातार फरार चल रहा था। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर गोहपारू पुलिस ने लवकुश बैगा को पकड़ा और उसे माननीय न्यायालय में पेश किया।
    user_Akhilesh Mishra
    Akhilesh Mishra
    सोहागपुर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • छत्तीसगढ़ के मरवाही वनमंडल क्षेत्र में चार हाथियों के उत्पात से इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है। हाथियों के विचरण के कई मामले सामने आए हैं, जिसमें मरवाही में एक छात्रावास की बाउंड्रीवॉल तोड़ते हुए हाथियों का वीडियो भी सामने आया है। हाथियों के इस दल ने किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुँचाया है। इसके साथ ही, नर्सरी में लगे आम के फसलों को भी हाथियों ने क्षति पहुँचाई है। वर्तमान में ये चारों हाथी गुल्लीडांड बीट के वन तालाब जंगल क्षेत्र में मौजूद हैं और अलग-अलग क्षेत्रों में विचरण कर रहे हैं। इस खतरे के बावजूद, ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर हाथियों के मोबाइल में वीडियो बनाने के लिए उनके करीब पहुँच रहे हैं। वन विभाग की टीम हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नज़र रख रही है, लेकिन वन अमला ग्रामीणों की भीड़ को रोकने में नाकाम साबित हो रहा है।
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    छत्तीसगढ़ के मरवाही वनमंडल क्षेत्र में चार हाथियों के उत्पात से इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है। हाथियों के विचरण के कई मामले सामने आए हैं, जिसमें मरवाही में एक छात्रावास की बाउंड्रीवॉल तोड़ते हुए हाथियों का वीडियो भी सामने आया है।

हाथियों के इस दल ने किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुँचाया है। इसके साथ ही, नर्सरी में लगे आम के फसलों को भी हाथियों ने क्षति पहुँचाई है। वर्तमान में ये चारों हाथी गुल्लीडांड बीट के वन तालाब जंगल क्षेत्र में मौजूद हैं और अलग-अलग क्षेत्रों में विचरण कर रहे हैं।

इस खतरे के बावजूद, ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर हाथियों के मोबाइल में वीडियो बनाने के लिए उनके करीब पहुँच रहे हैं। वन विभाग की टीम हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नज़र रख रही है, लेकिन वन अमला ग्रामीणों की भीड़ को रोकने में नाकाम साबित हो रहा है।
    user_Prayas kaiwart
    Prayas kaiwart
    स्वदेश न्यूज चैनल म.प्र./छ.ग. मरवाही, गौरेला पेंड्रा मरवाही, छत्तीसगढ़•
    5 hrs ago
  • बजाग ब्लॉक के अंतर्गत आमाडोंगरी में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण कार्य के दौरान पेयजल की पाइपलाइन टूट जाने से क्षेत्र की पानी आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई। इस घटना के कारण ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त हो गया, जिसके चलते उन्होंने विरोध प्रदर्शन करते हुए चक्का जाम कर दिया। ग्रामीणों का गुस्सा पाइपलाइन फोड़ने से उत्पन्न हुई पेयजल समस्या को लेकर था। यह चक्का जाम संबंधित विभाग और प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन और समझौते के बाद ही समाप्त किया गया।
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    बजाग ब्लॉक के अंतर्गत आमाडोंगरी में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण कार्य के दौरान पेयजल की पाइपलाइन टूट जाने से क्षेत्र की पानी आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई। इस घटना के कारण ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त हो गया, जिसके चलते उन्होंने विरोध प्रदर्शन करते हुए चक्का जाम कर दिया। ग्रामीणों का गुस्सा पाइपलाइन फोड़ने से उत्पन्न हुई पेयजल समस्या को लेकर था। यह चक्का जाम संबंधित विभाग और प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन और समझौते के बाद ही समाप्त किया गया।
    user_Santosh Ahirwar
    Santosh Ahirwar
    Voice of people डिंडोरी, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • डिंडौरी जिले में किसानों को जैविक खेती और नवाचार से जोड़ने के लिए नर्मदांचल गौ सेवा समिति ढोंढ़ा के जैविक कृषि विशेषज्ञ एवं भारतीय किसान संघ डिंडौरी के जिलाध्यक्ष बिहारी लाल साहू ने एक पहल की है। वे किसानों को धान की बेहतर पैदावार के लिए जैविक विधि से बीजोपचार और नर्सरी तैयार करने का प्रशिक्षण दे रहे हैं। साहू का कहना है कि बीजों का समय पर उपचार करने से उक्ठा सहित कई बीजजनित और मृदाजनित रोगों से फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, धान की अच्छी उपज के लिए सीधे बुवाई के बजाय नर्सरी तैयार कर रोपाई करना अधिक लाभकारी है। यदि बीजोपचार जैविक तरीके से किया जाए, तो अंकुरण क्षमता बढ़ती है और पौधों की शुरुआती वृद्धि बेहतर होती है। बीजोपचार के लिए 'बीजामृत' नामक जैविक घोल तैयार किया जाता है, जिसके निर्माण में लगभग 10 किलोग्राम गोबर, 10 लीटर गौमूत्र, 500 ग्राम खाने का चूना, 5 लीटर साफ पानी और एक पाव कच्चे दूध का उपयोग होता है। इन सभी सामग्रियों को मिलाकर 24 घंटे छाया में रखा जाता है। तैयार मिश्रण का छिड़काव 100 किलोग्राम बीज पर कर उसे अच्छी तरह मिलाया जाता है, ताकि सभी बीजों पर एक समान परत बन जाए। उपचारित बीजों को छाया में सुखाकर अगले दिन बोआई करने की सलाह दी जाती है। इस प्रक्रिया से बीजों में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने और पौधों की जड़ों के बेहतर विकास में मदद मिल सकती है। बिहारी लाल साहू ने किसान भाइयों से आग्रह किया कि वे बीज बोने से पहले बीजोपचार अवश्य करें, क्योंकि जैविक विधि अपनाने से लागत कम करने और फसल की शुरुआती सुरक्षा में मदद मिल सकती है।
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    डिंडौरी जिले में किसानों को जैविक खेती और नवाचार से जोड़ने के लिए नर्मदांचल गौ सेवा समिति ढोंढ़ा के जैविक कृषि विशेषज्ञ एवं भारतीय किसान संघ डिंडौरी के जिलाध्यक्ष बिहारी लाल साहू ने एक पहल की है। वे किसानों को धान की बेहतर पैदावार के लिए जैविक विधि से बीजोपचार और नर्सरी तैयार करने का प्रशिक्षण दे रहे हैं। साहू का कहना है कि बीजों का समय पर उपचार करने से उक्ठा सहित कई बीजजनित और मृदाजनित रोगों से फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, धान की अच्छी उपज के लिए सीधे बुवाई के बजाय नर्सरी तैयार कर रोपाई करना अधिक लाभकारी है। यदि बीजोपचार जैविक तरीके से किया जाए, तो अंकुरण क्षमता बढ़ती है और पौधों की शुरुआती वृद्धि बेहतर होती है। बीजोपचार के लिए 'बीजामृत' नामक जैविक घोल तैयार किया जाता है, जिसके निर्माण में लगभग 10 किलोग्राम गोबर, 10 लीटर गौमूत्र, 500 ग्राम खाने का चूना, 5 लीटर साफ पानी और एक पाव कच्चे दूध का उपयोग होता है। इन सभी सामग्रियों को मिलाकर 24 घंटे छाया में रखा जाता है।

तैयार मिश्रण का छिड़काव 100 किलोग्राम बीज पर कर उसे अच्छी तरह मिलाया जाता है, ताकि सभी बीजों पर एक समान परत बन जाए। उपचारित बीजों को छाया में सुखाकर अगले दिन बोआई करने की सलाह दी जाती है। इस प्रक्रिया से बीजों में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने और पौधों की जड़ों के बेहतर विकास में मदद मिल सकती है। बिहारी लाल साहू ने किसान भाइयों से आग्रह किया कि वे बीज बोने से पहले बीजोपचार अवश्य करें, क्योंकि जैविक विधि अपनाने से लागत कम करने और फसल की शुरुआती सुरक्षा में मदद मिल सकती है।
    user_वाइस ऑफ़ राइट्स न्यूज चैनल
    वाइस ऑफ़ राइट्स न्यूज चैनल
    Voice of people डिंडोरी, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • डिंडौरी जिले के ढोंढ़ा में जनजाति कल्याण केन्द्र बरगांव प्रकल्प प्रमुख, वरिष्ठ प्रचारक श्याम जी और महाकौशल प्रांत गौसेवा प्रमुख घनश्याम जी ने दौरा किया। इस प्रवास के दौरान, उन्होंने जैविक खेती के महत्व पर विशेष जोर देते हुए इसे मानव जीवन, पशु-पक्षियों तथा पूरे पर्यावरण के अस्तित्व का आधार बताया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि खेत की जमीन और मिट्टी ही अन्न उत्पन्न करने की मूल शक्ति है, जिससे मानव तथा अन्य जीवों का जीवन चलता है, इसलिए मिट्टी का संरक्षण और उसकी उर्वरता को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। रासायनिक खेती के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता को हुए नुकसान, जमीन के बंजर होने, तथा जल, वायु और खाद्य पदार्थों के प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की गई। इसके परिणामस्वरूप मानव स्वास्थ्य, पशुओं और पर्यावरण पर पड़ रहे सीधे प्रभाव को देखते हुए, गौवंश आधारित जैविक खेती को एकमात्र सही विकल्प के रूप में सामने रखा गया। जैविक खेती प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके मिट्टी की उर्वरता बनाए रखती है, पर्यावरण को संतुलित रखती है, और शुद्ध, सुरक्षित तथा स्वास्थ्यवर्धक फसलें उत्पन्न करती है। यह पद्धति दीर्घकालीन लाभ प्रदान करती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन को सुरक्षित रखती है। इस संदर्भ में, यह आवश्यक बताया गया कि अधिक से अधिक किसान जैविक खेती को अपनाएँ। साथ ही, केंद्र सरकार को भी जैविक खेती करने वाले किसानों को सीधे सहयोग प्रदान करना चाहिए, जिसमें प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता, बाजार की सुविधा और उचित मूल्य की व्यवस्था शामिल है। इससे किसानों का मनोबल बढ़ेगा और देश में जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। अंततः यह निष्कर्ष निकाला गया कि अपने खेत, मिट्टी, स्वास्थ्य और पर्यावरण को बचाने के लिए जैविक खेती को अपनाना ही एकमात्र ऐसा मार्ग है, जो एक स्वस्थ, समृद्ध और संतुलित भविष्य की ओर ले जाता है। इस प्रवास के दौरान बायोगैस संयंत्र और जीवामृत जैसी जैविक खेती की महत्वपूर्ण तकनीकों पर भी चर्चा की गई। बायोगैस संयंत्र में पशुओं के गोबर को पानी में घोलकर टैंक में डाला जाता है, जहाँ बिना ऑक्सीजन के जैविक पदार्थों के विघटन से मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनती है। यह गैस सीधे चूल्हे तक पहुँचती है, जबकि बची हुई स्लरी उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद के रूप में उपयोग की जाती है। इसी प्रकार, जीवामृत देसी गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन (दाल का आटा) और खेत की मिट्टी से बना एक प्राकृतिक तरल जैविक खाद है। हाल ही में, डिंडौरी जिले के जाने-माने बहुचर्चित ऑर्गेनिक फार्मिंग एक्सपर्ट बिहारी लाल साहू ने, जो विगत 10 वर्षों से लगातार जैविक खेती कर रहे हैं, जनजाति कल्याण केन्द्र महाकौशल बरगांव प्रकल्प प्रमुख (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक) श्याम जी भाईसाहब, महाकौशल प्रांत के गौसेवा प्रमुख (आर एस एस के प्रचारक) घनश्याम जी भाईसाहब, और यूट्यूबर बर्मन ब्लॉग्स के हेमराज बर्मन के साथ नर्मदांचल गौ सेवा केन्द्र ढोंढ़ा में संचालित बीआरसी और जैविक फार्म हाउस का दौरा किया। बिहारी लाल साहू स्वयं जैविक खेती करने के साथ-साथ ग्रामीण किसान बंधुओं, महाविद्यालयों, विद्यालयों, सरकारी संस्थानों और एनजीओ जैसे अनेक मंचों के माध्यम से डिंडौरी सहित विभिन्न जिलों में जैविक खेती का अमूल्य प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने अपने फार्म हाउस में जैविक खेती का लाइव डेमो भी दिखाया, जिसमें गोबर गैस संयंत्र को जलता हुआ प्रदर्शित किया गया। सभी आगंतुकों ने उनके इन प्रयासों की सराहना की। यह जानकारी डिंडौरी ब्यूरो से नीरज रजक द्वारा दिनांक 10 जून, 2026 को प्रदान की गई।
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    डिंडौरी जिले के ढोंढ़ा में जनजाति कल्याण केन्द्र बरगांव प्रकल्प प्रमुख, वरिष्ठ प्रचारक श्याम जी और महाकौशल प्रांत गौसेवा प्रमुख घनश्याम जी ने दौरा किया। इस प्रवास के दौरान, उन्होंने जैविक खेती के महत्व पर विशेष जोर देते हुए इसे मानव जीवन, पशु-पक्षियों तथा पूरे पर्यावरण के अस्तित्व का आधार बताया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि खेत की जमीन और मिट्टी ही अन्न उत्पन्न करने की मूल शक्ति है, जिससे मानव तथा अन्य जीवों का जीवन चलता है, इसलिए मिट्टी का संरक्षण और उसकी उर्वरता को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

रासायनिक खेती के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता को हुए नुकसान, जमीन के बंजर होने, तथा जल, वायु और खाद्य पदार्थों के प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की गई। इसके परिणामस्वरूप मानव स्वास्थ्य, पशुओं और पर्यावरण पर पड़ रहे सीधे प्रभाव को देखते हुए, गौवंश आधारित जैविक खेती को एकमात्र सही विकल्प के रूप में सामने रखा गया। जैविक खेती प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके मिट्टी की उर्वरता बनाए रखती है, पर्यावरण को संतुलित रखती है, और शुद्ध, सुरक्षित तथा स्वास्थ्यवर्धक फसलें उत्पन्न करती है। यह पद्धति दीर्घकालीन लाभ प्रदान करती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन को सुरक्षित रखती है।

इस संदर्भ में, यह आवश्यक बताया गया कि अधिक से अधिक किसान जैविक खेती को अपनाएँ। साथ ही, केंद्र सरकार को भी जैविक खेती करने वाले किसानों को सीधे सहयोग प्रदान करना चाहिए, जिसमें प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता, बाजार की सुविधा और उचित मूल्य की व्यवस्था शामिल है। इससे किसानों का मनोबल बढ़ेगा और देश में जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। अंततः यह निष्कर्ष निकाला गया कि अपने खेत, मिट्टी, स्वास्थ्य और पर्यावरण को बचाने के लिए जैविक खेती को अपनाना ही एकमात्र ऐसा मार्ग है, जो एक स्वस्थ, समृद्ध और संतुलित भविष्य की ओर ले जाता है।

इस प्रवास के दौरान बायोगैस संयंत्र और जीवामृत जैसी जैविक खेती की महत्वपूर्ण तकनीकों पर भी चर्चा की गई। बायोगैस संयंत्र में पशुओं के गोबर को पानी में घोलकर टैंक में डाला जाता है, जहाँ बिना ऑक्सीजन के जैविक पदार्थों के विघटन से मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनती है। यह गैस सीधे चूल्हे तक पहुँचती है, जबकि बची हुई स्लरी उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद के रूप में उपयोग की जाती है। इसी प्रकार, जीवामृत देसी गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन (दाल का आटा) और खेत की मिट्टी से बना एक प्राकृतिक तरल जैविक खाद है।

हाल ही में, डिंडौरी जिले के जाने-माने बहुचर्चित ऑर्गेनिक फार्मिंग एक्सपर्ट बिहारी लाल साहू ने, जो विगत 10 वर्षों से लगातार जैविक खेती कर रहे हैं, जनजाति कल्याण केन्द्र महाकौशल बरगांव प्रकल्प प्रमुख (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक) श्याम जी भाईसाहब, महाकौशल प्रांत के गौसेवा प्रमुख (आर एस एस के प्रचारक) घनश्याम जी भाईसाहब, और यूट्यूबर बर्मन ब्लॉग्स के हेमराज बर्मन के साथ नर्मदांचल गौ सेवा केन्द्र ढोंढ़ा में संचालित बीआरसी और जैविक फार्म हाउस का दौरा किया। बिहारी लाल साहू स्वयं जैविक खेती करने के साथ-साथ ग्रामीण किसान बंधुओं, महाविद्यालयों, विद्यालयों, सरकारी संस्थानों और एनजीओ जैसे अनेक मंचों के माध्यम से डिंडौरी सहित विभिन्न जिलों में जैविक खेती का अमूल्य प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने अपने फार्म हाउस में जैविक खेती का लाइव डेमो भी दिखाया, जिसमें गोबर गैस संयंत्र को जलता हुआ प्रदर्शित किया गया। सभी आगंतुकों ने उनके इन प्रयासों की सराहना की। यह जानकारी डिंडौरी ब्यूरो से नीरज रजक द्वारा दिनांक 10 जून, 2026 को प्रदान की गई।
    user_Neeraj rajak
    Neeraj rajak
    Voice of people डिंडोरी, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • मनावर में एक व्यापारी का ढाय लाख रुपए का बैग गायब हो गया था। मनावर पुलिस ने इस घटना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए कुछ ही समय में गुम हुए बैग को ढूंढ निकाला। पुलिस की इस तत्परता के कारण व्यापारी को उसका बैग सुरक्षित वापस मिल गया, जिसके लिए व्यापारी ने पुलिस का हृदय से आभार व्यक्त किया।
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    मनावर में एक व्यापारी का ढाय लाख रुपए का बैग गायब हो गया था। मनावर पुलिस ने इस घटना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए कुछ ही समय में गुम हुए बैग को ढूंढ निकाला। पुलिस की इस तत्परता के कारण व्यापारी को उसका बैग सुरक्षित वापस मिल गया, जिसके लिए व्यापारी ने पुलिस का हृदय से आभार व्यक्त किया।
    user_JIYAUDDIN ANSARI
    JIYAUDDIN ANSARI
    Voice of people Budar, Shahdol•
    18 hrs ago
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