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मेडिकल कॉलेज प्रस्तावित स्थान पर ही बनेगा साथ ही अतिरिक्त भूमि का भी होगा समाधान : किशोर मेडिकल कॉलेज, बिजली पानी, अतिरिक्त भूमि को लेकर विधायक किशोर ने की स्थिति स्पष्ट

1 day ago
user_Uklive Uttrakhand
Uklive Uttrakhand
टिहरी, टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड•
1 day ago

मेडिकल कॉलेज प्रस्तावित स्थान पर ही बनेगा साथ ही अतिरिक्त भूमि का भी होगा समाधान : किशोर मेडिकल कॉलेज, बिजली पानी, अतिरिक्त भूमि को लेकर विधायक किशोर ने की स्थिति स्पष्ट

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  • उत्तराखंड बेरोज़गार संघ के बैनरतले प्रदेश भर के युवा परेड ग्राउंड में पहुंचने शुरू हो गए हैं। उत्तराखंड बेरोज़गार संघ के बैनरतले प्रदेश भर के युवा परेड ग्राउंड में पहुंचने शुरू हो गए हैं।
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    उत्तराखंड बेरोज़गार संघ के बैनरतले प्रदेश भर के युवा परेड ग्राउंड में पहुंचने शुरू हो गए हैं। 
उत्तराखंड बेरोज़गार संघ के बैनरतले प्रदेश भर के युवा परेड ग्राउंड में पहुंचने शुरू हो गए हैं।
    user_Journalist Amit nautiyal
    Journalist Amit nautiyal
    Media house Tehri Garhwal, Uttarakhand•
    2 hrs ago
  • दिनेश कश्यप नाथ जी बृजमोहन गुप्ता जिला महासचिव बजरंग सेना आज दिन शुक्रवार 30 अक्टूबर 2026 एक ताजा खबर और न्यूज़ आपको देनी है थेरेपी सेंटर सहसपुर विधानसभा एसबीआई के सामने एक्सचेंज गली के पास ही ब्रिज मोहन गुप्ता जी जोकि थेरेपी सेंटर निशुल्क चला रहे हैं इसमें हमारे बजरंग सेना के पति अधिकारी चौकी समाज सेना गांव के लिए करते रहते हैं आप सभी वहां जाकर संपर्क कर सकते हैं सहसपुर विधानसभा के प्रभारी अनुज बंसल जी भी शामिल है यह समाचार आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है यह जानकारी आपको देनी है थेरेपी के लिए आपके नजदीक की सहसपुर विधानसभा एक्सचेंज वाली गली में थेरेपी सेंटर खुल चुका है जय श्री राम जी आज की ताजा खबर दिनेश कश्यप नाथ जी की तरफ से बजरंग सेना राष्ट्रीय मंत्री धर्म रक्षा दल प्रकोष्ठ आप सभी के लिए थेरेपी सेंटर निशुल्क है ज्यादा से चादर पहुंच कर सेवा का लाभ ले आप सभी का धन्यवाद
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    दिनेश कश्यप नाथ जी 
बृजमोहन गुप्ता 
जिला महासचिव 
बजरंग सेना 
आज दिन शुक्रवार 30 अक्टूबर 2026 
एक ताजा खबर और न्यूज़ आपको देनी है थेरेपी सेंटर सहसपुर विधानसभा एसबीआई के सामने एक्सचेंज गली के पास ही ब्रिज मोहन गुप्ता जी जोकि थेरेपी सेंटर निशुल्क चला रहे हैं इसमें हमारे बजरंग सेना के पति अधिकारी चौकी समाज सेना गांव के लिए करते रहते हैं आप सभी वहां जाकर संपर्क कर सकते हैं सहसपुर विधानसभा के प्रभारी अनुज बंसल जी भी शामिल है यह समाचार आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है यह जानकारी आपको देनी है थेरेपी के लिए आपके नजदीक की सहसपुर विधानसभा एक्सचेंज वाली गली में थेरेपी सेंटर खुल चुका है जय श्री राम जी आज की ताजा खबर दिनेश कश्यप नाथ जी की तरफ से बजरंग सेना राष्ट्रीय मंत्री धर्म रक्षा दल प्रकोष्ठ 
आप सभी के लिए थेरेपी सेंटर निशुल्क है ज्यादा से चादर पहुंच कर सेवा का लाभ ले आप सभी का धन्यवाद
    user_दिनेश कश्यप नाथ जी
    दिनेश कश्यप नाथ जी
    विकास नगर, देहरादून, उत्तराखंड•
    29 min ago
  • पहाड़ों से इश्क, शिखर तक पहुंचने का जुनून... सार्थक ने बढ़ा रहे टिहरी का मान सफलता की कहानी।टिहरी कुछ लोग पहाड़ों को दूर से निहारते हैं, कुछ उनकी खूबसूरती में खो जाते हैं और कुछ ऐसे भी होते हैं, जो उन्हीं पहाड़ों की दुर्गम चोटियों को अपना लक्ष्य बना लेते हैं। टिहरी के सार्थक कुड़ियाल इन्हीं जुनूनी लोगों में से एक हैं। जिन पहाड़ों को देखकर लोग उनकी विशालता और कठिनाइयों का अंदाजा लगाते हैं, सार्थक ने उन्हीं पहाड़ों को अपने सपनों की मंजिल बनाया। संकल्प, साहस और अदम्य इच्छाशक्ति के दम पर उन्होंने 6,137 मीटर ऊंची हिमालय की बेहद चुनौतीपूर्ण श्रीकंठ चोटी का सफल आरोहण कर एक नया कीर्तिमान भी स्थापित किया है। इस उपलब्धि के साथ वे दुनिया के सबसे युवा श्रीकंठ पर्वतारोही बने हैं। उनकी इस सफलता ने न केवल टिहरी गढ़वाल, बल्कि पूरे उत्तराखंड को गौरवान्वित किया है। *पहाड़ों की गोद में पला सपना, बना जीवन का लक्ष्य* जनपद टिहरी गढ़वाल के विकासखंड प्रतापनगर के ग्राम शुक्री निवासी सार्थक कुड़ियाल का जन्म अगस्त 2001 में नई टिहरी में हुआ। उनके पिता श्री रमेश कुड़ियाल पेशे से पत्रकार हैं, जबकि माता श्रीमती सरिता कुड़ियाल समाजसेविका हैं। वे पूर्व में भारत सरकार की महत्वपूर्ण परियोजना महिला समाख्या में जिला समन्वयक के पद पर भी कार्य कर चुकी हैं। सार्थक की प्रारंभिक शिक्षा ऑल सेंट्स कॉन्वेंट स्कूल एवं केंद्रीय विद्यालय, नई टिहरी में हुई। इसके बाद उन्होंने देहरादून से आगे की पढ़ाई पूरी की। शिक्षा के साथ-साथ प्रकृति और पहाड़ों के प्रति उनका आकर्षण गहराता गया। धीरे-धीरे यही आकर्षण उनके जीवन का उद्देश्य और पर्वतारोहण उनका करियर बन गया। *कठिन प्रशिक्षण से निखरी पर्वतारोहण की दक्षता* पर्वतारोहण केवल शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता, अनुशासन, तकनीकी दक्षता और विपरीत परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता का भी कठिन परीक्षण है। इस चुनौती को समझते हुए सार्थक ने अपने हुनर को व्यवस्थित प्रशिक्षण के जरिए निखारा। उन्होंने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम), उत्तरकाशी से बेसिक माउंटेनियरिंग कोर्स, सर्च एंड रेस्क्यू कोर्स तथा एमओआई कोर्स किया। इसके अतिरिक्त मनाली स्थित अभिमास (ABHIMAS) से एडवांस माउंटेनियरिंग कोर्स भी पूरा किया। प्रशिक्षण और निरंतर अभ्यास के जरिए उन्होंने पर्वतारोहण की तकनीकी बारीकियों को सीखा और कई चुनौतीपूर्ण चोटियों पर सफल आरोहण कर अपने अनुभव को विस्तार दिया। *श्रीकंठ चोटी : जहां हर कदम पर होती है हौसले की परीक्षा* समुद्र तल से 6,137 मीटर की ऊंचाई पर स्थित श्रीकंठ चोटी को तकनीकी दृष्टि से बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। यहां तक पहुंचने का रास्ता केवल ऊंचाई की चुनौती नहीं, बल्कि पर्वतारोहियों के धैर्य, कौशल और शारीरिक क्षमता की भी परीक्षा लेता है। कम ऑक्सीजन, खड़ी ढलानें और प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियां इस अभियान को और कठिन बना देती हैं। बताया जाता है कि अब तक इस चोटी पर केवल चार पर्वतारोहण दल ही सफलतापूर्वक आरोहण कर पाए हैं। ऐसे में सार्थक की सफलता पर्वतारोहण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उत्तराखंड सरकार की ओर से वर्ष 2022-23 में प्रायोजित श्रीकंठ चोटी पर्वतारोहण अभियान के लिए भी सार्थक का चयन हुआ था। अभियान में सफलता के बाद उन्हें माननीय मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया था। *पर्वत उनके लिए मंजिल नहीं, जीवन का हिस्सा हैं* सार्थक के लिए पर्वतारोहण महज किसी ऊंची चोटी को फतह करने का रोमांच नहीं है। यह पहाड़ों को करीब से जानने, प्रकृति के विस्तार को महसूस करने और मानव जीवन तथा प्रकृति के बीच गहरे संबंध को समझने का माध्यम है। पर्वतारोहण के साथ-साथ उन्होंने जल क्रीड़ा के क्षेत्र में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया है। प्रकृति के प्रति उनका लगाव और पहाड़ों के प्रति समर्पण उनके व्यक्तित्व की विशिष्ट पहचान है। सार्थक कहते हैं, "पहाड़ मेरे लिए केवल पहाड़ नहीं हैं, बल्कि मेरा जीवन हैं। मैं हर ऊंचे से ऊंचे पहाड़ की चोटी पर पहुंचकर एक और पहाड़ देखना चाहता हूं। मेरे लिए पर्वतारोहण किसी चोटी को फतह करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पहाड़ों के विस्तार, प्रकृति में उनके महत्व और मानव जीवन के साथ उनके अंतरसंबंध को समझने का एक माध्यम है। किसी ऊंची चोटी पर पहुंचकर दुनिया को देखने का नजरिया ही बदल जाता है।" उनके इस विचार में पर्वतारोहण के प्रति उनका जुनून ही नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति उनकी संवेदनशीलता भी झलकती है। *युवाओं के लिए प्रेरणा, टिहरी के लिए गौरव* सार्थक की यह उपलब्धि बताती है कि पहाड़ों की कठिन परिस्थितियों में पले-बढ़े युवाओं के सपने भी हिमालय की चोटियों की तरह ऊंचे हो सकते हैं। जरूरत है तो केवल अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण, निरंतर अभ्यास और चुनौतियों से जूझने के साहस की। सार्थक के लिए श्रीकंठ चोटी का आरोहण कोई अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि हिमालय की अनगिनत ऊंचाइयों की ओर बढ़ते सफर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। पहाड़ों को अपना पहला प्रेम और जीवन का अभिन्न हिस्सा मानने वाले सार्थक की यह सफलता नई पीढ़ी के युवाओं को अपने सपनों को पहचानने, उन्हें लक्ष्य में बदलने और पूरे समर्पण के साथ उन्हें हासिल करने की प्रेरणा देती है। कहते हैं कि शिखर पर पहुंचने वाले कदमों के पीछे वर्षों का अभ्यास और अनगिनत संघर्ष छिपे होते हैं। सार्थक कुड़ियाल की कहानी भी इसी जुनून, समर्पण और हौसले की कहानी है, जिसने टिहरी की धरती से निकलकर हिमालय की ऊंचाइयों पर अपनी पहचान बनाई है।
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    पहाड़ों से इश्क, शिखर तक पहुंचने का जुनून... सार्थक ने बढ़ा रहे टिहरी का मान

सफलता की कहानी।टिहरी कुछ लोग पहाड़ों को दूर से निहारते हैं, कुछ उनकी खूबसूरती में खो जाते हैं और कुछ ऐसे भी होते हैं, जो उन्हीं पहाड़ों की दुर्गम चोटियों को अपना लक्ष्य बना लेते हैं। टिहरी के सार्थक कुड़ियाल इन्हीं जुनूनी लोगों में से एक हैं। जिन पहाड़ों को देखकर लोग उनकी विशालता और कठिनाइयों का अंदाजा लगाते हैं, सार्थक ने उन्हीं पहाड़ों को अपने सपनों की मंजिल बनाया। संकल्प, साहस और अदम्य इच्छाशक्ति के दम पर उन्होंने 6,137 मीटर ऊंची हिमालय की बेहद चुनौतीपूर्ण श्रीकंठ चोटी का सफल आरोहण कर एक नया कीर्तिमान भी स्थापित किया है। इस उपलब्धि के साथ वे दुनिया के सबसे युवा श्रीकंठ पर्वतारोही बने हैं। उनकी इस सफलता ने न केवल टिहरी गढ़वाल, बल्कि पूरे उत्तराखंड को गौरवान्वित किया है।
*पहाड़ों की गोद में पला सपना, बना जीवन का लक्ष्य*
जनपद टिहरी गढ़वाल के विकासखंड प्रतापनगर के ग्राम शुक्री निवासी सार्थक कुड़ियाल का जन्म अगस्त 2001 में नई टिहरी में हुआ। उनके पिता श्री रमेश कुड़ियाल पेशे से पत्रकार हैं, जबकि माता श्रीमती सरिता कुड़ियाल समाजसेविका हैं। वे पूर्व में भारत सरकार की महत्वपूर्ण परियोजना महिला समाख्या में जिला समन्वयक के पद पर भी कार्य कर चुकी हैं।
सार्थक की प्रारंभिक शिक्षा ऑल सेंट्स कॉन्वेंट स्कूल एवं केंद्रीय विद्यालय, नई टिहरी में हुई। इसके बाद उन्होंने देहरादून से आगे की पढ़ाई पूरी की। शिक्षा के साथ-साथ प्रकृति और पहाड़ों के प्रति उनका आकर्षण गहराता गया। धीरे-धीरे यही आकर्षण उनके जीवन का उद्देश्य और पर्वतारोहण उनका करियर बन गया।
*कठिन प्रशिक्षण से निखरी पर्वतारोहण की दक्षता*
पर्वतारोहण केवल शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता, अनुशासन, तकनीकी दक्षता और विपरीत परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता का भी कठिन परीक्षण है। इस चुनौती को समझते हुए सार्थक ने अपने हुनर को व्यवस्थित प्रशिक्षण के जरिए निखारा।
उन्होंने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम), उत्तरकाशी से बेसिक माउंटेनियरिंग कोर्स, सर्च एंड रेस्क्यू कोर्स तथा एमओआई कोर्स किया। इसके अतिरिक्त मनाली स्थित अभिमास (ABHIMAS) से एडवांस माउंटेनियरिंग कोर्स भी पूरा किया। प्रशिक्षण और निरंतर अभ्यास के जरिए उन्होंने पर्वतारोहण की तकनीकी बारीकियों को सीखा और कई चुनौतीपूर्ण चोटियों पर सफल आरोहण कर अपने अनुभव को विस्तार दिया।
*श्रीकंठ चोटी : जहां हर कदम पर होती है हौसले की परीक्षा*
समुद्र तल से 6,137 मीटर की ऊंचाई पर स्थित श्रीकंठ चोटी को तकनीकी दृष्टि से बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। यहां तक पहुंचने का रास्ता केवल ऊंचाई की चुनौती नहीं, बल्कि पर्वतारोहियों के धैर्य, कौशल और शारीरिक क्षमता की भी परीक्षा लेता है। कम ऑक्सीजन, खड़ी ढलानें और प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियां इस अभियान को और कठिन बना देती हैं।
बताया जाता है कि अब तक इस चोटी पर केवल चार पर्वतारोहण दल ही सफलतापूर्वक आरोहण कर पाए हैं। ऐसे में सार्थक की सफलता पर्वतारोहण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
उत्तराखंड सरकार की ओर से वर्ष 2022-23 में प्रायोजित श्रीकंठ चोटी पर्वतारोहण अभियान के लिए भी सार्थक का चयन हुआ था। अभियान में सफलता के बाद उन्हें माननीय मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया था।
*पर्वत उनके लिए मंजिल नहीं, जीवन का हिस्सा हैं*
सार्थक के लिए पर्वतारोहण महज किसी ऊंची चोटी को फतह करने का रोमांच नहीं है। यह पहाड़ों को करीब से जानने, प्रकृति के विस्तार को महसूस करने और मानव जीवन तथा प्रकृति के बीच गहरे संबंध को समझने का माध्यम है। पर्वतारोहण के साथ-साथ उन्होंने जल क्रीड़ा के क्षेत्र में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया है। प्रकृति के प्रति उनका लगाव और पहाड़ों के प्रति समर्पण उनके व्यक्तित्व की विशिष्ट पहचान है।
सार्थक कहते हैं, "पहाड़ मेरे लिए केवल पहाड़ नहीं हैं, बल्कि मेरा जीवन हैं। मैं हर ऊंचे से ऊंचे पहाड़ की चोटी पर पहुंचकर एक और पहाड़ देखना चाहता हूं। मेरे लिए पर्वतारोहण किसी चोटी को फतह करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पहाड़ों के विस्तार, प्रकृति में उनके महत्व और मानव जीवन के साथ उनके अंतरसंबंध को समझने का एक माध्यम है। किसी ऊंची चोटी पर पहुंचकर दुनिया को देखने का नजरिया ही बदल जाता है।"
उनके इस विचार में पर्वतारोहण के प्रति उनका जुनून ही नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति उनकी संवेदनशीलता भी झलकती है।
*युवाओं के लिए प्रेरणा, टिहरी के लिए गौरव*
सार्थक की यह उपलब्धि बताती है कि पहाड़ों की कठिन परिस्थितियों में पले-बढ़े युवाओं के सपने भी हिमालय की चोटियों की तरह ऊंचे हो सकते हैं। जरूरत है तो केवल अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण, निरंतर अभ्यास और चुनौतियों से जूझने के साहस की।
सार्थक के लिए श्रीकंठ चोटी का आरोहण कोई अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि हिमालय की अनगिनत ऊंचाइयों की ओर बढ़ते सफर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। पहाड़ों को अपना पहला प्रेम और जीवन का अभिन्न हिस्सा मानने वाले सार्थक की यह सफलता नई पीढ़ी के युवाओं को अपने सपनों को पहचानने, उन्हें लक्ष्य में बदलने और पूरे समर्पण के साथ उन्हें हासिल करने की प्रेरणा देती है।
कहते हैं कि शिखर पर पहुंचने वाले कदमों के पीछे वर्षों का अभ्यास और अनगिनत संघर्ष छिपे होते हैं। सार्थक कुड़ियाल की कहानी भी इसी जुनून, समर्पण और हौसले की कहानी है, जिसने टिहरी की धरती से निकलकर हिमालय की ऊंचाइयों पर अपनी पहचान बनाई है।
    user_Arunabh Raturi
    Arunabh Raturi
    Local News Reporter ऋषिकेश, देहरादून, उत्तराखंड•
    49 min ago
  • *विशेष दिव्यांग शिविरों में 150 दिव्यांगजनों को जारी किए गए दिव्यांगता प्रमाण पत्र* *दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए भी किया गया चिह्नीकरण, यूडीआईडी कार्ड हेतु पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी* *देहरादून, 30 अक्टूबर 2026 (सू.वि.)* जिलाधिकारी डॉ आशीष चौहान की पहल पर दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने तथा उन्हें आवश्यक सुविधाओं से जोड़ने के उद्देश्य से जनपद में आयोजित विशेष दिव्यांग शिविरों में 150 दिव्यांगजनों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। साथ ही, पात्र दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए उनका चिह्नीकरण तथा यूडीआईडी कार्ड बनवाने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण भी किया गया। जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिडियाल ने बताया कि अक्टूबर में देहरादून के विकासखंडों एवं क्षेत्रों में चार विशेष दिव्यांग शिविर आयोजित किए गए। इनमें 21 अक्टूबर को विकासखंड रायपुर के अंतर्गत गांधी शताब्दी अस्पताल में आयोजित शिविर में 31 व 22 अक्टूबर को विकासखंड डोईवाला परिसर में 39 तथा 23 अक्टूबर को राजकीय इंटर कॉलेज मेहूंवाला परिसर (शिमला बाईपास) में 26 और 26 अक्टूबर को रियांश रिजॉर्ट, शिमला बाईपास रोड, समीप सींगनिवाला, शेरपुर में आयोजित शिविर में 54 दिव्यांगजनों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किए गए। जिला समाज कल्याण अधिकारी ने बताया कि शिविरों का आयोजन स्वास्थ्य विभाग एवं जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र के सहयोग से किया गया। शिविरों में दिव्यांगजनों का स्वास्थ्य परीक्षण कर दिव्यांगता की जांच की गई तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रमाण पत्र जारी किए गए। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री दिव्यांग सहायता केंद्र के माध्यम से स्वास्थ्य परीक्षण के उपरांत पात्र दिव्यांगजनों को आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए चिह्नित किया गया। दिव्यांगता प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए आवेदकों द्वारा यूडीआईडी पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण किया जाता है। इसके आधार पर संबंधित चिकित्सकों द्वारा दिव्यांगता की जांच की जाती है तथा चिकित्सकीय परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं। जिलाधिकारी के दिशा निर्देशन में विशेष शिविरों के माध्यम से दिव्यांगजनों को एक ही स्थान पर स्वास्थ्य परीक्षण, प्रमाण पत्र एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है।
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    *विशेष दिव्यांग शिविरों में 150 दिव्यांगजनों को जारी किए गए दिव्यांगता प्रमाण पत्र*
*दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए भी किया गया चिह्नीकरण, यूडीआईडी कार्ड हेतु पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी*
*देहरादून, 30 अक्टूबर 2026 (सू.वि.)*
जिलाधिकारी डॉ आशीष चौहान की पहल पर दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने तथा उन्हें आवश्यक सुविधाओं से जोड़ने के उद्देश्य से जनपद में आयोजित विशेष दिव्यांग शिविरों में 150 दिव्यांगजनों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। साथ ही, पात्र दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए उनका चिह्नीकरण तथा यूडीआईडी कार्ड बनवाने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण भी किया गया।
जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिडियाल ने बताया कि अक्टूबर में देहरादून के विकासखंडों एवं क्षेत्रों में चार विशेष दिव्यांग शिविर आयोजित किए गए। इनमें 21 अक्टूबर को विकासखंड रायपुर के अंतर्गत गांधी शताब्दी अस्पताल में आयोजित शिविर में 31 व 22 अक्टूबर को विकासखंड डोईवाला परिसर में 39 तथा 23 अक्टूबर को राजकीय इंटर कॉलेज मेहूंवाला परिसर (शिमला बाईपास) में 26 और 26 अक्टूबर को रियांश रिजॉर्ट, शिमला बाईपास रोड, समीप सींगनिवाला, शेरपुर में आयोजित शिविर में 54 दिव्यांगजनों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किए गए।
जिला समाज कल्याण अधिकारी ने बताया कि शिविरों का आयोजन स्वास्थ्य विभाग एवं जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र के सहयोग से किया गया। शिविरों में दिव्यांगजनों का स्वास्थ्य परीक्षण कर दिव्यांगता की जांच की गई तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रमाण पत्र जारी किए गए। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री दिव्यांग सहायता केंद्र के माध्यम से स्वास्थ्य परीक्षण के उपरांत पात्र दिव्यांगजनों को आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए चिह्नित किया गया।
दिव्यांगता प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए आवेदकों द्वारा यूडीआईडी पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण किया जाता है। इसके आधार पर संबंधित चिकित्सकों द्वारा दिव्यांगता की जांच की जाती है तथा चिकित्सकीय परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं।
जिलाधिकारी के दिशा निर्देशन में विशेष शिविरों के माध्यम से दिव्यांगजनों को एक ही स्थान पर स्वास्थ्य परीक्षण, प्रमाण पत्र एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है।
    user_Uma shankar Kukreti
    Uma shankar Kukreti
    Newspaper publisher ऋषिकेश, देहरादून, उत्तराखंड•
    2 hrs ago
  • **सर्प मित्र भारत भूषण पेले के इशारों पर चलता दिखा खतरनाक नाग!** 🐍 **The Aman Times | डोईवाला** **सर्प मित्र भारत भूषण पेले के इशारों पर चलता दिखा खतरनाक नाग!** डोईवाला के राजीव नगर निवासी सर्प मित्र भारत भूषण पेले अपनी जान जोखिम में डालकर लगातार खतरनाक सांपों का रेस्क्यू कर लोगों को भय से निजात दिला रहे हैं। पेले के रेस्क्यू करने के अनोखे अंदाज को देखकर ऐसा लगता है मानो सांप भी उनके इशारों को समझने लगे हैं। ताजा वीडियो में एक नाग उनके इशारों को समझकर धीरे-धीरे जंगल की ओर जाता दिखाई दे रहा है। **देखिए रोमांचक वीडियो, कैसे पेले के इशारे पर जंगल की ओर चला गया नाग!** सर्प मित्र की अपील है कि सांप दिखाई देने पर खुद जोखिम न उठाएं, बल्कि विशेषज्ञ की मदद लें।
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    **सर्प मित्र भारत भूषण पेले के इशारों पर चलता दिखा खतरनाक नाग!**

🐍 **The Aman Times | डोईवाला**
**सर्प मित्र भारत भूषण पेले के इशारों पर चलता दिखा खतरनाक नाग!**
डोईवाला के राजीव नगर निवासी सर्प मित्र भारत भूषण पेले अपनी जान जोखिम में डालकर लगातार खतरनाक सांपों का रेस्क्यू कर लोगों को भय से निजात दिला रहे हैं।
पेले के रेस्क्यू करने के अनोखे अंदाज को देखकर ऐसा लगता है मानो सांप भी उनके इशारों को समझने लगे हैं। ताजा वीडियो में एक नाग उनके इशारों को समझकर धीरे-धीरे जंगल की ओर जाता दिखाई दे रहा है।
**देखिए रोमांचक वीडियो, कैसे पेले के इशारे पर जंगल की ओर चला गया नाग!**
सर्प मित्र की अपील है कि सांप दिखाई देने पर खुद जोखिम न उठाएं, बल्कि विशेषज्ञ की मदद लें।
    user_राजकुमार अग्रवाल डोईवाला/देहरा
    राजकुमार अग्रवाल डोईवाला/देहरा
    Lawyer डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड•
    5 hrs ago
  • दून में एलिवेटेड रोड के नए रूट से तीन सौ  पचास परिवारों के घरों पर संकट, लोग सड़क पर दून में एलिवेटेड रोड के नए रूट से तीन सौ  पचास परिवारों के घरों पर संकट, लोग सड़क पर आशारोड़ी-मोहकमपुर एलिवेटेड रोड: एलाइनमेंट बदलने से भड़के लोग, घर बचाने को कर रहे आंदोलन,
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    दून में एलिवेटेड रोड के नए रूट से तीन सौ  पचास परिवारों के घरों पर संकट, लोग सड़क पर
दून में एलिवेटेड रोड के नए रूट से तीन सौ  पचास परिवारों के घरों पर संकट, लोग सड़क पर
आशारोड़ी-मोहकमपुर एलिवेटेड रोड: एलाइनमेंट बदलने से भड़के लोग, घर बचाने को कर रहे आंदोलन,
    user_Deep Maithani - News India Update NIU Journalist Uttarakhand
    Deep Maithani - News India Update NIU Journalist Uttarakhand
    Graphic designer विकास नगर, देहरादून, उत्तराखंड•
    6 hrs ago
  • *किसानों के हक़ की लड़ाई में अकेले खड़े रहे विधायक उमेश कुमार जी — किसान मजदूर महासंग्राम संगठन ने की सराहना!* किसानों की आवाज़ उठाना ही जनप्रतिनिधि की असली जिम्मेदारी है! देहरादून, उत्तराखंड। खानपुर विधानसभा क्षेत्र के निर्दलीय विधायक श्री उमेश कुमार जी द्वारा किसानों एवं जनहित के मुद्दों को लेकर विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के घटनाक्रम पर किसान मजदूर महासंग्राम संगठन उनकी किसानों के प्रति प्रतिबद्धता और सदन में किसानों की समस्याओं को उठाने के प्रयासों की सराहना करता है। श्री उमेश कुमार जी ने किसानों की समस्याओं, गन्ना किसानों के बकाया भुगतान, प्राकृतिक आपदा से बर्बाद हुई फसलों तथा किसानों पर पड़ रहे आर्थिक बोझ जैसे गंभीर विषयों को विधानसभा में उठाया। उन्होंने विपक्ष से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने पर भी अपनी निराशा सार्वजनिक रूप से व्यक्त की है। *जब किसानों के मुद्दों पर साथ की जरूरत थी, तब समर्थन क्यों नहीं मिला?* किसान मजदूर महासंग्राम संगठन का मानना है कि किसानों के सवाल किसी एक पार्टी, दल या व्यक्ति के नहीं होते। किसान का बकाया भुगतान, फसल का उचित मूल्य, आपदा से हुए नुकसान का मुआवजा और बिजली-पानी जैसी बुनियादी समस्याएं जनहित के मुद्दे हैं। किसानों के हितों पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सभी जनप्रतिनिधियों को एकजुट होना चाहिए। *किसान मजदूर महासंग्राम संगठन का स्पष्ट संदेश* हम किसानों के हक़, सम्मान और न्याय के लिए आवाज़ उठाने वाले प्रत्येक जनप्रतिनिधि के प्रयासों की सराहना करते हैं। किसान को केवल आश्वासन नहीं, न्याय चाहिए। किसान को केवल भाषण नहीं, उसका हक़ चाहिए। हमारा संघर्ष किसी व्यक्ति या दल के विरोध में नहीं, बल्कि किसानों के अधिकारों, मजदूरों के सम्मान और आम जनता को न्याय दिलाने के लिए है। *जय जवान! जय किसान!* *किसान मजदूर महासंग्राम संगठन जिंदाबाद!* मोबीन अहमद राष्ट्रीय अध्यक्ष किसान मजदूर महासंग्राम संगठन *किसानों के हक़ की लड़ाई में अकेले खड़े रहे विधायक उमेश कुमार जी — किसान मजदूर महासंग्राम संगठन ने की सराहना!* किसानों की आवाज़ उठाना ही जनप्रतिनिधि की असली जिम्मेदारी है! देहरादून, उत्तराखंड। खानपुर विधानसभा क्षेत्र के निर्दलीय विधायक श्री उमेश कुमार जी द्वारा किसानों एवं जनहित के मुद्दों को लेकर विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के घटनाक्रम पर किसान मजदूर महासंग्राम संगठन उनकी किसानों के प्रति प्रतिबद्धता और सदन में किसानों की समस्याओं को उठाने के प्रयासों की सराहना करता है। श्री उमेश कुमार जी ने किसानों की समस्याओं, गन्ना किसानों के बकाया भुगतान, प्राकृतिक आपदा से बर्बाद हुई फसलों तथा किसानों पर पड़ रहे आर्थिक बोझ जैसे गंभीर विषयों को विधानसभा में उठाया। उन्होंने विपक्ष से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने पर भी अपनी निराशा सार्वजनिक रूप से व्यक्त की है। *जब किसानों के मुद्दों पर साथ की जरूरत थी, तब समर्थन क्यों नहीं मिला?* किसान मजदूर महासंग्राम संगठन का मानना है कि किसानों के सवाल किसी एक पार्टी, दल या व्यक्ति के नहीं होते। किसान का बकाया भुगतान, फसल का उचित मूल्य, आपदा से हुए नुकसान का मुआवजा और बिजली-पानी जैसी बुनियादी समस्याएं जनहित के मुद्दे हैं। किसानों के हितों पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सभी जनप्रतिनिधियों को एकजुट होना चाहिए। *किसान मजदूर महासंग्राम संगठन का स्पष्ट संदेश* हम किसानों के हक़, सम्मान और न्याय के लिए आवाज़ उठाने वाले प्रत्येक जनप्रतिनिधि के प्रयासों की सराहना करते हैं। किसान को केवल आश्वासन नहीं, न्याय चाहिए। किसान को केवल भाषण नहीं, उसका हक़ चाहिए। हमारा संघर्ष किसी व्यक्ति या दल के विरोध में नहीं, बल्कि किसानों के अधिकारों, मजदूरों के सम्मान और आम जनता को न्याय दिलाने के लिए है। *जय जवान! जय किसान!* *किसान मजदूर महासंग्राम संगठन जिंदाबाद!* मोबीन अहमद राष्ट्रीय अध्यक्ष किसान मजदूर महासंग्राम संगठन
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    *किसानों के हक़ की लड़ाई में अकेले खड़े रहे विधायक उमेश कुमार जी — किसान मजदूर महासंग्राम संगठन ने की सराहना!*
किसानों की आवाज़ उठाना ही जनप्रतिनिधि की असली जिम्मेदारी है!
देहरादून, उत्तराखंड। खानपुर विधानसभा क्षेत्र के निर्दलीय विधायक श्री उमेश कुमार जी द्वारा किसानों एवं जनहित के मुद्दों को लेकर विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के घटनाक्रम पर किसान मजदूर महासंग्राम संगठन उनकी किसानों के प्रति प्रतिबद्धता और सदन में किसानों की समस्याओं को उठाने के प्रयासों की सराहना करता है।
श्री उमेश कुमार जी ने किसानों की समस्याओं, गन्ना किसानों के बकाया भुगतान, प्राकृतिक आपदा से बर्बाद हुई फसलों तथा किसानों पर पड़ रहे आर्थिक बोझ जैसे गंभीर विषयों को विधानसभा में उठाया। उन्होंने विपक्ष से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने पर भी अपनी निराशा सार्वजनिक रूप से व्यक्त की है।
*जब किसानों के मुद्दों पर साथ की जरूरत थी, तब समर्थन क्यों नहीं मिला?*
किसान मजदूर महासंग्राम संगठन का मानना है कि किसानों के सवाल किसी एक पार्टी, दल या व्यक्ति के नहीं होते। किसान का बकाया भुगतान, फसल का उचित मूल्य, आपदा से हुए नुकसान का मुआवजा और बिजली-पानी जैसी बुनियादी समस्याएं जनहित के मुद्दे हैं।
किसानों के हितों पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सभी जनप्रतिनिधियों को एकजुट होना चाहिए।
*किसान मजदूर महासंग्राम संगठन का स्पष्ट संदेश*
हम किसानों के हक़, सम्मान और न्याय के लिए आवाज़ उठाने वाले प्रत्येक जनप्रतिनिधि के प्रयासों की सराहना करते हैं। किसान को केवल आश्वासन नहीं, न्याय चाहिए। किसान को केवल भाषण नहीं, उसका हक़ चाहिए।
हमारा संघर्ष किसी व्यक्ति या दल के विरोध में नहीं, बल्कि किसानों के अधिकारों, मजदूरों के सम्मान और आम जनता को न्याय दिलाने के लिए है।

*जय जवान! जय किसान!*

*किसान मजदूर महासंग्राम संगठन जिंदाबाद!*


मोबीन अहमद
राष्ट्रीय अध्यक्ष
किसान मजदूर महासंग्राम संगठन
*किसानों के हक़ की लड़ाई में अकेले खड़े रहे विधायक उमेश कुमार जी — किसान मजदूर महासंग्राम संगठन ने की सराहना!*
किसानों की आवाज़ उठाना ही जनप्रतिनिधि की असली जिम्मेदारी है!
देहरादून, उत्तराखंड। खानपुर विधानसभा क्षेत्र के निर्दलीय विधायक श्री उमेश कुमार जी द्वारा किसानों एवं जनहित के मुद्दों को लेकर विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के घटनाक्रम पर किसान मजदूर महासंग्राम संगठन उनकी किसानों के प्रति प्रतिबद्धता और सदन में किसानों की समस्याओं को उठाने के प्रयासों की सराहना करता है।
श्री उमेश कुमार जी ने किसानों की समस्याओं, गन्ना किसानों के बकाया भुगतान, प्राकृतिक आपदा से बर्बाद हुई फसलों तथा किसानों पर पड़ रहे आर्थिक बोझ जैसे गंभीर विषयों को विधानसभा में उठाया। उन्होंने विपक्ष से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने पर भी अपनी निराशा सार्वजनिक रूप से व्यक्त की है।
*जब किसानों के मुद्दों पर साथ की जरूरत थी, तब समर्थन क्यों नहीं मिला?*
किसान मजदूर महासंग्राम संगठन का मानना है कि किसानों के सवाल किसी एक पार्टी, दल या व्यक्ति के नहीं होते। किसान का बकाया भुगतान, फसल का उचित मूल्य, आपदा से हुए नुकसान का मुआवजा और बिजली-पानी जैसी बुनियादी समस्याएं जनहित के मुद्दे हैं।
किसानों के हितों पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सभी जनप्रतिनिधियों को एकजुट होना चाहिए।
*किसान मजदूर महासंग्राम संगठन का स्पष्ट संदेश*
हम किसानों के हक़, सम्मान और न्याय के लिए आवाज़ उठाने वाले प्रत्येक जनप्रतिनिधि के प्रयासों की सराहना करते हैं। किसान को केवल आश्वासन नहीं, न्याय चाहिए। किसान को केवल भाषण नहीं, उसका हक़ चाहिए।
हमारा संघर्ष किसी व्यक्ति या दल के विरोध में नहीं, बल्कि किसानों के अधिकारों, मजदूरों के सम्मान और आम जनता को न्याय दिलाने के लिए है।
*जय जवान! जय किसान!*
*किसान मजदूर महासंग्राम संगठन जिंदाबाद!*
मोबीन अहमद
राष्ट्रीय अध्यक्ष
किसान मजदूर महासंग्राम संगठन
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    किसान मजदूर महासंग्राम संगठन
    Farmer देहरादून, देहरादून, उत्तराखंड•
    14 hrs ago
  • मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने धर्मपत्नी गीता धामी के साथ मनाया करवाचौथ पर्व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने धर्मपत्नी गीता धामी के साथ मनाया करवाचौथ पर्व प्रदेशवासियों को दी करवाचौथ की हार्दिक शुभकामनाएं देहरादून मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी धर्मपत्नी गीता धामी के साथ करवाचौथ का पावन पर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर समस्त प्रदेशवासियों को करवाचौथ की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि करवाचौथ का पर्व हमारी समृद्ध भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों, अटूट विश्वास, प्रेम एवं समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति में ऐसे पर्व पारिवारिक रिश्तों को और अधिक मजबूत बनाने के साथ ही समाज में प्रेम, सद्भाव और आपसी विश्वास की भावना को सुदृढ़ करते हैं। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से सभी परिवारों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं खुशहाली की कामना की।
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    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने धर्मपत्नी गीता धामी के साथ मनाया करवाचौथ पर्व

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने धर्मपत्नी गीता धामी के साथ मनाया करवाचौथ पर्व
प्रदेशवासियों को दी करवाचौथ की हार्दिक शुभकामनाएं
देहरादून
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी धर्मपत्नी गीता धामी के साथ करवाचौथ का पावन पर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर समस्त प्रदेशवासियों को करवाचौथ की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि करवाचौथ का पर्व हमारी समृद्ध भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों, अटूट विश्वास, प्रेम एवं समर्पण का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति में ऐसे पर्व पारिवारिक रिश्तों को और अधिक मजबूत बनाने के साथ ही समाज में प्रेम, सद्भाव और आपसी विश्वास की भावना को सुदृढ़ करते हैं।
मुख्यमंत्री ने ईश्वर से सभी परिवारों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं खुशहाली की कामना की।
    user_Journalist Amit nautiyal
    Journalist Amit nautiyal
    Media house Tehri Garhwal, Uttarakhand•
    17 hrs ago
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