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चैनपुर में समावेशी शिक्षा के तहत कार्यशाला, विज्ञान प्रदर्शनी व क्विज प्रतियोगिता का आयोजन चैनपुर: प्रखंड संसाधन केन्द्र चैनपुर के तत्वावधान में सोमवार को अनुमंडल पुस्तकालय, चैनपुर में समावेशी शिक्षा के अंतर्गत एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रखंड स्तरीय हेडमास्टर, अध्यक्ष, आंगनबाड़ी सेविका एवं अभिभावकों ने भाग लिया।
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चैनपुर में समावेशी शिक्षा के तहत कार्यशाला, विज्ञान प्रदर्शनी व क्विज प्रतियोगिता का आयोजन चैनपुर: प्रखंड संसाधन केन्द्र चैनपुर के तत्वावधान में सोमवार को अनुमंडल पुस्तकालय, चैनपुर में समावेशी शिक्षा के अंतर्गत एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रखंड स्तरीय हेडमास्टर, अध्यक्ष, आंगनबाड़ी सेविका एवं अभिभावकों ने भाग लिया।
- Gangaलोहरदगा, लोहरदगा, झारखंड😤52 min ago
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- Post by Nikhil Chauhan1
- चैनपुर: प्रखंड संसाधन केन्द्र चैनपुर के तत्वावधान में सोमवार को अनुमंडल पुस्तकालय, चैनपुर में समावेशी शिक्षा के अंतर्गत एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रखंड स्तरीय हेडमास्टर, अध्यक्ष, आंगनबाड़ी सेविका एवं अभिभावकों ने भाग लिया।1
- चैनपुर-: शहीद दिवस के मौके पर परमवीर अल्बर्ट एक्का मेमोरियल कॉलेज के युवाओं ने देश के अमर बलिदानियों को नमन करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। माय भारत गुमला और परमवीर अल्बर्ट एक्का मेमोरियल कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के संयुक्त तत्वावधान में एक भव्य पदयात्रा और श्रमदान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान युवाओं ने न केवल देशभक्ति का जज्बा दिखाया बल्कि स्वच्छता का कड़ा संदेश भी दिया। इस कार्यक्रम का आगाज कॉलेज परिसर से हुआ। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और एनएसएस स्वयंसेवकों ने कदम से कदम मिलाते हुए पदयात्रा निकाली। इसके बाद युवाओं ने हाथों में झाड़ू थामकर कॉलेज परिसर और आसपास के इलाकों में वृहद पैमाने पर साफ-सफाई की। श्रमदान के जरिए इन ऊर्जावान युवाओं ने समाज को स्वच्छता और नागरिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूक किया। पदयात्रा और श्रमदान के बाद मुख्य कार्यक्रम कॉलेज के सभागार में आयोजित हुआ। बतौर मुख्य अतिथि कॉलेज के प्राचार्य फादर अगस्तुस एक्का ने शिरकत की। युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि शहीदों का बलिदान हमें सिर्फ याद नहीं रखना है बल्कि उनके बताए मार्ग पर चलना है। आज के युवाओं को उन वीर सपूतों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपनी सार्थक भूमिका निभानी चाहिए। इस मौके पर फादर इनोसेंट और माय भारत के प्रतिनिधि विश्वेश्वर मुंडा ने भी युवाओं में जोश भरा। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि सच्ची देशभक्ति समाज सेवा, कड़े अनुशासन और राष्ट्र के प्रति पूर्ण समर्पण में निहित है। आयोजन के दौरान अंचल की खेल प्रतिभाओं को निखारने की दिशा में भी अहम कदम उठाया गया। माय भारत अभियान के तहत क्षेत्र के चार खेल क्लबों को स्पोर्ट्स किट प्रदान की गई। किट पाकर खिलाड़ियों के चेहरे खिल उठे जिससे उनमें भारी उत्साह और खेल भावना का संचार देखने को मिला।1
- जशपुर जिले के करदाना घाटमें अनियंत्रित होकर ट्रक जंगल में घुस गया हालांकि एक बहुत बड़ा हादसा टूटा लग गया क्योंकि किसी की मौत हुई नहीं यह सिर्फ तेज रफ्तार चलने पर हुआ है सावधानी बरतना जरूरी है धन्यवाद आप भी वारते1
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- आरोपियों के विरुद्ध थाना बागबहार में छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 की धारा 6, 10 एवं पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है 👤 गिरफ्तार आरोपी: 1️⃣ तरुण चौहान निवासी ग्राम फरसा टोली, थाना बागबहार, जिला जशपुर का बताया जा रहा है। 2️⃣ शोभन नागवंशी निवासी ग्राम खाडामाचा, थाना बागबहार, जिला जशपुर का बताया जा रहा है। 3️⃣ सीता राम नागवंशी निवासी ग्राम कुकरगांव, थाना बागबहार, जिला जशपुर बताया जा रहा है। ♦️ मामले में एक आरोपी फरार बताया जा रहा है,पुलिस ने फरार आरोपी को चिन्हित कर ली है, जशपुर पुलिस द्वारा फरार आरोपी कि तलाश जारी है,जल्द ही गिरफ्तारी करेगी । 1
- प्रशासन ने रामनवमी अखाड़ा समिति अध्यक्ष एवं डीजे संचालक के साथ बैठक सरकार द्वारा जारी गाइड लाइन किया साझा1
- शक्ति का संचार (भाव आना): धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान जब भक्ति और मंत्रोच्चार अपने चरम पर होते हैं, तो भक्त के शरीर में देवी की दिव्य ऊर्जा या 'शक्ति' का प्रवेश होता है। इस अवस्था को 'भाव आना' कहा जाता है, जिसमें व्यक्ति अनियंत्रित रूप से झूमने या डोलने लगता है। आध्यात्मिक तल्लीनता: भजन और कीर्तन की लय पर पंडा पूरी तरह से देवी की भक्ति में लीन हो जाते हैं। यह शारीरिक हलचल उनके गहरे ध्यान और समर्पण की अभिव्यक्ति होती है, जहाँ वे बाहरी दुनिया को भूलकर ईश्वर से जुड़ जाते हैं। सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव: नवरात्रि में वातावरण मंत्रों और धूप-दीप से अत्यंत ऊर्जावान होता है। पंडा, जो नौ दिनों तक कड़ा उपवास और साधना करते हैं, इस ऊर्जा के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, जिससे उनके शरीर में कंपन या झूपना शुरू हो जाता है।1