Shuru
Apke Nagar Ki App…
इस पोस्ट में बताया गया है कि जीवन में सभी को काम करना पड़ता है। इस संदर्भ में, लोगों को चींटी की ओर देखने का आग्रह किया गया है, जो निरंतर कड़ी मेहनत करती है।
Suneshwar Oraon
इस पोस्ट में बताया गया है कि जीवन में सभी को काम करना पड़ता है। इस संदर्भ में, लोगों को चींटी की ओर देखने का आग्रह किया गया है, जो निरंतर कड़ी मेहनत करती है।
More news from Jharkhand and nearby areas
- इस पोस्ट में बताया गया है कि जीवन में सभी को काम करना पड़ता है। इस संदर्भ में, लोगों को चींटी की ओर देखने का आग्रह किया गया है, जो निरंतर कड़ी मेहनत करती है।1
- झारखंड के लातेहार जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत सासंग पंचायत के सासंग गांव स्थित कोटारी टोला अखड़ा में ओरिएंटल कंपनी द्वारा कोयला जांच के लिए की जा रही ड्रिलिंग के विरोध में सोमवार को ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि यह ड्रिलिंग कार्य ग्रामसभा की अनुमति और स्थानीय लोगों की सहमति के बिना शुरू किया गया है, जो उनके अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। इस प्रदर्शन में परहा, पाहन, महंत और बैगा जैसे विभिन्न सामाजिक प्रतिनिधि भी शामिल हुए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी खनन गतिविधि से पहले ग्रामसभा की स्वीकृति अनिवार्य होती है। सासंग, कोटारी, मांजर, कायमा और बिश्रामपुर गांवों के हजारों लोगों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से इस मामले की जांच करने और उचित कार्रवाई करने की मांग भी की।1
- लातेहार जिले के बालूमाथ प्रखंड कार्यालय परिसर में नॉर्थ एनटीपीसी कोल परियोजना धाधू की पर्यावरण जनसुनवाई का प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने कड़ा विरोध किया। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना था कि यह जनसुनवाई उनके प्रभावित गांवों में होनी चाहिए थी, लेकिन इसे किसी अन्य स्थान पर आयोजित किया गया। इसी बात को लेकर ग्रामीणों ने इस जनसुनवाई का विरोध दर्ज कराया।1
- डीसी संदीप कुमार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के सात ट्रेनी अफसरों को 'जन सेवा की सीख' दी है। उन्होंने अधिकारियों को सलाह दी कि वे फील्ड की ज़मीनी हकीकत को भली-भांति समझें और यह सुनिश्चित करें कि उनकी पहुँच समाज के आखिरी व्यक्ति तक हो।1
- एक एजेंट ने अच्छा काम दिलाने का वादा करके एक व्यक्ति को चंडीगढ़ में फंसा लिया है। वहाँ ले जाने के बाद, एजेंट उनसे बर्तन धुलवाता है और उन्हें केवल बर्तन धोने के बाद ही खाने के लिए देता है, जिससे व्यक्ति खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहा है।1
- एक मुस्लिम परिवार के बेघर हो जाने के कारण गांव में चिंता और चर्चा का माहौल बना हुआ है।1
- लातेहार के बालूमाथ प्रखंड कार्यालय परिसर में सोमवार को उत्तरी धाधू (पूर्वी भाग) एनटीपीसी कोयला खनन परियोजना के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति संबंधी लोक सुनवाई कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जिसे प्रभावित ग्रामीणों के जोरदार विरोध के कारण बीच में ही रोकना पड़ा। हजारों रैयतों और ग्रामीणों ने “एनटीपीसी वापस जाओ”, “रैयतों का शोषण बंद करो” और “कोल कंपनी वापस जाओ” जैसे नारे लगाते हुए परियोजना का पुरजोर विरोध किया और इसे रद्द करने की मांग की। विरोध करने वाले ग्रामीणों का मुख्य आरोप था कि कंपनी स्थानीय ग्राम सभाओं की सहमति और निर्णयों को महत्व नहीं दे रही है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी प्रक्रिया से पहले कंपनी को संबंधित गांवों में ग्राम सभा आयोजित करनी चाहिए और बिना ग्राम सभा की सहमति के वे परियोजना को स्वीकार नहीं करेंगे। ग्रामीणों ने अपनी पुश्तैनी जमीन किसी भी कीमत पर न देने की बात कही और आशंका जताई कि कोयला खनन से क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ेगा तथा उनकी आजीविका और सामाजिक जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने विस्थापन अस्वीकार करते हुए अपनी जमीन की रक्षा के लिए हर संभव संघर्ष करने का संकल्प लिया। इस लोक सुनवाई में लातेहार के अपर समाहर्ता सलमान जफर खिजरी अध्यक्ष के तौर पर, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद (जेएसपीसीबी) की प्रतिनिधि प्रियंका कुमारी, एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड के अधिकारी और अन्य प्रशासनिक पदाधिकारी मौजूद थे। ग्रेंजा, विशुनपुर, भैंसादोन, पिंडारकोम और मरंगलोइया सहित कई प्रभावित गांवों के लोग शामिल हुए। जिला परिषद सदस्य अनीता देवी और आजसू प्रखंड अध्यक्ष सह विरोधी ग्रामीणों के नेता शंकर उरांव सहित कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता भी उपस्थित थे, जिन्होंने ग्रामीणों की सहमति के बिना परियोजना लागू न करने की बात दोहराई और फर्जी रिपोर्ट तैयार कर जमीन पर कब्जा करने के प्रयासों के खिलाफ चेतावनी दी। विरोध प्रदर्शन के चलते प्रशासन और परियोजना प्रबंधन को जनसुनवाई प्रक्रिया स्थगित करनी पड़ी। हालांकि क्षेत्र में स्थिति शांतिपूर्ण रही, लेकिन ग्रामीणों ने भविष्य में भी अपने अधिकारों और जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने की बात कही। ग्रामीणों के नेतृत्वकर्ता शंकर उरांव ने यह भी कहा कि यदि जनसुनवाई बालूमाथ प्रखंड मुख्यालय की जगह उनके गांव में भी होती, तो वे परियोजना का विरोध अवश्य करते।1
- एक वीडियो सामने आया है जिसमें कंदरा जंगल के बीच बनी एक सड़क का दृश्य दिखाया गया है। इस वीडियो में जंगल के घने क्षेत्र के मध्य से गुजरते हुए इस रास्ते को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।2