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डीसी संदीप कुमार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के सात ट्रेनी अफसरों को 'जन सेवा की सीख' दी है। उन्होंने अधिकारियों को सलाह दी कि वे फील्ड की ज़मीनी हकीकत को भली-भांति समझें और यह सुनिश्चित करें कि उनकी पहुँच समाज के आखिरी व्यक्ति तक हो।
Shamsher Alam
डीसी संदीप कुमार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के सात ट्रेनी अफसरों को 'जन सेवा की सीख' दी है। उन्होंने अधिकारियों को सलाह दी कि वे फील्ड की ज़मीनी हकीकत को भली-भांति समझें और यह सुनिश्चित करें कि उनकी पहुँच समाज के आखिरी व्यक्ति तक हो।
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- झारखंड के लातेहार जिले के बालूमाथ प्रखंड कार्यालय परिसर में सोमवार को उत्तरी धाधू (पूर्वी भाग) एनटीपीसी कोयला खनन परियोजना की पर्यावरण स्वीकृति संबंधी लोक सुनवाई का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में लातेहार के अपर समाहर्ता सलमान जफर खिजरी अध्यक्ष के तौर पर, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की प्रतिनिधि प्रियंका कुमारी और एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड के अधिकारी व अन्य प्रशासनिक पदाधिकारी मौजूद थे। लोक सुनवाई के दौरान ग्रेंजा, विशुनपुर, भैंसादोन, पिंडारकोम और मरंगलोइया सहित प्रभावित गांवों के हजारों रैयत और ग्रामीण परियोजना का जोरदार विरोध करने पहुंचे। ग्रामीणों ने 'एनटीपीसी वापस जाओ', 'रैयतों का शोषण बंद करो' और 'कोल कंपनी वापस जाओ' जैसे नारे लगाए, जिसके कारण अंततः लोक सुनवाई कार्यक्रम को बीच में ही रोकना पड़ा। ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी द्वारा स्थानीय ग्राम सभाओं की सहमति और निर्णयों को महत्व नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रक्रिया से पहले कंपनी को संबंधित गांवों में जाकर ग्राम सभा आयोजित करनी चाहिए और बिना ग्राम सभा की सहमति के परियोजना को स्वीकार नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों ने कहा कि वे अपनी पुश्तैनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देंगे, क्योंकि कोयला खनन से क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ेगा तथा उनकी आजीविका और सामाजिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने विस्थापन अस्वीकार करते हुए अपनी जमीन की रक्षा के लिए हर संभव संघर्ष करने की बात कही। ग्रामीणों की ओर से जिला परिषद सदस्य अनीता देवी और आजसू प्रखंड अध्यक्ष सह विरोधी ग्रामीणों के नेता शंकर उरांव सहित कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद थे। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में ग्रामीण इसलिए जनसुनवाई में पहुंचे थे ताकि किसी प्रकार की भ्रामक या फर्जी रिपोर्ट तैयार कर उनकी जमीन पर कब्जा न किया जा सके। विरोध प्रदर्शन के चलते प्रशासन और परियोजना प्रबंधन को जनसुनवाई प्रक्रिया स्थगित करनी पड़ी, हालांकि क्षेत्र में स्थिति शांतिपूर्ण रही। ग्रामीणों ने भविष्य में भी अपने अधिकारों और जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया है।1
- झारखंड के लातेहार में कोयला खदानों के कारण ग्रामीण विकास के बजाय विनाश का सामना कर रहे हैं। खदानों से उड़ती धूल, जगह-जगह टूटी सड़कें और व्यापक प्रदूषण ने ग्रामीणों का जीना दूभर कर दिया है। इसके बावजूद, आज तक कई प्रभावित परिवारों को उनका अपेक्षित मुआवज़ा नहीं मिल पाया है। यह गंभीर सवाल उठाया जा रहा है कि आख़िर कब जनता की आवाज़ सुनी जाएगी और उनकी पीड़ा का समाधान होगा। प्रभावित ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि उनकी यह पीड़ा अब हर मंच तक पहुँचाई जाएगी, क्योंकि जनता का दर्द ही उनकी राजनीति का आधार है। ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि उन्हें तत्काल मुआवज़ा दिया जाए और प्रदूषण पर लगाम लगाई जाए।1
- एक मुस्लिम परिवार के बेघर हो जाने के कारण गांव में चिंता और चर्चा का माहौल बना हुआ है।1
- महुआडांड़ स्थित सारना भवन में जनजाति सुरक्षा मंच की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई, जहाँ जनजातीय समाज के सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। इस बैठक में क्षेत्रीय संयोजक संदीप उरांव, प्रांतीय संयोजक हिंदूवा उरांव तथा जनजाति सुरक्षा मंच के प्रांतीय सदस्य शन्नी टोप्पो सहित कई गणमान्य लोग और समाज के प्रतिनिधि मौजूद थे। बैठक के दौरान जनजातीय समाज की परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा संवर्धन पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही, जनजातीय समूहों के संगठनात्मक विस्तार और समाज को एकजुट करने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तैयार की गई। उपस्थित वक्ताओं ने धर्मांतरण को समाज की पहचान पर हमला करार देते हुए जनजातीय अधिकारों और पारंपरिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में डीलिस्टिंग, बैगा, पुजार और पाहन के चुनाव संबंधी विषयों पर भी गहन चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त, मुंडा और नगेसिया समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) सूची में शामिल करने की मांग को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया, जिस पर सदस्यों ने सरकार से सकारात्मक पहल की अपेक्षा जताई। यह बैठक समाज की एकता, सांस्कृतिक पहचान की रक्षा तथा जनजातीय हितों के संरक्षण के संकल्प के साथ समाप्त हुई।4
- शहर के एक क्षेत्र में लंबे समय से खराब और गंदगी से भरे नाले की समस्या से स्थानीय लोग परेशान थे। इस समस्या को उजागर करते हुए एक स्थानीय युवक ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें नाले की बदहाल स्थिति और नागरिकों को हो रही कठिनाइयों को स्पष्ट रूप से दिखाया गया था। वीडियो के सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित होने के बाद, नगर पालिका प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया और बिना देर किए नाले की सफाई का अभियान शुरू कराया। नगर पालिका की टीम मौके पर पहुंची और नाले में जमा कचरे तथा गाद को हटाकर उसकी पूर्ण सफाई की। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि सोशल मीडिया अब जनसमस्याओं को प्रभावी ढंग से उजागर करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है। इस सफाई अभियान में "कॉकरोच जनता पार्टी" के सदस्यों ने भी सक्रिय सहयोग दिया, उन्होंने समस्या को संबंधित अधिकारियों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नाले की सफाई से अब क्षेत्र में जलभराव, दुर्गंध और गंदगी जैसी समस्याओं से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जिसके लिए नागरिकों ने नगर पालिका प्रशासन और सभी सहयोगी संगठनों का आभार व्यक्त किया है। यह पूरी घटना नागरिक जागरूकता, सोशल मीडिया की शक्ति और प्रशासनिक तत्परता के सफल समन्वय का उदाहरण पेश करती है, जो यह दर्शाता है कि स्थानीय समस्याओं का समाधान इस प्रकार से अपेक्षाकृत कम समय में संभव है।1
- प्रतापपुर प्रखंड के मोनिया पंचायत अंतर्गत विचकिला गांव में रविवार शाम एक दर्दनाक घटना में ज्वार (सोरघम) के पौधे खाने से पांच भैंसों की मौत हो गई, जिससे पशुपालक परिवारों पर गहरा आर्थिक संकट आ गया है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में कैलाश यादव की तीन भैंसें और विनेश यादव की दो भैंसें शामिल थीं। इन मृत भैंसों में दो गर्भवती थीं, एक दुधारू थी, और शेष दो भी परिवारों के लिए आय का प्रमुख स्रोत थीं। जानकारी के अनुसार, भैंसें अपने घर के पास स्थित ज्वार के खेत में चर रही थीं, तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और वे बेहोश होकर गिर पड़ीं। पशुपालकों ने तुरंत पशु चिकित्सक को बुलाकर इलाज कराया, लेकिन सभी प्रयासों के बावजूद भैंसों को बचाया नहीं जा सका। इस घटना के बाद कैलाश यादव और विनेश यादव के परिवारों में मातम पसर गया है। कैलाश यादव की पत्नी ललिता देवी और विनेश यादव की पत्नी मुनिया देवी ने बताया कि पशुपालन ही उनके परिवार के जीविकोपार्जन का मुख्य साधन था। उन्हें लगभग दो लाख रुपये का भारी नुकसान हुआ है, जिससे उनके सामने एक गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि वे इस बड़े नुकसान से उबर सकें।1
- झारखंड में सड़कों की बदहाल स्थिति पर गहरा असंतोष व्यक्त किया गया है, जहाँ यह दावा किया गया है कि राज्य में सड़कें बनाने के बजाय केवल तालाब ही बनते हैं। पोस्ट में स्पष्ट किया गया है कि झारखंड की सड़कें गड्ढों से इतनी भरी हुई हैं कि वे किसी तालाब से कम नहीं दिखतीं। इसके साथ ही, नेताओं पर भ्रष्टाचार का सीधा आरोप लगाते हुए कहा गया है कि जहाँ नेताओं की जेबें भरती रहती हैं, वहीं राज्य की सड़कों के गड्ढे कभी नहीं भरते।1
- एक मुस्लिम महिला को गांव के लोगों ने उसके घर से निकाल दिया है। महिला ने दावा किया है कि वह पिछले 30 सालों से उसी घर में रह रही थी, जिससे उसे बेदखल किया गया है।1
- प्रतापपुर थाना पुलिस को मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में बड़ी सफलता मिली है, जहाँ गुप्त सूचना के आधार पर की गई छापेमारी में 83.79 किलोग्राम अवैध अफीम डोडा बरामद किया गया है। बाजार में इस बरामदगी की कीमत लगभग 12 लाख 56 हज़ार रुपये आंकी गई है, और इस मामले में एक तस्कर को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर सोमवार को गठित एक विशेष दल ने अंचलाधिकारी विकास कुमार टूडू और थाना प्रभारी आलोक रंजन चौधरी के नेतृत्व में चरका खुर्द गाँव निवासी सुनील कुमार के घर पर छापा मारा। तलाशी के दौरान घर से छह प्लास्टिक की बोरियों में रखा अफीम डोडा मिला, जिसमें क्रमशः 18 किलो 400 ग्राम, 16 किलो 190 ग्राम, 16 किलो 200 ग्राम, 9 किलो 380 ग्राम, 18 किलो 620 ग्राम और 5 किलो डोडा शामिल था। ये सभी बोरियाँ जब्त कर ली गईं। पुलिस ने सुनील कुमार, जो बृक्ष यादव का पुत्र है, को मौके से गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ प्रतापपुर थाना कांड संख्या 52/2026 के तहत एनडीपीएस एक्ट की धारा 15सी, 18बी और बीएनएस की धारा 3(5) में केस दर्ज किया गया है। जाँच के दौरान एक और व्यक्ति की संलिप्तता भी सामने आई है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिले में नशे के कारोबार पर लगातार कार्रवाई जारी रहेगी और किसी को बख्शा नहीं जाएगा।1