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लाहौल की ताजा खबर।लाहौल में बर्फ पड़ने से जलस्रोत भरते हैं और गर्मियों में पानी की कमी नहीं होती। इससे खेती के लिए नमी बनी रहती है। बर्फ पर्यावरण संतुलन बनाए रखती है और कीटों को कम करती है। साथ ही, बर्फबारी से पर्यटन बढ़ता है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है। लाहौल के केलांग में हो रही बर्फबारी। जो कि खेती के लिहाज से बहुत अच्छी है स्थानीय ग्रामीणों में उत्साह और खुशी की लहर। लाहौल में बर्फ पड़ने से जलस्रोत भरते हैं और गर्मियों में पानी की कमी नहीं होती। इससे खेती के लिए नमी बनी रहती है। बर्फ पर्यावरण संतुलन बनाए रखती है और कीटों को कम करती है। साथ ही, बर्फबारी से पर्यटन बढ़ता है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है।
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लाहौल की ताजा खबर।लाहौल में बर्फ पड़ने से जलस्रोत भरते हैं और गर्मियों में पानी की कमी नहीं होती। इससे खेती के लिए नमी बनी रहती है। बर्फ पर्यावरण संतुलन बनाए रखती है और कीटों को कम करती है। साथ ही, बर्फबारी से पर्यटन बढ़ता है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है। लाहौल के केलांग में हो रही बर्फबारी। जो कि खेती के लिहाज से बहुत अच्छी है स्थानीय ग्रामीणों में उत्साह और खुशी की लहर। लाहौल में बर्फ पड़ने से जलस्रोत भरते हैं और गर्मियों में पानी की कमी नहीं होती। इससे खेती के लिए नमी बनी रहती है। बर्फ पर्यावरण संतुलन बनाए रखती है और कीटों को कम करती है। साथ ही, बर्फबारी से पर्यटन बढ़ता है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है।
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- लाहौल के केलांग में हो रही बर्फबारी। जो कि खेती के लिहाज से बहुत अच्छी है स्थानीय ग्रामीणों में उत्साह और खुशी की लहर। लाहौल में बर्फ पड़ने से जलस्रोत भरते हैं और गर्मियों में पानी की कमी नहीं होती। इससे खेती के लिए नमी बनी रहती है। बर्फ पर्यावरण संतुलन बनाए रखती है और कीटों को कम करती है। साथ ही, बर्फबारी से पर्यटन बढ़ता है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है।1
- Ram चन्द सिंगर🌹🔱फ़ॉलो करो1
- प्रतिनिधि पांगी न्यूज़ टुडे। जिला चंबा के जनजातीय उपमंडल पांगी में लगातार बारिश और भारी बर्फबारी के चलते क्षेत्र का संपर्क प्रदेश, देश और विश्व से पूरी तरह कट गया है। खराब मौसम के कारण लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं और जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। हालांकि मौसम साफ होने पर तांदी–संसारी नाला सड़क को बहाल करने का प्रयास किया जाता है, लेकिन वर्तमान हालात में यह मार्ग बंद पड़ा है। पांगी के अंदरूनी क्षेत्रों सहित कुल्लू–किलाड़ के बीच चलने वाली बस सेवा भी पूरी तरह ठप हो गई है। निजी वाहनों से सफर करना भी जोखिम भरा हो गया है। लगातार बर्फबारी और बारिश के कारण जगह-जगह हिमस्खलन (एवलांच), भूस्खलन और पहाड़ियों से पत्थर गिरने का खतरा बना हुआ है। जानकारी के अनुसार पांगी के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में करीब तीन फीट तक और निचले इलाकों में दो फीट तक बर्फबारी दर्ज की गई है। शुक्रवार को सुराल, हुडान, कुमार परमार, प्रेग्राम, चस्क, मूर्छ, चस्क भटोरी, सुण, उदीन, चलोली, कुठाह सहित अन्य ऊंचाई वाले गांवों में 12 से 15 इंच ताजा बर्फबारी हुई, जबकि मुख्यालय किलाड़ और आसपास के क्षेत्रों में 8 से 10 इंच बर्फ गिरी है। वाहनों की आवाजाही ठप होने से लोगों को जरूरी कार्यों के लिए पैदल ही सफर करना पड़ रहा है, जो बेहद जोखिम भरा साबित हो रहा है। वहीं, बर्फबारी के कारण किसानों और पशुपालकों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। कई पशुपालकों के पास चारे की कमी होने लगी है और यदि मौसम ऐसे ही बना रहा तो पशुओं के लिए चारे का संकट गहरा सकता है। स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि मार्च माह के मध्य के बाद हुई बर्फबारी से खुबानी और ठंगी के फूलों को नुकसान पहुंचता है, जिससे इस बार ठंगी और जीरा की फसल प्रभावित होने की आशंका है। एसडीएम पांगी अमन दीप सिंह का बयान उपमंडल अधिकारी (एसडीएम) पांगी अमन दीप सिंह ने लोगों से अपील करते हुए कहा, “मौजूदा मौसम में अनावश्यक यात्रा से बचें। क्षेत्र में भूस्खलन, पत्थर गिरने और हिमस्खलन का खतरा बना हुआ है। सभी लोग जहां हैं, वहीं सुरक्षित रहें। प्रशासन हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है, लेकिन इसमें जनता के सहयोग की भी आवश्यकता है।” उन्होंने बताया कि सीमा सड़क संगठन (BRO) ने तांदी–संसारी नाला मार्ग पर मशीनरी तैनात कर रखी है, लेकिन सड़क बहाली का कार्य मौसम साफ होने के बाद ही संभव हो पाएगा।1
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