शाहनगर। रात्रि में घायल युवक तड़पता रहा - सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शाहनगर बना सिर्फ नाम का अस्पताल स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। झिलमिल गांव का एक युवक बीती रात शाहनगर की ओर आते समय ट्राइबल छात्रावास के पास अचानक भैंस से टकरा गया। हादसे में युवक को गंभीर चोटें आईं। सूचना मिलते ही 100 डायल आपातकालीन सेवा की टीम ने घायल को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शाहनगर पहुंचाया। लेकिन यहां जो हुआ, उसने पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए रात करीब 9 बजे अस्पताल पहुंचने के बाद युवक पूरी रात दर्द से कराहता रहा। मौके पर केवल स्टाफ नर्स मौजूद थीं न कोई डॉक्टर, और प्राथमिक उपचार तक नहीं मिला। परिजनों के अनुसार बार-बार आग्रह करने के बावजूद कोई वरिष्ठ कर्मचारी अस्पताल नहीं पहुंचा। "अस्पताल खुला, इलाज बंद" घायल युवक के परिजनों ने बताया कि वे पूरी रात डॉक्टर का इंतजार करते रहे। न एक्स-रे हुआ, न इंजेक्शन, न दर्द निवारक दवा
शाहनगर। रात्रि में घायल युवक तड़पता रहा - सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शाहनगर बना सिर्फ नाम का अस्पताल स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। झिलमिल गांव का एक युवक बीती रात शाहनगर की ओर आते समय ट्राइबल छात्रावास के पास अचानक भैंस से टकरा गया। हादसे में युवक को गंभीर चोटें आईं। सूचना मिलते ही 100 डायल आपातकालीन सेवा की टीम ने घायल को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शाहनगर पहुंचाया। लेकिन यहां जो हुआ, उसने पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए रात करीब 9 बजे अस्पताल पहुंचने के बाद युवक पूरी रात दर्द से कराहता रहा। मौके पर केवल स्टाफ नर्स मौजूद थीं न कोई डॉक्टर, और प्राथमिक उपचार तक नहीं मिला। परिजनों के अनुसार बार-बार आग्रह करने के बावजूद कोई वरिष्ठ कर्मचारी अस्पताल नहीं पहुंचा। "अस्पताल खुला, इलाज बंद" घायल युवक के परिजनों ने बताया कि वे पूरी रात डॉक्टर का इंतजार करते रहे। न एक्स-रे हुआ, न इंजेक्शन, न दर्द निवारक दवा
- पन्ना के रकसेहा में छात्रावास की बिल्डिंग हुई जर्जर अधिकांश बच्चियों बिल्डिंग के नीचे पढ़ाई भजन और रात्रि में आराम करते हैं लेकिन इस बिल्डिंग की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि बिल्डिंग के ऊपर टीम चद्दर और लकड़ी की से लगाई हुई है इस बिल्डिंग में कितनी हालत खराब है कि कभी भी कोई बड़ी घटना हो सकती है या बड़ा हादसा 100 बच्चियों का यह छात्रावास केवल बिल्डिंग की हालत इतनी खराब की है जिला प्रशासन से खाने के बाद भी नेताजी सुभाष चंद्र बोस छात्रावास में अभी तक नहीं हुई कोई व्यवस्था जिला प्रशासन दे रहा बड़ी घटना और छात्रावास अगर इसकी जल्दी मरम्मत और देखभाल नहीं हुई तो कुछ भी हो सकता है इतनी बुरी हालत में सरकारी सिस्टम देखते ही बनती है शान द्वारा लाखों करोड़ों रुपए तो दिए जाते हैं लेकिन अधिकारियों के द्वारा उसे पैसे का उपयोग अच्छे तरीके से नहीं किया जाता जिले में अधिकांश छात्रावासों की यही हालत है और जो बच्चा बच्चियों ऐसे छात्रावासों की शिकायत करते हैं तो उनके साथ इतना बुरा व्यवहार किया जाता है कि कोई छात्र-छात्राएं नहीं बोलता कई छात्रावास ऐसे हैं कि कुछ अधीक्षक अपने किराने की दुकान और अपना वेबसाइट चला रहे हैं ना ही कभी छात्रावास में मिलते हैं और ना ही छात्रावास की सफाई नहीं होती और गंदगी का अंबार चारों तरफ लगा रहता है अब देखना होगा कि पन्ना जिला प्रशासन द्वारा इन अधीक्षिकाओं के ऊपर अधीक्षक के ऊपर क्या कार्रवाई या करते हैं या फिर ऐसे ही सरकारी सिस्टम चलता रहेगा और बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ जान मन सबसे होता ही रहेगा4
- *मैहर। कांग्रेस के पुतला दहन कार्यक्रम में यातायात प्रभारी विक्रम पाठक बुरी तरह झुलसे।*1
- गुनौर विधानसभा के पूर्व विधायक महेंद्र सिंह बागरी के पुत्र शैलेंद्र बागरी के तिलकोत्सव कार्यक्रम में पन्ना जिले एवं आसपास क्षेत्र के जनप्रतिनिधि शामिल हुए एवं शुभकामनाएं दी।2
- “ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बड़ी घोषणा। नई ग्रामीण सड़क विकास योजना के तहत गांवों में पक्की सड़कें बनाई जाएंगी। काम जल्द शुरू होगा।”1
- प्रकृति का नियम है - उसके बच्चे को मत छुओ ❤️🙏1
- BCCI ने A+ Contract खत्म कर दिया है। Kohli-Rohit अब B Grade में 😳 Shami और Ishan हुए बाहर! देखिए पूरी खबर। 🔖 #CricketNews #BCCIUpdate #TeamIndia #SportsNews1
- शाहनगर। रात्रि में घायल युवक तड़पता रहा - सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शाहनगर बना सिर्फ नाम का अस्पताल स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। झिलमिल गांव का एक युवक बीती रात शाहनगर की ओर आते समय ट्राइबल छात्रावास के पास अचानक भैंस से टकरा गया। हादसे में युवक को गंभीर चोटें आईं। सूचना मिलते ही 100 डायल आपातकालीन सेवा की टीम ने घायल को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शाहनगर पहुंचाया। लेकिन यहां जो हुआ, उसने पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए रात करीब 9 बजे अस्पताल पहुंचने के बाद युवक पूरी रात दर्द से कराहता रहा। मौके पर केवल स्टाफ नर्स मौजूद थीं न कोई डॉक्टर, और प्राथमिक उपचार तक नहीं मिला। परिजनों के अनुसार बार-बार आग्रह करने के बावजूद कोई वरिष्ठ कर्मचारी अस्पताल नहीं पहुंचा। "अस्पताल खुला, इलाज बंद" घायल युवक के परिजनों ने बताया कि वे पूरी रात डॉक्टर का इंतजार करते रहे। न एक्स-रे हुआ, न इंजेक्शन, न दर्द निवारक दवा1
- बांदा महुआ ब्लॉक के अंतर्गत पिथोराबाद में रसद दुकानों का निर्माण में ग्राम प्रधान व सदस्य ने मिलकर जिलाधिकारी जे.रिभा से सचिव शशि प्रकाश के ऊपर दबंगई के बल पर कार्य करने के लगाए आरोप1
- #Apkiawajdigital बांदा/चित्रकूट | विशेष संवाददाता इंसानियत को शर्मसार करने वाले देश के सबसे बड़े 'चाइल्ड एब्यूज' कांड में शुक्रवार को न्याय का वह हथौड़ा चला, जिसकी गूँज पूरे देश में सुनाई दी। बांदा की विशेष पॉक्सो अदालत ने 34 मासूम बच्चों के साथ कुकर्म करने, उनके अश्लील वीडियो बनाकर विदेशी पोर्न साइट्स को बेचने वाले मुख्य आरोपी रामभवन और साक्ष्यों को मिटाने में उसकी मददगार पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इस मामले को 'जघन्यतम' श्रेणी में रखते हुए स्पष्ट किया कि मासूमों के बचपन को नीलाम करने वालों के लिए समाज में कोई जगह नहीं है। CBI की चार्जशीट ने खोली दरिंदगी की परतें चित्रकूट में सिंचाई विभाग में तैनात रहा कनिष्ठ सहायक रामभवन (निलंबित) वर्षों से मासूमों को अपनी हवस का शिकार बना रहा था। मामला तब खुला जब 2020 में सीबीआई ने इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। जांच में सामने आया कि रामभवन न केवल बच्चों का शारीरिक शोषण करता था, बल्कि डार्क वेब और पोर्न साइट्स के जरिए उनकी अस्मत का सौदा भी करता था। उसकी पत्नी दुर्गावती पर गवाहों को धमकाने और सबूतों से छेड़छाड़ के गंभीर आरोप सिद्ध हुए, जिसके चलते कोर्ट ने उसे भी मृत्युदंड का भागीदार माना। न्याय की जीत: पीड़ितों को 10-10 लाख का मरहम विशेष न्यायाधीश ने फैसले के साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ा निर्देश दिया है कि सभी 34 पीड़ित बच्चों को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता तत्काल प्रदान की जाए। अधिवक्ताओं के अनुसार, गवाहों के टूटने और डराने-धमकाने के बावजूद सीबीआई की ठोस पैरवी ने दोषियों को फंदे तक पहुँचाया है। निष्कर्ष: "यह फैसला केवल एक सजा नहीं, बल्कि उन 34 परिवारों के घावों पर मरहम है, जिनका बचपन इस दरिंदे ने उजाड़ दिया था। बांदा कोर्ट का यह निर्णय देश भर के चाइल्ड एब्यूज मामलों में नजीर बनेगा।"1