आज प्रातः लगभग 07:30 बजे, वाराणसी के दांडी घाट पर गंगा नदी में पिकेट और पेट्रोलिंग ड्यूटी के दौरान 11वीं वाहिनी एनडीआरएफ की टीम ने एक व्यक्ति को स्नान करते समय गहरे पानी में डूबते हुए देखा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, निकट तैनात एनडीआरएफ के बचावकर्मी तत्काल सक्रिय हो गए और बिना समय गंवाए नदी में छलांग लगाकर बचाव अभियान शुरू किया। एनडीआरएफ टीम के बचावकर्मियों ने तेजी और तत्परता से उस व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालकर नदी तट पर पहुँचाया। बचाए गए व्यक्ति की पहचान बिहार के नालंदा निवासी श्री सतीश कुमार पटेल के 20 वर्षीय पुत्र रिशुराज के रूप में हुई। समय रहते किए गए इस त्वरित बचाव अभियान के कारण युवक की जान बचाई जा सकी। एनडीआरएफ द्वारा किए गए इस साहसिक बचाव कार्य को वाराही घाट सहित आसपास के अन्य घाटों पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रत्यक्ष रूप से देखा और बचाव दल की जमकर प्रशंसा की। इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन ने एक बार फिर एनडीआरएफ की तत्परता, दक्षता और जनसेवा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया। इस घटना पर एनडीआरएफ के उप महानिरीक्षक श्री मनोज कुमार शर्मा ने भी गंगा में डूब रहे युवक की जान बचाने में एनडीआरएफ की तत्परता की सराहना की।
आज प्रातः लगभग 07:30 बजे, वाराणसी के दांडी घाट पर गंगा नदी में पिकेट और पेट्रोलिंग ड्यूटी के दौरान 11वीं वाहिनी एनडीआरएफ की टीम ने एक व्यक्ति को स्नान करते समय गहरे पानी में डूबते हुए देखा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, निकट तैनात एनडीआरएफ के बचावकर्मी तत्काल सक्रिय हो गए और बिना समय गंवाए नदी में छलांग लगाकर बचाव अभियान शुरू किया। एनडीआरएफ टीम के बचावकर्मियों ने तेजी और तत्परता से उस व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालकर नदी तट पर पहुँचाया। बचाए गए व्यक्ति की पहचान बिहार के नालंदा निवासी श्री सतीश कुमार पटेल के 20 वर्षीय पुत्र रिशुराज के रूप में हुई। समय रहते किए गए इस त्वरित बचाव अभियान के कारण युवक की जान बचाई जा सकी। एनडीआरएफ द्वारा किए गए इस साहसिक बचाव कार्य को वाराही घाट सहित आसपास के अन्य घाटों पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रत्यक्ष रूप से देखा और बचाव दल की जमकर प्रशंसा की। इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन ने एक बार फिर एनडीआरएफ की तत्परता, दक्षता और जनसेवा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया। इस घटना पर एनडीआरएफ के उप महानिरीक्षक श्री मनोज कुमार शर्मा ने भी गंगा में डूब रहे युवक की जान बचाने में एनडीआरएफ की तत्परता की सराहना की।
- सोनभद्र जिले के रेणुकूट नगर पंचायत के वार्ड संख्या-1 में शुभकामना फाउंडेशन द्वारा टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत एक विशेष जनजागरूकता एवं स्क्रीनिंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भारत सरकार के राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के लक्ष्यों को आगे बढ़ाते हुए, इस अभियान में वार्ड की सभासद श्रीमती चंदा देवी और समाजसेवी चंदन ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। फाउंडेशन के स्वयंसेवक मौसम यादव, संदीप कुमार, देव सिंह और तनिष्क कुमार ने घर-घर जाकर लोगों को टीबी के लक्षणों और बचाव के उपायों के प्रति जागरूक किया। उन्होंने लोगों को स्पष्ट किया कि दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, रात में बुखार, पसीना आना, वजन कम होना या बलगम में खून आने जैसे लक्षण होने पर बिना किसी संकोच के सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर निःशुल्क जांच करानी चाहिए। उन्होंने टीबी के प्रति सामाजिक भ्रांतियों को दूर करने और रोगियों के साथ भेदभाव न करने की अपील भी की। शुभकामना फाउंडेशन के सुभाष राय ने इस पहल पर जोर देते हुए कहा कि जनभागीदारी के बिना टीबी मुक्त भारत का संकल्प पूरा करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन लगातार संभावित मरीजों की पहचान करने और उन्हें सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने का कार्य कर रहा है। अंत में, उन्होंने समाज के सभी जागरूक नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और संस्थाओं से अपने क्षेत्रों में इस दिशा में सहयोग करने का आग्रह किया ताकि टीबी मुक्त भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य को समय पर साकार किया जा सके।1
- सोनभद्र जनपद में एक भीषण सड़क हादसे में बाइक सवार तीन युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। यह दर्दनाक घटना तब हुई जब एक बाइक पर सवार होकर जा रहे इन तीनों युवकों की हाइवा से जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी गंभीर थी कि तीनों की जान तत्काल चली गई और पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल छा गया। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची। पुलिस ने शवों को कब्जे में लिया और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। क्षेत्राधिकारी (CO) ने भी इस घटना की पुष्टि की है, जिसमें बताया गया कि सड़क दुर्घटना में बाइक सवार तीन युवकों की मृत्यु हुई है। पुलिस अब इस मामले की गहन जांच कर रही है ताकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। घटनास्थल पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। इस हादसे के बाद मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। इस दुखद घटना के मद्देनजर, पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे वाहन चलाते समय यातायात नियमों का कड़ाई से पालन करें, निर्धारित गति सीमा में ही वाहन चलाएँ और सुरक्षा संबंधी सभी आवश्यक सावधानियां बरतें।1
- सोनभद्र के दुद्धी कोतवाली क्षेत्र के डुमरडीहा गांव में गुरुवार शाम करीब 4 बजे एक गंभीर बाइक दुर्घटना में एक युवक बुरी तरह घायल हो गया। डुमरडीहा निवासी 25 वर्षीय सत्यनारायण पुत्र जंगी पासी अपनी बाइक से घर से दुद्धी बाजार जा रहे थे। नहर के पास सरोजा देवी के घर के समीप उनकी बाइक एक पत्थर से टकरा गई, जिससे वह गंभीर रूप से चोटिल हो गए। ग्रामीणों के मुताबिक, युवक शराब के नशे में था और सड़क के दाहिनी ओर से आ रहा था, तभी उसकी बाइक अनियंत्रित होकर बाईं ओर जाकर पत्थर से जा टकराई। घटना की सूचना ग्रामीणों ने 112 पर दी। इसके बाद 102 एम्बुलेंस टीम के ईएमटी पंकज और चालक विजय राजभर घायल युवक को प्राथमिक उपचार के लिए सीएचसी दुद्धी लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने प्रारंभिक जांच में सत्यनारायण के सिर में गंभीर चोट और दाहिने पैर में फ्रैक्चर पाया। उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए सीएचसी दुद्धी से जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। घायल के इलाज में मदद के लिए गांव के प्रधान प्रतिनिधि सुभाष प्रसाद भी अस्पताल पहुंचे। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घटना की जानकारी ली है और मामले की जांच शुरू कर दी है।3
- आज प्रातः लगभग 07:30 बजे, वाराणसी के दांडी घाट पर गंगा नदी में पिकेट और पेट्रोलिंग ड्यूटी के दौरान 11वीं वाहिनी एनडीआरएफ की टीम ने एक व्यक्ति को स्नान करते समय गहरे पानी में डूबते हुए देखा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, निकट तैनात एनडीआरएफ के बचावकर्मी तत्काल सक्रिय हो गए और बिना समय गंवाए नदी में छलांग लगाकर बचाव अभियान शुरू किया। एनडीआरएफ टीम के बचावकर्मियों ने तेजी और तत्परता से उस व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालकर नदी तट पर पहुँचाया। बचाए गए व्यक्ति की पहचान बिहार के नालंदा निवासी श्री सतीश कुमार पटेल के 20 वर्षीय पुत्र रिशुराज के रूप में हुई। समय रहते किए गए इस त्वरित बचाव अभियान के कारण युवक की जान बचाई जा सकी। एनडीआरएफ द्वारा किए गए इस साहसिक बचाव कार्य को वाराही घाट सहित आसपास के अन्य घाटों पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रत्यक्ष रूप से देखा और बचाव दल की जमकर प्रशंसा की। इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन ने एक बार फिर एनडीआरएफ की तत्परता, दक्षता और जनसेवा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया। इस घटना पर एनडीआरएफ के उप महानिरीक्षक श्री मनोज कुमार शर्मा ने भी गंगा में डूब रहे युवक की जान बचाने में एनडीआरएफ की तत्परता की सराहना की।1
- गढ़वा जिले के भवनाथपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मानवीय संवेदना को तार-तार करने का एक मामला सामने आया है। अस्पताल पर गंभीर आरोप है कि उसने प्रसव पीड़ा से कराहती एक महिला को रेफर करने के बाद गढ़वा ले जाने के लिए एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं कराई, जबकि उसी अस्पताल में एक बुजुर्ग महिला की मौत होने पर उसके शव को ले जाने के लिए एम्बुलेंस की सुविधा तुरंत प्रदान की गई। जानकारी के अनुसार, भवनाथपुर पंचायत के बुका गांव की सुमन देवी (पति दुर्गेश पासवान) को बीती रात करीब 9 बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई, जिसके बाद परिजन उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाए। एएनएम गुलाब खलखो ने जांच के बाद 'अभी विलंब है' कहकर महिला को घर भेज दिया। रात लगभग 2-2:30 बजे फिर से पीड़ा बढ़ने पर परिजन दोबारा अस्पताल पहुंचे, जहाँ एएनएम गुलाब खलखो ने फिर आश्वासन दिया कि कोई दिक्कत नहीं है और सब ठीक हो जाएगा, बावजूद इसके कि परिजनों ने बाहर ले जाने की इच्छा जताई थी। चार-पांच घंटे बाद जब प्रसव पीड़ा अत्यधिक बढ़ गई और महिला दर्द से कराहने लगी, तब एएनएम ने हाथ खड़े कर दिए और बाहर ले जाने को कहा। करीब 10 बजे डॉक्टर रंजन दास ने महिला की जांच कर उसे रेफर कर दिया। रेफर किए जाने के बाद महिला को अस्पताल परिसर में खुले आसमान के नीचे एक चबूतरे पर घंटों दर्द से कराहते हुए छोड़ दिया गया। अस्पताल प्रबंधन ने उसे डेढ़ घंटे तक एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं कराया, जिससे परिजनों को निजी वाहन की तलाश करनी पड़ी। इतना ही नहीं, परिजनों से बाहर से दवाइयां भी मंगवाई गई थीं। इसी बीच, अस्पताल में माईधिया गांव की बुजुर्ग महिला सरोज देवी की मौत हो जाती है। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. दिनेश कुमार सिंह के निर्देश पर उस मृत महिला का शव ले जाने के लिए एम्बुलेंस तुरंत उपलब्ध करा दिया जाता है। दूसरी ओर, प्रसव पीड़ा से छटपटाती महिला को एम्बुलेंस नहीं दिया गया और उसे निजी गाड़ी खोजने को कहा गया। इस संबंध में डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने बाद में कहा कि उन्हें प्रसव पीड़ा से कराहती महिला के बारे में जानकारी नहीं दी गई थी, और मृत महिला के परिजनों के पास संसाधन न होने के कारण एम्बुलेंस से शव भेजने का आदेश उन्होंने दिया था, जिसे उन्होंने 'थोड़ी सी चूक' बताया। अस्पताल प्रबंधन की इस घोर लापरवाही और अमानवीय संवेदना पर पीड़ित के भाई गनौरी पासवान, बहन गीता देवी और अन्य परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। अंततः, डेढ़ घंटे के बाद निजी वाहन से प्रसव पीड़ा से कराहती महिला को गढ़वा ले जाया गया। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर मानवीय संवेदना को तार-तार करने का आरोप लगाया है।3
- देशभर के किसानों के लिए एक बहुत बड़ी और अच्छी खबर सामने आई है।1
- सोनभद्र के बभनी थाना क्षेत्र में एक बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई है। यह हादसा चालक की लापरवाही के कारण हुआ, जिसके चलते बस अनियंत्रित हो गई और दुर्घटना का शिकार हो गई।1