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पुलिस ने एक मोटरसाइकिल चोरी के मामले का सफलतापूर्वक खुलासा किया है। इस कार्रवाई के तहत, दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और उनके कब्जे से कुल सात वाहन जब्त किए गए हैं।
अजय कुमार केवट
पुलिस ने एक मोटरसाइकिल चोरी के मामले का सफलतापूर्वक खुलासा किया है। इस कार्रवाई के तहत, दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और उनके कब्जे से कुल सात वाहन जब्त किए गए हैं।
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- पुलिस ने एक मोटरसाइकिल चोरी के मामले का सफलतापूर्वक खुलासा किया है। इस कार्रवाई के तहत, दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और उनके कब्जे से कुल सात वाहन जब्त किए गए हैं।1
- शहडोल के वार्ड क्रमांक 11 से बीते दिनों लापता हुए रमेश शराफ की गुमशुदगी की रिपोर्ट कोतवाली थाने में दर्ज कराई गई थी। इसी बीच, पुलिस को मुडना नदी में एक अज्ञात व्यक्ति का शव तैरता हुआ मिला। शव की शिनाख्त न होने पर पुलिस ने उसे दफना दिया, लेकिन परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने शव को 24 घंटे भी सुरक्षा में नहीं रखा और न ही पहले उसकी सही शिनाख्त करवाई। जब मृत व्यक्ति की पहचान महेश शराफ के रूप में हुई, तो परिजनों ने उसकी शिनाख्त की। इसके बाद, कोतवाली पुलिस ने मंगलवार को लगभग 4:00 बजे जमीन में दफनाए गए शव को निकलवाकर परिजनों को सुपुर्द किया।1
- भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) की उमरिया इकाई ने सुश्री मीनाक्षी नटराजन जी का नामांकन निरस्त किए जाने के विरोध में गांधी चौक, उमरिया में प्रदर्शन किया। इस दौरान संगठन के सदस्यों ने ECI का पुतला दहन कर अपनी नाराजगी व्यक्त की। पुतला दहन के माध्यम से NSUI ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर गहरा असंतोष जताया और निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता तथा पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए। संगठन ने स्पष्ट किया कि उनका यह आंदोलन किसी विशेष व्यक्ति के खिलाफ नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर किया गया है।1
- भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) जिला उमरिया ने सुश्री मीनाक्षी नटराजन के नामांकन निरस्त किए जाने के विरोध में उमरिया के गांधी चौक पर भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) का पुतला फूँककर प्रदर्शन किया। इस दौरान एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी गहरी नाराज़गी व्यक्त की और इसकी निष्पक्षता तथा पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए। प्रदर्शन के दौरान, NSUI ने आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं और विपक्षी दलों के नेताओं तथा प्रत्याशियों के साथ असमान व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने भाजपा सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को प्रभावित करने का भी आरोप लगाया, जिससे केंद्र और विभिन्न स्तरों पर सत्ता पक्ष के प्रभाव में इन संस्थाओं की भूमिका पर प्रश्नचिह्न लग गया है। NSUI ने मांग की कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए ताकि जनता का विश्वास लोकतांत्रिक व्यवस्था में बना रहे, विशेषकर मध्यप्रदेश के राज्यसभा चुनाव में सुश्री मीनाक्षी नटराजन के नामांकन निरस्तीकरण के विवादित फैसले की पारदर्शी समीक्षा की मांग की गई। NSUI जिला अध्यक्ष मो. असलम शेर ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव कराने से मजबूत नहीं होता, बल्कि निष्पक्ष चुनाव और सभी दलों को समान अवसर मिलने से मजबूत होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि जनता के मन में चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो उनका पारदर्शी जवाब मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि NSUI का यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर है, और छात्र तथा युवा लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपनी आवाज़ उठाते रहेंगे। इस कार्यक्रम में मो. असलम शेर के साथ कृष्ण कांत तिवारी, रोहनी श्याम, आकाश प्रजापति, अनुज वर्मा, अनुराग तिवारी, खुशी मोगरे, अजय विश्वकर्मा, अर्पिता तिवारी, आंचल चौधरी, सागर यादव, अमित बर्मन, अजय, संदीप, आकाश, विकाश प्रजापति सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। मो. असलम शेर ने अंत में भाजपा सरकार से लोकतांत्रिक संस्थाओं के दुरुपयोग को बंद करने का आह्वान किया।1
- वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप सिंह जी की पावन जयंती के अवसर पर उमरिया जिले में एक भव्य शौर्य यात्रा का आयोजन किया गया। यह यात्रा मां ज्वाला धाम उचेहरा से उमरिया के लिए कुछ ही क्षणों में रवाना हुई, जिसमें मध्य प्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री और उमरिया जिले के प्रभारी मंत्री श्री नगर सिंह चौहान जी सहित कई गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। इस शौर्य यात्रा में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा छत्तीसगढ़ के जसपुर राज परिवार के महाराज कुंवर श्रीमंत विक्रमादित्य सिंह जूदेव जी, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय संरक्षिका आदरणीय श्री बहु रानी जया सिंह जूदेव (छत्तीसगढ़), बांधवगढ़ विधानसभा क्षेत्र के विधायक शिवनारायण सिंह (लालू भैया), एवं महाराणा क्षत्रिय महासभा के सभी पदाधिकारीगण उपस्थित रहे। इन सभी ने यात्रा शुरू होने से पहले मां ज्वाला माता रानी का विधिवत पूजा अर्चना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।2
- अनूपपुर जिले में सर्पदंश की घटनाओं ने दो लोगों की जान ले ली, जबकि एक महिला का इलाज जारी है। जिला चिकित्सालय अनूपपुर में उपचार के दौरान एक नवविवाहिता की मौत हो गई। शहडोल जिले के बुढार थाना अंतर्गत सरईकापा गांव निवासी 24 वर्षीय सरिता पति अवधेश चौधरी को सोमवार रात घर के पीछे बाड़ी में किसी अज्ञात जहरीले सांप ने जांघ के पास डस लिया था। सांप के नहीं मिलने और सरिता की हालत बिगड़ने पर परिजनों ने उसे निजी वाहन से देर रात जिला चिकित्सालय अनूपपुर में भर्ती कराया, जहाँ उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। ड्यूटी डॉक्टर हिमांशु पांडेय ने घटना की जानकारी अस्पताल पुलिस को दी। मंगलवार सुबह जिला अस्पताल पुलिस के प्रधान आरक्षक कमलेश प्रसाद ने मृतका नवविवाहिता होने के कारण कार्यपालक दण्डाधिकारी/तहसीलदार अनूपपुर वेद प्रकाश सिंह की उपस्थिति में शव का पंचनामा किया। परिवार की महिलाओं द्वारा महिला के शव का अंदरुनी परीक्षण कराकर, ड्यूटी डॉक्टर से पोस्टमॉर्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। संबंधित थाना को घटना की जानकारी देते हुए अग्रिम जांच करने की बात कही गई है। इसी क्रम में, भालूमाडा थाना अंतर्गत पयारी क्रमांक एक निवासी 27 वर्षीय रविशंकर पिता स्व. मनोहर चौधरी की दो दिन पूर्व घर में सोते समय एक अत्यंत जहरीले करैत सर्प के काटने से मृत्यु हो गई थी। गंभीर स्थिति में उन्हें कोतमा चिकित्सालय ले जाया गया था, जहाँ उन्होंने दम तोड़ दिया। कोतमा पुलिस द्वारा कार्यवाही के बाद शव परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया गया था। परिजनों एवं रिश्तेदारों के एकत्रित होने तथा रात में रुकने के दौरान, रविशंकर की 48 वर्षीय मां इंद्रवती चौधरी पति स्व. मनोहर चौधरी को भी देर रात करैत सर्प ने दाएं हाथ की बीच की उंगली में काट लिया। परिजनों ने हो-हल्ला सुनकर सांप को मारकर इंद्रवती को उपचार के लिए फुनगा अस्पताल से जिला चिकित्सालय अनूपपुर में भर्ती कराया है, जहाँ चिकित्सकों ने उनकी हालत खतरे से बाहर बताई है और वर्तमान में उनका उपचार जारी है।1
- मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में आयोजित जनसुनवाई के दौरान एक बार फिर आदिवासी परिवार की पुश्तैनी जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार ने प्रशासन के समक्ष आरोप लगाया है कि विभागीय अधिकारियों और बिचौलियों की मिलीभगत से उनकी जमीन को छलपूर्वक हड़प लिया गया है, जिससे उन्हें उनके अधिकारों से वंचित कर दिया गया। पीड़ित परिवार ने अपनी शिकायत में बताया कि उन्हें आर्थिक सहायता और मुआवजे का झांसा देकर विश्वास में लिया गया। इस दौरान लाखों रुपये मूल्य की उनकी भूमि से संबंधित दस्तावेज तैयार कर लिए गए, और बाद में उन्हें ही उनकी जमीन से बेदखल करने का प्रयास किया गया। परिवार का आरोप है कि उन्हें 32 लाख रुपये का चेक दिखाकर बाद में वापस ले लिया गया, जिसके कारण वे न्याय के लिए भटकने को मजबूर हैं। जनसुनवाई में यह गंभीर मामला सामने आते ही कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने संबंधित अधिकारियों से तत्काल जानकारी तलब की। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं, साथ ही स्पष्ट किया कि किसी भी गरीब, आदिवासी या कमजोर वर्ग के व्यक्ति के साथ अन्याय बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। अब पूरे जिले की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस जांच के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाता है या यह मामला भी केवल फाइलों में दब कर रह जाएगा। यह प्रकरण आदिवासी हितों की रक्षा के दावों के बीच प्रशासनिक जवाबदेही और व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।1
- शहडोल जिले के सोहागपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत आकाशवाणी केंद्र के पास बिजली लाइन में फॉल्ट सुधारने के दौरान एक आउटसोर्स कर्मचारी की करंट लगने से दर्दनाक मौत हो गई है। इस घटना ने बिजली विभाग और आउटसोर्स कंपनियों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक की पहचान मालाचुआ निवासी कुंदन सिंह के रूप में हुई है, जो क्रिस्टा कंपनी के माध्यम से बिजली विभाग में कार्यरत था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुंदन सिंह बिजली लाइन पर मरम्मत का काम कर रहा था, तभी अचानक लाइन में हाई वोल्टेज करंट प्रवाहित हो गया, जिसकी चपेट में आने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस दुखद हादसे के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि आउटसोर्स कर्मचारियों से पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के बिना ही जोखिम भरे कार्य कराए जाते हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि कर्मचारी लाइन पर काम कर रहा था तो संबंधित लाइन का शटडाउन क्यों नहीं लिया गया और किसकी अनुमति से बिजली आपूर्ति चालू की गई। लोगों ने घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और संबंधित कंपनी के जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यह हादसा एक बार फिर बिजली विभाग में सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी और आउटसोर्स कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करता है।1