बैतूल से मुलताई जाने की हड़बड़ी में गलत ट्रेन संघमित्रा एक्सप्रेस में सवार हुई एक मां और उसकी बेटी चिचोली के पास एक हादसे का शिकार हो गईं। ट्रेन के मुलताई में न रुकने की जानकारी मिलने पर घबराहट में चलती ट्रेन से उतरने के प्रयास में सरिता दुबे (49) और उनकी पुत्री अक्षरा दुबे (15) गंभीर रूप से घायल हो गईं। दुर्घटना में सरिता दुबे के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आई हैं और उन्हें अत्यधिक रक्तस्राव हुआ है। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें नागपुर रेफर कर दिया है। वहीं, उनकी पुत्री अक्षरा दुबे का उपचार पांढुर्णा सिविल अस्पताल में जारी है। रेलवे और जीआरपी पुलिस ने तत्काल सक्रियता दिखाते हुए घायलों को मेमो ट्रेन से पांढुर्णा रेलवे स्टेशन पहुंचाया। वहाँ से उन्हें तुरंत एंबुलेंस के जरिए पांढुर्णा सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस द्वारा घटना की विस्तृत जांच की जा रही है।
बैतूल से मुलताई जाने की हड़बड़ी में गलत ट्रेन संघमित्रा एक्सप्रेस में सवार हुई एक मां और उसकी बेटी चिचोली के पास एक हादसे का शिकार हो गईं। ट्रेन के मुलताई में न रुकने की जानकारी मिलने पर घबराहट में चलती ट्रेन से उतरने के प्रयास में सरिता दुबे (49) और उनकी पुत्री अक्षरा दुबे (15) गंभीर रूप से घायल हो गईं। दुर्घटना में सरिता दुबे के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आई हैं और उन्हें अत्यधिक रक्तस्राव हुआ है। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें नागपुर रेफर कर दिया है। वहीं, उनकी पुत्री अक्षरा दुबे का उपचार पांढुर्णा सिविल अस्पताल में जारी है। रेलवे और जीआरपी पुलिस ने तत्काल सक्रियता दिखाते हुए घायलों को मेमो ट्रेन से पांढुर्णा रेलवे स्टेशन पहुंचाया। वहाँ से उन्हें तुरंत एंबुलेंस के जरिए पांढुर्णा सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस द्वारा घटना की विस्तृत जांच की जा रही है।
- बैतूल से मुलताई जाने की हड़बड़ी में गलत ट्रेन संघमित्रा एक्सप्रेस में सवार हुई एक मां और उसकी बेटी चिचोली के पास एक हादसे का शिकार हो गईं। ट्रेन के मुलताई में न रुकने की जानकारी मिलने पर घबराहट में चलती ट्रेन से उतरने के प्रयास में सरिता दुबे (49) और उनकी पुत्री अक्षरा दुबे (15) गंभीर रूप से घायल हो गईं। दुर्घटना में सरिता दुबे के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आई हैं और उन्हें अत्यधिक रक्तस्राव हुआ है। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें नागपुर रेफर कर दिया है। वहीं, उनकी पुत्री अक्षरा दुबे का उपचार पांढुर्णा सिविल अस्पताल में जारी है। रेलवे और जीआरपी पुलिस ने तत्काल सक्रियता दिखाते हुए घायलों को मेमो ट्रेन से पांढुर्णा रेलवे स्टेशन पहुंचाया। वहाँ से उन्हें तुरंत एंबुलेंस के जरिए पांढुर्णा सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस द्वारा घटना की विस्तृत जांच की जा रही है।1
- बैतूल जिला चिकित्सालय में बीती रात करीब दो घंटे तक बिजली व्यवस्था ठप रहने से स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बिजली बाधित रहने के दौरान मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा, जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन की तैयारियों और वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर भी गहन चर्चाएं शुरू हो गई हैं। मामला तब और गरमा गया जब अस्पताल की बिजली समस्या की जानकारी प्रशासन तक पहुंचाने वाले पत्रकार नितिन अग्रवाल को कथित तौर पर अस्पताल के एक कर्मचारी द्वारा सरेआम जान से मारने की धमकी दिए जाने का आरोप सामने आया। इस घटना से जिले के पत्रकारों में गहरा आक्रोश व्याप्त हो गया है। आक्रोशित पत्रकारों ने कलेक्टर एवं पुलिस प्रशासन से दोषी कर्मचारी के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा अस्पताल की व्यवस्थाओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग की है। पत्रकारों का कहना है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में कार्य करने वाले पत्रकारों को धमकाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है और ऐसे प्रकरणों में सख्त कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि दोषी के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे। इस बीच, घटना को लेकर प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद जिले में जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं और पत्रकार की सुरक्षा को लेकर चर्चा का माहौल बना हुआ है।1
- आमला में जल संरक्षण और पानी बचाने के बड़े-बड़े दावों के बीच नगर पालिका की लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। नगर पालिका कार्यालय के ठीक सामने स्थित एक सार्वजनिक नल पिछले कई दिनों से लगातार बह रहा है, जिससे प्रतिदिन हजारों लीटर पेयजल व्यर्थ बर्बाद हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि नगर पालिका परिसर के सामने होने के बावजूद अब तक किसी भी अधिकारी, कर्मचारी या जनप्रतिनिधि ने इसकी सुध नहीं ली है। स्थानीय लोगों के अनुसार, नगर पालिका ने लगभग 45 दिन पहले ही पुराने नल को हटाकर एक नया नल लगाया था। हालांकि, इस नए नल की गुणवत्ता इतनी खराब निकली कि कुछ ही दिनों में यह खराब हो गया और इससे लगातार पानी बहने लगा। इस घटना से न केवल पेयजल की भारी बर्बादी हो रही है, बल्कि नगर पालिका की कार्यप्रणाली और उसके द्वारा करवाए गए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि एक तरफ नगर पालिका जल संकट और पानी की कमी का हवाला देकर लोगों से पानी बचाने की अपील करती है, वहीं दूसरी ओर उसकी आंखों के सामने ही हजारों लीटर पानी रोजाना नालियों में बहता रहता है। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते खराब नल को ठीक कर दिया जाता, तो इस पानी की बर्बादी को आसानी से रोका जा सकता था। लगातार बहते पानी के कारण नल के आसपास का क्षेत्र भी हमेशा गीला और गंदा बना रहता है, जिससे राहगीरों और स्थानीय दुकानदारों को भी काफी असुविधा हो रही है। नागरिकों का यह भी कहना है कि जब नगर पालिका कार्यालय के ठीक सामने की स्थिति इतनी खराब है, तो शहर के अन्य क्षेत्रों में व्यवस्थाओं की निगरानी किस प्रकार हो रही होगी, इसका अनुमान लगाना कठिन नहीं है। स्थानीय नागरिकों ने नगर पालिका अध्यक्ष, मुख्य नगर पालिका अधिकारी और संबंधित विभाग से तुरंत खराब नल को बदलने और पानी की बर्बादी रोकने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने भविष्य में घटिया सामग्री का उपयोग करने वाले जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई करने की अपील की है। जनता सवाल उठा रही है कि जब जल संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने वाली संस्था ही पानी की बर्बादी रोकने में गंभीर नहीं है, तो आम नागरिकों से जल बचाने की अपेक्षा कैसे की जा सकती है।2
- जनसुनवाई के दौरान एक महिला ने एसडीएम से हाथ जोड़कर गुहार लगाई है, जिसमें उसने गांव में बेखौफ चल रहे अवैध शराब के कारोबार पर रोक लगाने की मांग की है। यह दूसरी बार है जब महिला इसी शिकायत को लेकर अधिकारियों के पास पहुंची है, जो समस्या की निरंतरता को दर्शाता है। महिला ने अपनी शिकायत में स्पष्ट किया कि गांव में अवैध शराब का धंधा बिना किसी भय के फल-फूल रहा है। स्थिति यह है कि शराब माफिया खुलेआम लोगों को धमकी दे रहे हैं, जिससे ग्रामीण दहशत में हैं। महिला की यह अपील गांव में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं उठाती है।1
- विश्व पर्यावरण दिवस सप्ताह (05 जून से 12 जून) के तहत, छिंदवाड़ा में 'सिंगल यूज़ प्लास्टिक मुक्त छिंदवाड़ा अभियान' चलाया गया। यह अभियान मृगनयनी मध्यप्रदेश प्रदर्शनी 2026 में आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य सिंगल यूज़ प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के प्रति नागरिकों को जागरूक करना था। मॉडल फ्यूचर कला एवं तकनीकी शिक्षा समिति, छिंदवाड़ा द्वारा नगर पालिका निगम छिंदवाड़ा और सिद्धिविनायक वेस्ट मैनेजमेंट सर्विसेज के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संस्था की अध्यक्ष आयशा लोधी के नेतृत्व में, प्रदर्शनी में आए दुकानदारों, विक्रेताओं और नागरिकों को कपड़े की थैलियाँ वितरित की गईं, ताकि वे सिंगल यूज़ प्लास्टिक का उपयोग कम कर सकें। इस अवसर पर स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर विनीता नेटी की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम में स्वच्छता चैंपियन डॉ. मीरा पराड़कर, अलका शुक्ला, वृक्षमित्र रविंद्र कुशवाहा, डॉ. महेश बंडेवार, समाजसेवी कोशिमा रजक, हमारा संकल्प वेलफेयर सोसाइटी से डॉ. नरेंद्र सोमकुंवर और मानव अधिकार मिशन से डॉ. शेख असलम सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। इस पहल के माध्यम से प्रदर्शनी में शामिल दुकानदारों और नागरिकों को कपड़े की थैली अपनाने, सिंगल यूज़ प्लास्टिक के इस्तेमाल को घटाने और स्वच्छ, हरित एवं सुंदर छिंदवाड़ा के निर्माण में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण संदेश दिया गया।1
- बडकी बेलहरी स्थित मठिया राजभर बस्ती के लोग पिछले 35 सालों से घोर अंधेरे और बदहाल सड़कों के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं। यह स्थिति क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही उपेक्षा को दर्शाती है।1
- छिंदवाड़ा में रेलवे स्टेशन रोड पर स्थित प्रसिद्ध 'नारियल वाले हनुमान मंदिर' को प्रशासन द्वारा नारियल हटाने का नोटिस जारी किए जाने के बाद भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला है। मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे मंदिर समिति के सदस्यों और सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर इस कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट के गेट पर एसडीएम सुधीर जैन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और वहीं बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर धार्मिक आस्था का सम्मान करने की मांग की है। मंदिर समिति का कहना है कि नारियल चढ़ाने की यह परंपरा बहुत पुरानी है और पूरे देश में यह मंदिर 'नारियल वाले हनुमान' के रूप में जाना जाता है, इसलिए प्रशासन को यह आदेश तत्काल वापस लेना चाहिए।1
- मल्टी नगर में नगर पालिका की अनदेखी के कारण जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं। इन कचरे के ढेरों में मवेशी भोजन की तलाश करते हैं, जिसके चलते वे कचरे में मिली पन्नी खा लेते हैं। पन्नी खाने की वजह से मवेशियों की मौत हो रही है, जो नगर पालिका की लापरवाही का एक गंभीर परिणाम है।1