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दिल्ली दल्लूपुरा में दोस्त की पिस्टल के लाइसेंस मिलने की खुशी में पिस्टल लोड कर रील बना रहा था पवन। ख़ुद के लगी गोली, हुई मौत।
राम जी दीक्षित पत्रकार
दिल्ली दल्लूपुरा में दोस्त की पिस्टल के लाइसेंस मिलने की खुशी में पिस्टल लोड कर रील बना रहा था पवन। ख़ुद के लगी गोली, हुई मौत।
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- प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बाइक सवार परिवार जैसे ही पुल पर पहुंचा, अचानक खतरनाक चाइनीज मांझा गले में उलझ गया, जिससे चालक की गर्दन बुरी तरह कट गई। हादसा इतना भीषण था कि मौके पर ही अफरा-तफरी मच गई और बाइक अनियंत्रित होकर टकरा गई। इस घटना में तीन लोग घायल हुए, जिनमें एक की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है। सबसे चिंताजनक और अमानवीय पहलू यह रहा कि घायल व्यक्ति लंबे समय तक सड़क पर तड़पता रहा। मौके पर मौजूद लोगों ने मदद की कोशिश की, लेकिन न तो समय पर एंबुलेंस पहुंची और न ही पास के सीतापुर रोड स्थित अस्पताल ने तुरंत इलाज के लिए हाथ बढ़ाया। बताया जा रहा है कि करीब एक घंटे तक घायल को ई-रिक्शा में ही इधर-उधर ले जाया जाता रहा, जहां वह दर्द से कराहता रहा। हद तो तब हो गई जब गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को ई-रिक्शा से उतारकर ऑटो में इस तरह डाल दिया गया, जैसे कोई संवेदनहीन वस्तु हो, और फिर उसे किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज भेजा गया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों को झकझोर देने वाला था। इस पूरे घटनाक्रम में अलीगंज पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि सूचना के बावजूद कोई जिम्मेदार अधिकारी समय पर मौके पर नहीं पहुंचा, जिससे राहत और बचाव कार्य प्रभावित हुआ। यह घटना एक बार फिर चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध के बावजूद उसकी खुलेआम बिक्री और इस्तेमाल पर सवाल खड़े करती है। साथ ही यह भी उजागर करती है कि आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था और पुलिस रिस्पॉन्स सिस्टम में कितनी गंभीर खामियां मौजूद हैं। जरूरत है कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच हो, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि किसी और को इस तरह की लापरवाही और दर्दनाक स्थिति का सामना न करना पड़े।1
- आगरा: महंगाई और गैस किल्लत के खिलाफ सपा का हल्ला बोल, कलेक्ट्रेट में फूँका चूल्हा आगरा। शहर में बढ़ती महंगाई और रसोई गैस की भारी किल्लत के विरोध में बुधवार को समाजवादी पार्टी ने जोरदार प्रदर्शन किया। सपा जिलाध्यक्ष उदल सिंह कुशवाहा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में महिलाओं ने जिलाधिकारी (DM) कार्यालय का घेराव किया और परिसर में ही धरने पर बैठ गए। कलेक्ट्रेट में जली रोटियां, गूंजे नारे प्रदर्शन के दौरान अनोखा नजारा तब देखने को मिला जब सपा की महिला कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर ही मिट्टी का चूल्हा जलाकर रोटियां बनाना शुरू कर दिया। महिलाओं का कहना था कि जब सिलेंडर पहुंच से बाहर है और एजेंसियों पर घंटों लाइन में लगने के बाद भी गैस नहीं मिल रही, तो उनके पास चूल्हा फूंकने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। 'ये नरेंद्र कहां है सिलेंडर' के नारों से गूंजा परिसर प्रदर्शनकारी महिलाओं ने केंद्र सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कलेक्ट्रेट परिसर "ये नरेंद्र कहां है सिलेंडर" जैसे नारों से गूंज उठा। महिलाओं ने आरोप लगाया कि: गैस एजेंसियों पर आए दिन लंबी लाइनें लग रही हैं, लेकिन प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। घरेलू गैस की आपूर्ति न होने से आम जनता का रसोई बजट बिगड़ चुका है। प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही के कारण कालाबाजारी बढ़ रही है। ठोस आश्वासन तक जारी रहेगा धरना जिलाध्यक्ष उदल सिंह कुशवाहा ने कहा कि आगरा की जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए त्रस्त है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक जिलाधिकारी खुद आकर इस समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस आश्वासन नहीं देते, तब तक सपा कार्यकर्ताओं का यह धरना और प्रदर्शन जारी रहेगा। प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल सुरक्षा व्यवस्था संभालने में जुटा रहा, लेकिन महिला कार्यकर्ताओं के आक्रोश के आगे अधिकारी बेबस नजर आए।1
- 🚩 हिन्दू नववर्ष 🚩1
- मध्यप्रदेश से प्रशासनिक संवेदनहीनता की एक बेहद शर्मनाक तस्वीर सामने आई है, जिसने इंसानियत और सरकारी व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक, अपनी समस्या लेकर एक गरीब और बेबस फरियादी SDM साहब के पास पहुंचा। न्याय की उम्मीद में वह रोते-बिलखते हुए SDM महोदय के पैरों में गिर पड़ा, लेकिन इसके बावजूद अधिकारी का दिल नहीं पसीजा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, SDM महोदय फरियादी की पूरी बात सुने बिना ही झल्ला गए और वहां से उल्टे पांव वापस लौट गए। इस पूरे घटनाक्रम का दृश्य सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी है और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक गरीब इंसान को अपनी फरियाद सुनाने के लिए अधिकारी के पैरों में गिरना पड़े, तब आम जनता आखिर न्याय की उम्मीद किससे करे? क्या यही जनसुनवाई है? क्या गरीब की पीड़ा सुनना अब प्रशासन के लिए बोझ बन गया है? और क्या इस मामले में जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई होगी? यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की बेबसी नहीं, बल्कि उस सिस्टम की सच्चाई है जहां फरियादी की आवाज़ से ज्यादा अफसर की नाराज़गी भारी पड़ती दिख रही है। तगड़ी हेडलाइन “रोता रहा फरियादी… SDM साहब लौट गए!” “पैरों में गिरा गरीब, फिर भी नहीं पसीजा अफसर का दिल!” “मध्यप्रदेश में इंसानियत शर्मसार, फरियादी को छोड़ SDM लौटे!”1
- 1090 चौराहे पर एसीपी हजरतगंज विकास जायसवाल के नेतृत्व में चलाया गया अभियान *बिगड़ैल अमीरजादों* की तेज आवाज वाली *मोडिफाइड हाई स्पीड तेज रफ्तार गाड़ियों* पर चला *एसीपी विकास जायसवाल का हंटर* *धमाकेदार आवाज करती गाड़ियों को लेकर* आज 1090 चौराहे पर ACP विकास जायसवाल के निर्देशन पर *ट्रैफिक इंस्पेक्टर उदय प्रताप सिंह वा हजरतगंज इंस्पेक्टर विक्रम सिंह एस एस आई अमित सिंह* के नेतृत्व में *भारी संख्या में पुलिस बल के साथ करीब दो दर्जन गाड़ियों को चालान कर किया गया सीज*4
- *इंदौर में 7 लोगों की मौत कैसे हुई ?* *बिजनेसमैन मनोज पुगलिया के घर के गेट पर EV चार्ज हो रही थी। चार्जिंग पॉइंट में शॉर्ट सर्किट हुआ। घर की गैलरी में कुछ सिलेंडर और केमिकल ड्रम रखे थे। आग इन तक पहुंची। कई धमाके हुए। 3 मंजिला घर चपेट में आ गया। घर के गेट इलेक्ट्रॉनिक थे। बिजली सप्लाई बंद होने से गेट लॉक हो गए। लोग अंदर फंसे रह गए और 7 लोग जिंदा जल गए।* *(पुलिस की शुरुआती जांच में ये सब बातें सामने आई हैं)*1