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jharkhand ,GARHWA के संग्रहे खुर्द-पंचायत के रेखा कुमारी शर्मा, ओडिशा मे पहली प्रराईज प्रारापत की l रेहला SPDC ओडिशा में महिला कॉलेज की छात्राएं , ओडिशा में संगीत पतियोगिता हेतु ,आपने मैम और शिक्षकों के साथ गये l संग्रहे खुर्द (Sangrahe Khurd) ग्राम पंचायत झारखंड के गढ़वा जिले के गढ़वा प्रखंड (CD Block) में स्थित है। [1] मुख्य विवरण राज्य: झारखंड जिला: गढ़वा (Garhwa) प्रखंड / ब्लॉक: गढ़वा मुख्यालय से दूरी: यह पंचायत या गाँव गढ़वा जिला मुख्यालय से लगभग 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। शामिल क्षेत्र: इस ग्राम पंचायत के अंतर्गत बाना (Bana), चमराही (Chamrahi) और दुबियाही (Dubiyahi) सहित कुल 8 गाँव आते हैं। रेखा कुमारी शर्मा

3 hrs ago
user_Ramashankar sharma
Ramashankar sharma
Communications central गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
3 hrs ago

jharkhand ,GARHWA के संग्रहे खुर्द-पंचायत के रेखा कुमारी शर्मा, ओडिशा मे पहली प्रराईज प्रारापत की l रेहला SPDC ओडिशा में महिला कॉलेज की छात्राएं , ओडिशा में संगीत पतियोगिता हेतु ,आपने मैम और शिक्षकों के साथ गये l संग्रहे खुर्द (Sangrahe Khurd) ग्राम पंचायत झारखंड के गढ़वा जिले के गढ़वा प्रखंड (CD Block) में स्थित है। [1] मुख्य विवरण राज्य: झारखंड जिला: गढ़वा (Garhwa) प्रखंड / ब्लॉक: गढ़वा मुख्यालय से दूरी: यह पंचायत या गाँव गढ़वा जिला मुख्यालय से लगभग 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। शामिल क्षेत्र: इस ग्राम पंचायत के अंतर्गत बाना (Bana), चमराही (Chamrahi) और दुबियाही (Dubiyahi) सहित कुल 8 गाँव आते हैं। रेखा कुमारी शर्मा

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  • बिहार का एक 6 साल का बच्चा छात्र आंदोलन में दहाड़ा l शिक्षा एक ऐसा शेरनी का दुध है जो जितना पीयेगा उतना दहाड़ेगा या तो ये बच्चा अब्दुल कलाम बनेगा या नहीं तो नटवरलाल 420, इसलिए अभिभावक और अन्य समाजसेवी से विनम्र आग्रह है कि इसके पॉजिटिव एनर्जी को किसी बढ़िया स्कूल के माध्यम से निखारने में योगदान दीजिए और इसका भविष्य संवारिए अन्यथा ? मनीष जी अन्यथा ना लीजियेगा आप ही नहीं कोई और भी संक्षम व्यक्ति आपकी जानकारी में हो तो इस बच्चे की अच्छी शिक्षा के लिए व्यवस्था करवा दीजिए, पढ़ाई में इसकी गरीबी आड़े ना आए ,प्रखर जीनियस बुद्धि का धनी है, बहुत आगे जाएगा देश और समाज के काम आएगा l यह मेरा बिहार का भविष्य है यह मेरा देश का भविष्य है हमें इन पर गर्व है हमें बिहारी होने पर गर्व है बिहार दुनिया को बहुत कुछ दिया शायद यह बच्चा भी दुनिया को कुछ भी दे सकता है हमारे बाद यही संभालेंगे हमारे बिहार को और हमारे देश को l जियो मेरे शेर तुम्हारे जैसे हर घर में बच्चा होना चाहिए तुम्हारे मां-बाप को मैं सलाम करता हू यह बच्चा के बारे में कोई जाती तो नहीं पूछ रहा है हमको तो नहीं लगता है कोई कमेंट में जाति पूछेगा कि कौन सा जात का बच्चा है जो अच्छा है अच्छा है l जिस पुलिसकर्मी ने इस बच्चे के साथ अत्याचार किया है, वक्त आने पर यही बच्चा उसे सलाम करवाएगा—और उस दिन इतिहास गवाह होगा। आज यह बच्चा छोटा है, लेकिन जो कुछ इसके साथ हुआ है, उसे यह कभी नहीं भूलेगा। ऐसे अनुभव इंसान को अंदर से मजबूत बनाते हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले समय में यह बच्चा अपनी मेहनत और हौसले से एक बड़ा मुकाम हासिल करेगा और समाज के लिए एक मजबूत आवाज बनेगा। आज जो अन्याय सह रहा है, कल वही अपने हक के लिए खड़ा होकर इतिहास लिख l मनीष भैया ये बच्चा एक दिन भविष्य में कुछ बड़ा करेगा। इसकी बौद्धिक क्षमता, यादाश्त एवं बेबाक बोलने का अंदाज बहुत प्रशंसनीय है। और भीड़ के बाहर बच्चों की स्थिति और सच्चाई दिखाने के लिए मनीष भैया आपको सलाम । पुलिस ने इनके माता पिता के साथ जो टॉर्चर किया ये बहुत निंदनीय है।इसको हमलोग फुल सपोर्ट करते हैं। जय हिंद ❤️📍
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    बिहार का एक 6 साल का बच्चा छात्र आंदोलन में दहाड़ा l शिक्षा एक ऐसा शेरनी का दुध है जो जितना पीयेगा उतना दहाड़ेगा
या तो ये बच्चा अब्दुल कलाम बनेगा या नहीं तो नटवरलाल 420, इसलिए अभिभावक और अन्य समाजसेवी से विनम्र आग्रह है कि इसके पॉजिटिव एनर्जी को किसी बढ़िया स्कूल के माध्यम से निखारने में योगदान दीजिए और इसका भविष्य संवारिए अन्यथा ?
मनीष जी अन्यथा ना लीजियेगा आप ही नहीं  कोई और भी संक्षम व्यक्ति आपकी जानकारी में हो तो इस बच्चे की अच्छी शिक्षा के लिए व्यवस्था करवा दीजिए, पढ़ाई में इसकी गरीबी आड़े ना आए ,प्रखर जीनियस बुद्धि का धनी है, बहुत आगे जाएगा देश और समाज के काम आएगा l
यह मेरा बिहार का भविष्य है यह मेरा देश का भविष्य है हमें इन पर गर्व है हमें बिहारी होने पर गर्व है बिहार दुनिया को बहुत कुछ दिया शायद यह बच्चा भी दुनिया को कुछ भी दे सकता है हमारे बाद यही संभालेंगे हमारे बिहार को और हमारे देश को l
जियो मेरे शेर तुम्हारे जैसे हर घर में बच्चा होना चाहिए तुम्हारे मां-बाप को मैं सलाम करता हू यह बच्चा के बारे में कोई जाती तो नहीं पूछ रहा है हमको तो नहीं लगता है कोई कमेंट में जाति पूछेगा कि कौन सा जात का बच्चा है जो अच्छा है अच्छा है l
जिस पुलिसकर्मी ने इस बच्चे के साथ अत्याचार किया है, वक्त आने पर यही बच्चा उसे सलाम करवाएगा—और उस दिन इतिहास गवाह होगा।
आज यह बच्चा छोटा है, लेकिन जो कुछ इसके साथ हुआ है, उसे यह कभी नहीं भूलेगा। ऐसे अनुभव इंसान को अंदर से मजबूत बनाते हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले समय में यह बच्चा अपनी मेहनत और हौसले से एक बड़ा मुकाम हासिल करेगा और समाज के लिए एक मजबूत आवाज बनेगा।
आज जो अन्याय सह रहा है, कल वही अपने हक के लिए खड़ा होकर इतिहास लिख l
मनीष भैया ये बच्चा एक दिन भविष्य में कुछ बड़ा करेगा। इसकी बौद्धिक क्षमता, यादाश्त एवं बेबाक बोलने का अंदाज बहुत प्रशंसनीय है। और भीड़ के बाहर बच्चों की स्थिति और सच्चाई दिखाने के लिए मनीष भैया आपको सलाम । पुलिस ने इनके माता पिता के साथ जो टॉर्चर किया ये बहुत निंदनीय है।इसको हमलोग फुल सपोर्ट करते हैं। जय हिंद ❤️📍
    user_Ramashankar sharma
    Ramashankar sharma
    Communications central गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    33 min ago
  • नगर परिषद मुख्यालय में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी के मौके पर निकला जुलूस ए मोहम्मदी,सरकार की आमद मरहबा से गुंजा क्षेत्र विश्रामपुर नगर परिषद व आंचलिक क्षेत्र में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी के मौके पर परंपरागत तरीके से जुलूस ए मोहम्मदी निकाला गया। क्षेत्र के विभिन्न मदरसों से जुलूस निकला और विश्रामपुर नगर परिषद मुख्यालय में सभी जुलूस शामिल हुआ। जहां सभी जुलूस एक साथ होकर एसबीआई बैंक चौक से बस स्टैंड,थाना चौक होते हुये पुनः बस स्टैंड आया। जहां जुलूस का समापन हुआ।
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    नगर परिषद मुख्यालय में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी के मौके पर निकला जुलूस ए मोहम्मदी,सरकार की आमद मरहबा से गुंजा क्षेत्र
विश्रामपुर नगर परिषद व आंचलिक क्षेत्र में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी के मौके पर परंपरागत तरीके से जुलूस ए मोहम्मदी निकाला गया। क्षेत्र के विभिन्न मदरसों से जुलूस निकला और विश्रामपुर नगर परिषद मुख्यालय में सभी जुलूस शामिल हुआ। जहां सभी जुलूस एक साथ होकर एसबीआई बैंक चौक से बस स्टैंड,थाना चौक होते हुये पुनः बस स्टैंड आया। जहां जुलूस का समापन हुआ।
    user_पब्लिक लोकल न्यूज झारखंड
    पब्लिक लोकल न्यूज झारखंड
    विश्रामपुर, पलामू, झारखंड•
    19 min ago
  • तेज बारिश से रंका के जोलंगा में दो महिलाओं के घर गिरे, बाल-बाल बचे परिवार रंका प्रखंड के तमगा पंचायत अंतर्गत जोलंगा गांव में तेज बारिश के कारण दो ग्रामीण महिलाओं के कच्चे मकान अचानक धराशायी हो गए। गनीमत रही कि घटना के समय परिवार के सभी सदस्य घर से बाहर थे, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। घर गिरने के बाद दोनों परिवारों के सामने अब रहने और सिर छुपाने की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। इस संबंध में मंगलवार को दोपहर करीब 3 बजे पीड़ित रुबीया देवी ने बताया कि तेज बारिश के दौरान वह अपने परिवार के साथ घर से बाहर थीं। इसी दौरान अचानक उनका घर भरभरा कर गिर गया। उन्होंने कहा कि यदि परिवार के सदस्य उस समय घर के अंदर होते तो मलबे में दबकर जान जाने की आशंका थी। इसी तरह चंद्रावती देवी का घर भी बारिश के कारण गिर गया। घटना के बाद दोनों परिवारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और फिलहाल दूसरे लोगों के घर में रहने को मजबूर हैं। पीड़ित परिवारों ने आवास की मांग को लेकर पंचायत के मुखिया से भी मुलाकात की। मुखिया ने जल्द ही आवास उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। वहीं दक्षिणी भाजपा महामंत्री मनोज कुमार ठाकुर ने भी दोनों पीड़ित महिलाओं को भरोसा दिलाया कि उन्हें जल्द प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने के लिए प्रयास किया जाएगा, ताकि दोनों परिवारों को सुरक्षित छत मिल सके और वे अपने घर में सम्मानपूर्वक रह सकें।
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    तेज बारिश से रंका के जोलंगा में दो महिलाओं के घर गिरे, बाल-बाल बचे परिवार


रंका प्रखंड के तमगा पंचायत अंतर्गत जोलंगा गांव में तेज बारिश के कारण दो ग्रामीण महिलाओं के कच्चे मकान अचानक धराशायी हो गए। गनीमत रही कि घटना के समय परिवार के सभी सदस्य घर से बाहर थे, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। घर गिरने के बाद दोनों परिवारों के सामने अब रहने और सिर छुपाने की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है।
इस संबंध में मंगलवार को दोपहर करीब 3 बजे पीड़ित रुबीया देवी ने बताया कि तेज बारिश के दौरान वह अपने परिवार के साथ घर से बाहर थीं। इसी दौरान अचानक उनका घर भरभरा कर गिर गया। उन्होंने कहा कि यदि परिवार के सदस्य उस समय घर के अंदर होते तो मलबे में दबकर जान जाने की आशंका थी। इसी तरह चंद्रावती देवी का घर भी बारिश के कारण गिर गया। घटना के बाद दोनों परिवारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और फिलहाल दूसरे लोगों के घर में रहने को मजबूर हैं।
पीड़ित परिवारों ने आवास की मांग को लेकर पंचायत के मुखिया से भी मुलाकात की। मुखिया ने जल्द ही आवास उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। वहीं दक्षिणी भाजपा महामंत्री मनोज कुमार ठाकुर ने भी दोनों पीड़ित महिलाओं को भरोसा दिलाया कि उन्हें जल्द प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने के लिए प्रयास किया जाएगा, ताकि दोनों परिवारों को सुरक्षित छत मिल सके और वे अपने घर में सम्मानपूर्वक रह सकें।
    user_Sunil singh
    Sunil singh
    रंका, गढ़वा, झारखंड•
    22 hrs ago
  • भीषण सड़क हादसा: बिजली पोल से टकराई बाइक, दो बच्चे गंभीर हेमंत कुमारकी रिपोर्ट चिनिया थाना क्षेत्र के चिनिया-रंका मुख्य सड़क पर बड़का नाला से कुछ दूरी ऊपर मंगलवार की सुबह करीब 11 बजे भीषण मोटरसाइकिल दुर्घटना में दो बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। मिली जानकारी के अनुसार डंडई थाना क्षेत्र के बालेखाड़ गांव निवासी दयाशंकर सिंह अपने बहनोई चिनिया थाना क्षेत्र के सरोइदोहर निवासी सुरेश सिंह और अपने भांजे के साथ मोटरसाइकिल से जा रहे थे। इसी दौरान बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बिजली के पोल से जा टकराई। हादसे में बाइक सवार सभी लोग घायल हो गए, जबकि दो बच्चे मनीष कुमार उम्र 4 वर्ष तथा अंशु कुमारी 3 वर्ष की स्थिति गंभीर बताई जा रही है, दोनों के सर पर गंभीर चोटे आई हैं। स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को चिनिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद दोनों बच्चों को बेहतर इलाज के लिए गढ़वा सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। घटना की सूचना मिलते ही चिनिया थाना प्रभारी विकु कुमार रजक के निर्देश पर एएसआई काशी भूषण पुलिस बल के साथ अस्पताल पहुंचे और घायलों को बेहतर इलाज के लिए गढ़वा भेजने में सहयोग किया।
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    भीषण सड़क हादसा: बिजली पोल से टकराई बाइक, दो बच्चे गंभीर
हेमंत कुमारकी रिपोर्ट
चिनिया थाना क्षेत्र के चिनिया-रंका मुख्य सड़क पर बड़का नाला से कुछ दूरी ऊपर मंगलवार की सुबह करीब 11 बजे भीषण मोटरसाइकिल दुर्घटना में दो बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। मिली जानकारी के अनुसार डंडई थाना क्षेत्र के बालेखाड़ गांव निवासी दयाशंकर सिंह अपने बहनोई चिनिया थाना क्षेत्र के सरोइदोहर निवासी सुरेश सिंह और अपने भांजे के साथ मोटरसाइकिल से जा रहे थे। इसी दौरान बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बिजली के पोल से जा टकराई।
हादसे में बाइक सवार सभी लोग घायल हो गए, जबकि दो बच्चे मनीष कुमार उम्र 4 वर्ष तथा अंशु कुमारी 3 वर्ष  की स्थिति गंभीर बताई जा रही है, दोनों के सर पर गंभीर चोटे आई हैं। स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को चिनिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद दोनों बच्चों को बेहतर इलाज के लिए गढ़वा सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया।
घटना की सूचना मिलते ही चिनिया थाना प्रभारी विकु कुमार रजक के निर्देश पर एएसआई काशी भूषण पुलिस बल के साथ अस्पताल पहुंचे और घायलों को बेहतर इलाज के लिए गढ़वा भेजने में सहयोग किया।
    user_Hemant Kumar.  (7294972353)
    Hemant Kumar. (7294972353)
    चिनिया, गढ़वा, झारखंड•
    18 hrs ago
  • महुली में भुगतान रुका, शौचालय हैंडपंप ठपः ग्रामीणों को पेयजल व स्वच्छता के लिए जूझना पड़ रहा महुली में भुगतान रुका, शौचालय हैंडपंप ठपः ग्रामीणों को पेयजल व स्वच्छता के लिए जूझना पड़ रहा
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    महुली में भुगतान रुका, शौचालय हैंडपंप ठपः ग्रामीणों को पेयजल व स्वच्छता के लिए जूझना पड़ रहा
महुली में भुगतान रुका, शौचालय हैंडपंप ठपः ग्रामीणों को पेयजल व स्वच्छता के लिए जूझना पड़ रहा
    user_Nitesh Kumar
    Nitesh Kumar
    Mandi Agent Mahuli•
    3 hrs ago
  • बारिश और जल निकासी के विवाद में जर्जर हुआ गरीब महिला का आशियाना, घर गिरने का मंडरा रहा खतरा विंढमगंज सोनभद्र/घिवही। लगातार हो रही बारिश ने घिवही टोला बैरियाखाड़ निवासी बसंती देवी पत्नी अनिल राम की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उनका कच्चा मकान लगातार बारिश और आसपास पानी जमा होने के कारण पूरी तरह जर्जर हो चुका है। परिवार को आशंका है कि यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो मकान कभी भी गिर सकता है। ऐसे में महिला ने प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और ग्राम प्रधान से तत्काल संज्ञान लेकर उनके आशियाने को बचाने की गुहार लगाई है। बसंती देवी का आरोप है कि उनके छोटे ससुर सुबेदार राम द्वारा अपने घर का पानी बाहर निकलने नहीं दिया जा रहा है, जिसके कारण पानी उनके मकान की ओर जमा हो रहा है। महिला का कहना है कि कच्ची दीवारें लगातार पानी की चपेट में आने से कमजोर हो गई हैं। यदि मकान गिर गया तो वह अपने परिवार के साथ कहां रहेंगी, यह सबसे बड़ा सवाल है। महिला के मुताबिक, घर से पानी बाहर निकालने के लिए रास्ता बनाया गया था, लेकिन आरोप है कि सुबेदार राम ने पानी निकासी के उस रास्ते को दोबारा मिट्टी डालकर बंद कर दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। ग्रामीणों की मौजूदगी में पानी निकासी के लिए मिट्टी काटकर करहा बनाने का प्रयास किया गया, ताकि बारिश का पानी मकान से दूर निकल सके। विवाद बढ़ने पर बसंती देवी ने 112 नंबर पर फोन कर पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने के बाद प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल की स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद दोनों पक्षों को विंढमगंज थाने बुलाया गया। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की पहल पर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में जल निकासी की समस्या का तत्काल समाधान कराया जाना जरूरी है, ताकि किसी अनहोनी से बचा जा सके। प्रशासन, ग्राम प्रधान और जनप्रतिनिधि मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके पर जल निकासी की व्यवस्था कराएं और गरीब महिला के जर्जर मकान को गिरने से बचाने के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाएं—यही पीड़ित परिवार की मांग है।
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    बारिश और जल निकासी के विवाद में जर्जर हुआ गरीब महिला का आशियाना, घर गिरने का मंडरा रहा खतरा
विंढमगंज सोनभद्र/घिवही। लगातार हो रही बारिश ने घिवही टोला बैरियाखाड़ निवासी बसंती देवी पत्नी अनिल राम की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उनका कच्चा मकान लगातार बारिश और आसपास पानी जमा होने के कारण पूरी तरह जर्जर हो चुका है। परिवार को आशंका है कि यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो मकान कभी भी गिर सकता है। ऐसे में महिला ने प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और ग्राम प्रधान से तत्काल संज्ञान लेकर उनके आशियाने को बचाने की गुहार लगाई है।
बसंती देवी का आरोप है कि उनके छोटे ससुर सुबेदार राम द्वारा अपने घर का पानी बाहर निकलने नहीं दिया जा रहा है, जिसके कारण पानी उनके मकान की ओर जमा हो रहा है। महिला का कहना है कि कच्ची दीवारें लगातार पानी की चपेट में आने से कमजोर हो गई हैं। यदि मकान गिर गया तो वह अपने परिवार के साथ कहां रहेंगी, यह सबसे बड़ा सवाल है।
महिला के मुताबिक, घर से पानी बाहर निकालने के लिए रास्ता बनाया गया था, लेकिन आरोप है कि सुबेदार राम ने पानी निकासी के उस रास्ते को दोबारा मिट्टी डालकर बंद कर दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। ग्रामीणों की मौजूदगी में पानी निकासी के लिए मिट्टी काटकर करहा बनाने का प्रयास किया गया, ताकि बारिश का पानी मकान से दूर निकल सके।
विवाद बढ़ने पर बसंती देवी ने 112 नंबर पर फोन कर पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने के बाद प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल की स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद दोनों पक्षों को विंढमगंज थाने बुलाया गया।
अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की पहल पर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में जल निकासी की समस्या का तत्काल समाधान कराया जाना जरूरी है, ताकि किसी अनहोनी से बचा जा सके।
प्रशासन, ग्राम प्रधान और जनप्रतिनिधि मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके पर जल निकासी की व्यवस्था कराएं और गरीब महिला के जर्जर मकान को गिरने से बचाने के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाएं—यही पीड़ित परिवार की मांग है।
    user_Jitendr Prshad
    Jitendr Prshad
    Court reporter दुद्धी, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    16 hrs ago
  • jharkhand ,GARHWA के संग्रहे खुर्द-पंचायत के रेखा कुमारी शर्मा, ओडिशा मे पहली प्रराईज प्रारापत की l रेहला SPDC ओडिशा में महिला कॉलेज की छात्राएं , ओडिशा में संगीत पतियोगिता हेतु ,आपने मैम और शिक्षकों के साथ गये l संग्रहे खुर्द (Sangrahe Khurd) ग्राम पंचायत झारखंड के गढ़वा जिले के गढ़वा प्रखंड (CD Block) में स्थित है। [1] मुख्य विवरण राज्य: झारखंड जिला: गढ़वा (Garhwa) प्रखंड / ब्लॉक: गढ़वा मुख्यालय से दूरी: यह पंचायत या गाँव गढ़वा जिला मुख्यालय से लगभग 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। शामिल क्षेत्र: इस ग्राम पंचायत के अंतर्गत बाना (Bana), चमराही (Chamrahi) और दुबियाही (Dubiyahi) सहित कुल 8 गाँव आते हैं। रेखा कुमारी शर्मा
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    jharkhand ,GARHWA के संग्रहे खुर्द-पंचायत के रेखा कुमारी शर्मा, ओडिशा मे पहली प्रराईज प्रारापत की l
रेहला SPDC ओडिशा में महिला कॉलेज की छात्राएं , ओडिशा में संगीत पतियोगिता हेतु ,आपने मैम और शिक्षकों के साथ गये l
संग्रहे खुर्द (Sangrahe Khurd) ग्राम पंचायत झारखंड के गढ़वा जिले के गढ़वा प्रखंड (CD Block) में स्थित है। [1]
मुख्य विवरण
राज्य: झारखंड
जिला: गढ़वा (Garhwa)
प्रखंड / ब्लॉक: गढ़वा
मुख्यालय से दूरी: यह पंचायत या गाँव गढ़वा जिला मुख्यालय से लगभग 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
शामिल क्षेत्र: इस ग्राम पंचायत के अंतर्गत बाना (Bana), चमराही (Chamrahi) और दुबियाही (Dubiyahi) सहित कुल 8 गाँव आते हैं। 
रेखा कुमारी शर्मा
    user_Ramashankar sharma
    Ramashankar sharma
    Communications central गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    3 hrs ago
  • मकई के खेत में मिला राजेंद्र यादव का शव, हत्या की आशंका के बीच दो मासूम बेटियों के भविष्य पर सवाल गांव निवासी राजेंद्र यादव का शव सोमवार को उनके घर से करीब 200 मीटर की दूरी पर स्थित मकई के खेत के बीच से बरामद हुआ। शव मिलने की सूचना के बाद गांव में सनसनी फैल गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और मामले की जांच शुरू कर दी है। बताया जाता है कि राजेंद्र यादव मानसिक रूप से कुछ कमजोर थे। उनके माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका है। परिवार में उनका एक बड़ा भाई कन्हाई यादव है, जो फिलहाल रायपुर में मजदूरी करने गए हुए थे। घटना की सूचना मिलने के बाद कन्हाई यादव गांव के लिए रवाना हो गए हैं। राजेंद्र यादव की पत्नी का भी करीब पांच से सात वर्ष पहले बीमारी के कारण निधन हो चुका है। उनकी दो बेटियां हैं, जिनके पालन-पोषण और देखभाल का एकमात्र सहारा उनके पिता राजेंद्र यादव ही थे। ऐसे में राजेंद्र यादव की मौत के बाद दोनों मासूम बेटियों के सामने सबसे बड़ा सवाल उनके भविष्य और देखभाल का खड़ा हो गया है। पुलिस ने सोमवार शाम मौके पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में लिया और जांच शुरू की। शव पर चोट के निशान बताए जा रहे हैं। नाक से खून निकलने और जीभ बाहर निकली होने की बात भी सामने आई है। इन परिस्थितियों को देखते हुए प्रथम दृष्टया मामला संदिग्ध माना जा रहा है और हत्या की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। जानकारी के अनुसार आज सुबह करीब 10 बजे तक पोस्टमार्टम के बाद शव के गांव पहुंचने की उम्मीद है, जिसके बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा। लेकिन सवाल सिर्फ अंतिम संस्कार तक सीमित नहीं है। राजेंद्र यादव की मौत के बाद उनकी दोनों बेटियों का क्या होगा? उनकी देखभाल कौन करेगा? इस घटना के पीछे कौन है? राजेंद्र यादव की मौत कब और किन परिस्थितियों में हुई? उनका मोबाइल फोन कहां है और इस समय किसके पास है? इन तमाम सवालों के जवाब मिलना जरूरी है। ग्रामीणों की मांग है कि पुलिस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच करे तथा यदि यह हत्या है तो इसके पीछे शामिल लोगों की पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाया जाए। साथ ही प्रशासन को राजेंद्र यादव की दोनों बेटियों के भविष्य और सुरक्षा को लेकर भी तत्काल पहल करनी चाहिए। सिर्फ शव का अंतिम संस्कार कर देना इस घटना का समाधान नहीं है। असली सवाल यह है कि राजेंद्र यादव की मौत की सच्चाई सामने कब आएगी और उनके पीछे छूट गईं दो मासूम बेटियों को न्याय और सहारा कौन देगा? मकई के खेत में मिला राजेंद्र यादव का शव, हत्या की आशंका के बीच दो मासूम बेटियों के भविष्य पर सवाल गांव निवासी राजेंद्र यादव का शव सोमवार को उनके घर से करीब 200 मीटर की दूरी पर स्थित मकई के खेत के बीच से बरामद हुआ। शव मिलने की सूचना के बाद गांव में सनसनी फैल गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और मामले की जांच शुरू कर दी है। बताया जाता है कि राजेंद्र यादव मानसिक रूप से कुछ कमजोर थे। उनके माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका है। परिवार में उनका एक बड़ा भाई कन्हाई यादव है, जो फिलहाल रायपुर में मजदूरी करने गए हुए थे। घटना की सूचना मिलने के बाद कन्हाई यादव गांव के लिए रवाना हो गए हैं। राजेंद्र यादव की पत्नी का भी करीब पांच से सात वर्ष पहले बीमारी के कारण निधन हो चुका है। उनकी दो बेटियां हैं, जिनके पालन-पोषण और देखभाल का एकमात्र सहारा उनके पिता राजेंद्र यादव ही थे। ऐसे में राजेंद्र यादव की मौत के बाद दोनों मासूम बेटियों के सामने सबसे बड़ा सवाल उनके भविष्य और देखभाल का खड़ा हो गया है। पुलिस ने सोमवार शाम मौके पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में लिया और जांच शुरू की। शव पर चोट के निशान बताए जा रहे हैं। नाक से खून निकलने और जीभ बाहर निकली होने की बात भी सामने आई है। इन परिस्थितियों को देखते हुए प्रथम दृष्टया मामला संदिग्ध माना जा रहा है और हत्या की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। जानकारी के अनुसार आज सुबह करीब 10 बजे तक पोस्टमार्टम के बाद शव के गांव पहुंचने की उम्मीद है, जिसके बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा। लेकिन सवाल सिर्फ अंतिम संस्कार तक सीमित नहीं है। राजेंद्र यादव की मौत के बाद उनकी दोनों बेटियों का क्या होगा? उनकी देखभाल कौन करेगा? इस घटना के पीछे कौन है? राजेंद्र यादव की मौत कब और किन परिस्थितियों में हुई? उनका मोबाइल फोन कहां है और इस समय किसके पास है? इन तमाम सवालों के जवाब मिलना जरूरी है। ग्रामीणों की मांग है कि पुलिस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच करे तथा यदि यह हत्या है तो इसके पीछे शामिल लोगों की पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाया जाए। साथ ही प्रशासन को राजेंद्र यादव की दोनों बेटियों के भविष्य और सुरक्षा को लेकर भी तत्काल पहल करनी चाहिए। सिर्फ शव का अंतिम संस्कार कर देना इस घटना का समाधान नहीं है। असली सवाल यह है कि राजेंद्र यादव की मौत की सच्चाई सामने कब आएगी और उनके पीछे छूट गईं दो मासूम बेटियों को न्याय और सहारा कौन देगा?
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    मकई के खेत में मिला राजेंद्र यादव का शव, हत्या की आशंका के बीच दो मासूम बेटियों के भविष्य पर सवाल

गांव निवासी राजेंद्र यादव का शव सोमवार को उनके घर से करीब 200 मीटर की दूरी पर स्थित मकई के खेत के बीच से बरामद हुआ। शव मिलने की सूचना के बाद गांव में सनसनी फैल गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और मामले की जांच शुरू कर दी है।

बताया जाता है कि राजेंद्र यादव मानसिक रूप से कुछ कमजोर थे। उनके माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका है। परिवार में उनका एक बड़ा भाई कन्हाई यादव है, जो फिलहाल रायपुर में मजदूरी करने गए हुए थे। घटना की सूचना मिलने के बाद कन्हाई यादव गांव के लिए रवाना हो गए हैं।

राजेंद्र यादव की पत्नी का भी करीब पांच से सात वर्ष पहले बीमारी के कारण निधन हो चुका है। उनकी दो बेटियां हैं, जिनके पालन-पोषण और देखभाल का एकमात्र सहारा उनके पिता राजेंद्र यादव ही थे। ऐसे में राजेंद्र यादव की मौत के बाद दोनों मासूम बेटियों के सामने सबसे बड़ा सवाल उनके भविष्य और देखभाल का खड़ा हो गया है।

पुलिस ने सोमवार शाम मौके पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में लिया और जांच शुरू की। शव पर चोट के निशान बताए जा रहे हैं। नाक से खून निकलने और जीभ बाहर निकली होने की बात भी सामने आई है। इन परिस्थितियों को देखते हुए प्रथम दृष्टया मामला संदिग्ध माना जा रहा है और हत्या की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

जानकारी के अनुसार आज सुबह करीब 10 बजे तक पोस्टमार्टम के बाद शव के गांव पहुंचने की उम्मीद है, जिसके बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा।

लेकिन सवाल सिर्फ अंतिम संस्कार तक सीमित नहीं है। राजेंद्र यादव की मौत के बाद उनकी दोनों बेटियों का क्या होगा? उनकी देखभाल कौन करेगा? इस घटना के पीछे कौन है? राजेंद्र यादव की मौत कब और किन परिस्थितियों में हुई? उनका मोबाइल फोन कहां है और इस समय किसके पास है? इन तमाम सवालों के जवाब मिलना जरूरी है।

ग्रामीणों की मांग है कि पुलिस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच करे तथा यदि यह हत्या है तो इसके पीछे शामिल लोगों की पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाया जाए। साथ ही प्रशासन को राजेंद्र यादव की दोनों बेटियों के भविष्य और सुरक्षा को लेकर भी तत्काल पहल करनी चाहिए।

सिर्फ शव का अंतिम संस्कार कर देना इस घटना का समाधान नहीं है। असली सवाल यह है कि राजेंद्र यादव की मौत की सच्चाई सामने कब आएगी और उनके पीछे छूट गईं दो मासूम बेटियों को न्याय और सहारा कौन देगा?
मकई के खेत में मिला राजेंद्र यादव का शव, हत्या की आशंका के बीच दो मासूम बेटियों के भविष्य पर सवाल
गांव निवासी राजेंद्र यादव का शव सोमवार को उनके घर से करीब 200 मीटर की दूरी पर स्थित मकई के खेत के बीच से बरामद हुआ। शव मिलने की सूचना के बाद गांव में सनसनी फैल गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और मामले की जांच शुरू कर दी है।
बताया जाता है कि राजेंद्र यादव मानसिक रूप से कुछ कमजोर थे। उनके माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका है। परिवार में उनका एक बड़ा भाई कन्हाई यादव है, जो फिलहाल रायपुर में मजदूरी करने गए हुए थे। घटना की सूचना मिलने के बाद कन्हाई यादव गांव के लिए रवाना हो गए हैं।
राजेंद्र यादव की पत्नी का भी करीब पांच से सात वर्ष पहले बीमारी के कारण निधन हो चुका है। उनकी दो बेटियां हैं, जिनके पालन-पोषण और देखभाल का एकमात्र सहारा उनके पिता राजेंद्र यादव ही थे। ऐसे में राजेंद्र यादव की मौत के बाद दोनों मासूम बेटियों के सामने सबसे बड़ा सवाल उनके भविष्य और देखभाल का खड़ा हो गया है।
पुलिस ने सोमवार शाम मौके पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में लिया और जांच शुरू की। शव पर चोट के निशान बताए जा रहे हैं। नाक से खून निकलने और जीभ बाहर निकली होने की बात भी सामने आई है। इन परिस्थितियों को देखते हुए प्रथम दृष्टया मामला संदिग्ध माना जा रहा है और हत्या की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
जानकारी के अनुसार आज सुबह करीब 10 बजे तक पोस्टमार्टम के बाद शव के गांव पहुंचने की उम्मीद है, जिसके बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा।
लेकिन सवाल सिर्फ अंतिम संस्कार तक सीमित नहीं है। राजेंद्र यादव की मौत के बाद उनकी दोनों बेटियों का क्या होगा? उनकी देखभाल कौन करेगा? इस घटना के पीछे कौन है? राजेंद्र यादव की मौत कब और किन परिस्थितियों में हुई? उनका मोबाइल फोन कहां है और इस समय किसके पास है? इन तमाम सवालों के जवाब मिलना जरूरी है।
ग्रामीणों की मांग है कि पुलिस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच करे तथा यदि यह हत्या है तो इसके पीछे शामिल लोगों की पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाया जाए। साथ ही प्रशासन को राजेंद्र यादव की दोनों बेटियों के भविष्य और सुरक्षा को लेकर भी तत्काल पहल करनी चाहिए।
सिर्फ शव का अंतिम संस्कार कर देना इस घटना का समाधान नहीं है। असली सवाल यह है कि राजेंद्र यादव की मौत की सच्चाई सामने कब आएगी और उनके पीछे छूट गईं दो मासूम बेटियों को न्याय और सहारा कौन देगा?
    user_Men of jharkhand
    Men of jharkhand
    Court reporter धुरकी, गढ़वा, झारखंड•
    20 hrs ago
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