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उत्तराखंड पिथोरागढ़ व्यूरो रिपोर्ट खाई में कार गिरने से तीन की मौत दो गंभीर रूप से हुए घायल इलाज जारी
द कहर न्यूज़ एजेंसी
उत्तराखंड पिथोरागढ़ व्यूरो रिपोर्ट खाई में कार गिरने से तीन की मौत दो गंभीर रूप से हुए घायल इलाज जारी
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- Post by द कहर न्यूज़ एजेंसी1
- पिंजरे में कैद हुआ महिला पर हमला करने वाला तेंदुआ, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस जनपद चम्पावत के विकासखंड बाराकोट क्षेत्र में पिछले दो हफ्तों से दहशत का कारण बना तेंदुआ आखिरकार वन विभाग के पिंजरे में कैद हो गया। बताया जा रहा है कि बाराकोट क्षेत्र के एक गांव में करीब 15 दिन पहले जंगल गई एक स्थानीय महिला पर तेंदुए ने जानलेवा हमला कर दिया था, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गई थी। घटना के बाद से क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ था और ग्रामीण लगातार तेंदुए को पकड़ने की मांग कर रहे थे। वन विभाग ने ग्रामीणों की मांग पर जंगल में पिंजरा लगाया था। रविवार सुबह करीब 3 से 4 साल का एक नर तेंदुआ पिंजरे में कैद मिला। रेंजर राजेश कुमार जोशी के अनुसार पकड़े गए तेंदुए को फिलहाल क्षीणा वन चौकी में रखा गया है, जहां से जल्द ही रेस्क्यू सेंटर भेजा जाएगा। वन विभाग की टीम में नंदा बल्लभ भट्ट, प्रकाश गिरी और रमेश त्रिवेदी सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। उल्लेखनीय है कि इससे पहले ओखलंज और च्यूरानी गांवों से भी दो तेंदुए पकड़े जा चुके हैं। तेंदुए के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है, हालांकि क्षेत्र में अब भी सतर्कता बरतने की अपील की जा रही है। #Champawat #Barakot #LeopardCaptured #ForestDepartment #UttarakhandNews #ChampawatNews1
- अल्मोड़ा। जनपद में रविवार को लोकपर्व फूलदेई उत्साह और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में चैत्र माह की संक्रांति के अवसर पर मनाया जाने वाला यह विशेष लोकपर्व प्रकृति और संस्कृति के अनूठे संगम का प्रतीक माना जाता है। बच्चों के बीच इसकी विशेष लोकप्रियता के कारण इसे बालपर्व भी कहा जाता है। फूलों की खुशबू से महकता यह पर्व चैत्र माह के पहले दिन मनाया जाता है, जो प्रायः मार्च के मध्य में पड़ता है। इस वर्ष फूलदेई का पर्व रविवार, 15 मार्च को मनाया गया। इतिहासकारों के अनुसार यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है और इसका संबंध उत्तराखंड के ग्रामीण समाज में सामूहिकता, प्रकृति के प्रति सम्मान और आपसी सद्भाव से जुड़ा है। इस दिन छोटे बच्चे सुबह जल्दी उठकर बगीचों और जंगलों से रंग-बिरंगे फूल तोड़कर लाते हैं और उन्हें गांव व कस्बों के घरों की दहलीज पर सजाते हैं। यह परंपरा घर-परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलकामना से जुड़ी मानी जाती है। बच्चे घर-घर जाकर 'फूलदेई, छम्मा देई, दैणी द्वार भर भकार' गाकर आशीर्वाद मांगते हैं, जिसका अर्थ है कि घर में सुख-समृद्धि बनी रहे। बदले में उन्हें चावल, गुड़, पैसे या अन्य उपहार दिए जाते हैं। रात्रि में बच्चों द्वारा एकत्रित चावल और गुड़ से पारंपरिक पकवान ‘सेई’ बनाया जाता है। फूलदेई पर्व की जड़ें उत्तराखंड की कृषि परंपराओं से भी जुड़ी हुई हैं। यह त्योहार वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक माना जाता है, जब पेड़-पौधे नई कोंपलों और फूलों से लद जाते हैं। घरों की चौखट पर फूल सजाने का अर्थ प्रकृति का स्वागत करना और परिवार की खुशहाली की कामना करना होता है। रविवार सुबह ठंड के मौसम के साथ हल्की बारिश के छींटे भी पड़े। इसके बावजूद अल्मोड़ा में फूलदेई के दिन बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। बच्चे एक घर से दूसरे घर जाकर दहलीज पर फूल डालते हुए 'फूलदेई, छम्मा देई' गाते नजर आए और पूरे क्षेत्र में पर्व का उल्लास दिखाई दिया।1
- हिन्दू नव वर्ष और चैत्र मास आगमन के अवसर पर नगर पालिका चिलियानौला की ओर से रविवार की देर शाम यहां चौमूथान मंदिर परिसर के निर्माणाधीन पार्क में झोड़ा गायन का आयोजन हुआ। पारम्परिक संस्कृति को बचाने और युवा पीढ़ी को जागरूक करने के उद्देश्य से झोड़ा गायन का आयोजन हुआ, जिसमें क्षेत्र की महिलाओं ने बड़ी संख्या में भागीदारी की। पालिकाध्यक्ष अरुण रावत ने कहा कि भविष्य में इस आयोजन को वृहद रूप दिया जाएगा। सभासद सुंदर कुवार्बी ने बताया कि शार्ट नोटिस में महिलाएं पहुंच गई यह प्राचीन परम्परा को लेकर उनके उत्साह को दर्शाता है। यहां व्यापार मंडल अध्यक्ष कमलेश बोरा, ललित बिष्ट, हरीश सिंह देव, धर्मेंद्र सिंह अधिकारी सहित पालिका कि महिलाओं ने सहयोग किया।1
- Post by Peshkar1
- Success is not permanent, but failure is not final. The courage to continue is what really matters. इसका सरल अर्थ यह है कि सफलता हमेशा हमेशा के लिए नहीं रहती और असफलता भी जिंदगी का अंत नहीं होती। जीवन में उतार–चढ़ाव आते रहते हैं। कभी हम जीतते हैं, कभी हारते हैं। लेकिन असली फर्क उस इंसान में होता है जो हारने के बाद भी हिम्मत नहीं छोड़ता और आगे बढ़ता रहता है। जब कोई व्यक्ति सफल होता है तो उसे यह नहीं सोचना चाहिए कि अब सब कुछ हासिल हो गया, क्योंकि समय के साथ परिस्थितियां बदल सकती हैं। उसी तरह अगर किसी को असफलता मिलती है तो उसे यह नहीं मान लेना चाहिए कि अब सब खत्म हो गया। असफलता अक्सर हमें कुछ नया सिखाती है और आगे बेहतर करने का मौका देती है। इतिहास और वर्तमान में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं जहां लोगों ने कई बार असफल होने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और अंत में बड़ी सफलता हासिल की। उनकी सबसे बड़ी ताकत यही थी कि उन्होंने कठिन समय में भी प्रयास करना नहीं छोड़ा। इसलिए जीवन का असली मंत्र यही है कि सफलता आने पर विनम्र रहें और असफलता आने पर धैर्य रखें। लगातार प्रयास करने का साहस ही इंसान को आगे बढ़ाता है और अंततः वही उसे उसकी मंज़िल तक पहुंचाता है। संक्षेप में — सफलता और असफलता दोनों अस्थायी हैं, लेकिन आगे बढ़ते रहने का साहस ही असली जीत है। 💪1
- वीरांगनाएँ जलाएगी जागृति का अलख गरुड़ में ब्लॉक लेवल वीरांगना महिला जन संगठन का गठन किया गया। विकास खंड के चार क्लस्टरों के 110 महिला पंचायत प्रतिनिधियों को वीरांगना महिला संगठन का सदस्य चुना गया। सदस्यों और पदाधिकारियों में खास उत्साह देखा गया। द हंगर प्रोजेक्ट दिल्ली की जिला संयोजक बागेश्वर बसंती कपकोटी ने जानकारी देते हुए कहा कि वीरांगना महिला जन संगठन नाम से प्रदेश भर में संगठन निर्माण का अभियान चल रहा है।1
- चम्पावत 15 मार्च 2026, सूवि। जनपद चम्पावत के स्वाला क्षेत्र में संचालित सड़क चौड़ीकरण एवं सुधार कार्यों की प्रगति का जायजा लेने हेतु जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार ने स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने निर्माण कार्य की वर्तमान स्थिति, प्रगति, गुणवत्ता, तकनीकी मानकों तथा सुरक्षा व्यवस्थाओं का विस्तार से अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने कार्य की अपेक्षाकृत धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों एवं कार्यदायी संस्था को निर्माण कार्य में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्य को व्यवस्थित रूप से संचालित करते हुए निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण किया जाए, ताकि आम जनता को जल्द से जल्द बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध हो सके। जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार ने निर्माण कार्य में तकनीकी मानकों, गुणवत्ता और सुरक्षा नियमों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए विशेष रूप से हिल साइड में बैंच कटिंग तथा डाउनसाइड में सुरक्षा दीवार (सेफ्टी वॉल) के निर्माण कार्य में तेजी लाने को कहा, जिससे सड़क की स्थिरता तथा यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में गुणवत्ता सर्वोपरि होनी चाहिए और किसी भी स्तर पर मानकों की अनदेखी स्वीकार्य नहीं होगी। निरीक्षण के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग, कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।1