जनपद चंदौली के नौगढ़ ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत बरबसपुर में सरकारी धन से हो रहे निर्माण कार्यों की हकीकत पर सवाल खड़े हो गए हैं। जहाँ एक भवन के भीतर बड़े जोर-शोर से टाइल्स लगाने का काम चल रहा है, वहीं इसी भवन का बाहरी हिस्सा बेहद चिंताजनक स्थिति में है। भवन की बाहरी दीवार पर बड़ी-बड़ी दरारें साफ देखी जा सकती हैं, जो किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही हैं। इतना ही नहीं, भवन के बाहर गंदगी और कूड़े का अंबार लगा हुआ है, जो सरकारी दावों की पोल खोलता दिख रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तरफ टाइल्स जैसी सुविधाओं पर खर्च किया जा रहा है, वहीं बुनियादी सुरक्षा और साफ-सफाई को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है। यह गंभीर गंदगी और दीवारों की जर्जर स्थिति प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रही है। अब यह देखना बाकी है कि स्थानीय प्रशासन और संबंधित अधिकारी इस ओर कब ध्यान देते हैं और इन खामियों को कब तक ठीक किया जाता है।
जनपद चंदौली के नौगढ़ ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत बरबसपुर में सरकारी धन से हो रहे निर्माण कार्यों की हकीकत पर सवाल खड़े हो गए हैं। जहाँ एक भवन के भीतर बड़े जोर-शोर से टाइल्स लगाने का काम चल रहा है, वहीं इसी भवन का बाहरी हिस्सा बेहद चिंताजनक स्थिति में है। भवन की बाहरी दीवार पर बड़ी-बड़ी दरारें साफ देखी जा सकती हैं, जो किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही हैं। इतना ही नहीं, भवन के बाहर गंदगी और कूड़े का अंबार लगा हुआ है, जो सरकारी दावों की पोल खोलता दिख रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तरफ टाइल्स जैसी सुविधाओं पर खर्च किया जा रहा है, वहीं बुनियादी सुरक्षा और साफ-सफाई को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है। यह गंभीर गंदगी और दीवारों की जर्जर स्थिति प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रही है। अब यह देखना बाकी है कि स्थानीय प्रशासन और संबंधित अधिकारी इस ओर कब ध्यान देते हैं और इन खामियों को कब तक ठीक किया जाता है।
- जनपद चंदौली के नौगढ़ ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत बरबसपुर में सरकारी धन से हो रहे निर्माण कार्यों की हकीकत पर सवाल खड़े हो गए हैं। जहाँ एक भवन के भीतर बड़े जोर-शोर से टाइल्स लगाने का काम चल रहा है, वहीं इसी भवन का बाहरी हिस्सा बेहद चिंताजनक स्थिति में है। भवन की बाहरी दीवार पर बड़ी-बड़ी दरारें साफ देखी जा सकती हैं, जो किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही हैं। इतना ही नहीं, भवन के बाहर गंदगी और कूड़े का अंबार लगा हुआ है, जो सरकारी दावों की पोल खोलता दिख रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तरफ टाइल्स जैसी सुविधाओं पर खर्च किया जा रहा है, वहीं बुनियादी सुरक्षा और साफ-सफाई को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है। यह गंभीर गंदगी और दीवारों की जर्जर स्थिति प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रही है। अब यह देखना बाकी है कि स्थानीय प्रशासन और संबंधित अधिकारी इस ओर कब ध्यान देते हैं और इन खामियों को कब तक ठीक किया जाता है।1
- चंदौली जिले के नौगढ़ तहसील क्षेत्र के भैसोड़ा गांव में जिला पंचायत द्वारा कराए जा रहे नाली निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार और लापरवाही से ग्रामीण परेशान हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि साहेमु के घर से नेहालु के घर तक नाली निर्माण का कार्य लगभग एक वर्ष से अधूरा पड़ा हुआ है, जिसके चलते खुली पड़ी नाली में गिरकर आए दिन बच्चे और बुजुर्ग घायल हो रहे हैं। ठेकेदार द्वारा केवल लोहे की छड़ें लगाकर काम रोक दिया गया है, न तो दीवार पूरी बनी है और न ही नाली ढकी गई है, जिससे खुले गड्ढे आवागमन में भारी दिक्कतें पैदा कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। इस अधूरे निर्माण के संबंध में ग्रामीणों ने कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की है। पिछले समाधान दिवस और हाल ही में आयोजित जिला स्तरीय सम्पूर्ण समाधान दिवस में भी जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर कार्य पूरा कराने की मांग की गई थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। बदरुद्दीन, अखलाक, शहंशाह, रहीमुद्दीन, रहमत, मकसूद, जाहिर सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल शेष कार्य पूरा कराने और सुरक्षा की दृष्टि से नाली को ढकने की मांग की है, ताकि गांव में दुर्घटनाओं पर रोक लग सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नाली निर्माण कार्य पूरा नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। ग्राम प्रधान पति लाल मोहम्मद ने भी इस बात की पुष्टि की है कि लगभग एक साल से यह कार्य अधूरा है और अधूरे निर्माण के कारण ग्रामवासियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि अधिकारियों का ध्यान कई बार इस ओर खींचा जा चुका है।3
- आज 23 जून 2026 को दुधवा टाइगर रिजर्व, लखीमपुर खीरी प्रभाग के उत्तर निघासन रेंज के लट्ठौआ बीट स्थित ग्राम मुर्तिहा से एक मादा गुलदार (तेंदुआ) को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। रेस्क्यू के बाद इस मादा गुलदार को वन प्रभाग में लाया गया, जिसके उपरांत उसे चन्द्रप्रभा रेंज के राजदरी अनुभाग अंतर्गत बलियारी बीट की देव पहाड़ी पर सकुशल अवमुक्त कर दिया गया।1
- लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में हुए अग्निकांड के बाद वाराणसी के कोचिंग सेंटरों में मॉकड्रिल का आयोजन किया गया। यह देखा गया है कि प्रशासन आमतौर पर किसी घटना के बाद ही सक्रिय होता है। हालांकि, इस बार उम्मीद जताई जा रही है कि वाराणसी में बड़े सुधार और महत्वपूर्ण कार्रवाई की जाएगी, जिससे भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना यहाँ न हो सके।1
- कैमूर जिले के भीतरी कोड़र गांव निवासी अमन यादव का चयन एकलव्य कुश्ती प्रशिक्षण के लिए हुआ है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के बाद क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है।1
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- सोनभद्र के ओबरा स्थित रेणुका घाट पर एक बड़ा हादसा उस समय टल गया जब ओबरा बांध से अचानक पानी छोड़े जाने के कारण 11 लोग नदी के बीच बने एक टापू में फंस गए। ये लोग घाट पर घूमने आए थे और नदी में पानी कम होने के कारण बेफिक्र होकर टापू तक पहुंच गए थे, जहां वे तस्वीरें और सेल्फी ले रहे थे। बांध से पानी छोड़ने के बाद नदी का बहाव तेजी से बढ़ा और टापू चारों तरफ से पानी से घिर गया, जिससे लोग बीच धारा में ही फंसकर रह गए। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और डैम प्रबंधन से संपर्क कर पानी छोड़े जाने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगवाई गई। हालांकि, नदी का बहाव काफी देर तक तेज बना रहा, जिससे फंसे हुए लोगों को टापू पर ही इंतजार करना पड़ा। अंधेरा होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन और भी चुनौतीपूर्ण हो गया। मौके पर पहुंची पुलिस टीम, पीआरवी के साथ नगर पंचायत के सभासद अजीत कनौजिया और स्थानीय युवकों ने मिलकर घंटों चले राहत अभियान के बाद सभी 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस सफल बचाव अभियान के बाद फंसे हुए लोगों और उनके परिजनों ने राहत की सांस ली। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेणुका घाट पर अचानक जलस्तर बढ़ने की घटनाएं पहले भी कई बार सामने आ चुकी हैं, जिनमें कई लोगों की जान भी जा चुकी है। इसके बावजूद घाट पर पर्याप्त चेतावनी बोर्ड और स्थायी सुरक्षा इंतजामों की कमी बनी हुई है। यह घटना, हालांकि बिना किसी जनहानि के समाप्त हो गई, लेकिन इसने एक बार फिर घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था और चेतावनी तंत्र की पोल खोल दी है। अब स्थानीय लोग भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए घाट पर प्रभावी चेतावनी व्यवस्था, सुरक्षा बैरिकेडिंग और स्थायी निगरानी की मांग कर रहे हैं।1
- चंदौली में जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में जनपद में संचालित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई और स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी तथा सुदृढ़ बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। जिलाधिकारी ने शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया, जिसमें प्रत्येक गर्भवती महिला का समय पर पंजीकरण और सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराया जाना शामिल है। उन्होंने नियमित टीकाकरण कार्यक्रम को शत-प्रतिशत लक्ष्य के साथ संचालित करने के भी निर्देश दिए, ताकि कोई भी बच्चा या गर्भवती महिला टीकाकरण से वंचित न रहे। जिलाधिकारी ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) पर ओपीडी सेवाओं को बढ़ाने के लिए कहा, जिससे अधिक से अधिक मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही उपचार की सुविधा मिल सके और उच्च स्वास्थ्य केंद्रों पर अनावश्यक दबाव कम हो। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि स्वास्थ्य सेवाएँ मरीजों, विशेषकर गरीबों के लिए सुलभ और किफायती हों, और उन्हें समय पर जाँच व इलाज उपलब्ध कराया जाए। बैठक के दौरान, जिलाधिकारी ने ग्राम स्तर पर कार्य में शिथिलता बरतने वाली निष्क्रिय आशाओं के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए उनकी सेवा समाप्त करने और उनके स्थान पर नई आशाओं की भर्ती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो सके। उन्होंने सभी डॉक्टरों को समय से अपने कार्यस्थल पर उपस्थित रहने और आपातकालीन डॉक्टरों को भी कार्यस्थल पर मौजूद रहने का आदेश दिया, ताकि स्वास्थ्य सेवाएँ बेहतर बनी रहें। साथ ही, आयुष्मान भारत, जननी सुरक्षा योजना और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम जैसी सरकारी योजनाओं को ईमानदारी से धरातल पर उतारने के निर्देश भी दिए गए। इस बैठक में मुख्य विकास अधिकारी आर जगत साई, मुख्य चिकित्सा अधिकारी सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।1