logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

किशुनपुर से खरका जाने वाली सड़क का कितना बुरा हाल है आप देख सकते है और यहाँ बालू माफियाओं का राज चलता है सरकार भी रुपयो मे बीचे है

8 hrs ago
user_शिवा निषाद पत्रकार
शिवा निषाद पत्रकार
Farmer भोगनीपुर, कानपुर देहात, उत्तर प्रदेश•
8 hrs ago

किशुनपुर से खरका जाने वाली सड़क का कितना बुरा हाल है आप देख सकते है और यहाँ बालू माफियाओं का राज चलता है सरकार भी रुपयो मे बीचे है

More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
  • किशुनपुर से खरका जाने वाली सड़क का कितना बुरा हाल है आप देख सकते है और यहाँ बालू माफियाओं का राज चलता है सरकार भी रुपयो मे बीचे है
    1
    किशुनपुर से खरका जाने वाली सड़क का कितना बुरा हाल है आप देख सकते है
और यहाँ बालू माफियाओं का राज चलता है सरकार भी रुपयो मे बीचे है
    user_शिवा निषाद पत्रकार
    शिवा निषाद पत्रकार
    Farmer भोगनीपुर, कानपुर देहात, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • Rachha... Bandhan... Ki... Hardik... Shubh... Kamnaeen... Md.. Anish.. Kuraishi.. Fattepur.. Mushangar.. Kanpur.. Dihat.. U.. P
    1
    Rachha... Bandhan... Ki... Hardik... Shubh... Kamnaeen... Md.. Anish.. Kuraishi.. Fattepur.. Mushangar.. Kanpur.. Dihat.. U.. P
    user_MD ANISH KURAISHI
    MD ANISH KURAISHI
    Mechanic भोगनीपुर, कानपुर देहात, उत्तर प्रदेश•
    13 hrs ago
  • जालौन जिला कारागार में भावुक हुआ रक्षाबंधन पर्व धूमधाम से मनाया । जालौन | जिला कारागार में भावुक हुआ रक्षाबंधन उरई जिला कारागार में रक्षाबंधन पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान जेल में निरुद्ध बंदियों की बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। रक्षाबंधन को लेकर कारागार प्रशासन की ओर से भी विशेष व्यवस्थाएं की गईं। बहनों के लिए मिठाई, हल्दी और चंदन की व्यवस्था की गई, जिससे जेल परिसर में भाई-बहन के इस पवित्र रिश्ते की झलक देखने को मिली। भाई-बहन के प्रेम और विश्वास से जुड़ा यह पर्व कई बंदियों के लिए भावुक पल लेकर आया।
    1
    जालौन 
जिला  कारागार  में  भावुक  हुआ रक्षाबंधन पर्व धूमधाम से मनाया ।
जालौन | जिला कारागार में भावुक हुआ रक्षाबंधन 
उरई जिला कारागार में रक्षाबंधन पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान जेल में निरुद्ध बंदियों की बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
रक्षाबंधन को लेकर कारागार प्रशासन की ओर से भी विशेष व्यवस्थाएं की गईं। बहनों के लिए मिठाई, हल्दी और चंदन की व्यवस्था की गई, जिससे जेल परिसर में भाई-बहन के इस पवित्र रिश्ते की झलक देखने को मिली।
भाई-बहन के प्रेम और विश्वास से जुड़ा यह पर्व कई बंदियों के लिए भावुक पल लेकर आया।
    user_Dev Patel
    Dev Patel
    Local News Reporter कालपी, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • कबड्डी के मैदान में पत्रकार धर्मेंद्र राजपूत का दमदार अंदाज, रक्षाबंधन पर बंधौली में मची खेल की धूम राखी के पर्व पर मैदान में उतरे पत्रकार धर्मेंद्र राजपूत, शानदार खेल से बढ़ाया प्रतियोगिता का रोमांच उरई, जालौन रक्षाबंधन के पावन पर्व पर ग्राम बंधौली में आयोजित विशाल कबड्डी प्रतियोगिता उस समय और रोमांचक हो गई, जब मित्र पत्रकार धर्मेंद्र राजपूत खुद कबड्डी के मैदान में उतर गए। पत्रकारिता के साथ खेल के मैदान में उनका जोशीला अंदाज देखने को मिला। धर्मेंद्र राजपूत के कबड्डी खेलते हुए वीडियो ने प्रतियोगिता के माहौल में और उत्साह भर दिया। अलखराम बाबा परिसर में आयोजित प्रतियोगिता में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की टीमों ने हिस्सा लिया। खिलाड़ियों के बीच जबरदस्त मुकाबले हुए और दर्शकों ने तालियों के साथ खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया। धर्मेंद्र राजपूत भी पूरे जोश के साथ मैदान में नजर आए और उन्होंने कबड्डी खेलकर प्रतियोगिता का आनंद लिया। प्रतियोगिता में 11-11 खिलाड़ियों की टीमों के बीच मुकाबले हुए। खिलाड़ियों के शानदार दांव-पेच और दमखम ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। विजेता टीम को दीवार घड़ी तथा उपविजेता टीम को टिफिन बॉक्स देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन ग्राम प्रधान रघुवीर यादव, मनोज राजपूत मुखिया, भगवान सिंह यादव, अभिषेक यादव एवं चंद्रशेखर यादव के सहयोग से किया गया। कमेंट्री विनय द्विवेदी ने की, जबकि शीलू यादव ने उनका साथ दिया। रक्षाबंधन के पारिवारिक पर्व पर कबड्डी प्रतियोगिता ने गांव में खेल, एकता और भाईचारे का शानदार माहौल बनाया। धर्मेंद्र राजपूत का मैदान में उतरकर कबड्डी खेलना प्रतियोगिता के यादगार पलों में शामिल रहा। #धर्मेंद्र_राजपूत #पत्रकार_धर्मेंद्र_राजपूत #कबड्डी #कबड्डी_प्रतियोगिता #बंधौली #उरई #जालौन #रक्षाबंधन #खेल_का_जुनून #ग्रामीण_खेल #वायरल_वीडियो #खेल_और_भाईचारा #JalaunNews #OraiNews #Kabaddi #RakshaBandhan Dharmendra Kumar
    1
    कबड्डी के मैदान में पत्रकार धर्मेंद्र राजपूत का दमदार अंदाज, रक्षाबंधन पर बंधौली में मची खेल की धूम

राखी के पर्व पर मैदान में उतरे पत्रकार धर्मेंद्र राजपूत, शानदार खेल से बढ़ाया प्रतियोगिता का रोमांच
उरई, जालौन  रक्षाबंधन के पावन पर्व पर ग्राम बंधौली में आयोजित विशाल कबड्डी प्रतियोगिता उस समय और रोमांचक हो गई, जब मित्र पत्रकार धर्मेंद्र राजपूत खुद कबड्डी के मैदान में उतर गए। 
पत्रकारिता के साथ खेल के मैदान में उनका जोशीला अंदाज देखने को मिला। धर्मेंद्र राजपूत के कबड्डी खेलते हुए वीडियो ने प्रतियोगिता के माहौल में और उत्साह भर दिया।
अलखराम बाबा परिसर में आयोजित प्रतियोगिता में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की टीमों ने हिस्सा लिया। 
खिलाड़ियों के बीच जबरदस्त मुकाबले हुए और दर्शकों ने तालियों के साथ खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया। 
धर्मेंद्र राजपूत भी पूरे जोश के साथ मैदान में नजर आए और उन्होंने कबड्डी खेलकर प्रतियोगिता का आनंद लिया।
प्रतियोगिता में 11-11 खिलाड़ियों की टीमों के बीच मुकाबले हुए। 
खिलाड़ियों के शानदार दांव-पेच और दमखम ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। विजेता टीम को दीवार घड़ी तथा उपविजेता टीम को टिफिन बॉक्स देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन ग्राम प्रधान रघुवीर यादव, मनोज राजपूत मुखिया, भगवान सिंह यादव, अभिषेक यादव एवं चंद्रशेखर यादव के सहयोग से किया गया। कमेंट्री विनय द्विवेदी ने की, जबकि शीलू यादव ने उनका साथ दिया।
रक्षाबंधन के पारिवारिक पर्व पर कबड्डी प्रतियोगिता ने गांव में खेल, एकता और भाईचारे का शानदार माहौल बनाया। 
धर्मेंद्र राजपूत का मैदान में उतरकर कबड्डी खेलना प्रतियोगिता के यादगार पलों में शामिल रहा।
#धर्मेंद्र_राजपूत #पत्रकार_धर्मेंद्र_राजपूत #कबड्डी #कबड्डी_प्रतियोगिता #बंधौली #उरई #जालौन #रक्षाबंधन #खेल_का_जुनून #ग्रामीण_खेल #वायरल_वीडियो #खेल_और_भाईचारा #JalaunNews #OraiNews #Kabaddi #RakshaBandhan
Dharmendra Kumar
    user_सोनू महाराज पत्रकार
    सोनू महाराज पत्रकार
    कालपी, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • *करमचंदपुर गौशाला में फिर वायरल तस्वीरें: कीचड़ में खड़ी गायें और सूखा भूसा, जिम्मेदारों की निगरानी पर बड़े सवाल* *बार-बार वीडियो और फोटो वायरल होने के बाद भी हालात क्यों नहीं बदले? जांच से पहले सवाल उठाने वाले पर कार्रवाई के आरोपों ने बढ़ाई बहस* आशुतोष की कलम से कदौरा, जालौन ग्राम पंचायत करमचंदपुर की गौशाला एक बार फिर वायरल वीडियो और तस्वीरों को लेकर चर्चा में है। ग्रामीणों के अनुसार गौशाला की जीपीएस लोकेशन के साथ कुछ वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं, जिनमें बारिश के बीच गौवंश के कीचड़ में खड़े होने तथा सूखा भूसा खाने की स्थिति दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। इन तस्वीरों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन यदि वायरल सामग्री उसी गौशाला की है और उसमें दिखाई जा रही स्थिति वास्तविक है, तो मामला केवल एक गौशाला का नहीं बल्कि गौशालाओं की निगरानी, चारा व्यवस्था, साफ-सफाई और जिम्मेदार अधिकारियों के निरीक्षण पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक बार नहीं, बार-बार वायरल होने का दावा ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का कहना है कि करमचंदपुर गौशाला से संबंधित वीडियो और फोटो पहले भी कई बार सोशल मीडिया पर सामने आ चुके हैं। आरोप है कि बारिश के दौरान गौवंश को कीचड़ में खड़े रहने की स्थिति दिखाई गई और चारे की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे। अब सवाल सीधा है— यदि शिकायतें और तस्वीरें बार-बार सामने आईं, तो सुधार क्यों नहीं हुआ? क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर जाकर स्थिति देखी? क्या गौशाला का नियमित निरीक्षण किया गया? क्या वहां उपलब्ध भूसे और चारे का सत्यापन हुआ? क्या बारिश से पहले जल निकासी और सुरक्षित स्थान की व्यवस्था की गई? अगर इन सवालों के जवाब रिकॉर्ड में हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए। कीचड़ में खड़ी गायें आखिर कहां बैठें? बारिश के मौसम में गौशाला परिसर में पानी और कीचड़ की स्थिति होना गौवंश के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। यदि वायरल तस्वीरें वास्तविक हैं तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि गौवंश के बैठने के लिए सूखा और सुरक्षित स्थान उपलब्ध है या नहीं? इंसान कुछ देर कीचड़ में खड़ा होकर परेशान हो जाता है, तो बेजुबान पशुओं की स्थिति की कल्पना की जा सकती है। जिसे बोलना नहीं आता, उसकी तकलीफ कौन बताएगा, गौशाला में कीचड़ हो तो सवाल कौन उठाएगा? सूखा भूसा ही चारे की पूरी व्यवस्था है? वायरल सामग्री में सूखा भूसा दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। यहां भी जांच की जरूरत है कि गौशाला में नियमित रूप से पर्याप्त हरा चारा, भूसा, पानी और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं या नहीं। केवल कागजों में चारा उपलब्ध होना और मौके पर पशुओं को पर्याप्त चारा मिलना—दो अलग-अलग बातें हैं। इसलिए अधिकारियों को चाहिए कि रिकॉर्ड की जांच के साथ-साथ मौके पर वास्तविक स्टॉक, पशुओं की संख्या और प्रतिदिन उपलब्ध कराए जा रहे चारे का भौतिक सत्यापन कराएं। खबर सामने आने पर पत्रकार पर मुकदमे का आरोप मामले का दूसरा पहलू भी चर्चा में है। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों के मुताबिक गौशाला की कथित अव्यवस्थाओं से संबंधित खबरें सोशल मीडिया पर प्रकाशित होने के बाद एक पत्रकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। यह आरोप भी सामने आया है कि कार्रवाई से पहले पूरे मामले की पर्याप्त जांच-पड़ताल नहीं की गई। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। लेकिन इससे एक व्यापक सवाल जरूर पैदा होता है— क्या किसी सरकारी व्यवस्था की कमियां दिखाना अपने आप में अपराध है? यदि किसी पत्रकार द्वारा लगाए गए आरोप गलत हैं तो जांच कर तथ्य सामने लाए जाएं। यदि आरोप सही हैं तो व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी तय हो। लोकतांत्रिक व्यवस्था में आरोप, जांच और जवाब—तीनों का अपना महत्व है। तीन लोगों पर कार्रवाई, लेकिन गौशाला की स्थिति पर जवाब कौन देगा? स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि गौशाला की कथित अनियमितताओं को लेकर तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। यदि वास्तव में ऐसा हुआ है तो सवाल यह है कि मुकदमे से अलग गौशाला की मूल समस्या पर क्या कार्रवाई हुई? क्योंकि किसी शिकायतकर्ता, पत्रकार या ग्रामीण पर कार्रवाई होने से गौशाला में मौजूद कथित समस्या अपने आप खत्म नहीं हो जाती। अगर गौशाला में व्यवस्था ठीक है तो मौके का सत्यापन कराकर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। अगर व्यवस्था खराब है तो जिम्मेदारी तय कर सुधार कराया जाए। कदौरा की दूसरी गौशालाओं पर भी नजर जरूरी करमचंदपुर के अलावा कदौरा ब्लॉक की अन्य ग्राम पंचायतों में संचालित गौशालाओं की स्थिति की भी जांच जरूरी है। क्या सभी गौशालाओं में पर्याप्त चारा है? क्या पीने का पानी उपलब्ध है? क्या बारिश से बचाव की व्यवस्था है? क्या जल निकासी ठीक है? क्या पशुओं के बैठने के लिए सूखी जगह है? क्या गौशालाओं का नियमित निरीक्षण होता है? इन सवालों का जवाब केवल फाइलों से नहीं, मौके की जांच से मिलना चाहिए। फाइलों में व्यवस्था हो तो तस्वीरें क्यों चीखती हैं, जिम्मेदार जागते हों तो शिकायतें बार-बार क्यों दिखती हैं? जीपीएस लोकेशन वाले वीडियो की जांच हो तो तस्वीर साफ होगी चूंकि वायरल सामग्री में जीपीएस लोकेशन होने का दावा किया जा रहा है, इसलिए संबंधित विभाग चाहे तो वीडियो और फोटो की सत्यता, स्थान और समय की जांच कर सकता है। इसके बाद यह स्पष्ट किया जा सकता है कि वायरल सामग्री कब और कहां की है तथा उसमें दिखाई गई स्थिति वर्तमान है या पुरानी। यह जांच इसलिए भी जरूरी है ताकि सही तथ्य सामने आएं और किसी निर्दोष व्यक्ति पर गलत आरोप न लगे। अधिकारियों से जनता के सीधे सवाल 1. करमचंदपुर गौशाला का अंतिम निरीक्षण कब हुआ? 2. निरीक्षण रिपोर्ट में क्या स्थिति दर्ज की गई? 3. गौशाला में कितने गौवंश दर्ज हैं और मौके पर कितने मिले? 4. प्रतिदिन कितना चारा उपलब्ध कराया जा रहा है? 5. बारिश में जलनिकासी और पशुओं के बैठने की क्या व्यवस्था है? 6. वायरल वीडियो और फोटो की जांच कराई गई या नहीं? 7. यदि पहले भी शिकायतें मिली थीं तो सुधारात्मक कार्रवाई क्या हुई? 8. पत्रकार के खिलाफ दर्ज मुकदमे के मामले में क्या स्वतंत्र जांच हुई? 9. कदौरा ब्लॉक की अन्य गौशालाओं का भी इसी तरह भौतिक सत्यापन कब होगा? आखिर बेजुबान कब तक भुगतेगा? गौशाला का उद्देश्य केवल गौवंश को एक परिसर में रखना नहीं, बल्कि उनके भोजन, पानी, आश्रय और देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित करना है। यदि वायरल तस्वीरें गलत हैं तो जांच से सच सामने आना चाहिए। यदि तस्वीरें सही हैं तो जिम्मेदारों को जवाब देना चाहिए। सवाल किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, व्यवस्था से है। बेजुबान की आंखों में भी दर्द दिखाई देता है, बस फर्क इतना है—वह अपनी फरियाद लिख नहीं सकता। अब देखना यह है कि वायरल तस्वीरों के बाद भी मामला केवल सोशल मीडिया की सुर्खियों तक सीमित रहता है या जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति की जांच कराते हैं। नोट: यह खबर वायरल वीडियो, वायरल फोटो और स्थानीय ग्रामीणों द्वारा बताए गए दावों के आधार पर तैयार की गई है। प्रस्तुत आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।
    4
    *करमचंदपुर गौशाला में फिर वायरल तस्वीरें:
 कीचड़ में खड़ी गायें और सूखा भूसा, जिम्मेदारों की निगरानी पर बड़े सवाल*

*बार-बार वीडियो और फोटो वायरल होने के बाद भी हालात क्यों नहीं बदले? 
जांच से पहले सवाल उठाने वाले पर कार्रवाई के आरोपों ने बढ़ाई बहस*


आशुतोष की कलम से
कदौरा, जालौन  ग्राम पंचायत करमचंदपुर की गौशाला एक बार फिर वायरल वीडियो और तस्वीरों को लेकर चर्चा में है। ग्रामीणों के अनुसार गौशाला की जीपीएस लोकेशन के साथ कुछ वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं, जिनमें बारिश के बीच गौवंश के कीचड़ में खड़े होने तथा सूखा भूसा खाने की स्थिति दिखाई देने का दावा किया जा रहा है।
इन तस्वीरों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन यदि वायरल सामग्री उसी गौशाला की है और उसमें दिखाई जा रही स्थिति वास्तविक है, तो मामला केवल एक गौशाला का नहीं बल्कि गौशालाओं की निगरानी, चारा व्यवस्था, साफ-सफाई और जिम्मेदार अधिकारियों के निरीक्षण पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
एक बार नहीं, बार-बार वायरल होने का दावा
ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का कहना है कि करमचंदपुर गौशाला से संबंधित वीडियो और फोटो पहले भी कई बार सोशल मीडिया पर सामने आ चुके हैं। आरोप है कि बारिश के दौरान गौवंश को कीचड़ में खड़े रहने की स्थिति दिखाई गई और चारे की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे।
अब सवाल सीधा है—
यदि शिकायतें और तस्वीरें बार-बार सामने आईं, तो सुधार क्यों नहीं हुआ?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर जाकर स्थिति देखी?
क्या गौशाला का नियमित निरीक्षण किया गया?
क्या वहां उपलब्ध भूसे और चारे का सत्यापन हुआ?
क्या बारिश से पहले जल निकासी और सुरक्षित स्थान की व्यवस्था की गई?
अगर इन सवालों के जवाब रिकॉर्ड में हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
कीचड़ में खड़ी गायें आखिर कहां बैठें?
बारिश के मौसम में गौशाला परिसर में पानी और कीचड़ की स्थिति होना गौवंश के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। 
यदि वायरल तस्वीरें वास्तविक हैं तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि गौवंश के बैठने के लिए सूखा और सुरक्षित स्थान उपलब्ध है या नहीं?
इंसान कुछ देर कीचड़ में खड़ा होकर परेशान हो जाता है, तो बेजुबान पशुओं की स्थिति की कल्पना की जा सकती है।
जिसे बोलना नहीं आता, उसकी तकलीफ कौन बताएगा,
गौशाला में कीचड़ हो तो सवाल कौन उठाएगा?
सूखा भूसा ही चारे की पूरी व्यवस्था है?
वायरल सामग्री में सूखा भूसा दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। 
यहां भी जांच की जरूरत है कि गौशाला में नियमित रूप से पर्याप्त हरा चारा, भूसा, पानी और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं या नहीं।
केवल कागजों में चारा उपलब्ध होना और मौके पर पशुओं को पर्याप्त चारा मिलना—दो अलग-अलग बातें हैं।
इसलिए अधिकारियों को चाहिए कि रिकॉर्ड की जांच के साथ-साथ मौके पर वास्तविक स्टॉक, पशुओं की संख्या और प्रतिदिन उपलब्ध कराए जा रहे चारे का भौतिक सत्यापन कराएं।
खबर सामने आने पर पत्रकार पर मुकदमे का आरोप
मामले का दूसरा पहलू भी चर्चा में है। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों के मुताबिक गौशाला की कथित अव्यवस्थाओं से संबंधित खबरें सोशल मीडिया पर प्रकाशित होने के बाद एक पत्रकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया।
यह आरोप भी सामने आया है कि कार्रवाई से पहले पूरे मामले की पर्याप्त जांच-पड़ताल नहीं की गई।
इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
लेकिन इससे एक व्यापक सवाल जरूर पैदा होता है—
क्या किसी सरकारी व्यवस्था की कमियां दिखाना अपने आप में अपराध है?
यदि किसी पत्रकार द्वारा लगाए गए आरोप गलत हैं तो जांच कर तथ्य सामने लाए जाएं।
यदि आरोप सही हैं तो व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी तय हो। लोकतांत्रिक व्यवस्था में आरोप, जांच और जवाब—तीनों का अपना महत्व है।
तीन लोगों पर कार्रवाई, लेकिन गौशाला की स्थिति पर जवाब कौन देगा?
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि गौशाला की कथित अनियमितताओं को लेकर तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया।
यदि वास्तव में ऐसा हुआ है तो सवाल यह है कि मुकदमे से अलग गौशाला की मूल समस्या पर क्या कार्रवाई हुई?
क्योंकि किसी शिकायतकर्ता, पत्रकार या ग्रामीण पर कार्रवाई होने से गौशाला में मौजूद कथित समस्या अपने आप खत्म नहीं हो जाती।
अगर गौशाला में व्यवस्था ठीक है तो मौके का सत्यापन कराकर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
अगर व्यवस्था खराब है तो जिम्मेदारी तय कर सुधार कराया जाए।
कदौरा की दूसरी गौशालाओं पर भी नजर जरूरी
करमचंदपुर के अलावा कदौरा ब्लॉक की अन्य ग्राम पंचायतों में संचालित गौशालाओं की स्थिति की भी जांच जरूरी है। 
क्या सभी गौशालाओं में पर्याप्त चारा है? 
क्या पीने का पानी उपलब्ध है? क्या बारिश से बचाव की व्यवस्था है?
क्या जल निकासी ठीक है? 
क्या पशुओं के बैठने के लिए सूखी जगह है? 
क्या गौशालाओं का नियमित निरीक्षण होता है?
इन सवालों का जवाब केवल फाइलों से नहीं, मौके की जांच से मिलना चाहिए।
फाइलों में व्यवस्था हो तो तस्वीरें क्यों चीखती हैं,
जिम्मेदार जागते हों तो शिकायतें बार-बार क्यों दिखती हैं?
जीपीएस लोकेशन वाले वीडियो की जांच हो तो तस्वीर साफ होगी
चूंकि वायरल सामग्री में जीपीएस लोकेशन होने का दावा किया जा रहा है, इसलिए संबंधित विभाग चाहे तो वीडियो और फोटो की सत्यता, स्थान और समय की जांच कर सकता है।
इसके बाद यह स्पष्ट किया जा सकता है कि वायरल सामग्री कब और कहां की है तथा उसमें दिखाई गई स्थिति वर्तमान है या पुरानी।
यह जांच इसलिए भी जरूरी है ताकि सही तथ्य सामने आएं और किसी निर्दोष व्यक्ति पर गलत आरोप न लगे।
अधिकारियों से जनता के सीधे सवाल
1. करमचंदपुर गौशाला का अंतिम निरीक्षण कब हुआ?
2. निरीक्षण रिपोर्ट में क्या स्थिति दर्ज की गई?
3. गौशाला में कितने गौवंश दर्ज हैं और मौके पर कितने मिले?
4. प्रतिदिन कितना चारा उपलब्ध कराया जा रहा है?
5. बारिश में जलनिकासी और पशुओं के बैठने की क्या व्यवस्था है?
6. वायरल वीडियो और फोटो की जांच कराई गई या नहीं?
7. यदि पहले भी शिकायतें मिली थीं तो सुधारात्मक कार्रवाई क्या हुई?
8. पत्रकार के खिलाफ दर्ज मुकदमे के मामले में क्या स्वतंत्र जांच हुई?
9. कदौरा ब्लॉक की अन्य गौशालाओं का भी इसी तरह भौतिक सत्यापन कब होगा?
आखिर बेजुबान कब तक भुगतेगा?
गौशाला का उद्देश्य केवल गौवंश को एक परिसर में रखना नहीं, बल्कि उनके भोजन, पानी, आश्रय और देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
यदि वायरल तस्वीरें गलत हैं तो जांच से सच सामने आना चाहिए।
यदि तस्वीरें सही हैं तो जिम्मेदारों को जवाब देना चाहिए।
सवाल किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, व्यवस्था से है।
बेजुबान की आंखों में भी दर्द दिखाई देता है,
बस फर्क इतना है—वह अपनी फरियाद लिख नहीं सकता।
अब देखना यह है कि वायरल तस्वीरों के बाद भी मामला केवल सोशल मीडिया की सुर्खियों तक सीमित रहता है या जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति की जांच कराते हैं।
नोट: यह खबर वायरल वीडियो, वायरल फोटो और स्थानीय ग्रामीणों द्वारा बताए गए दावों के आधार पर तैयार की गई है। प्रस्तुत आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।
    user_Ashutosh jalaun ripotar
    Ashutosh jalaun ripotar
    कालपी, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
  • भोगनीपुर क्षेत्र में झांसी से कानपुर जा रहे ट्रक के साथ बड़ा हादसा हो गया। हादसे में एक महिला समेत दो लोग गंभीर घायल बताए जा रहे हैं। महिला को उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किया गया। ट्रक चालक मौके से फरार बताया जा रहा है। पुलिस जांच में जुटी है।
    2
    भोगनीपुर क्षेत्र में झांसी से कानपुर जा रहे ट्रक के साथ बड़ा हादसा हो गया। हादसे में एक महिला समेत दो लोग गंभीर घायल बताए जा रहे हैं। महिला को उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किया गया। ट्रक चालक मौके से फरार बताया जा रहा है। पुलिस जांच में जुटी है।
    user_Shivganesh dwivedi कुलगाँव टाइ
    Shivganesh dwivedi कुलगाँव टाइ
    Local News Reporter सिकंदरा, कानपुर देहात, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • मंगरोल मार्ग पर पलटा ई-रिक्शा मंगरोल मार्ग पर सड़क की बदहाली बनी हादसे की वजह । मंगरोल मार्ग पर पलटा ई-रिक्शा मंगरोल मार्ग पर सड़क की बदहाली बनी हादसे की वजह, संतुलन बिगड़ने से पलटा ई-रिक्शा — बाल-बाल बचीं सवारियां कालपी। मंगरोल मार्ग पर सड़क की खराब स्थिति के चलते एक ई-रिक्शा अचानक असंतुलित होकर पलट गया। हादसे के दौरान ई-रिक्शा में सवार लोगों में अफरा-तफरी मच गई, हालांकि गनीमत रही कि सवारियां बाल-बाल बच गईं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक सड़क पर मौजूद खराब हिस्से और गड्ढों के कारण ई-रिक्शा का संतुलन बिगड़ा, जिसके बाद वह सड़क पर पलट गया। हादसे में बड़ी जनहानि होने से टल गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंगरोल मार्ग की खराब सड़क राहगीरों और वाहन चालकों के लिए लगातार परेशानी का कारण बनी हुई है। लोगों ने संबंधित विभाग से सड़क की मरम्मत कराए जाने की मांग की है, ताकि भविष्य में कोई बड़ा हादसा न हो। 🔴 मंगरोल मार्ग पर पलटा ई-रिक्शा ⚠️ सड़क खराब होने से हुआ हादसा 🙏 बाल-बाल बचीं ई-रिक्शा की सवारियां 🚧 सड़क मरम्मत की उठी मांग हाल के स्थानीय समाचारों में भी जालौन क्षेत्र की खराब सड़कों और गड्ढों से दुर्घटना के खतरे की समस्या सामने आई है।
    1
    मंगरोल मार्ग पर पलटा ई-रिक्शा
मंगरोल मार्ग पर सड़क की बदहाली बनी हादसे की वजह ।
मंगरोल मार्ग पर पलटा ई-रिक्शा
मंगरोल मार्ग पर सड़क की बदहाली बनी हादसे की वजह, संतुलन बिगड़ने से पलटा ई-रिक्शा — बाल-बाल बचीं सवारियां
कालपी। मंगरोल मार्ग पर सड़क की खराब स्थिति के चलते एक ई-रिक्शा अचानक असंतुलित होकर पलट गया। हादसे के दौरान ई-रिक्शा में सवार लोगों में अफरा-तफरी मच गई, हालांकि गनीमत रही कि सवारियां बाल-बाल बच गईं।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक सड़क पर मौजूद खराब हिस्से और गड्ढों के कारण ई-रिक्शा का संतुलन बिगड़ा, जिसके बाद वह सड़क पर पलट गया। हादसे में बड़ी जनहानि होने से टल गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मंगरोल मार्ग की खराब सड़क राहगीरों और वाहन चालकों के लिए लगातार परेशानी का कारण बनी हुई है। लोगों ने संबंधित विभाग से सड़क की मरम्मत कराए जाने की मांग की है, ताकि भविष्य में कोई बड़ा हादसा न हो।
🔴 मंगरोल मार्ग पर पलटा ई-रिक्शा
⚠️ सड़क खराब होने से हुआ हादसा
🙏 बाल-बाल बचीं ई-रिक्शा की सवारियां
🚧 सड़क मरम्मत की उठी मांग
हाल के स्थानीय समाचारों में भी जालौन क्षेत्र की खराब सड़कों और गड्ढों से दुर्घटना के खतरे की समस्या सामने आई है।
    user_Dev Patel
    Dev Patel
    Local News Reporter कालपी, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • जालौन में विकास के दावों की खुली पोल, मौत के बाद भी नहीं मिला शव को सम्मान श्मशान घाट न होने से कूड़ाघर में युवक का अंतिम संस्कार करने को मजबूर हुए ग्रामीण, गढ़गुवां गांव का मामला जालौन में विकास के दावों की खुली पोल, मौत के बाद भी नहीं मिला शव को सम्मान श्मशान घाट न होने से कूड़ाघर में युवक का अंतिम संस्कार करने को मजबूर हुए ग्रामीण, गढ़गुवां गांव का मामला जालौन। विकास कार्यों को लेकर किए जा रहे दावों के बीच जालौन ब्लॉक के ग्राम गढ़गुवां से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने गांव की मूलभूत सुविधाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव में श्मशान घाट की व्यवस्था नहीं होने के कारण एक युवक के शव का अंतिम संस्कार कूड़ाघर के पास करने को ग्रामीण मजबूर हुए। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में लंबे समय से श्मशान घाट की आवश्यकता महसूस की जा रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बारिश के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जिससे अंतिम संस्कार के लिए उपयुक्त स्थान तलाशना ग्रामीणों के लिए मुश्किल हो जाता है। युवक की मौत के बाद जब अंतिम संस्कार की बारी आई तो ग्रामीणों के सामने कोई उचित स्थान नहीं था। मजबूरी में कूड़ाघर के पास ही शव का अंतिम संस्कार किया गया। इस घटना के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है और उनका कहना है कि जीवन के साथ-साथ मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार के लिए भी सम्मानजनक व्यवस्था होना जरूरी है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव में जल्द से जल्द श्मशान घाट के लिए भूमि चिह्नित कर उसका निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी परिवार को अपने परिजन के अंतिम संस्कार के लिए इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। अब सवाल यह है कि जब गांवों में विकास के दावे किए जा रहे हैं, तो गढ़गुवां जैसे गांव में श्मशान घाट जैसी बुनियादी सुविधा अब तक क्यों नहीं उपलब्ध हो सकी? ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले का संज्ञान लेकर जल्द कार्रवाई करेगा।
    2
    जालौन में विकास के दावों की खुली पोल, मौत के बाद भी नहीं मिला शव को सम्मान

श्मशान घाट न होने से कूड़ाघर में युवक का अंतिम संस्कार करने को मजबूर हुए ग्रामीण, गढ़गुवां गांव का मामला
जालौन में विकास के दावों की खुली पोल, मौत के बाद भी नहीं मिला शव को सम्मान
श्मशान घाट न होने से कूड़ाघर में युवक का अंतिम संस्कार करने को मजबूर हुए ग्रामीण, गढ़गुवां गांव का मामला
जालौन। विकास कार्यों को लेकर किए जा रहे दावों के बीच जालौन ब्लॉक के ग्राम गढ़गुवां से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने गांव की मूलभूत सुविधाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव में श्मशान घाट की व्यवस्था नहीं होने के कारण एक युवक के शव का अंतिम संस्कार कूड़ाघर के पास करने को ग्रामीण मजबूर हुए।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में लंबे समय से श्मशान घाट की आवश्यकता महसूस की जा रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बारिश के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जिससे अंतिम संस्कार के लिए उपयुक्त स्थान तलाशना ग्रामीणों के लिए मुश्किल हो जाता है।
युवक की मौत के बाद जब अंतिम संस्कार की बारी आई तो ग्रामीणों के सामने कोई उचित स्थान नहीं था। मजबूरी में कूड़ाघर के पास ही शव का अंतिम संस्कार किया गया। इस घटना के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है और उनका कहना है कि जीवन के साथ-साथ मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार के लिए भी सम्मानजनक व्यवस्था होना जरूरी है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव में जल्द से जल्द श्मशान घाट के लिए भूमि चिह्नित कर उसका निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी परिवार को अपने परिजन के अंतिम संस्कार के लिए इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
अब सवाल यह है कि जब गांवों में विकास के दावे किए जा रहे हैं, तो गढ़गुवां जैसे गांव में श्मशान घाट जैसी बुनियादी सुविधा अब तक क्यों नहीं उपलब्ध हो सकी? ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले का संज्ञान लेकर जल्द कार्रवाई करेगा।
    user_पुष्पेंद्र सिंह जिला संवाददाता
    पुष्पेंद्र सिंह जिला संवाददाता
    पत्रकार कालपी, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    11 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.